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यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए तैयार लिस्ट, 6 नामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री भी शामिल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राज्य इकाई प्रमुख का चुनाव भाजपा के सामने प्रमुख फैसलों में से एक माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई ने राष्ट्रीय नेतृत्व को छह नामों की एक सूची भेजी है। इनमें दो ब्राह्मण, दो पिछड़े समुदाय से और दो दलित समुदाय से हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही राज्य इकाई के अगले प्रमुख का चयन और ऐलान हो जाएगा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने  यह जानकारी दी। सुझाए गए नामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी (दोनों ब्राह्मण), उत्तर प्रदेश के वर्तमान मंत्री धर्मपाल सिंह और वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा (दोनों ओबीसी), और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया और वर्तमान एमएलसी विद्या सागर सोनकर (दोनों दलित) शामिल हैं। नेता ने कहा, ‘हमने अपनी ओर से केंद्रीय नेतृत्व को उपयुक्त नाम सुझाए हैं जिन पर उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए विचार किया जा सकता है और नेतृत्व सक्रिय रूप से उनका मूल्यांकन कर रहा है। अगले दो हफ़्तों में, संभवतः उससे भी पहले, कोई निर्णय होने की संभावना है।’ भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं और राज्य इकाई प्रमुख का चुनाव भाजपा के सामने प्रमुख फैसलों में से एक माना जा रहा है। भाजपा, यूपी में पिछले लोकसभा चुनाव की अपनी हार को पलटने और प्रदेश में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने की कोशिश करेगी। भाजपा ने पहले ही 37 संगठनात्मक इकाइयों में से 25 से अधिक में राज्य प्रमुखों का चयन कर लिया है। अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की भी तैयारी कर रही है। वर्तमान में यूपी भाजपा की कमान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेता भूपेन्द्र सिंह चौधरी संभाल रहे हैं। नए अध्यक्ष उनकी जगह लेंगे। लिस्ट में शामिल नामों की खासियत अपनी स्वच्छ छवि और शैक्षणिक योग्यता के लिए जाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा (ब्राह्मण) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शीर्ष नेतृत्व का विश्वास प्राप्त है। हरीश द्विवेदी भी ब्राह्मण हैं और अपने साथ संसदीय अनुभव लेकर आते हैं। वे बस्ती से सांसद और पार्टी में राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं। धर्मपाल सिंह और बीएल वर्मा दोनों ही प्रभावशाली लोध समुदाय से हैं। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में वरिष्ठ मंत्री सिंह को विधायी और मंत्री पद का दशकों का अनुभव है। वर्मा, जो वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं, एक अनुशासित और साधारण संगठनकर्ता माने जाते हैं जिनके आरएसएस से गहरे संबंध हैं। संगठन के भीतर उन्हें विश्वास प्राप्त है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष कठेरिया हिंदुत्व और दलित पहचान के अपने आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं। एमएलसी सोनकर एक साधारण लेकिन वफादार पार्टी कार्यकर्ता हैं जिनका पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रभाव है। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा, "हमने आलाकमान को अपने विचारों से अवगत करा दिया है। अब, केंद्रीय नेतृत्व को राज्य के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा करनी है और हमें उम्मीद है कि यह बहुत जल्द हो जाएगा।"

आयुष्मान कार्ड, वय वंदन, एएनसी एवं सिकल सेल जांच पर दिया जोर

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आज बिल्हा ब्लॉक  में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की गहन समीक्षा प्रार्थना सभा भवन में की। बैठक में आयुष्मान भारत योजना, वय वंदन योजना, गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच एवं सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग और उपचार संबंधी गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जन स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को समयबद्ध और पारदर्शी रूप से पहुंचाया जाए। बैठक में नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार, सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल, एसडीएम बजरंग वर्मा, सीएमएचओ डॉ. शुभा गढ़ेवाल, डीपीएम पीयूली मजूमदार सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और मैदानी अमले के लोग मौजूद थे।      कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत बचे हुए हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड जल्द बनाने के निर्देश दिए। बिल्हा में 3 लाख 57 हजार 31 आयुष्मान कार्ड बनना है जिसमें से 2 लाख 64 हजार 544 आयुष्मान कार्ड बन चुके है। 92 हजार 487 हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड बनना शेष है। कलेक्टर ने इसमें प्रगति लाने कहा। उन्होंने कार्ययोजना बनाकर एक माह के भीतर बचे हुए हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि सामूहिक रूप से लोगों को जोड़ने से ही यह कार्य संभव होगा। उन्होंने वार्ड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर सक्रिय प्रचार-प्रसार और लाभार्थी जागरूकता अभियान चलाने कहा। हर पात्र व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुँचना चाहिए, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है। बैठक में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित वय वंदन योजना की भी समीक्षा की गई। उन्होंने इसमें भी प्रगति लाने के निर्देश दिए।  गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच अनिवार्य – कलेक्टर ने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं के लिए एएनसी जांच, टीकाकरण एवं पोषण सुविधा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी गर्भवती महिला जांच से वंचित न रहे।      बैठक में कलेक्टर ने सिकल सेल जांच एवं उपचार की भी सीएचसी एवं पीएचसी वार समीक्षा की। उन्होंने सिकल सेल जांच में प्रगति लाने के भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने मौसमी बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया और जलजनित रोगों के प्रति भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित तौर पर निरीक्षण करें और किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि सभी जरूरतमंद व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ पहुँचना चाहिए।  

भोपाल में सक्रिय ‘लव-ड्रग्स जिहाद’ नेटवर्क! पीड़िता के बयान से खुली कई परतें, कहा- सबको खुश करो

भोपाल भाजपा नेता शरीफ मछली का भजीता व शफीक मछली का बेटा यासीन अहमद (मछली) और उसका चाचा शाहवर मध्य प्रदेश की राजधनी भोपाल में एमडी ड्रग्स तस्करी का बहुत बड़ा नेटवर्क संचालित कर रहे थे। यासीन मछली भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन के बाहर एक बड़े काम्प्लेक्स में स्थित दो पबों में डीजे का कार्य करता था। इसी की आड़ में दोनों पबों में ड्रग्स का धंधा चलाया जा रहा था। पब में पार्टियों में आने वाले युवकों, खासकर हाईप्रोफाइल युवतियों को फ्री में नशा देकर आदी बनाया जाता था। बाद में नशे के बदले या फिर बेहोशी की हालत में इन युवतियों के साथ दुष्कर्म करता था। यासीन के मोबाइल में मिले  वीडियो में इसके सबूत भी पुलिस को मिले हैं। पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि यासीन मुंबई ही नहीं, राजस्थान और पंजाब से भी चरस और एमडी ड्रग्स भोपाल लाकर हाईप्रोफाइल पार्टियों में खपाता था। बता दें कि भोपाल पुलिस ड्रग्स तस्करी के आरोपी शाहवर को मामले की जांच के लिए राजस्थान लेकर गई थी, जहां ड्रग्स तस्करी से जुड़े कुछ सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं। ऐसे में पूछताछ के लिए पुलिस ने शाहवर को दो दिन की रिमांड पर फिर लिया है। नए सबूतों को लेकर पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। ड्रग्स और लव जिहाद केस में यासीन अहमद के चाचा और शहर के बड़े मछली कारोबारी सारिक मछली भी फंसता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से कराई फायरिंग यासीन अहमद उर्फ मछली के मोबाइल में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का वीडियो भी पुलिस को मिला है, जो यासीन के बुलावे पर भोपाल में पार्टी करने आया था। वह मछली के हथाईखेड़ा स्थित फार्म हाउस पर रुका था, इस दौरान उसने वहां पर फायरिंग भी की थी। पुलिस आरोपी शाहवर और यासीन की निशानदेही पर आधा दर्जन से अधिक ड्रग पैडलरों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। क्लब-90 का मैनेजर, संचालक मोहित बघेल और गौरव चौहान भी पुलिस हिरासत में है, पुलिस दोनों से लगातार पूछताछ कर रही है। यासीन ने बंधक बनाकर युवक को पीटा  ड्रग्स तस्करी के आरोप में भोपाल क्राइम ब्रांच की रिमांड पर चल रहे यासीन अहमद उर्फ यासीन मछली के खिलाफ तलैया थाने में एक युवक ने शिकायत की है। शिकायत में युवक ने कहा कि यासीन मछली और उसके गुर्गों ने उसका अपहरण कर उसे बंधक बनाकर बुरी तरह मारपीट की थी। आरोपियों के डर के कारण अभी तक शिकायत नहीं की थी। यह मामला पुराना है, पुलिस ने शिकायत की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक प्रकरण दर्ज नहीं किया है। सारिक के गुर्गे ने युवती से क्लब-90 में किया दुष्कर्म, बनाया धर्म परिवर्तन का दबाव इस ड्रग्स और लव जिहाद केस में यासीन अहमद के चाचा और शहर के बड़े मछली कारोबारी सारिक मछली भी उलझता जा रहा है। बागसेवनिया थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती ने पिपलानी थाने में दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने को लेकर शिकायत की जिसमें सारिक पर गंभीर आरोप हैं। युवती का कहना है कि सारिक मछली का गुर्गा दिव्यांश अहिरवार मुझसे मैनिट का स्टूडेंट बनकर कोचिंग में मिला और फिर दोस्ती की। आरोपी दिव्यांश अहिरवार टीआईटी कॉलेज का छात्र है। जून महीने में वह मुझे घर छोड़ने के बहाने अपने साथ ले गया और क्लब-90 में ले जाकर मेरे साथ दुष्कर्म किया। उसने क्लब-90 में एक व्यक्ति से मिलवाया, जिसका नाम उसने सारिक मछली बताया। उसने एक और व्यक्ति से मिलवाया, जिसका परिचय क्लब के मैनेजर मोहित बघेल के रूप में कराया। इसके बाद आरोपी दिव्यांश ने युवती पर दबाव बनाया कि वह सारिक मछली और उसके गुर्गों के साथ दोस्ती करे, उनको खुश करे। दिव्यांश ने यह भी कहा कि मैं और मेरे जैसे कई युवक सारिक भाई के लिए काम करते हैं। पीड़िता ने पुलिस को दिए लिखित बयान में कहा है कि सारिक मछली के कहने पर ही पिपलानी थाना पुलिस ने मेरी शिकायत पर दिव्यांश के खिलाफ पहले दुष्कर्म का केस दर्ज नहीं किया था। बाद में कोरे कागज में मेरे हस्ताक्षर कराकर अपने हिसाब से एफआईआर दर्ज करा दी, ताकि दिव्यांश को जल्दी जमानत मिल जाए। युवती ने आरोप लगाया कि सारिक मछली के गुर्गों ने कई युवतियों के साथ ऐसा किया। युवती का अश्लील वीडियो वायरल किया पीड़ित युवती ने पिपलानी पुलिस को दिए लिखित बयान में बताया है कि दिव्यांश के साथ आधा दर्जन लोग और हैं जो सारिक मछली के लिए काम करते हैं। वह सब मिलकर युवतियों का शारीरिक शोषण करते हैं और फिर उन पर मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाते हैं। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि दिव्यांश ने उसे रामकृपाल मेहरा, अविनाश आनंद, मोहिल बघेल, साहिल और कई मुस्लिम लड़कों से मिलावाया था। उसने मेरा अश्लील वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल किया, इसके बाद ही पुलिस ने केस दर्ज किया था।  मोबाइल और पैन ड्राइव में वीडियो, नमाज पढ़ने का दबाव  पीड़ित युवती ने पिपलानी थाने में दिए लिखित बयान में कहा है कि दिव्यांश कुछ दिनों के लिए जेल गया, इस बीच मेरे अश्लील वीडियो प्रियांशी कुश्वाह नाम की युवती ने सोशल मीडिया में अपलोड किए। इसका मतलब है कि दिव्यांश ने मेरे निर्वस्त्र वीडियो कई लोगों को बांटे हैं। पीड़िता का आरोप है कि दिव्यांश के मोबाइल और पैन ड्राइव में मेरी जैसी कई हिंदू युवतियों के अश्लील वीडियो, वीडियो और शारीरिक शोषण के दरिंदगी भरे वीडियो बनाकर रखे हैं। उनका वह समय-समय पर दुरुपयोग करता है। पीड़िता का आरोप है कि दिव्यांश कहता था कि वह यह सब सारिक मछली के कहने पर ही करता है। दिव्यांश नमाज पढ़ता है और मुझे पर भी नमाज पढ़ने के लिए दबाव बनाता था। ऐसा नहीं करने पर उसने मेरे साथ मारपीट भी की। वह हिंदू युवतियों का शारीरिक शोषण कर उन्हें जाल में फंसाकर सारिक मछली और उनके गुर्गों से दोस्ती करता है। बाद में उन पर मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया जाता था।  

मध्यप्रदेश में कुपोषण को लेकर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टरों से मांगा जिलावार विवरण

जबलपुर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में कुपोषण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर 54 जिलों के कलेक्टरों को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह याचिका अधिवक्ता दीपांकर सिंह द्वारा दायर की गई, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, मिड डे मील, आंगनवाड़ी और मातृत्व लाभ जैसी योजनाएं कागजी साबित हो रही हैं। याचिका में दावा किया गया है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति में भारी अंतर है। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 21, 39, 45 और 47 का हवाला देते हुए इन योजनाओं को संवैधानिक जिम्मेदारी से जोड़ा है। याचिका में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए फर्जी पंजीकरण, कम उपस्थिति और आपूर्ति में अनियमितताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

रायपुर: विधानसभा अध्यक्ष ने कहा – हर जरूरतमंद को मिले गुणवत्तापूर्ण राशन

रायपुर : गरीबों को गुणवत्तापूर्ण राशन मिले यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह डॉ. रमन सिंह बोले – गरीबों तक अच्छा राशन पहुँचाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी रायपुर: विधानसभा अध्यक्ष ने कहा – हर जरूरतमंद को मिले गुणवत्तापूर्ण राशन राशन वितरण में गुणवत्ता जरूरी, गरीबों का हक प्राथमिकता: डॉ. रमन सिंह नवनियुक्त अध्यक्ष  संदीप शर्मा का शपथ ग्रहण समारोह  रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में लगातार संघर्ष करते हुए श्री शर्मा ने संघर्षशील जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी छवि बनाई है। सरकार ने उन्हें पीडीएस के तहत राशन कार्डधारियों  को गुणवत्तापूर्ण प्रतिमाह राशन मिले, इसके निरीक्षण और परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। डॉ. सिंह ने कहा कि गरीबों और प्राथमिकता वाले परिवारों को गुणवत्तायुक्त राशन मिले, यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने नवनियुक्त अध्यक्ष को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी।  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयाल दास बघेल इस मौके पर नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा को पदभार ग्रहण की बधाई देते हुए कहा कि अब गरीबों को साफ-सुथरा राशन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उन पर है। खाद्य वितरण संबंधी कोई भी शिकायत होती है हितग्राही आयोग के माध्यम से अपनी समस्या का समाधन करा सकेंगे। अब खाद्य विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन को और गति मिलेगी।  खाद्य मंत्री श्री बघेल ने आगे कहा कि राज्य में राशन कार्डधारियों की संख्या 81 लाख से अधिक है। 13 हजार 930 शासकीय उचित मूल्य की दुकानें स्व-सहायता समूहों, ग्राम पंचायतों तथा सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित हो रही हैं। गरीबों एवं प्राथमिकता वाले परिवारों को पारदर्शिता के साथ राशन का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। हाल ही में हमारी सरकार ने प्रदेश के राशन कार्डधारियों को तीन माह का एकमुश्त चावल देने का उल्लेखनीय काम किया है।  मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल का स्मरण करते हुए कहा कि उनके समय में छत्तीसगढ़ खाद्यान्न सुरक्षा कानून बना, जिसके तहत प्रदेश के अंतिम छोर के व्यक्तियों तक राशन उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य ने पीडीएस प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। डॉ. सिंह को चाउर वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है। मंत्री श्री बघेल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार द्वारा बजट में 6500 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुझे सरकार ने गरीबों को गुणवत्तपूर्ण राशन उपलब्ध कराने तथा जांच परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वाहन करूगा। हर गरीब एवं प्राथमिकता वाले परिवारों को गुणवत्तापूर्ण चावल मिले, यह हर हाल में सुनिश्चित होगा।   खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने इस अवसर पर विभागीय योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में पीडीएस के माध्यम से राज्य के 2 करोड 73 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। आधार प्रमाणिकरण के जरिए पारदर्शी तरीके से राशन वितरण व्यवस्था को सृदृढ़ की गई है।  शपथ ग्रहण समारोह में कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, विधायक श्री धरमलाल कौशिक, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्री गौरी शंकर अग्रवाल, विधायक सर्वश्री मोतीलाल साहू, राजेश मूणत, रोहित साहू, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा,  संपत अग्रवाल, रिकेश सेन, नगर निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निनिर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री राम प्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, लौह शिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा, श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री योगेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे। 

IRCTC आईडी पर बड़ा अपडेट: रेलवे ने 2.5 करोड़ अकाउंट किए डीएक्टिवेट, बदली गाइडलाइन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्‍टम में दुरुप्रयोग को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर्स आईडी डीएक्टिवट हो चुके हैं. संदिग्‍ध बुकिंग पैटर्न और फेक यूजर्स की पहचान के बाद IDs डीएक्टिवेट की गई हैं. संसद में सांसद ए.डी. सिंह के सवाल पर सरकार ने इसकी जानकारी दी गई है. इन अकाउंट के डीएक्टिव होने से पहले तत्‍काल टिकट बुकिंग में कई तरह की समस्‍याएं आ रही थीं. अक्‍सर देखा जा रहा था कि तत्‍काल बुकिंग विंडो खुलने के कुछ ही मिनटों में टिकट गायब हो जाते थे, क्‍योंकि बॉट्स का यूज करके एजेंट सारे टिकट गायब कर देते थे, जिससे आम यात्री टिकट बुक नहीं कर पाता था. हालांकि अब बदलाव के बाद रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है.  सरकार ने क्‍या दी जानकारी?  संसद में सरकार ने बताया कि टिकट बुकिंग सिस्‍टम में गड़बड़‍ियों को रोकने के लिए IRCTC ने हाल ही में 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर आईडी डीएक्टिव किए हैं. क्‍योंकि ये यूजर्स आईडी संदिग्‍ध पाए गए थे. सरकार ने बताया कि भारतीय रेलवे ने कंफर्म टिकट बुकिंग और डिजिटल को बढ़ावा देने के लिए कुछ और बदलाव किए हैं.  रेलवे ने  बदले हैं ये नियम     रिजर्व टिकट ऑनलाइन या कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) काउंटरों पर 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर बुक किए जा सकते हैं.  हालांकि कुल टिकटों का लगभग 89% ऑनलाइन माध्यम से बुक हो रहा है.      PRS काउंटर्स पर डिजिटल माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.     1 जुलाई 2025 से तत्‍काल योजना के तहत टिकट केवल आधार वेरिफाई यूजर्स द्वारा ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप के माध्‍यम से बुक किए जा सकते हैं.      एजेंटों को तत्‍काल रिजर्व खुलने के पहले 30 मिनट के दौरान तत्‍काल टिकट बुक करने से रोक दिया गया है.      ट्रेनों की वेटिंग लिस्‍ट का स्‍टेटस की नियमित आधार पर निगरानी की जाती है और अतिरिक्‍त मांग को पूरा करने के लिए, भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें चला रहा है.  इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव  सरकार ने इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव किया है. पहले इमरजेंसी कोटा के तहत टिकट बुकिंग करने के लिए यात्रा वाले दिन ही आवेदन किया जा सकता था, लेकिन अब 1 दिन पहले इमरजेंसी कोटा के लिए अप्‍लाई करना होगा. यह कोटा सांसद, उच्‍च अधिकारी, मेडिकल इमरजेंसी और सीनियर सिटीजन के लिए होता है. 

उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने मोबाइल नेत्र जांच वैन को दिखाई हरी झंडी

रायपुर कबीरधाम जिले के दूरस्थ और वनांचल इलाकों में आंखों की जांच और इलाज जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा अब लोगों के घरों तक निःशुल्क पहुंचेगी। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज पीजी कॉलेज परिसर, कवर्धा में उदयाचल संस्था द्वारा संचालित मोबाइल नेत्र जांच वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।  यह मोबाइल वैन कबीरधाम जिले के वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में जाकर लोगों की आंखों की जांच करेगी, विशेष रूप से मोतियाबिंद जैसे रोगों की पहचान और इलाज के लिए सेवा देगी।      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। आज यह मोबाइल वैन जिले के उन क्षेत्रों तक पहुंचेगी, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंच पातीं। यह कदम नेत्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है, जिससे लोगों को समय पर जांच और इलाज का लाभ मिलेगा।      स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी इसे एक सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि कई बार लोग आंखों की छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे जाकर गंभीर स्थिति ले सकती है। यह मोबाइल वैन मोतियाबिंद जैसे रोगों की पहचान कर लोगों को निःशुल्क उपचार प्रदान करेगी, जिससे ग्रामीण और वनांचल निवासियों को राहत मिलेगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ गोसेवा आयोग अध्यक्ष विशेषर पटेल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, कलेक्टर गोपाल वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगरपालिका परिषद कवर्धा अध्यक्ष चंदप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य रामकुमार भट्ट, जिला पंचायत सीईओ अजय त्रिपाठी, सहित कई जनप्रतिनिधिगण और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।      यह मोबाइल नेत्र जांच वैन विशेष रूप से जिले के तरेगांव, रेंगाखर, कुकदूर, बोक्काखार जैसे दुर्गम और सुदूर गांवों में जाकर मोतियाबिंद और अन्य नेत्र संबंधी रोगों की पहचान करेगी। जांच के उपरांत मरीजों को उचित मार्गदर्शन, इलाज, और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इस वैन में प्रशिक्षित नेत्र चिकित्सकों की टीम के साथ आधुनिक नेत्र जांच उपकरण मौजूद हैं। इस सेवा के माध्यम से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र रोगों की समय पर पहचान होगी, बल्कि समय रहते इलाज मिलने से अंधता की रोकथाम भी संभव होगी।

मध्यप्रदेश में हिन्दी फीचर फिल्म तन्वी द ग्रेट कर मुक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फीचर फिल्म "तन्वी द ग्रेट" को कर मुक्त करने की घोषणा की थी। इसी क्रम में राज्य शासन ने फिल्म को मध्यप्रदेश में कर मुक्त करने के आदेश जारी किए है। फीचर फिल्म के मध्यप्रदेश में प्रदर्शन की अवधि 25 जुलाई से 23 अगस्त, 2025 तक के लिए मध्यप्रदेश मॉल एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के अधीन स्टेट जीएसटी की संपूर्ण राशि की प्रतिपूर्ति करते हुए दर्शकों को छूट मिलेगी। फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने किया है। संबंधित सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स द्वारा स्टेट जीएसटी की राशि को घटाकर दर्शकों को इस फिल्म के टिकट का विक्रय किया जाएगा। इस सेवा प्रदाय पर देय एवं भुगतान किये गये राज्य जीएसटी के अंश के बराबर की राशि की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सेवा प्रदाता को की जायेगी। फिल्म के प्रदर्शन के लिए संबंधित सिनेमाघरों मल्टीप्लेक्स के प्रचलित सामान्य प्रवेश शुल्क में वृद्धि नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि "तन्वी द ग्रेट" 21 वर्षीय तन्वी रैना की कहानी है, जो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जूझते हुए अपने शहीद पिता के सपने को पूरा करने के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का प्रयास करती है। इसकी संवेदनशील कहानी और सामाजिक संदेश को दर्शकों और समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है।  

UPI ट्रांजैक्शन पर आए नए नियम, 1 अगस्त से ये 3 बदलाव होंगे लागू

 नई दिल्ली  1 अगस्त 2025 से UPI से जुड़े नए नियम लागू हो रहे हैं। अगर आप रोज Paytm, PhonePe, GPay या किसी और UPI ऐप से पेमेंट करते हैं, तो ये बदलाव आपके लिए जरूरी हैं। UPI सिस्टम को मैनेज करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ये लिमिट्स इसीलिए तय की हैं ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो और ट्रांजैक्शन फेल या डिले जैसी दिक्कतें घटें। ये बदलाव जरूरी ट्रांजैक्शन्स को प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन बैलेंस चेक, स्टेटस रीफ्रेश जैसी चीजों पर लिमिट जरूर लगाई जा रही है। NPCI का कहना है कि इससे UPI ज्यादा स्मूद और भरोसेमंद बनेगा, खासतौर पर उस वक्त जब ज्यादा लोग एक साथ ट्रांजैक्शन करते हैं। 1 अगस्त से UPI पर क्या नई लिमिट्स लगेंगी? अगले महीने से UPI यूजर्स सिर्फ 50 बार ही अपना अकाउंट बैलेंस चेक कर पाएंगे। इसके अलावा, जो यूजर्स अपने मोबाइल नंबर से लिंक बैंक अकाउंट्स को बार-बार चेक करते हैं, वो भी अब सिर्फ 25 बार ही ऐसा कर सकेंगे। ये लिमिट्स इसीलिए लाई गई हैं ताकि बिना जरूरत के सिस्टम पर लोड ना पड़े, जिससे अक्सर स्पीड स्लो हो जाती है या ट्रांज़ैक्शन फेल हो जाते हैं। नए नियमों की वजह क्या है? NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने बताया कि अप्रैल और मई 2025 में UPI प्लेटफॉर्म पर काफी लोड देखा गया। इसका सबसे बड़ा कारण था लोग बार-बार बैलेंस चेक करते रहे या फिर एक ही ट्रांजैक्शन का स्टेटस बार-बार रिफ्रेश करते रहे। इससे सर्वर पर दबाव बढ़ा और कई बार लेन-देन में देरी या फेल होने की स्थिति आ गई। इसी वजह से अब नए नियम लाए जा रहे हैं ताकि सिस्टम बेहतर और फास्ट बना रहे। कौन-कौन से बदलाव होंगे? एक दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक कर सकेंगे। आप अपने मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक अकाउंट की डिटेल्स दिन में 25 बार से ज्यादा नहीं देख पाएंगे। कोई एक ट्रांजैक्शन का स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक किया जा सकेगा, वो भी हर बार कम से कम 90 सेकंड का अंतर होना जरूरी होगा। Netflix, EMI, बिजली बिल जैसे ऑटो डेबिट पेमेंट्स अब सिर्फ निर्धारित समय पर ही प्रोसेस होंगे। ऑटो पेमेंट्स पर भी असर पड़ेगा जो व्यापारी या कंपनियां ऑटो पेमेंट के जरिए ग्राहकों से पेमेंट लेती हैं, उन्हें अब NPCI द्वारा तय किए गए टाइम स्लॉट्स के अनुसार भुगतान प्राप्त करना होगा। इससे पेमेंट सिस्टम और ज़्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। हालांकि आम यूजर्स को इससे कोई खास दिक्कत नहीं होगी। UPI बना डिजिटल इंडिया की रीढ़ आज UPI सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि हर गली, मोहल्ले और चाय की दुकान तक पहुंच चुका है। "भैया QR स्कैन कर दूं?" जैसे वाक्य अब आम सुनाई देते हैं। NPCI का यह कदम UPI नेटवर्क को और ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए उठाया गया है। बदलाव जरूरी हैं सुविधा बनाए रखने के लिए जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट की सुविधा बढ़ रही है, वैसे-वैसे सिस्टम को स्मार्ट और टिकाऊ बनाने के लिए ऐसे बदलाव जरूरी हो जाते हैं। इन छोटे लेकिन असरदार नियमों के जरिए हर यूजर को बिना किसी रुकावट के पेमेंट करने में आसानी मिलेगी।  

भोपाल: होम्योपैथिक कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट स्टडी को मिली हरी झंडी

भोपाल  स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और विशेषज्ञता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, भोपाल को दो नए स्नातकोत्तर (पीजी) कोर्स शुरू करने की मंजूरी दे दी है। अब यह महाविद्यालय त्वचा रोग (डर्मेटोलॉजी) और कम्युनिटी मेडिसिन जैसे दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों में भी पीजी डिग्री प्रदान करेगा। यह दोनों कोर्स शैक्षणिक सत्र 2025-26 से शुरू होंगे। फिलहाल महाविद्यालय में सात विषयों — प्रैक्टिस ऑफ मेडिसिन, पीडियाट्रिक, साइकियाट्रिक, फार्मेसी, मेडिसिन और रेस्पिरेटरी में पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं। नए कोर्स जुड़ने से यह संख्या नौ हो जाएगी। अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुनीता तोमर ने जानकारी दी कि वर्तमान समय में प्रदूषण, अस्वस्थ खान-पान और निष्क्रिय जीवनशैली के चलते त्वचा रोगों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसी तरह जनस्वास्थ्य की चुनौतियों, नई बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इस निर्णय से न केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि आमजन को बेहतर होम्योपैथिक इलाज भी मिल सकेगा। साथ ही यह कदम प्रदेश में जनस्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त करने में भी सहायक होगा। फार्मेसी छात्रों के लिए डिजीलाकर जरूरी, घर बैठे होगा रजिस्ट्रेशन मध्य प्रदेश में बी-फार्मा और एम-फार्मा करने वाले छात्रों के लिए अब रजिस्ट्रेशन से पहले डिजीलाकर पर खाता बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। फार्मेसी काउंसिल की रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी के अनुसार जल्द ही पंजीयन की प्रक्रिया एक विशेष डिजिटल सॉफ्टवेयर के माध्यम से शुरू की जाएगी, जिससे छात्रों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बार-बार भोपाल नहीं आना पड़ेगा। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से छात्रों के स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र, 10वीं-12वीं की मार्कशीट, डिग्री/डिप्लोमा, फोटो व अन्य जरूरी दस्तावेजों का समग्र आईडी और डिजीलाकर के जरिए स्वतः सत्यापन किया जाएगा। अब तक यह प्रक्रिया मैन्युअल थी, जिससे रजिस्ट्रेशन में देरी हो रही थी और लगभग 10,500 आवेदन पेंडिंग हो गए थे। अधिकारियों के मुताबिक लगभग 70 प्रतिशत आवेदन फार्म में गलतियां पाई गईं। सबसे ज्यादा गलती अंग्रेजी में नाम, पिता/पति का नाम और जन्मतिथि में हुई। इन समस्याओं से निपटने के लिए अब फार्मेसी काउंसिल पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर रही है, जिससे छात्र घर बैठे आवेदन और वेरिफिकेशन कर सकेंगे। रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ली जाएगी नई प्रक्रिया के तहत जब तक दस्तावेजों का वेरिफिकेशन पूरा नहीं होगा, तब तक रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ली जाएगी। इससे पहले एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पहले फीस ली जाती थी, बाद में वेरिफिकेशन होता था। अब ऐसा नहीं होगा। रजिस्ट्रार के मुताबिक, मई तक 10,500 आवेदन लंबित थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक करीब 2,500 छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 7,500 आवेदन अभी भी पेंडिंग हैं। इनमें से 4,000 आवेदनों को दस्तावेजों की गलतियों के कारण लौटा दिया गया है। छात्रों को इन फार्मों के लिए नई प्रक्रिया के अनुसार दोबारा आवेदन करना होगा।