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पंजाब: हरसिमरत कौर बादल का हरमंदिर साहिब में मत्था टेकने का पवित्र दृश्य, बाढ़ पर चिंता

अमृतसर  शिरोमणि अकाली दल नेता और बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल शनिवार को सचखंड श्री हरमंदिर साहिब पहुंची। इस दौरान उन्होंने अखंड पाठों का भोग डाला और नए अखंड पाठ शुरू करवाए। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने पंजाब में आई प्राकृतिक आपदा और जनता की समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। हरसिमरत ने कहा, " पंजाब के लोग आज बहुत मुश्किल हालात से जूझ रहे हैं। सोशल मीडिया पर पीड़ितों को देखकर रातों की नींद नहीं आती।" मुख्यमंत्री भगवंत मान को निशाने पर ले कहा, "जब भी पहले प्राकृतिक आपदा आती थी, सरकार हेल्पलाइन नंबर जारी करती थी, ताकि लोग खाना, दवा, नाव या अन्य मदद के लिए संपर्क कर सकें। अगर स्कूलों में शौचालयों का उद्घाटन हो सकता है, तो आज जरूरतमंदों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करना भी जरूरी है।" उन्होंने आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री मान से तत्काल कदम उठाने की मांग की। साथ ही, गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया कि पंजाब में एनडीआरएफ की टीमें भेजी जाएं, ताकि बाढ़ प्रभावितों को समय पर मदद मिले। हरसिमरत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बाढ़ पीड़ितों की मदद का आग्रह किया। बोलीं, "जैसे अन्य राज्यों में सेना भेजी जाती है, वैसे ही पंजाब में फौज भेजकर लोगों की जान बचाई जाए।" उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ हफ्ते पहले भाजपा नेता गांवों में अपनी योजनाएं बताने गए थे, लेकिन आज बाढ़ग्रस्त इलाकों में क्यों नहीं दिख रहे। उन्होंने केंद्र से बड़ी नावें मांगी, जो दूर-दराज के गांवों तक जाकर लोगों और पशुधन को सुरक्षित स्थानों पर ले जा सकें। अगर 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर नहीं जारी करते, तो वे शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल से पार्टी का खुद का नंबर जारी करने का आग्रह करेंगी। उन्होंने कहा कि अकाली दल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जनता की सेवा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और आगे भी जारी रखेगी।

सीएम नायब सिंह सैनी का बड़ा ऐलान: बनेगी ‘हरियाणा आपदा राहत बल’ की दो बटालियन

चण्डीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में हरियाणा आपदा राहत बल की दो बटालियन बनाई जाएगी, जो राज्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने और लोगों की सहायता के लिए काम करेगी। इसके अलावा, जिला जींद में बनने वाले फायर एवं डिजास्टर ट्रेनिंग इंस्टीटयूट का शिलान्यास जल्द किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी यहां अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। नायब सिंह सैनी ने कहा कि फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की रिन्यूअल के लिए एनओसी आवदेन करते ही ऑटोमैटिक मिल जाएगी। लेकिन रिन्यूअल होने के बाद विभाग के अधिकारी 15 दिन में रैन्डम चैक करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही और समय सीमा तय की जाए। साथ ही फायर एनओसी को सीएम डैशबोर्ड के साथ जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने फायर विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेंडिंग एनओसी रखने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई तकनीक से लैस 101 मीटर वाली अग्रिशमन की दो गाडिया जल्द ही खरीदी जाए। साथ ही हाइड्रोलिक प्लेटफ़ॉर्म की 13 अग्रिशमन वाहन, जो विभिन्न मीटर के होगें तथा 250 अग्रिशमन वाहन भी खरीदे जाऐंगे, जो ब्लॉक लेवल तक होंगे। इसके अलावा, फायर गाडियों में लगे पानी के पाईप की क्षमता को एक हजार मीटर तक बढाया जाए ताकि भीड़भाड वाले क्षेत्रों में आपदा के दौरान यह काम आ सके। श्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला जींद में बनने वाले फायर एवं डिजास्टर ट्रेनिंग इंस्टिटयूट में एनडीआरएफ के मानदंडों के तहत कार्य होगे और भूकम्प, आग, बाढ़ आदि आपदा से सम्बंधित ट्रेनिंग करवाई जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रदेश में जितने भी तैराक है उनका डाटा तैयार कर एक पोर्टल बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार प्रदेश में फायर स्टेशन खोलने के लिए मैपिंग करवाई गई थी, जिसके तहत प्रदेश में 59 नए फायर स्टेशन खोले जाऐंगे। इसके अलावा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि 10 आधुनिक फायर फाइट रोबोट भी जल्द खरीदे जाए। इनका पायलट के तौर उपयोग किया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ सुमिता मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरूण कुमार गुप्ता, अग्निशमन सेवाएँ, हरियाणा के महानिदेशक श्री शेखर विद्यार्थी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव श्री राहुल हुड्डा सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय घेरने पहुंची भाजपा, पीएम मोदी को अपशब्द कहने पर बवाल

नई दिल्ली  बिहार के दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वोटर अधिकार यात्रा के मंच से अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसे लेकर सियासी सरगर्मियां सुर्खियों में है। शनिवार को दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय के बाहर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए तत्काल माफी की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करती रही है, लेकिन इस बार हद पार हो गई है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस को अपने नेताओं की इस शर्मनाक हरकत के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। यह अपमान न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि देश की 140 करोड़ जनता का भी है।" भाजपा की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल अब देश विरोधी रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "ये लोग अपनी हताशा में अब देश की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।" दिल्ली के भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल पूरे देश का अपमान है। जब तक कांग्रेस माफी नहीं मांगती, हमारा विरोध जारी रहेगा।" वहीं, विधायक कैलाश गहलोत ने कहा कि लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि यह भाषा भारतीय संस्कृति और मूल्यों के खिलाफ है। भाजपा विधायक अनिल गोयल ने प्रदर्शन के दौरान कहा, "आज पूरा देश इस अपमान से आहत है। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर हमारा यह प्रदर्शन उसी आक्रोश का प्रतीक है।" इसी तरह विधायक सतीश उपाध्याय ने बिहार को मां सीता की धरती बताते हुए कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल भारतीय संस्कृति और भगवान राम के सम्मान के खिलाफ है। यह पूरे देश के लिए असहनीय है।" भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कांग्रेस के आधिकारिक मंच से बोले गए अपशब्दों को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और तेजस्वी यादव इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। सहरावत ने कहा, "यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि देश की अस्मिता पर हमला है।"  

गृह मंत्री अमित शाह ने गणेशोत्सव में लगाई हाजिरी, देखा लालबाग का राजा

मुंबई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुंबई दौरे पर पहुंचे हैं। उन्होंने परिवार के साथ अलग-अलग जगहों पर गणेशोत्सव में हिस्सा लिया। वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर गए, जहां श्री गणेश जी का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद अमित शाह ने परिवार के साथ प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन किए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी आवास 'वर्षा' पर गृह मंत्री अमित शाह के आगमन पर स्वागत किया। उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी थे। इसके बाद अमित शाह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पर स्थापित गणपति बप्पा की पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "हमारे नेता केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह व इनके परिवारजनों ने गणेशोत्सव के अवसर पर मुंबई स्थित मेरे सरकारी आवास 'वर्षा' पर भेंट दी, इस दौरान उनका हार्दिक स्वागत किया।" इसके बाद, अमित शाह लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल गए, जहां श्री गणेश के दर्शन किए। मंडल की ओर से उनका स्वागत शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट करके किया गया। अमित शाह ने अपने बेटे जय शाह और परिवार के बाकी सदस्यों के साथ लालबागचा राजा मंडल में भगवान गणेश का दर्शन-पूजन किया। इस मौके पर सीएम देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत महाराष्ट्र सरकार के अन्य मंत्री मौजूद रहे। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, "हर साल की तहत इस साल भी हमारे नेता गृह अमित शाह व इनके परिवारजनों के साथ लालबाग के राजा के भक्तिमय दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर लालबाग के बाप्पा के चरणों में जनसेवा के लिए प्रार्थना की।" उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लिखा, "शनिवार को गणेश उत्सव के लिए मुंबई प्रवास पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल के श्री गणेश के भावपूर्ण दर्शन किए। मंडल की ओर से उनका स्वागत शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट करके किया गया।"

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कांग्रेस पर वार, कहा- यह बेहद आपत्तिजनक

गुवाहाटी  असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने गांधी परिवार के अहंकार को चूर-चूर किया, इसलिए वे अभद्र भाषा बोल रहे हैं। इस दौरान, हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस ने माफी मांगने की बजाय मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा शनिवार को गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। सरमा ने कहा, "राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अन्य ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। यह बेहद निंदनीय है।" हिमंता ने कहा, "गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को असम की धरती से इसकी निंदा की और उनसे (कांग्रेस) माफी मांगने को कहा। लेकिन, माफी मांगना तो दूर, कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से किसी को आगे लाकर इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। बिहार सरकार ने इसमें शामिल व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। उम्मीदवार नौशाद की भी तलाश की जा रही है। यह निश्चित है कि यह कांग्रेस की मानसिकता है।" असम के मुख्यमंत्री ने कहा, "वे (गांधी परिवार) कभी सोच भी नहीं सकते थे कि गांधी परिवार से बाहर का कोई प्रधानमंत्री बन सकता है। राहुल गांधी, उनकी मां सोनिया गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा सोचते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री पद पर उनके अलावा कोई और आसीन नहीं हो सकता। यह उनकी सामंती मानसिकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इस अहंकार को चूर-चूर किया और साबित कर दिया कि प्रधानमंत्री का पद सिर्फ गांधी परिवार के लिए रिजर्व नहीं है।" हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी की 11 साल की सरकार और उनके वैश्विक नेतृत्व की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के घमंड को तोड़ा और पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। गांधी परिवार ने कभी कल्पना नहीं की थी कि पीएम मोदी को जापान और चीन जैसे देशों में इतनी सराहना मिलेगी। इसलिए, वे अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।"

संसदीय समितियों की भूमिका व्यापक, बजट के साथ परिणामों पर भी नजर: ओम बिरला

भुवनेश्वर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राज्य एवम् केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिरला ने समावेशी विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में संसदीय समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। बिरला ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि संसदीय समितियां न केवल बजट आवंटन की निगरानी करती हैं, बल्कि उनके परिणामों का मूल्यांकन भी करती हैं। बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों में आरक्षण और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन सहित कई ऐतिहासिक निर्णय इन समितियों की सिफारिशों से सामने आए हैं। हालांकि सरकारें इन सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं, ज्‍यादातर सुझावों को आमतौर पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभाओं में समितियों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना सकें और नई तकनीकों को एकीकृत कर सकें। इसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना और लोगों के लिए अधिकतम कल्याण सुनिश्चित करना है। बिरला ने समितियों की मुख्य जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक और विधायी अधिकारों की रक्षा करना, उनकी चुनौतियों का समाधान करना और उनका कल्याण है। इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक विजन 2025 रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि समितियां नियमित रूप से हितधारकों के साथ बातचीत करती हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित धन का उचित उपयोग हो, क्षेत्रीय दौरे करती हैं। वे मौजूदा योजनाओं में संशोधन का सुझाव भी देती हैं या नई पहल की सिफारिश करती हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से, सरकारों ने इनमें से अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार किया है। बिरला ने कहा कि सरकार के अलावा, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग जैसी संस्थाएं भी मुद्दों की निगरानी और इन समुदायों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने विभिन्न संसदीय मुद्दों पर मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि संसदीय समितियों के माध्यम से अच्छे विचारों और प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। समितियों के लिए सभी राजनीतिक दलों से नाम मांगे गए हैं, जिनका गठन जल्द ही किया जाएगा। बिरला ने संसद और राज्य विधानसभाओं में सार्थक और गरिमापूर्ण चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया ताकि जनहित के मुद्दों पर बहस हो सके और समाज के गरीब और हाशिए पर पड़े वर्गों का कल्याण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि देश की जनता भी यही अपेक्षा रखती है। उन्‍हाेंने लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसे हमेशा गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए, चाहे वह नीतियों की आलोचना हो या सरकारी कामकाज की। चर्चाओं और बहसों को और बेहतर बनाने के लिए, 1947 से अब तक की सभी संसदीय बहसों का डिजिटलीकरण और उन्हें मेटाडेटा के साथ 'डिजिटल संसद' प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने सहित कई कदम उठाए गए हैं। सदस्यों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक 'लाइव लाइब्रेरी' भी 24 घंटे उपलब्ध कराई गई है।

मोदी शासन की नीतियों से बढ़ी GDP, मंत्रियों ने बताया सुधारों का नतीजा

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रियों ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जीडीपी की 7.4 प्रतिशत शानदार वृद्धि दर को पीएम नरेंद्र मोदी के सुधार-संचालित शासन का प्रमाण बताया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों के कारण जीडीपी वृद्धि दर लगातार दूसरी तिमाही में उम्मीदों से बेहतर रही और अप्रैल-जून 2025 के लिए यह पांच तिमाहियों के उच्चतम स्तर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह जनवरी-मार्च 2025 की 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर और 2024-25 की पहली तिमाही की 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से कहीं अधिक है।" केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत के साथ दूसरे बड़े देशों के वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों का एक इंफोग्राफिक शेयर किया। इस इंफोग्राफिक में दी गई जानकारी के अनुसार, जून तिमाही में चीन ने 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की, उसके बाद इंडोनेशिया ने 5.1 प्रतिशत, अमेरिका ने 2.1 प्रतिशत, जापान और ब्रिटेन ने 1.2-1.2 प्रतिशत और फ्रांस ने 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की। इन सबसे अलग भारत ने जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की शानदार जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की। उन्होंने लिखा, "7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि – पीएम नरेंद्र मोदी के सुधार-संचालित शासन का प्रमाण है।" केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लिखा, "निरंतर कम मुद्रास्फीति के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि हासिल की। यह पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। साथ ही, पिछली तिमाही की 7.4 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में, वर्तमान विकास दर भारतीय अर्थव्यवस्था के निरंतर बढ़ते रुझान को दर्शाती है।" केंद्रीय मंत्री ने 20वें इंडिया-अफ्रिका बिजनेस कॉन्क्लेव में कहा, "जब हम भारत की विकास गाथा पढ़ते हैं तो पाते हैं कि इस तिमाही आनी अप्रैल से जून तक देश की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है और हमने सभी क्षेत्रों में प्रगति की है।"

बारिश से बिगड़ा MP का हाल, हाईवे जाम में दो घंटे तक फंसे यात्री

बुरहानपुर बाढ़ ने शनिवार को दूसरी बार इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाइवे दो घंटे से ज्यादा समय तक जाम कर दिया। जिससे हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस जाम में एम्बुलेंस और यात्री बसें भी काफी देर तक फंसी रहीं। बाद में ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें पार कराया। दूसरे वाहन चालकों ने भी जान जोखिम में डाल कर हाइवे पार किया। इससे पहले गुरुवार देर रात भी असीरगढ़ से ढाई किमी दूर धूपगट्टा गांव के पास हाइवे पर पानी भर जाने से रात बारह बजे तक मार्ग अवरुद्ध हुआ था। पानी से हुआ भारी नुकसान निंबोला थाना प्रभारी राहुल कांबले ने हाइवे का निर्माण कर रही कंपनी और एनएचएआई के अधिकारियों को सूचना दी थी। बावजूद इसके निर्माण एजेंसी ने पहाड़ी नाले की जल निकासी का ठोस प्रबंध नहीं किया। जिसके चलते शनिवार दोपहर तीन बजे क्षेत्र में तेज वर्षा होने के बाद फिर न केवल हाईवे जाम हो गया, बल्कि धूपगट्टा गांव में भी पानी घुस गया। जिससे करीब दो दर्जन ग्रामीणों का गृहस्थी का सामान भी खराब हो गया। खेतों में दो से तीन फीट पानी भर जाने के कारण मक्का व अन्य फसलों को भी क्षति हुई है।   पुलिया छोटी करने से उपजी समस्या उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को नईदुनिया टीम ने हाइवे पर बाढ़ का पानी आने का मूल कारण तलाशा था। जिसमें पता चला था कि बरसाती नाले पर नई पुलिया बनाई जा रही है। जिसके लिए निर्माण एजेंसी ने पानी को डायवर्ट करने एक पाइप डालकर अस्थाई पुलिया बनाई है। पहाड़ों से उतरने वाले पानी की मात्रा अधिक होती है। एक पाइप से केवल बीस प्रतिशत पानी ही निकल पा रहा है। जिसके चलते शेष पानी हाईवे और धूपगट्टा गांव में घुस कर तबाही मचा रहा है। अब तक 542 मिमी औसत वर्षा हुई बाढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार अब तक जिले में 542 मिमी औसत वर्षा हुई है। जिले की कुल औसत वर्षा 823 मिमी है। शनिवार सुबह तक बुरहानपुर में पांच मिमी, नेपानगर में 29 मिमी और धूलकोट क्षेत्र में 65 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। जिससे ताप्ती नदी का जल स्तर भी बढ़ गया है। शनिवार दोपहर तीन बजे परसाडोह बांध का एक गेट भी खोला गया है। जिसके कारण ताप्ती नदी का जल स्तर देर रात अथवा कल तक और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

रेलवे का बड़ा ऐलान: यात्रियों के लिए बदला लोकल ट्रेनों का टाइमटेबल

मुंबई  गणेशोत्सव को देखते हुए, मुंबई के लाखों लोगों को रेलवे ने बड़ी खुशखबरी दी है। मुंबई मेट्रो के बाद अब मध्य रेलवे ने भी रात में अतिरिक्त लोकल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इस कदम से गणपति विसर्जन के दौरान देर रात तक सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। सेंट्रल लाइन पर चलेंगी ये ट्रेनें मध्य रेलवे 4, 5 और 6 सितंबर की रात को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और कल्याण-ठाणे के बीच विशेष ट्रेनें चलाएगा। ये ट्रेनें मुख्य मार्ग पर सभी स्टेशनों पर रुकेंगी। CSMT से कल्याण: 6 सितंबर को एक स्पेशल ट्रेन रात 01:40 बजे CSMT से चलेगी और 03:10 बजे कल्याण पहुँचेगी। CSMT से ठाणे: एक अन्य स्पेशल सेवा CSMT से रात 02:30 बजे रवाना होकर 03:30 बजे ठाणे पहुँचेगी। अप मेन लाइन पर: 4, 5 और 6 सितंबर को कल्याण से CSMT के लिए स्पेशल ट्रेनें रात 00:05 बजे से चलेंगी, जो 01:30 बजे CSMT पहुँचेगी। हार्बर लाइन पर भी चलेंगी स्पेशल ट्रेनें गणपति विसर्जन के दिन यानी 6 और 7 सितंबर को हार्बर लाइन पर भी यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। CSMT से पनवेल: 01:30 बजे और 02:45 बजे दो विशेष ट्रेनें CSMT से पनवेल के लिए चलेंगी। पनवेल से CSMT: पनवेल से CSMT के लिए पहली स्पेशल ट्रेन रात 01:00 बजे और दूसरी 01:45 बजे चलेगी।  

मानसून सत्र में हरियाणा विधानसभा रही बेहद सक्रिय, कार्य उत्पादकता 120% तक पहुँची

चंडीगढ़  हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि मानसून सत्र हर दृष्टि से ऐतिहासिक रहा और इसने संसदीय परंपराओं को नई दिशा दी है। यह सत्र सकारात्मक माहौल में सम्पन्न हो गया। चार दिनों तक चले इस सत्र में 21 घंटे 8 मिनट की कार्यवाही हुई, जो 120.37 प्रतिशत उत्पादकता का प्रतीक रही। सत्र के दौरान कुल 7 विधेयक पारित किए गए और कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विधायकगणों ने चर्चा में भाग लिया। विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने शनिवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 3 स्थित हरियाणा निवास में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि सत्र 22 अगस्त से 27 अगस्त तक चला। पहले और दूसरे दिन 71, तीसरे दिन 72 और चौथे दिन 70 विधायक मौजूद रहे। इसमें मुख्यमंत्री, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मंत्रियों की संख्या शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुशासन और गंभीरता के साथ विधायकगणों ने बहस में हिस्सा लिया और सदन की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सत्र के समापन पर पहली बार राज्यगीत का वादन हुआ। विस अध्यक्ष ने बताया कि शून्यकाल की कार्यवाही तीन दिन चली, जिसमें 78 सदस्यों ने हिस्सा लिया। भाजपा के 30 सदस्यों ने 99 मिनट, कांग्रेस के 34 सदस्यों ने 129 मिनट, इनेलो के 2 सदस्यों ने 7 मिनट और निर्दलीय 3 विधायकों ने 10 मिनट तक अपनी बात रखी। प्रश्नकाल में भी विधायकों की सक्रियता देखने को मिली। इस दौरान 53 विधायकों से 307 तारांकित प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 194 स्वीकार किए गए और 56 प्रश्नों पर सदन में चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त 160 अतारांकित प्रश्नों में से 132 स्वीकृत किए गए। ध्यानाकर्षण सूचनाओं के तहत कुल 40 नोटिस आए, जिनमें से 11 को स्वीकार किया गया। इनमें जलभराव, सीईटी परीक्षा की कार्यप्रणाली, धान में वायरस की समस्या, कलेक्टर रेट में वृद्धि और खिलाड़ियों की समस्याओं जैसे मुद्दे शामिल रहे। स्थगन प्रस्तावों में से एक को स्वीकार कर 26 अगस्त को तीन घंटे 35 मिनट लंबी चर्चा की गई, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी 67 मिनट तक जवाब दिया। इस सत्र में तीन सरकारी प्रस्ताव भी पारित हुए। इनमें गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर प्रस्ताव, मीडिया से अपराध का महिमामंडन रोकने की अपील और एक आपराधिक विधेयक वापसी शामिल हैं। साथ ही सात महत्त्वपूर्ण विधेयक भी पारित किए गए, जिनमें सदस्य वेतन-भत्ता संशोधन, पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन और जीएसटी संशोधन प्रमुख रहे। सत्र के दौरान दर्शकों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। कुल 1585 लोग विधान सभा पहुंचे, जिनमें 842 विद्यार्थी, 281 स्पीकर गैलरी और 462 दर्शक दीर्घा से थे। सत्र में कई विशेष पहलें भी हुईं। पहली बार महामहिम राज्यपाल प्रो. अशीम कुमार घोष विधान भवन आए, जिनका भव्य स्वागत किया गया। टीवी चैनलों पर कार्यवाही का सीधा प्रसारण सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइन जारी की गई। वहीं 26 अगस्त को नशा मुक्ति का संदेश देने के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों की भागीदारी से साइक्लोथॉन आयोजित किया गया। भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि अब अधिकारियों को विधायी प्रारूपण की ट्रेनिंग दी जाएगी, लोकसभा की तर्ज पर एआई आधारित रिकॉर्डिंग और अनुवाद व्यवस्था शुरू होगी तथा संविधान के मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्यव्यापी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। अनुसंधान विंग को सुदृढ़ बनाने, एमएलए हॉस्टल के विस्तार और नई डिस्पेंसरी की योजना भी घोषित की गई है। इस मौके पर विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि वे भविष्य में भी इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं।