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IRCTC आईडी पर बड़ा अपडेट: रेलवे ने 2.5 करोड़ अकाउंट किए डीएक्टिवेट, बदली गाइडलाइन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्‍टम में दुरुप्रयोग को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर्स आईडी डीएक्टिवट हो चुके हैं. संदिग्‍ध बुकिंग पैटर्न और फेक यूजर्स की पहचान के बाद IDs डीएक्टिवेट की गई हैं. संसद में सांसद ए.डी. सिंह के सवाल पर सरकार ने इसकी जानकारी दी गई है. इन अकाउंट के डीएक्टिव होने से पहले तत्‍काल टिकट बुकिंग में कई तरह की समस्‍याएं आ रही थीं. अक्‍सर देखा जा रहा था कि तत्‍काल बुकिंग विंडो खुलने के कुछ ही मिनटों में टिकट गायब हो जाते थे, क्‍योंकि बॉट्स का यूज करके एजेंट सारे टिकट गायब कर देते थे, जिससे आम यात्री टिकट बुक नहीं कर पाता था. हालांकि अब बदलाव के बाद रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है.  सरकार ने क्‍या दी जानकारी?  संसद में सरकार ने बताया कि टिकट बुकिंग सिस्‍टम में गड़बड़‍ियों को रोकने के लिए IRCTC ने हाल ही में 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर आईडी डीएक्टिव किए हैं. क्‍योंकि ये यूजर्स आईडी संदिग्‍ध पाए गए थे. सरकार ने बताया कि भारतीय रेलवे ने कंफर्म टिकट बुकिंग और डिजिटल को बढ़ावा देने के लिए कुछ और बदलाव किए हैं.  रेलवे ने  बदले हैं ये नियम     रिजर्व टिकट ऑनलाइन या कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) काउंटरों पर 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर बुक किए जा सकते हैं.  हालांकि कुल टिकटों का लगभग 89% ऑनलाइन माध्यम से बुक हो रहा है.      PRS काउंटर्स पर डिजिटल माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.     1 जुलाई 2025 से तत्‍काल योजना के तहत टिकट केवल आधार वेरिफाई यूजर्स द्वारा ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप के माध्‍यम से बुक किए जा सकते हैं.      एजेंटों को तत्‍काल रिजर्व खुलने के पहले 30 मिनट के दौरान तत्‍काल टिकट बुक करने से रोक दिया गया है.      ट्रेनों की वेटिंग लिस्‍ट का स्‍टेटस की नियमित आधार पर निगरानी की जाती है और अतिरिक्‍त मांग को पूरा करने के लिए, भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें चला रहा है.  इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव  सरकार ने इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव किया है. पहले इमरजेंसी कोटा के तहत टिकट बुकिंग करने के लिए यात्रा वाले दिन ही आवेदन किया जा सकता था, लेकिन अब 1 दिन पहले इमरजेंसी कोटा के लिए अप्‍लाई करना होगा. यह कोटा सांसद, उच्‍च अधिकारी, मेडिकल इमरजेंसी और सीनियर सिटीजन के लिए होता है. 

उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने मोबाइल नेत्र जांच वैन को दिखाई हरी झंडी

रायपुर कबीरधाम जिले के दूरस्थ और वनांचल इलाकों में आंखों की जांच और इलाज जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा अब लोगों के घरों तक निःशुल्क पहुंचेगी। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज पीजी कॉलेज परिसर, कवर्धा में उदयाचल संस्था द्वारा संचालित मोबाइल नेत्र जांच वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।  यह मोबाइल वैन कबीरधाम जिले के वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में जाकर लोगों की आंखों की जांच करेगी, विशेष रूप से मोतियाबिंद जैसे रोगों की पहचान और इलाज के लिए सेवा देगी।      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। आज यह मोबाइल वैन जिले के उन क्षेत्रों तक पहुंचेगी, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंच पातीं। यह कदम नेत्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है, जिससे लोगों को समय पर जांच और इलाज का लाभ मिलेगा।      स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी इसे एक सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि कई बार लोग आंखों की छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे जाकर गंभीर स्थिति ले सकती है। यह मोबाइल वैन मोतियाबिंद जैसे रोगों की पहचान कर लोगों को निःशुल्क उपचार प्रदान करेगी, जिससे ग्रामीण और वनांचल निवासियों को राहत मिलेगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ गोसेवा आयोग अध्यक्ष विशेषर पटेल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, कलेक्टर गोपाल वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगरपालिका परिषद कवर्धा अध्यक्ष चंदप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य रामकुमार भट्ट, जिला पंचायत सीईओ अजय त्रिपाठी, सहित कई जनप्रतिनिधिगण और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।      यह मोबाइल नेत्र जांच वैन विशेष रूप से जिले के तरेगांव, रेंगाखर, कुकदूर, बोक्काखार जैसे दुर्गम और सुदूर गांवों में जाकर मोतियाबिंद और अन्य नेत्र संबंधी रोगों की पहचान करेगी। जांच के उपरांत मरीजों को उचित मार्गदर्शन, इलाज, और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इस वैन में प्रशिक्षित नेत्र चिकित्सकों की टीम के साथ आधुनिक नेत्र जांच उपकरण मौजूद हैं। इस सेवा के माध्यम से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र रोगों की समय पर पहचान होगी, बल्कि समय रहते इलाज मिलने से अंधता की रोकथाम भी संभव होगी।

मध्यप्रदेश में हिन्दी फीचर फिल्म तन्वी द ग्रेट कर मुक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फीचर फिल्म "तन्वी द ग्रेट" को कर मुक्त करने की घोषणा की थी। इसी क्रम में राज्य शासन ने फिल्म को मध्यप्रदेश में कर मुक्त करने के आदेश जारी किए है। फीचर फिल्म के मध्यप्रदेश में प्रदर्शन की अवधि 25 जुलाई से 23 अगस्त, 2025 तक के लिए मध्यप्रदेश मॉल एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के अधीन स्टेट जीएसटी की संपूर्ण राशि की प्रतिपूर्ति करते हुए दर्शकों को छूट मिलेगी। फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने किया है। संबंधित सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स द्वारा स्टेट जीएसटी की राशि को घटाकर दर्शकों को इस फिल्म के टिकट का विक्रय किया जाएगा। इस सेवा प्रदाय पर देय एवं भुगतान किये गये राज्य जीएसटी के अंश के बराबर की राशि की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सेवा प्रदाता को की जायेगी। फिल्म के प्रदर्शन के लिए संबंधित सिनेमाघरों मल्टीप्लेक्स के प्रचलित सामान्य प्रवेश शुल्क में वृद्धि नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि "तन्वी द ग्रेट" 21 वर्षीय तन्वी रैना की कहानी है, जो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जूझते हुए अपने शहीद पिता के सपने को पूरा करने के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का प्रयास करती है। इसकी संवेदनशील कहानी और सामाजिक संदेश को दर्शकों और समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है।  

UPI ट्रांजैक्शन पर आए नए नियम, 1 अगस्त से ये 3 बदलाव होंगे लागू

 नई दिल्ली  1 अगस्त 2025 से UPI से जुड़े नए नियम लागू हो रहे हैं। अगर आप रोज Paytm, PhonePe, GPay या किसी और UPI ऐप से पेमेंट करते हैं, तो ये बदलाव आपके लिए जरूरी हैं। UPI सिस्टम को मैनेज करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ये लिमिट्स इसीलिए तय की हैं ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो और ट्रांजैक्शन फेल या डिले जैसी दिक्कतें घटें। ये बदलाव जरूरी ट्रांजैक्शन्स को प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन बैलेंस चेक, स्टेटस रीफ्रेश जैसी चीजों पर लिमिट जरूर लगाई जा रही है। NPCI का कहना है कि इससे UPI ज्यादा स्मूद और भरोसेमंद बनेगा, खासतौर पर उस वक्त जब ज्यादा लोग एक साथ ट्रांजैक्शन करते हैं। 1 अगस्त से UPI पर क्या नई लिमिट्स लगेंगी? अगले महीने से UPI यूजर्स सिर्फ 50 बार ही अपना अकाउंट बैलेंस चेक कर पाएंगे। इसके अलावा, जो यूजर्स अपने मोबाइल नंबर से लिंक बैंक अकाउंट्स को बार-बार चेक करते हैं, वो भी अब सिर्फ 25 बार ही ऐसा कर सकेंगे। ये लिमिट्स इसीलिए लाई गई हैं ताकि बिना जरूरत के सिस्टम पर लोड ना पड़े, जिससे अक्सर स्पीड स्लो हो जाती है या ट्रांज़ैक्शन फेल हो जाते हैं। नए नियमों की वजह क्या है? NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने बताया कि अप्रैल और मई 2025 में UPI प्लेटफॉर्म पर काफी लोड देखा गया। इसका सबसे बड़ा कारण था लोग बार-बार बैलेंस चेक करते रहे या फिर एक ही ट्रांजैक्शन का स्टेटस बार-बार रिफ्रेश करते रहे। इससे सर्वर पर दबाव बढ़ा और कई बार लेन-देन में देरी या फेल होने की स्थिति आ गई। इसी वजह से अब नए नियम लाए जा रहे हैं ताकि सिस्टम बेहतर और फास्ट बना रहे। कौन-कौन से बदलाव होंगे? एक दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक कर सकेंगे। आप अपने मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक अकाउंट की डिटेल्स दिन में 25 बार से ज्यादा नहीं देख पाएंगे। कोई एक ट्रांजैक्शन का स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक किया जा सकेगा, वो भी हर बार कम से कम 90 सेकंड का अंतर होना जरूरी होगा। Netflix, EMI, बिजली बिल जैसे ऑटो डेबिट पेमेंट्स अब सिर्फ निर्धारित समय पर ही प्रोसेस होंगे। ऑटो पेमेंट्स पर भी असर पड़ेगा जो व्यापारी या कंपनियां ऑटो पेमेंट के जरिए ग्राहकों से पेमेंट लेती हैं, उन्हें अब NPCI द्वारा तय किए गए टाइम स्लॉट्स के अनुसार भुगतान प्राप्त करना होगा। इससे पेमेंट सिस्टम और ज़्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। हालांकि आम यूजर्स को इससे कोई खास दिक्कत नहीं होगी। UPI बना डिजिटल इंडिया की रीढ़ आज UPI सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि हर गली, मोहल्ले और चाय की दुकान तक पहुंच चुका है। "भैया QR स्कैन कर दूं?" जैसे वाक्य अब आम सुनाई देते हैं। NPCI का यह कदम UPI नेटवर्क को और ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए उठाया गया है। बदलाव जरूरी हैं सुविधा बनाए रखने के लिए जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट की सुविधा बढ़ रही है, वैसे-वैसे सिस्टम को स्मार्ट और टिकाऊ बनाने के लिए ऐसे बदलाव जरूरी हो जाते हैं। इन छोटे लेकिन असरदार नियमों के जरिए हर यूजर को बिना किसी रुकावट के पेमेंट करने में आसानी मिलेगी।  

भोपाल: होम्योपैथिक कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट स्टडी को मिली हरी झंडी

भोपाल  स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और विशेषज्ञता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, भोपाल को दो नए स्नातकोत्तर (पीजी) कोर्स शुरू करने की मंजूरी दे दी है। अब यह महाविद्यालय त्वचा रोग (डर्मेटोलॉजी) और कम्युनिटी मेडिसिन जैसे दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों में भी पीजी डिग्री प्रदान करेगा। यह दोनों कोर्स शैक्षणिक सत्र 2025-26 से शुरू होंगे। फिलहाल महाविद्यालय में सात विषयों — प्रैक्टिस ऑफ मेडिसिन, पीडियाट्रिक, साइकियाट्रिक, फार्मेसी, मेडिसिन और रेस्पिरेटरी में पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं। नए कोर्स जुड़ने से यह संख्या नौ हो जाएगी। अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुनीता तोमर ने जानकारी दी कि वर्तमान समय में प्रदूषण, अस्वस्थ खान-पान और निष्क्रिय जीवनशैली के चलते त्वचा रोगों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसी तरह जनस्वास्थ्य की चुनौतियों, नई बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इस निर्णय से न केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि आमजन को बेहतर होम्योपैथिक इलाज भी मिल सकेगा। साथ ही यह कदम प्रदेश में जनस्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त करने में भी सहायक होगा। फार्मेसी छात्रों के लिए डिजीलाकर जरूरी, घर बैठे होगा रजिस्ट्रेशन मध्य प्रदेश में बी-फार्मा और एम-फार्मा करने वाले छात्रों के लिए अब रजिस्ट्रेशन से पहले डिजीलाकर पर खाता बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। फार्मेसी काउंसिल की रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी के अनुसार जल्द ही पंजीयन की प्रक्रिया एक विशेष डिजिटल सॉफ्टवेयर के माध्यम से शुरू की जाएगी, जिससे छात्रों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बार-बार भोपाल नहीं आना पड़ेगा। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से छात्रों के स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र, 10वीं-12वीं की मार्कशीट, डिग्री/डिप्लोमा, फोटो व अन्य जरूरी दस्तावेजों का समग्र आईडी और डिजीलाकर के जरिए स्वतः सत्यापन किया जाएगा। अब तक यह प्रक्रिया मैन्युअल थी, जिससे रजिस्ट्रेशन में देरी हो रही थी और लगभग 10,500 आवेदन पेंडिंग हो गए थे। अधिकारियों के मुताबिक लगभग 70 प्रतिशत आवेदन फार्म में गलतियां पाई गईं। सबसे ज्यादा गलती अंग्रेजी में नाम, पिता/पति का नाम और जन्मतिथि में हुई। इन समस्याओं से निपटने के लिए अब फार्मेसी काउंसिल पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर रही है, जिससे छात्र घर बैठे आवेदन और वेरिफिकेशन कर सकेंगे। रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ली जाएगी नई प्रक्रिया के तहत जब तक दस्तावेजों का वेरिफिकेशन पूरा नहीं होगा, तब तक रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ली जाएगी। इससे पहले एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पहले फीस ली जाती थी, बाद में वेरिफिकेशन होता था। अब ऐसा नहीं होगा। रजिस्ट्रार के मुताबिक, मई तक 10,500 आवेदन लंबित थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक करीब 2,500 छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 7,500 आवेदन अभी भी पेंडिंग हैं। इनमें से 4,000 आवेदनों को दस्तावेजों की गलतियों के कारण लौटा दिया गया है। छात्रों को इन फार्मों के लिए नई प्रक्रिया के अनुसार दोबारा आवेदन करना होगा।

HIV मामलों में वृद्धि के बीच Meghalaya में शादी से पहले compulsory टेस्टिंग क़ानून की तैयारी

शिलांग देश के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में अब शादी से पहले एचआईवी टेस्ट को अनिवार्य बनाने की तैयारी चल रही है। हेल्थ मिनिस्टर एंपरीन लिंगदोह ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए विवाह से पहले जांच अनिवार्य करने के लिए नया कानून लाने पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि मेघालय एचआईवी/एड्स प्रसार के मामले में देश में छठे स्थान पर है और पूर्वोत्तर क्षेत्र पर इसका अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। लिंगदोह ने कहा, ‘अगर गोवा ने विवाह से पहले एचआईवी जांच को अनिवार्य कर दिया है तो मेघालय को भी इस तरह का कानून क्यों नहीं लागू करना चाहिए? यह पूरे समाज के लिए फायदेमंद होगा।’ स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग की अध्यक्षता में एक बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें समाज कल्याण मंत्री पॉल लिंगदोह और ईस्ट खासी हिल्स जिले के आठ विधायक भी शामिल हुए। इस बैठक में एचआईवी/एड्स पर एक नीति बनाने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में कैबिनेट नोट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही इसी तरह की बैठकें गारो हिल्स और जैंतिया हिल्स क्षेत्रों में आयोजित की जाएंगी ताकि क्षेत्रवार रणनीति तैयार की जा सके। स्वास्थ्य मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि सिर्फ ईस्ट खासी हिल्स जिले में ही अब तक एचआईवी/एड्स के 3,432 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से केवल 1,581 मरीज ही उपचार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में इस संक्रमण का प्रमुख कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं। मंत्री ने कहा, ‘हमें सुनिश्चित करना होगा कि जांच के बाद संक्रमित पाए गए हर व्यक्ति का इलाज कराया जाए। एचआईवी/एड्स घातक नहीं है, अगर इसका समय पर और सही तरीके से इलाज हो।’ बता दें कि गोवा में भी ऐसे तमाम मामले पाए जाने के बाद एचआईवी टेस्ट को लेकर नियम बनाया गया है।

यूथ कांग्रेस का सदस्यता अभियान ऐतिहासिक, मप्र में पार किए 15 लाख सदस्यता के आंकड़े

भोपाल   मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस की चुनावी प्रक्रिया पूरी हो गई है। पूरे प्रदेश से लगभग 16 लाख युवाओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली है। युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के लिए 18 प्रत्याशी मैदान में है। प्रदेश महासचिव पद के लिए 182 दावेदार है। संगठन का दावा है कि करीब दो महीने बाद नई कार्यकारिणी मिल जाएगी।युवा कांग्रेस के चुनाव में सबसे ज्यादा घमासान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के गृह जिले धार में देखने को मिला है। धार में युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के लिए सबसे ज्यादा 15 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। नए सदस्यों के दस्तावेजों की होगी जांच एमपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने बताया कि यूथ कांग्रेस के महासचिव के अलावा ब्लॉक अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष के दावेदारों को वोट किया। अब 16 लाख के करीब बनाए गए सदस्यों के दस्तावेजों की जांच होगी। दस्तावेजों में त्रुटि पाए जाने पर सदस्यता निरस्त की जाएगी। इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में करीब दो माह का समय लगेगा। करीब 2 महीने के बाद यूथ कांग्रेस को नया अध्यक्ष और नई कार्यकारिणी मिलेगी। प्रदेश अध्यक्ष पद पर प्रथम तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए आलाकमान दिल्ली बुलाएगा। इसके बाद नाम का ऐलान किया जाएगा। एक सदस्य ने छह वोट किए मध्य प्रदेश में युवा कांग्रेस संगठन चुनाव के लिए सदस्यता लेने और मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं। एमपी में 20 जून की सुबह 9 बजे से मतदान और सदस्यता प्रक्रिया शुरू हुई, जो 19 जुलाई की शाम तक चली। युवा कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महासचिव, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, जिला महासचिव के पद पर वोटिंग हुई। एक सदस्य ने छह वोट किए। प्रदेश अध्यक्ष के लिए ये दावेदार  युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कुल 18 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। जिनमें जावेद पटेल, योगिता सिंह, नीरज पटेल, गीता कड़वे, अभिषेक परमार, विश्वजीत सिंह चौहान, विनय पांडे, प्रमोद सिंह, प्रियेश चौकड़े, राजवीर कुड़िया, अब्दुल करीम सिद्दीकी, शुभंगाना राजे, आशीष चौबे, यश घनघोरिया, स्वीटी पाटिल, देवेंद्र सिंह दादू, शिवराज यादव, मोनिका मांडरे चुनावी मैदान में हैं। कमलनाथ के जिले में मुकाबला नहीं पूर्व सीएम कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा और पांढुर्णा ेमें युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष के लिए कोई मुकाबला नजर नहीं आया। दोनों जिलों में सिर्फ एक-एक उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा। हरदा में भी सिंगल केंडिडेट रहा। इन तीनों जिलों में निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाएंगे। दो महीने तक चलेगी स्क्रूटनी युवा कांग्रेस के चुनाव के लिए चलाए गए सदस्यता अभियान में नए मेंबर्स ने सदस्यता लेने के बाद 6 पदों के लिए मतदान किया है। ब्लॉक अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, जिला महासचिव, प्रदेश महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष का वोट डाले हैं। अब दो महीनों तक सभी वोटों की स्क्रूटनी होगी। इसमें ये देखा जाएगा कि वोट देने वाले ने अपने दस्तावेज अपलोड किए हैं या नहीं, मतदान के बाद वीडियो अपलोड किया है या नहीं। यदि मेंबरशिप फीस अदा नहीं की है तो वोट रिजेक्ट माना जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष के लिए त्रिकोणीय जंग युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा वोटिंग जबलपुर, भोपाल और ग्वालियर में हुई है। जबलपुर के विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे यश घनघोरिया प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। वहीं भोपाल के अभिषेक परमार और ग्वालियर के शिवराज यादव ने भी चुनाव जीतने के लिए पूरा दम लगाया है। युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के 19 उम्मीदवार     योगिता सिंह     जावेद पटेल     अभिषेक परमार     नीरज पटेल     गीता कडवे     प्रमोद सिंह     विश्वजीत सिंह चौहान     विनय पांडेय     राजवीर कुड़िया     प्रियेश चौकड़े     अब्दुल करीम कुरैशी     शुभांगना राजे जामनिया     आशीष चौबे     यश घनघोरिया     देवेंद्रसिंह दादू     स्वीटी पाटिल     शिवराज यादव     मोनिका मंडरे     राजीव सिंह प्रदेश महासचिव के लिए सबसे ज्यादा घमासान युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव के लिए सबसे ज्यादा घमासान मचा है। महासचिव के लिए 182 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। प्रदेश कार्यकारिणी में अध्यक्ष के साथ नौ उपाध्यक्ष होंगे। इनमें एसटी, एससी, ओबीसी, महिला, अल्पसंख्यक और एक दिव्यांग उपाध्यक्ष होगा। ,48 प्रदेश महासचिव बनेंगे युवा कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में 48 प्रदेश महासचिव बनाए जाएंगे। इनमें 17 महासचिव अनारक्षित वर्ग से होंगे। 3 एसटी, एससी, 5 ओबीसी, 5 अल्पसंख्यक, 11 महिला, 2 ओबीसी महिला, एक अल्पसंख्यक महिला, एक दिव्यांग और एक ट्रांसजेंडर को महासचिव बनाया जाएगा।  

यूथ कांग्रेस का सदस्यता अभियान ऐतिहासिक, मप्र में पार किए 15 लाख सदस्यता के आंकड़े

भोपाल   मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस की चुनावी प्रक्रिया पूरी हो गई है। पूरे प्रदेश से लगभग 16 लाख युवाओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली है। युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के लिए 18 प्रत्याशी मैदान में है। प्रदेश महासचिव पद के लिए 182 दावेदार है। संगठन का दावा है कि करीब दो महीने बाद नई कार्यकारिणी मिल जाएगी।युवा कांग्रेस के चुनाव में सबसे ज्यादा घमासान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के गृह जिले धार में देखने को मिला है। धार में युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के लिए सबसे ज्यादा 15 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। नए सदस्यों के दस्तावेजों की होगी जांच एमपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने बताया कि यूथ कांग्रेस के महासचिव के अलावा ब्लॉक अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष के दावेदारों को वोट किया। अब 16 लाख के करीब बनाए गए सदस्यों के दस्तावेजों की जांच होगी। दस्तावेजों में त्रुटि पाए जाने पर सदस्यता निरस्त की जाएगी। इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में करीब दो माह का समय लगेगा। करीब 2 महीने के बाद यूथ कांग्रेस को नया अध्यक्ष और नई कार्यकारिणी मिलेगी। प्रदेश अध्यक्ष पद पर प्रथम तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए आलाकमान दिल्ली बुलाएगा। इसके बाद नाम का ऐलान किया जाएगा। एक सदस्य ने छह वोट किए मध्य प्रदेश में युवा कांग्रेस संगठन चुनाव के लिए सदस्यता लेने और मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं। एमपी में 20 जून की सुबह 9 बजे से मतदान और सदस्यता प्रक्रिया शुरू हुई, जो 19 जुलाई की शाम तक चली। युवा कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महासचिव, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, जिला महासचिव के पद पर वोटिंग हुई। एक सदस्य ने छह वोट किए। प्रदेश अध्यक्ष के लिए ये दावेदार  युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कुल 18 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। जिनमें जावेद पटेल, योगिता सिंह, नीरज पटेल, गीता कड़वे, अभिषेक परमार, विश्वजीत सिंह चौहान, विनय पांडे, प्रमोद सिंह, प्रियेश चौकड़े, राजवीर कुड़िया, अब्दुल करीम सिद्दीकी, शुभंगाना राजे, आशीष चौबे, यश घनघोरिया, स्वीटी पाटिल, देवेंद्र सिंह दादू, शिवराज यादव, मोनिका मांडरे चुनावी मैदान में हैं। कमलनाथ के जिले में मुकाबला नहीं पूर्व सीएम कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा और पांढुर्णा ेमें युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष के लिए कोई मुकाबला नजर नहीं आया। दोनों जिलों में सिर्फ एक-एक उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा। हरदा में भी सिंगल केंडिडेट रहा। इन तीनों जिलों में निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाएंगे। दो महीने तक चलेगी स्क्रूटनी युवा कांग्रेस के चुनाव के लिए चलाए गए सदस्यता अभियान में नए मेंबर्स ने सदस्यता लेने के बाद 6 पदों के लिए मतदान किया है। ब्लॉक अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, जिला महासचिव, प्रदेश महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष का वोट डाले हैं। अब दो महीनों तक सभी वोटों की स्क्रूटनी होगी। इसमें ये देखा जाएगा कि वोट देने वाले ने अपने दस्तावेज अपलोड किए हैं या नहीं, मतदान के बाद वीडियो अपलोड किया है या नहीं। यदि मेंबरशिप फीस अदा नहीं की है तो वोट रिजेक्ट माना जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष के लिए त्रिकोणीय जंग युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा वोटिंग जबलपुर, भोपाल और ग्वालियर में हुई है। जबलपुर के विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे यश घनघोरिया प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। वहीं भोपाल के अभिषेक परमार और ग्वालियर के शिवराज यादव ने भी चुनाव जीतने के लिए पूरा दम लगाया है। युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के 19 उम्मीदवार     योगिता सिंह     जावेद पटेल     अभिषेक परमार     नीरज पटेल     गीता कडवे     प्रमोद सिंह     विश्वजीत सिंह चौहान     विनय पांडेय     राजवीर कुड़िया     प्रियेश चौकड़े     अब्दुल करीम कुरैशी     शुभांगना राजे जामनिया     आशीष चौबे     यश घनघोरिया     देवेंद्रसिंह दादू     स्वीटी पाटिल     शिवराज यादव     मोनिका मंडरे     राजीव सिंह प्रदेश महासचिव के लिए सबसे ज्यादा घमासान युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव के लिए सबसे ज्यादा घमासान मचा है। महासचिव के लिए 182 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। प्रदेश कार्यकारिणी में अध्यक्ष के साथ नौ उपाध्यक्ष होंगे। इनमें एसटी, एससी, ओबीसी, महिला, अल्पसंख्यक और एक दिव्यांग उपाध्यक्ष होगा। ,48 प्रदेश महासचिव बनेंगे युवा कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में 48 प्रदेश महासचिव बनाए जाएंगे। इनमें 17 महासचिव अनारक्षित वर्ग से होंगे। 3 एसटी, एससी, 5 ओबीसी, 5 अल्पसंख्यक, 11 महिला, 2 ओबीसी महिला, एक अल्पसंख्यक महिला, एक दिव्यांग और एक ट्रांसजेंडर को महासचिव बनाया जाएगा।  

OTT और वेबसाइट्स पर सेंसर का शिकंजा, 40 ऐप्स पर एक साथ बैन

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सॉफ्ट पॉर्न और एडल्ट कंटेंट दिखाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइट्स और ऐप्स को ब्लॉक करने का फैसला किया है। जिन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ ऐक्शन लिया गया है, उनमें उल्लू और ऑल्ट बालाजी (ALTT) जैसे कुछ चर्चित ओटीटी हैं। उल्लू के हाउस अरेस्ट शो के लेकर पिछले साल काफी बवाल भी हुआ था। सरकार की ओर से बताया गया कि यह ऐक्शन गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विधि मामलों के विभाग, उद्योग संगठनों (FICCI, CII) और महिला एवं बाल अधिकार विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निर्देश जारी करके सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से इन्हें ब्लॉक करने को कहा है। 'हाउस अरेस्ट' को लेकर हुआ था बवाल पिछले साल जुलाई-अगस्त में सरकार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से उल्लू और ALTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ शिकायतें मिली थीं। दूसरे प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ भी कई सार्वजनिक शिकायतें आई थीं। मंत्रालय द्वारा मई 2025 में हस्तक्षेप के बाद उल्लू ने ‘हाउस अरेस्ट’ वेब सीरीज को हटाया था। अश्लील कंटेट को लेकर दी गई थी चेतावनी सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस साल 19 फरवरी को सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को आईटी नियम, 2021 के तहत निर्धारित कोड ऑफ कंडक्ट और भारत में लागू अश्लीलता से संबंधित कानूनों का पालन करने की एडवाइजरी जारी की गई थी। इससे पहले सितंबर 2024 में सभी 25 प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया गया था। सरकार को दे रहे थे चकमा इसके बावजूद उन्होंने आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित करना जारी रखा। इसके अलावा, पहले से ब्लॉक किए गए पांच प्लेटफॉर्म्स ने नए डोमेन पर फिर से अश्लील कंटेंट दिखाना शुरू कर दिया। सरकार की चेतावनी के बाद उल्लू से 100 से अधिक वेब सीरीज हटाई गईं, लेकिन यह पाया गया कि प्लेटफॉर्म उन्हें अस्थायी रूप से हटाकर बाद में फिर से बिना एडिट किए प्रसारित कर देता था। कहानी नहीं, सिर्फ अश्लीलता सरकार का कहना है कि इन साइट्स और ऐप्स पर सेक्सुअल सीन्स और कई जगहों पर नग्नता दिखाई जाती थी, जिससे यह पोर्नोग्राफिक श्रेणी में आता है। कंटेंट में किसी भी प्रकार की ठोस कहानी, सामाजिक संदेश या थीम की कमी थी। ऐसे सीन्स सिर्फ व्यूरशिप के लिए दिखाए जाते थे और इसी वजह से इन्हें बैन किया है। इंटरनेट सर्विस कंपनियों को निर्देश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नोटिफिकेशन में इंटरनेट सर्विस देनी वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि प्रतिबंधित सामग्री होस्ट करने के लिए चिह्नित इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ऐप्स-वेबसाइटों की सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित करें। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि आईटी ऐक्ट 2000 और इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी (इन्टर्मीडीएरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत इन्टर्मीडीएरी यानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स की जिम्मेदारी है कि वे अवैध जानकारी को हटाएं या उसकी पहुंच को बंद करें। इन ऐप्स पर लगा बैन सरकार ने जिन पर बैन लगाया है उनके नाम हैं- देसीफ्लिक्स, बूमेक्स, निऑनएक्स वीआईपी, नवरसा लाइट, गुलाब ऐप, कंगन ऐप, बुल ऐप, शो हिट, जलवा ऐप, वाउ एंटरटेनमेंट, लुक एंटरटेनमेंट, हिटप्राइम, फुगी, फेनेओ, शोएक्स, सोल टॉकीज, अड्डा टीवी, ऑल्ट बालाजी (ALTT), हॉटएक्स वीआईपी, हलचल ऐप,मूडएक्स, ट्राईफ्लिक्स, उल्लू और मोजफ्लिक्स।

फतेहपुर विवाद: दिव्यांग के घर गिराने पर SDM पर गिरी गाज, सरकार ने किया सस्पेंड

फतेहपुर यूपी में फतेहपुर में दलित दिव्यांग परिवार का घर बुलडोजर से गिराने के मामले में कानूनगो जितेन्द्र सिंह और ट्रेनी लेखपाल पर ऐक्शन के बाद अब एसडीएम अर्चना अग्निहोत्री को भी सस्पेंड कर दिया। वह निलंबित रहने तक राजस्व परिषद से संबंध रहेंगी। उनके खिलाफ जांच लखनऊ कमिश्नर को दी गई है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज ने गुरुवार को यह आदेश जारी किया। आरोप हैं अर्चना ने मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं किया और अपने पद के दायित्वों का शिथिलतापूर्वक पालन किया। अर्चना अग्निहोत्री के निलंबन के बाद महकमे में सनसनी फैल गई। ऐसा माना जा रहा है कि मामले में संलिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी जल्द कार्रवाई संभव है। बता दें कि बरमतपुर प्रकरण को लेते हुए शासन ने कडी कार्रवाई करने का भरोसा दिया था। डीएम स्तर पर कानून गो जितेन्द्र सिंह और ट्रेनी लेखपाल आराधना देवी के निलंबन के बाद से मामले में अफसरों व अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई होने की बात सामने आ रही थी। खास कर टीम गठित करने वाले तहसीलदार समेत उसमें शामिल अधिकारी कर्मचारी राडार पर थे। खास कर सदर एसडीएम व तहसीलदार पर कार्रवाई की तलवार लटक रही थी। एसडीएम के बाद अब तहसीलदार व अन्य लेखपाल जद में आ सकते है। वहीं नायब तहसीलदार कांधी के खिलाफ राजस्व परिषद को हुई लिखापढ़ी पर भी जल्द कार्रवाई का आदेश आने की उम्मीद है। वहीं विधायक जयकुमार जैकी का कहना है कि दलित परिवार को बेघर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सूबे में मिशाल बनेगी। शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रकरण में ढहाने का आदेश देने वाले अफसर भी खुद को बचा नहीं पाएंगे। दिया भरोसा हम साथ हैं: ब्लाक प्रमुख गुरुवार को अमौली ब्लाक प्रमुख सुशीला देवी बरमतपुर गांव पहुंच पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने ढहाए गए घर और मलबे के नीचे दबी गृहस्थी को देखते हुए अफसरों की कार्रवाई की निंदा की। पी़ड़ितों को भरोसा दिया कि वह मुसीबत की घड़ी में परिवार के साथ है। उन्होंने परिवार को राशन सामग्री समेत जरूरत का सामान सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होने का भरोसा दिया।