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दिल्ली में दर्दनाक हादसा: होटल में आग से मचा कोहराम, जांच के आदेश

नई दिल्ली  दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में मंगलवार सुबह एक होटल में भीषण आग लग गई। इस घटना में अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी हैं। घायलों का इलाज आसपास के अस्पतालों में चल रहा है। आग लगने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। देखते ही देखते आग की लपटों ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया। मौके पर पहुंची दमकल की कई गाड़ियां घंटों तक आग पर काबू पाने में जुटीं, जबकि पुलिस ने इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस भयावह घटना ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। धुएं के गुबार और चीख-पुकार से दहला इलाका प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगते ही इमारत से काले धुएं के घने गुबार उठने लगे। रेस्टोरेंट और आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। मौके पर चीख-पुकार का माहौल बन गया, जबकि कई लोग इमारत के भीतर फंसे लोगों को बचाने की कोशिश करते दिखाई दिए। पूरे इलाके को सुरक्षा कारणों से घेर लिया गया और राहत-बचाव अभियान शुरू किया गया। सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को सुबह 9:45 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। मालवीय नगर के एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही बचाव दल की टीम को एक्टिव कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इमारत के निचले हिस्से में होटल/रेस्टोरेंट चल रहा था और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग वहीं से शुरू हुई। आग के कारणों की जांच की जा रही है। बिजली सप्लाई बंद कर आग पर पाया गया काबू राहत कार्य के दौरान बिजली विभाग ने तत्काल इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी, जिससे आग को फैलने से रोकने में मदद मिली। दमकल कर्मियों और अन्य एजेंसियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रशासन ने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है, जहां उनका उपचार जारी है। अधिकारियों के अनुसार कुछ लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की होगी जांच मालवीय नगर के विधायक सतीश उपाध्याय ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि प्रशासन और सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि रेस्टोरेंट या होटल निर्धारित नियमों और लाइसेंस शर्तों के तहत संचालित हो रहा था या नहीं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

RIMS में 75 से अधिक कर्मियों की भर्ती पर उठे सवाल, एसीबी जांच की मांग से मचा हड़कंप

 रांची  राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत समानता एजेंसी द्वारा बहाल किए गए करीब 75 से अधिक कर्मियों से कथित अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में रिम्स निदेशक को एक लिखित शिकायत सौंपकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई है और यह प्रक्रिया अब भी जारी है। यह शिकायत शासी परिषद के सदस्य संजय सेठ के प्रतिनिधि ने शिकायत कर खुलासा किया है। मालूम हो कि इससे पहले भी बुंडू ट्रामा सेंटर में आउटसोर्स के माध्यम से बहाली में पैसे लेने का मामला आया था जिस पर कानूनी कार्रवाई चल रही है और और एक कर्मचारी अजय सेठ को भी हटाया गया है शिकायत क बाद निदेशक डा. राजकुमार ने जांच कमेटी गठित किया है। उधर समानता एजेंसी की और से इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। प्राप्त शिकायत के अनुसार रिम्स में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत मानव बल उपलब्ध कराने के लिए एम-एस समंता सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर आपरेटर, लिफ्ट अपरेटर, मल्टी टास्किंग स्टाफ (वार्ड बाय), लैब टेक्नीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ समेत अन्य पदों पर मानव बल उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया है। एजेंसी को करीब 1000 मानव बल नियुक्त करना है, लेकिन अभी भी कई पद खाली रखे गए हैं। नियुक्ति के बदले लाखों रुपये लेने का आरोप शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि चयनित अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की राशि ली गई। आरोप है कि यह रकम संबंधित रिक्त पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित कराने के एवज में वसूली गई। शिकायतकर्ता ने कहा है कि कई युवाओं ने रोजगार पाने की उम्मीद में जमीन, गहने तक बेच दिए या कर्ज लेकर राशि का भुगतान किया। पत्र में कहा गया है कि बेरोजगारी और सीमित रोजगार अवसरों का लाभ उठाकर युवाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। आरोप है कि आउटसोर्स व्यवस्था में मानव बल रखने के नाम पर एक संगठित रैकेट काम कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जा रही है। अधिकारियों को जानकारी होने का भी आरोप इस कथित वसूली की जानकारी आउटसोर्स व्यवस्था से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को है। दावा किया गया है कि इस विषय की जानकारी मौखिक रूप से संस्थान स्तर पर पहले भी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामले की सूचना रिम्स के तत्कालीन और वर्तमान प्रशासनिक पदाधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नियुक्तियों की पारदर्शिता और संस्थान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। बताया जा रहा है कि अगर प्रबंधन सही से जांच करती है और सभी कर्मियों के रोजगार की सुरक्षा का वादा करती है तो सभी ऐसे पीड़ितों का नाम सामने लाया जाएगा। किन-किन पदों का किया गया उल्लेख शिकायत में जिन पदों पर कथित रूप से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से मानव बल रखने और अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से :     नर्सिंग स्टाफ     कंप्यूटर अपरेटर     वार्ड बाय     मल्टी टास्किंग स्टाफ     लिफ्ट आपरेटर     लैब टेक्नीशियन     पैरामेडिकल स्टाफ     अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन पदों के अलावा भी अन्य श्रेणियों में आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती की गई है, जिसकी जांच आवश्यक है। एसीबी जांच की मांग शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), झारखंड से कराई जाए। नियुक्ति प्रक्रिया, चयन सूची, भुगतान विवरण, एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच हुए लेन-देन की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। यह भी मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों से कथित रूप से राशि ली गई है, उन्हें राहत प्रदान की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर फिर उठे सवाल यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि नियुक्ति के बदले पैसे लेने जैसे आरोप सही साबित होते हैं तो इसका सीधा असर सेवा की गुणवत्ता पर पड़ता है। योग्यता के बजाय पैसे के आधार पर चयन होने की स्थिति में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आउटसोर्स एजेंसियों के चयन, नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की मेरिट सूची और कार्य आवंटन की नियमित आडिट व्यवस्था होनी चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। अब निगाहें रिम्स प्रशासन पर शिकायत पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा शासी परिषद से जुड़े पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें रिम्स प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि

चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हलचल, आयोग ने विभागों से मांगा जरूरी डेटा

जयपुर राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण संबंधी नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है. आयोग का मानना है कि आवश्यक डेटा मिलते ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा. विभागों से मांगे आंकड़े राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जरूरी आंकड़े मांगे हैं.  आयोग का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है. आयोग ने विभागों को स्पष्ट किया है कि डेटा उपलब्ध होते ही चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा. आयोग को कोर्ट में देना है जवाब उल्लेखनीय है कि चुनाव में देरी को लेकर आयोग को न्यायालय में भी जवाब देना पड़ा था.  15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने को प्रमुख कारण बताया था. राज्य सरकार की ओर से पहले ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, लेकिन निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंतिम और प्रमाणित आंकड़ों की आवश्यकता है.  यही वजह है कि विभागों से एक बार फिर विस्तृत डेटा मांगा गया है. पंचायत और निकाय चुनाव लंबित राजस्थान में पंचायत राज और नगरीय निकायों के चुनाव काफी समय से लंबित हैं. ऐसे में आयोग के ताजा पत्राचार के बाद चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.  अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आयोग को मांगा गया डेटा कब तक उपलब्ध कराती है क्योंकि इसी पर चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय होगी.

महिला शिक्षिकाओं को नजदीकी पंचायत में पोस्टिंग, पुरुष शिक्षकों का भी होगा ट्रांसफर

पटना बिहार में अपने तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया है कि जून के महीने में टीचरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग होगी। मंगलवार को शेखपुरा में एक कार्यक्रम में मौजूद सीएम सम्राट चौधरी ने यह भी बताया है कि पुरुष और महिला टीचरों की कहां पोस्टिंग होगी। सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्होंने निर्देश दिया है कि जो महिला शिक्षिका हैं उन्हें बगल वाले पंचायत में पोस्टिंग मिलेगी। सम्राट चौधरी ने कहा, 'आपकी चिंता सरकार की चिंता है। हमने शिक्षकों को कहा है कि जून के महीने में सभी का ट्रांसफर होगा। जो महिला शिक्षिका हैं उनको उनके पंचायत के बगल वाले पंचायत में पोस्टिंग किया जाए। जो पुरुष शिक्षक हैं उनको बगल के प्रखंड में ट्रांसफर कर दिया जाए। पूरी व्यवस्था उनके घर में रहे। वो घर से जाकर हमारे बच्चों को पढ़ाने का काम कर सकें। हम उनको घर का किराया नहीं दे रहे हैं लेकिन हम व्यवस्था को लेकर उनके साथ खड़े होना चाहते हैं। हमारी शिक्षा की व्यवस्थाा सुदृढ़ हो उसको आगे बढ़ाना है।' छात्रों-अभिभावकों की शिकायतों का 30 दिन में होगा निपटारा- शिक्षा मंत्री इधर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों का हर हाल में अधिकतम 30 दिनों के अंदर समाधान करना होगा। निष्पादन नहीं कर सकने की स्थिति में कारण बताना होगा। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से छात्रवृत्ति, नामांकन, प्रमाण पत्र, विद्यालय संबंधी शिकायतों एवं अन्य शैक्षणिक समस्याओं का समाधान अधिक सरल और सुगम हो सकेगा। शिक्षा विभाग ने इसको लेकर एसओपी बनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत सारी शिकायतों की कैटेगरी बनायी जा रही है। इसके बाद उनके निष्पादन के लिए दिनों का निर्धारण किया जाएगा। इसमें यह बताया जाएगा कि किस शिकायत का निष्पादन कितने दिनों में किया जाएगा। किसी प्रकार की शिकायत को किसी सूरत में लंबित नहीं रखा जा सकेगा। शिक्षा विभाग ने तैयार किया है सिंगल विंडो सिस्टम छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की सारी समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर करने के लिए शिक्षा विभाग ने सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किया है। विभाग की ओर से टोल-फ्री नंबर 14417 और 18003454417 जारी किया जा चुका है। इन नंबरों पर आमजन शिक्षा, शिक्षण व्यवस्था, छात्र-छात्राओं तथा विद्यालय संबंधी शिकायतें एवं समस्याएं दर्ज कर सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनहितकारी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। अब विद्यार्थी और अभिभावक टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे, जिनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिपोर्ट करेंगे हार्दिक पांड्या, अफगानिस्तान सीरीज से पहले तैयारी तेज

नई दिल्ली  IND vs AFG ODI: भारतीय टीम और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट और तीन वनडे मैच की सीरीज कुछ ही दिन बाद खेली जाएगी। एकमात्र टेस्ट 6 जून से शुरू होगा, वहीं वनडे सीरीज 13 जून से होगी। बीसीसीआई ने दोनों फॉर्मेट के लिए भारतीय टीम का एलान पहले ही कर दिया है, जहां वनडे टीम में हार्दिक पांड्या और रोहित शर्मा को शामिल किया गया है, लेकिन बोर्ड ने ये भी बताया कि दोनों का खेलना फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर करेगा। अफगानिस्तान वनडे सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली की उपलब्धता पर एक बड़ा भी अपडेट सामने आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्दिक बेंगलुरु में बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी CoE पहुंचने वाले है। वो वहां एक हफ्ता बिताएंगे और फिर अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम से जुड़ेंगे। Rohit-Hardik को लेकर क्या अपडेट? रिपोर्ट में कहा गया कि बीसीसीआई ने हार्दिक और रोहित दोनों को CoE में रिपोर्ट करने को कहा था, लेकिन रोहित को फिलहाल कोई अपडेट नहीं सामने आया है। IND vs AFG ODI 2026: भारत की वनडे टीम इस प्रकार- शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या, नीतीश कुमार रेड्डी, वाशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे। अफगान टेस्ट से पहले बुलाए गए नेट बॉलर्स जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी डार को टीम मैनेजमेंट ने 6 जून से शुरू हो रहे अफगानिस्तान टेस्ट से पहले नेट्स में बॉलिंग के लिए बुलाया है। आकिब को टेस्ट टीम में नहीं चुने जाने पर काफी सवाल उठे थे। उनके साथ 6 और गेंदबाजों को भी नेट्स के लिए बुलाया गया है।  

झारखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला, रांची-बिहार तक फैला नेटवर्क सामने आया

जमशेदपुर सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में चार हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का बड़ा घोटाला सामने आया है। रसुनिया, रुचाप और चौका जैसी पंचायतों से ये कंप्यूटर जनरेटेड सरकारी प्रमाण पत्र धड़ल्ले से बांटे गए। हैरानी की बात यह है कि इनमें सबसे ज्यादा प्रमाणपत्र रांची जिले के लोगों के हैं। इसके अलावा पड़ोसी राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल के निवासियों को भी फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। भंडाफोड़ होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू तो की, लेकिन अब इसकी रफ्तार इतनी धीमी हो गई है कि लोगों को लीपापोती का डर सताने लगा है। ऐसे खुला घोटाले का राज इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा मई के पहले हफ्ते में हुआ। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के संस्थापक राकेश रंजन महतो ने रुचाप पंचायत में पश्चिम बंगाल (बाघुड़िया) के एक व्यक्ति को पकड़ा। वह व्यक्ति प्रखंड के कंप्यूटर ऑपरेटर राकेश गुप्ता को पैसे देकर अपना फर्जी जन्म प्रमाण पत्र लेकर लौट रहा था। शिकायत के बाद अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने जांच के आदेश दिए। पंचायत सचिवों और ऑपरेटर राकेश गुप्ता से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। लेकिन इसके बाद से ही ऑपरेटर राकेश गुप्ता इलाके से गायब है और जांच ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। सरकारी प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल नियम के मुताबिक, एक साल से अधिक उम्र के व्यक्ति का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन, पंचायत स्तर पर वेरिफिकेशन, प्रखंड कार्यालय की जांच और अंत में अनुमंडल कार्यालय की मंजूरी अनिवार्य होती है। बड़ा सवाल यह है कि इतनी सख्त और लंबी प्रक्रिया होने के बावजूद चार हजार फर्जी आवेदन कैसे पास हो गए? स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि इतना बड़ा खेल बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के नहीं चल सकता। सिर्फ निचले कर्मचारियों को मोहरा बनाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है। इस मामले को लेकर हाल ही में राजनीतिक दलों ने भी धरना-प्रदर्शन कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे कांड झारखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया और बोकारो में भी बिल्कुल ऐसा ही रैकेट पकड़ा गया था। वहां भी बाहरी लोगों को झारखंड का निवासी बनाने के लिए हजारों फर्जी प्रमाणपत्र बेचे गए थे। चाकुलिया मामले में पंचायत सचिव और प्रज्ञा केंद्र संचालकों समेत पांच लोग जेल जा चुके हैं। इसके बावजूद चांडिल प्रशासन ने पुरानी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। अब जनता इस पूरे गिरोह के पर्दाफाश और सख्त कार्रवाई का इंतजार कर रही है। मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। -तालेश्वर रविदास, प्रखंड विकास पदाधिकारी, चांडिल  

नॉर्वे चेस में आर प्रज्ञानंद का शानदार प्रदर्शन जारी, कार्लसन को लगातार दूसरी बार दी मात

 नई दिल्ली नॉर्वे चेस 2026 के आठवें दौर में आर प्रज्ञानंद ने एक बार फिर वर्ल्ड नंबर 1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ दमदार खेल दिखाया है। 20 साल के चेन्नई के इस ग्रैंडमास्टर ने 3 जून को कार्लसन को फिर से हराकर इतिहस रचा। प्रज्ञानंद ने इसी टूर्नामेंट के राउंड 3 में भी नॉर्वे के कार्लसन को हराया था। इस तरह 19 साल में ये पहली बार देखने को मिला है जब नॉर्वे के वर्ल्ड नंबर 1 को एक ही क्लासिकल टूर्नामेंट में एक ही खिलाड़ी ने दो बार हराया है। इससे पहले साल 2007 में लिनारेस टूर्नामेंट में भारतीय दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने कार्लसन को दो बार हराया था। इतना ही नहीं, खास बात ये भी है कि प्रज्ञानानंदा ने 2024 के नॉर्वे चेस में भी कार्लसन को मात दी थी। R Praggnanandhaa ने कार्लसन पर दर्ज की दूसरी जीत दरअसल, आर प्रज्ञानंद के हाथों मिली हार के बाद कार्लसन काफी परेशान नजर आए। उन्होंने अपना सिर हिलाया और इस युवा भारतीय से एक बार फिर हारने के बाद तुरंत खेल की जगह से बाहर चले गए। इस हार से नॉर्वे के कार्लसन का खिताब बचाना मुश्किल हो गया। वहीं, इस जीत के साथ प्रज्ञानंद के 12 अंक हो गए हैं और वो टेबल में तीसरे नंबर पर आ गए हैं। अभी दो राउंड बाकी हैं और वो खिताब की रेस में बने हुए हैं। वहीं वेस्ले सो 14 प्वाइंट के साथ टॉप पर हैं। अलीरेजा फिरोजा 13 पॉइंट के साथ दूसरे नंबर पर हैं। डी गुकेश की खिताब की उम्मीदें लगभग खत्म फिरोजा ने वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश को हराकर उनकी खिताब की उम्मीदें लगभग खत्म कर दी हैं। लेकिन प्रज्ञानंद के लिए ये सही समय पर बनी लय है। कार्लसन के खिलाफ लगातार जीत से वो इस टूर्नामेंट के सबसे बड़े स्टार बन गए हैं। इतनी बड़ी कामयाबी के बाद भी 20 साल के प्रज्ञानंद शांत रहे और मैच के बाद उन्होंने कहा, "मैग्नस को हराने से ज्यादा जरूरी है कि इस टूर्नामेंट में मैच जीता जाए। इस समय यही अहम है। मैं खुश हूं कि मैं ये कर पाया। उन्होंने मैच के दौरान कार्लसन के जज्बे की भी तारीफ की और माना कि उसे हराना कितना मुश्किल था। प्रज्ञानंद ने कहा, "नहीं, वो सच में बहुत अच्छा खेल रहे थे और बेहतरीन डिफेंस कर रहे थे। मुझे लगता है कि कई दूसरे खिलाड़ी यहां-वहां छोटी पोजिशनल गलतियां कर देते, लेकिन वो लगातार सही चालें चल रहे थे। एक समय तो मुझे सच में लगा कि ये गेम ड्रॉ हो जाएगा। ये हैरानी की बात थी कि उन्होंने ऐसी गलती की, क्योंकि उससे पहले तक उन्होंने बहुत अच्छा बचाव किया था। कुल मिलाकर मुझे लगता है कि मैं अच्छा खेल रहा हूं। बस टाइम स्क्रैम्बल मेरे हिसाब से नहीं रहे। तो मैं कोशिश करूंगा कि घड़ी में ज्यादा समय रखूं और पिछले कुछ मैचों की तरह ही खेलता रहूं। मैं कल आराम करने की कोशिश करूंगा और फिर आखिरी राउंड्स के लिए पूरे जोश के साथ वापसी करूंगा।"

Xiaomi 17T भारत में लॉन्च से पहले चर्चा में, कीमत और फीचर्स लीक

जून महीने की शुरुआत एक पावरफुल फोन की लॉन्चिंग के साथ हो रही है. शाओमी भारत में 4 जून को अपना Xiaomi 17T लॉन्च करने जा रहा है. कंपनी इसकी लॉन्चिंग डेट को पहले ही कंफर्म कर चुका है. कंपनी ने इसका पोस्टर जारी कर चुकी है, जिसमें हैंडसेट को पर्पल कलर में दिखाया गया है. बैक पैनल पर ट्रिपल कमरा सेटअप दिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स में टिप्स्टर्स के हवाले से बताया गया है कि भारत में Xiaomi 17T को करीब 65 हजार से 70 हजार रुपये में लॉन्च किया जाएगा, हालांकि अभी तक कंपनी ने इस कीमत को कंफर्म नहीं किया है. यह एक पावर परफॉर्मेंस स्मार्टफोन है, जिसमें कई अच्छे फीचर्स और कैमरा आदि देकने को मिलेगा. हालांकि ऑफिशियली तौर पर फीचर लॉन्चिंग के बाद ही पता चलेंगे. ग्लोबल मार्केट में यह करीब 749 यूरो (करीब 83 हजार रुपये) में लॉन्च हो सकता है. Xiaomi 17T के भारत में दो वेरिएंट लॉन्च होंगे Xiaomi 17T को भारत में 65 हजार रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया जा सकता है, जिसमें 12 जीबी रैम और 256जीबी इंटरनल स्टोरेज मिलती है. हालांकि टॉप एंड वेरिएंट में 512जीबी स्टोरेज मिलेगी, जिसकी कीमत की जानकारी कंपनी ने शेयर नहीं की है. शाओमी 17T में 6500mAh की सिलिकॉम कार्बन बैटरी मिलेगी, जो 67W हाइपर चार्ज के साथ आएगा. ऑफिशियल पोर्टल पर बैटरी की जानकारी को ऑफिशियल कर दिया है, जिससे पता चलता है कि इसमें बड़ी बैटरी मिलेगी. शाओमी 17T का प्रोसेसर शाओमी के ऑफिशियल पोर्टल के मुताबिक, शाओमी 17T में डाइमेंसिटी 8500 अल्ट्रा चिपसेट का इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी ने बैक पैनल को दिखाया है, जिसमें साफ पता चलता है कि यह हैंडसेट पर्पल कलर वेरिएंट में लॉन्च होगा. इसमें बैक पैनल पर ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा, जिसको Leica ने ट्यून किया है. लीक्स रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा सेंसर है. 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस और 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस है, जिसमें 5X ऑप्टिकल जूम की खूबी मिलता है. कंपनी की तरफ से 32 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया गया है. Xiaomi 17T के स्पेसिफिकेशन्स Xiaomi 17T में 6.59 इंच का 1.5K रेजोल्युशन डिस्प्ले दिया है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट्स का डिस्प्ले दिया गया है. इसमें एचडीआर 10 प्लस, डॉल्बी विजन और फुल डीसीआई पी3 कलर गमेट कवरेज का इस्तेमाल किया गया है. इसमें 3500 की पीक ब्राइटनेस मिलेगी.

हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए बेस्ट ऑप्शन? जानिए Dylect NutriPro Slow Press Juicer का रिव्यू

आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ जिम और डाइट तक सीमित नहीं है. लोग अब घर पर फ्रेश और न्यूट्रिशन से भरपूर जूस बनाना चाहते हैं. लेकिन ज्यादातर घरों में जो जूसर होते हैं वो मिक्सर वाले सेटअप के साथ आते हैं. यानी इन जूसर से सभी फलों के जूस को नहीं निकाला जा सकता है. ऐसे जूसर का विकल्प स्लो जूसर हैं. क्योंकि मिक्सर-ग्राइंडर वाले सेटअप से जूस नहीं बल्कि फलों का पेस्ट निकलता है. यही वजह है कि स्लो प्रेस और कोल्ड प्रेस जूसर्स तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. इन्हीं में से एक है डायलेक्ट न्यूट्रीप्रो स्लो प्रेस जूसर (Dylect NutriPro Slow Press Juicer), जो हाल में भारत में लॉन्च हुआ है. डायलेक्ट ने इस प्रोडक्ट के साथ किचन अप्लायंसेस की कैटेगरी में भी एंट्री की है. कंपनी कहती है कि ये जूसर सिर्फ जूस नहीं बनाता, बल्कि फलों और सब्जियों के पोषण को बेहतर तरीके से बचाकर रखता है. पिछले कुछ दिनों से हम इसे इस्तेमाल कर रहे हैं. आइए जानते हैं ये जूसर कितना दमदार है. डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी डायलेक्ट का ये स्लो जूसर पहली नजर में काफी प्रीमियम और कॉम्पैक्ट महसूस होता है. इसका मोटर यूनिट थोड़ा भारी जरूर है, लेकिन इसी वजह से इस्तेमाल के दौरान मशीन स्टेबल रहती है. डिजाइन मॉडर्न किचन अप्लायंस के साथ फिट बैठता है. यानी ये आपके मॉडर्न किचन का हिस्सा आसानी से बन जाएगा और ज्यादा जगह भी नहीं घेरता है.Dylect बॉक्स में कंपनी ने यूजर मैन्युअल, क्विक असेंबली गाइड, रेसिपी बुक, क्लीनिंग ब्रश, दो कंटेनर और पुशर दिया हैं. रेसिपी बुक में आपको कई जूस कॉम्बिनेशन के अच्छे आइडिया मिल जाएंगे. इन्हें आप ट्राई कर सकते हैं. इस स्लो जूसर की असेंबली काफी आसान है. इसमें लॉकिंग सिस्टम दिया गया है, जिसकी वजह से अगर ढक्कन सही तरीके से बंद नहीं होगा, तो मशीन स्टार्ट नहीं होगी. ये एक अच्छा सेफ्टी फीचर है. अगर आपको इसकी असेंबली में दिक्कत आ रही है, तो आप बॉक्स में मिलने वाले क्यूआर कोड्स को स्कैन करके उसका प्रॉसेस देख सकते हैं. कैसा रहा एक्सपीरियंस? जूसर को सेटअप करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. सभी पार्ट्स आसानी से फिट हो जाते हैं और एक बार लॉक हो जाने पर मशीन मजबूत तरीके से काम करती है. फल और सब्जियां ऊपर से डालनी होती हैं और जरूरत पड़ने पर पुशर का इस्तेमाल किया जा सकता है. मशीन में दो अलग आउटलेट दिए गए हैं. एक से आपको फ्रेश जूस मिलेगा, जबकि दूसरे से वेस्ट पल्प बाहर आता है. जूसर में एक सिंपल स्विच दिया गया है, जिसमें ऑन-ऑफ और एक रिवर्स बटन मिलता है. रिवर्स बटन का इस्तेमाल आप तब कर सकते हैं, जब कोई फल या सब्जी अंदर फंस जाए. इस जूसर से आप नट मिल्क और कोकोनट मिल्क भी तैयार कर सकते हैं.Dylect रफॉर्मेंस कैसी है? डायलेक्ट का ये स्लो जूसर धीरे-धीरे जूस निकालता है. इसमें हाई-स्पीड ब्लेड्स वाली गर्मी पैदा नहीं होती, इसलिए जूस ज्यादा फ्रेश और नैचुरल लगता है. मौसंबी और तरबूज जैसे फलों के साथ मशीन काफी स्मूद काम करती है. वहीं गाजर और चुकंदर जैसी हार्ड सब्जियों पर मोटर थोड़ा ज्यादा आवाज करता है, लेकिन जूस निकालने में दिक्कत नहीं होती. सबसे अच्छी बात ये है कि पल्प काफी ड्राई निकलता है, यानी मशीन फलों से अच्छा-खासा जूस एक्सट्रैक्ट कर लेती है. इस मशीन की सफाई करना आसान है. कंपनी ने अलग ब्रश दिया है, जिससे फिल्टर और अंदरूनी हिस्से साफ किए जा सकते हैं. अगर आपको इंस्टेंट और बहुत बड़ी मात्रा में जूस बनाना है, तो ये थोड़ा स्लो महसूस हो सकता है. बॉटम लाइन डायलेक्ट न्यूट्रीप्रो स्लो प्रेस जूसर (Dylect NutriPro Slow Press Juicer) उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है, जो घर पर हेल्दी और फ्रेश जूस चाहते हैं. इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन, आसान असेंबली और न्यूट्रिशन-फोकस्ड स्लो प्रेस टेक्नोलॉजी इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए काफी उपयोगी बनाती है. इस जूसर की कीमत 12,999 रुपये है. हालांकि, डिस्काउंट ऑफर के साथ आप इसे लगभग 10 हजार के बजट में खरीद सकते हैं. कई लोगों को ये डिवाइस महंगा लग सकता है. अगर आप अपनी हेल्थ पर इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो डिवाइस को खरीद सकते हैं.

खोड़ा में पुलिस-प्रशासन का बड़ा एक्शन, 600 अपराधियों का किया गया सत्यापन

गाजियाबाद यूपी के गाजियाबाद में पुलिस-प्रशासन का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' जारी है. सूर्या हत्याकांड के बाद खोड़ा इलाके को अपराध मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे इस ऑपरेशन के तीसरे और फाइनल दिन मंगलवार को तीन अवैध मदरसों को सील कर दिया. वक्फ निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा. पुलिस ने घर-घर जाकर 600 अपराधियों का सत्यापन किया, संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और पुराने बदमाशों से अपराध न करने की शपथ दिलवाई. खोड़ा के तीन अवैध मदरसे किए गए सील आपको बता दें कि गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे रविन्द्र गौड़, डीएम रविन्द्र एम और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कैलाश चन्द्र तिवारी की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन की अगुवाई की. मोहल्ले-मोहल्ले जाकर अपराधियों की शिनाख्त की गई और कानूनी एक्शन लिया गया. इन सबके बीच प्रशासन की टीम ने खोड़ा के मदरसा रहमानिया अरबिया कासिम-उल उलूम (मोहल्ला बीरबल), सुल्तान अलारफीन मदरसा और एक अन्य मदरसे को सील कर नोटिस चस्पा कर दिया है. यह कार्रवाई मदरसों के गैर-मान्यता प्राप्त होने, अवैध संचालन, कार्यालय में पंजीकृत न होने और परिसर में अग्निशमन व विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी (NOC) न होने के कारण की गई. संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. अपराधियों का सत्यापन और थानों में ली शपथ 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' का असर अब पूरे गाजियाबाद जिले में दिखने लगा है. खोड़ा कॉलोनी में घर-घर जाकर 3 दिन के अंदर 600 अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर्स का वेरिफिकेशन किया गया. इसके अलावा, साहिबाबाद, इंदिरापुरम और खोड़ा थानों में करीब 150 पुराने अपराधियों को बुलाकर चेतावनी दी गई, जिसके बाद करीब 80 लोग तख्ती लेकर साहिबाबाद थाने पहुंचे और भविष्य में कभी अपराध न करने की शपथ ली. संदिग्ध किराएदारों की जांच और असद के घर पर नोटिस खोड़ा के घने आबादी वाले इलाके में बिना वेरिफिकेशन के रह रहे किराएदारों और कमर्शियल जगहों की लिस्ट खंगालकर चेकिंग चलाई जा रही है. मुख्य आरोपी असद के घर के दरवाजे पर एसडीएम (SDM) का नोटिस लगा है, जिसे सोमवार को कुछ लोगों ने तोड़ने की कोशिश की थी. पड़ोसी ललित के मुताबिक असद के पिता नवाब ने यह मकान 6 महीने पहले किसी डीलर को बेच दिया था, लेकिन असद कभी-कभार गली में आया करता था. असद के मददगार गिरफ्तार, सारिक मेवाती फरार पुलिस ने इस मामले में गहराई से जांच करते हुए कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है और कुछ को छोड़ दिया गया है. मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर के बाद पुलिस ने साजिश रचने और मदद करने के आरोप में उसके पिता नवाब, फरहान और आतिफ को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, मामले का एक अन्य आरोपी सारिक मेवाती अभी भी पुलिस की गिरफ्त से फरार है.