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वरुण धवन मंदिर में शॉर्ट्स-बनियान पहनकर पहुंचे, वायरल वीडियो पर फैंस में बहस

वरुण धवन इन दिनों अपनी फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' को लेकर सुर्खियों में हैं. वरुण की ये फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. फिल्म रिलीज से पहले वरुण ने मंदिर जाकर फिल्म की सक्सेस को लेकर प्रार्थना की. लेकिन वरुण ने इस दौरान एक ऐसी गलती करदी, जिसके बाद से वो ट्रोल्स के निशाने पर आ गए हैं. वरुण पर क्यों भड़के लोग? दरअसल, वरुण धवन शॉर्ट्स और बनियान पहनकर मंदिर से बाहर निकलते हुए दिखाई दिए. उन्होंने माथे पर तिलक भी लगाया हुआ है. मंदिर से बाहर निकलते हुए उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. वरुण ने मंदिर के बाहर मौजूद पैप्स को प्रसाद भी बांटा और फैंस संग तस्वीरें भी क्लिक कराईं. वरुण धवन को भक्ति में डूबा देखकर उनके फैंस खुशी से गदगद नजर आए. लेकिन शॉर्ट्स और बनियान पहनकर मंदिर जाने पर कुछ लोग एक्टर को जमकर ट्रोल कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- मंदिर जाने का ये कौन सा तरीका है? दूसरे ने लिखा- मंदिर जाते वक्त तो सही से कपड़े पहनने चाहिए. कुछ ने कहा कि बॉलीवुड स्टार्स भी हॉलीवुड कल्चर अपनाते जा रहे हैं. रिलीज से पहले फिल्म पर विवाद वरुण धवन इस समय अपनी आने वाली फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' की रिलीज की तैयारियों में बिजी हैं. वो फिल्म का जमकर प्रमोशन कर रहे हैं. डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में पूजा हेगड़े, मृणाल ठाकुर भी अहम रोल में दिखाई देंगी. हालांकि, रिलीज से फिल्म अपनी स्टोरीलाइन और गानों लेकर विवादों में है. दरअसल, वाशु भगनानी ने दावा किया है कि फिल्म का 'चुनरी चुनरी' सॉन्ग उनकी आइकॉनिक हिट फिल्म बीवी नंबर 1 से उनकी बिना परमिशन के इस्तेमाल किया गया है. मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि विवादों के बीच रिलीज होने जा रही फिल्म को दर्शकों का कैसा रिस्पॉन्स मिलेगा. 

अग्निकांड पर सीएम रेखा गुप्ता का बयान, पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन

नई दिल्ली  दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक रेस्टोरेंट में बुधवार सुबह भीषण आग लग गई। जिसमें अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायलों को बाहर निकाला जा चुका है। अब इस हादसे पर पीएम मोदी व दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हादसे में मृतक को परिजनों को मुआवजे का ऐलान किया गया है। दिल्ली मोदी ने मालवीय नगर अग्निकांड पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, 'अपनों को खोने वाले सभी लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। अधिकारी प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।' पीएम मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान इसके साथ ही पीएमएनआरएफ से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे। मालवीय नगर अग्निकांड पर सीएम रेखा गुप्ता ने क्या बताया? सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'मालवीय नगर में हुई भीषण अग्निकांड की घटना में हुई जनहानि से मैं अत्यंत दुखी हूं। शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने तथा इस हृदयविदारक त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों को शक्ति और साहस प्रदान करने की प्रार्थना करती हूं।' 'मौके पर आपातकालीन एजेंसियां मौजूद' मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा, 'दिल्ली पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), CATS एम्बुलेंस सेवा तथा अन्य आपातकालीन एजेंसियों की टीमों को तत्काल सक्रिय किया गया और उन्होंने बचाव एवं राहत कार्य शुरू कर दिया गया था। उनकी त्वरित कार्रवाई के कारण प्रभावित परिसर से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उनका सफलतापूर्वक बचाया गया है। ' रेखा गुप्ता ने आगे कहा, 'दिल्ली सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रभावित परिवारों को हर संभव चिकित्सा सहायता और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इस दुख की घड़ी में दिल्ली सरकार प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। हम इस त्रासदी से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' प्रशासन ने क्या कहा? मालवीय नगर के एसडीएम जितेंद्र कुमार ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया, 'जैसे ही आज सुबह मुझे यह जानकारी मिली, हमने अपनी टीम को सक्रिय किया और वहां से सभी बलों को सूचित किया। उन्हें घटनास्थल पर रवाना कर दिया गया। मुझे ट्रेनिंग पर जाना था, लेकिन मैं ट्रेनिंग छोड़कर घटनास्थल पर पहुंचा। हमें जानकारी मिली कि इस इमारत के नीचे एक रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चला है, लेकिन आशंका है कि उस रेस्टोरेंट की वजह से ही आग लगी है।' उन्होंने आगे बताया, 'अब तक कुछ शव बरामद कर अस्पताल भेजे जा चुके हैं और 7-8 अन्य लोग भी घायल हुए हैं। कुछ लोग तीसरे मंजिल से कूदे, स्थानीय लोगों ने नीचे गद्दा बिछाया और उन्हें बचाने का प्रयास किया। समय रहते बीएसईएस ने बिजली की आपूर्ति काट दी। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी जरूरी है। रेस्टोरेंट के लाइसेंस की जांच के लिए भी आदेश दिए गए है।' 'आप' नेता सोमनाथ भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा, 'आज सुबह करीब 8.30 बजे, मेरे विधानसभा क्षेत्र हौजरानी में एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई; इसमें कई लोगों के हताहत होने की आशंका है। मरने वालों में ज्यादा अफ्रीकी नागरिक हैं। तलाश और बचाव अभियान अभी भी जारी है, और आगे की जानकारी का इंतजार है।' अभिषेक पाण्डेय

गोवर्धन से गिरफ्तारी के बाद अभिषेक मिश्रा केस में नए खुलासे, डिजिटल रिकॉर्ड बने अहम सबूत

माथुरा मथुरा के गोवर्धन से गिरफ्तार IIT रुड़की से इंजीनियरिंग कर चुके अभिषेक मिश्रा को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. ऑनलाइन गीता प्रवचन के जरिए अपनी पहचान बनाने वाले अभिषेक के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं. जांच अधिकारियों के मुताबिक कुछ फोटो और वीडियो ऐसे मिले हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. पुलिस के अनुसार, अभिषेक मिश्रा के संपर्क में आने वाली कई युवतियां उच्च शिक्षित थीं. इनमें बीटेक, एमटेक और MBA जैसी पढ़ाई कर चुकी युवतियों के नाम भी सामने आए हैं. आरोप है कि धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर शुरू हुआ संपर्क धीरे-धीरे भरोसे, भावनात्मक निर्भरता और कथित शोषण में बदलता चला गया. जांच में जुटी टीम मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है. मोबाइल से मिले फोटो-वीडियो क्यों बने जांच का केंद्र मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की ओर से कुछ ऐसे फोटो उपलब्ध कराए गए हैं जिनमें आरोपी युवतियों के साथ अंतरंग स्थिति में दिखाई दे रहा है. इन तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये सामग्री कब रिकॉर्ड की गई और इसके पीछे की परिस्थितियां क्या थीं. सूत्रों के अनुसार, मोबाइल फोन से मिले डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसका नेटवर्क कितना बड़ा था. IIT की डिग्री और आध्यात्मिक छवि का असर जांच के दौरान सामने आया है कि अभिषेक मिश्रा ने IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और बोलने की शैली ने कई युवाओं को प्रभावित किया. वह ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करता था, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उससे जुड़ते गए. आरोप है कि इसी भरोसे का इस्तेमाल कर वह कुछ लोगों को अपने करीब लाने में सफल रहा. पुलिस का कहना है कि इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में पढ़ी-लिखी युवतियां उसके साथ रहने के लिए गोवर्धन पहुंचीं. गंधर्व विवाह का दावा और गंभीर आरोप मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अभिषेक मिश्रा ने उसे यह विश्वास दिलाया कि दोनों का 'गंधर्व विवाह' हो चुका है. पुलिस के मुताबिक इसी आधार पर शारीरिक संबंध बनाए जाने का आरोप लगाया गया है. पीड़िता के बयान के बाद आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इसी तरह के दावे अन्य लोगों के सामने भी किए गए थे. परिवारों से पैसे मंगवाने के आरोप पुलिस जांच में एक और पहलू सामने आया है. अधिकारियों के मुताबिक कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि समूह में रहने वाले युवक-युवतियों के परिवारों से आर्थिक मदद मंगवाई जाती थी. यह भी जांच का विषय है कि क्या भावनात्मक दबाव बनाकर पैसे मंगवाए गए थे. फिलहाल पुलिस बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है. पहले भी पहुंच चुके थे परिजन जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले कुछ परिजन अपनी बेटी को वहां से वापस ले जाने पहुंचे थे. उस समय भी विवाद की स्थिति बनी थी. हालांकि मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ा, लेकिन अब पुलिस उस पूरे घटनाक्रम को भी दोबारा खंगाल रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय वहां दो दर्जन से ज्यादा युवक-युवतियां आते-जाते थे. बाद में अधिकांश लोग वहां से अलग हो गए. पुलिस अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर इसके पीछे क्या वजह थी. पुलिस कार्रवाई के दौरान दो युवतियों और एक युवक को वहां से रेस्क्यू किया गया था. बाद में उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि सभी की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें. अभी कई सवालों के जवाब बाकी अभिषेक मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऑनलाइन प्रवचन से शुरू हुई यह कहानी इतने गंभीर आरोपों तक कैसे पहुंची. मोबाइल फोन से मिले डेटा, फोटो-वीडियो, कथित आर्थिक लेन-देन और पीड़ितों के बयानों के आधार पर पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने का दावा कर रही है. फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

महंगा नारियल पानी नहीं! गर्मी में ये 5 सस्ते देसी ड्रिंक्स रखेंगे शरीर को हाइड्रेट

गर्मी बढ़ते ही तेज धूप, पसीना और उमस की वजह से शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में लोग ठंडी-ठंडी ड्रिंक्स से अपने आपको कूल और फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं. चिलचिलाती गर्मी में अगर कोई ड्रिंक लोगों को खूब पसंद आती है तो वो नारियल पानी होता है. एक्सपर्ट्स से लेकर डॉक्टर्स तक गर्मियों में नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग खुद को हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी पीना पसंद करते हैं. इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और थकान भी दूर करते हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय में नारियल पानी की कीमत काफी बढ़ गई हैं. कई शहरों में एक नारियल पानी के लिए 80 से 100 रुपये या उससे भी ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं. ऐसे में बहुत से लोगों के लिए इसे रोजाना खरीदना मुश्किल होता है. अगर आपको भी रोजाना नारियल पानी खरीदना भारी पड़ता है तो परेशान ना हों. गर्मियों में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए सिर्फ नारियल पानी पर ही निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको कई देसी और सस्ती ड्रिंक्स बताने वाले हैं, जिनमें भरपूर पानी, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 सस्ते और हेल्दी ऑप्शंस के बारे में, जो नारियल पानी की जगह आपकी डाइट का हिस्सा बन सकते हैं. 1. तरबूज का जूस: लिस्ट में सबसे पहला नाम तरबूज के जूस का आता है. गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है. इसका जूस शरीर में पानी की कमी पूरी करने में मदद करता है. इसमें नारियल पानी की तरह ही भरपूर मात्रा में पोटैशियम, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को तरोताजा बनाए रखते हैं. 2. लौकी का जूस: भले ही कई लोगों को लौकी पसंद न हो, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि सेहत के मामले में ये किसी सुपरफूड से कम नहीं है. लौकी में 92% पानी होता है. साथ ही इसमें कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को गर्मी में हाइड्रेट रखने के साथ ही एनर्जी देने में भी मदद करते हैं. 3. सफेद पेठे का जूस: सफेद पेठा का जूस भी गर्मियों में नारियल पानी की जगह पीने के लिए बढ़िया ऑप्शन है. सफेद पेठे में 96% पानी होता है. ऐसे में ये शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर पानी के साथ कैल्शियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये शरीर को ठंडक देने और हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है. 4. केले के तने का जूस: केले के फल के साथ उसका तना भी पोषण का खजाना माना जाता है. इसके जूस में विटामिन बी6, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं. ये शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद कर सकता है. इतना ही नहीं ये शरीर को अंदरूनी ठंडक भी देता है. 5. स्नेक गॉर्ड का जूस: स्नेक गॉर्ड (चिचिंडा) का जूस भी शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ अंदर से साफ रखने में भी मदद कर सकता है.

नर्सिंग स्टाफ की भर्ती जल्द, सीएम ने स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी लाने को कहा

रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने राज्य में खाली पड़े नर्सिंग स्टाफ और स्पेशलिस्ट समेत चिकित्सकों के पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने का निर्देश दिया। बता दें राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में 21578 नर्सिंग स्टाफ के पद स्वीकृत हैं जिसमें 7609 पद रिक्त हैं। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच है कि हम सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दें। इसके लिए उन्होंने उन्होंने राज्य सभी लोगों का हेल्थ प्रोफाइल सिस्टम तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने पूरे राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्घ कराने के लिए शहरी एवं ग्रामीण में बांटकर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं अलग-अलग हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के संचालन के लिए अध्ययन करें। कैंसर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, शुगर आदि से संबंधित आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था बनाएं। बैठक में सीएम ने सरकारी अस्पतालों की बुनियादी ढांचे, दवाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन की विस्तृत जानकारी ली। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव, स्वास्थ्य नेहा अरोड़ा, एमडी एनएचएम शशि प्रकाश झा आदि मौजूद थे। एंबुलेंस सेवा की मॉनिटरिंग को एआई कंट्रोल रूम बनाएं मुख्यमंत्री ने एंबुलेंस सेवाओं को लेकर नाराजगी जताई। साथ ही एंबुलेंसों की मॉनिटरिंग के लिए एआई कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों से टैग एंबुलेंस क्रियाशील हों, यह सुनिश्चित करें। लापरवाही पर संबंधित लोगों पर कार्रवाई करें। सीएम ने आपातकालीन स्थिति में मरीज को त्वरित अस्पताल पहुंचाने को लेकर उबर कॉन्सेप्ट का अध्ययन कर भविष्य में उसी तर्ज पर एंबुलेंस सेवा के विस्तार करने का निर्देश दिया। पैरालाइसिस, ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए अच्छी व्यवस्था हो मुख्यमंत्री ने राज्य में पैरालाइसिस अटैक, ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज में अच्छी व्यवस्था करने का निर्देश दिया। सीएम ने कोडरमा, बोकारो, चाईबासा, दुमका, जमशेदपुर, हजारीबाग आदि जिलों में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यो में तेजी लाकर शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया। राज्य में खुलेगा अबुआ दवाखाना राज्य सरकार द्वारा राज्य में मुख्यमंत्री अबुआ दवाखाना की स्थापना एवं संचालन की जायेगी। यह एकीकृत औषधि केन्द्र होगा, जिसका संचालन आयुष्मान आरोग्य मंदिर में होगा। अबुआ दवाखाना से ग्रामीण जनता को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी एवं सिद्ध प्रणाली की आवश्यक औषधियां एक ही स्थान पर सुलभता पूर्वक नि:शुल्क उपलब्ध कराई जायेंगी। अंगदान के लिए करें जागरूक मुख्यमंत्री ने किडनी, लीवर, कॉर्निया आदि अंगदान के लिए लोगों को जागरूक करने और इसके लिए अस्पताल में व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यशाला का आयोजन कर चिकित्सकों का ज्ञान विकसित कराने का निर्देश दिया। साथ ही ब्लड बैंक की व्यवस्था को दुरुस्त करने को कहा। उन्होंने अस्पतालों को एयर कूल बनाने की कार्य योजना बनाने और बर्न यूनिट दुरूस्त करने का निर्देश दिया।

सफलता का रास्ता संघर्ष और त्याग से होकर गुजरता है, जानें क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया

जीवन में तरक्की कोई लक (luck) नहीं, बल्कि एक तय प्रक्रिया है. अगर आप सफलता के शिखर तक पहुंचना चाहते हैं, तो संघर्ष और त्याग को अपने करियर और लाइफ का हिस्सा बनाना ही होगा. संघर्ष: मुश्किलों से लड़ने का हुनर तरक्की का रास्ता कभी भी सीधा नहीं होता.  अगर आप चुनौती से भाग रहे हैं, तो आप अपनी प्रोग्रेस खुद रोक रहे हैं.  संघर्ष का मतलब सिर्फ मेहनत करना नहीं, बल्कि खराब हालातों में भी अपना फोकस बनाए रखना है. जो लोग मुश्किलों में रास्ता ढूंढना जानते हैं, वही आगे चलकर बड़े पदों और जिम्मेदारियों के काबिल बनते हैं. याद रखें, प्रेशर में ही हीरा तराशा जाता है. त्याग: सही चीजों को चुनने की समझ प्रोफेशनल लाइफ हो या पर्सनल, तरक्की पाने के लिए कुछ चीजों का त्याग करना पड़ता है. यहां त्याग का मतलब खुद को दुखी करना नहीं, बल्कि डिस्ट्रैक्शंस (distractions) को हटाना है. कंफर्ट जोन का त्याग: नई चीजें सीखने के लिए पुराने ढर्रे को छोड़ना. आलस और फिजूलखर्ची का त्याग: समय की बर्बादी को रोककर अपने लक्ष्यों को प्रायोरिटी देना. निष्कर्ष सरल शब्दों में कहें तो, सफलता उन्हीं को मिलती है जो रिस्क लेना जानते हैं (संघर्ष) और जो अपने बड़े गोल के लिए छोटी सुख-सुविधाओं को छोड़ने का दम रखते हैं (त्याग).  अगर आप शॉर्टकट ढूंढ रहे हैं, तो तरक्की हमेशा आपसे एक कदम दूर रहेगी. लेकिन अगर आप इस संघर्ष और त्याग की प्रक्रिया को अपना लेते हैं, तो सफलता मिलना तय है.

रोटी बनाते समय इन वास्तु नियमों का रखें ध्यान, घर में बनी रहेगी सकारात्मक ऊर्जा

 क्या आप रोज रोटियां बनाते समय यह सोचते हैं कि यह बस एक सामान्य काम है? क्या आपने कभी सोचा है कि इस छोटे से कार्य का आपके घर की ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि पर कितना गहरा असर पड़ता है? अगर नहीं, तो अब जान लें कि भारतीय संस्कृति में रसोई सिर्फ भोजन बनाने की जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र भी मानी जाती है. यहां तैयार होने वाला भोजन न सिर्फ शरीर को पोषण देता है, बल्कि घर के वातावरण को भी प्रभावित करता है. खासकर रोटी, जिसे परंपरा में सूर्य से जुड़ा माना गया है. रोटी बनाते समय की गई छोटी-छोटी गलतियां भी बड़े वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि रोटियां बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि बनी रहे. रोटियां गिनकर बनाना क्यों माना जाता है गलत? वास्तु के अनुसार ऐसा करना अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि रोटियों को गिनना सूर्यदेव का अपमान होता है, जिससे आर्थिक समस्याएं, नौकरी या व्यापार में रुकावटें आ सकती हैं. बेहतर है कि हमेशा अनुमान से थोड़ी अधिक रोटियां बनाएं, ताकि कोई अतिथि भूखा न जाए और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे. पहली और आखिरी रोटी का महत्व वास्तु शास्त्र में पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा है. यह न केवल पुण्य का काम माना जाता है, बल्कि इससे घर में लक्ष्मी का वास और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी होती है. अगर आसपास गाय न हो, तो पहली रोटी किसी जरूरतमंद को देना भी शुभ माना गया है. हमेशा ताजा आटा ही इस्तेमाल करें बासी आटा राहु का प्रतीक माना जाता है, जो नकारात्मकता को बढ़ाता है. इसलिए रोटियों के लिए हमेशा ताजा आटा गूंथें और बचे हुए आटे का अगले दिन इस्तेमाल न करें. इससे घर में अशांति और आर्थिक परेशानियों से बचाव होता है. चूल्हे की दिशा का रखें ध्यान वास्तु के अनुसार, रसोई का चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए. रोटी बनाते समय रसोई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है. इससे भोजन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और घर में मानसिक व शारीरिक संतुलन बना रहता है. तवा और कढ़ाई को जूठा न छोड़ें रात में तवा या कढ़ाई जूठी छोड़ देना वास्तु दोष को बढ़ाता है और राहु की अशुभता ला सकता है. इन्हें हमेशा साफ करके सूखी जगह पर रखें. रोटी बनाने से पहले तवे को हल्का गरम कर उस पर एक चुटकी नमक डालना भी शुभ माना जाता है. चकला-बेलन की सफाई और सही उपयोग चकला-बेलन को हर बार इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह साफ करना चाहिए. अगर इससे आवाज आती हो, तो नीचे कपड़ा रख लें. गंदे या गलत स्थान पर रखे चकला-बेलन घर में दरिद्रता और कलह का कारण बन सकते हैं. अंतिम बात कहा जाता है कि ईश्वर हर घर में रसोई के माध्यम से प्रवेश करते हैं. रोटियां सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा का केंद्र होती हैं. अगर आप इन छोटे-छोटे वास्तु नियमों का ध्यान रखते हैं, तो घर में सकारात्मकता, संतुलन और समृद्धि अपने आप बनी रहती है. रोटियां बनाने को हमेशा पवित्र कर्म समझें, जो पूरे परिवार की खुशहाली की नींव रखता है.

गर्मी से राहत का देसी सुपरड्रिंक: सत्तू शरबत की आसान रेसिपी

गर्मियों के मौसम में सूरज की तपिश और चिलचिलाती धूप शरीर का सारी एनर्जी सोख लेती है. ऐसे में खुद को हाइड्रेटेड और ऊर्जावान रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. अगर आप भी इस चिलचिलाती गर्मी से परेशान हैं और सुबह-सुबह कुछ ऐसा चाहते हैं जो पेट को ठंडक दे और दिनभर एक्टिव रखे तो सत्तू का ठंडा-ठंडा शरबत आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन है. इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है. प्रोटीन, फाइबर और आयरन से भरपूर सत्तू न सिर्फ पेट की गर्मी को शांत करता है, बल्कि डाइजेशन को सुधारकर आपको लू की चपेट में आने से भी बचाता है. रोज़ सुबह नाश्ते में एक गिलास सत्तू का शरबत पीने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और आप दिनभर तरोताजा महसूस करते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान और क्विक रेसिपी. सामग्री: चना सत्तू: 4 बड़े चम्मच ठंडा पानी: 2 गिलास भुना जीरा पाउडर: 1 छोटा चम्मच काला नमक: स्वादानुसार नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच बारीक कटा प्याज: 1 चम्मच (वैकल्पिक) बारीक कटी हरी मिर्च व हरा धनिया: थोड़ी सी बर्फ के टुकड़े सत्तू का नमकीन शरबत बनाने की विधि एक बड़े बर्तन या जग में 4 चम्मच चने का सत्तू डालें. अब इसमें थोड़ा सा ठंडा पानी डालकर चम्मच या मथनी की मदद से अच्छे से मिलाएं ताकि कोई गांठ (lumps) न रहे. जब सत्तू अच्छे से घुल जाए, तो बचा हुआ पूरा ठंडा पानी इसमें डाल दें. इसके बाद भुना जीरा पाउडर, काला नमक और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. अगर आपको पसंद हो, तो इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिला लें. इससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. शरबत को गिलासों में निकालें, ऊपर से आइस क्यूब्स डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें.

सोनाली चिकन: ब्रायलर और देसी मुर्गे के बीच का नया हेल्दी विकल्प

 आज के समय में चिकन की काफी डिमांड है क्योंकि नॉनवेजिटेरियन लोगों के लिए वो एक प्रोटीन का अच्छा सोर्स है. मार्केट में चिकन की बढ़ती कीमतों और ब्रायलर चिकन के बारे में सोशल मीडिया पर आए दिन आ रही खबरों के कारण अक्सर लोग कुछ नए ऑपशंस की तलाश में रहते हैं. यदि आप नॉनवेज के शौकीन हैं तो बाजार में इन दिनों एक ऐसे चिकन की चर्चा है जिसका नाम सुनते ही लोग काफी शॉक होते हैं. हम बात कर रहे हैं 'सोनाली चिकन' की. इसके नाम के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है. यदि आप भी चिकन खाने के शौकीन हैं और हेल्थ के साथ समझौता किए बिना बजट में बेस्ट स्वाद चाहते हैं तो सोनाली चिकन आपके लिए सबसे सही चॉइस हो सकता है. इसका कारण है कि यह चिकन न केवल दिखने में बल्कि स्वाद में भी पूरी तरह देसी मुर्गे जैसा होता है लेकिन इसकी कीमत काफी कम होती है. तो आइए जानते हैं ये चिकन की कौन सी ब्रीड है और देसी चिकन की तुलना में कितनी फायदेमंद है. क्या है सोनाली चिकन ब्रीड? इस अनोखी ब्रीड के मुर्गों के पंख सुनहरे-पीले और चमकीले होते हैं जो देखने में बिल्कुल सोने की तरह चमकते हैं. इसी गोल्डन वाइब के कारण इसका नाम सोनाली रखा गया है. सोनाली चिकन कोई साधारण ब्रीड नहीं है बल्कि यह रोड आइलैंड रेड (RIR) और फायौमी (Fayoumi) मुर्गों का एक स्पेशल क्रॉस-ब्रीड है. इस ब्रीड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से नेचुरल और देसी चिकन की तरह फील देता है. जहां एक तरफ नॉर्मल ब्रायलर चिकन के पेट और स्किन के पास काफी ज्यादा फैट जमा होता है वहीं सोनाली चिकन में एब्डोमिनल फैट (पेट की चर्बी) न के बराबर होता है. फैट न होने के कारण इसके मांस को लीन और हाई-क्वालिटी का माना जाता है. कम फैट होने के कारण जिम जाने वाले और अपनी फिटनेस को लेकर अलर्ट रहने वाले लोग इसे काफी पसंद करते हैं. सोनाली चिकन के न्यूट्रिशन रोड आइलैंड रेड + फेयूमी के क्रॉस ब्रीड सोनाली चिकन की 100 ग्राम मात्रा में कपरीब 165-175 कैलोरीज होती हैं. इसके अलावा 20-23 ग्राम प्रोटीन, 7-9 ग्राम कुल फैट, सैचुरेट फैट-2-2.5 ग्राम, कोलेस्ट्रॉल 70-80 मिग्रा, आयरन 1.2-1.5 मिग्रा, कैल्शियम 10-15 मिग्रा, विटामिन बी12- 0.3-0.5 मिग्रा होता है. सोनाली मुर्गी के अंडे में प्रति अंडा (50g) 70-75 कैलोरी, 6-7 ग्राम प्रोटीन, फैट 5 ग्राम होता है. यदि मुर्गी को कीड़े-मकोड़े खिलाए जाएं तो अंडों में प्रोटीन और बढ़ जाता है. 3 महीने में मांस के लिए और 4 महीने बाद अंडे देना शुरू करती है. क्या कहती है रिसर्च? पबमेड सेंट्रल (PMC) में पब्लिश्ड रिसर्च के अनुसार, सोनाली चिकन का मीट ब्रायलर के मुकाबले इंसानी शरीर के लिए ज्यादा बेहतर पाया गया है. रिसर्च में देखा गया कि सोनाली चिकन खाने से ब्लड में कुल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स लेवल को कंट्रोल रखने में काफी मदद मिलती है जिससे हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है और हार्ट की बीमारियों का जोखिम भी कम होता है. सोनाली चिकन में खतरनाक लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले फैक्टर्स बहुत कम होते हैं. डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कम फैट और बेहतर लिपिड प्रोफाइल की वजह से यह चिकन दिल की बीमारियों और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए ब्रायलर के मुकाबले एक सेफ चॉइस है. कैसे तैयार होती है ये ब्रीड? रिपोर्ट के मुताबिक, सोनाली चिकन सिर्फ खाने वालों के लिए ही नहीं बल्कि इसे पालने वाले किसानों के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो रहा है. यह ब्रीड भारत और बांग्लादेश के गर्म और ट्रॉपिकल क्लाइमेट में बहुत आसानी से सरवाइव कर लेती है. ब्रायलर मुर्गों की तुलना में इन्हें बहुत ज्यादा केयर, महंगी दवाओं या स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती. हालांकि, इनका ग्रोथ रेट ब्रायलर से थोड़ा धीमी होता है और इन्हें तैयार होने में करीब 60 दिन का समय लगता है. लेकिन मार्केट में इनकी अच्छी और स्टेबल कीमत मिलने के कारण किसानों का नेट प्रॉफिट मार्जिन काफी ज्यादा रहता है.

गोवर्धन से गिरफ्तारी के बाद खुल रहे राज, ‘प्रवचनकर्ता’ पर दुष्कर्म और शोषण के आरोप

मथुरा IIT रुड़की से पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक मिश्रा ने नौकरी नहीं, बल्कि प्रवचन का रास्ता चुना. कुछ ही वर्षों में वह ऑनलाइन माध्यम से युवाओं के बीच पहचान बनाने लगा. लेकिन मथुरा के गोवर्धन से हुई उसकी गिरफ्तारी के बाद वही पहचान जांच के घेरे में है. पुलिस का आरोप है कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर उसने युवतियों का विश्वास जीता और फिर उन्हें अपने प्रभाव में लिया. अब हर दिन सामने आ रहे नए तथ्य इस मामले को और गंभीर बनाते जा रहे हैं. पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया अभिषेक मिश्रा मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है. उसने वर्ष 2017 से 2021 के बीच IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. बताया जा रहा है कि उसने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भगवद्गीता तथा आध्यात्मिक विषयों पर प्रवचन शुरू कर दिए. धीरे-धीरे उसकी पहचान एक ऐसे युवा प्रवचनकर्ता के रूप में बनने लगी जो आधुनिक शिक्षा और धार्मिक ज्ञान का मिश्रण पेश करता था. यहीं से उसकी पहुंच देश के अलग-अलग राज्यों तक बननी शुरू हुई. पहला कदम ऑनलाइन प्रवचन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का सबसे बड़ा हथियार उसका ऑनलाइन नेटवर्क था. वह इंटरनेट के माध्यम से युवाओं से जुड़ता था. धार्मिक चर्चा, आत्मिक शांति, जीवन के उद्देश्य और आध्यात्मिक उन्नति जैसे विषयों पर बातचीत कर वह लोगों का विश्वास जीतता था. जांच में यह भी सामने आया है कि उसके संपर्क में आने वाली कई युवतियां इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा से जुड़ी थीं. कुछ बीटेक और एमटेक कर चुकी थीं तो कुछ उच्च शिक्षित परिवारों से थीं. पुलिस का मानना है कि आरोपी विशेष रूप से ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जो जीवन में किसी भावनात्मक, मानसिक या आध्यात्मिक उलझन से गुजर रहे हों. पहले विश्वास कायम किया जाता था और फिर धीरे-धीरे उन्हें परिवार से दूर रहने तथा समूह के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था. गंधर्व विवाह का दावा और शारीरिक संबंधों के आरोप मामले में सबसे गंभीर आरोप एक पीड़िता के बयान के बाद सामने आए. पुलिस के अनुसार पीड़िता ने बताया कि अभिषेक मिश्रा कथित तौर पर यह कहकर युवतियों को भ्रमित करता था कि उनका गंधर्व विवाह हो चुका है. जांच अधिकारियों के मुताबिक, इसी आधार पर वह शारीरिक संबंध बनाता था. पीड़िता की शिकायत और दर्ज बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या ऐसी घटनाएं सिर्फ एक पीड़िता तक सीमित थीं या फिर अन्य युवतियां भी इसी तरह के दबाव और भ्रम का शिकार हुईं. पहले भी उठे थे सवाल, लेकिन नहीं खुल पाया था पूरा राज पूरे मामले का एक दिलचस्प और अहम पहलू यह भी है कि अभिषेक मिश्रा का नाम पहली बार विवादों में नहीं आया है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार लगभग छह महीने पहले भी एक परिवार अपनी बेटी को वहां से वापस ले जाने पहुंचा था. उस दौरान काफी हंगामा हुआ था. हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि युवती के साथ आए लोग उसके परिजन ही थे. उस समय मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन अब अधिकारियों का मानना है कि उसी दौरान कई संकेत मिल गए थे कि वहां कुछ असामान्य गतिविधियां चल रही हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक समय वहां करीब दो दर्जन युवक-युवतियां मौजूद थीं. हालांकि समय के साथ अधिकांश लोग वहां से अलग हो गए. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आखिर इतने लोग वहां क्यों पहुंचे और बाद में क्यों लौट गए. परिवारों से दूरी, भावनात्मक दबाव और पैसों की जांच मथुरा पुलिस अब सिर्फ दुष्कर्म के आरोपों तक सीमित नहीं है. जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार यह भी जानकारी मिली है कि समूह में रहने वाले कुछ लोगों से उनके परिवारों के जरिए पैसे मंगवाए जाते थे. आरोप है कि भावनात्मक दबाव बनाकर आर्थिक मदद लेने की कोशिश की जाती थी. इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि क्या किसी प्रकार का आर्थिक शोषण हुआ था और यदि हुआ तो उसकी प्रकृति क्या थी. पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है. मोबाइल में मिले फोटो और वीडियो बने जांच का अहम हिस्सा जांच के दौरान कुछ फोटो और वीडियो भी पुलिस के संज्ञान में आए हैं. अधिकारियों के मुताबिक परिजनों द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ चित्रों में आरोपी युवतियों के साथ आपत्तिजनक और अंतरंग स्थिति में दिखाई दे रहा है. हालांकि इन सामग्रियों की फोरेंसिक जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन पुलिस इन्हें केस के महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल कर रही है. इसके अलावा जिन परिवारों के पास इस तरह की कोई अन्य सामग्री मौजूद है, उनसे भी संपर्क किया जा रहा है ताकि जांच को और मजबूत बनाया जा सके. मां भी छोड़ गई थी साथ  पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती दिनों में अभिषेक की मां भी उसके साथ रहती थीं. लेकिन बाद में वह वहां से चली गईं. अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने वहां से दूरी बनाई. पुलिस कार्रवाई के दौरान वहां से दो युवतियों और एक युवक को बरामद किया गया था. बाद में उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि सभी की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें. इस प्रक्रिया में विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं की भी मदद ली जा रही है.  स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है. पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने बयान दिए हैं कि आरोपी अपने समूह से बाहर भी स्थानीय युवतियों और परिवारों से संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा था. यदि जांच में यह तथ्य पुष्ट होता है तो मामला और गंभीर हो सकता है. यही वजह है कि पुलिस आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज कर रही है.