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उत्तराखंड में बदलता मौसम पैटर्न, ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता

उत्तराखंड उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की खबर है। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हर वर्ष नीचे की तरफ खिसक रहा ग्लेशियर गर्मी में तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है। इस मामले में चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मार्च-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी-फरवरी से ज्यादा बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है। इसका सीधा असर वाटर बैंक माने जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ेगा। इस पैटर्न के कारण ट्री लाइन भी लगातार ऊपर को खिसक रही है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है। सर्दियों में कम बर्फबारी हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही है। गर्मियों में इसके बढ़ने से बर्फबारी के साथ बारिश, ओलावृष्टि और आपदाओं के खतरे बढ़े हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान कहते हैं कि बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस बदलाव से जूझ रहा है। आर्थिक और सामाजिक नुकसान पर्यावरणविद् पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी के मुताबिक, हिमालय में मौसम के बदले पैटर्न से आर्थिक और सामाजिक नुकसान का खतरा भी बढ़ा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पर्यटन और हॉर्टिकल्चर भी प्रभावित होगा। सामान्य से अधिक तापमान पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल में गिरी है। मार्च में ये आकड़ा 84 सेंटीमीटर रहा, जबकि जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर ही बर्फ पड़ी। दिसंबर में महज चार बार बर्फबारी हुई, वह भी बेहद ऊपरी क्षेत्र में। वैज्ञानिकों के मुताबिक अध्ययन क्षेत्र में बर्फबारी रिकॉर्ड करने लायक भी नहीं हुई। इससे ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र का तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान में 0.1 से बढ़कर 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है। कमजोर पड़ रहे ग्लेशियर डॉक्टर पंकज चौहान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में हो रही बर्फबारी से ग्लेशियर खतरे में पड़ सकते हैं। चूंकि इन महीनों में तापमान अधिक रहता है इसलिए जिस गति से बर्फ पड़ती है, उसी गति से पिघल भी रही है और ग्लेशियर कमजोर पड़ रहे हैं। ये भविष्य में जलधाराओं को प्रभावित करेंगे, साथ ही आपदा के खतरों को भी बढ़ाएंगे।

अमेरिका के विदेश मंत्री जयपुर में, रामबाग पैलेस से लेकर आमेर तक हाई-प्रोफाइल विजिट का शेड्यूल तैयार

जयपुर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जयपुर दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं. रुबियो सोमवार (25 मई) को परिवार के साथ जयपुर आ रहे हैं. इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर गुलाबी नगरी में प्रशासनिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों के लिहाज से भी बेहद अहम है. यही वजह है कि राजस्थान की राजधानी में व्यवस्था चाक-चौबंद है. रूबियो के दौरे का शेड्यूल और उससे जुड़ी हर जरूरी बात इस खास रिपोर्ट में पढ़िए. हाथी गांव में चल रही विशेष तैयारियां मार्को रूबियो के हाथी गांव में दौरे को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं. हालांकि, इससे जुड़ा कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है. हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री के आगमन को लेकर यहां विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. उनका बेहद खास अंदाज में पारंपरिक स्वागत किया जाएगा. इसके साथ ही मरुधरा की इस धरती पर हाथियों को किस तरह रखा जाता है और उनका रखरखाव कैसे होता है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी. इससे पहले जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जयपुर आए थे, तब भी हाथियों के विशेष स्वागत ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं. राजस्थानी इतिहास को करीब से जानेंगे रुबियो सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं. एयरपोर्ट से लेकर आमेर तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री का विशेष विमान दोपहर करीब 2 बजे जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड होगा. एयरपोर्ट पर राजस्थानी परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया जाएगा. इसके बाद उनका काफिला सीधे जयपुर के प्रतिष्ठित हेरिटेज होटल 'रामबाग पैलेस' के लिए रवाना होगा. रामबाग पैलेस में रुकने के बाद मार्को रूबियो राजस्थान के इतिहास के को करीब से देखने के लिए आमेर फोर्ट पहुंचेंगे. कल्चरल डिप्लोमेसी के लिहाज से भी अहम है दौरा जयपुर की विरासत, यहां की समृद्ध संस्कृति और राजस्थानी मेहमाननवाजी को इस पूरे दौरे का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है. यही वजह है कि जानकार इस यात्रा को केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि 'सांस्कृतिक कूटनीति' यानी कल्चरल डिप्लोमेसी के एक नए अध्याय के तौर पर देख रहे हैं.

यूपी में बिजली आपूर्ति सुधार पर जोर, फीडर-वाइज मॉनिटरिंग के आदेश

लखनऊ यूपी में भीषण गर्मी में बिजली संकट और राजधानी लखनऊ से लेकर छोटे जिलों तक मचे हाहाकार को देखते हुए सीएम योगी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। सीएम योगी ने रविवार को बिजली अधिकारियों को तलब कर आपूर्ति से लेकर वितरण तक की स्थिति जानी। अलग-अलग इलाकों के बारे में विश्लेषण किया और व्यवस्था सुधारने के लिए कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए। फीडर वाइज मॉनिटरिंग करें और जवाबदेही भी तय करें। बैठक में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत के साथ ही ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन व सभी डिस्कॉम भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ बनाने और गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और सभी संयंत्रों में तकनीकी दक्षता और रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। ट्रांसमिशन नेटवर्क को करें मजबूत मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक एवं भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग 10 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। वितरण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह के साथ ही उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने या शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों के बावजूद त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए। बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन दुरुस्त करें मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुसार बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भविष्य की मांग को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर बनाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित तथा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। सही जानकारी उपभोक्ताओं को दें मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर व्यवस्था की पड़ताल करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आमजन को समयबद्ध और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर केवल समस्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाए कि समाधान कब तक होगा।

बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए बनेगा डिटेंशन सेंटर, बंगाल सरकार का बड़ा कदम

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के  निर्देश जारी किए हैं. शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है. प्रशासन का फोकस सीमावर्ती जिलों और उन इलाकों पर है, जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की ज्यादा उम्मीद रहती है. डिपोर्ट होने तक सेंटरों में रखे जाएंगे घुसपैठिए सरकार के बनाए जा रहे इन होल्डिंग सेंटरों का मकसद अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कड़ी नजर रखना है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सीधे जेल में रखने के बजाय इन सेंटरों में ट्रांसफर किया जाएगा. जब तक इन पकड़े गए विदेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि करने और उन्हें कानूनी रूप से उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें इन्हीं होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा. चुनाव प्रचार के दौरान किया था ये वादा बता दें कि बीजेपी ने इसी साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है.

अब प्राइवेट केंद्रों पर भी फ्री अल्ट्रासाउंड, नूंह की गर्भवती महिलाओं को मिली राहत

नूंह. जिला स्वास्थ्य विभाग ने नूंह के नागरिकों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार,प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत जिले के प्रमुख निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को स्वास्थ्य विभाग के पैनल में शामिल किया गया है। अब सरकारी अस्पतालो से रेफर की गई गर्भवती महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने इसके लिए प्रति अल्ट्रासाउंड 330 रुपये की दर तय की है, जिसका भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाएगा। वहीं मरीजों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकता। यह सुविधा 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी। गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश 18 से 19 सप्ताह की जांच अनिवार्य: प्रत्येक रेफर की गई महिला को गर्भावस्था के 18वें से 19वें सप्ताह के बीच कम से कम एक मुफ्त अल्ट्रासाउंड प्रदान किया जाएगा। यह जांच गर्भ में पल रहे शिशु की किसी भी जन्मजात विकृति या अन्य जटिलताओं का समय पर पता लगाने के लिए बेहद जरूरी है। विशेष दिनों में प्राथमिकता: हर महीने की 9, 10, 23 और 30 तारीख को रेफर की गई महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर जांच के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। शनिवार को पहले दिन ही देवांश अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छह महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किया गया। देवांश हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. प्रियंका ने बताया कि सरकार द्वारा जारी आदेशों का नियमानुसार पालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अब दूर दराज के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें अपने नजदीकी ही उच्च स्तरीय जांच की सुविधा बिल्कुल मुफ्त मिल सकेगी। फिरोजपुर झिरका खंड     न्यू वाधवा नर्सिंग होम,     रौनक अल्ट्रासाउंड सेंटर     दुर्गा देवी अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     प्राइम डॉयग्नोस्टिक्स     गोयल अल्ट्रासाउंड     डॉ. अरोड़ा अल्ट्रासाउंड नूंह खंड      आर.जी. अल्ट्रासाउंड सेंटर     मलिक हॉस्पिटल     महाजन डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. विशाखा इमेजिंग सेंटर     गोयल अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर      सिटी डॉयग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड सेंटर      मेसर्स एएनएच 3डी/4डी अल्ट्रासाउंड     भारत अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर पुन्हाना खंड       बी.एस. अल्ट्रासाउंड सेंटर      सहारा अल्ट्रासाउंड सेंटर     न्यू भारत डॉयग्नोस्टिक सेंटर     तिरुपति डॉयग्नोस्टिक्स लैब व सीटी स्कैन      वरदान अल्ट्रासाउंड सेंटर      न्यू प्राइम अल्ट्रासाउंड सेंटर पिनंगवा खंड     मंगला अल्ट्रासाउंड सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     डॉ. हिम्मत राय मेमोरियल हॉस्पिटल तावडू खंड     माडर्न अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     न्यू ओम डॉयग्नोस्टिक     देवांश अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर गर्भ की जांच सरल होगी – क्योंकि सरकारी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की पुख्ता व्यवस्था नहीं है, इसलिए यह फैसला लिया गया है, सरकारी केंद्रों पर आने वाली गर्भवति महिलाओं को जांच के लिए भेजा जाएगा प्राईवेट केंद्र पर। इससे महिलाओं की गर्भ की जांच सरल होगी। – डॉ ज्योत्सना, सीएमओ नूंह

हथौड़े-छेनी से तराशी गई ‘मशरूम रॉक’ बनी गया जिले की नई पहचान

गयाजी  बिहार के गया जिले में दो मजदूरों द्वारा तराशी गई मशरूम के आकार की एक शिलाशि मूर्ति इस क्षेत्र से गुजरने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह संरचना जेठियां-राजगीर मार्ग पर अराई गांव के पास स्थित है, जो गया जिला मुख्यालय से लगभग 60-65 किलोमीटर दूर है। चट्टान के विशिष्ट आकार के कारण स्थानीय लोग इसे मशरूम पहाड़ कहते हैं। मशरूम रॉक का जलवा इस मूर्ति का निर्माण कछारा गांव के निवासी शौकी राजवंशी और विनोद मांझी ने किया था, जो पहले स्थानीय ठेकेदारों के अधीन पहाड़ी क्षेत्र में पत्थर तराशने का काम करते थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दोनों व्यक्तियों ने हथौड़ा, छेनी और लोहे की छड़ों जैसे पारंपरिक औजारों का उपयोग करके एक विशाल चट्टान को आकार देने में कई वर्ष बिताए। यह कार्य आधुनिक मशीनों के उपयोग के बिना किया गया था। जिस चट्टान को मूल रूप से उन्हें पत्थर तोड़ने के काम के लिए सौंपा गया था, उसे उसके आकार और मजबूती के कारण काटना मुश्किल माना जाता था। गांव को मिली पहचान स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मूर्ति ने कछारा गांव को पहचान दिलाई है, जो पहले इस क्षेत्र के बाहर काफी हद तक अज्ञात था। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्री अक्सर इस संरचना को देखने के लिए रुकते हैं, और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल धीरे-धीरे एक छोटे पर्यटक आकर्षण के रूप में उभरा है। पत्थर तराशने की विरासत इस कहानी की तुलना दशरथ मांझी की विरासत से भी की गई है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से "पहाड़ का आदमी" के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक हाथ के औजारों का उपयोग करके गया जिले की एक पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया था। हालांकि मशरूम के आकार की यह मूर्ति अलग-अलग परिस्थितियों में बनाई गई थी, लेकिन स्थानीय निवासी इसे इस क्षेत्र की दृढ़ता और हस्तशिल्प का एक और उदाहरण मानते हैं।

ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: अब अमेरिका में रहकर नहीं मिलेगा ग्रीन कार्ड

नई दिल्ली आज के समय में ज्यादातर लोग भारत छोड़ विदेश का रुख कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग अमेरिका जा रहे हैं या जाना चाहते हैं। लेकिन अब अमेरिका की ट्रंप सरकार (Trump Government) ने ग्रीन कार्ड को लेकर नई नीति की घोषणा की है। पहले लोग अमेरिका में अस्थाई वीजा पर रहते हुए ही ग्रीन कार्ड मिलने तक वहीं रुक सकते थे, लेकिन अब ऐसा करना नहीं होगा। ग्रीन कार्ड के लिए छोड़ना होगा अमेरिका अब तक लोग अमेरिका में रहते हुए ही “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे लेकिन अब से ये मुमकिन नहीं होगा। यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS ) ने जानकारी दी कि जो लोग अपने स्टेटस में बदलाव चाहते हैं, उन्हें पहले अपने गृह देश वापिस लौटना होगा फिर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के जरिए ही आवेदन करना होगा। ये प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो गई है। 12 लाख भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में इमिग्रेशन एडवोकेट अजय भुटोरिया ने PTI को बताया कि नई ग्रीन कार्ड नीति भारतीयों के लिए झटका है। उन्होंने कहा, कि "कानून का पालन करने वाले 12 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी अब मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के नए नियम के तहत ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका छोड़कर इमिग्रेंट वीजा पर दोबारा एंट्री करना जरूरी हो गया है।" उन्होंने कहा, "पिछले दो सालों में पढ़ाई के लिए अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में 35 से 40 फीसदी की कमी देखी गई है। पिछले दिसंबर से जो लोग वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत गए वे अभी भी अटके हुए हैं। उन्हें जो डेट मिली है वो अगस्त, अक्टूबर तक की मिली है।" क्या होता है ग्रीन कार्ड? ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड (Permanent Resident Card) कहा जाता है। जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार देता है। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में कहीं भी रह सकता है। ये कार्ड लोगों को ज्यादातर कंपनियों में नौकरी करने, पढ़ाई करने और नियमों के तहत अमेरिका से बाहर आने-जाने का अधिकार देता है। इस कार्ड के मिलने के बाद वह व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता के लिए भी अप्लाई कर सकता है।  

बिहार: उद्यमी योजना से युवाओं और महिलाओं को बड़ा अवसर, गांवों में खुलेंगे नए उद्योग

चरपोखरी (आरा)  बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत भोजपुर जिले में स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार को नई रफ्तार मिलने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी औपबंधिक चयन सूची में जिले के 224 लाभार्थियों का चयन विभिन्न श्रेणियों के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए किया गया है। सरकार की ओर से वित्तीय सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण मिलने के बाद चयनित लाभार्थी जिले के अलग-अलग प्रखंडों और कस्बों में अपने उद्योग शुरू करेंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि युवाओं का महानगरों की ओर पलायन भी कम होने की उम्मीद है। युवाओं और महिलाओं को सबसे ज्यादा मौका इस बार सरकार ने सामाजिक संतुलन के साथ युवाओं और महिलाओं को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 53 युवाओं का चयन किया गया है। जबकि मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना में 52 महिलाओं को मौका मिला है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ईबीसी उद्यमी योजना के तहत 52, अनुसूचित जाति-जनजाति श्रेणी में 50, अल्पसंख्यक उद्यमी योजना में 14 और दिव्यांग उद्यमी योजना में तीन लोगों का चयन हुआ है। डिजिटल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर बना पहली पसंद नई पीढ़ी का झुकाव डिजिटल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की ओर अधिक देखने को मिल रहा है। चयनित परियोजनाओं में सबसे ज्यादा 35 साइबर कैफे सह आईटी बिजनेस यूनिट शामिल हैं। इसके अलावा 26 आटा-सत्तू-मसाला पिसाई इकाइयां, 16 तेल मिल, छह मिनी राइस मिल और 12 रेडीमेड गारमेंट्स प्लांट स्थापित किए जाएंगे। वहीं 16 होटल, रेस्तरां और ढाबे, 15 पेपर प्लेट यूनिट, सात आधुनिक ऑटोमोबाइल गैराज, सात फर्नीचर प्लांट, पांच मेडिकल डायग्नोस्टिक सेंटर और चार फ्लेक्स प्रिंटिंग इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है। आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों में कूलर-पंखा असेंबलिंग के चार प्लांट, तीन एलईडी बल्ब उद्योग और तीन आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा 65 अन्य लघु और कुटीर उद्योगों को भी स्वीकृति मिली है। गांवों तक पहुंचेगी ड्रोन तकनीक इस बार आधुनिक कृषि ड्रोन सेवा केंद्रों को मंजूरी मिलना सबसे खास माना जा रहा है। चयनित उद्यमियों को ड्रोन खरीदने, पायलट प्रशिक्षण और सर्विस सेंटर संचालन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को गांव स्तर पर ही नैनो यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव के साथ फसल निगरानी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 10 लाख तक की सहायता, आधी राशि अनुदान अधिकारियों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन के बाद लाभार्थियों को पहली किस्त जारी की जाएगी। योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसमें 50 प्रतिशत यानी अधिकतम पांच लाख रुपये अनुदान के रूप में माफ किए जाते हैं। शेष राशि आसान शर्तों पर ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। पलायन रोकने में मिलेगी मदद आरा, तरारी, जगदीशपुर, पीरो, बिहिया, शाहपुर, संदेश और चरपोखरी जैसे इलाकों में ये इकाइयां शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। इससे दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों की ओर होने वाले पलायन पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है। हर साल बढ़ रहा योजना का दायरा मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की शुरुआत वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए की गई थी। बाद में इसे अति पिछड़ा वर्ग और फिर 2021-22 से सभी वर्गों के युवाओं और महिलाओं के लिए खोल दिया गया। इसके बाद जिले में स्वरोजगार का दायरा लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2021-22 में 174, 2022-23 में 172, 2023-24 में 194, 2024-25 में 208 और अब 2025-26 में 224 लाभार्थियों का चयन किया गया है।

पीस कमेटी बैठक में फैसला, भीड़ बढ़ने पर मस्जिदों में ही अदा होगी ईद की नमाज

लखनऊ ईदगाह में जगह पूरी तरह भर जाने की स्थिति में आसपास की अन्य मस्जिदों में जाकर नमाज अदा करने को कहा गया है.(File Photo: PTI) सड़क पर नमाज के मुद्दे पर सीएम योगी के सख़्त रुख के चलते, बकरीद को लेकर बुलाई गई पीस कमेटी की बैठक में साफ कहा गया कि किसी भी हाल में सड़क पर नमाज नहीं होगी. अगर ईदगाह में जगह पूरी तरह भर जाती है, तो बाहर नमाज पढ़ने के बजाय आसपास की दूसरी मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने को कहा गया है. प्रशासन ने यह भी कहा कि कुर्बानी के बाद जानवर के अवशेष खुले में या नालियों में न फेंके. खुले में अवशेष फेंकने का मुद्दा विश्व हिन्दू परिषद की तरफ से उठाया गया था. बता दें, झांसी के शहर कोतवाली में एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में बकरीद त्यौहार को लेकर पीस कमेटी की बैठक हुई. जिसमें दोनों धर्मों के धर्मगुरुओं व विभिन्न संगठन के सदस्य मौजूद रहे. जिन्होंने कई समस्याओं के बारे में चर्चा की. वहीं प्रशासन ने जहां सड़क पर नमाज न पढ़ने पर फोकस किया तो वहीं हिन्दू संगठनों ने कुर्बानी के बाद जानवर का खून व वेस्ट मटेरियल नालियों में न बहाने की बात उठाई. मुस्लिम समाज के लोगों ने ईद के दिन बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और सफाई व्यवस्था पर जोर दिया. एसपी सिटी प्रीति सिंह ने कहा कि जो भी व्यवस्थाओं की बात कही गई है, उन्हें पूरा करने के निर्देश नगर निगम, बिजली व जल संस्थान के अधिकारियों को दे दिए गए हैं. साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क पर किसी भी दशा में नमाज न पढ़े और कुर्बानी के अवशेष खुले में न फेंके. कुर्बानी के बाद अवशेष का सही तरह से रखें पुलिस प्रशासन की ओर से सभी को अवगत करा दिया गया है कि कुर्बानी के बाद जानवरक के अवशेष सही तरह से बाहर रखा जाए ताकि जब नगर निगम की गाड़ी आए तो वह कचरे रूप में उठाकर ले जाए. अव्यवस्था रूप से न फेंका जाए, जिससे कोई कुत्ता या अन्य जानवर उसे उठाकर न ले जाए. अगर ऐसा हो जाता है तो अव्यवस्था का माहौल बन जाता है. साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि जो भी स्थानीय ईदगाह में नमाज सम्पन्न होती है वहां यदि क्षमता पूरी हो चुकी है तो आस-पास की मस्जिद में जाकर नमाज अदा कर लें, मस्जिद के बाहर किसी भी दशा में नमाज अदा न करें. वहीं पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर लक्ष्मीकांत गौतम ने भी कहा कि किसी भी दशा में मस्जिद के बाहर या फिर सड़क पर नमाज अदा न करें.

दिल्ली में जयशंकर से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी विदेश मंत्री, भारत-अमेरिका संबंध दुनिया के सबसे अहम

नई दिल्ली  भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज दिल्ली में अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका न केवल सहयोगी हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं। रूबियो ने आज सुबह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से मिले। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका के रिश्तों को अन्य देशों से अलग बनाते हैं। रूबियो ने क्या कहा? उन्होंने कहा, "अमेरिका और भारत सिर्फ सहयोगी नहीं हैं। हम रणनीतिक सहयोगी हैं और यह बात बेहद अहम है। जाहिर है हम दुनिया भर के देशों के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन हमारी रणनीतिक साझेदारी ही इस रिश्ते को सबसे अलग बनाती है।" रूबियो ने आगे कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी सिर्प इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसर भी देती है। और जैसा कि मैंने कहा और जैसा कि कल रात हमने खाने पर थोड़ी चर्चा भी की थी इसमें पश्चिमी गोलार्ध और वैसी ही दूसरी जगहें भी शामिल हो सकती हैं।" 'भारत-अमेरिका रखते हैं साझा हित' उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते कई साझा हित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। सिर्फ यही बात हमारे बीच जबरदस्त सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है। हमारे इतने सारे साझा हित हैं कि हमारे लिए उन पर लगातार काम करते रहना पूरी तरह से समझदारी की बात है।" अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, "यह किसी चीज को फिर से बहाल करने या उसमें नई जान डालने के बारे में नहीं है। मैंने कुछ लोगों को इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते देखा है बल्कि यह तो उस पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है, जो हमारी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह दुनिया की सबसे अहम साझेदारियों में से एक है।"