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वाराणसी-कोलकाता सिक्स लेन और जल परियोजनाओं को नई रफ्तार, बिहार की कनेक्टिविटी और सिंचाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

 पटना पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार बनने से इसका सीधा और सकारात्मक असर पड़ोसी राज्य बिहार पर देखने को मिलेगा। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बंगाल फतह को केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि बिहार के दूरगामी हितों की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। बिहार में एनडीए की सरकार है और अब बंगाल में भी बीजेपी का मुख्यमंत्री होने से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादित मुद्दों पर आसानी से सहमति बन सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा बिहार के सीमावर्ती जिलों को मिलेगा। घुसपैठ और तस्करी पर लगेगी रोक बंगाल की ममता सरकार के दौरान बिहार को घुसपैठ के मुद्दे पर सहयोग नहीं मिल पा रहा था। इसी के कारण सीमावर्ती इलाकों में यह समस्या लगातार गंभीर हो रही थी। लेकिन अब केंद्र, बिहार और बंगाल- तीनों जगह समान विचारधारा वाली सरकार होने से घुसपैठियों के खिलाफ ठोस और संयुक्त कार्रवाई की जा सकेगी। इससे न केवल अवैध रूप से आने वाले लोगों पर नकेल कसेगी, बल्कि सीमा पर होने वाली तस्करी पर भी पूर्ण रूप से रोक लगेगी। वाराणसी-कोलकाता सिक्स लेन परियोजना पकड़ेगी रफ्तार उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बिहार और झारखंड होते हुए कोलकाता तक बनने वाले महत्वाकांक्षी 'सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग' को भी अब नई गति मिलेगी। ममता सरकार के कारण बंगाल की लगभग 285 किलोमीटर की इस परियोजना पर कोई ठोस काम नहीं हो सका था, जबकि यूपी, बिहार और झारखंड में प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। नई सरकार के आने से यह बाधा दूर होगी, जिसके बाद सड़क बनने पर बिहार से बंगाल का सफर सिर्फ 7 घंटे में तय किया जा सकेगा। अपर महानंदा सिंचाई और फरक्का बराज पर सकारात्मक पहल इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा जल बंटवारे के मामले में भी बिहार को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। 1978 के समझौते के तहत 'अपर महानंदा सिंचाई परियोजना' से जुड़ी 8 किलोमीटर लंबी नहर का काम अब रफ्तार पकड़ेगा। इससे 67 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकेगा। वहीं, 1996 के समझौते के तहत फरक्का बराज से बांग्लादेश को पानी देने की बाध्यता पर भी राज्य सरकार ने पुनर्विचार का अनुरोध किया था। अब इस दिशा में अच्छी पहल होने की उम्मीद है, जिससे गंगा के पानी में बिहार की भागीदारी बढ़ सकेगी।

गर्मी में एसी का सही इस्तेमाल,6–8 घंटे चलाना सुरक्षित, 24–26°C तापमान सबसे बेहतर

अप्रैल में ही गर्मी इस बार रिकॉर्डतोड़ रही है. गर्मियों ने अपना ऐसा रंग दिखाया कि ज्यादातर घरों में लगातार एसी चलने लगे हैं. बाहर की तपिश में एसी की ठंडी हवा न केवल सुकून देती है, बल्कि भट्टी जैसे गर्म हो रहे घर को जीने के लायक भी बनाती है. हालांकि, एसी से गर्मी से छुटकारा तो मिल जाता है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल बिजली के बिल को भी तेजी से बढ़ाता है. इतना ही नहीं हर समय एसी की हवा खाने से सेहत पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में एसी को समझदारी से चलाना बहुत जरूरी है, ताकि ठंडक भी मिले और नुकसान भी न हो. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या इस भीषण गर्मी में बिना अपनी जेब और सेहत को नुकसान पहुंचाए चैन की नींद ली जा सकती है? इसके साथ ही आखिर दिन में कितने घंटे एसी चलाना सही रहता है? आइए जानते हैं कि एक दिन में कितने घंटे एसी चलाना चाहिए. कितनी देर तक एसी चलाना सही है? अगर आप अपने कमरे को ठंडा करने के लिए लगातार एसी चलाए रखते हैं, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं. लंबे समय तक एसी चलाना सही नहीं माना जाता है. क्योंकि एसी की हवा में ज्यादा देर बैठने से स्किन रूखी होती है और इसके साथ ही कई हेल्थ समस्याएं भी हो सकती है. ऐसे में कोशिश करें कि एसी को एक बार में करीब 6–8 घंटे तक ही इस्तेमाल करें. जब कमरा अच्छी तरह ठंडा हो जाए, तो कुछ देर के लिए एसी बंद कर दें या फिर पंखा चला लें. इससे तीन फायदे होते हैं. पहला एसी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और उसके खराब होने के चांस घट जाते हैं, दूसरा आपकी स्किन/ सेहत सही बनी रहती है और साथ ही बिजली की खपत भी कम होती है. इस हिसाब से आप एसी को एक दिन में 12-14 घंटे चला सकते हैं. ज्यादा एसी में रहने के नुकसान हर समय एसी में बैठे रहना भी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता. इस पर कई तरह की रिसर्च की गई हैं जिनके अनुसार, जब आप लगातार ठंडी जगह पर रहते हैं तो शरीर कम कैलोरी बर्न करता है, क्योंकि उसे अपने टेंपरेचर को बैलेंस रखने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखने लगता है. इससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है, स्किन सूखने लगती है और सिर दर्द या थकान भी महसूस हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि आप बीच-बीच में एसी से बाहर निकलें और नेचुरल हवा में रहें. किस टेंपरेचर पर चलाना होता है बेस्ट? अगर आप चाहते हैं कि आपका एसी कमरे को अच्छे से ठंडा भी करे और बिजली का बिल भी ज्यादा न आए, तो इसे सही टेंपरेचर पर चलाना बहुत जरूरी है. एक्स्पर्ट की मानें तो एसी के टेंपरेचर को 24°C से 26°C के बीच रखना सबसे बढ़िया माना जाता है. इस टेंपरेचर पर कमरा ठंडा भी रहता है और बिजली की खपत भी कम होती है. 16°C या 18°C पर एसी चलाने से बिजली की खपत ज्यादा होती है.  

2 अगस्त 2027: इस सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण? जानिए पूरी सच्चाई

आसमान में होने वाली कुछ घटनाएं सिर्फ खगोलीय नहीं होतीं, वे इंसान को ठहरकर देखने पर मजबूर कर देती हैं. ऐसा ही एक अद्भुत नजारा आने वाले समय में दिखाई देने वाला है, जब दिन के उजाले के बीच अचानक अंधेरा छा जाएगा. यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि 21वीं सदी का सबसे लंबा और दुर्लभ सूर्य ग्रहण होगा, जिसे लेकर वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों तक में उत्साह बना हुआ है. 2 अगस्त 2027: इतिहास रचने वाला दिन 2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण कई मायनों में खास होगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इस सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. इस दौरान चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच ऐसी स्थिति बनेगी कि चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा. इस ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत इसकी अवधि है, करीब 6 मिनट 20 से 23 सेकंड तक पूर्ण अंधकार छाया रहेगा. सामान्यतः पूर्ण सूर्य ग्रहण 2 से 3 मिनट तक ही रहता है, लेकिन इस बार यह समय दोगुने से भी अधिक होगा. यही वजह है कि इसे सदी का सबसे लंबा ग्रहण कहा जा रहा है. किन-किन जगहों पर दिखेगा यह अद्भुत नजारा यह ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में साफ दिखाई देगा, खासतौर पर दक्षिणी यूरोप (स्पेन, पुर्तगाल), उत्तरी अफ्रीका (मिस्र, लीबिया), मध्य पूर्व (सऊदी अरब, यूएई) में यह नजारा दिखेगा. इन क्षेत्रों में लोग कुछ मिनटों के लिए दिन में रात जैसा अनुभव करेंगे. आसमान में तारे भी नजर आ सकते हैं और तापमान में हल्की गिरावट महसूस हो सकती है. भारत की बात करें तो यहां यह ग्रहण पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देगा. इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिल सकता है, लेकिन वह अनुभव उतना प्रभावशाली नहीं होगा जितना पूर्ण ग्रहण वाले क्षेत्रों में होगा. 2026 में भी दिखेगा शानदार नजारा इससे पहले 12 अगस्त 2026 को भी एक लंबा सूर्य ग्रहण लगेगा. हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में इसे देखने का मौका मिलेगा. आखिर क्यों लगता है सूर्य ग्रहण? सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक देता है. पूर्ण सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है. आंशिक सूर्य ग्रहण: जब सूर्य का केवल एक हिस्सा ढकता है. 2027 का ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, इसलिए इसका प्रभाव ज्यादा रोमांचक और दुर्लभ होगा. ग्रहण देखते समय रखें सावधानी सूर्य ग्रहण को सीधे नंगी आंखों से देखना खतरनाक हो सकता है. इससे आंखों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए हमेशा सोलर फिल्टर या स्पेशल चश्मे का उपयोग करें.कैमरा या दूरबीन में भी प्रोटेक्टिव फिल्टर लगाएं.  

10,000 स्टेप्स का नियम हर किसी के लिए जरूरी नहीं, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

 आज के समय में फिटनेस फ्रीक और फिटनेस के लिए अवेयर रहने वाले लोग अक्सर पैदल चलने को भी महत्व देते हैं. अगर किसी से भी पूछो कि वह दिन में कितने स्टेप्स चलता है तो हर किसी का जवाब होता है, 10 हजार कदम. ऐसे में हर कोई अपनी स्मार्टवॉच में 10,000 कदम का आंकड़ा ही सिलेक्ट करता है और दिनभर उसके मुताबिक ही चलता है. डॉक्टर्स की मानें तो यह 'जादुई नंबर' हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना अपनी शारीरिक क्षमता को समझे इतना ज्यादा पैदल चलना आपके जोड़ों के लिए मुसीबत बन सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही किसी फिजिकल समस्या से जूझ रहे हैं. 10,000 स्टेप्स का चलना कितना जरूरी? पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल और एमआरसी सेंटर के ऑर्थोपेडिक्स डॉ. प्रदीप मूनोट का कहना है, अधिकतर लोग मानते हैं कि जितना अधिक चलेंगे, उतने फिट रहेंगे. लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, 10,000 कदम का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है. डॉक्टर का कहना है कि यह केवल एक मार्केटिंग स्ट्रेटजी के तौर पर शुरू हुआ था कि सबको 10 हजार कदम चलना चाहिए. ओवरवेट लोगों या बुजुर्गों के लिए अचानक से इतने कदम चलने से एक्स्ट्रा लोड पड़ सकता है जिससे घुटने के कार्टिलेज (हड्डियों के बीच की कुशनिंग) घिसने लगती है.   जोड़ों पर कैसे पड़ता है असर? डॉ. प्रदीम का कहना है, जब हम चलते हैं तो हमारे शरीर के वजन का पूरा भार घुटनों पर आता है. अगर कोई व्यक्ति गलत जूतों में या कठोर जगह पर 10 हजार कदम चलता है तो उसे ओवरयूज़ इंजरी हो सकती है. यदि आपको वॉक के समय घुटनों में सूजन, दर्द या कटकट की आवाज आने लगे तो समझ लीजिए कि आपके जोड़ों पर लोड आ रहा है और और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. जबरदस्ती 10 हजार कदम चलने का गोलपूरा करना ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है. वॉकिंग का क्या है सही तरीका? फिट रहने के लिए केवल कदमों की गिनती काफी नहीं है. डॉक्टरों का सुझाव है कि 7,000 से 8,000 कदम भी सेहत के लिए पर्याप्त होते हैं. पैदल चलने के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी है ताकि मसल्स भी मजबूत बने रहें और जोड़ों पर अधिक लोड न पड़े. चलने के लिए हमेशा अच्छे कुशन वाले जूतों का चुनाव करें और कंक्रीट की जगह घास या नरम सतह पर टहलें.  

घर की सीलन और वास्तु दोष: जानिए कैसे प्रभावित होती है आर्थिक स्थिति

 घर की सीलन (नमी) को अक्सर लोग छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, सीलन सिर्फ दीवारों के लिए ही नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है. माना जाता है कि घर में बढ़ती नमी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है, जिससे धन हानि, खर्चों में बढ़ोतरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस घर में लगातार सीलन रहती है, वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है. खासतौर पर घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) और उत्तर दिशा में सीलन आना शुभ नहीं माना जाता है. यह दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी होती है, इसलिए यहां सीलन आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है. सीलन का वास्तु में महत्व वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सीलन की वजह से घर में बदबू, फंगस और गंदगी भी बढ़ती है, जो सकारात्मक ऊर्जा को कम करती है. इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और काम में मन नहीं लगता है. धीरे-धीरे यह स्थिति आर्थिक नुकसान को न्योता देने लगती है. अगर आपके घर में कहीं भी दीवारें गीली रहती हैं या पेंट उखड़ने लगा है, तो इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए. घर में अच्छी धूप और हवा का आना जरूरी है, क्योंकि इससे नमी कम होती है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इसके अलावा, पानी के लीकेज को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर घर की सफाई और मरम्मत करते रहें. नमक या कपूर का उपयोग भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मददगार माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि सीलन आने से घर को कौन से वास्तु दोष लगते हैं. 1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) का दोष अगर घर के उत्तर-पूर्व हिस्से में सीलन रहती है, तो इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है. यह दिशा देवताओं और धन-दौलत की मानी जाती है. यहां सीलन होने से धन रुकावट, मानसिक तनाव और निर्णय लेने में कमजोरी आ सकती है. 2. उत्तर दिशा में नमी (धन दोष) उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा कहा जाता है. इस जगह सीलन आने से आर्थिक नुकसान, बचत में कमी और अचानक खर्च बढ़ सकते हैं. 3. दीवारों का गीला और खराब होना (ऊर्जा दोष) घर की दीवारों पर फंगस, पपड़ी या बदबू आना घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. इससे घर में कलह, आलस्य और काम में रुकावट आने लगती है. 4. दक्षिण-पश्चिम में सीलन (स्थिरता दोष) यह दिशा स्थिरता और रिश्तों से जुड़ी होती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में नमी होने से रिश्तों में अस्थिरता और करियर में उतार-चढ़ाव आ सकता है. घर में सीलन आने से कौन से ग्रह होते हैं प्रभावित? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सीलन का संबंध मुख्य रूप से चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना जाता है. चंद्रमा (Moon) – चंद्रमा जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है. घर में सीलन आने से चंद्रमा कमजोर हो सकता है, जिससे मानसिक तनाव, बेचैनी और नींद की समस्या बढ़ सकती है. शुक्र (Venus)- शुक्र देवता सुख-सुविधा, वैभव और सुंदरता का कारक है. सीलन से शुक्र प्रभावित होता है, जिससे आर्थिक परेशानी, घर की रौनक कम होना और वैवाहिक जीवन में तनाव की समस्याएं आ सकती हैं. क्या करें उपाय? – घर में जहां भी लीकेज या सीलन है, उसे तुरंत ठीक कराएं. – घर में धूप और हवा का सही इंतजाम रखें. – नमक या कपूर रखकर नमी और नकारात्मक ऊर्जा कम करें. – उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ और सूखा रखें.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली दौरे के बाद पटना में नीतीश कुमार से की मुलाकात, गठबंधन में समन्वय पर चर्चा

पटना बिहार की एनडीए सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार 7 मई को होगा। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए मंत्री शपथ लेंगे। उन्हें राज्यपाल सय्यद अता हसनैन पद व गोपनीयता की शपथ दिलायेंगे। इस मौके के साक्षी बड़ी संख्या में एनडीए के शीर्ष नेता बनेंगे। रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह के साथ ही भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। साथ ही बिहार में एनडीए के प्रमुख घटक दलों के नेता जदयू के राजीव रंजन सिंह ललन, हम के जीतन राम मांझी, लोजपाआर के चिराग पासवान से मिलकर रविवार की दोपहर वे पटना पहुंचे। उनकी वापसी के पहले ही पटना जिला प्रशासन के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां आरंभ कर दीं। बताया जाता है कि इसको लेकर आलाधिकारियों ने एक बैठक कर इसकी रणनीति बनाई। समय और शपथ लेने वाले मंत्रियों की संख्या तय की जा रही है। इधर बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को अपने पूर्ववर्ती और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रमुख नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की। सम्राट चौधरी नई दिल्ली से लौटने के तुरंत बाद कुमार के आवास पहुंचे थे। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने जदयू अध्यक्ष के साथ हुई मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने "राजग की शानदार जीत के गौरवपूर्ण क्षण को साझा किया।" यह हालिया विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन का संदर्भ था। इससे पहले, सम्राट चौधरी ने जदयू प्रमुख के एक पोस्ट को भी साझा किया था, जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनावों में राजग की सफलता पर खुशी जताई थी। इसी बीच, यह चर्चा तेज है कि चुनाव परिणामों के बाद बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। पिछले महीने शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में फिलहाल केवल दो मंत्री हैं, दोनों ही जदयू से हैं। वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शपथ ली थी और दोनों को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के मंत्रिमंडल में अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं। संभावित विस्तार में भाजपा और जदयू के अलावा राजग के अन्य घटकों-लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। इन दलों का नेतृत्व क्रमशः केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा कर रहे हैं। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से जब सात मई को मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।” इस बीच, शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक बड़ा टेंट लगाया जा रहा है। अधिकारी तैयारियों के बारे में कुछ भी बताने से बच रहे हैं, हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं का दावा है कि मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम "भव्य आयोजन" होगा, जो राजभवन में हुए सम्राट चौधरी के सादे शपथ ग्रहण समारोह से अलग होगा।

बाल झड़ने की समस्या का नया समाधान: स्टेम सेल रिसर्च से गंजेपन के इलाज की उम्मीद

 बाल गिरना आज के समय में अधिकतर महिला और पुरुष की समस्या बन चुका है. इसके कारण कई लोग परेशान रहते हैं लेकिन उन्हें अपने हेयर फॉल को रोकने का सही तरीका नहीं मिलता. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि काश उनके झड़े हुए बाल दोबारा आ जाएं. पहले तो ऐसा पॉसिबल नहीं था लेकिन अब ऐसे लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है. हाल ही में हुई एक रिसर्च ने गंजेपन के इलाज के पुराने दावों को चुनौती देते हुए यह साबित किया है कि बालों का झड़ना अब लाइलाज नहीं रहा. वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बालों की जड़ें यानी स्टेम सेल्स पूरी तरह खत्म नहीं होतीं. यानी वे सिर्फ सो जाती हैं और सही तकनीक से उन्हें फिर से एक्टिव किया जा सकता है. क्या कहती है यह नई रिसर्च? स्टेम सेल रिव्यूज एंड रिपोर्ट्स (Stem Cell Reviews and Reports) में पब्लिश्ड स्टडी के मुताबिक, बालों के झड़ने का मुख्य कारण केवल हार्मोन या जेनेटिक्स नहीं है. रिसर्चर्स ने पाया कि हमारे सिर की त्वचा का वातावरण यानी एक्सट्रासेलुलर मैट्रिक्स (ECM) जब सख्त हो जाती है तो वहां मौजूद स्टेम सेल्स को बढ़ने का सिग्नल नहीं मिल पाता. इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए कि जैसे बंजर जमीन पर बीज नहीं पनपते वैसे ही कठोर हुए स्कैल्प में बाल नहीं उग पाते. एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स की राय रिसर्च के को-राइटर और क्लिनिकल साइंटिस्ट डॉ. देबराज शोम (Dr. Debraj Shome) का कहना है, अब तक हम सिर्फ बालों के स्ट्रैंड्स पर ध्यान दे रहे थे लेकिन असली खेल स्कैल्प के इकोसिस्टम का है. दरअसल, हार्मोन और जेनेटिक्स की कहानी हमेशा से अधूरी थी. स्टेम सेल्स के आसपास का भौतिक वातावरण उतना ही मायने रखता है जितना कि खुद कोशिकाएं. दरअसल, माइक्रोनीडलिंग और बायोमटेरियल स्कैफोल्ड्स जैसी तकनीकों से स्कैल्प के सख्त टिश्यूज को फिर से नरम बनाया जा सकता है जिससे बाल दोबारा उगने लगते हैं. कैसे होगा दोबारा हेयर ग्रोथ? स्टडी में पाया गया कि जब स्कैल्प को मैकेनिकल स्टिमुलेशन के जरिए सुधारा जाता है तो शरीर के अंदर 'Wnt' और 'YAP/TAZ' जैसे महत्वपूर्ण बायोलॉजिकल पाथवे फिर से एक्टिव हो जाते हैं. क्लिनिकल ट्रायल के दौरान देखा गया कि केवल 12 हफ्तों के भीतर बालों की डेंसिटी में 20 से 30 प्रतिशत तक का सुधार हुआ था. यह उन लोगों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है जिन पर मिनोक्सिडिल जैसी दवाएं असर करना बंद कर चुकी हैं.

तेज रफ्तार का कहर: गोसलपुर हाईवे पर ट्रैक्टर से भिड़ी बस, 39 यात्री जख्मी

जबलपुर   गोसलपुर में नेशनल हाईवे के बीच में मंगलवार सुबह ट्रैक्टर एमपी 20 ac 0372 बस क्रमांक एमपी 20 pa 9849 क्रॉसिंग के दौरान जबरदस्त भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद यात्रियों से भरी बस और ट्रैक्टर दोनों पलट गए। जबलपुर कटनी राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित बस में सवार 39 लोग घायल, जिसमें 21 लोग सिहोरा अस्पताल और 18 गोसलपुर में के सरकारी अस्‍पतासल में भर्ती किए गए हैं।  जबलपुर  गोसलपुर में नेशनल हाईवे के बीच में मंगलवार सुबह ट्रैक्टर एमपी 20 ac 0372 बस क्रमांक एमपी 20 pa 9849 क्रॉसिंग के दौरान जबरदस्त भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद यात्रियों से भरी बस और ट्रैक्टर दोनों पलट गए। जबलपुर कटनी राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित बस में सवार 39 लोग घायल, जिसमें 21 लोग सिहोरा अस्पताल और 18 गोसलपुर में के सरकारी अस्‍पतासल में भर्ती किए गए हैं। 

15 जुलाई तक टैक्स भुगतान पर छूट, ऑनलाइन पेमेंट करने पर मिलेगा 12% तक लाभ

वाराणसी उत्तर प्रदेश के एक नगर निगम में हाउस, वाटर और सीवर टैक्स को लेकर बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब यहां पर दिव्यांग और दृष्टिबाधित यानी जिन्हें दिखाई नहीं देता है, ऐसे लोगों से किसी प्रकार का टैक्स नहीं लेना का फैसला किया गया है। नगर निगम कार्यकारिणी ने अबकी पहली बार दृष्टिबाधित और 80 प्रतिशत तक दिव्यांग भवनस्वामियों को सभी कर से छूट दे दी है। इसमें गृह, जल और सीवरकर शामिल है। वहीं सामान्य लोगों को 15 मई से 15 जुलाई तक गृहकर और सीवरकर जमा करने पर 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। यदि कर ऑनलाइन जमा करते हैं तो यह छूट 12 प्रतिशत मिलेगी। वहीं लाइसेंस शुल्क में व्यापारियों को 10 प्रतिशत की राहत दी गई है। यह छूट वाराणसी के नगर निगम ने दी है। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में सोमवार को निगम मुख्यालय में कार्यकारिणी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। करीब तीन घंटे चली बैठक में दृष्टिहीन और 80% दिव्यांग भवन स्वामियों के लिए कर में पूरी तरह छूट का निर्णय हुआ। लेकिन संबंधित भवनस्वामी को दिव्यांगता प्रमाण पत्र निगम कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा। जिन भवन स्वामियों ने इस वित्तीय वर्ष का गृहकर, सीवरकर जमा कर दिया है, उनका अगले वित्तीय वर्ष में समायोजन होगा। उपसभापति नरसिंह दास ने सभी पूर्व महापौर और नगर प्रमुख के आवास तक जाने वाले मार्गों एवं गलियों की मरम्मत का मुद्दा उठाया। पार्षद प्रवीण राय ने पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग की बदहाली का मुद्दा उठाया। कार्यकारिणी ने नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को परिक्रमा पथ पर सड़कों की मरम्मत, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, शौचालय सुविधा का निर्देश दिया। मदन मोहन तिवारी ने वर्ष 2023 से 2026 तक हुए कार्यों का ब्योरा एक सप्ताह में प्रस्तुत करने को कहा। प्रमोद राय ने ठेकेदारों को हो रहे भुगतान के संबंध में सवाल उठाए। सुशील गुप्ता ने कहा कि सड़क की खोदाई के लिए एनओसी में कड़ी शर्तें रखी जाएं। अशोक मौर्या ने कांशीराम आवास योजना की बदहाली पर सवाल उठाए। बैठक में अमरदेव यादव, हनुमान प्रसाद, माधुरी सिंह, सुशीला देवी रहीं। रेलवे की जमीन लेकर सुविधाएं दी जाएं शहर में बुनियादी सुविधाओं के लिए नगर निगम ने रक्षा संपदा विभाग और रेलवे की कुछ जमीनों को लेने के संबंध में प्रस्ताव दिया है। रक्षा संपदा विभाग से कैंटोंमेंट स्थित गुडशेड बाजार में 1.2286 हेक्टेयर, फुलवरिया फ्लाईओवर के नीचे 3.8121 हेक्टेयर, डोमरी और सूजाबाद में 19.6690 हेक्टेयर, 160 एकड़ क्षेत्र में 34.259 हेक्टेयर शामिल है। इसी तरह रेलवे से घौसाबाद में 2830 वर्ग मीटर, लहरतारा से मंडुवाडीह मार्ग पर 2029.30 वर्ग मीटर, गुडशेड बाजार में लगभग 4100 वर्ग मीटर जमीन शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम रक्षा संपदा और रेलवे को इस कीमत की अपनी जमीन देगा।

गर्मी में ठंडक और स्वाद का कॉम्बो: अचारी लौकी सलाद बनाने की आसान रेसिपी

 गर्मियों के मौसम में जब कुछ हल्का और चटपटा खाने का मन होता है तो अक्सर सलाद खाने का मन करता है. लेकिन क्या आपने कभी अचारी लौकी सलाद ट्राई किया है. इसमें लौकी की ठंडक और अचार के मसालों का चटपटा स्वाद मिलता है जो खाने का मजा कई गुना बढ़ा देता है. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि लौकी न खाने वाले भी इसे मांग-मांगकर खाते हैं. खास बात यह है कि यह सलाद बिना तेल के बनता है और झटपट तैयार हो जाता है, इसलिए हेल्दी डाइट फॉलो करने वालों के लिए भी यह एक बेहतर ऑप्शन है.  आइए जानते हैं कि लौकी का अचारी सलाद कैसे बनता है और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 1 कप कद्दूकस की हुई या हल्की उबली लौकी 1/2 कप दही 1 चम्मच अचारी मसाला (अचार का मसाला या घर का बना) 1/2 चम्मच भुना जीरा पाउडर चुटकी भर काली मिर्च 1 चम्मच नींबू का रस नमक स्वादानुसार थोड़ा सा हरा धनिया (गार्निश के लिए) लौकी का अचारी सलाद कैसे बनाते हैं?     लौकी का अचारी सलाद बनाने के लिए सबसे पहले लौकी को हल्का उबाल लें या कद्दूकस करके उसमें थोड़ा नमक मिलाकर 5 मिनट रख दें. इसके बाद उसका पानी अच्छी तरह निचोड़ लें.     अब एक बाउल में दही को अच्छी तरह फेंट लें. इसमें अचारी मसाला, नमक, भुना जीरा पाउडर, काली मिर्च और नींबू का रस डालकर अच्छे से मिलाएं.     अब इसमें तैयार की हुई लौकी डालें और अच्छी तरह मिक्स करें. ऊपर से हरा धनिया डालकर गार्निश करें और सलाद को हल्का ठंडा करके सर्व करें.     अचारी मसाले के लिए आप घर के आम या मिक्स अचार का मसाला इस्तेमाल कर सकते हैं. चाहें तो इसमें थोड़ा कटा हुआ प्याज या टमाटर भी डाल सकते हैं, इससे इसका स्वाद और बढ़ जाएगा.