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जहानाबाद में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 46 शिक्षकों का वेतन रोका गया

जहानाबाद बिहार के जहानाबाद जिले में मैट्रिक और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंटल परीक्षा के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 46 शिक्षकों का वेतन अस्थायी रूप से रोक दिया है और तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इस कदम से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। क्या है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति परीक्षा कार्य के लिए विभिन्न केंद्रों पर की गई थी। केंद्राधीक्षकों की रिपोर्ट में सामने आया कि कई शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना के अपने निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर अनुपस्थित रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने इस संबंध में कोई अनुमति भी नहीं ली। जिला शिक्षा कार्यालय ने इस मामले को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ी कार्रवाई की है। जारी आदेश में कहा गया है कि यह कृत्य उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना, स्वेच्छाचारिता, लापरवाही और अनाधिकृत अनुपस्थिति की श्रेणी में आता है। किसका कितना वेतन रोका गया इंटर कम्पार्टमेंटल परीक्षा में ड्यूटी पर लगाए गए 27 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 11 मई तक रोक दिया गया है। वहीं मैट्रिक कम्पार्टमेंटल परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले 19 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 6 मई तक स्थगित किया गया है। तीन दिन में देना होगा जवाब शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनकी सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिहार विद्यालय परीक्षा संचालन अधिनियम 1981 के तहत भी विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इस कार्रवाई के दायरे में सहायक शिक्षक से लेकर प्रधानाध्यापक तक शामिल हैं, जो विभिन्न प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों में कार्यरत हैं। क्या बोले अधिकारी अधिकारियों ने साफ कहा है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में ‘नो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। शिक्षा विभाग की इस सख्ती को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  

बिहार से सकारात्मक संदेश, सम्राट चौधरी ने जनादेश का किया स्वागत

पटना चार राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने इसे ‘तुष्टिकरण की राजनीति के अंत’ का संकेत बताया। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल की जनता को ऐतिहासिक जनादेश के लिए बधाई दी। सम्राट चौधरी ने कही ये बात बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “जहां पैदा हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वो बंगाल हमारा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जनादेश देने के लिए बंगाल की जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ जनता का हृदय से कोटि-कोटि अभिनंदन। भारत माता की जय!” ऋतुराज सिन्हा का बड़ा बयान बीजेपी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों के चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की राजनीति से अब ‘वोट बैंक’ और ‘तुष्टिकरण’ का दौर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। ममता बनर्जी पर हमला उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सत्ता से विदाई इस बात का प्रमाण है कि जनता अब उस मॉडल को स्वीकार नहीं करेगी, जहां अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के नाम पर बहुसंख्यक समाज के साथ दोहरा व्यवहार किया जाता है। ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि बंगाल की माताओं-बहनों ने अपनी असुरक्षा और युवाओं ने अपने भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ का हिसाब ‘वोट की चोट’ से चुका दिया है। उन्होंने तमिलनाडु और केरल का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग ‘सनातन धर्म’ और भारतीय संस्कृति का अपमान कर अपनी राजनीति कर रहे थे, उन्हें जनता ने कड़ा सबक सिखाया है। उनके अनुसार दक्षिण भारत अब परिवारवाद और छद्म धर्मनिरपेक्षता से बाहर निकलकर राष्ट्रवाद की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। इंडी गठबंधन पर प्रहार ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि यह प्रचंड जनादेश ‘इंडी गठबंधन’ के उन दलों के लिए करारा जवाब है, जो जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति करते रहे हैं। सुशासन बनाम विभाजनकारी राजनीति उन्होंने कहा कि देश की जनता ने साफ संदेश दिया है कि उन्हें विभाजनकारी राजनीति नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल और सुशासन चाहिए। ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि जो दल ‘वोट जिहाद’ जैसे हथकंडों पर भरोसा कर रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि अब देश में वही टिकेगा जो “सबका साथ, सबका विकास” के रास्ते पर चलेगा। उन्होंने अंत में कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति का अध्याय अब इस देश में हमेशा के लिए बंद हो चुका है।  

केरल में सत्ता बदलाव के संकेत, पिनराई विजयन पर जनमत-संग्रह जैसा बना चुनाव

केरलम केरलम विधानसभा चुनावों के नतीजों की तस्वीर तो ऐसे बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रही है, जैसे मौसम विभाग हर बारिश में भारी तूफान की चेतावनी दे देता है और फिर बूंदाबांदी भी ठीक से नहीं होती. यहां इस बार का चुनाव ऐसा रहा मानो किसी ने “विकास बनाम मूड स्विंग” का लाइव टेस्ट रख दिया हो. एक तरफ सरकार थी, जो लगातार बता रही थी कि सड़कें बन गईं, योजनाएं चल रही हैं और सब कुछ बढ़िया है. दूसरी तरफ जनता थी जो कह रही थी, “ठीक है, पर अब थोड़ा बदलाव भी देख लेते हैं.” पूरा चुनाव धीरे-धीरे उम्मीदवारों और सीटों की लड़ाई से ज्यादा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के “फैक्टर” का एग्जाम बन गया. हर सीट पर उनका नाम ऐसा गूंजा कि कई उम्मीदवारों की अपनी पहचान भी “ब्रांड विजयन” के नीचे दब सी गई. नतीजा ये कि कहीं वोट विकास के लिए पड़े, कहीं नाराज़गी के लिए, और कई जगह तो बस “अब बस भी करो” वाले मूड में. एलडीएफ को भरोसा था कि जनता खुश है, लेकिन मतदाताओं ने अपने अंदाज़ में बता दिया कि खुशी और वोट हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलते. सत्ता-विरोधी लहर ऐसी चली कि योजनाओं की लिस्ट और भाषणों की लंबाई भी उसे रोक नहीं पाई. कुल मिलाकर, ये चुनाव कम और एक तरह का राजनीतिक रियलिटी टेस्ट ज्यादा लग रहा था जहां जनता ने शांत तरीके से बता दिया कि “काम हुआ होगा, लेकिन अब किरदार बदलना चाहिए.” विजयन फैक्टर के खिलाफ वोट सीपीआई(एम) को सबसे बड़ा झटका मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के “फैक्टर” से लगा माना जा रहा है. वो ही एलडीएफ के प्रचार का मुख्य चेहरा थे, जिससे चुनाव एक तरह से उनके नेतृत्व पर जनमत-संग्रह बन गया.140 में से सभी सीटों पर एलडीएफ ने विजयन को केंद्र में रखा, जिससे उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि पीछे रह गई. कई जगह मजबूत और साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवार भी विजयन के नाम से बने नकारात्मक माहौल का शिकार हुए. मतदाताओं ने उम्मीदवार की बजाय मुख्यमंत्री के प्रति समर्थन या विरोध के आधार पर वोट किया. सत्ता-विरोधी लहर नतीजे यह संकेत देते हैं कि मतदाताओं ने एलडीएफ के इस दावे को खारिज कर दिया कि सरकार के खिलाफ कोई खास नाराजगी नहीं है. दिसंबर के स्थानीय निकाय चुनावों में मिले झटकों के बावजूद पार्टी यह मानती रही कि जनता के बीच व्यापक असंतोष नहीं है. हालांकि, वेलफेयर योजनाओं, मेगा प्रोजेक्ट्स और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों के बावजूद मतदाताओं में एक तरह की थकान और बदलाव की इच्छा स्पष्ट रूप से दिखाई दी. केरलम में ऐतिहासिक रूप से सत्ता परिवर्तन की प्रवृत्ति रही है, और 2021 का चुनाव इसका एक अपवाद माना जाता है. अब एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद, इस बार बदलाव की भावना पहले से कहीं अधिक मजबूत होती दिख रही है. अल्पसंख्यक वोटों का झुकाव मुस्लिम वोटों का कांग्रेस की ओर एकजुट होना निर्णायक माना जा रहा है. 2014 के बाद से लोकसभा चुनावों में यह प्रवृत्ति लगातार दिखी है कि मुस्लिम मतदाता कांग्रेस को अधिक मजबूत विकल्प मानते हैं. इस बार भी यह रुझान जारी रहा. यह धारणा भी असर डालती दिखी कि सीपीआई(एम) और बीजेपी के बीच कहीं न कहीं समझ है. वहीं हिंदू वोटों को साधने की कोशिश में पार्टी ने कुछ अल्पसंख्यक वर्गों को दूर कर दिया. मुस्लिम वोटों का कांग्रेस की ओर एकजुट होना इस बार भी एक अहम और निर्णायक फैक्टर माना जा रहा है. 2014 के बाद से लोकसभा चुनावों में यह रुझान लगातार दिखता रहा है कि मुस्लिम मतदाता कांग्रेस को अपेक्षाकृत मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखते हैं, और इस बार भी यह प्रवृत्ति जारी रही. वहीं राजनीतिक गलियारों में यह धारणा भी चर्चा में रही कि सीपीआई(एम) और बीजेपी के बीच कहीं न कहीं परोक्ष समझ या नरमी का माहौल है, जिसने भी वोटिंग पैटर्न को प्रभावित किया. दूसरी ओर, हिंदू वोटों को साधने की कोशिश में पार्टी की रणनीति कुछ जगह उलटी पड़ती दिखी, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय के एक हिस्से में दूरी और असहजता बढ़ी. लेफ्ट में असंतोष एलडीएफ के पारंपरिक गढ़ों, खासकर उत्तर केरल में हार और वोट शेयर में गिरावट से स्पष्ट है कि उसके कोर वोट बैंक में असंतोष बढ़ा है. पार्टी ने विकास और संगठन पर जोर दिया, लेकिन मतदाताओं में यह भावना बनी कि विचारधारा की जगह सत्ता बनाए रखना प्राथमिकता बन गया. इससे वामपंथी समर्थकों में नाराजगी बढ़ी. विकास की कहानी का असर नहीं सीपीआई(एम) ने सड़क, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन यह वोटों में तब्दील नहीं हो सका. महंगाई, बेरोजगारी, किसान संकट और कई क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमलों जैसे मुद्दों ने सरकार के खिलाफ माहौल बनाया. ईसाई समुदाय का यूडीएफ की ओर रुझान मध्य केरल में ईसाई मतदाताओं का बड़ा हिस्सा, जो 2021 में कुछ हद तक अलग हुआ था, इस बार फिर कांग्रेस की ओर लौटता दिखा. बीजेपी का ईसाई समुदाय तक पहुंच बनाने का प्रयास सफल नहीं हो पाया. फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) से जुड़ी बहस ने भी कुछ ईसाई मतदाताओं में बीजेपी को लेकर झिझक पैदा की. सबरीमला और अन्य मुद्दे सबरीमला मंदिर से जुड़े कथित सोना चोरी मामले ने भी एलडीएफ के खिलाफ माहौल बनाने में भूमिका निभाई. हालांकि बीजेपी ने इस मुद्दे को अपेक्षाकृत सीमित रूप से ही उठाया. दूसरी ओर, कांग्रेस ने वायनाड राहत राशि के दुरुपयोग का मुद्दा सामने रखा, लेकिन उसका असर भी सीमित ही दिखाई दिया. इससे कई क्षेत्रों में हिंदू मतदाताओं ने वोट विभाजन के बजाय अधिकतर सीपीआई(एम) के खिलाफ मतदान को प्राथमिकता दी, जिसका सीधा लाभ यूडीएफ को मिलता दिखा.

नई औद्योगिक नीति से छोटे व्यापारियों को फायदा, समयबद्ध भुगतान और बीमा सुरक्षा का प्रावधान

चंडीगड़ हरियाणा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) व छोटे व्यापारियों को नई औद्योगिक नीति में बड़ी राहत मिलने जा रही है। किसी भी स्वीकृत सब्सिडी, प्रोत्साहन राशि, सरकारी अनुदान या अन्य देय भुगतान में देरी होने पर उद्योग विभाग उद्यमियों व व्यापारियों को कुल राशि का आठ फीसदी वार्षिक ब्याज देगा। इसी तरह आग, चोरी और प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने पर स्मॉल ट्रेडर्स एंड एमएसएमई इंश्योरेंस स्कीम भी लागू की जाएगी। इससे उनको किफायती बीमा सुरक्षा मिलेगी और वे बड़े वित्तीय जोखिम से बच सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत उद्यमियों को इनवेस्ट हरियाणा पोर्टल पर आवेदन करना होगा। प्रारंभिक जांच के बाद पात्र किसी भी प्रोत्साहन राशि का 50 फीसदी हिस्सा सात कार्य दिवसों के भीतर जारी किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत जांच पूरी होने पर बाकी 50 फीसदी राशि 45 कार्य दिवसों में दी जाएगी। इन तय कार्य दिवसों के आगे बढ़ने पर प्रत्येक दिन के अनुसार ब्याज का लाभ स्वत: मिलेगा। पहले उद्योगों को सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि तो मिल रही है लेकिन भुगतान में देरी पर ब्याज देने या तय समय सीमा में स्वचालित निपटान की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। नई नीति पहली बार समयबद्ध भुगतान, अग्रिम 50 फीसदी रिलीज और देरी होने पर आठ फीसदी ब्याज की जवाबदेह प्रणाली लागू करेगी। एमएसएमई इंश्योरेंस स्कीम पहली से चल रही योजनाओं से अलग प्रदेश में व्यापारियों और छोटे कारोबारियों के लिए मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना और व्यापारी क्षतिपूर्ति बीमा योजना चल रही है। इन योजनाओं में मुख्य रूप से दुर्घटना, मृत्यु या सीमित कारोबारी नुकसान को कवर किया जाता है। नई स्मॉल ट्रेडर्स एंड एमएसएमई इंश्योरेंस स्कीम इससे अधिक व्यापक होगी जिसमें आग, चोरी और प्राकृतिक आपदाओं से व्यापारिक संपत्ति व स्टॉक के नुकसान को व्यवस्थित सुरक्षा मिलेगी। एमएसएमई का बढ़ता दायरा वर्ष 2004 से 2014 के दौरान करीब 33 हजार एमएसएमई इकाइयां दर्ज थीं। राज्य का कुल औद्योगिक रोजगार वर्ष 2018-19 में 10.16 लाख से बढ़कर 2023-24 में 11.91 लाख हो गया। देश के एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) में हरियाणा की हिस्सेदारी करीब 9-10 फीसदी है। अर्थव्यवस्था को अधिक सुरक्षित करने वाला फैसला : राज चावला हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सचिव राज चावला के मुताबिक समयबद्ध भुगतान और बीमा सुरक्षा से निवेश का माहौल मजबूत होगा। इससे नए उद्योग आकर्षित होंगे और छोटे व्यापारियों का भरोसा बढ़ेगा। यह फैसला प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को अधिक सुरक्षित करने वाला साबित होगा।    

छह लाख की हेरोइन बरामद, गुप्त सूचना पर पुलिस ने दबोचा नशा तस्कर

 यमुनानगर जिला पुलिस की एंटी नारकोटिक सेल ने नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब छह लाख रुपये कीमत की 126 ग्राम हेरोइन के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया है। अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स  सेल की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि गड़ी रोड, हमीदा के पास एक युवक खाली प्लॉट में नशीले पदार्थ बेचने का काम करता है। गुप्त सूचना पर पुलिस ने की कार्रवाई सूचना के आधार पर इंचार्ज अनिल कुमार के नेतृत्व में उप निरीक्षक सतीश कुमार, नवीन, एएसआई जसवीर सिंह, जयपाल, अमित और ललित की टीम का गठन किया गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध युवक को काबू कर लिया। तलाशी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में नायब तहसीलदार साढौरा कुलदीप सिंह को मौके पर बुलाया गया। तलाशी के दौरान युवक के पास से 126 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। आरोपी की पहचान पुराना हमीदा निवासी समीर पुत्र गुलजार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस कर रही जांच इंचार्ज अनिल कुमार ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि वह किस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है तथा किन-किन क्षेत्रों में नशीले पदार्थ की सप्लाई करता था। उन्होंने कहा कि जिले में नशे के कारोबार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

बिहार TRE-3: 10 उम्मीदवारों का रिजल्ट जारी, कई जिलों में मिली पोस्टिंग

पटना Bihar Public Service Commission ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पटना हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में परिणाम जारी किए गए। टीआरई-3 के 10 अभ्यर्थियों का रिजल्ट घोषित हुआ। लंबे समय से लंबित मामला अब आगे बढ़ा है। किन-किन अभ्यर्थियों का हुआ चयन जारी परिणाम में वर्ग 1 से 5 के 8 अभ्यर्थी शामिल हैं। वर्ग 6 से 8 सामाजिक विज्ञान के 2 अभ्यर्थी भी सफल हुए। ये सभी अभ्यर्थी पहले से रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे। अब इनके चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इन जिलों में मिली नियुक्ति चयनित अभ्यर्थियों को अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग दी गई है। नवादा, समस्तीपुर, खगड़िया और कैमूर शामिल हैं। इसके अलावा शेखपुरा, मुंगेर, बांका और अररिया में भी नियुक्ति हुई। शिक्षा विभाग को अनुशंसा भेजी जा चुकी है। TRE 3.0 परीक्षा से जुड़ा मामला यह पूरा मामला विज्ञापन संख्या 22/2024 से संबंधित है। विद्यालय अध्यापक प्रतियोगिता परीक्षा (TRE 3.0) के तहत चयन हुआ। सभी विषयों के रिजल्ट पहले ही जारी किए जा चुके थे। सफल अभ्यर्थियों की सूची विभाग को भेजी गई थी। आर्थिक अपराध इकाई की जांच का असर Economic Offences Unit Bihar ने परीक्षा में गड़बड़ी का मामला दर्ज किया था। कांड संख्या 06/2024 के तहत जांच शुरू हुई थी। कुछ अभ्यर्थियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया। इस कारण उनका रिजल्ट रोक दिया गया था। सील्ड कवर में रखे गए थे रिजल्ट जिन अभ्यर्थियों पर आरोप थे, उनके परिणाम सील्ड कवर में रखे गए। आयोग ने हाईकोर्ट में लंबित मामले का हवाला दिया था। अन्य अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी कर दिया गया था। विवादित अभ्यर्थियों का मामला अलग रखा गया। अब आगे क्या होगा? हाईकोर्ट में मामले के निष्पादन के बाद ही आगे फैसला होगा। सील्ड कवर वाले रिजल्ट तभी सार्वजनिक किए जाएंगे। फिलहाल 10 अभ्यर्थियों को राहत मिली है। आयोग ने प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। उम्मीदवारों के लिए अहम संदेश इस फैसले से अन्य अभ्यर्थियों को भी उम्मीद मिली है। लंबित मामलों में धीरे-धीरे समाधान निकल रहा है। पारदर्शिता बनाए रखने पर आयोग का जोर है। आने वाले समय में और अपडेट संभव हैं।  

संजय सरावगी की नई टीम में महिलाओं को मिलेगा अधिक प्रतिनिधित्व, जमीनी कार्यकर्ताओं पर जोर

पटना  सम्राट कैबिनेट विस्तार के उपरांत बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की प्रदेश संगठन की घोषणा का खाका भी तैयार है। पार्टी की ओर से पहली बार प्रदेश संगठन में 33 प्रतिशत महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने की पहल की जा रही है। अहम यह है कि महिलाओं में किसी सांसद, विधायक या विधान पार्षद की जगह कार्यकर्ता को प्राथमिकता देने की नीति पर पार्टी का विशेष बल है। ऐसे में यह संभावना प्रबल हो गई है कि वर्तमान प्रदेश संगठन में कार्यरत आठ से बढ़कर महिलाओं का प्रतिनिधित्व 12 से 14 हो जाएगा। नेतृत्व की ओर से पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी अंतिम चरण में है। संगठन की नई टीम की घोषणा को लेकर गहन मंथन चल रहा है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को संगठनात्मक ढांचे में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत सरावगी टीम में महिला कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर दिया जा रहा है। यह भी स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि महिला प्रतिनिधित्व के मामले में केवल सांसद, विधायक या विधान पार्षद जैसे जनप्रतिनिधियों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाएगा। बड़े बदलाव की पहल संगठन के अंदर यह पहल एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। अब तक प्रदेश स्तर पर महिलाओं की सहभागिता सीमित मानी जाती रही है, लेकिन नए प्रयोग के जरिए पार्टी महिला नेतृत्व को मजबूत आधार देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इससे न केवल संगठन का विस्तार होगा, बल्कि बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी बढ़ेगी।वरिष्ठ नेताओं की मानें तो सरावगी की टीम में युवा एवं अनुभवी नेताओं का संतुलन भी देखने को मिलेगा। लगभग 50 प्रतिशत नए चेहरों को मौका देने की तैयारी है, जिससे संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो सके। इसके साथ ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। महिला मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ की कोशिश महिलाओं को संगठन में अधिक भागीदारी देने से भाजपा सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ-साथ महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब सबकी नजरें सरावगी कैबिनेट और प्रदेश संगठन की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह टीम भाजपा के लिए आगामी चुनावी चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी और संगठन को नई दिशा देने का काम करेगी। वर्तमान में किस पद पर कौन महिला प्रदेश में संगठन में वर्तमान में छह महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। इसमें प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर चार महिलाएं हैं। इसमें सबसे वरिष्ठ अमृता भूषण के अतिरिक्त धर्मशीला गुप्ता, ललिता कुशवाहा एवं अनामिका पासवान नाम है। जबकि प्रदेश महामंत्री पद पर लाजवंती झा हैं। इसके अतिरिक्त मंत्री का दायित्व रीता शर्मा, शोभा सिंह एवं पूनम रविदास संभाल रही हैं।

पटना में गैस संकट का असर, लिट्टी-चाय से लेकर समोसा तक हुआ महंगा

 पटना व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 994 रुपये की भारी बढ़ोतरी का असर अब राजधानी के बाजार में साफ दिखने लगा है। होटल-रेस्टोरेंट से लेकर चाय-नाश्ते की दुकानों और स्ट्रीट फूड तक, हर जगह लागत बढ़ने का दबाव महसूस किया जा रहा है। स्थिति यह है कि लिट्टी, चाय एवं समोसा के कीमत भी बढ़े है। गैस आपूर्ति में कमी और कीमतों में उछाल ने कारोबारियों को वैकल्पिक ईंधन कोयला और लकड़ी की ओर धकेल दिया है, इससे खान-पान की कीमतों में बढ़ोतरी होने लगे है। स्ट्रीट फूड की कीमतों में पांच से 10 रुपये तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। 40-45 रुपये मिलने वाला एग राल 50-60 रुपये, 12 रुपये का समोसा 15-18 रुपये मिलने लगा है। 10 रुपये ग्लास वाली चाय की कीमत 12 से 15 रुपये तक पहुंच गई है। बाजार में मार्च के पहले सप्ताह से ही व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित है। पहले जहां शहर में हर दिन करीब पांच हजार सिलेंडर आपूर्ति दिए जाते थे, यह आंकड़ा तीन हजार के पास पहुंची है। अभी लग्न या कार्यक्रम को लेकर कार्ड के साथ आवेदन देने पड़ रहे है। कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति में करीब 30 प्रतिशत की कमी के चलते होटल-रेस्टोरेंट को लकड़ी-कोयले की भट्टी या इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं। लेकिन यह विकल्प भी सस्ता नहीं पड़ रहा। कोयला का दाम 20 रुपये बढ़ा कोयले की कीमतों में अचानक उछाल आया है। पहले 18 से 20 रुपये किलो मिलने वाला कोयला अब 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले के दाम इससे भी ज्यादा हैं। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। राजीवनगर के दुकानदार संजय ने बताया कि अब कोयला का आर्डर भी पहले देना पड़ रहा है। इसके बाद थोक व्यापारियों की ओर से आपूर्ति किया जाता है। कैटरिंग कारोबारी जैनेंद्र सिंह बताते है कि पहले कोयला वाला चूल्हा का उपयोग शाही या अन्य कार्यक्रम में नहीं होते थे, लेकिन इसकी उपयोगिता अब बढ़ी है। इसके दाम भी बढ़ने से आयोजन का बजट भी बढ़ने लगा है। एक सप्ताह में कीमतों को तेजी से दिखेगी वृद्धि बिहार राज्य व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि कमर्शियल गैस में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी बीते वर्षों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसका सीधा असर खान-पान की वस्तुओं पर पड़ेगा। आने वाले एक सप्ताह में खाद्य सामग्री की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगा। खाने-पीने की चीजों की कीमतें कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। यह इजाफा खासकर मिठाइयों, रेस्टोरेंट के मेन्यू, हास्टल मेस और स्ट्रीट फूड हर जगह कीमतों में इजाफा दिख सकता है। हालांकि कई कारोबारियों ने फिलहाल कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन वे भी मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसा संभव नहीं होगा। इसका असर सभी सेक्टर पर देखने को मिलेगा।

इंडिया-ए महिला T-20 टीम की कप्तान बनीं अनुष्का, इंग्लैंड-ए के खिलाफ अपनी कप्तानी में खेलेंगी 3 मैच

ग्वालियर  बीसीसीआई ने इंग्लैंड टूर के लिए भारतीय महिला ए क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया है. इस बार इंग्लैंड के खिलाफ T20 सीरीज की कप्तानी के लिए ग्वालियर की बेटी अनुष्का शर्मा पर भरोसा जताया है. अनुष्का शर्मा की कप्तानी में वुमन इंडियन ए क्रिकेट टीम टी20 क्रिकेट के 3 मुकाबले इंग्लैंड के खिलाफ खेलेगी।  बीसीसीआई ने घोषित की इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम भारतीय क्रिकेट में ग्वालियर का बोलबाला होने जा रहा है. ये शायद पहली बार होगा जब भारतीय क्रिकेट टीम को ग्वालियर की बेटी कप्तानी संभालेगी. ग्वालियर की अनुष्का शर्मा को टी20 मुकाबलों के लिए इंडिया-ए स्क्वाड की घोषणा के साथ इंग्लैंड टूर का टीम कप्तान बनाया है. इंग्लैंड दौरे से पहले वन डे और टी20 दोनों ही क्रिकेट फॉर्मेट के लिए बीसीसीआई ने वुमेंस इंडिया-ए स्क्वॉड्स का ऐलान कर दिया है।  अनुष्का शर्मा टी20, हरलीन देओल वन-डे की कैप्टन अनुष्का शर्मा को जहां इंग्लैंड के लिए टीम कैप्टेंसी सौंपी गई है वहीं इसी स्क्वाड में ग्वालियर की वैष्णवी शर्मा को भी टीम में शामिल किया गया. दोनों ही खिलाड़ियों के खेल में शानदार प्रदर्शन को देखते हुए बीसीसीआई ने दोनों पर भरोसा जताया है. इंडिया ए महिला टीम का इंग्लैंड टूर आगामी 20 जून से शुरू होगा. इस सीरीज के टी20 मुकाबले नॉर्थम्पटन और चेल्सफोर्ड में खेले जाएंगे. वहीं वन-डे मैचेस के लिए घोषत स्क्वॉड की कैप्टन की जिम्मेदारी एक बार फिर हरलीन देओल के कंधों पर है।  पहले लग चुके हैं चकिंग के आरोप ग्वालियर और अनुष्का शर्मा के लिए ये बड़ी ऑपर्च्युनिटी है. इससे पहले अप्रैल में साउथ अफ्रीका सीरीज में भारतीय महिला सीनियर टीम में उन्होंने अपना डेब्यू किया था और अब टीम की जिम्मेदारी संभालने का मौका उन्हें बीसीसीआई ने दिया है. ये इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि, साल 2024 में अनुष्का शर्मा पर चकिंग के आरोप लगे थे. जिस पर बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी पर बैन लगा दिया था, और अब उन्हें टीम कप्तान बना दिया है।  डेब्यू के तुरंत बाद मिली इंडिया ए की कप्तानी अनुष्का शर्मा की बात करें तो उन्होंने हाल ही में साउथ अफ्रीका दौरे पर भारत के लिए इंटरनेशनल डेब्यू किया था। अब कुछ ही दिनों के अंतराल में उन्होंने इंडिया ए की कप्तानी मिल गई है। इस खिलाड़ी ने WPL 2026 में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। इंडिया ए वुमेंस टी20 टीम की उपकप्तान वृन्दा दिनेश को बनाया गया है। जबकि प्रतिका रावल वनडे टीम की उपकप्तान हैं। यह टीम उस वक्त इंग्लैंड दौरे पर ए टीम का सामना करेगी, जिस वक्त सीनियर टीम टी20 वर्ल्ड कप खेल रही होगी। इंडिया ए बनाम इंग्लैंड ए सीरीज का शेड्यूल     पहला टी20: 20 जून 2026, नॉर्थैम्पटन काउंटी ग्राउंड     दूसरा टी20: 23 जून 2026, नॉर्थैम्पटन काउंटी ग्राउंड     तीसरा टी20: 25 जून 2026, Chelmsford काउंटी ग्राउंड     पहला वनडे: 28 जून 2026, Hove काउंटी ग्राउंड     दूसरा वनडे: 1 जुलाई 2026, टॉन्टन     तीसरा वनडे: 4 जुलाई 2026, टॉन्टन इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय महिला ए टीम के स्क्वाड     टी20 इंडिया ए स्क्वाड: अनुष्का शर्मा (कप्तान), वृन्दा दिनेश (उपकप्तान), जी कमालिनी (विकेटकीपर), उमा छेत्री, वैष्णवी शर्मा, प्रेमा रावत, पूर्वजा वेर्लेकर, जिंतीमनी कलिता, साइमा ठाकुर, सिमरन शर्मा, श्वेता सेहरावत, दीया यादव, मिन्नू मनी, शबनम शकील, तनुजा कंवर।     वनडे इंडिया ए स्क्वाड: हरलीन देओल (कप्तान), प्रतिका रावल (उपकप्तान), प्रिया पूनिया, तनिषा सिंह, जी कमालिनी (विकेटकीपर), उमा छेत्री (विकेटकीपर), तेजल हसबनीस, निकी प्रसाद, प्रेमा रावत, तनुजा कंवर, वैष्णवी शर्मा, शबनम शकील, सयाली सतघरे, जिंतीमनी कलिता, साइमा ठाकुर। हरमनप्रीत कप्तान, स्मृति मंधाना उपकप्तान: T20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान, WPL के 2 नए नाम शामिल 12 जून से शुरू होने वाले महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड की घोषणा कर दी गई है। हरमनप्रीत कौर को इस टीम की कमान सौंपी गई है और स्मृति मंधाना उपकप्तान हैं ये है इंडिया-ए (महिला) टी20 स्क्वाड अनुष्का शर्मा (कप्तान), वृंदा दिनेश (उप कप्तान), जी कमलिनी (विकेट कीपर), उमा चेट्री, वैष्णवी शर्मा, प्रेमा रावत, पूर्वाजा वर्लेकर, जिन्तिमणि कलिता, साइमा ठाकुर, सिमरन बहादुर, श्वेता सहरावत, दीया यादव, मीनू मणि, शबनम शकील, तनुजा कंवर  

शेयर बाजार घोटाले के आरोपों पर शाकिब अल हसन ने तोड़ी चुप्पी, जांच पर जताया भरोसा

बांग्लादेश बांग्लादेश के दिग्गज ऑलराउंडर शाकिब अल हसन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने शेयर बाजार में हेरफेर, भ्रष्टाचार रोधी जांच और चेक-बाउंस मामलों से जुड़े आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि लंबे समय से चल रही जांच में अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है. शाकिब अल हसन ने बताया कि जांच के दौरान उनका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला. शाकिब ने बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट bdnews24.com से कहा, 'मेरा बैंक खाता फ्रीज है, इसलिए मैं कुछ नहीं कर सकता.शायद जांच के लिए ऐसा किया गया,. लेकिन डेढ़ साल से जांच चल रही है और अभी तक कुछ नहीं मिला.' शाकिब अल हसन ने साफ कहा कि अगर जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ कोई सबूत मिलता है, तो वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं. शाकिब कहते हैं, 'अगर दोष साबित होता है तो कार्रवाई करें। अगर कुछ नहीं मिलता, तो मुझे क्लियरेंस दें और मुक्त करें.' शाकिब पर लटक रही गिरफ्तारी की तलवार हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. शाकिब अल हसन ने कहा कि अब उन्हें कुछ भी असामान्य नहीं लगता, लेकिन अपने देश लौटने पर गिरफ्तारी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. शाकिब ने ही यह भी स्वीकार किया कि वतन वापसी पर उन्हें गिरफ्तारी का डर है. शाकिब अल हसन का अपने देश लौटना फिलहाल मुश्किल है. बांग्लादश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने स्पष्ट कर दिया था कि वह शाकिब को किसी भी प्रकार की सुरक्षा की गारंटी देने की स्थिति में नहीं है. इसी कारण शाकिब पिछले कई महीनों से बांग्लादेश से बाहर हैं. निकट भविष्य में भी उनकी वापसी की संभावना बेहद कम मानी जा रही है. 39 वर्षीय शाकिब अल हसन का अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद शानदार रहा है. वह बांग्लादेश के सबसे सफल क्रिकेटर माने जाते हैं. शाकिब ने 71 टेस्ट, 247 ओडीआई और 129 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं. टेस्ट क्रिकेट में शाकिब ने 4609 रन बनाए और 246 विकेट झटके हैं. वहीं वनडे इंटरनेशनल में शाकिब के नाम पर 7570 रन और 317 विकेट दर्ज हैं. टी20 इंटरनेशनल में शाकिब ने 149 विकेट लेने के अलावा 2551 रन बनाए हैं. शाकिब अल हसन के बयान से साफ है कि वह खुद को बेगुनाह मानते हैं और जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताते हैं. अब नजर इस बात पर होगी कि संबंधित एजेंसियां इस मामले में आगे क्या फैसला लेती हैं.