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भगवंत मान सरकार का बड़ा प्लान: फिनलैंड-नीदरलैंड मॉडल से बदलेगा पंजाब

 चंडीगढ़  वैश्विक स्तर की तकनीक और नीतियों को अपनाकर पंजाब को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। हाल ही में यूरोपीय देशों के दौरे से लौटे प्रतिनिधिमंडल के अनुभवों के आधार पर सरकार अब खेती, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्रों में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस का मकसद कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर शिक्षा गुणवत्ता और राज्य में निवेश को आकर्षित करना। मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने मंगलवार पत्रकारों से बातचीत में बताया कि फिनलैंड और नीदरलैंड में आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को पूरी तरह बदल दिया गया है। पालीहाउस और ग्लास हाउस जैसी तकनीकों से एक स्क्वेयर मीटर में उत्पादन 5-6 किलो से बढ़कर 80-100 किलो तक पहुंच गया है, जबकि पानी की खपत बेहद कम और केमिकल का इस्तेमाल लगभग खत्म हो चुका है। सरकार अब इस मॉडल को पंजाब में भी बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है। शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड का मॉडल विशेष रूप से प्रभावी शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड का मॉडल विशेष रूप से प्रभावी पाया गया, जहां शिक्षकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसी तर्ज पर पंजाब में भी टीचर ट्रेनिंग और स्कूल सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने जानकारी दी कि जिन विद्यार्थियों ने हाल ही में ‘जेईई मेन’ (जेईई) परीक्षा पास की है, उन्हें बुधवार को मोहाली स्थित विकास भवन में सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद रहेंगे और छात्रों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाएंगे। उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि दौरे के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों के साथ सार्थक बातचीत हुई है। एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश की अच्छी संभावनाएं बनी हैं। कुछ कंपनियों ने पंजाब में प्लांट लगाने में रुचि भी दिखाई कुछ कंपनियों ने पंजाब में प्लांट लगाने में रुचि भी दिखाई है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार तेज मंजूरी प्रक्रियाऔर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। इसके अलावा 18 मई को अगला डेलिगेशन विदेश भेजा जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। अब तक 200 से अधिक लोग ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से पंजाब में आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

शिक्षा कैलेंडर अपडेट: राजस्थान में 35 दिन की गर्मी छुट्टी, पढ़ाई के दिन बढ़े

 जयपुर अगर आप राजस्थान के स्कूलों में पढ़ते हैं या पढ़ाते हैं, और गर्मियों की लंबी छुट्टियों में नानी के घर जाने या पहाड़ों पर घूमने की लंबी प्लानिंग कर रहे हैं… तो थोड़ा रुक जाइए. क्योंकि इस बार आपकी छुट्टियों पर सरकार ने थोड़ी 'कैंची' चला दी है. हाल ही में शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-2027 के लिए शिविरा पंचांग (Academic Calendar 2026-27) जारी कर दिया है. सबसे बड़ी अपडेट यह है कि इस बार ग्रीष्मावकाश यानी गर्मियों की छुट्टियां 17 मई, 2026 से शुरू होकर 20 जून, 2026 तक ही रहेंगी. यानी, जहां पहले 40 से 45 दिनों तक (30 जून तक) की लंबी छुट्टियां मिलती थीं, वहीं अब बच्चों को चिलचिलाती गर्मी में महज 35 दिन ही घर पर एंजॉय करने को मिलेंगे. आखिर सरकार ने छुट्टियां कम क्यों कीं? इसके पीछे दो बहुत बड़े और दिलचस्प कारण हैं. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने हाल ही में जयपुर के शिक्षा संकुल में शिक्षक संगठनों के साथ एक अहम बैठक की. फोकस एक ही था- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और बच्चों की सुरक्षा. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार शिक्षण दिवसों (Teaching Days) को बढ़ाकर 214 दिन कर दिया गया है. जब पढ़ाई के दिन बढ़ेंगे, तो जाहिर सी बात है कि छुट्टियों के दिन तो कम होंगे ही. दूसरा कारण 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' को माना जा रहा है जो हर साल 21 जून को मनाया जाता है. पहले होता यह था कि स्कूल 30 जून तक बंद रहते थे, और योग दिवस के लिए टीचर्स और स्टूडेंट्स को छुट्टियों के बीच में एक दिन के लिए स्कूल आना पड़ता था. यह किसी सिरदर्द से कम नहीं था. लेकिन अब मास्टरस्ट्रोक देखिए. छुट्टियां 20 जून को ही खत्म हो रही हैं. यानी 21 जून को स्कूल खुलेंगे और सभी लोग एक साथ मिलकर बिना किसी छुट्टी कैंसल होने की टेंशन के, आराम से योगाभ्यास कर सकेंगे. 46 डिग्री के पार पहुंचा पारा, जैसलमेर सबसे गर्म राजस्थान के टेम्परेचर की बात करें तो इस वक्त जैसलमेर सबसे गर्म है. यहां तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है. इसी तरह बाड़मेर में 46.0 डिग्री, कोटा में 45.7 डिग्री और चूरू में तापमान 45.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. IMD जयपुर के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों तक पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) चलने की चेतावनी जारी की गई है, जिसके चलते उत्तर-पश्चिमी जिलों में कुछ स्थानों पर पारा 44 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है. हालांकि पश्चिमी और उत्तरी भागों में आज दोपहर बाद मेघगर्जन के साथ धूलभरी आंधी चल सकती है और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी होने के आसार हैं, जिससे यहां गर्मी से मामूली राहत मिल सकती है. सरकार ने बदला स्कूलों का बदला समय इस भीषण गर्मी को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है. जयपुर, कोटा, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर और दौसा में बच्चों को राहत देने के लिए सुबह की शिफ्ट में कक्षाएं चलाई जा रही हैं. कोटा में 12वीं कक्षा तक का समय सुबह 7:30 से 12:30 बजे तक कर दिया गया है. वहीं, दौसा में 8वीं कक्षा तक के लिए 24 अप्रैल से 2 मई तक समय सुबह 7:30 से 12:00 बजे रहेगा. जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ में भी 8वीं तक के बच्चों का समय सुबह 7:30 से 12:00 बजे तक तय किया गया है. लू से बचने के लिए राजस्थान सरकार की गाइडलाइन राजस्थान सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस भीषण लू में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है. लू से बचाव के लिए आमजन से कहा गया है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें. जरूरी होने पर हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें, और सिर को हमेशा छाते या कपड़े से ढककर रखें. पर्याप्त पानी पिएं. ओआरएस (ORS), लस्सी, छाछ और नींबू पानी का सेवन बढ़ाएं. शराब, चाय, कॉफी और सोडा जैसे पेय पदार्थों से परहेज करें, क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं. बच्चों और पालतू जानवरों को भूलकर भी बंद खड़ी गाड़ी में अकेला न छोड़ें, अंदर का तापमान तेजी से बढ़ना जानलेवा साबित हो सकता है. चक्कर आने, कमजोरी या बेहोशी (हीट स्ट्रोक) की स्थिति में मरीज के शरीर को गीले कपड़े से पोंछें और तुरंत टोल-फ्री नंबर 108 या 112 पर कॉल करें.

ग्रामीण इलाकों में आधुनिक हेल्थकेयर, एक छत के नीचे मिल रहीं सभी सुविधाएं

रांची झारखंड के रांची जिले के अनगड़ा के लोगों के लिए शालिनी अस्पताल अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की नई उम्मीद बन गया है. यह अस्पताल आधुनिक मशीनों और नए चिकित्सा उपकरणों से लैस है और लोगों को सुरक्षित, भरोसेमंद और अच्छी इलाज की सुविधा दे रहा है. अब लोगों को इस बात की जरूरत नहीं है कि अच्छा इलाज सिर्फ बड़े शहरों में ही मिलता है. इस अस्पताल की वजह से अब ग्रामीण और आसपास के मरीजों को छोटे-बड़े इलाज के लिए दूर शहर नहीं जाना पड़ेगा. एक ही छत के नीचे मिल रहीं कई अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में माताओं और बच्चों के इलाज की खास सुविधा है. यहां अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी की जाती है. इसके साथ ही खून की जांच, एक्स-रे, ईसीजी और सामान्य सर्जरी जैसी सभी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मरीजों को मिल रही हैं. नेत्र चिकित्सा में बनाई नई पहचान, फेको विधि से हो रही सर्जरी शालिनी अस्पताल ने आंखों के इलाज में अपनी अलग पहचान बनाई है. यहां हर साल हजारों मरीजों का मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया जाता है. अभी यहां रोजाना आधुनिक ‘फेको’ विधि से सर्जरी हो रही है. यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित है, इसमें टांके नहीं लगते, समय कम लगता है और दर्द भी बहुत कम होता है. मरीजों को स्क्रीन पर दिखाई जाती है आंखों की स्थिति नई ओपीडी मशीनों के बाद मरीजों को उनकी आंखों की हालत स्क्रीन पर साफ दिख जाती है. इससे वे खुद समझ पाते हैं कि मोतियाबिंद कैसे बढ़ रहा है और समय पर इलाज क्यों जरूरी है. सर्जरी के दौरान उन्नत लेंस लगाए जाते हैं, जिससे मरीजों की नजर पहले से ज्यादा साफ और बेहतर हो जाती है. मरीजों को मिल रहे हैं बेहतर परिणाम: राणा विकास अस्पताल के प्रबंधक श्री राणा विकास ने बताया कि नई तकनीकों के इस्तेमाल से मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है. अब मरीज जल्दी ठीक हो रहे हैं और संक्रमण का खतरा भी काफी कम हो गया है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति को उसके घर के पास ही अच्छी और उच्च गुणवत्ता वाली इलाज सुविधा मिले. अस्पताल की टीम हर मरीज की देखभाल पूरी जिम्मेदारी और ध्यान से करती है.

स्टिल्ट प्लस फोर केस: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक से इनकार

चंडीगढ़ स्टिल्ट प्लस फोर नीति को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला देते हुए लोगों को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायधीश जस्टिस शील नागू व जस्टिस संजीव बैरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि रोक का आदेश केवल गुरुग्राम तक सीमित है। अन्य जिलों पर यह लागू नहीं होगा। यानी हरियाणा सरकार की स्टिल्ट प्लस फोर नीति के तहत गुरुग्राम को छोड़कर बाकी हरियाणा में चार मंजिल से ज्यादा के भवन का निर्माण हो सकेगा। साथ ही पीठ ने गुरुग्राम समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में अतिक्रमण और निर्माण नियमों के उल्लंघन के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर रोक से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। जस्टिस नागू ने रोक हटाने की मांग को लेकर दायर अर्जी पर कहा-आप लोग गुरुग्राम में सुधार चाहते हैं या नहीं। हाईकोर्ट ने यह आदेश दो अप्रैल को जारी किए गए अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुरुग्राम की बिगड़ती शहरी स्थिति पर गंभीर चिंता भी जताई। कहा कि फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण के कारण लोगों के पास चलने तक की जगह नहीं बची है। कोर्ट ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए टिप्पणी की कि वहां लोग कॉलोनियां छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें चलने के लिए जगह नहीं मिल रही। गुरुग्राम पहले ही बढ़ती आबादी के दबाव से चरमराने की कगार पर है इसलिए फिलहाल कोई राहत देना संभव नहीं है। सरकार की नीति की न्यायिक समीक्षा होगी हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की व्यापक नीति अभी भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगी और मामले की सुनवाई जारी रहेगी। जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा कोर्ट जनहित याचिका में स्टिल्ट प्लस फोर नीति पर रोक लगाने की मांग की गई है। याची पक्ष ने तर्क दिया है कि विशेषज्ञ कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए चार फ्लोर बनाने की अनुमति दे दी गई। सरकार को पहले विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए थी। कोर्ट ने माना कि बिना पर्याप्त आधारभूत संरचना के अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति देने से शहर पर बोझ बढ़ेगा। इससे सीवरेज, ड्रेनेज, ट्रैफिक, जलभराव व अन्य नागिरक समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।  

आरक्षण तय करने की प्रक्रिया बदली, राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किया संशोधित

 मधुबनी बिहार में प्रस्तावित पंचायत आम निर्वाचन 2026 की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए ‘प्रपत्र-1’ के प्रारूप प्रकाशन की तिथि में बदलाव कर दिया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह प्रकाशन 27 अप्रैल 2026 को होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से अब इसे 4 मई 2026 को जारी किया जाएगा। आयोग ने इसके साथ ही आरक्षण निर्धारण से संबंधित पूरी संशोधित समय-सारणी भी जारी कर दी है। आरक्षण तय करने का आधार: क्या है ‘प्रपत्र-1’? ‘प्रपत्र-1’ पंचायत चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसमें वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर राजस्व ग्रामवार आबादी का विस्तृत ब्योरा शामिल रहता है। इसी के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के विभिन्न पदों के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाता है। अर्थात किस वार्ड या पंचायत की सीट महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होगी, यह पूरी तरह इसी प्रपत्र पर निर्भर करता है। ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक संभावित उम्मीदवारों के लिए यह दस्तावेज निर्णायक भूमिका निभाता है। संशोधित कार्यक्रम एवं प्रमुख तिथियां: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नई समय-सारणी के अनुसार प्रक्रिया इस प्रकार आगे बढ़ेगी-     4 मई 2026: ‘प्रपत्र-1’ का प्रारूप प्रकाशन     4 मई से 18 मई 2026: दावा और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि     4 मई से 22 मई 2026: प्राप्त आपत्तियों का निपटारा     11 मई से 29 मई 2026: अपील वादों की सुनवाई     5 जून 2026: ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन     9 जून 2026: जिला गजट में अंतिम आंकड़ों का प्रकाशन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आपत्तियां केवल जनसंख्या संबंधी तथ्यों के आधार पर ही स्वीकार की जाएंगी। अन्य किसी प्रकार की आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। कहां उपलब्ध होगा प्रपत्र-1: आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रकाशन के स्थान भी निर्धारित किए हैं। यथा ग्राम पंचायत और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए संबंधित ग्राम पंचायत एवं प्रखंड कार्यालय, जिला परिषद सदस्य पद के लिए प्रखंड, अनुमंडल तथा जिला पदाधिकारी कार्यालय साथ ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा अधिकारियों को सख्त निर्देश: राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि डाटा प्रविष्टि और सत्यापन कार्य को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। संशोधित कार्यक्रम के अनुरूप निर्धारित समय-सीमा के भीतर ‘प्रपत्र-1’ का प्रकाशन सुनिश्चित करने तथा पूरी प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने को कहा गया है। संभावित उम्मीदवारों में बढ़ी सक्रियता: तिथि में बदलाव के बावजूद जिले में चुनावी तैयारियों के लिए जुटे संभावित उम्मीदवारों की नजर अब 4 मई पर टिक गई है। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी पंचायत या वार्ड की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। जिले से लेकर प्रखंड व पंचायत के राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव के बाद सरगर्मी तेज हो गई है। कई संभावित दावेदार अब अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। बता दें कि बिहार में वर्ष 2026 के अंत तक पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है। ऐसे में ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन होते ही आरक्षण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और इसके साथ ही चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।  

पंचायत चुनाव की तैयारी तेज: बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने जनसंख्या डेटा प्रकाशन 4 मई को किया

पटना बिहार में होने वाले आगामी पंचायत आम निर्वाचन की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार होने वाले प्रपत्र-1 यानी राजस्व ग्रामवार जनसंख्या विवरण के प्रकाशन की पूर्व निर्धारित तिथि में बदलाव कर दिया है। अब इसका प्रारूप प्रकाशन 27 अप्रैल को नहीं बल्कि 04 मई को किया जाएगा। इस कारण से लिया गया निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हए बताया कि किसी अपरिहार्य कारणों से समय-सारणी में संशोधन किया गया है। नए शेड्यूल के तहत अब निर्वाचन क्षेत्रों के लिए जनसंख्या आधारित आंकड़ों का मिलान और सत्यापन नए सिरे से तय समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। संयुक्त निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि डाटा प्रविष्टि और इसके सत्यापन का कार्य चुनावी पारदर्शिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। दावा और आपत्ति के लिए मिलेगा समय राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि प्रपत्र-1 के प्रारूप प्रकाशन के बाद यदि किसी नागरिक या मतदाता को इसके आंकड़ों को लेकर कोई शिकायत है, तो वे अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्ति दर्ज कराने की तिथि 04 मई से 18 मई तक निर्धारित की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग का स्पष्ट रूप से कहना है कि आपत्ति का आधार केवल वर्ष 2011 की जनसंख्या ही मान्य होगी।  राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्धारित 4 मई की समय-सीमा के भीतर प्रपत्र-1 का प्रकाशन सुनिश्चित करें ताकि चुनावी प्रक्रिया में कोई और विलंब न हो। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: सीएम सम्राट चौधरी कब करेंगे मंत्रिमंडल विस्तार? 'नई विकास टीम' पर मंथन जारी; विजय सिन्हा का क्या होगा? विशेष जानकारी कहाँ से लें? आम जनता की सुविधा के लिए आयोग ने प्रकाशन स्थलों की सूची भी जारी की है। पंचायत एवं पंचायत समिति सदस्य पद के लिए ग्राम पंचायत कार्यालय और प्रखंड (Block) कार्यालय बनाया गया है। वहीं जिला परिषद सदस्य पद के लिए प्रखंड कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और जिला पदाधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि किसी भी तरह की जानकारी के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.sec.bihar.gov.in से भी जानकारी ली जा सकती है। ऑनलाइन सुविधा और टोल-फ्री नंबर राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाताओं के लिए इस बार तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। नागरिक आयोग की वेबसाइट पर जाकर न केवल प्रपत्र-1 देख सकते हैं, बल्कि ऑनलाइन दावा या आपत्ति भी दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की सहायता, सुझाव या शिकायत के लिए आयोग के टोल-फ्री नंबर 1800-3457-243 पर संपर्क किया जा सकता है।  

दिल्ली में अब बिना PUC सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा फ्यूल

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदुषण बड़ी समस्या बन चुकी है। सालों से इस समस्या पर काम किया जा रहा है, लेकिन अभी तक बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है। दरअसल, अब सरकार ने इसे लेकर एक सख्त कदम उठाया है। दरअसल, गाड़ियों से जुड़ा एक नया सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें दिल्ली के अंदर फ्यूल पंप केवल उन्हीं गाड़ियों को फ्यूल देंगे, जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट होगा जरूरी होगा। जिन गाड़ियों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें न केवल पेट्रोल, डीजल या CNG देने से मना कर दिया जाएगा, बल्कि उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। अब किसी भी तरह के फ्यूल के लिए वैध PUC सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इस नए कदम को प्रदूषण-रोधी एक स्थायी पहल बना दिया गया है। इसका मतलब है कि ये जांचे पूरे साल चलती रहेंगी। अगर आपका PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया है, तो इससे आपको देरी का सामना करना पड़ सकता है या फिर आपके इंश्योरेंस क्लेम को भी खारिज किया जा सकता है। कई इंश्योरेंस कंपनियां प्रदूषण उत्सर्जन के नियमों का पालन करने की उम्मीद करती हैं। इसके बिना क्लेम मिलने में देरी हो या फिर क्लेम को पूरी तरह से खारिज भी किया जा सकता है। परिवहन विभाग, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस जैसी एजेंसियां इन नियमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आपकी गाड़ी के पास वैलिड PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट नहीं है और आप उसे लेकर पास के पेट्रोल पंप पर जाते हैं, तो इसके नतीजे आम जुर्माने से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। 'सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989' के तहत, अधिकारी मौके पर ही चालान काट देंगे। यह काम या तो कोई ट्रैफिक पुलिस अधिकारी कर सकता है या फिर किसी ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए किया जा सकता है। जुर्माने की रकम 10,000 रुपए या उससे ज्यादा होने की उम्मीद है। ऐसे बनवाएं PUC सर्टिफिकेट PUC सर्टिफिकेट की मदद से ये पता चलता है कि आपकी गाड़ी कितना पॉल्युशन कर रही है। दिल्ली-NCR में आपके पास ये सर्टिफिकेट होना बहुत जरूरी है, क्योंकि पॉल्युशन को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस उन गाड़ियों पर कड़ी निगरानी रखती है जो पॉल्युशन फैलाती हैं। PUC सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाता है जब PUC सेंटर पर चेकिंग के दौरान गाड़ी तय सीमा के दायरे में पाई जाए। अगर आपकी गाड़ी प्रदूषण करती है, तो गाड़ी की रिपेयरिंग या ट्यूनिंग कराने के लिए कहा जाता है। ट्रांसपोर्ट विभाग ने दिल्‍ली के कई पेट्रोल पंप और वर्कशॉप पर पॉल्युशन चेकिंग सेंटर की लिस्ट जारी की है। लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें। PUC सर्टिफिकेट को लेकर कानून एक समय के बाद कार का PUC सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य हो जाता है। यदि आपके पास PUC सर्टिफिकेट नहीं है, या फिर एक्सपायर हो चुका है तो मोटर वीइकल्‍स एक्ट, 1988 की धारा 190(2) के तहत चालान काटा जाता है। इसमें 10,000 रुपए का जुर्माना या 6 महीने की जेल या फिर दोनों हो सकते हैं। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट विभाग अपनी तरफ से PUC सर्टिफिकेट ना होने पर गाड़ी के ओनर का लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड भी कर सकता है। यदि PUC सर्टिफिकेट होने के बाद भी गाड़ी पॉल्युशन ज्यादा कर रही है, तब 7 दिन के अंदर नया PUC सर्टिफिकेट लेना होगा।

टॉपर देने वाला स्कूल भी जांच में कोडरमा में शिक्षा विभाग की सख्ती, शिक्षकों से स्पष्टीकरण

कोडरमा  झारखंड बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा 2026 में कोडरमा जिले का रिजल्ट इस बार काफी खराब रहा है. पिछले साल जिला पहले नंबर पर था, लेकिन इस बार 20वें स्थान पर पहुंच गया है. इससे कई सवाल उठ रहे हैं. खासकर सालभर चलाए गए प्रोजेक्ट इम्पैक्ट, प्रोजेक्ट रेल और आवासीय कोचिंग जैसी योजनाएं भी सवालों में हैं. शिक्षा विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं. इसी को गंभीर मानते हुए विभाग ने 40 स्कूलों के प्रिंसिपल, प्रभारी प्रिंसिपल और जिन विषयों में छात्र फेल हुए, उन शिक्षकों से जवाब मांगा है. सभी को दो दिन के अंदर बताना होगा कि उनके स्कूल का रिजल्ट 100% क्यों नहीं रहा. अविनाश राम के स्तर से जारी पत्र में कहा जिला शिक्षा पदाधिकारी अविनाश राम के स्तर से जारी पत्र में कहा गया है कि वार्षिक माध्यमिक परीक्षा 2026 में कोडरमा जिले का परीक्षाफल काफी निराशाजनक रहा है. पूर्व में कई बार बैठक और वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उपायुक्त और मेरे स्तर से शत प्रतिशत परिणाम हासिल करने को लेकर कई निर्देश दिया गया था, लेकिन आप लोगों के द्वारा कार्य में शिथिलता बरती गई है जिसके परिणाम स्वरूप कोडरमा जिले में 93़86 प्रतिशत छात्र छात्राएं उतीर्ण हुए हैं. जो राज्य के औसत प्रतिशत से भी कम है. पत्र में आगे कहा गया है कि आखिर किस परिस्थिति में आपके विद्यालय का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शत-प्रतिशत नहीं रहा. अगर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हुआ तो अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की जाएगी. बता दें कि इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में कोडरमा जिले से 12,214 छात्र छात्रायें शामिल हुए थे ,जिसमे से 11,465 सफल रहे ,जबकि 749 असफल रहे़ उतीर्ण करने वालों में प्रथम श्रेणी से 6196, द्वितीय श्रेणी से 4513 और तृतीय श्रेणी से 756 छात्र-छात्राएं शामिल हैं. जिला टॉपर देने वाले स्कूल के प्राचार्य से भी स्पष्टीकरण बताया जाता है कि शिक्षा विभाग ने जिन 40 स्कूलों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक-शिक्षिकाओं से स्पष्टीकरण मांगा है उसमें इस वर्ष जिला टॉपर देने वाला विद्यालय भी शामिल है़. इस वर्ष के परिणाम में उत्क्रमित उच्च विद्यालय सोनपूरा जयनगर की राजनंदिनी जिला टॉपर बनी थी, जबकि रानी जिले में दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन इस विद्यालय से परीक्षा देने वाले कुल 130 विद्यार्थियों में दो अनुतीर्ण हो गए़. ऐसे में शत प्रतिशत परिणाम नहीं रहने पर विभाग ने प्रधानाध्यापक और अनुतीर्ण विषय के शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है. किसी में एक-दो तो किसी में 25-28 बच्चे हो गए हैं फेल जानकारी सामने आई है कि जिले के कुछ स्कूल ऐसे हैं जिनके 1 या 2 बच्चे अनुर्तीर्ण हुए हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जहां से परीक्षा देने वाले कुल विद्यार्थियों में 25 से 28 की संख्या में विद्यार्थी अनुतीर्ण हो गए हैं. हालांकि, इन विद्यालयों से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी ज्यादा है. इनसे मांगा गया है स्पष्टीकरण सीएच प्लस टू विद्यालय झुमरीतिलैया, गांधी उच्च विद्यालय झुमरीतिलैया, राजकीयकृत 2 उच्च विद्यालय कोडरमा, पीएम श्री परियोजना बालिका प्लस 2 उच्च विद्यालय कोडरमा, उत्क्रमित उच्च विद्यालय गझंडी, खरकोटा, इंदरवा देहाती, उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय पथलडीहा, डुमरडीहा, मेघातरी, इंदरवा देहाती, कस्तूरबा गाँधी बालिका आवासीय विद्यालय, कोडरमा, सर्वोदय 2 उच्च विद्यालय मरकच्चो, परियोजना 2 उच्च विद्यालय देवीपुर, परियोजना बालिका उच्च विद्यालय मरकच्चो, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय जगदीशपुर, उत्क्रमित उच्च विद्यालय अम्बाडीह, सिमरिया, योगिडीह, राज्य सम्पोषित 2 उच्च विद्यालय बासोडीह, परियोजना 2 उच्च विद्यालय, मीरगंज, उत्क्रमित उच्च विद्यालय पोखरडीहा, राजाबर, पचाने, उत्क्रमित उच्च विद्यालय ढाब, बच्छेडीह, लक्ष्मीपुर, जानपुर, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय मसमोहना, बेहराडीह, ढुब्बा, रामेश्वर मोदी महादेव मोदी 2 उच्च विद्यालय, चंदवारा, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय ढाब, जयपुर कांको, उत्क्रमित उच्च विद्यालय उरवां, जौंगी, विरसोडीह, हरणो, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय बेंदी, उत्क्रमित उच्च विद्यालय गोदखर और सोनपुरा.

अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश,गोपालगंज लूट केस में मुंबई तक जुड़े तार

 गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में दीपक ज्वेलर्स में हुई सनसनीखेज लूट और हत्याकांड मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार अपराधी के बयान से पता चला है कि इस पूरी वारदात की साजिश गुजरात के एक होटल में रची गई थी और इसमें अंतरराज्यीय गिरोह शामिल था, जिसके तार मुंबई तक जुड़े हैं। गुजरात के होटल में बनी थी साजिश भोरे थाना क्षेत्र के लाला छापर स्थित दीपक ज्वेलर्स में हुई इस वारदात को लेकर गिरफ्तार अपराधी सुमित सिंह उर्फ रोहित ने पुलिस को बताया कि करीब 20 दिन पहले गुजरात के उमरगांव स्थित होटल ‘दर्शन’ में गिरोह के सभी सदस्य इकट्ठा हुए थे। यहीं पर कुख्यात मनिंदर मिश्रा उर्फ बड़का भैया और गोलू मिश्रा ने लूट की पूरी योजना बनाई थी। लूट के लिए करोड़ों का लालच, 10-10 लाख का वादा अपराधियों को बताया गया था कि ज्वेलर्स की दुकान में करोड़ों के जेवरात हैं। लूट के बाद मिलने वाले हिस्से से सभी मुंबई में आराम की जिंदगी जी सकते हैं। गिरोह के हर सदस्य को काम के बदले 10-10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। मुंबई से मंगाए गए थे आधुनिक हथियार वारदात को अंजाम देने के लिए हथियारों का बड़ा जखीरा मुंबई से मंगाया गया था। सुमित ने बताया कि गोलू मिश्रा खुद मुंबई गया था और वहां से हथियार लेकर आया। इसके बाद विशाल यादव और सुमित को मुंबई बुलाया गया, जहां उन्हें एक बैग दिया गया, जिसमें 7 पिस्टल और 200 जिंदा कारतूस थे। इसके बाद सभी ट्रेन से वलसाड से गोरखपुर पहुंचे और फिर गोपालगंज पहुंचे। विरोध करने पर गोली मारने का था आदेश अपराधियों को साफ निर्देश दिया गया था कि लूट के दौरान अगर कोई विरोध करे, तो उसे सीधे गोली मार दी जाए। इसी वजह से दुकान में घुसते ही अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गिरोह में विशाल यादव, शत्रुघ्न राम, रोहित राम, फरमान और गोल्डन जैसे अपराधी शामिल थे। सभी दो बाइक और एक बोलेरो से वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। झाड़ियों से बरामद हुए जेवरात और हथियार पुलिस ने गिरफ्तार सुमित की निशानदेही पर करमासी गांव के एक बगीचे से लूटे गए सोने-चांदी के जेवरात और घटना में इस्तेमाल पिस्टल बरामद कर लिए हैं। सुमित ने बताया कि घटना के बाद जब भीड़ ने उनका पीछा किया, तो वह डर गया और जेवरात व हथियार झाड़ियों में छिपाकर भागने की कोशिश की। पुलिस इस मामले में बाकी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।  

जमीन कब्जा केस में जेडीयू विधायक अमरेंद्र पांडेय को कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा

 गोपालगंज गोपालगंज से जेडीयू विधायक अमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय को बड़ी राहत मिली है। जमीन कब्जे और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के एक गंभीर मामले में कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर 7 मई तक रोक लगा दी है। विधायक के साथ उनके सहयोगी राहुल तिवारी को भी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई है। इस फैसले के बाद गोपालगंज की सियासत में हलचल तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? यह पूरा विवाद गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के बेलहिया से जुड़ा है। आरोप है कि विधायक अमरेंद्र पांडेय और उनके करीबियों ने फर्जी कागजातों के जरिए सरकारी और निजी जमीनों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। इस मामले में उन पर भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण देने का भी गंभीर आरोप है। किरण सिन्हा नामक महिला की शिकायत के बाद मीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पिछले दिनों विधायक और उनके सहयोगियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। कोर्ट में हुई जोरदार बहस सोमवार को इस मामले पर कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। विधायक की ओर से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन मिश्र ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के सामने दलील दी कि विधायक को राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस डायरी और एलसीआर रिकॉर्ड की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक विधायक के खिलाफ कोई भी सख्त कदम न उठाया जाए। 7 मई को होगी अगली सुनवाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की है। तब तक पुलिस डायरी और अन्य संबंधित दस्तावेजों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। विधायक पप्पू पांडेय के समर्थकों के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। विधायक ने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार और शासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।