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धीमी ओवर गति पड़ी भारी, भारत पर 20 और वेस्टइंडीज पर 10 फीसदी मैच फीस का जुर्माना

नई दिल्ली भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले में पांच विकेट से हार झेलनी पड़ी थी. 3 सितंबर (शनिवार) को मुल्लांपुर में आयोजित इस मुकाबले में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के सामने 352 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे मेहमान टीम ने कप्तान शाई होप के नाबाद 162 रनों की बदौलत 10 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. भारतीय टीम शुरुआती दो मुकाबले जीत सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुकी थी. हालांकि आखिरी मैच में हार के चलते भारतीय टीम वेस्टइंडीज का सूपड़ा साफ नहीं कर सकी. अब वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने दोनों टीमों पर तगड़ा एक्शन लिया है. भारत और वेस्टइंडीज दोनों टीमों पर धीमी ओवर गति को लेकर कार्रवाई हुई है. आईसीसी ने भारतीय टीम पर मैच फीस का 20 प्रतिशत, जबकि वेस्टइंडीज की टीम पर 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया है. भारत निर्धारित समय में चार ओवर पीछे रह गया, जबकि वेस्टइंडीज की टीम दो ओवर कम कर पाई. समय से जुड़ी रियायतों को शामिल करने के बाद दोनों टीमों को न्यूनतम ओवर रेट के नियम का दोषी पाया गया. आईसीसी इंटरनेशनल पैनल ऑफ मैच रेफरी के प्रकाश भट्ट ने दोनों टीमों पर यह जुर्माना लगाया. भारत ने चार ओवर कम फेंके आईसीसी की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के मुताबिक निर्धारित समय में कम फेंके गए प्रत्येक ओवर के लिए खिलाड़ियों की मैच फीस का 5 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है. इसी नियम के तहत भारत पर चार ओवर कम होने के कारण 20 प्रतिशत और वेस्टइंडीज पर दो ओवर कम होने के चलते 10 प्रतिशत जुर्माना लगा. भारत और वेस्टइंडीज के कप्तानों ने धीमी ओवर गति के आरोपों को स्वीकार कर लिया और आईसीसी की ओर से प्रस्तावित सजा पर भी सहमति जताई. साथ ही दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया, इसलिए मामले में औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी. इस मामले में मैदानी अंपायर जयरामन मदनगोपाल और सैम नोगाज्स्की के साथ थर्ड अंपायर शरफुद्दौला इब्ने शाहिद और फोर्थ अंपायर वीरेंद्र शर्मा ने आरोप लगाए थे. इस तरह सीरीज के आखिरी वनडे के बाद दोनों टीमों को मैदान पर प्रदर्शन के अलावा धीमी ओवर गति की कीमत भी चुकानी पड़ी.

PDS में सरसों तेल के पैकिंग नियम बदले, 21 अक्टूबर से लाभार्थियों को मिलेगा तेल

चंडीगढ़ हरियाणा में गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सरसों का तेल उपलब्ध कराने के पैकिंग प्रारूप में बदलाव किया गया है। अब इन परिवारों को पहले से निर्धारित पैक के स्थान पर 500 एमएल और एक लीटर के पैक में सरसों का तेल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश में करीब 39.89 लाख बीपीएल/एएवाई परिवारों के लिए यह तेल वितरित किया जाना है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय की ओर से हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड (एचएआइसी) के प्रबंध निदेशक को जारी पत्र में अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के लिए सरसों तेल की आपूर्ति और वितरण की प्रक्रिया तय की गई है। सप्लाई के 15 दिनों के भीतर एचएआइसी को भुगतान 174 रुपये प्रति लीटर की दर से किया जाएगा। इसके बाद रूटीन चक्र में भुगतान 15 दिन के बाद 180 रुपये प्रति लीटर की दर से होगा। 15 से 20 अक्टूबर तक तेल की डिलीवरी डिपुओं तक होगी विभाग के अनुसार अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में करीब 39.89 लाख बीपीएल/एएवाई परिवारों को सरसों तेल वितरित किया जाना है। अगस्त में 30 लाख लीटर, जबकि सितंबर और अक्टूबर में 37-37 लाख लीटर सरसों तेल की आवश्यकता बताई गई है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 10 से 15 अक्टूबर तक अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के लिए सभी जिलों में करीब 104 लाख लीटर सरसों तेल कानफेड के सभी फोकल प्वाइंट्स पर उपलब्ध करा दिया जाए। इसके बाद परिवहन ठेकेदार 15 से 20 अक्टूबर तक तेल की डिलीवरी डिपुओं तक करेंगे और 21 अक्टूबर 2026 से लाभार्थियों को इसका वितरण शुरू कराया जा सकेगा। विभाग ने आगे की व्यवस्था भी स्पष्ट की है। प्रत्येक महीने अगले माह के लिए सरसों तेल की मांग पिछले माह की 20 से 25 तारीख तक जिलों के कानफेड फोकल प्वाइंट पर भेजी जाएगी। परिवहन ठेकेदार 25 से 30 तारीख तक इसकी डिलीवरी डिपुओं तक कराएंगे और अगले महीने की एक तारीख से लाभार्थियों को वितरण शुरू कराया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सप्लाई के समय कोई भी बोतल खुली नहीं होनी चाहिए। इतनी बोतलों की होगी जरूरत माह -सरसों तेल की मात्रा -बोतलों की मात्रा अगस्त -30 लाख लीटर -करीब 8 लाख 500 एमएल व 26 लाख एक लीटर बोतल सितंबर -37 लाख लीटर -करीब 10 लाख 500 एमएल व 32 लाख एक लीटर बोतल अक्टूबर -37 लाख लीटर -करीब 10 लाख 500 एमएल व 32 लाख एक लीटर बोतल  

सचिन के आखिरी टेस्ट में 10 विकेट लेने वाले प्रज्ञान ओझा अब संभालेंगे सिलेक्शन की कमान

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की चयन समिति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को अजीत अगरकर के पद छोड़ने के बाद कथित तौर पर अंतरिम इंटरीम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत के लिए 24 टेस्ट मैच खेल चुके ओझा अब टीम इंडिया के आगामी दौरों के लिए स्क्वाड चुनने की अहम प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रज्ञान ओझा को मिली जिम्मेदारी हाल ही में गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले से ठीक पहले प्रज्ञान ओझा ने चयन समिति के अन्य सदस्यों शिव सुंदर दास, अजय रात्रा और आरपी सिंह के साथ मिलकर मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ एक लंबी बैठक की। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के आगामी न्यूजीलैंड दौरे और बहुप्रतीक्षित टीम के चयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। न्यूजीलैंड सीरीज पर ध्यान सेलेक्टर्स की इस बैठक का मुख्य ध्यान न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी पांच मैचों की टी20आई और वनडे सीरीज के साथ-साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम को अंतिम रूप देना था। इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड दौरे पर जाने वाली इंडिया ए टीम के तीन टेस्ट मैचों के लिए भी खिलाड़ियों के चयन पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सचिन और रोहित से खास कनेक्शन पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा का अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद शानदार रहा है। वे सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक 200वें और अपने करियर के आखिरी टेस्ट मैच के हीरो रहे थे जिसमें उन्होंने 10 विकेट झटकर मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता था। इसके अलावा, आईपीएल में वह रोहित शर्मा की कप्तानी में डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस जैसी टीमों के लिए भी खेल चुके हैं। मैदान पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अब वे भारतीय चयन समिति में इस नई भूमिका को बखूबी संभाल रहे हैं।  

सबालेंका को 34वीं रैंक की बार्तुनकोवा ने हराया, उधर अलकराज ने जापान ओपन में बनाई सेमीफाइनल में जगह

 बीजिंग  विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज एरिना सबालेंका को रविवार को चीन ओपन के तीसरे दौर में चेक गणराज्य की निकोला बार्तुनकोवा ने सीधे सेटों में हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। विश्व रैंकिंग में 34वें स्थान पर काबिज बार्तुनकोवा ने चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन सबालेंका को करीब डेढ़ घंटे में 6-4, 6-3 से मात दी। इसके साथ ही टूर्नामेंट के पहले ही सप्ताह में दोनों शीर्ष वरीय खिलाड़ी बाहर हो गईं। हाल ही में विश्व की नंबर एक खिलाड़ी बनीं एलेना रिबाकिना शनिवार को ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई थीं और अब सबालेंका के बाहर होने के साथ बीजिंग में जारी डब्ल्यूटीए-1000 प्रतियोगिता से दोनों शीर्ष वरीय खिलाड़ियों की विदाई हो गई है। पि छले महीने यूएस ओपन में रिबाकिना के हाथों खिताब की हैटट्रिक से चूकने वाली सबालेंका ने पहले सेट में पांच ब्रेक पाइंट गंवाए। बीजिंग में उनका संघर्ष जारी रहा। 28 वर्षीय बेलारूसी खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में कभी क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सकी हैं। अब बार्तुनकोवा का सामना आस्ट्रिया की 24 वर्षीय सिंजा क्राउस से होगा, जिन्होंने इससे पहले दयाना यास्त्रेम्स्का को 6-1, 6-4 से हराया। अलकराज सेमीफाइनल में पहुंचे शीर्ष वरीयता प्राप्त कार्लोस अलकराज ने रविवार को जापान ओपन के सेमीफाइनल में जगह बना ली। चार महीने तक कलाई की चोट के कारण कोर्ट से दूर रहने के बाद उनकी शानदार वापसी जारी है। अलकराज ने अंतिम चार में जगह बनाई, क्योंकि उनके क्वार्टर फाइनल प्रतिद्वंद्वी डेनिस शापोवालोव को कूल्हे की चोट के कारण मुकाबले के दौरान रिटायर होना पड़ा। गत चैंपियन अलकराज 82 मिनट के खेल के बाद 7-6 (4), 2-1 से आगे थे, तभी कनाडाई खिलाड़ी ने मुकाबले से हटने का फैसला किया। अलकराज ने पिछले सप्ताह लेवर कप में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने सिंगल्स मुकाबले में टेलर फ्रिट्ज को हराकर यूरोप को खिताब दिलाने में मदद की थी। शापोवालोव ने पहले सेट में कड़ा मुकाबला किया और 5-4 के स्कोर पर सेट पाइंट भी हासिल किया। अलकराज ने शानदार ड्राप शाट लगाकर इस खतरे को टाला और इसके बाद प्रभावशाली टाईब्रेक जीतकर सेट अपने नाम कर लिया। सेमीफाइनल में अलकराज का सामना हमवतन जाउमे मुनार से होगा।

‘पिंक कार्ड घर भूल आए…’ दिल्ली में मुफ्त बस यात्रा के नियम से महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली 'भैया, हमारे पास दिल्ली का आधार कार्ड नहीं है, फ्री टिकट दे दो ना…', 'दो स्टॉप पर ही जाना है, पिंक कार्ड घर पर भूल आए', 'आधे पैसों में टिकट दे दो भैया', दिन के करीब 11:45 पर मधु बिहार से महरौली जा रही क्लस्टर बस में रविवार को कुछ इसी तरह की आवाजें सुनाई दीं। महिलाओं के मुफ्त सफर को लेकर नए नियमों के बीच टिकट लेने के दौरान महिला यात्री और कंडक्टर आमने-सामने नजर आए। कोई मुफ्त यात्रा के लिए दस्तावेज दिखाने की बात कर रहा था तो कोई पिंक कार्ड घर पर छूट जाने का हवाला दे रही थी। बस में चढ़ते ही महिलाओं की ओर से मुफ्त सफर को लेकर सवाल शुरू हो गए। कंडक्टर एक-एक यात्री को समझाने और टिकट काटने में उलझे रहे थे। कई बार एक महिला को समझाने में इतना समय लग रहा था कि पीछे खड़े यात्रियों को इंतजार करना पड़ा। कंडक्टर का कहना था कि सिर्फ उन्हें ही मुफ्त टिकट मिलेगा जिने पास पिंक कार्ड है। एनबीटी रिपोर्टर से कंडक्टर ने कहा कि उन्हें पहले यह देखना पड़ रहा है कि महिला यात्री मुफ्त सफर की पात्रता पूरी करती है या नहीं, इसके बाद ही टिकट जारी किया जा रहा है।     यह आदेश जारी हो चुके हैं। इस बीच बस कुछ पुरुष यात्रियों की टिप्पणी से महिलाओं में नाराजगी दिखी। दूसरे राज्य की महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत नई व्यवस्था से सबसे अधिक परेशानी उन महिलाओं को हो रही है जो दूसरे राज्यों से हैं और दिल्ली में रहती हैं या काम करती हैं। महिलाओं ने बताया कि वे दिल्ली में लंबे समय से रह रही हैं, लेकिन उनके पास दिल्ली का आधार कार्ड या मांगे जा रहे दस्तावेज नहीं है। ऐसे में उन्हें मुफ्त यात्रा का लाभ लेने में दिक्कत आ रही है। एनसीआर के शहरों से दिल्ली आकर रहने वाले लोगों की भी यही शिकायत थी। एक महिला यात्री ने कहा कि हम कई साल से दिल्ली में रह रहे हैं। अगर किसी दस्तावेज की जरूरत है तो इसकी जानकारी पहले से साफ तौर पर मिलनी चाहिए।  

एशियन गेम्स में भारत की शानदार कामयाबी, पीएम मोदी ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली एशियन गेम्स-2026 खत्म हो चुके हैं और भारत ने कुल 85 मेडल्स के साथ अपना सफर खत्म किया। हालांकि, पिछले संस्करण के मुकाबले ये संख्या काफी कम है, लेकिन मेडल टैली में भारत फिर भी चौथे स्थान पर रहने में सफल रहा। इस सफलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को बधाई दी है। भारत ने चीन में खेले गए पिछले एशियन गेम्स में कुल 106 मेडल जीते थे। इस बार भारतीय खिलाड़ी 100 के आस-पास भी नहीं पहुंच सके। भारत के हिस्से कुल 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। भारत ने इस बार कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं जिनमें आर्चरी और मुक्केबाजी सहित हॉकी ने अहम योगदान दिया। पीएम मोदी की बधाई पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए खिलाड़ियों के जुनून, जज्बे की सराहना की है और हर किसी को बधाई दी है। उन्होंने लिखा, "एशियन गेम्स-2026 खत्म हो गए हैं और ऐसे में मैं भारतीय दल के हर सदस्य को प्रतिबद्धता, जुनून और बेहतरीन खेल भावना के साथ इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बधाई देता हूं। सभी मेडल विजेताओं को बधाई जिनकी सफलता ने देश को खुशी के पल दिए। उम्मीद करता हूं कि इन खेलों में मिली सफलता आने वाले सालों में कई और उपलब्धियों को प्रेरित करेगी। उम्मीद करता हूं कि ये उपलब्धियां जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में योगदान देंगी।"   आखिरी दो दिन में हुआ कमाल भारत ने इन खेलों में आखिरी दो दिन में शानदार कमाल किया और 11 गोल्ड मेडल अपने नाम किए जिससे मेडल टैली में उसके स्थान में गजब का इजाफा हुआ। भारत पहले टॉप-10 में नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे भारतीय खिलाड़ियों ने मेडल जीते और भारत को आगे बढ़ने का मौका दिया। चीन 341 मेडल के साथ पहले स्थान पर रहा जिसमें 169 गोल्ड, 89 सिल्वर और 83 ब्रॉन्ज मेडल हैं। उसके बाद मेजबान जापान है जिसने कुल 269 मेडल जीते हैं। इसमें से जापान के हिस्से 83 गोल्ड, 95 सिल्वर और 91 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। साउथ कोरिया कुल 160 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर है। इस देश के हिस्से 39 गोल्ड, 43 सिल्वर और 68 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं।

गंगा पर रेल कनेक्टिविटी को बड़ा बूस्ट, 2400 करोड़ के नए पुल से बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार

 पटना मोकामा में गंगा नदी पर राजेंद्र पुल के समानांतर बनाए गए नए डबल लाइन रेल पुल के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस), पूर्वी सर्किल कोलकाता गुरु प्रकाश ने शनिवार व रविवार को नवनिर्मित पुल, राजेंद्रपुल-हाथीदह ऊपर-रामपुर डुमरा रेलखंड तथा टाल स्टेशन का दो दिवसीय संरक्षा निरीक्षण पूरा कर लिया। सीआरएस से प्राधिकार प्राप्त होते ही नया रेल पुल माल और यात्री ट्रेनों का परिचालन के लिए सोमवार से उपलब्ध हो गया है। रविवार रात रेलवे की इस उपलब्धि की जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने इंटरनेट मीडिया हैंडल एक्स पर साझा की। रेल मंत्री नए रेल पुल पर ट्रायल का एक वीडियो पर पोस्ट किया है। रविवार को नए पुल से ट्रेन का अलग अलग स्पीड में ट्रायल किया गया। जिसके बाद रविवार रात सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट दी। करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह नया रेल पुल वर्तमान राजेंद्र सेतु के समानांतर, पटना छोर की तरफ करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। इस पर दोहरी रेल लाइन बिछाई गई है। करीब 15.5 किलोमीटर लंबे पूरे प्रोजेक्ट में गंगा नदी पर 1.9 किलोमीटर का मुख्य पुल शामिल है। मुख्य पुल में गंगा के ऊपर 17 स्टील स्पैन बनाए गए हैं। इसके अलावा 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायडक्ट, आठ लघु पुल, दो सड़क उपरि पुल और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण किया गया है। एक पुराने पुल के साथ दो नई लाइनें, अब गंगा पर कुल तीन लाइनें नए डबल लाइन पुल के चालू होने के बाद पुराने राजेंद्र सेतु से भी रेलवे परिचालन जारी रहेगा। इस तरह राजेंद्र पुल क्षेत्र में कुल तीन रेल लाइनों की उपलब्धता हो जाएगी। इससे मोकामा-राजेंद्र पुल रेलखंड की क्षमता में बड़ी वृद्धि होगी और उत्तर तथा दक्षिण बिहार के बीच ट्रेनों के संचालन को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। नए पुल के दोनों छोर के स्टेशन वर्तमान रेल नेटवर्क से ही जुड़े रहेंगे। उत्तर दिशा में हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा तथा दक्षिण दिशा में राजेंद्रपुल और बरौनी स्टेशन से इसका संपर्क रहेगा। नए पुल का निर्माण इस तरह किया गया है कि मौजूदा पुल के एप्रोच में न्यूनतम बदलाव करना पड़े। उत्तर-पूर्व के लिए भी मजबूत होगा रेल संपर्क नए पुल के चालू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों के बीच रेल संपर्क को भी मजबूती मिलेगी। अतिरिक्त दोहरी लाइन उपलब्ध होने से यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन में भी सुविधा होगी। रेलवे के अनुसार, इस परियोजना के बाद इस क्षेत्र में रेल यातायात की क्षमता में अनुमानतः 2.5 गुना तक वृद्धि हो सकती है। अतिरिक्त रेल लाइन मिलने से ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन आएगा। मालगाड़ियों के परिचालन में समय और लागत कम होने की उम्मीद है, जिसका असर व्यापारिक गतिविधियों और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही पर भी पड़ेगा।

गुरुग्राम-फरीदाबाद के फ्लैट मालिकों को राहत की तैयारी, एक मंजिल पर अलग बिजली कनेक्शन का रास्ता साफ

चंडीगढ़  हरियाणा के मेट्रो शहरों में एक मंजिल पर एक से अधिक मकानों में अब अलग-अलग बिजली कनेक्शन दिए जाने की तैयारी की जा रही है। लंबे समय से उपभोक्ताओं की मांग तथा गुरुग्राम समेत कई जिला अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों के बाद इस मुद्दे पर हरियाणा विद्युत नियामक आयोग द्वारा छह अक्टूबर को जन सुनवाई आयोजित की जाएगी। इस सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हरियाणा के मेट्रो शहरों विशेषकर गुरुग्राम तथा फरीदाबाद में विकसित हो रही ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में अक्सर एक फ्लोर पर एक से अधिक मकान हैं। वर्तमान में फ्लोर में केवल एक कनेक्शन दिया जा रहा है, जिस कारण अक्सर इन मकानों में रहने वाले लोगों के झगड़े होते रहते हैं। इस संबंध में गुरुग्राम की अदालत अलग-अलग बिजली कनेक्शन दिए जाने के निर्देश दे चुकी है। झुग्गियों में भी बिजली कनेक्शन दिए जाने का प्रविधान बिजली को जीवन का जरूरी हिस्सा मानते हुए सरकार ने वर्ष 2023 में बिल्डिंग कोड में बदलाव कर हरियाणा में अवैध कालोनियों तथा झुग्गियों में भी बिजली कनेक्शन दिए जाने का प्रविधान किया है। इसी को आधार बनाते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने एक ही मंजिल पर निर्मित बहु-फ्लैटों या हरियाणा भवन संहिता के उल्लंघन में बनाए जा रहे फ्लैटों को बिजली कनेक्शन जारी करने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगने हेतु हरियाणा विद्युत विनियामक बोर्ड के समक्ष याचिका दायर की है। छह अक्टूबर को होगी सुनवाई याचिकाकर्ता ने एक ही मंजिल पर निर्मित कई फ्लैटों के लिए अलग-अलग बिजली कनेक्शन प्रदान करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने और नियमों में उपयुक्त संशोधन करने की मांग की है। वर्तमान में ऐसा कोई नियम नहीं है जिसमें एक ही फ्लोर पर बने एक से अधिक मकानों को अलग-अलग कनेक्शन दिए जा सकें। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के पास ऐसे ढेरों आवेदन तथा ज्ञापन हैं, जिनमें यह मांग उठाई गई है। एचईआरसी के समक्ष दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया गया है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने इस संबंध में छह अक्टूबर को जनसुनवाई आयोजित की है। इसमें आम जनता तथा संबंधित हित धारक भाग ले सकेंगे।

कसाब ने खुद को बताया था 17 साल का, उज्ज्वल निकम ने ऐसे खोली उम्र की सच्चाई

26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब का मुकदमा चल रहा था. अभियोजन पक्ष के पास उसके खिलाफ गवाह थे, घटनास्थल से मिले सबूत थे और खुद कसाब के बयान भी थे. मामला पहली नजर में बेहद मजबूत दिखाई दे रहा था. लेकिन तभी कसाब ने अदालत में एक ऐसा दावा किया, जिसने पूरे केस की दिशा बदलने की कोशिश की. उसने कहा, मैं 17 साल का हूं. हिंदी फिल्म प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम में इसी कानूनी लड़ाई को अहम जगह दी गई है. फिल्म में राजकुमार राव मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म के ट्रेलर में भी अदालत के अंदर कसाब का यही दावा सुनाई देता है कि मैं 17 साल का हूं. लेकिन सवाल था कि अगर कसाब वाकई नाबालिग साबित हो जाता तो क्या होता? और उज्ज्वल निकम ने आखिर कैसे साबित किया कि कसाब अदालत में अपनी उम्र को लेकर झूठ बोल रहा था? कसाब ने क्यों कहा, मैं 17 साल का हूं? अप्रैल 2009 में मुकदमा शुरू होने के कुछ ही समय बाद कसाब के वकील अब्बास काजमी ने अदालत में उसकी उम्र को लेकर दावा किया. बचाव पक्ष का कहना था कि 26/11 के हमलों के वक्त कसाब नाबालिग था. इसके आधार पर उन्होंने मामले को जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट में भेजने की मांग की. इस दावे का महत्व इसलिए बहुत ज्यादा था, क्योंकि अगर अदालत कसाब को कानूनी तौर पर नाबालिग मान लेती, तो उसे मौत की सजा नहीं दी जा सकती थी. जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत उसके लिए अधिकतम सजा तीन साल के जुवेनाइल रिमांड होम तक सीमित हो सकती थी. उज्ज्वल निकम ने इस मांग का तुरंत विरोध किया. अभियोजन पक्ष का कहना था कि उम्र कम बताने की कोशिश मुकदमे को लंबा खींचने और मौत की सजा से बचने की रणनीति थी. लेकिन केवल तर्क से कसाब की उम्र साबित नहीं हो सकती थी. निकम को ठोस सबूत चाहिए था. उज्ज्वल निकम ने मेडिकल जांच को बनाया हथियार निकम ने कसाब की उम्र की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की. इसके बाद मुंबई के सर जेजे अस्पताल में चार डॉक्टरों की एक मेडिकल टीम ने उसकी जांच की. टीम का नेतृत्व डॉ. नंदा कुमार ने किया. कसाब की उम्र का पता लगाने के लिए हड्डियों के जुड़ने यानी बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट और दांतों की जांच की गई. सवाल सीधा था कि कसाब का शरीर उसकी उम्र के बारे में क्या बता रहा है? मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी. इसमें एक्स-रे के जरिए जोड़ों के जुड़ने और अक्ल की दाढ़ निकलने जैसे संकेतों का अध्ययन किया गया. जांच के आधार पर कसाब की उम्र 20 से 26 साल के बीच आंकी गई. रिपोर्ट के मुताबिक, 26 नवंबर 2008 की रात जब मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था, उस समय कसाब की उम्र कम से कम 19 साल 6 महीने थी यानी अदालत में किया गया उसका ‘मैं 17 साल का हूं’ वाला दावा मेडिकल जांच के सामने टिक नहीं पाया. लेकिन निकम यहीं नहीं रुके. अभियोजन पक्ष ने कसाब के गिरफ्तार होने के बाद के आधिकारिक रिकॉर्ड खंगाले. इन रिकॉर्ड्स में उसकी उम्र को लेकर ऐसे बयान मौजूद थे, जो अदालत में किए गए उसके नाबालिग होने के दावे से बिल्कुल अलग थे. सबसे पहले जेल रिकॉर्ड सामने आया. आर्थर रोड सेंट्रल जेल की तत्कालीन अधीक्षक स्वाति साठे ने गवाही दी कि जेल में दाखिल किए जाने के समय कसाब ने अपनी उम्र 21 साल बताई थी. इसके बाद अस्पताल का रिकॉर्ड सामने आया. 27 नवंबर 2008 को घायल कसाब का नायर अस्पताल में इलाज हुआ था. डॉक्टर राघवन ने अदालत में बताया कि शुरुआती इलाज के दौरान कसाब ने अपनी उम्र 21 साल बताई थी. लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण एक और दस्तावेज था, कसाब का खुद का न्यायिक इकबालिया बयान. मजिस्ट्रेट के सामने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज अपने बयान में कसाब ने आधिकारिक तौर पर खुद को 21 साल का बताया था यानी अभियोजन पक्ष के पास सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट नहीं थी. उसके पास कसाब के अपने पुराने बयान, जेल और अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच सब एक ही दिशा में इशारा कर रहे थे. बचाव पक्ष ने पाकिस्तान से जन्म प्रमाण पत्र मंगाने की कोशिश की जब मेडिकल रिपोर्ट और पुराने रिकॉर्ड कसाब के खिलाफ जाने लगे तो बचाव पक्ष ने एक और रास्ता अपनाया. अप्रैल 2009 में अब्बास काजमी ने अदालत से अपील की कि कसाब के पाकिस्तान स्थित गांव फरिदकोट से उसके नगर निकाय के जन्म रिकॉर्ड हासिल करने के लिए एक रोगेटरी लेटर जारी किया जाए या वहां एक कमीशन भेजा जाए. अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध किया. निकम का तर्क था कि पाकिस्तानी अधिकारी उस समय कसाब की नागरिकता तक से इनकार कर रहे थे, ऐसे में वहां से आधिकारिक रिकॉर्ड हासिल करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं. विशेष न्यायाधीश एमएल तहिलयानी ने बचाव पक्ष की मांग खारिज कर दी. अदालत ने सर जेजे अस्पताल की रेडियोलॉजिकल जांच को कसाब के वयस्क होने का निर्णायक सबूत माना. क्या अदालत में कसाब ने सिर्फ उम्र को लेकर ही कहानी बदली? उज्ज्वल निकम ने बाद में अपने कई इंटरव्यू में दावा किया कि कसाब अदालत में अपनी छवि और माहौल को प्रभावित करने की कोशिश करता रहता था. एक इंटरव्यू में निकम ने बताया था कि कसाब कभी आंसू बहाने का नाटक करता, कभी मासूमियत दिखाने की कोशिश करता और जब विदेशी पर्यवेक्षक या पत्रकार अदालत में मौजूद होते, तब अपने बयानों में बदलाव करता था. निकम के मुताबिक, ऐसी बदलती कहानियों का जवाब देने का सबसे मजबूत तरीका था- ऐसे सबूतों पर टिके रहना जिन्हें बदला नहीं जा सकता. यानी घटनास्थल के सबूत, आधिकारिक रिकॉर्ड और मेडिकल जांच. सीधी भाषा में कहें तो कसाब अपनी कहानी बदल सकता था, लेकिन सबूत नहीं बदल सकते थे. सुप्रीम कोर्ट ने भी मेडिकल सबूत को माना बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी कसाब की उम्र तय करने के लिए इस्तेमाल की गई मेडिकल जांच को स्वीकार किया. अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कसाब की मौत की सजा बरकरार रखते हुए अपने फैसले में … Read more

भुवनेश्वर कुमार की कप्तानी में हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस खेलेगा भारत, टीम में क्रुणाल-तेवतिया समेत 7 खिलाड़ी

  नई दिल्ली अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की अगुवाई में आईपीएल सितारों से सजी भारतीय टीम 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाले आगामी हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में उतरेगी. छह खिलाड़ियों वाले इस तेजतर्रार फॉर्मेट के लिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय अनुभव और विस्फोटक बल्लेबाजी का शानदार मिश्रण तैयार किया है. भारतीय टीम में भुवनेश्वर कुमार के अलावा क्रुणाल पंड्या, शशांक सिंह, राहुल तेवतिया, नीतीश राणा, राहुल त्रिपाठी और टी. नटराजन शामिल हैं. शशांक सिंह को छोड़कर टीम के बाकी सभी खिलाड़ी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं. हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में मैदान पर एक समय सिर्फ छह खिलाड़ी होते हैं, लिहाजा यहां बल्लेबाजों को पारी जमाने का ज्यादा वक्त नहीं मिलता. यही वजह है कि टीम में ऐसे खिलाड़ियों को तरजीह दी गई है, जो कम गेंदों में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं. भुवनेश्वर कुमार अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल अनुभव के साथ नई गेंद से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान करने की जिम्मेदारी संभालेंगे. वहीं क्रुणाल पंड्या बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने वाले उपयोगी ऑलराउंडर हैं. नीतीश राणा की आक्रामक बल्लेबाजी भारत को शीर्ष क्रम में तेजी देगी, जबकि शशांक सिंह और राहुल तेवतिया फिनिशर की भूमिका में कम गेंदों में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं. राहुल त्रिपाठी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, जबकि बाएं हाथ के तेज गेंदबाज टी. नटराजन टीम के गेंदबाजी आक्रमण में विविधता जोड़ेंगे. क्रिकेट हॉन्गकॉन्ग, चीन के मार्केटिंग एवं कमर्शियल निदेशक अनुराग भटनागर ने भारतीय टीम के चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट अधिकारियों के सहयोग से इस टीम को तैयार किया गया है. उन्होंने इसे हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस के इतिहास में भारत की सबसे मजबूत टीमों में से एक बताया और उम्मीद जताई कि इससे टूर्नामेंट की दर्शक संख्या को बड़ा फायदा मिलेगा. भारत पिछले साल भी हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में उतरा था. उसने अपने अभियान की शुरुआत पाकिस्तान के खिलाफ दो रन की DLS जीत से की थी, लेकिन इसके बाद लगातार मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया था. इस बार टीम बेहतर प्रदर्शन के इरादे से उतरेगी. पाकिस्तान 2026 संस्करण में डिफेंडिंग चैम्पियन के तौर पर उतरेगा. उसने पिछले साल फाइनल में पदार्पण कर रहे कुवैत को हराकर खिताब जीता था. यह हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस में पाकिस्तान का रिकॉर्ड छठा खिताब था. इस साल टूर्नामेंट में आठ प्रमुख क्रिकेटिंग देशों के साथ चार एसोसिएट सदस्य देश हिस्सा लेंगे. तीन दिनों तक चलने वाला यह मुकाबला हॉन्गकॉन्ग के टिन क्वांग रोड रिक्रिएशन ग्राउंड में खेला जाएगा, जहां छोटे फॉर्मेट में चौकों-छक्कों और तेजतर्रार क्रिकेट का रोमांच देखने को मिलेगा.