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भायखला में सनसनी: जिंक फॉस्फाइड वाले कैप्सूल बांटने के आरोप में फैयाज प्रेमजी पकड़ा गया

मुंबई मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस के दौरान जहरीले कैप्सूल बांटने की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. पुलिस ने इस मामले में फैयाज प्रेमजी नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी बिना अनुमति के 'दर्द से राहत' के नाम पर लोगों को कैप्सूल बांट और बेच रहा था. मुंबई पुलिस के मुताबिक जेजे और भायखला इलाके से मोहर्रम का जुलूस गुजर रहा था, जहां आरोपी कथित तौर पर लोगों को कैप्सूल बांट रहा था. पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने फैयाज को कैप्सूल वितरित करते हुए देखा. शक होने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की और उसके पास मौजूद कैप्सूल जब्त कर लिए. डीसीपी सेंट्रल रीजन जोन-1 जयंत मीणा ने बताया, 'बीती रात भायखला पुलिस स्टेशन की सीमा में मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था. जुलूस के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति लोगों को कैप्सूल बांटता और बेचता हुआ दिखाई दिया. संदेह होने पर मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने उससे पूछताछ की और उसके पास से कैप्सूल का स्टॉक बरामद किया.' पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने खासतौर पर मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाया और इसमें शामिल होने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखता था. फैयाज ने 50 KG जिंक फॉस्फाइड मंगाया था डीसीपी जयंत मीणा ने कहा, 'पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने कुल 30 हजार खाली कैप्सूल और 50 किलो जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने वाला जहरीला केमिकल) मंगवाया था, जो बेहद जहरीला पदार्थ है.' पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान पुणे निवासी फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पेंट का कारोबार करता है और बीबीए ग्रेजुएट है. पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कई दिनों तक अपने ठिकाने पर कैप्सूलों में जहर भरने का काम किया. पुलिस का कहना है कि कैप्सूल का सेवन करने वाले सलमान सैयद नाम के व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई थी. उसे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज भायखला पुलिस ने आरोपी के पास से 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद किए हैं. प्रत्येक कैप्सूल में करीब एक ग्राम जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी साल 2025 में ईरान और इराक गया था. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है. इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 110 और 123 के तहत जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि फैयाज प्रेमजी शिया खोजा मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है. आरोपी एक साल में 19 बार ईरान-इराक गया फैयाज की बहन ईरान में फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम करती है, जबकि उसकी मां भी ईरान में रहती हैं. उसकी पत्नी से उसका तलाक हो चुका है. जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच फैयाज कई बार ईरान और इराक की यात्रा कर चुका है. पुलिस के मुताबिक पिछले एक साल में ही वह 19 बार ईरान और इराक गया था. फैयाज प्रेमजी पुणे के विमान नगर इलाके में रहता है, जहां उसका पेंट का कारोबार है. मुंबई आने के दौरान वह डोंगरी इलाके के एक गेस्ट हाउस और डॉरमेट्री में ठहरा था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी उन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और क्या आरोपी किसी के प्रभाव में था या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. हालांकि, फिलहाल किसी आतंकी संगठन से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है. फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की गहन जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति या संगठन शामिल था या नहीं.

हरियाणा सीएम की मध्यस्थता से हल हुआ निहंग-प्रशासन विवाद, बनी सहमति

चंडीगढ़ उत्तराखंड के पांवटा साहिब क्षेत्र में पिछले कई दिनों से आंदोलनरत निहंगों और उत्तराखंड सरकार के बीच चल रहा विवाद आखिरकार हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पहल पर सुलझ गया। शुक्रवार देर रात निहंगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर अपनी मांगों और विवाद से अवगत कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल अपने राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी को मामले के समाधान की जिम्मेदारी सौंपी। निहंगों ने की आंदोलन खत्म करने की घोषणा मुख्यमंत्री के निर्देश पर तरुण भंडारी ने उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार बातचीत की और दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित कराया। लंबी बातचीत के बाद सहमति बनी, जिसके साथ ही कई दिनों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया और निहंगों ने अपना आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी। दरअसल, पांवटा साहिब क्षेत्र में निहंगों का विवाद धार्मिक गतिविधियों और संबंधित भूमि के उपयोग को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा हुआ था। निहंग संगठन प्रशासन के कुछ फैसलों का विरोध कर रहे थे और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। मामला लगातार तूल पकड़ रहा था, जिससे कानून-व्यवस्था और धार्मिक सौहार्द को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही थीं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित हस्तक्षेप किया। उनके निर्देश पर राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी ने उत्तराखंड सरकार से संपर्क साधा और ऐसा समाधान निकालने का प्रयास किया, जिससे निहंगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी बना रहे और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित न हो। सहमति बनने के बाद निहंग प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी का आभार व्यक्त किया। राजनीतिक दृष्टि से भी इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एक दूसरे राज्य में उत्पन्न संवेदनशील धार्मिक विवाद के समाधान में हरियाणा सरकार की सक्रिय भूमिका देखने को मिली। इससे दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की भी मिसाल सामने आई।  

1 जुलाई से बड़ा बदलाव: मनरेगा की जगह लागू होगी ‘G-RAM-JI’ स्कीम, बढ़ेगा रोजगार का दायरा

अररिया ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मनरेगा (MGNREGA) अब पूरी तरह से नए स्वरूप में नजर आने वाली है। वर्ष 2005 में 'नरेगा' के रूप में शुरू हुई और 2010 में 'मनरेगा' बनी इस योजना का नाम अब केंद्र सरकार ने बदल दिया है। वर्ष 2026 से इसे 'जी राम जी' (G-RAM-JI) यानी 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण' के नाम से जाना जाएगा। तकनीकी दिक्कतों के कारण टली थी योजना, अब 1 जुलाई से होगी लागू विभागीय जानकारी के अनुसार, इस नई योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही लागू किया जाना था। हालांकि, पोर्टल और तकनीकी तैयारियां पूरी न होने के कारण इसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब विभाग ने इसे आगामी 1 जुलाई से पूरी तरह लागू करने का सख्त निर्देश जारी किया है। पुराना मनरेगा कानून होगा समाप्त, नए जॉब कार्ड बनने तक पुराने रहेंगे मान्य इस संबंध में जानकारी देते हुए मनरेगा पीओ अफरोज अहमद ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होते ही पुराना मनरेगा कानून समाप्त हो जाएगा। पुरानी सभी योजनाएं इसमें समाहित कर ली जाएंगी। राहत की बात यह है कि जब तक मजदूरों के नए जॉब कार्ड नहीं बन जाते, तब तक उनके पुराने जॉब कार्ड ही मान्य रहेंगे। सिर्फ मजदूरी नहीं, अब गांवों का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करेगी सरकार अधिकारियों के मुताबिक, 'जी राम जी' योजना सिर्फ मजदूरी आधारित नहीं होगी, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला एक व्यापक मिशन बनेगी। इसमें मिट्टी भराई जैसे पारंपरिक कार्यों के बजाय जल संरक्षण, खेत, सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई जैसे ढांचागत (Infrastructure) कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। 100 के बदले मिलेंगे 125 दिन काम, 3 दिन के भीतर खाते में आएगा पैसा इस नई योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब ग्रामीणों को साल में 100 दिन के बदले 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। यही नहीं, मजदूरी का भुगतान महज तीन दिनों के भीतर डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में कर दिया जाएगा। भुगतान में देरी होने पर मजदूरों को मुआवजा देने का भी नियम बनाया गया है विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत हर हफ्ते वेतन का प्रविधान वर्तमान में चल रही मनरेगा योजना में मजदूरों को ₹252 की दिहाड़ी मिलती है। केंद्र सरकार की इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को 'विकसित भारत वर्ष 2047' के लक्ष्य के अनुरूप तैयार करना है। इसके तहत मजदूरों का वेतन भुगतान हर सप्ताह करने का भी प्रविधान है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।  

यूपी में स्किल डेवलपमेंट मिशन तेज, 15 जुलाई 2026 तक शुरू होंगी प्रशिक्षण कक्षाएं

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल (Employment Skills) से जोड़ने की मुहिम तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में "प्रोजेक्ट प्रवीण" के अन्तर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण (STT) देने के लिए जिलों और प्रशिक्षण प्रदाताओं को महत्वाकांक्षी लक्ष्य आवंटित कर दिए गए हैं। योगी सरकार का संकल्प: कोई भी युवा हुनर से न रहे वंचित उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने योजना के विवरण साझा करते हुए कहा कि योगी सरकार का मुख्य ध्येय है कि प्रदेश का कोई भी युवा हुनर से वंचित न रहे। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के जरिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत आईटी (IT-ITeS), हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस और कृषि जैसे उन महत्वपूर्ण सेक्टर्स में ट्रेनिंग दी जाएगी जिनकी बाजार में भारी मांग है। गुणवत्ता पर विशेष ध्यान: इस वर्ष 36,103 छात्रों को ट्रेनिंग का लक्ष्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता को उच्च स्तरीय बनाए रखने के लिए सरकार ने प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थियों की सीमा तय की है, जिससे बच्चों को प्रयोगात्मक (Practical) और व्यावहारिक ज्ञान बेहतर ढंग से मिल सके। इस वर्ष प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत प्रदेश भर में कुल 36,103 छात्र-छात्राओं को कौशल प्रशिक्षण देने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह जिम्मेदारी आगरा, बरेली, आजमगढ़, वाराणसी, ललितपुर, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र सहित विभिन्न जनपदों के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को सौंपी गई है। कड़ा अल्टीमेटम: 15 जुलाई 2026 तक शुरू करनी होंगी कक्षाएं उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। सभी सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को केंद्र की स्थापना, पंजीकरण और बैच निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर 15 जुलाई, 2026 तक हर हाल में कक्षाओं का संचालन शुरू करना होगा। इसके साथ ही, पाठ्यक्रम की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है। लापरवाही पर होगी विधिक कार्रवाई, पोर्टल पर रखनी होगी नजर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया गया है कि बैच शुरू होने के 07 कार्य दिवसों के भीतर सभी छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री (Study Material) का वितरण करना होगा और उसकी तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। मिशन निदेशक ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता समय पर कार्य आरंभ नहीं करता है या जनपद स्तर से किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी व विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।  

Health Alert: छोटी बच्चियों में समय से पहले पीरियड्स बढ़ने के मामले, डॉक्टर बोले- इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

 नई दिल्ली कई दशकों तक लड़कियों में पीरियड्स की शुरुआत की उम्र आमतौर पर 11 से 13 साल की उम्र के बीच देखी जाती रही है लेकिन आज डॉक्टर्स इस पैटर्न में एक बड़ा बदलाव महसूस कर रहे हैं जिसमें लड़कियों में प्यूबर्टी (यौवन) के लक्षण बहुत कम उम्र में ही दिखने लगे हैं. अब कई लड़कियों को 8 या 9 साल की उम्र या उससे भी पहले पीरियड्स शुरू हो रहे हैं जो बेहद चिंता वाली बात है. कई बार माता-पिता अक्सर इसे सामान्य मानकर यह सोच लेते हैं कि उनका बच्चा दूसरों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस शारीरिक बदलाव को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।  कुछ मामलों में यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्यूबर्टी बहुत जल्दी शुरू हो गई है. इस कंडीशन को प्रीकोशियस (Precocious Puberty) प्यूबर्टी कहा जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि समय से पहले प्यूबर्टी आने से न केवल बच्चे का शारीरिक और कद-काठी बढ़ने से रुक सकती है बल्कि यह कंडीशन उनकी इमोशनल और मेंटल हेल्थ को भी बुरी तरह प्रभावित करती है. इसके अलावा यह कंडीशन आगे चलकर लंबे समय तक रहने वाली कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।  अगर माता-पिता को अपनी बच्ची में तय उम्र से बहुत पहले ही प्यूबर्टी के लक्षण दिखने लगें तो उन्हें इस पर खास ध्यान देना चाहिए. ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. समय पर डॉक्टर से जांच कराने से न सिर्फ इसके सही कारणों का पता लगाया जा सकता है बल्कि यह भी पक्का किया जा सकता है कि बच्ची को सही समय पर सही इलाज, देखभाल और मानसिक सहायता मिल सके।  क्यों बच्चियां हो रहीं जल्दी जवान? भारत और कई अन्य देशों के शोधकर्ताओं ने देखा है कि पिछले कुछ दशकों में प्यूबर्टी की औसत उम्र धीरे-धीरे कम हो गई है. हालांकि इस प्रवृत्ति के पीछे कोई एक कारण नहीं है लेकिन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि कई जीवनशैली और पर्यावरणीय कारक इसमें योगदान दे सकते हैं।  भारत और दुनिया के कई देशों के रिसर्चर्स ने यह देखा है कि पिछले कुछ दशकों में लड़कियों में प्यूबर्टी की औसत उम्र धीरे-धीरे काफी कम हुई है. हालांकि, इस बदलाव के पीछे कोई एक इकलौता कारण नहीं है बल्कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमारी बदलती लाइफस्टाइल और पर्यावरण से जुड़े कई फैक्टर्स इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।  समय से पहले प्यूबर्टी आने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है बचपन में बढ़ता मोटापा. शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी (फैट्स) एस्ट्रोजेन हार्मोन के प्रोडक्शन को बढ़ा देती है जो लड़कियों के शारीरिक और यौन विकास के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है. शरीर में एस्ट्रोजेन का यह हाई लेवल तय समय से काफी पहले ही प्यूबर्टी की प्रक्रिया को ट्रिगर करता है।  अलर्टी प्यूबर्टी के कई और कारण भी हैं रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी की कमी स्क्रीन टाइम बढ़ाना नींद की खराब आदतें प्रोसेस्ड फूड और मीठे ड्रिंक्स का बार-बार इस्तेमाल प्लास्टिक, कॉस्मेटिक्स और कुछ घरेलू प्रोडक्ट्स में पाए जाने वाले एंडोक्राइन को खराब करने वाले केमिकल्स के संपर्क में आना फैमिली हिस्ट्री या जेनेटिक कारण हालांकि इन कारणों से जल्दी प्यूबर्टी होने की संभावना बढ़ सकती है लेकिन हर बच्चा अलग होता है और जल्दी प्यूबर्टी वाली सभी लड़कियों को कोई अंदरूनी मेडिकल प्रॉब्लम नहीं होती है।  इन संकेतों पर ध्यान दें माता-पिता जल्दी प्यूबर्टी अक्सर 8 साल की उम्र से पहले दिखने वाले शारीरिक बदलावों से शुरू होती है. इनमें कुछ आम चेतावनी संकेत शामिल हैं।  8 साल की उम्र से पहले ब्रेस्ट का विकास हाइट में तेजी से बढ़ोतरी शरीर में टीनएजर्स जैसी बॉडी महक आना मुंहासें प्यूबिक या अंडरआर्म बालों का बढ़ना मूड स्विंग या इमोशनल बदलाव पीरियड्स का नॉर्मल उम्र से पहले शुरू होना डॉक्टरों का कहना है कि कुछ बच्चे दूसरों की तुलना में नैचुरली जल्दी मैच्योर हो जाते हैं लेकिन इन संकेतों की हमेशा एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल से जांच करवानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वो नॉर्मल रेंज में हैं या नहीं।  जल्दी पीरियड्स का मतलब सिर्फ पीरियड्स जल्दी आना नहीं है. रिसर्च से पता चलता है कि जिन लड़कियों को बहुत कम उम्र में पीरियड्स आते हैं, उन्हें आगे चलकर कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं. जैसे- मोटापा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) टाइप 2 डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी कुछ हॉर्मोन से जुड़े कैंसर बचपन में इमोशनल और साइकोलॉजिकल चुनौतियां जल्दी प्यूबर्टी एक लड़की की आखिरी एडल्ट हाइट पर भी असर डाल सकती है. एक बार पीरियड्स शुरू होने पर हड्डियां ज्यादा तेजी से मैच्योर होती हैं जिससे ग्रोथ प्लेट्स वक्त से पहले बंद हो जाती हैं. इस वजह से कुछ लड़कियों का लंबाई बढ़ना जल्दी रुक सकता है और उनकी कद-काठी अपनी जेनेटिक क्षमता से भी छोटी रह सकती है।  बहुत जल्दी बड़े होने की इमोशनल चुनौतियां शारीरिक बदलाव कहानी का सिर्फ एक हिस्सा हैं जो लड़कियां अपनी क्लासमेट्स से पहले प्यूबर्टी का अनुभव करती हैं, उन्हें इमोशनली भी परेशानी हो सकती है।  उन्हें अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर शर्मिंदगी महसूस हो सकती है, स्कूल में दूसरे बच्चों द्वारा उनका मजाक उड़ाने या चिढ़ाने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, उन्हें कन्फ्यूजन और एंग्जायटी हो सकती है क्योंकि वे पीरियड्स के लिए इमोशनली तैयार नहीं होती हैं।  एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर पर खुलकर बातचीत करना जरूरी है. माता-पिता को उम्र के हिसाब से सही भाषा में प्यूबर्टी के बारे में समझाना चाहिए. सवालों का ईमानदारी से जवाब देना चाहिए और बच्चों को भरोसा दिलाना चाहिए कि उनकी भावनाएं नॉर्मल हैं।  स्कूल भी पीरियड्स के बारे में जल्दी जानकारी देकर एक जरूरी भूमिका निभाते हैं ताकि लड़कियां अपने पहले पीरियड्स से पहले समझ सकें कि क्या उम्मीद करनी है।  क्या जल्दी प्यूबर्टी को रोका जा सकता है? जल्दी पीरियड्स आने के हर मामले को रोका नहीं जा सकता. खासकर जब जेनेटिक्स शामिल हों. हालांकि, हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतें नॉर्मल ग्रोथ और पूरी सेहत को सपोर्ट कर सकती हैं। 

अरहर की इस खास किस्म से होगी तगड़ी कमाई, शहडोल की रॉयल वेरायटी की बढ़ी मांग

शहडोल   खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश के कई जिलों में धान की खेती जमकर की जाती है पर इन दिनों किसानों का झुकाव अरहर की फसल की ओर भी बढ़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण है अरहर दाल की डिमांड. अरहर दाल खाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, यही वजह है कि इस दाल को नगद वाली फसल या खटाखट पैसे दिलाने वाली फसल भी कहा जाता है. इस आर्टिकल में जानें कि कैसे इस दाल को उगाकर आप भी जमकर कमाई कर सकते हैं।  कैसे करें अरहर दाल की खेती? शहडोल के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, '' अगर आप अरहर की खेती करना चाहते हैं, तो यह प्रमुख तौर पर खरीफ के सीजन में इसे बोया जाता है. अरहर की फसल ऐसे क्षेत्र में बोई जाती है, जहां उचहन वाली जमीन हो, जल निकासी की खेत में अच्छी व्यवस्था हो और जल जमाव बिल्कुल भी न हो रहा हो, क्योंकि ज्यादा जल जमाव से फसल खराब हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि इस फसल के लिए मिट्टी का पीएच लेवल 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए।  वे आगे कहते हैं, '' अरहर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, हालांकि, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, उपजाऊ जमीन हो वहां इसकी खेती की जा सकती है. अरहर की खेती के लिए 15 जून से 15 जुलाई के बीच में उपयुक्त समय माना जाता है।  अरहर की खेती के लिए सबसे पहले ये करें कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' सबसे पहले कल्टीवेटर से अच्छी तरह से खेतों की जुताई कर लें, और फिर उसके बाद रोटावेटर चला दें, जिससे खेत में जो खरपतवार हैं पूरी तरह से कट जाएगा, नष्ट हो जाएगा, और मिट्टी एकदम समतल हो जाएगी. इसके बाद 10 से 15 किलोग्राम के लगभग प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई के लिए जरूरत पड़ती है. बुवाई से पहले बीज को कवकनाशी से अच्छी तरह से उपचारित कर लें, और कतार से 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें, जिससे फायदा होगा।  खाद, खरपतवार और कीट प्रबंधन वे आगे बताते हैं कि अरहर दाल एक ऐसी किस्म की फसल है, जिसमें ज्यादा देख रेख की जरूरत नहीं पड़ती, ना ही ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है, क्योंकि दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन की कम ही जरूरत पड़ती है. इसके लिए सड़ा हुआ गोबर खाद हो तो अच्छी मात्रा में खेतों में डाल दें. इसके अलावा इसको ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है।  खरीफ के सीजन में बोई जाती है अरहर दाल की फसल  ये कम पानी में पकने वाली फसल है, लेकिन एक बात का जरूर ध्यान रखें कि फूल आने और फली बनने के समय नमी जरूर बनाए रखें. इस फसल में खरपतवार पर भी बहुत ज्यादा नियंत्रण नहीं करना पड़ता. जहां तक कीट और रोग प्रबंधन की बात करें तो अरहर में उकठा रोग की समस्या आती है, और फली भेदक कीट की समस्या आती है, जिससे कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों से संपर्क करके जो भी रोग लगे उसके हिसाब से समाधान कर लें।  इतनी होती है अरहर की पैदावार कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' जहां तक उपज की बात करते हैं तो फसल की कटाई के बाद 10 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक इसमें पैदावार मिल सकती है. अब आप पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से खेती कर रहे हैं और कितना ध्यान दे रहे हैं.और उस समय मौसम का बर्ताव कैसा रहा। 

समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ा छत्तीसगढ़, गोवा-उत्तराखंड मॉडल के आधार पर बनेगी रूपरेखा

 रायपुर  राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। यह समिति गोवा में लंबे समय से प्रभावी पुर्तगाली नागरिक संहिता और उत्तराखंड के नए यूसीसी कानून के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी। इसके साथ ही समिति गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों से भी संपर्क कर समन्वय स्थापित करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम इसे विधानसभा में पारित कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया जारी है। आदिवासियों को संवैधानिक संरक्षण जनगणना 2011 के अुनसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासियों) का प्रतिशत लगभग 30.62% है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वायत्तता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को इन संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा। उत्तराखंड में एसटी यूसीसी से बाहर उत्तराखंड की यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार ने यह निर्णय उनकी अनूठी परंपराओं, विवाह प्रथाओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया है। आदिवासी समुदायों में विवाह और संपत्ति के अधिकार अक्सर उनकी पारंपरिक ''रूढ़िवादी प्रथाओं'' द्वारा शासित होते हैं, जो मुख्यधारा के कानूनों से काफी भिन्न होते हैं। इन समुदायों की पहचान उनकी इन्हीं विशिष्ट प्रथाओं से जुड़ी है। सूत्राें के अनुसार आदिवासियों की प्रथागत कानून प्रणाली की रक्षा के लिए विशेष ''अपवाद'' या ''छूट'' का प्रविधान किए जाने की प्रबल संभावना है। उन्हें किस हद तक छूट दी जाए, समिति इस पर भी काम करेगी। गोवा के यूसीसी में लिंग समानता गोवा की यूसीसी 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है और राज्य के सभी निवासियों पर धर्म से परे लागू होती है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता 'सामुदायिक संपत्ति'' है, जिसके तहत विवाह के बाद पति-पत्नी संपत्ति के समान भागीदार बन जाते हैं। तलाक या मृत्यु पर संपत्ति का आधा-आधा बंटवारा अनिवार्य है। उत्तराधिकार में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार प्राप्त हैं और माता-पिता अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को बाध्य हैं। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है और यह कानून व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो लिंग समानता सुनिश्चित करता है। उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप पर भी प्रविधान उत्तराखंड के यूसीसी में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में सभी धर्मों के लिए एकसमान नियम निर्धारित करता है, जिससे पुत्र-पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलते हैं। राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। यदि इस संबंध में बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी मान्यता और उत्तराधिकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करता है। सक्रिय है राज्य सरकार     संविधान निर्माण के दौरान यूसीसी के लिए प्रयास करने का प्रविधान रखा था। गोवा के बाद अब उत्तराखंड ने इसे लागू किया है, और असम व गुजरात में भी इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों की आदर्श संहिता का अध्ययन किया जाएगा। समान नागरिक संहिता का लागू होना हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बेहतर और सकारात्मक कदम है।     – अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़  

Aaj Ka Rashifal 28 June 2026: जानें रविवार का दिन किस राशि के लिए रहेगा सबसे शुभ

मेष राशि- कल के दिन सीखने के छोटे मौके मिलेंगे। एक क्लियर आइडिया चुनें और थोड़ी देर के लिए पढ़ें। आसान सवाल पूछें, जरूरी बातें नोट करें, और उन्हें किसी दोस्त के साथ शेयर करें। एक छोटा प्लान पढ़ाई पूरी करने में मददगार साबित होगा। इससे आप आज बिना स्ट्रेस के शांत और नए कामों के लिए आत्मविश्वास से तैयार रहेंगे। वृषभ राशि- कल के दिन खुद पर भरोसा रखें। आपका दिमाग तेज और अलर्ट रहेगा। नए आइडिया जल्दी आ सकते हैं। बोलने से ज्यादा सुनें। आपकी तेज सोच आज छोटी-मोटी समस्याओं को सॉल्व करने में मदद करेगी। मिथुन राशि- कल के दिन बातचीत को विनम्र और दृढ़ रखें, और पैसे को सावधानी से संभालें। एक नॉर्मल रूटीन कामों को पूरा करने में मदद करेगी। छोटी-छोटी सुख-सुविधाएं आपका मूड बेहतर करेगी और आगे की योजना बनाने के लिए मदद करेगी। कर्क राशि- कल के दिन एक काम पूरा करें, शांति का आनंद लें, और प्यार से बात करें। धैर्य आपको लाभ तक पहुंचने में मदद करेगा। आपकी स्किल्स व मेहनत प्रगति ला सकती है। जरूरी टास्क चुनें और अचानक बदलाव से बचें। सिंह राशि- कल के दिन लव के मामले में शांत और कूल रहें। प्रोफेशनल सफलता आपकी भरोसेमंद साथी रहेगी। स्वास्थ्य और फाइनेंस दोनों पूरे दिन आपके साथ रहने वाले हैं। अपने कदमों और छोटी-छोटी सुख-सुविधाओं पर ध्यान दें। कन्या राशि- कल के दिन आपकी लव लाइफ बहुत अच्छी रहेगी। इसके साथ ही ऑफिस का शेड्यूल भी ज्यादातर बिजी रहेगा। आज कोई बड़ी फाइनेंशियल दिक्कत नहीं आएगी। कोई गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या जीवन पर असर नहीं डालेगी। तुला राशि- कल के दिन फाइनेंशियल दिक्कतें हो सकती हैं। आज आपकी सेहत नॉर्मल है। काम पर फोकस करें। बेवजह के स्ट्रेस से दूर रहें। बैलेंस मेंटेन करें। अपने पार्टनर से बिना शर्त प्यार का इजहार करें। अपने काम के प्रति अपनी कमीटमेंट बनाए रखें, जो आपको पॉजिटिव परिणाम प्राप्त करने में मदद करेगी। वृश्चिक राशि- कल के दिन ऑफिशियल रवैया आधिकारिक मामलों को सुलझाने में मदद करेगा। लव अफेयर में समझदारी दिखाएं और आज के दिन जरूरी फैसले लेते समय अपने पार्टनर की राय भी जरूर लें। आपकी प्रोफेशनल लाइफ आज के दिन प्रोडक्टिव रहेगी। धनु राशि- कल के दिन ऑफिशियल रवैया आधिकारिक मामलों को सुलझाने में मदद करेगा। इस बात का ध्यान रखें कि आप पैसे को ध्यान से संभालें। सेहत आज के दिन नॉर्मल है। इस बात का ध्यान रखें कि आप पैसे को ध्यान से संभालें। सेहत आज के दिन नॉर्मल है। मकर राशि- कल के दिन मैनेजमेंट के साथ आपके रिश्ते खराब होने की नौबत भी आ सकती है। आज धन और स्वास्थ्य दोनों की स्थिति अच्छी रहने वाली है। अपने प्यार का इजहार करने के लिए आज के दिन का ऑप्शन चुनें। कुंभ राशि- कल के दिन सेहत भी आपकी अच्छी रहेगी। आज के दिन लव लाइफ में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन आप दोनों साथ में खुशी महसूस करेंगे। ऑफिस की गॉसिप पर ध्यान न दें, क्योंकि इससे आपकी प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ सकता है। मीन राशि- कल के दिन अहंकार के चक्कर में अपने प्रेम संबंध को खराब न होने दें। बेहतरीन नतीजे देने के लिए नई प्रोफेशनल चुनौतियों का सामना पूरी मेहनत से करें। ऑफिस में अपना बेस्ट दें, और अपने पार्टनर से सच्चे दिल से प्यार करें।

77 करोड़ के कर्ज मामले में हाईकोर्ट सख्त, बैंक को सेल सर्टिफिकेट जारी करने की मंजूरी

 रांची  झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि डेट्स रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल (डीआरएटी) के अध्यक्ष अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर कोई न्यायिक या स्थगन आदेश पारित नहीं कर सकते। अदालत ने कर्जदार द्वारा अपनाई गई कानूनी दांवपेच की रणनीति बताते हुए उनकी कड़ी निंदा की और बैंक को सफल नीलामी खरीदार के पक्ष में तुरंत सेल सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि कर्जदार पर 77 करोड़ से अधिक का बकाया है। यह जनता का पैसा है जिसे कानूनन वसूला जाना जरूरी है। कर्जदार ने लोन चुकाने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि केवल वसूली प्रक्रिया को टालने के लिए कानूनी दांवपेंच अपनाए। एकल पीठ ने उक्त निर्णय इंडियन बैंक बनाम मां ललिता हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड और नीलामी खरीदार यशोदा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर लिमिटेड द्वारा दायर दो अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाया। क्या है पूरा मामला? देवघर स्थित मां ललिता हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने अस्पताल स्थापित करने के लिए इंडियन बैंक (पूर्व में इलाहाबाद बैंक) से करोड़ों रुपये का लोन लिया था, जो बाद में बढ़कर ₹19.45 करोड़ तक पहुंच गया। लोन न चुकाने के कारण 31 दिसंबर 2009 को इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया। साल 2015 में बैंक और अस्पताल प्रबंधन के बीच एक समझौता हुआ, जिसके बाद बैंक ने अस्पताल की जब्त संपत्ति वापस लौटा दी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया। इसके बाद बैंक ने करीब 70.92 करोड़ की बकाया राशि की वसूली के लिए सरफेसी एक्ट के तहत नए सिरे से कार्रवाई शुरू की। बैंक ने सात अप्रैल 2026 को अस्पताल की संपत्तियों की नीलामी की, जिससे 44.22 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इस नीलामी में यशोदा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर लिमिटेड सबसे बड़ा बोलीदाता बनकर उभरा और उसने पूरी रकम जमा कर दी। डीआरएटी के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी), रांची के बंद होने का हवाला देते हुए कर्जदार अस्पताल ने इलाहाबाद स्थित अपीलेट ट्रिब्यूनल (डीआरएटी) में याचिका दाखिल की डीआरएटी के अध्यक्ष ने आरडीबी एक्ट की धारा 17ए के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 10 अप्रैल 2026 को बैंक को नीलामी की रकम स्वीकार करने की अनुमति तो दी, लेकिन खरीदार को सेल सर्टिफिके जारी करने पर रोक लगा दी थी। इस स्थगन आदेश के खिलाफ बैंक और नीलामी खरीदार दोनों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट की अहम टिप्पणियां और फैसला हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डीआरएटी के आदेश को पूरी तरह अधिकार क्षेत्र से बाहर माना। पीठ ने कहा कि कर्जदार ने कोर्ट में पहले भी अर्जी दी थी, जहां उन्हें राहत पाने के लिए दो करोड़ जमा करने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने वह राशि जमा नहीं की और चालाकी से डीआरएटी में बिना कोई प्री-डिपाजिट किए राहत पा ली, जो कि पूरी तरह से अनुचित है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआरएटी द्वारा 10 अप्रैल 2026 और 21 अप्रैल 2026 को जारी अंतरिम स्थगन आदेशों को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि अब बैंक द्वारा नीलामी खरीदार के पक्ष में सेल सर्टिफिकेट जारी करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

किराना घराने की विरासत से निकली सुर-तपस्या: गोंडा की बंकू बहनों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

गोंड  एक तरफ किताबें, दूसरी तरफ भक्ति का दीप और बीच में दो ऐसी बेटियाँ जिन्होंने साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो तो क्या, संकल्प बड़ा हो तो पहाड़ भी झुक जाते हैं। उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले की श्रुतिका बंकू और रितिका बंकू आज देश के उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जो स्कूल की पढ़ाई करते हुए भी भजन-कीर्तन के मंचों पर राष्ट्रीय स्तर की पहचान बना चुकी हैं। अवध की इस धरती से उठी इनकी भक्ति की आवाज़ आज रामनगरी अयोध्या से लेकर झारखंड, हिमाचल और राजस्थान तक गूँज रही है। किराना घराने की इन दो बेटियों ने अपने सुर, साधना और समर्पण से न केवल परिवार का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है。 रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि ने किया विशेष सम्मान बंकू बेटियों के नाम से देशभर में पहचानी जाने वाली इन दोनों बहनों की प्रतिभा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जा रही है। हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि एवं राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने इन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। इससे पहले भी देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री इन्हें सम्मान से नवाज़ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सम्मान और अयोध्या में सांस्कृतिक विभाग से जुड़ाव इनकी राष्ट्रीय पहचान को और मज़बूत करता है। पढ़ाई के साथ-साथ भजन-कीर्तन की साधना में भी अव्वल श्रुतिका बंकू इस समय कक्षा 12वीं और रितिका बंकू कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। इतनी कम उम्र में जहाँ एक ओर वे अपनी पढ़ाई में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर भजन-कीर्तन और जागरण के मंचों पर उनकी निरंतर उपस्थिति यह साबित करती है कि सच्ची लगन हो तो शिक्षा और साधना साथ-साथ चल सकती हैं। राजस्थान के सीकर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय अग्र गौरव पुरस्कार से नवाज़ा गया, जबकि अयोध्या की पावन भूमि पर उन्हें जागरण शक्ति की उपाधि से विभूषित किया गया जो उनकी आध्यात्मिक निष्ठा का सबसे बड़ा प्रमाण है। तीन पीढ़ियों की संगीत विरासत से मिली भक्ति की शक्ति श्रुतिका और रितिका की यह प्रतिभा अचानक नहीं उभरी, इसके पीछे है तीन पीढ़ियों की अटूट संगीत साधना। दादी श्रीमती लक्ष्मी देवी और माँ श्रीमती नमिता बंकू स्वयं संगीत शिक्षा से जुड़ी हैं और वर्षों से न केवल अपने परिवार में, बल्कि समाज की अन्य बेटियों को भी संगीत का संस्कार दे रही हैं। गोण्डा के प्रतिष्ठित किराना घराने की इस विरासत ने श्रुतिका और रितिका को वह नींव दी है, जिस पर उनकी भक्ति, उनका सुर और उनका समर्पण टिका है। यही कारण है कि इनकी प्रस्तुति में केवल सुर-ताल नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक अनुभूति भी झलकती है। राम नगरी से पहाड़ों तक गूँजते हैं इनके भजन, नम हो जाती हैं श्रोताओं की आँखें अयोध्या की रामनगरी हो या हिमाचल की पहाड़ियाँ, झारखंड की धरती हो या राजस्थान का मरुस्थल, जहाँ भी ये दोनों बहनें मंच पर उतरती हैं, वहाँ का माहौल भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। राम नाम, हनुमान चालीसा और देवी-देवताओं के भजन जब इनकी वाणी से निकलते हैं, तो श्रोताओं की आँखें नम हो जाती हैं और मन श्रद्धा से भर उठता है। घर-घर पहुँचा रही हैं सनातन की ज्योति, आने वाली पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा आज जब युवा पीढ़ी तेज़ी से पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है और परंपराएँ पीछे छूटती जा रही हैं, ऐसे समय में अवध की ये दो बेटियाँ सनातन धर्म की ज्योति को घर-घर पहुँचाने का बीड़ा उठाए हुए हैं। अपने भावपूर्ण और आध्यात्मिक गायन के ज़रिए वे यह संदेश दे रही हैं कि हमारी सनातन परंपराएँ केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी दिशा हैं। श्रुतिका और रितिका बंकू निःसंदेह आने वाली पीढ़ी के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं, जहाँ भक्ति, शिक्षा और संस्कार एकसाथ फलते-फूलते हैं।