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कुमकुम से लवलीना तक छाईं भारतीय बेटियां, नागोया एशियन गेम्स में 38 पदकों से रचा नया इतिहास

नई दिल्ली नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अपने साहस और बेजोड़ खेल से नया इतिहास रच दिया। भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते, जबकि 3 गोल्ड मिक्स-टीम इवेंट्स में आए। 495 खिलाड़ियों के भारतीय दल में 234 महिला एथलीट शामिल थीं, जिन्होंने कुल 85 पदकों में से 38 पदक जीतकर साबित कर दिया कि वे अब पोडियम के सबसे ऊपरी पायदान की असली हकदार हैं। 17 साल की कुमकुम ने ओलंपिक चैंपियन को हराया, प्रणवी उर्स ने गोल्फ में रचा इतिहास इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। दोनों युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं। हॉकी में 44 साल बाद गोल्ड मेडल, मीराबाई चानू ने खत्म किया 28 साल का सूखा टीम इवेंट्स और वेटलिफ्टिंग में भारतीय महिलाओं की वापसी की तस्वीरें सबसे यादगार रहीं। भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन कर 44 साल लंबे इंतजार के बाद एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। लवलीना और परवीन हुड्डा का मुक्केबाजी में पंच, वीथ्या रामराज ने तोड़ा पीटी उषा का रिकॉर्ड बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। बीमारियों और संघर्षों को पछाड़कर पोडियम तक पहुंचीं नीरू, अन्सी और सुचिका नागोया की सफलता सिर्फ मेडलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एथलीट्स के निजी संघर्षों की जीत भी दिखी। इन्फ्लूएंजा-बी से उबरकर ट्रैप शूटर नीरू ढांडा ने इंडिविजुअल गोल्ड समेत 3 मेडल जीते। पीसीएस (PCOS) से जूझ रही लॉन्ग जंपर अन्सी सोजन ने 6.53 मीटर छलांग लगाकर सिल्वर जीता, जबकि 36 साल की सुचिका तरियाल ने मिक्स मार्शल आर्ट्स में ब्रॉन्ज जीता। यह साबित करता है कि महिला खेलों में लगातार निवेश देश का नाम रोशन कर सकता है।

‘बिग बॉस’ के बाद फिर ठेले पर लौटीं ‘वड़ा पाव गर्ल’, अब बेच रही हैं मोमोज

कहते हैं कि वक्त और किस्मत बदलते देर नहीं लगती. सोशल मीडिया के जरिए रातोरात मशहूर हुईं 'वड़ा पाव गर्ल' यानी चंद्रिका दीक्षित ने 'बिग बॉस' तक का सफर तय किया. लेकिन स्टारडम देखने के बाद अब चंद्रिका का दौर फिर से बदल चुका है. वो एक बार फिर सड़क पर ठेला लगाने लगी हैं. ठेला लगाने पर मजबूर चंद्रिका चंद्रिका का सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो फिर से सड़क पर ठेला लगाती हुई नजर आ रही हैं. लेकिन इस बार चंद्रिका वड़ा पाव नहीं, बल्कि मोमोज बेच रही हैं. चंद्रिका ने कहा कि अब सर्दियां आने वाली हैं. सर्दियों में लोगों को मोमोज खाना काफी पसंद है. इसलिए उन्होंने अब खुद से मोमोज बनाकर बेचना शुरू किए हैं. चंद्रिका ने ये भी क्लियर किया कि वो वड़ा पाव भी बेच रही हैं, लेकिन अब से मोमोज भी साथ में बेचेंगी. लोगों ने उड़ाया मजाक चंद्रिका के फिर से सड़क पर ठेला लगाने पर लोगों के तरह-तरह के रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं. कई लोग उनका मजाक भी उड़ा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- बिग बॉस से सीधा कार्ट पर आ गईं.  एक दूसरे यूजर ने लिखा- फिर से सड़क पर आ गई. एक अन्य यूजर ने लिखा- फिर रोना-धोना करेगी. बता दें कि कुछ समय पहले चंद्रिका पति संग अपनी अनबन और तलाक के ड्रामे को लेकर सुर्खियों में रही थीं. मुस्लिम मिस्ट्री मैन संग रोमांटिक वीडियो बनाने पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया था. लेकिन लड़ाई-झगड़े के बीच उन्होंने पति संग पैचअप कर लिया था, जिससे लोग काफी हैरान हुए थे.

हरियाणा के खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का गौरव, 14 स्वर्ण समेत 32 पदक जीतने वालों का हुआ सम्मान

पंचकुला  जापान में आयोजित एशिया चैंपियनशिप में जोरदार प्रदर्शन करके लौटे हरियाणा के खिलाड़ियों का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने जोरदार स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने फूल मालाएं पहनाकर खिलाड़ियों का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 85 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। इनमें से हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुल 32 पदक जीते हैं, जिसमें 14 स्वर्ण, 9 रजत और 9 कांस्य पदक सहित शामिल हैं। खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने यह पदक अपने नाम कर हरियाणा की खेल शक्ति का लोहा मनवाया। उन्होंने खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी उपलब्धियों की सराहना की और भविष्य में भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश को खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर गर्व है। यह हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा चलाई जा रही खेल नीतियों व योजनाओं का नतीजा है कि प्रदेश में खेल व खिलाड़ी निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि भविष्य में भी खिलाड़ी इसी तरह बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। हरियाणा के 32 पदक प्रदेश की खेल क्षमता का प्रमाण खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे की शान बढ़ाने वाले इन खिलाड़ियों पर पूरे हरियाणा को गर्व है। उन्होंने कहा कि 14 स्वर्ण पदक यह बताते हैं कि हरियाणा के खिलाड़ी केवल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए नहीं, बल्कि जीत हासिल करने के इरादे से मैदान में उतरते हैं। उन्हों ने कहा कि खिलाड़ियों ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। इन खिलाड़ियों के पीछे उनके माता-पिता, प्रशिक्षकों और खेल संस्थानों की भी बड़ी भूमिका है। मंत्री ने सभी अभिभावकों और प्रशिक्षकों को भी बधाई दी और कहा कि सरकार खिलाड़ियों के साथ मजबूती से खड़ी है। खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने खिलाड़ियों से बातचीत कर उनकी यात्रा, प्रतियोगिता में प्रदर्शन और आगे की तैयारियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मान देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में खिलाड़ियों के लिए प्रतिबद्ध है सरकार खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार खिलाड़ियों के प्रोत्साहन, उनकी डाइट, बेहतर प्रशिक्षण, अच्छे कोच और आधुनिक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उस प्रतिभा को सही मंच और सही दिशा देने की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की धरती ने देश को अनेक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं और आने वाले समय में भी प्रदेश से बड़ी संख्या में प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगी। सरकार चाहती है कि हरियाणा के खिलाड़ी राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि एशियाई, विश्व और ओलंपिक स्तर पर भी अधिक से अधिक पदक जीतें। गांवों की प्रतिभाओं को मिलेगा बेहतर मंच खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने कहा कि हरियाणा की खेल संस्कृति में गांवों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश के कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर दुनिया के बड़े खेल मंचों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि गांवों और छोटे शहरों में रहने वाले युवाओं को भी विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें, इस दिशा में सरकार का विशेष ध्यान है। यदि गांवों में छिपी प्रतिभाओं को समय रहते उचित सुविधाएं और प्रशिक्षक मिल जाएं, तो आने वाले वर्षों में हरियाणा से और अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल सकते हैं। खिलाड़ियों की सफलता बनेगी युवाओं की प्रेरणा खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत खेलों के क्षेत्र में लगातार अपनी प्रतिभा और क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित कर रहा है और हरियाणा भी इस खेल यात्रा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतता है, तो उसकी सफलता सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहती, बल्कि पूरे प्रदेश और देश की उपलब्धि बन जाती है। ऐसी उपलब्धियां दूसरे युवाओं को भी खेलों की ओर आकर्षित करेंगी और वे मोबाइल तथा अन्य गतिविधियों से हटकर मैदान की ओर आएंगे। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के सम्मान और प्रोत्साहन में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने खिलाड़ियों से अपनी मेहनत जारी रखने और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश के लिए पदक जीतने का आह्वान किया।

राम सेतु: आस्था, इतिहास या विज्ञान? जानिए नासा की तस्वीरों और मानव निर्मित पुल के दावे की पूरी सच्चाई

 समुद्र के बीच पत्थरों और चट्टानों की एक लंबी कतार… एक तरफ भारत का रामेश्वरम और दूसरी तरफ श्रीलंका का मन्नार द्वीप. हजारों साल पुरानी धार्मिक परंपरा इसे राम सेतु कहती है, जबकि आधुनिक भूगोल में इसे एडम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि भगवान राम की वानर सेना ने माता सीता को लंका से वापस लाने के लिए इसी समुद्री मार्ग पर सेतु का निर्माण किया था. लेकिन विज्ञान इसे किस नजर से देखता है? क्या यह सच में इंसानों द्वारा बनाया गया पुल था या फिर समुद्र के भीतर प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बनी एक अनोखी संरचना? और फिर आती है नासा की वो तस्वीर, जिसने साल 2007 में राम सेतु को लेकर देश-दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी थी. इंटरनेट पर दावा किया गया कि नासा ने अपनी सैटेलाइट तस्वीरों से साबित कर दिया है कि राम सेतु इंसानों ने बनाया था. लेकिन नासा ने वास्तव में क्या कहा था? क्या रामायण में बताए गए पांच दिन में सेतु निर्माण की बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण है? पत्थरों के पानी पर तैरने की कहानी कितनी पुरानी है? राम सेतु की उम्र को लेकर अलग-अलग दावे क्यों मिलते हैं? और 2007 में सेतु समुद्र परियोजना के दौरान केंद्र सरकार का हलफनामा इतना बड़ा विवाद क्यों बन गया था. आइए, राम सेतु की पूरी कहानी को आस्था, इतिहास और विज्ञान, तीनों नजरिए से समझते हैं. रामायण में राम सेतु के निर्माण की क्या कथा है? वाल्मीकि रामायण में बताया गया है कि जब भगवान राम माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए लंका की ओर बढ़े, तब उनकी सेना समुद्र के किनारे पहुंची. सामने था विशाल समुद्र और उसे पार करना बेहद जरूरी था. रामायण की कथा के अनुसार, वानर सेना में नल नाम के एक कुशल सेनापति थे. धार्मिक परंपरा में नल को विश्वकर्मा का पुत्र और निर्माण-कला में निपुण माना जाता है. कथा के अनुसार, नल की अगुवाई में वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बनाने का काम शुरू किया. बड़े-बड़े पत्थर, चट्टानें और पेड़ जुटाए गए और उन्हें समुद्र में डालकर एक मार्ग तैयार किया गया. रामायण में इस निर्माण की गति भी बेहद चमत्कारिक बताई गई है. कुछ विवरणों के अनुसार, सेतु का निर्माण पांच दिनों में पूरा हुआ. यहीं से राम सेतु की कथा सामान्य निर्माण की कहानी न रहकर आस्था और चमत्कार से जुड़ी कथा बन जाती है. क्या राम नाम लिखने से पत्थर तैरने लगे थे? राम सेतु से जुड़ी सबसे लोकप्रिय मान्यताओं में से एक है कि भगवान राम की सेना ने पत्थरों पर 'राम' नाम लिखा और उन्हें समुद्र में डाल दिया. कहा जाता है कि इसके बाद वे पत्थर पानी में डूबे नहीं बल्कि तैरते रहे. हालांकि इस बात को समझना जरूरी है कि राम नाम लिखे पत्थरों वाली कथा धार्मिक और लोक परंपराओं में बेहद प्रसिद्ध है, लेकिन इसे आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है. रामायण के अलग-अलग संस्करणों और बाद की लोक परंपराओं में राम सेतु से जुड़ी कथाओं में अंतर भी मिलता है. इसलिए यहां धार्मिक मान्यता और मूल ग्रंथ के वर्णन को एक ही चीज मानने के बजाय दोनों को अलग संदर्भ में समझना ज्यादा उचित है. राम सेतु में गिलहरी की कहानी क्यों सुनाई जाती है? राम सेतु की कथा में एक छोटी सी गिलहरी का प्रसंग भी बेहद लोकप्रिय है. कहा जाता है कि जब वानर सेना विशाल पत्थरों और चट्टानों से सेतु बना रही थी, तब एक छोटी गिलहरी भी इस काम में अपना योगदान देने लगी. वह समुद्र किनारे रेत में लोटती और फिर पुल के पास जाकर अपने शरीर से रेत झाड़ देती है. वानरों को उसका यह प्रयास छोटा और मजाकिया लगा, लेकिन भगवान राम ने उसकी भावना को समझा. लोकमान्यता है कि भगवान राम ने गिलहरी की पीठ पर प्यार से हाथ फेरा. इसी वजह से उसकी पीठ पर तीन धारियां पड़ गईं, जिन्हें आज भी गिलहरी की पहचान से जोड़ा जाता है. इस कथा का संदेश भी बेहद खूबसूरत है कि किसी बड़े काम में योगदान की कीमत उसके आकार से नहीं, बल्कि भावना से तय होती है. समुद्र में मौजूद यह संरचना आखिर है क्या? अब आते हैं उस हिस्से पर जहां धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के बिल्कुल सामने दिखाई देते हैं. भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार के बीच समुद्र में उथले क्षेत्र, रेत और चूना-पत्थर की संरचनाओं की एक श्रृंखला दिखाई देती है. अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और भौगोलिक संदर्भों में इसे Adam's Bridge कहा जाता है. नासा की ओर से उपलब्ध तस्वीर में भी इसे लगभग 48 किलोमीटर लंबी limestone shoals की श्रृंखला बताया गया है. नासा की सामग्री इसके भूवैज्ञानिक उद्गम को विवादित बताती है. यानी यह संरचना वास्तविक है और सैटेलाइट से इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. लेकिन असली सवाल यह है कि इसे बनाया किसने? क्या नासा ने साबित किया था कि राम सेतु इंसानों ने बनाया? यहीं सबसे बड़ी गलतफहमी पैदा हुई. साल 2007 के आसपास राम सेतु की सैटेलाइट तस्वीरें इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुईं. तस्वीर के साथ दावा किया गया कि नासा ने खुद साबित कर दिया है कि भारत और श्रीलंका के बीच मौजूद यह संरचना इंसानों द्वारा बनाया गया पुल है. लेकिन किसी सैटेलाइट तस्वीर से यह अपने आप साबित नहीं होता कि कोई संरचना इंसानों ने बनाई है. सैटेलाइट तस्वीर आपको किसी इलाके का स्वरूप दिखा सकती है, लेकिन उससे अकेले यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई संरचना कितनी पुरानी है, उसका निर्माण किसने किया या वह पूरी तरह प्राकृतिक है अथवा उसमें मानव हस्तक्षेप हुआ है. इसलिए 'नासा ने राम सेतु को मानव निर्मित साबित कर दिया' कहना सही नहीं होगा. नासा की अपनी प्रकाशित सामग्री भी संरचना को Adam's Bridge के रूप में दर्ज करती है और उसके geological origin को लेकर विवाद का उल्लेख करती है. तो क्या राम सेतु सच है? अगर सवाल यह है कि क्या राम सेतु नाम से जुड़ी समुद्री संरचना वास्तव में मौजूद है? तो इसका जवाब हां है. रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच यह वास्तविक भौगोलिक संरचना मौजूद है और इसे अंतरिक्ष से भी देखा … Read more

JSCA में टिकट के लिए जबरदस्त क्रेज, 700 फैंस रात में पहुंचे; महिलाओं की भी लंबी कतार

रांची  राजधानी रांची के धुर्वा स्थित जेएससीए (JSCA) इंटरनेशनल स्टेडियम में 9 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला जाना है। इस मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मैच देखने और खिलाड़ियों को लाइव खेलते देखने के लिए आज सोमवार, 5 अक्टूबर से ऑफलाइन टिकटों की बिक्री शुरू हो गई है। टिकट हासिल करने के लिए बिहार व झारखंड के अलग-अलग जिलों से पहुंचे फैंस बीते रविवार की रात से ही स्टेडियम परिसर के आसपास रुक गए थे। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात में कतार लगाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद सोमवार सुबह 7 बजे से दर्शकों को कतार में खड़ा कराया गया और सुबह 9 बजे से टिकटों की बिक्री शुरू हुई। ऑफलाइन बिक्री के नियम और व्यवस्था: काउंटरों की संख्या: स्टेडियम परिसर में कुल 5 काउंटर बनाए गए हैं। समय: टिकट काउंटर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुले रहेंगे। बिक्री की तारीख: ऑफलाइन टिकटों की बिक्री केवल 5 अक्टूबर और 6 अक्टूबर को ही होगी. इसके बाद ऑफलाइन टिकट की बिक्री बंद हो जाएगी। टिकट सीमा: एक व्यक्ति को अधिकतम दो (2) टिकट ही दिए जा रहे हैं। विशेष काउंटर: महिलाओं और दिव्यांग दर्शकों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की गई है। सुबह 5 से 6 बजे के बीच महिला फैंस कतारों में लग चुकी थीं। महिलाएं भी लगी लाइन मेंः टिकट लेने का खुमार कुछ इस कदर है कि महिलाएं भी अपना सारा काम खत्म कर के लाइनों में लगी हुई, ताकि उन्हें टिकट मिल जाएं। युवाओं में दिखा खास क्रेज: मैच को लेकर युवाओं में भारी रोमांच देखा जा रहा है। टिकट की लाइन में खड़े कई युवाओं ने बताया कि वे उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी को मैदान पर लाइव देखने के लिए घंटों से कतार में लगे हुए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और कतारबद्ध तरीके से टिकट वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और जेएससीए प्रबंधन की ओर से सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, ताकि व्यवस्था बनी रहे। रविवार के शाम से लगी लंबी कतार टिकट लेने के लिए रविवार शाम करीब सात बजे धुर्वा स्थित जेएससीए स्टेडियम के बाहर बनाए गए बेरिकेडिंग में करीब 700 दर्शक पहुंचकर कतार में खड़े हो गए। दर्शकों को उम्मीद थी कि रातभर यहीं रहकर सुबह टिकट काउंटर खुलते ही टिकट ले लेंगे। करीब डेढ़ घंटे तक दर्शक बेरिकेडिंग में खड़े रहे। इसकी जानकारी मिलने पर धुर्वा थाना की पुलिस और डीएसपी मौके पर पहुंचे और सभी को बेरिकेडिंग से बाहर कराया। इनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में थीं। कई महिलाएं चटाई और चादर लेकर पहुंची थीं, ताकि रातभर इंतजार कर सुबह टिकट ले सकें।

फर्जी आधार सेंटरों का नेटवर्क चलाने वाला मो. एजाज कमर गिरफ्तार, बांग्लादेशी को दिलाया पासपोर्ट

पटना बिहार में फर्जी आधार के जरिए विदेशी पासपोर्ट बनाने वाले नेटवर्क का मास्टरमाइंड अरेस्ट हुआ है। फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने और बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट निर्गत कराने के मास्टरमाइंड मो. एजाज कमर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एजाज मूल रूप से आरा का रहने वाला है, लेकिन दशकों पूर्व इसका परिवार पंजाब के चंडीगढ़ में पलटाना इलाके में शिफ्ट हो चुका है। एजाज एमटेक है। इसकी पत्नी लंदन में जॉब करती है। परिवार में कई लोग अमेरिका में रह रहे हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस ने एजाज को पटना से गिरफ्तार किया है। रविवार को उसे न्यायालय में पेशकर जेल भेजा गया। मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है। सिटी एसपी मो. मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि सरकारी स्तर पर बैंकों में संचालित आधार सेंटर के लिए मशीन व मैन पॉवर उपलब्ध कराने के लिए एजाज वेंडरशिप लिए हुए है। 11 राज्यों में इसका आधार सेंटर चल रहा है। बिहार में 13 जिलों में कई बैंकों में आधार सेंटर चलवा रहा है। यह इन सेंटरों में दी गई यूआईडीएआई मशीन और कर्मियों का लॉगिन पासवर्ड फर्जी आधार सेंटर पर भेजता था। इसके लिए हर माह प्रति मशीन के हिसाब से 30 हजार रुपये लेता था। मुजफ्फरपुर में बीते दो साल से इसकी मशीन का इस्तेमाल कन्हाई कम्युनिकेशन सेंटर और आरडीएस कॉलेज के निकट ओम कम्यूनिकेशन सेंटर में हो रहा था। कन्हाई कम्यूनिकेशन सेंटर में इसकी मशीन से बांग्लादेशी बेलाल होसेन का आधार मो. आफताब के नाम से बनाया गया। फिर इसी आधार के जरिए बांग्लादेशी के छद्म नाम पर पासपोर्ट निर्गत कराया गया। मुजफ्फरपुर के अलावा पटना, हाजीपुर, खगड़िया समेत कई जिलों में एजाज ने अपने ऑपरेटर के जरिए मशीन व लॉगिन-पासवर्ड मुहैया कराया है, जिसके इस्तेमाल से हजारों फर्जी आधार बनाए गए हैं। 30 सितंबर को नगर थाने की पुलिस को मोतीझील में अवैध रूप से दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर फर्जी आधार बनाने की सूचना मिली। इसी फर्जी आधार सेंटर से बांग्लादेशी नागरिक का छद्म नाम से आवेदन कर पासपोर्ट निर्गत कराया गया था।

OpenAI के सेफ्टी लीडर ने दिया इस्तीफा, AI डेवलपमेंट के तरीके पर उठाए गंभीर सवाल

OpenAI में एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. कंपनी के लंबे समय तक काम करने वाले सेफ्टी  लीडर डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा दे दिया है. कंपनी छोड़ने के बाद रॉबिन्सन ने OpenAI की काम करने की कल्चर और एआई को आगे बढ़ाने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि AI इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है. रॉबिन्सन के मुताबिक, मौजूदा तरीके से एआई को डेवलप करना अब सही नहीं है. OpenAI की ट्रायल एंड एरर अप्रोच पर उठे बड़े सवाल डेविड रॉबिन्सन ने अपने एक लेख में बताया कि एआई कंपनियां अक्सर पहले सिस्टम को डेवलप और डिप्लॉय करती हैं और जब कोई दिक्कत सामने आती है, तब सेफ्टी सिस्टम को बेहतर किया जाता है. ओपनएआई इस तरीके को इटरेटिव डिप्लॉयमेंट कहता है. रॉबिन्सन का कहना है कि यह तरीका AI के लिए काफी बड़ा रिस्क बन सकता है. जैसे-जैसे एआई मॉडल ज्यादा पावरफुल होते जाएंगे, वैसे-वैसे किसी गलती का असर भी बड़ा हो सकता है. उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ी गलती हो गई तो हर बार उसे बाद में ठीक करने का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए एआई कंपनियों को पहले से ज्यादा मजबूत सेफ्टी सिस्टम बनाने होंगे. AI Agents की घटनाओं का भी किया जिक्र रॉबिन्सन ने अपने लेख में एआई एजेंट से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि एक घटना में ओपनएआई से गलती से AI Agents का एक स्वॉर्म रिलीज हो गया था. उन्होंने एक और मामले का जिक्र किया, जिसमें ट्रेनिंग के दौरान एक एआई मॉडल ने इंटरनेट एक्सेस से जुड़ी पाबंदियों को पार कर लिया. सिस्टम ने इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे अपने आप बंद नहीं किया जा सका, जबकि ऐसा होना चाहिए था. रॉबिन्सन के मुताबिक, इस तरह की गलतियां सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं. AI इंडस्ट्री में तेजी से काम करने की वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं. अब Trial and Error का समय खत्म रॉबिन्सन ने कहा कि AI की बढ़ती कैपिसिटी को देखते हुए अब 'Trial and Error' के भरोसे आगे बढ़ना ठीक नहीं है. उनका मानना है कि भविष्य में एआई सिस्टम इंसानों से भी ज्यादा सक्षम हो सकते हैं. ऐसे में किसी बड़ी गलती को बाद में ठीक करना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने AI कंपनियों को एविएशन और नुक्लेअर पावर  जैसे हाई-रिस्क सेक्टर से सेफ्टी के तरीके सीखने की सलाह दी है. उनके मुताबिक, एआई सिस्टम में भी कई लेयर की सेफ्टी और बैकअप सिस्टम होने चाहिए, ताकि एक छोटी गलती बड़ी समस्या में न बदल जाए. AI से नहीं, उसके गलत इस्तेमाल से चिंता रॉबिन्सन ने यह भी साफ किया कि वह एआई को पूरी तरह खराब नहीं मानते. उनके मुताबिक, AI लोगों के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद हो सकता है. लेकिन इसकी कैपिसिटी बढ़ने के साथ सेफ्टी भी उसी हिसाब से मजबूत होनी चाहिए. OpenAI से इस्तीफा देने के बाद अब रॉबिन्सन बाहर से AI सेफ्टी को लेकर काम करना चाहते हैं. उनका कहना है कि कंपनियों पर बाहर से भी दबाव होना जरूरी है, ताकि एआई को ज्यादा सुरक्षित तरीके से डेवलप किया जा सके. यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब AI सेफ्टी को लेकर पूरी इंडस्ट्री में बहस तेज हो रही है. रॉबिन्सन का कहना है कि एआई को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ-साथ उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

29,334 शिक्षक भर्ती: नौकरी की उम्मीद जगी, सुप्रीम कोर्ट ने 355 अभ्यर्थियों के मामलों पर लिया बड़ा फैसला

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित एवं विज्ञान विषय की 29334 भर्ती से सैकड़ों अभ्यर्थियों को नौकरी की उम्मीद जगी है। इस भर्ती से जुड़े अवमानना मामले में उच्चतम न्यायालय ने 28 सितंबर को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा है कि 29 जनवरी 2025 के आदेश के बावजूद जिन 355 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया, उनके मामलों पर 12 सप्ताह के अंदर विचार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि और अभ्यर्थी योग्य और उपयुक्त पाए जाते हैं तो उन्हें भी बिना देरी के नियुक्ति पत्र दिए जाएं। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ के समक्ष तीन अलग-अलग आवेदन पेश किए गए थे, जिनमें क्रमशः 163, 190 और 2 अभ्यर्थियों ने पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। कुल 355 अभ्यर्थियों का आरोप है कि 29 जनवरी 2025 के आदेश के बावजूद उनकी उम्मीदवारी पर अभी तक विचार नहीं किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इन 355 अभ्यर्थियों के मामलों पर 12 सप्ताह के अंदर विचार किया जाए। इसके अलावा यदि और अभ्यर्थी 29 जनवरी 2025 के आदेश के अनुसार योग्य पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत नियुक्ति की पेशकश की जाए। यदि किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दी जाती है, तो तर्कपूर्ण आदेश पारित कर उसे सूचित किया जाए। इस मामले को छह सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

चंबल में रेत उत्खनन पर रोक के दावे खोखले? कलेक्टर कार्यालय के पीछे निर्माण में रेत इस्तेमाल का आरोप

चंबल से रेत उत्खनन पर रोक के दावे खोखले, कलेक्टर कार्यालय के पीछे निर्माण में रेत के इस्तेमाल का आरोप रात में गश्त के दावों के बीच नदी से नहीं थम रहा अवैध उत्खनन, जलीय जीवों पर भी मंडरा रहा खतरा मुरैना  चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने के प्रशासन के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। प्रशासन द्वारा अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई किए जाने और कलेक्टर-एसपी के रात में गश्त करने के दावों के बावजूद चंबल नदी से रेत का अवैध उत्खनन जारी होने के आरोप सामने आ रहे हैं। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कलेक्टर कार्यालय के पीछे चल रहे निर्माण कार्य में चंबल नदी की रेत के इस्तेमाल की बात सामने आई है। यदि निर्माण स्थल पर इस्तेमाल हो रही रेत चंबल नदी से लाई गई है, तो सवाल यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र से रेत निकालकर उसे शहर तक पहुंचाने वाला नेटवर्क आखिर प्रशासन की नजर से कैसे बच रहा है। कलेक्टर की नाक के नीचे पहुंच रही चंबल की रेत चंबल नदी से अवैध उत्खनन रोकने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की बात कही जाती है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय में कलेक्टर कार्यालय के पीछे चल रहे निर्माण कार्य तक चंबल की रेत पहुंचने के आरोप ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जिला मुख्यालय में ही ऐसी स्थिति है तो नदी के दूरस्थ घाटों और बीहड़ क्षेत्र में अवैध उत्खनन की निगरानी किस तरह हो रही है। कार्रवाई के दावों के बीच जारी है रेत का खेल चंबल नदी से रेत उत्खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद रेत माफिया द्वारा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों से रेत निकालने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और अन्य वाहन जब्त करने का दावा करता है, लेकिन कार्रवाई के बाद भी अवैध उत्खनन पूरी तरह रुकता नजर नहीं आ रहा है। जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा चंबल नदी राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नदी से अवैध तरीके से रेत निकालने से नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होने के साथ ही जलीय जीवों के जीवन पर भी खतरा पैदा होता है। खासकर घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों के प्रजनन स्थलों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन की सख्ती और रात में गश्त के दावों के बावजूद चंबल की रेत निर्माण स्थलों तक कैसे पहुंच रही है? क्या जिम्मेदार विभाग निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही रेत के स्रोत की जांच कराएंगे और अवैध रेत मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे?

50 से ज्यादा महिलाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग का खुलासा, स्क्रीन रिकॉर्डर ऐप से बनाता था अश्लील वीडियो

ग्वालियर शहर के सिटी सेंटर इलाके के न्यू सारिका नगर में पानी का प्लांट चलाने वाले एक युवक के मोबाइल की जांच में 40 से ज्यादा महिलाओं के अश्लील वीडियो मिलने का मामला सामने आया है। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में आरोप है कि वह महिलाओं से दोस्ती करता था और संपर्क बढ़ने के बाद उनके निजी वीडियो रिकॉर्ड कर लेता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन वीडियो का इस्तेमाल महिलाओं को ब्लैकमेल करने या किसी अन्य तरीके से परेशान करने के लिए किया गया था या नहीं। मोबाइल में मिले नंबरों के आधार पर संबंधित महिलाओं से भी संपर्क किया जा रहा है। आरोपी की पहचान योगेश गुप्ता के रूप में आरोपी सिटी सेंटर के सारिका नगर निवासी 40 वर्षीय योगेश गुप्ता है। वह पानी का प्लांट चलाता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं से संपर्क बनाता था। सनातन सेना की सूचना पर पकड़ा गया सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला और सदस्य मुकेश शर्मा को एक महिला कार्यकर्ता ने योगेश की गतिविधियों की जानकारी दी थी। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उसे मुलाकात के बहाने बुलाकर पकड़ लिया। मोबाइल की जांच के दौरान वीडियो मिलने पर उसे विश्वविद्यालय पुलिस को सौंपा गया। रिकॉर्डिंग के लिए स्क्रीन रिकॉर्डर और स्पाई कैमरा वीडियो कॉल के दौरान आरोपी स्क्रीन रिकॉर्डर ऐप का इस्तेमाल करता था। पुलिस को स्पाई कैमरे से रिकॉर्डिंग किए जाने की जानकारी भी मिली है। वह इन रिकॉर्डिंग को अपने पास सुरक्षित रखता था। पुलिस को उसके मोबाइल में एक वीडियो मिला है, जिसमें वह अपनी एक महिला मित्र के साथ वीडियो शूट करता नजर आ रहा है। पुलिस मोबाइल में मिले रिकॉर्ड की जांच कर रही है। संपर्क नंबरों से महिलाओं तक पहुंचेगी पुलिस पुलिस मोबाइल से मिले संपर्क नंबरों के आधार पर संबंधित महिलाओं से संपर्क कर रही है। आरोपी के लैपटॉप में मिले डेटा को भी खंगाला जा रहा है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि रिकॉर्डिंग के बाद महिलाओं पर दबाव बनाया गया या उनसे पैसे मांगे गए। झांसी की महिला देगी शिकायत झांसी की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराने की सहमति दी है। उसके रविवार रात ग्वालियर पहुंचने के बाद पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है। सीएसपी रवि भदौरिया ने बताया- सनातन सेना की सूचना पर युवक को पकड़ा गया है। मामले में पूछताछ की जा रही है। संपर्क नंबरों के आधार पर महिलाओं से बात कर ब्लैकमेलिंग और दबाव के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।  पुलिस ने युवक को हिरासत में लिया पुलिस के अनुसार, योगेश गुप्ता के खिलाफ सनातन सेना संगठन के कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर विश्वविद्यालय थाना पुलिस से शिकायत की थी। शिकायत में एक महिला के हवाले से आरोप लगाया गया था कि युवक महिलाओं से दोस्ती करने के बाद उनके अश्लील वीडियो बनाता है और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करता है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने शनिवार देर शाम योगेश गुप्ता को हिरासत में लिया। मोबाइल की जांच के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं से जुड़े अश्लील वीडियो मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच आगे बढ़ाई। 40 से 50 वर्ष की महिलाओं के वीडियो मिलने की बात पुलिस के मुताबिक, मोबाइल में मिले वीडियो करीब 40 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं से संबंधित बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में इनमें अधिकांश महिलाओं के तलाकशुदा होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी यह स्पष्ट करने में जुटी है कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाए गए। नगर पुलिस अधीक्षक रवि भदौरिया के अनुसार युवक के मोबाइल में मिले नंबरों के आधार पर संबंधित महिलाओं से संपर्क किया जा रहा है। उनसे बातचीत के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।