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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक इकाइयां बंद, हाई पावर कमेटी के फैसले लागू

नोएडा नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन को लेकर यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने कहा कि जिले में स्थिति पूरी तरह सामान्य है। कहीं भी कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि सभी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है। डीजीपी ने कहा कि पुलिस को सोशल मीडिया, मीडिया और यूपी-112 के जरिए लगातार इनपुट मिल रहे हैं। हर सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने पहले ही एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया था, जिसने मौके पर पहुंचकर सभी पक्षों से बातचीत की और अपनी घोषणाएं भी कर दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और मुख्यमंत्री श्रमिकों के प्रति संवेदनशील हैं और उनकी उचित वेतन से जुड़ी मांगों पर निर्णय लिया गया है। कुछ व्यक्तियों और समूहों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई, जिनके खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक और CCTV सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। DGP राजीव कृष्ण ने श्रमिकों से अपील की कि वे शांति बनाए रखें, किसी के बहकावे में न आएं और प्रशासन का सहयोग करें। उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों पर बढ़ी न्यूनतम मजदूरी सरकार ने श्रमिकों व उद्यमियों से संवाद और औद्योगिक सौहार्द व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाई है। समिति के अध्यक्ष औद्योगिक विकास आयुक्त हैं। अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई), प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन विभाग) और श्रमायुक्त कानपुर इसके सदस्य हैं। आज औद्योगिक इकाइयां बंद समिति में श्रमिक संगठनों के पांच प्रतिनिधि एवं उद्यमी संघों के तीन प्रतिनिधि भी सदस्य हैं। समिति ने नोएडा पहुंचते ही पहला निर्णय किया कि शांति व्यवस्था बनाने और स्थिति संभालने के मकसद से मंगलवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सभी औद्योगिक इकाइयां बंद रहेंगी।  

धुरंधर 2 ने तोड़े बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड, 3000 करोड़ क्लब में फ्रेंचाइजी

रणवीर सिंह की धुरंधर 2 को रिलीज हुए 27 दिन हो चुके हैं. एक महीना पूरा होने से पहले ही धुरंधर 2 ने बॉलीवुड और हिंदी सिनेमा के लगभग सारे टॉप रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं. अब ये फिल्म साउथ की सबसे बड़ी फिल्मों बाहुबली 2 और पुष्पा 2 को पीछे छोड़कर एक नया रिकॉर्ड बनाने की तरफ बढ़ रही है. बॉलीवुड फैन्स के लिए सबसे बड़ी खबर ये है कि सिर्फ धुरंधर 2 ही टॉप इंडियन फिल्मों को पछाड़ने जा रही है, बल्कि एक फिल्म सीरीज के तौर पर धुरंधर ने इंडियन सिनेमा को एक नई ऊंचाई दे दी है. आदित्य धर की धुरंधर फ्रेंचाईजी, वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 3000 करोड़ से ज्यादा कमाई कर चुकी है. अब ये इंडिया की सबसे बड़ी फिल्म सीरीज है. धुरंधर के 3000 करोड़ दिसंबर 2025 में आई धुरंधर ने वर्ल्डवाइड 1300 करोड़ से थोड़ा ज्यादा कलेक्शन किया था. जबकि धुरंधर 2 पिछले गुरुवार तक 1680 करोड़ रुपये से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी थी. इस बीते वीकेंड और मंडे के कलेक्शन के साथ धुरंधर 2 का वर्ल्डवाइड 1750 करोड़ से ज्यादा हो चुका है. एक फ्रेंचाईजी के तौर पर धुरंधर का टोटल वर्ल्डवाइड कलेक्शन 3000 करोड़ से ज्यादा हो चुका है. धुरंधर से पहले सबसे बड़ी इंडियन फिल्म सीरीज बाहुबली थी. S. S. Rajamouli की एपिक का पहला पार्ट वर्ल्डवाइड 650 करोड़ से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन लेकर आया था. जबकि दूसरे पार्ट ने करीब 1788 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन किया था. बाहुबली के दोनों पार्ट्स ने वर्ल्डवाइड करीब ऑलमोस्ट 2440 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन किया था. इसी तरह Allu Arjun की दोनों पुष्पा फिल्मों ने मिलकर 2092 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन किया था. इसमें पहली फिल्म के 350 करोड़ और दूसरी फिल्म के 1742 करोड़ शामिल थे. धुरंधर ने इन बाहुबली-पुष्पा का रिकॉर्ड सिर्फ तोड़ा नहीं है, बल्कि इन्हें मीलों पीछे छोड़ दिया है. इंडियन सिनेमा में पहली बार किसी फिल्म सीरीज ने वर्ल्डवाइड 3000 करोड़ का लैंडमार्क पार किया है. बाहुबली 2 का ऑल टाइम रिकॉर्ड भी ध्वस्त! आमिर खान की दंगल 2000 करोड़ वर्ल्डवाइड कलेक्शन के साथ अभी तक सबसे बड़ी इंडियन फिल्म है. इसके बाद दूसरे नंबर पर करीब 1788 करोड़ के साथ बाहुबली 2 थी. लेकिन धुरंधर 2 बहुत जल्द 1800 करोड़ तक पहुंचने वाली है. रणवीर की फिल्म जिस तरह आगे बढ़ रही है, जल्द ही 1900 करोड़ के पार नजर आएगी. हालांकि 2000 करोड़ अभी इसके लिए थोड़ा दूर नजर आ रहा है क्योंकि अपनी मेन मार्केट, इंडिया में धुरंधर 2 थोड़ी स्लो पड़ने लगी है. चौथे सोमवार को स्लो पड़ी धुरंधर 2 चौथे हफ्ते की शुरुआत में शुक्रवार को 7 करोड़ नेट इंडिया कलेक्शन करने वाली धुरंधर 2 ने शनिवार-रविवार को 13-14 करोड़ तक कमाई की. लेकिन सोमवार सुबह से ही फिल्म स्लो नजर आई. सैकनिल्क का डेटा बताता है कि चौथे सोमवार को धुरंधर 2 ने 5.20 करोड़ कलेक्शन किया है. संडे के मुकाबले ये गिरावट बड़ी जरूर नजर आती है. शुक्रवार के मुकाबले फिल्म वर्किंग डेज में ठीकठाक पकड़ बनाए नजर आ रही है. लेकिन ये क्लियर है कि बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर 2 अब स्लो पड़ रही है. अब तक 26 दिनों में धुरंधर 2 का नेट कलेक्शन 1088 करोड़ से ज्यादा हो चुका है. जिसमें सिर्फ हिंदी वर्जन से ही फिल्म ने 1000 करोड़ का बिजनेस किया है. अब देखना है कि आने वाले दिनों में धुरंधर 2 1900 करोड़ से और कितना आगे जा पाती है.

लखनऊ–कानपुर टेरर मॉड्यूल मामले में मिन्हाज समेत तीन को आजीवन कारावास

कानपुर स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई शहरों को दहलाने की साजिश रचने वाले तीन आतंकियों मिन्हाज अहमद, मुशीरुद्दीन और तौहीद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इनकी गिरफ्तारी लखनऊ से हुई थी, लेकिन बाद में यह दावा किया गया कि मिन्हाज और मुशीरुद्दीन ने कानपुर में भी आतंकी नर्सरी तैयार करने की योजना बनाई थी और इसके लिए एक बिल्डर की मदद से चमनगंज में इनके लिए ठिकाना तैयार किया जा रहा था। मिन्हाज और मुशीरुद्दीन के कानपुर कनेक्शन को लेकर कोई जांच रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन इस बार के पुख्ता सबूत बताए गए थे कि दोनों का कानपुर से गहरा नाता था। दावा था कि मिन्हाज ने बताया था कि उसने कानपुर में टेरर क्लास रूम प्लान किया था। इसके लिए जगह की जिम्मेदारी चमनगंज के एक बड़े बिल्डर को दी गई थी। उसने बताया था कि यहां नौजवानों को रेडिकलाइज करके आतंक का पाठ पढ़ाया जाना था। यह भी सामने आया था कि रहमानी मार्केट से मिन्हाज के लिए दो प्री-एक्टिवेटेड सिम और एक मोबाइल उपलब्ध कराया गया था। उस वक्त मीडिया में बिल्डर को उठाकर उनसे पूछताछ की खबर भी सामने आई थी, लेकिन उसकी कभी पुष्टि नहीं हो सकी। यह भी सामने आया था कि मिन्हाज ने चमनगंज के हिस्ट्रीशीटर से एक पिस्टल भी खरीदी थी। इसका फाइनेंसर नई सड़क का एक बिल्डर था। उस वक्त एटीएस व जांच एजेंसियों की चहलकदमी चमनगंज के अलावा पेंचबाग में भी सामने आई थीं। स्लीपर सेल की तरह किया काम जानकारी के मुताबिक करीब डेढ़ साल तक मिन्हाज ने स्लीपर सेल की तरह काम किया और फिर नौकरी जाने के बाद वह सक्रिय रूप से अलकायदा के साथ जुड़कर काम करने लगा। सूत्रों के मुताबिक वह इतना कट्टर हो चुका था कि वह खुद को मानव बम बनाने पर भी राजी हो गया था।  

हरियाणा बीजेपी ने निकाय चुनाव को लेकर बनाया ‘मिशन मोड’ प्लान

पंचकूला  हरियाणा बीजेपी के प्रदेश कार्यालय 'पंचकमल' में आज कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने की। बैठक में आगामी निकाय चुनावों की रणनीति, संगठन के आगामी कार्यक्रमों और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। निकाय चुनाव के लिए 'मिशन मोड' में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने स्पष्ट किया कि पार्टी निकाय चुनावों को लेकर पूरी तरह तैयार है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के लिए निकाय चुनाव वाले क्षेत्रों के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी 16 से 18 अप्रैल तक संबंधित निगम, परिषद और पालिकाओं का दौरा करेगी। इस बीच कमेटी स्थानीय विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए 20 अप्रैल को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है। संगठनात्मक चर्चा और विपक्षी घेराबंदी बैठक के बाद वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि बैठक में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम', पीएम के 'मन की बात' कार्यक्रम और डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के आयोजनों पर भी मंथन हुआ। पार्टी अंबेडकर जयंती को बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े उत्साह के साथ मना रही है। बैंक फ्रॉड मामला: पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड पर बड़ौली ने कहा कि सरकार को पूरा पैसा ब्याज समेत वापस मिल चुका है और विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। कैप्टन अभिमन्यु का विपक्ष पर तीखा हमला कैप्टन अभिमन्यु ने मंडियों में फसल खरीद की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले हुड्डा सरकार में किसानों को दो-दो रुपये के चेक मिलते थे और खाद के लिए थानों से पर्चियां कटवानी पड़ती थीं। आज किसानों के खातों में 24 से 48 घंटे के भीतर सीधे पैसा (DBT) पहुंच रहा है, जो पहले के समय में सपना था। कैप्टन ने कहा कि कहा कि विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है।  

ई-रिक्शा व ऑटो में जेवर चोरी करने वाला महिला गैंग पकड़ा गया

लखनऊ ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा यात्रियों को उलझाकर जेवर चोरी व टप्पेबाजी करने वाले महिला गैंग का खुलासा करते हुए कृष्णानगर पुलिस ने तीन महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से चोरी की गई सोने की चेन, एक अंगूठी और पायल बरामद की गई है। डीसीपी दक्षिणी अमित आनंद ने बताया कि कृष्णानगर इलाके में नवंबर 2025 से बीते मार्च माह के बीच टप्पेबाजी की तीन घटनाएं घटी थीं। इस मामले में कृष्णानगर पुलिस की एक टीम को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे 600 से 700 सीसीटीवी कैमरों को चेक किया और वारदात को अंजाम देने वाले गैंग का पता लगाते हुए मंगलवार को डूडा कॉलोनी आशाराम बापू मार्ग मानसनगर से दुबग्गा सीतापुर बाईपास झुग्गी झोपड़ी निवासी शेषकला, उसके पति दयालाल, पूजा और गौरी देवी को गिरफ्तार किया। शेषकला, दयालाल और पूजा मूल रूप से नागपुर के रहने वाले हैं, जबकि आरोपी गौरी देवी बिहार के आरा की निवासी है। महिला दरोगा ने सादे कपड़े में एक हफ्ते तक रेकी की एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा ने बताया कि इस गैंग का पकड़ने में कृष्णानगर थाने पर तैनात महिला दरोगा सिद्धि मिश्रा की सबसे अहम भूमिका रही। फुटेज मिलने के बाद उन्होंने सादे कपड़े में कई दिनों में घूम-घूम कर गैंग के बारे में पता किया। इसके बाद उन्होंने गैंग के निवास स्थान की पूरी रेकी कर जानकारी जुटाई और फिर पुलिस ने इस गैंग पकड़ा। एसीपी ने बताया कि शेषकला इस गैंग की लीडर है और पहले से उनके खिलाफ बख्शी का ताला, मड़ियांव, हरदोई, नाका में चोरी के कई मामले दर्ज हैं। उल्टी करने के बहाने या पिन चुभोकर वारदात को देते थे अंजाम एसीपी ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह लोग ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा में सफर करने वाले ऐसे वृद्धों को शिकार बनाते थे जो जेवर पहने होते थे। आरोपी महिलाएं उसी वाहन में सवार तो जाते थे, जिसमें पीड़ित बैठते थे। सफर के दौरान आरोपी महिलाएं उल्टी करने या पीड़ित को सेफ्टी पिन चुभोकर उनको उलझा कर जेवर चोरी कर लेते थे। आरोपी नागपुर से ट्रेन से लखनऊ व अन्य शहरों में जाकर इलाज के नाम पर या फेरी लगाने के बहाने से भीड़भाड़ वाले इलाके में वारदात को अंजाम देते थे। बार-बार पता बदले देते थे आरोपी पूछताछ में पुलिस को इस बात का पता चला है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपी न सिर्फ अपना ठिकाना बदलते थे, बल्कि आधार कार्ड पर भी पता बदलवा लेते थे। ऐसे में इनको ट्रेस करना पुलिस के लिए मुश्किल होता था।  

‘जुमांजी: ओपन वर्ल्ड’ का ऐलान, 25 दिसंबर को रिलीज होगी फिल्म

‘जुमांजी’ के तीसरे पार्ट की घोषणा लॉस एंजेलिस में नहीं, बल्कि लास वेगास में हुए सोनी के सिनेामकॉन इवेंट के दौरान की गई, जहां फिल्म की पहली झलक और ट्रेलर भी दिखाया गया। इस खास मौके पर केविन हार्ट, ड्वेन जॉनसन और जैक ब्लैक खुद मौजूद थे। जानिए क्या होगा ‘जुमांजी’ के तीसरे पार्ट का ऑफिशियल टाइटल। क्या होगा मूवी का नाम? केविन हार्ट, ड्वेन जॉनसन और जैक ब्लैक स्टारर इस फिल्म का नाम ‘जुमांजी: ओपन वर्ल्ड’ होगा। फिल्म 25 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसमें कैरन गिलन भी अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन जेक कसडन ने किया है, जबकि इसे मैट टोलमैक, ड्वेन जॉनसन, डेनी गार्सिया, हीराम गार्सिया और जेक कसडन ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म की कहानी जेफ पिंकनर और स्कॉट रोसेनबर्ग ने लिखी है, जो पहले भी इस सीरीज के पार्ट्स लिख चुके हैं।

सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगी पदोन्नति, नई नियमावली 2026 जारी

रांची  झारखंड सरकार ने चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में कार्यरत हजारों ग्रुप ‘घ’ कर्मियों को ग्रुप ‘ग’ के पदों पर प्रोन्नति का अवसर मिलेगा. इस निर्णय से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में खुशी की लहर है. यह कदम कर्मचारियों के करियर विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. किन पदों पर मिलेगी प्रोन्नति नए प्रावधान के तहत चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को निम्न वर्गीय लिपिक (एलडीसी) के पद पर प्रोन्नत किया जाएगा. वहीं, सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों को कनीय सचिवालय सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ मिलेगा. इससे कर्मचारियों को बेहतर जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र मिलेगा. साथ ही, उनके वेतन और पद की गरिमा में भी वृद्धि होगी. सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगा चयन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से दी जाएगी. यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित होगी, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके. कुल रिक्त पदों के 15 प्रतिशत हिस्से पर इस परीक्षा के जरिए प्रोन्नति दी जाएगी. इससे योग्य और सक्षम कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. नई नियमावली 2026 जारी कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने ‘सीमित प्रतियोगिता ऑनलाइन परीक्षा नियमावली 2026’ जारी कर दी है. इस नियमावली में प्रोन्नति से संबंधित सभी दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड तय किए गए हैं. साथ ही परीक्षा के पैटर्न और प्रक्रिया की भी स्पष्ट जानकारी दी गई है, ताकि उम्मीदवार पहले से तैयारी कर सकें. शैक्षणिक योग्यता क्या होगी प्रोन्नति के लिए अलग-अलग पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है. कनीय सचिवालय सहायक बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी. वहीं, समाहरणालय और अन्य कार्यालयों में कनीय लिपिक के पद के लिए इंटरमीडिएट या 10+2 पास होना जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पदोन्नति के बाद कर्मचारी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें. कर्मचारियों को मिलेगा करियर ग्रोथ का अवसर इस फैसले से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा. लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह निर्णय उत्साहवर्धक साबित होगा. इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार आएगा. पारदर्शिता और दक्षता पर जोर ऑनलाइन परीक्षा और स्पष्ट नियमावली के जरिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है. इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी. साथ ही योग्य कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जो राज्य की प्रशासनिक दक्षता को और मजबूत करेगा.

बच्चों के नाम बदलने की पहल, शिक्षा विभाग ने तैयार की 3000 नामों की लिस्ट

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर है, जिन्हें अपने अजीबोगरीब नाम या सरनेम की वजह से अक्सर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पहल पर शिक्षा विभाग ने 'सार्थक नाम अभियान' की पूरी तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास का आधार होता है. इसी सोच के साथ अब उन बच्चों के नाम और उपनाम बदले जाएंगे जो सुनने में नकारात्मक या अर्थहीन लगते हैं. विभाग ने तैयार की 3 हजार 'सार्थक' नामों की लिस्ट इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3000 सार्थक और गौरवपूर्ण नामों की एक आधिकारिक लिस्ट तैयार की है. इस लिस्ट में बालिकाओं के लिए 1529 और बालकों के लिए 1409 बेहतरीन नाम शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि ये नाम बच्चों की राशि और उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और विश्वास के अनुसार सही नाम का चुनाव कर सकें. शिक्षा मंत्री का कहना है कि अक्सर जानकारी के अभाव में बच्चों के नाम 'कजोड़मल', 'शेरू' या 'घीसा' जैसे रख दिए जाते हैं, जिससे बड़े होने पर उन्हें समाज में अजीब लगता है. विभाग अब इन नामों की जगह सम्मानजनक विकल्प दे रहा है. इस अभियान का एक अहम पहलू बच्चों के सरनेम में बदलाव करना भी है. सरकार ने उन उपनामों को बदलने का सुझाव दिया है जो आज के दौर में गरिमापूर्ण नहीं माने जाते. शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन पुराने उपनामों की जगह 'वाल्मीकि' या अन्य सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए. इससे न केवल बच्चों की सामाजिक छवि बेहतर होगी, बल्कि उनमें जातिगत हीन भावना को खत्म करने में भी मदद मिलेगी. शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. चयन के लिए पेरेंट्स की लिखित सहमति जरूरी स्कूलों में होने वाली एसएमसी (SMC) और पीटीएम (PTM) बैठकों के दौरान शिक्षक उन बच्चों की पहचान करेंगे जिनके नाम सुधारने की जरूरत है. इसके बाद विभाग द्वारा सुझाई गई लिस्ट अभिभावकों को दिखाई जाएगी. यदि माता-पिता अपने बच्चे का नाम या सरनेम बदलने के लिए तैयार होते हैं, तो उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद ही सरकारी दस्तावेजों, शाला दर्पण पोर्टल और यूडीआईएसई प्लस पर नाम बदला जाएगा. यह प्रक्रिया फिलहाल कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए ही लागू की गई है. विरोध के स्वर: नाम जरूरी या सुविधाओं में सुधार? जहां सरकार इसे बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं कुछ संगठनों ने इसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त अभिभावक संघ और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को बच्चों के नाम बदलने के बजाय निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने, स्कूलों के जर्जर ढांचे को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उनका तर्क है कि नाम बदलना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव है, जबकि शिक्षा का असली सुधार धरातल पर सुविधाओं को बढ़ाने से होगा.

PSL प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबर आजम का जवाब, आलोचना पर दी सफाई

नई दिल्ली  पाकिस्तान सुपर लीग के मुकाबलों से ज्यादा मजेदार तो मैच के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है। कुछ ही दिन पहले ही एक रिपोर्टर के द्वारा विराट कोहली जैसा मैच फिनिश नहीं करने के सवाल पर भड़कने वाले बाबर आजम अब एक और पत्रकार पर आग बबूला हुए है पेशावर जाल्मी के कप्तान बाबर आजम के टी20 करियर के साथ सबसे बड़ी समस्या उनकी स्ट्राइक रेट रही है। इसको लेकर जब उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल किया गया कि क्या उन्होंने अपने खेल पर दोबारा काम किया है, जैसा कि टीम के कोच मिस्बाह-उल-हक ने हिंट दिया था। इस पर बाबर ने जो जवाब दिया, वो हैरान कर देने वाला रहा। बाबर आजम ने रिपोर्टर का मुंह किया बंद अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो बाबर आजम का स्ट्राइक रेट उनकी टीम के बाकी खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम है। पेशावर जाल्मी के लिए इस सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले कुसल मेंडिस ने 5 पारियों में 309 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 171.67 का है। वहीं, पाकिस्तान के ही साहिबजादा फरहान ने 249 रन 180.43 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से बनाए हैं, जबकि बाबर आजम का स्ट्राइक रेट इस सीजन में अब तक महज 130.68 का रहा है। मुल्तान सुल्तांस को 24 रनों से हराने के बाद जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्राइक रेट पर सवाल उठा, तो बाबर ने कहा, "आपको अलग-अलग पोजीशन पर अलग तरह से खेलना होता है। स्कोरबोर्ड को ध्यान में रखते हुए यह देखना पड़ता है कि टीम की जरूरत क्या है। मुझे लगता है कि आपको पहले परिस्थितियों का आकलन करना चाहिए। जैसे कराची की जिस विकेट पर 240 रन बने थे, अगले दिन वैसी स्थिति नहीं थी और हम मुश्किल से 180 रन ही बना सके। इसलिए, हालात बहुत मायने रखते हैं।" 31 साल के बाबर ने आगे कहा,     हर दिन आपको एक जैसी पिच नहीं मिलेगी, आप हर दिन एक जैसा नहीं खेल सकते, विपक्षी टीम आपके लिए प्लान बनाती है। मुंह उठाकर शॉट्स नहीं खेल सकते। हर दिन आपको एक अलग गेम प्लान के साथ आना पड़ता है। अगर आप पहले छह ओवर में बल्लेबाजी कर रहे हैं, तो मुझे पता है कि पावरप्ले का फायदा उठाना है. फिर साझेदारी बनानी है, मौके लेने हैं, गेंदबाजों को टारगेट करना है।    साझेदारी की अहमियत पर भी जोर देते हुए उन्होंने कहा, “कई बार आप स्ट्राइक रेट संभाल लेते हैं और कई बार नहीं। यही साझेदारी की अहमियत है। एक बल्लेबाज दूसरे का दबाव कम कर सकता है।" अगर बात करें मैच की तो पेशावर जाल्मी बनाम मुल्तान सुल्तांस के बीच खेले गए पीएसएल के 22वें मैच में पेशावर जाल्मी की टीम को जीत मिली। ये उनकी मौजूदा टूर्नामेंट की पांचवीं जीत रही और वो पीएसएल की अंक तालिका में 11 अंक के साथ टॉप पर बनी हुई है, जबकि मुल्तान सुल्तान की टीम प्वाइंट्स टेबल में 8 अंक के साथ दूसरे स्थान पर है।  

वर्ल्ड कप के स्टार बुमराह आईपीएल में क्यों हो रहे हैं फीके?

नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप-2026 में 14 विकेट लेकर पूरे टूर्नामेंट के सबसे घातक तेज गेंदबाज साबित हुए जसप्रीत बुमराह के लिए आईपीएल 2026 की शुरुआत बिल्कुल उलटी कहानी लेकर आई है. वही बुमराह, जिनकी यॉर्कर को दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज भी मुश्किल से पढ़ पाते थे, इस सीजन में विकेट लेने के लिए जूझते नजर आ रहे हैं. उनकी गेंदों से पहले जैसी धार और निर्णायक असर गायब दिख रहा है, जिससे क्रिकेट फैन्स भी हैरान हैं. चार मैच… 15 ओवर… और नतीजा बेहद चौंकाने वाला- एक भी विकेट नहीं. 123 रन खर्च, 8.20 का इकोनॉमी रेट और सबसे बड़ी चिंता, वो ‘विकेट टच’ जो बुमराह की पहचान था, पूरी तरह गायब. क्रिकेट के गलियारों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या बुमराह को किसी की नजर लग गई है या फिर बल्लेबाजों ने उनका कोड तोड़ दिया है? सिर्फ कुछ महीने पहले तक तस्वीर बिल्कुल अलग थी. टी20 वर्ल्ड कप में बुमराह ने अपनी गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को बांधकर रख दिया था. 8 मैच, 14 विकेट, 6.21 की इकोनॉमी और 12.42 का एवरेज…ये आंकड़े बताते हैं कि वह अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ व्हाइट बॉल फॉर्म में थे. डेथ ओवर्स में उनका नियंत्रण, यॉर्कर की सटीकता और धीमी गेंदों का मिश्रण उन्हें लगभग अजेय बना रहा था. लेकिन आईपीएल में आते ही वही गेंदबाज अचानक सामान्य दिखने लगे. चार मैचों में विकेट का कॉलम खाली होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत है कि कुछ गड़बड़ जरूर है. यॉर्कर क्यों हो गई कमजोर? बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी यॉर्कर रही है. वह गेंद जो बल्लेबाज के पैरों के पास आकर स्टंप्स को निशाना बनाती है. लेकिन इस सीजन में वही गेंद बार-बार फुल टॉस या आधी पिच पर गिरती दिखी है. बुमराह के इस बुरे हाल के तीन कारण हो सकते हैं – 1. थकान का असर लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और लीग क्रिकेट के बीच शरीर को पर्याप्त रिकवरी नहीं मिली हो सकती है. जसप्रीत बुमराह जैसे अनोखे एक्शन वाले गेंदबाज पर यह असर और भी ज्यादा होता है. उनके एक्शन में डिलीवरी के समय शरीर पर असामान्य दबाव पड़ता है, ऐसे में थोड़ी भी थकान सटीकता पर सीधा असर डालती है. 2. वर्कलोड मैनेजमेंट की गड़बड़ी वर्कलोड मैनेजमेंट सिर्फ मैचों की संख्या तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें ओवरों की तीव्रता, डेथ ओवर का दबाव और लगातार हाई-इंटेंसिटी स्पेल भी शामिल होते हैं. बुमराह को अक्सर टीम के सबसे मुश्किल ओवर (पावरप्ले और डेथ) दिए जाते हैं. इसका मतलब है कि हर मैच में उनका शरीर और दिमाग दोनों चरम दबाव में रहते हैं. अगर इस वर्कलोड को सही तरीके से बैलेंस नहीं किया गया, तो परफॉर्मेंस में गिरावट आना तय है. 3. बल्लेबाजों की तैयारी और माइक्रो-एडजस्टमेंट की कमी आज का टी20 बल्लेबाज पहले से ज्यादा डेटा-आधारित हो गया है. यॉर्कर के खिलाफ खास बैटिंग प्लान तैयार किए जाते हैं और बुमराह की गेंदों को अब पहले से बेहतर पढ़ा जा रहा है. दूसरी ओर, बुमराह की गेंदबाजी बेहद माइक्रो-एडजस्टमेंट पर टिकी होती है. हल्की सी भी लय बिगड़ने पर उनका पूरा पैटर्न प्रभावित हो जाता है. आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं – टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल 2026 के बीच का फर्क चौंकाने वाला है. – वर्ल्ड कप: 8 मैच, 14 विकेट, इकोनॉमी 6.21 – आईपीएल: 4 मैच, 0 विकेट, 15 ओवर, 123 रन, इकोनॉमी 8.20 ये सिर्फ फॉर्म का गिरना नहीं है, बल्कि प्रभावशीलता (impact) का गिरना है. बुमराह जैसे गेंदबाज के लिए विकेट नहीं लेना सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ाता है. मुंबई इंडियंस के लिए बड़ा सिरदर्द आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में डेथ ओवर्स में बुमराह का रोल निर्णायक होता है. लेकिन इस बार वही विभाग टीम के लिए चिंता बन गया है. विपक्षी टीमें अब बुमराह के ओवर में खुलकर रन बना रही हैं, जो पहले लगभग असंभव था. कप्तान के लिए यह स्थिति रणनीति बदलने जैसी है…क्योंकि जब आपका सबसे भरोसेमंद हथियार ही धार खो दे, तो प्लान B हमेशा कमजोर पड़ जाता है. क्या यह सिर्फ ‘अस्थायी स्लिप’ है? क्रिकेट इतिहास बताता है कि बड़े गेंदबाजों के करियर में ऐसे फेज आते हैं, लेकिन बुमराह का मामला थोड़ा अलग है. क्योंकि वह सिर्फ तेज गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि स्किल और माइंड गेम के मास्टर हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी वापसी क्षमता रही है. चोट से लौटना हो या फॉर्म से, बुमराह ने हमेशा खुद को फिर से साबित किया है. बल्लेबाजों ने सीखा या बुमराह ने खोया? यह बहस अब तेज हो चुकी है. एक वर्ग मानता है कि टी20 क्रिकेट अब इतना एडवांस हो चुका है कि किसी भी गेंदबाज की कमजोरी लंबे समय तक छुपी नहीं रहती. दूसरी तरफ, कई पूर्व खिलाड़ी मानते हैं कि यह सिर्फ फॉर्म का मामला है और जैसे ही बुमराह एक विकेट निकालेंगे, उनका आत्मविश्वास फिर से लौट आएगा. असली सवाल अब यह है क्या बुमराह की यह गिरावट एक छोटे से फेज का हिस्सा है? या फिर टी20 क्रिकेट का नया युग तेज गेंदबाजों के खिलाफ एक नया ‘सिस्टम’ बना रहा है? फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है. लेकिन एक बात तय है, जब बुमराह अपनी लय में होते हैं, तो दुनिया का कोई भी बल्लेबाज सुरक्षित महसूस नहीं करता.