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वृंदावन, मिलावटी पेड़े और ई-रिक्शा पर होगी सख्ती

वृंदावन  ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर की हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी की बैठक बृहस्पतिवार को लक्ष्मण शहीद स्मारक भवन में आयोजित की गई। इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ठाकुरजी के फूल बंगलों में आ रही रुकावट पर कमेटी ने नरम रुख दिखाया और उसका शुल्क 1,51000 रुपये से घटाकर 101000 रुपये कर दिया गया। साथ ही मंदिर खुलने से एक घंटे पहले फूल बंगला सजाने वाले के यजमान और उसके परिजन को सिंहासन पूजा की भी अनुमति दी गई। इसके अलावा मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने पर मंथन किया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 25 बिंदुओं के एजेंडा पर विस्तार से चर्चा की गई। फूल बंगले के अलावा मंदिरों के आसपास बिक रहे मिलावटी पेड़े को लेकर अध्यक्ष ने एफएसडीए के अफसरों को निर्देश दिए कि मिलावटी पेड़े बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। बैठक में मौजूद अध्यक्ष अशोक कुमार, मुकेश मिश्रा व अन्य। उन्होंने कहा कि राजस्थान बॉर्डर से लाकर सस्ता खोया यहां खपाया जा रहा है, लेकिन ऐसे लोगों पर अब कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा वृंदावन में ई-रिक्शों से आ रही परेशानी को दूर करने के लिए निर्देश दिए। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ई रिक्शा सीज किए जाएंगे तो उन्हें खड़ा करने की समस्या आएगी, इस पर नगरायुक्त जग प्रवेश ने बताया कि चार धाम मंदिर के पास सरकारी जगह है, वहां सीज वाहनों को रखा जाएगा। मंदिर में निजी सुरक्षाकर्मियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए उन्हें मंदिर के प्रबंधक को निर्देश दिए और कहा कि अगली बैठक में उनके लिए नए नियम तय किए जाएंगे। इसके अलावा मंदिर चबूतरे पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा की गई। सर्वसम्मति निर्णय लिया गया है कि बांकेबिहारी मंदिर और उससे जुडे़ अन्य मंदिरों पर किए जा रहे विकास कार्यों को जल्द पूरा किया जाए। मंदिर परिसर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को एचडी एवं एआई तकनीक से लैस कर अपग्रेड किया जाए। निधिवन राज और सुरक्षा सेवाओं के ठेकों की अवधि समाप्त होने पर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने पर मंथन किया गया। इसके अलावा विभिन्न बैंकों से वित्तीय वर्ष 2025-26 में जमा धनराशि और अर्जित ब्याज का विवरण देखा गया। साथ ही चार बैंकों में धनराशि जमा करने और मंदिर के ऑडिट, लेखांकन व्यवस्था और मीडिया उपकरणों की खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। मंदिर के सिंहासन को ठीक कराने पर सहमति बनीं।   अक्षय तृतीय पर पूरे मार्ग पर मिलेगा पेयजल अध्यक्ष ने कहा कि अक्षय तृतीय पर बांकेबिहारी पर बहुत भीड़ होती है। ऐसे में किसी श्रद्धालु को परेशानी न हो इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही श्रद्धालुओं को मंदिर से लेकर गलियों तक में पेयजल की जगह-जगह व्यवस्था होगी। मंदिर की ओर से पानी की बोतलें बांटी जाएंगी। फूल बंगले पर सेवायत एकमत नहीं फूल बंगले की धनराशि को लेकर एक बार फिर दोनों भोगों के सेवायतों में स्वर नहीं मिले। जहां शयनभाेग के सेवायतों ने कहा कि धनराशि को कम नहीं किया जाए। वहीं राजभोग सेवायतों धनराशि कम करने के फैसले को सही बताया। कॉरिडोर के लिए रजिस्ट्री की संख्या बढ़ाने पर दिया जोर बांकेबिहारी कॉरिडोर को लेकर स्वेच्छा से रजिस्ट्री कर रहे लोगों की संख्या को बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। कमेटी अध्यक्ष ने कहा कि ठाकुरजी के लिए कई लोग आगे आए, उन्होंने अपने घरों की रजिस्ट्री की, यह उनके लिए गर्व की बात है। अन्य लोगों को भी खुद ही आगे आना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि ऐसे लोगों के लिए पहले आओ पहले पाओ स्कीम चलाई जा रही है। पहले आने वालों के सामने जगह से लेकर मल्टी स्टोरी में फ्लोर चुनने का भी विकल्प है। वह अपनी पसंद से जगह ले सकते हैं।  ये रहे मौजूद सदस्य बैठक में सेवानिवृत्त जिला जज मुकेश मिश्रा, जिला जज मथुरा विकास कुमार, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, मंदिर के मैनेजर मुनीश शर्मा आदि मौजूद रहे।  

गर्मी में नींबू पानी से ज्यादा हाइड्रेटिंग है तरबूज का शरबत, विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर यह ड्रिंक तुरंत देगा एनर्जी

भीषण गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और शरीर के तापमान को कम करने के लिए कुछ ना कुछ ठंडी हेल्दी ड्रिंक्स पीते रहना चाहिए लेकिन शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादातर लोग नींबू के शरबत पर ही निर्भर रहते हैं. लेकिन आपको बता दें कि हाइड्रेशन के मामले में तरबूज बहुत ही अच्छा माना जाता है.   तरबूज का शरबत के फायदे विटामिन A, C और पोटेशियम से भरपूर तरबूज का शरबत न केवल प्यास बुझाता है बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा कर तुरंत ताकत से भर देता है. बाजार के मिलावटी जूस के बजाय घर पर बना यह शुद्ध और ठंडा शरबत आपको दिन भर की थकान से राहत देगा. साथ ही इसे घर पर बनाना भी बेहद आसान है. यहां हम आपको इसकी रेसिपी शेयर कर रहे हैं. शरबत बनाने के लिए तैयार कर लें ये चीजें तरबूज: 3-4 कप (कटा हुआ और बीज निकले हुए) नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच पुदीना के पत्ते: 8-10 ताजी पत्तियां काला नमक: आधा छोटा चम्मच चीनी/शहद: 1 चम्मच (अगर तरबूज कम मीठा हो) चाट मसाला: एक चुटकी बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका तरबूज को छोटे टुकड़ों में काट लें और जितना संभव हो सके इसके बीज निकाल दें. कुछ छोटे क्यूब्स को सर्विंग के लिए अलग रख लें. एक मिक्सर जार में तरबूज के टुकड़े, ताजी पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस और काला नमक डालें. इसे अच्छी तरह ब्लेंड करके जूस तैयार कर लें. अगर आपको बिल्कुल साफ जूस पसंद है तो इसे छान लें. वरना इसके पल्प के साथ भी यह काफी टेस्टी लगता है. तैयार जूस में एक चुटकी चाट मसाला मिलाएं जो इसके स्वाद को दोगुना कर देगा. गिलास में बर्फ के टुकड़े और पहले से बचाकर रखे हुए तरबूज के छोटे क्यूब्स डालें. ऊपर से ठंडा-ठंडा जूस डालें और पुदीने की पत्ती से सजाकर तुरंत सर्व करें.

सफलता पाने के लिए बगुले से सीखें ये खास गुण, स्थान और अपनी शक्ति का सही अंदाजा लगाकर ही शुरू करें कोई भी नया कार्य

महान विद्वान चाणक्य ने अपनी किताब चाणक्य नीति में जीवन से जुड़ी कई अहम बातों का जिक्र किया है. उनकी नीतियों को आज भी लोग सफलता का रास्ता मानते हैं. कहा जाता है कि जो व्यक्ति उनकी बातों को अपनाता है, वह अपने जीवन में आगे बढ़ सकता है. चाणक्य ने सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों के गुणों के बारे में भी विस्तार से बताया है. उनका मानना था कि प्रकृति में मौजूद हर जीव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. उन्होंने बताया कि कुछ जानवरों के खास गुण ऐसे होते हैं, जिन्हें अगर इंसान अपनी जिंदगी में उतार ले, तो उसे सफलता हासिल करने में मदद मिल सकती है. उन्हीं में से एक बगुला. इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत्पण्डितो नरः । देशकाल बलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ।। आचार्य चाणक्य बगुले के जरिए एक बहुत जरूरी सीख दे रहे हैं. बगुला जब शिकार करता है, तो वह पूरी तरह शांत और एकाग्र होकर खड़ा रहता है. उसका ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य यानी मछली पर होता है. वह जल्दबाजी नहीं करता, बल्कि सही समय का इंतजार करता है. जैसे ही मौका मिलता है, तुरंत उसे पकड़ लेता है. इसी तरह इंसान को भी अपने काम में पूरा फोकस रखना चाहिए. कार्यों पर रखें फोकस आचार्य चाणक्य आगे कहते हैं कि इंसान को भी अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए. अगर हम बार-बार ध्यान भटकाते हैं या बिना सोचे-समझे जल्दबाजी करते हैं, तो सफलता मिलना मुश्किल हो जाता है. धैर्य के साथ सही समय का इंतजार करना और मौके को पहचानना बहुत जरूरी होता है. काम शुरू करने से पहले इन चीजों पर दें ध्यान देश (स्थान)- जहां आप काम कर रहे हैं, वहां उसका कितना फायदा होगा और उसकी जरूरत कितनी है, यह समझना जरूरी है. काल (समय)- कौन-सा समय उस काम के लिए सही है, यह जानना चाहिए. बल (शक्ति)- अपनी क्षमता, पैसे और संसाधनों का सही अंदाजा लगाना भी जरूरी है.

परशुराम जयंती की तारीख को लेकर उलझन हुई दूर, 19 अप्रैल को प्रदोष काल में मनेगा जन्मोत्सव और यह है पूजा का शुभ मुहूर्त

 हर साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की तारीख को लेकर लोगों में बना रहता है. इस बार कुछ लोग 19 अप्रैल को मनाने बात कर रहे हैं और कुछ लोग 20 अप्रैल को. क्योंकि उसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर परशुराम जयंती की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल यानी प्रदोष काल में हुआ था. द्रिक पंचांग के मुताबिक, तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, परशुराम जयंती पर पूजन का समय 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. कैसे मनाएं परशुराम जयंती? इस पावन अवसर पर आप घर पर ही सरल तरीके से पूजा कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान परशुराम की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगाजल या साफ जल से छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें. फिर भगवान को तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और फूल या माला चढ़ाएं. दीपक जलाकर आरती करें और फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. अंत में अपनी मनोकामनाओं के लिए भगवान से प्रार्थना करें. पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और आसपास के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है. परशुराम जयंती से मिलने वाले लाभ परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से उपासना करने पर व्यक्ति के जीवन में साहस और पराक्रम बढ़ता है. साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मन को शांति मिलती है. मान्यता है कि इस पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिन से कठिन कार्यों को पूरा करने की क्षमता भी मिलती है.

दूरी के हिसाब से तय होगा बसों का नया किराया, 5 साल बाद समीक्षा के आधार पर बिहार सरकार ने शुरू की बदलाव की तैयारी

 पटना   बिहार में बस यात्रा महंगी हो सकती है. लगभग 15 प्रतिशत तक किराया बढ़ सकता है. इससे कहीं ना कहीं लोगों की टेंशन बढ़ने वाली है. परिवहन विभाग की ओर से गुरुवार को ही प्रस्ताव की अधिसूचना जारी की गई है. इसे लेकर एक महीने के अंदर आपत्ति या फिर सुझाव मांगा गया है. कितने प्रतिशत तक बढ़ेगा किराया? जानकारी के मुताबिक, नॉर्मल बसों के किराए में 50 किलोमीटर तक के लिए 15 प्रतिशत, 100 किलोमीटर के लिए 14 प्रतिशत, 150 किलोमीटर तक के लिए 13 प्रतिशत, 200 किलोमीटर तक के लिए 12 प्रतिशत, 250 किलोमीटर तक के लिए 11 प्रतिशत और 300 किलोमीटर की अधिक दूरी तक के लिए 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा गया है. हर 5 साल पर बस किराए की होती है समीक्षा परिवहन विभाग की ओर से हर 5 साल पर बस के किराए की समीक्षा की जाती है. प्रस्ताव को लेकर बिहार राज्य मोटर फेडरेशन की बैठक में फैसला लिया जाएगा. आपत्ति या सुझाव आने के बाद उस बैठक में चर्चा की जाएगी. इस दौरान बस यात्रियों के साथ-साथ बस संचालकों के हित का भी ध्यान रखा जाएगा. जानकारी के मुताबिक, दूरी के हिसाब से बस का किराया तय किया जाएगा. चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसों की मिलेगी सुविधा जानकारी के मुताबिक, परिवहन विभाग ने मई महीने से गांधी मैदान से अटल पथ और जेपी सेतु होते हुए सोनपुर और हाजीपुर रेलवे स्टेशन तक चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसें चलाने का फैसला किया है. सबसे खास बात यह है कि इस सेवा के शुरू होने से अटल पथ के दोनों ओर रहने वाली करीब पांच लाख की आबादी को पहली बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सीधी सुविधा मिलेगी. यह पहल ‘पीएम ई-बस सेवा’ योजना के तहत की जा रही है, जिसका सर्वे इसी महीने पूरा कर लिया जाएगा.

सम्राट चौधरी बन सकते हैं बिहार के अगले मुख्यमंत्री, अमित शाह ने पीएम मोदी के साथ नाम पर लगाई अंतिम मुहर और 15 अप्रैल को शपथ संभव

 पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन होगा? यह सवाल सबसे ज्यादा पूछे जा रहे हैं। दिल्ली में नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन जारी है। भाजपा आलाकमान की ओर से हाईलेवल मीटिंग बुलाई गई है। बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री इसमें विचार विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले चुके हैं। अगले तीन से चार दिनों के अंदर वह अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगे। इधर, दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी बिहार के वरिष्ठ नेताओं का जुटान हो चुका है। शुक्रवार शाम छह बजे वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े के आवास पर बिहार भाजपा के नेताओं की बैठक करेंगे। इसमें मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन होगा। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे। बैठक में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, विधान सभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, मंत्री मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, बिहार प्रभारी विनोद तावड़े समेत कई वरिष्ठ नेताओं इसमें शामिल होंगे। आज मंत्री श्रेयसी सिंह को भी दिल्ली बुलाया गया था। वह भी पहुंच चुकी हैं। खरमास बाद पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री सूत्र बता हैं कि खरमास के बाद बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है। यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। 12 अप्रैल को बिहार में एनडीए के विधायक दल की बैठक होने वाली है। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने इस्तीफे का प्रस्ताव रखेंगे। इसके बाद विधायक दल नेता नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाएंगे। खरमास के अगले दिन यानी 15 अप्रैल को या इसके बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा। भाजपा से मुख्यमंत्री पद के किस नाम की चर्चा सबसे अधिक सियासी गलियारे से लेकर गांव के मचान तक डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। कुछ जगह तो यह चर्चा हो रही है कि सम्राट चौधरी को गृह मंत्री अमित शाह खूब पसंद करते हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान मुंगेर की एक रैली में अमित शाह ने जनता से सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाने की बात कही थी। दूसरे दलों से होकर भाजपा में आए सम्राट चौधरी बिहार प्रदेश अध्यक्ष रहे तो सामने नीतीश कुमार तब महागठबंधन के मुख्यमंत्री थे। बाद में नीतीश वापस एनडीए में आए और सम्राट चौधरी उनके ही डिप्टी सीएम बन गए। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सम्राट चौधरी भाजपा की कमान संभाले दिखे। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, जो जदयू के सामने भाजपा को मजबूत करने में काम आएगा- यह कहा गया था। भाजपा ने चुनावों में उसका असर देखा है। 

करण पटेल और अंकिता भार्गव के तलाक की खबरें निकलीं महज अफवाह, पत्नी अंकिता ने चुप्पी तोड़ते हुए ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

 टीवी के मशहूर अभिनेता करण पटेल, जिन्हें उनके फैंस ‘टीवी का शाहरुख खान’ भी कहते हैं, इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं. सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि करण पटेल और उनकी पत्नी अंकिता भार्गव के रिश्ते में दरार आ गई है और उनकी 11 साल पुरानी शादी टूटने की कगार पर है. अब आखिरकार एक्ट्रेस की पत्नी ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है. अफवाहों पर अंकिता का खुलकर जवाब इन सभी खबरों पर अब करण पटेल की पत्नी और अभिनेत्री अंकिता भार्गव ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ किया है कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा कि वह और करण दोनों पूरी तरह खुश हैं और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं. टेली मसाला को दिए एक इंटरव्यू में अंकिता ने कहा, “मैंने यह सीख लिया है कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग और अफवाहों से खुद को कैसे दूर रखना है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके रिश्ते को लेकर जो भी खबरें फैल रही हैं, वे पूरी तरह झूठी और बेबुनियाद हैं. शल मीडिया से फैली थीं अफवाहें अंकिता ने बताया कि उनके और करण के बीच अनबन की खबरें सोशल मीडिया पर उनकी कम सार्वजनिक मौजूदगी के कारण फैलीं. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी एक दोस्त के जरिए यह पता चला कि उनके तलाक की अफवाहें चल रही हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा कर दिया था कि दोनों ने तलाक के लिए वकील तक हायर कर लिया है, जो पूरी तरह गलत जानकारी थी. करीबी रिश्तों और परिवार पर असर अंकिता के अनुसार, यह अफवाहें किसी करीबी द्वारा फैलाई गई थीं, जिससे परिवार और रिश्तों पर बेवजह दबाव बना. उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें मानसिक रूप से परेशान करने वाली होती हैं, लेकिन वह अब इन सब से ऊपर उठ चुकी हैं. शादी और परिवार करण पटेल और अंकिता भार्गव की शादी 3 मई 2015 को हुई थी, जो एक अरेंज मैरिज थी. दोनों की एक बेटी मेहर भी है और परिवार के साथ वे अपनी जिंदगी खुशहाल तरीके से बिता रहे हैं.

पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाएगा मोगरे का देसी इत्र, बिना किसी खर्च के घर पर इस जादुई तरीके से करें तैयार

गर्मियों के बढ़ते तापमान में लोगों को बहुत पसीना आता है. पसीने की चिपचिपाहट और उससे आने वाली बदबू से लोग बहुत परेशान रहते हैं. इस बदबू से बचने के लिए लोग महंगे से महंगे ब्रांडेड सेंट, परफ्यूम और डियो खरीदते हैं. यही चीजें खरीदने में कुछ लोग तो हजारों रुपए खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ये तेज खुशबू वाले डियो पसीने की बदबू को दबाने के बजाय कई बार और भी अजीब महक देने लगते हैं? ऊपर से इनमें मौजूद केमिकल्स स्किन को नुकसान भी पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं इनकी महक बहुत जल्दी उड़ भी जाती है. ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि इस चिलचिलाती गर्मी में आप 100% नेचुरल इत्र अपने घर पर बना सकते हैं, वो भी बिना किसी खर्च और केमिकल के. तो क्या आप यकीन करेंगे? आज हम आपको एक ऐसा जादुई तरीका बताने वाले हैं जिससे आप मोगरे के फूलों से देसी इत्र बना सकते हैं. ये न सिर्फ आपको दिनभर तरोताजा रखेगा, बल्कि पसीने की बदबू की छुट्टी भी कर देगा. इंग्रेडिएंट्स मोगरा का इत्र बनाने के लिए आपको       ताजे मोगरे (जैस्मिन) के फूल     सुई-धागा     कांच की ढक्कन वाली साफ और सूखी बोतल       थोड़ा सा सेलो टेप कैसे बनाएं मोगरे का इत्र? 1. मोगरे का इत्र बनाने के लिए सबसे पहले मोगरे के फूलों को सुई-धागे में पिरोकर एक लंबा गजरा बना लें. लेकिन आपको ध्यान देना रखना है कि फूल बिल्कुल ताजे हों, तभी खुशबू अच्छी आएगी. 2. अब एक कांच की बोतल लें और इस गजरे को उसके अंदर लटकाएं. गजरा इस तरह लटकाएं कि फूल बोतल की दीवार से न छुएं और नीचे भी न टिके. इसका मतलब साफ है कि गजरा बिल्कुल बीच में हवा में लटका होना चाहिए. 3. गजरे के धागे वाले हिस्से को बोतल के ढक्कन के बीच में सेलो टेप से चिपका दें. इससे फूल अपनी जगह पर टिके रहेंगे. 4. अब बोतल को अच्छी तरह बंद करके 2 दिन के लिए तेज धूप में रख दें. ये स्टेप बहुत जरूरी है क्योंकि धूप की गर्मी से फूलों की खुशबू बाहर निकलती है. 5. दो दिन बाद आप देखेंगे कि फूल सूखकर हल्के नारंगी हो गए हैं. बोतल के अंदर पानी जैसी बूंदें जमा हो गई हैं. यही बूंदें असली मोगरे का इत्र है. बस आपका इत्र तैयार है. कैसे करें स्टोर? इस इत्र को आप छोटी रोल-ऑन बोतल या स्प्रे वाली बोतल में भरकर रख सकते हैं. इस इत्र को थोड़ी सी मात्रा में लगाना भी काफी होता है, क्योंकि इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है.

जरूरतमंदों को तुरंत मिल रहा छोटा सिलिंडर, रामगढ़ की तीनों बड़ी एजेंसियों पर गैस का पर्याप्त स्टॉक और सप्लाई जारी

 रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले में एलपीजी गैस की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी के बाद भी स्थिति सामान्य है. शहर के तीन गैस एजेंसियों दूसरे शहरों की तरह उपभोक्ताओं की तरह लाइन नहीं लग रही है. गैस लेने को लेकर भागदौड़ और जद्दोजहद करते उपभोक्ता भी नहीं दिख रहे हैं. रामगढ़ शहर के गैस एजेंसी में मंगलवार के दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच स्थिति सामान्य दिखा. सभी गैस एजेंसी संचालक मौजूद उपभोक्ताओं को आपूर्ति देने के बाद आश्वस्त भी करते दिख रहे थे. शहर के तीन गैस एजेंसियों का हाल     माता रानी इंडेन गैस एजेंसी कैथा के कर्मी ने बताया कि दो दिनों में 342 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर दिया गया. अमेरिका ईरान के युद्ध से पहले एक सप्ताह में 342 गैस सिलिंडर उपभोक्ता ले जाते थे. अभी के आंकड़ो के अनुसार 4500 उपभोक्ताओं में 3800 उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर दिया गया है. 800 उपभोक्ताओं का गैस डिलीवरी बाकी है.      पद्मावती गैस एजेंसी शनिचरा बाजार में भी मंगलवार को स्थिति सामान्य दिखा. कई उपभोक्ता गैस सिलिंडर लेने आए थे. वहीं कई उपभोक्ता ओटीपी संबंधी समस्याओं के साथ केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करते हुए दिखाई दे रहे थे. मैनेजर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि इस गैस एजेंसी से 25 हजार गैस उपभोक्ता पंजीकृत हैं. एजेंसी द्वारा दो पिकअप और दस टेंपो के माध्यम से डोर-टू-डोर गैस आपूर्ति की जा रही है. शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों 45 दिन में गैस आपूर्ति कर रहे हैं. जिससे कोई परेशानी नहीं है.     रामगढ़ गैस एजेंसी थाना चौक में भी मंगलवार को स्थिति सामान्य दिखा. एजेंसी के संचालक उज्जवल महतो ने बताया कि 29 हजार उपभोक्ता एजेंसी से जुड़े हुए हैं. 1700 उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराया गया है. 1200 उपभोक्ता बाकी हैं. रविवार को गैस प्लांट बंद रहने के कारण सोमवार को वितरण में थोड़ा कठिनाई हो रही है. जरूरतमंद उपभोक्ताओं को पांच किलोग्राम का छोटा सिलिंडर भी उपलब्ध कराया जा रहा है. गैस उपभोक्ताओं ने क्या कहा रामगढ़ शहर के तीन गैस एजेंसी में मंगलवार को मौजूद उपभोक्ताओं ने बताया कि जितना अफवाह है, उतनी परेशानी का सामना अभी तक नहीं किए हैं. कोठार निवासी सुनील सिन्हा ने बताया कि ओटीपी और अन्य प्रक्रिया में कोई परेशानी नहीं हो रही है. छोटकी मुर्राम निवासी विकास कुमार महतो ने बताया कि प्रक्रिया के तहत निर्धारित समय में बुकिंग के बाद गैस मिल रहा है. गैस एजेंसी संचालकों ने बताया शहर के पद्मावती गैस मैनेजर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गैस की बढ़ती मांग से इंकार नहीं कर रहे हैं. हमलोगों पर दबाव बहुत अधिक है, लेकिन अभी स्थिति समान्य बनाए हुए हैं.

वास्तु के ये 5 नियम बदल देंगे आपकी किस्मत, सुबह और शाम की इन गलतियों को सुधारने से घर में आएगी सुख और समृद्धि

  वास्तु शास्त्र में सुबह और शाम के समय को घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे खास वक्त माना गया है. हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि घर की बरकत केवल अच्छी कमाई से नहीं, बल्कि सही आदतों से आती है. अक्सर हम अनजाने में सुबह उठने या शाम के वक्त कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे घर में दरिद्रता आने लगती है. अगर आप भी महसूस करते हैं कि मेहनत के बाद भी पैसा नहीं टिक रहा या घर में तनाव रहता है, तो आपको अपनी दिनचर्या के इन 5 वास्तु नियमों पर ध्यान देने की जरूरत है. 1. सुबह देर तक सोना सूर्योदय के बाद भी देर तक सोते रहना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए बुरा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, जो लोग सुबह देर तक सोते हैं, उनके घर में नकारात्मकता बढ़ती है, ऐसे घरों में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता. कोशिश करें कि सूर्योदय से पहले या साथ उठें. 2. शाम को झाड़ू लगाना शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय यानी सूर्यास्त के वक्त घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए. माना जाता है कि शाम को झाड़ू लगाने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है. अगर झाड़ू लगाना बहुत जरूरी हो, तो कूड़ा घर के बाहर न फेंकें, उसे एक कोने में इकट्ठा कर दें. 3. सूर्यास्त के समय सोना शाम के समय सोना वर्जित माना गया है. जो लोग गोधूलि वेला (शाम के वक्त) में सोते हैं, उन्हें शारीरिक बीमारियां घेर सकती हैं . घर में दरिद्रता आती है. यह समय पूजा-पाठ और ध्यान का होता है, न कि सोने का. 4. मुख्य द्वार पर अंधेरा रखना शाम होते ही घर के मुख्य द्वार पर रोशनी जरूर करनी चाहिए. अंधेरा दरवाजा नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करता है. प्रवेश द्वार पर दीपक या बल्ब जलाकर रखने से मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं, जिससे व्यापार व करियर में तरक्की होती है. 5. तुलसी के पास गंदगी या अंधेरा सुबह-शाम तुलसी की देखभाल बहुत जरूरी है. शाम को तुलसी के पास दीपक जरूर जलाएं, लेकिन याद रखें कि सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्तों को कभी न छुएं और न ही जल चढ़ाएं. तुलसी के आसपास गंदगी रखना भी धन हानि का बड़ा कारण बनता है.