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दूरी के हिसाब से तय होगा बसों का नया किराया, 5 साल बाद समीक्षा के आधार पर बिहार सरकार ने शुरू की बदलाव की तैयारी

 पटना   बिहार में बस यात्रा महंगी हो सकती है. लगभग 15 प्रतिशत तक किराया बढ़ सकता है. इससे कहीं ना कहीं लोगों की टेंशन बढ़ने वाली है. परिवहन विभाग की ओर से गुरुवार को ही प्रस्ताव की अधिसूचना जारी की गई है. इसे लेकर एक महीने के अंदर आपत्ति या फिर सुझाव मांगा गया है. कितने प्रतिशत तक बढ़ेगा किराया? जानकारी के मुताबिक, नॉर्मल बसों के किराए में 50 किलोमीटर तक के लिए 15 प्रतिशत, 100 किलोमीटर के लिए 14 प्रतिशत, 150 किलोमीटर तक के लिए 13 प्रतिशत, 200 किलोमीटर तक के लिए 12 प्रतिशत, 250 किलोमीटर तक के लिए 11 प्रतिशत और 300 किलोमीटर की अधिक दूरी तक के लिए 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा गया है. हर 5 साल पर बस किराए की होती है समीक्षा परिवहन विभाग की ओर से हर 5 साल पर बस के किराए की समीक्षा की जाती है. प्रस्ताव को लेकर बिहार राज्य मोटर फेडरेशन की बैठक में फैसला लिया जाएगा. आपत्ति या सुझाव आने के बाद उस बैठक में चर्चा की जाएगी. इस दौरान बस यात्रियों के साथ-साथ बस संचालकों के हित का भी ध्यान रखा जाएगा. जानकारी के मुताबिक, दूरी के हिसाब से बस का किराया तय किया जाएगा. चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसों की मिलेगी सुविधा जानकारी के मुताबिक, परिवहन विभाग ने मई महीने से गांधी मैदान से अटल पथ और जेपी सेतु होते हुए सोनपुर और हाजीपुर रेलवे स्टेशन तक चार नई इलेक्ट्रिक लग्जरी बसें चलाने का फैसला किया है. सबसे खास बात यह है कि इस सेवा के शुरू होने से अटल पथ के दोनों ओर रहने वाली करीब पांच लाख की आबादी को पहली बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सीधी सुविधा मिलेगी. यह पहल ‘पीएम ई-बस सेवा’ योजना के तहत की जा रही है, जिसका सर्वे इसी महीने पूरा कर लिया जाएगा.

सम्राट चौधरी बन सकते हैं बिहार के अगले मुख्यमंत्री, अमित शाह ने पीएम मोदी के साथ नाम पर लगाई अंतिम मुहर और 15 अप्रैल को शपथ संभव

 पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन होगा? यह सवाल सबसे ज्यादा पूछे जा रहे हैं। दिल्ली में नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन जारी है। भाजपा आलाकमान की ओर से हाईलेवल मीटिंग बुलाई गई है। बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री इसमें विचार विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले चुके हैं। अगले तीन से चार दिनों के अंदर वह अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगे। इधर, दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी बिहार के वरिष्ठ नेताओं का जुटान हो चुका है। शुक्रवार शाम छह बजे वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े के आवास पर बिहार भाजपा के नेताओं की बैठक करेंगे। इसमें मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन होगा। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे। बैठक में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, विधान सभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, मंत्री मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, बिहार प्रभारी विनोद तावड़े समेत कई वरिष्ठ नेताओं इसमें शामिल होंगे। आज मंत्री श्रेयसी सिंह को भी दिल्ली बुलाया गया था। वह भी पहुंच चुकी हैं। खरमास बाद पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री सूत्र बता हैं कि खरमास के बाद बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है। यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। 12 अप्रैल को बिहार में एनडीए के विधायक दल की बैठक होने वाली है। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने इस्तीफे का प्रस्ताव रखेंगे। इसके बाद विधायक दल नेता नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाएंगे। खरमास के अगले दिन यानी 15 अप्रैल को या इसके बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा। भाजपा से मुख्यमंत्री पद के किस नाम की चर्चा सबसे अधिक सियासी गलियारे से लेकर गांव के मचान तक डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। कुछ जगह तो यह चर्चा हो रही है कि सम्राट चौधरी को गृह मंत्री अमित शाह खूब पसंद करते हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान मुंगेर की एक रैली में अमित शाह ने जनता से सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाने की बात कही थी। दूसरे दलों से होकर भाजपा में आए सम्राट चौधरी बिहार प्रदेश अध्यक्ष रहे तो सामने नीतीश कुमार तब महागठबंधन के मुख्यमंत्री थे। बाद में नीतीश वापस एनडीए में आए और सम्राट चौधरी उनके ही डिप्टी सीएम बन गए। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सम्राट चौधरी भाजपा की कमान संभाले दिखे। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, जो जदयू के सामने भाजपा को मजबूत करने में काम आएगा- यह कहा गया था। भाजपा ने चुनावों में उसका असर देखा है। 

करण पटेल और अंकिता भार्गव के तलाक की खबरें निकलीं महज अफवाह, पत्नी अंकिता ने चुप्पी तोड़ते हुए ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

 टीवी के मशहूर अभिनेता करण पटेल, जिन्हें उनके फैंस ‘टीवी का शाहरुख खान’ भी कहते हैं, इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं. सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि करण पटेल और उनकी पत्नी अंकिता भार्गव के रिश्ते में दरार आ गई है और उनकी 11 साल पुरानी शादी टूटने की कगार पर है. अब आखिरकार एक्ट्रेस की पत्नी ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है. अफवाहों पर अंकिता का खुलकर जवाब इन सभी खबरों पर अब करण पटेल की पत्नी और अभिनेत्री अंकिता भार्गव ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ किया है कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा कि वह और करण दोनों पूरी तरह खुश हैं और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं. टेली मसाला को दिए एक इंटरव्यू में अंकिता ने कहा, “मैंने यह सीख लिया है कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग और अफवाहों से खुद को कैसे दूर रखना है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके रिश्ते को लेकर जो भी खबरें फैल रही हैं, वे पूरी तरह झूठी और बेबुनियाद हैं. शल मीडिया से फैली थीं अफवाहें अंकिता ने बताया कि उनके और करण के बीच अनबन की खबरें सोशल मीडिया पर उनकी कम सार्वजनिक मौजूदगी के कारण फैलीं. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी एक दोस्त के जरिए यह पता चला कि उनके तलाक की अफवाहें चल रही हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा कर दिया था कि दोनों ने तलाक के लिए वकील तक हायर कर लिया है, जो पूरी तरह गलत जानकारी थी. करीबी रिश्तों और परिवार पर असर अंकिता के अनुसार, यह अफवाहें किसी करीबी द्वारा फैलाई गई थीं, जिससे परिवार और रिश्तों पर बेवजह दबाव बना. उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें मानसिक रूप से परेशान करने वाली होती हैं, लेकिन वह अब इन सब से ऊपर उठ चुकी हैं. शादी और परिवार करण पटेल और अंकिता भार्गव की शादी 3 मई 2015 को हुई थी, जो एक अरेंज मैरिज थी. दोनों की एक बेटी मेहर भी है और परिवार के साथ वे अपनी जिंदगी खुशहाल तरीके से बिता रहे हैं.

पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाएगा मोगरे का देसी इत्र, बिना किसी खर्च के घर पर इस जादुई तरीके से करें तैयार

गर्मियों के बढ़ते तापमान में लोगों को बहुत पसीना आता है. पसीने की चिपचिपाहट और उससे आने वाली बदबू से लोग बहुत परेशान रहते हैं. इस बदबू से बचने के लिए लोग महंगे से महंगे ब्रांडेड सेंट, परफ्यूम और डियो खरीदते हैं. यही चीजें खरीदने में कुछ लोग तो हजारों रुपए खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ये तेज खुशबू वाले डियो पसीने की बदबू को दबाने के बजाय कई बार और भी अजीब महक देने लगते हैं? ऊपर से इनमें मौजूद केमिकल्स स्किन को नुकसान भी पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं इनकी महक बहुत जल्दी उड़ भी जाती है. ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि इस चिलचिलाती गर्मी में आप 100% नेचुरल इत्र अपने घर पर बना सकते हैं, वो भी बिना किसी खर्च और केमिकल के. तो क्या आप यकीन करेंगे? आज हम आपको एक ऐसा जादुई तरीका बताने वाले हैं जिससे आप मोगरे के फूलों से देसी इत्र बना सकते हैं. ये न सिर्फ आपको दिनभर तरोताजा रखेगा, बल्कि पसीने की बदबू की छुट्टी भी कर देगा. इंग्रेडिएंट्स मोगरा का इत्र बनाने के लिए आपको       ताजे मोगरे (जैस्मिन) के फूल     सुई-धागा     कांच की ढक्कन वाली साफ और सूखी बोतल       थोड़ा सा सेलो टेप कैसे बनाएं मोगरे का इत्र? 1. मोगरे का इत्र बनाने के लिए सबसे पहले मोगरे के फूलों को सुई-धागे में पिरोकर एक लंबा गजरा बना लें. लेकिन आपको ध्यान देना रखना है कि फूल बिल्कुल ताजे हों, तभी खुशबू अच्छी आएगी. 2. अब एक कांच की बोतल लें और इस गजरे को उसके अंदर लटकाएं. गजरा इस तरह लटकाएं कि फूल बोतल की दीवार से न छुएं और नीचे भी न टिके. इसका मतलब साफ है कि गजरा बिल्कुल बीच में हवा में लटका होना चाहिए. 3. गजरे के धागे वाले हिस्से को बोतल के ढक्कन के बीच में सेलो टेप से चिपका दें. इससे फूल अपनी जगह पर टिके रहेंगे. 4. अब बोतल को अच्छी तरह बंद करके 2 दिन के लिए तेज धूप में रख दें. ये स्टेप बहुत जरूरी है क्योंकि धूप की गर्मी से फूलों की खुशबू बाहर निकलती है. 5. दो दिन बाद आप देखेंगे कि फूल सूखकर हल्के नारंगी हो गए हैं. बोतल के अंदर पानी जैसी बूंदें जमा हो गई हैं. यही बूंदें असली मोगरे का इत्र है. बस आपका इत्र तैयार है. कैसे करें स्टोर? इस इत्र को आप छोटी रोल-ऑन बोतल या स्प्रे वाली बोतल में भरकर रख सकते हैं. इस इत्र को थोड़ी सी मात्रा में लगाना भी काफी होता है, क्योंकि इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है.

जरूरतमंदों को तुरंत मिल रहा छोटा सिलिंडर, रामगढ़ की तीनों बड़ी एजेंसियों पर गैस का पर्याप्त स्टॉक और सप्लाई जारी

 रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले में एलपीजी गैस की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी के बाद भी स्थिति सामान्य है. शहर के तीन गैस एजेंसियों दूसरे शहरों की तरह उपभोक्ताओं की तरह लाइन नहीं लग रही है. गैस लेने को लेकर भागदौड़ और जद्दोजहद करते उपभोक्ता भी नहीं दिख रहे हैं. रामगढ़ शहर के गैस एजेंसी में मंगलवार के दोपहर 12 बजे से चार बजे के बीच स्थिति सामान्य दिखा. सभी गैस एजेंसी संचालक मौजूद उपभोक्ताओं को आपूर्ति देने के बाद आश्वस्त भी करते दिख रहे थे. शहर के तीन गैस एजेंसियों का हाल     माता रानी इंडेन गैस एजेंसी कैथा के कर्मी ने बताया कि दो दिनों में 342 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर दिया गया. अमेरिका ईरान के युद्ध से पहले एक सप्ताह में 342 गैस सिलिंडर उपभोक्ता ले जाते थे. अभी के आंकड़ो के अनुसार 4500 उपभोक्ताओं में 3800 उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर दिया गया है. 800 उपभोक्ताओं का गैस डिलीवरी बाकी है.      पद्मावती गैस एजेंसी शनिचरा बाजार में भी मंगलवार को स्थिति सामान्य दिखा. कई उपभोक्ता गैस सिलिंडर लेने आए थे. वहीं कई उपभोक्ता ओटीपी संबंधी समस्याओं के साथ केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करते हुए दिखाई दे रहे थे. मैनेजर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि इस गैस एजेंसी से 25 हजार गैस उपभोक्ता पंजीकृत हैं. एजेंसी द्वारा दो पिकअप और दस टेंपो के माध्यम से डोर-टू-डोर गैस आपूर्ति की जा रही है. शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों 45 दिन में गैस आपूर्ति कर रहे हैं. जिससे कोई परेशानी नहीं है.     रामगढ़ गैस एजेंसी थाना चौक में भी मंगलवार को स्थिति सामान्य दिखा. एजेंसी के संचालक उज्जवल महतो ने बताया कि 29 हजार उपभोक्ता एजेंसी से जुड़े हुए हैं. 1700 उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराया गया है. 1200 उपभोक्ता बाकी हैं. रविवार को गैस प्लांट बंद रहने के कारण सोमवार को वितरण में थोड़ा कठिनाई हो रही है. जरूरतमंद उपभोक्ताओं को पांच किलोग्राम का छोटा सिलिंडर भी उपलब्ध कराया जा रहा है. गैस उपभोक्ताओं ने क्या कहा रामगढ़ शहर के तीन गैस एजेंसी में मंगलवार को मौजूद उपभोक्ताओं ने बताया कि जितना अफवाह है, उतनी परेशानी का सामना अभी तक नहीं किए हैं. कोठार निवासी सुनील सिन्हा ने बताया कि ओटीपी और अन्य प्रक्रिया में कोई परेशानी नहीं हो रही है. छोटकी मुर्राम निवासी विकास कुमार महतो ने बताया कि प्रक्रिया के तहत निर्धारित समय में बुकिंग के बाद गैस मिल रहा है. गैस एजेंसी संचालकों ने बताया शहर के पद्मावती गैस मैनेजर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गैस की बढ़ती मांग से इंकार नहीं कर रहे हैं. हमलोगों पर दबाव बहुत अधिक है, लेकिन अभी स्थिति समान्य बनाए हुए हैं.

वास्तु के ये 5 नियम बदल देंगे आपकी किस्मत, सुबह और शाम की इन गलतियों को सुधारने से घर में आएगी सुख और समृद्धि

  वास्तु शास्त्र में सुबह और शाम के समय को घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे खास वक्त माना गया है. हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि घर की बरकत केवल अच्छी कमाई से नहीं, बल्कि सही आदतों से आती है. अक्सर हम अनजाने में सुबह उठने या शाम के वक्त कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे घर में दरिद्रता आने लगती है. अगर आप भी महसूस करते हैं कि मेहनत के बाद भी पैसा नहीं टिक रहा या घर में तनाव रहता है, तो आपको अपनी दिनचर्या के इन 5 वास्तु नियमों पर ध्यान देने की जरूरत है. 1. सुबह देर तक सोना सूर्योदय के बाद भी देर तक सोते रहना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए बुरा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, जो लोग सुबह देर तक सोते हैं, उनके घर में नकारात्मकता बढ़ती है, ऐसे घरों में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता. कोशिश करें कि सूर्योदय से पहले या साथ उठें. 2. शाम को झाड़ू लगाना शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय यानी सूर्यास्त के वक्त घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए. माना जाता है कि शाम को झाड़ू लगाने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है. अगर झाड़ू लगाना बहुत जरूरी हो, तो कूड़ा घर के बाहर न फेंकें, उसे एक कोने में इकट्ठा कर दें. 3. सूर्यास्त के समय सोना शाम के समय सोना वर्जित माना गया है. जो लोग गोधूलि वेला (शाम के वक्त) में सोते हैं, उन्हें शारीरिक बीमारियां घेर सकती हैं . घर में दरिद्रता आती है. यह समय पूजा-पाठ और ध्यान का होता है, न कि सोने का. 4. मुख्य द्वार पर अंधेरा रखना शाम होते ही घर के मुख्य द्वार पर रोशनी जरूर करनी चाहिए. अंधेरा दरवाजा नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करता है. प्रवेश द्वार पर दीपक या बल्ब जलाकर रखने से मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं, जिससे व्यापार व करियर में तरक्की होती है. 5. तुलसी के पास गंदगी या अंधेरा सुबह-शाम तुलसी की देखभाल बहुत जरूरी है. शाम को तुलसी के पास दीपक जरूर जलाएं, लेकिन याद रखें कि सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्तों को कभी न छुएं और न ही जल चढ़ाएं. तुलसी के आसपास गंदगी रखना भी धन हानि का बड़ा कारण बनता है.

कला और संस्कृति का महाजुटान होगा रांची का आड्रे हाउस, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगेंगे 100 से अधिक फ्री स्टॉल

रांची झारखंड के कलाकारों और स्वदेशी उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए राजधानी में एक से तीन मई तक सांसद सांस्कृतिक महोत्सव व स्वदेशी मेला आयोजित किया जाएगा. इसमें झारखंड सहित देश के लोक कलाकारों का महाजुटान होगा. रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. पत्रकारों से बात करते हुए संजय सेठ ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह महोत्सव कला, संस्कृति और स्वदेशी का अनूठा संगम होगा. इन वर्गों की होगी भागीदारी इस आयोजन में रांची लोकसभा क्षेत्र के बच्चे, युवा, महिला और बुजुर्ग शामिल होंगे. राजधानी के आड्रे हाउस में होने वाले इस कार्यक्रम में लोकसभा क्षेत्र के 50 से अधिक स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र अपनी सहभागिता निभाएंगे. संवाददाता सम्मेलन में पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री मधु मंसूरी, नाट्य कलाकार अजय  मलकानी, पूनम आनंद, मुकेश काबरा, एसडी सिंह, पवन बजाज, ऐश्वर सेठ, रमेंद्र कुमार, नीरज चौधरी मौजूद थे. इन प्रतियोगिताओं का किया जाएगा आयोजन महोत्सव में अलग-अलग आयु वर्ग के लिए नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी. महोत्सव में अर्धशास्त्रीय, लोकगीत, देशभक्ति गीत, वेस्टर्न, फ्यूजन म्यूजिक श्रेणी में गायन प्रतियोगिता होगी. महोत्सव में रंगारंग बैंड प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी. झारखंडी उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा कि इस महोत्सव में रांची लोकसभा क्षेत्र के स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों को विशेष अवसर दिया जाएगा. मेले में 100 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे. इस स्वदेशी मेले में झारखंडी स्वदेशी उत्पाद, झारखंड की पारंपरिक वेशभूषा, झारखंडी खानपान और मिलेट यानी मोटा अनाज को विशेष रूप से प्रदर्शित और प्रोत्साहित किया जाएगा. स्वदेशी उत्पाद के लिए स्टॉल निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा.

शुक्र और शनि के मिलन से बना दुर्लभ दशांक योग, आज से अगले 48 घंटे इन 3 राशियों के लिए खुलेंगे बंद किस्मत के ताले

  ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और विलासिता का कारक माना जाता है, वहीं शनि देव कर्म, अनुशासन और न्याय के अधिपति हैं. जब इन दो महत्वपूर्ण ग्रहों के बीच विशेष दृष्टि संबंध बनता है, तो यह राजयोग के जैसा शक्तिशाली फल मिलने लगता है. ज्योतिष गणना के अनुसार, जब शुक्र और शनि एक-दूसरे से दशम भाव (10th House) में स्थित होते हैं या उनके बीच 36 डिग्री की विशेष दूरी होती है, तो इसे दशांक दृष्टि या दशांक योग कहा जाता है.   10 अप्रैल को बना महासंयोग: 48 घंटे रहेंगे बेहद खास आज 10 अप्रैल 2026 को यह दुर्लभ दशांक योग सुबह ही बन चुका है. आज सुबह 04:39 बजे शुक्र और शनि एक-दूसरे से ठीक 36 डिग्री के विशेष कोण पर आए, जिससे इस शुभ योग की शुरुआत हुई. इस खगोलीय घटना का सबसे तीव्र और सीधा असर अगले 48 घंटों तक बना रहेगा. यह समय आर्थिक निवेश, नए व्यावसायिक समझौतों और करियर से जुड़े बड़े फैसले लेने के लिए बेहद शुभ है. विशेष रूप से तीन भाग्यशाली राशियों के लिए यह योग दरिद्रता दूर करने वाला और बंद किस्मत के ताले खोलने वाला साबित होगा. इन 3 राशियों पर होगी धन की वर्षा वृषभ राशि (Taurus): आपकी राशि के स्वामी शुक्र हैं.  शनि आपके भाग्य भाव के स्वामी हैं. इस योग के कारण व्यापार में बड़ा मुनाफा होगा. अगर आप नया घर या गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय सबसे उत्तम है. तुला राशि (Libra): आपके लिए यह योग करियर में बड़ी छलांग लगाने वाला साबित होगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है.  आपकी लाइफस्टाइल में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा. कुंभ राशि (Aquarius): शनि आपकी ही राशि के स्वामी हैं. शुक्र की कृपा से आपको पैतृक संपत्ति से लाभ मिल सकता है. जो जातक कला, मीडिया या फैशन जगत से जुड़े हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है. सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय दशांक योग का पूर्ण लाभ लेने के लिए शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं. साथ ही, शनिवार को गरीबों को काले चने या वस्त्र दान करें.  इससे शनि और शुक्र दोनों ग्रह मजबूत होंगे. जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी.

टाटा मोटर्स यूनियन की तीन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार, 13 अप्रैल को मिलेंगे नामांकन फॉर्म और बढ़ी चुनावी सरगर्मी

  जमशेदपुर झारखंड के जमशेदपुर में टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के तीन रिक्त कमेटी मेंबर पदों पर उपचुनाव के लिए मतदान 17 अप्रैल को होगा. चुनाव पदाधिकारी चिदानंद खंडई ने गुरुवार को अधिसूचना जारी कर चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी. जिसके साथ ही कंपनी परिसर में चुनावी सरगर्मी तेज हो गयी है. 13 अप्रैल को मिलेगा नामांकन फॉर्म घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन पदों के लिए नामांकन पत्रों का वितरण 13 अप्रैल को होगा. इसके बाद 17 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा और इसी दिन शाम को मतगणना के बाद देर रात तक नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी. कमेटी मेंबरों का चुनाव पूरा होते ही यूनियन की कमेटी मीटिंग बुलाई जाएगी. इसके बाद ही खाली उपाध्यक्ष और सहायक सचिव के एक-एक पदों पर भरा जाएगा. त्रिकोणीय मुकाबले के आसार एक्सल डिवीजन की दो सीटों के लिए जहां विजय कुमार शर्मा, रवींद्र कुमार, अश्विनी तिवारी और विजय कुमार सिंह जैसे पुराने चेहरे आमने-सामने हैं. वहीं इआरसी की एक सीट पर दो से अधिक दावेदारों के कूदने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है. संभावित प्रत्याशी अपने-अपने विभागों में छोटी-छोटी बैठकें कर रहे हैं और मतदाताओं को रिझाने के लिए पार्टियों का दौर भी शुरू हो चुका है. रिटाइरमेंट के कारण खाली हुए पद एक्सल डिवीजन से कमेटी मेंबर सैयद मुनव्वर और उपाध्यक्ष शिव नारायण सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद दो सीटें खाली हुई थीं. वहीं, इआरसी विभाग से सहायक सचिव मनोज कुमार शर्मा के रिटायर होने से एक पद खाली हुआ था. इन तीनों सीटों पर कब्जा जमाने के लिए प्रत्याशियों ने अभी से फील्डिंग सजानी शुरू कर दी है.

झारखंड के सभी जिलों में खुलेंगे कैंसर डे-केयर यूनिट, इलाज के लिए अब दूसरे राज्यों में नहीं भटकेंगे मरीज

 रांची  राजधानी रांची के सदर अस्पताल में मरीजों को अब विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू हो गया है. स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने गुरुवार को मुख्यमंत्री अस्पताल कायाकल्प योजना की समीक्षा बैठक के दौरान बताया कि सदर अस्पताल में 200 बेड का नया सुपर स्पेशियलिटी विंग स्थापित किया जाएगा. इसके लिए जमीन का चयन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया जल्द आरंभ करने का निर्देश दिया गया है. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना और मरीजों को त्वरित इलाज उपलब्ध कराना रहा. कैंसर मरीजों के लिए विशेष सुविधाएं और रेडिएशन बंकर झारखंड में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश दिया कि राज्य के सभी जिलों के सदर अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए समर्पित ‘डे-केयर यूनिट’ बनाई जाए. इसके साथ ही, रेडिएशन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष बंकरों का निर्माण भी किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को राज्य से बाहर या महंगे निजी अस्पतालों में न जाना पड़े, बल्कि उन्हें अपने ही जिले में उचित चिकित्सा और देखभाल मिल सके. आईपीएचएस मानकों के आधार पर अस्पतालों का उन्नयन बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सभी सदर अस्पतालों का विकास इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के मानकों के अनुरूप किया जाएगा. इसके तहत अस्पतालों की बेड क्षमता बढ़ाई जाएगी और वहां अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. स्वास्थ्य सचिव ने बोकारो, धनबाद, सरायकेला, चाईबासा, गोड्डा और रामगढ़ के लिए पूर्व में तैयार डीपीआर में संशोधन कर उन्हें पुन: प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. वहीं, धनबाद, साहिबगंज, गिरिडीह, दुमका, पाकुड़ और गढ़वा के अस्पतालों के जीर्णोद्धार (Renovation) प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है. मानव संसाधन विकास और नामकुम में प्रशिक्षण केंद्र अस्पतालों के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ कुशल मानव संसाधन पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. रांची के नामकुम में 500 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला एक अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना पर चर्चा की गई है. स्वास्थ्य सचिव ने एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी और गहन चिकित्सा (ICU) सेवाओं में प्रशिक्षित कर्मियों की कमी पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने निर्देश दिया है कि इन सेवाओं के लिए विशेषज्ञ कर्मियों की नियुक्ति और प्रशिक्षण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि जीवन रक्षक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके.