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नागवंशी राजाओं की राजधानी था नवरत्नगढ़, आज भी मौजूद हैं पंचमहला महल और रहस्यमयी रानी लुकई

रांची अगर आप झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने के अलावा यहां के कुछ ऐतिहासिक किले के इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं, तो गुमला जिले के सिसई में स्थित 'नवरत्नगढ़' (डोइसागढ़) का किला सबसे बेस्ट है. रांची से गुमला जाने वाले मुख्य मार्ग पर सिसई प्रखंड है. सिसई के मुख्य रास्ते से मात्र 5 किलोमीटर दूर नगर गांव में स्थित यह ऐतिहासिक स्थल विश्व धरोहर (World Heritage) में शामिल है. सन्नाटे और वीरानी के बीच खड़े इसके ऐतिहासिक अवशेष आज भी छोटानागपुर के नागवंशी राजाओं की कहानी को बयां करता है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) विभाग अब इस प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखने के लिए इसका समय समय पर जीर्णोद्धार करता रहता है. सुरक्षा के लिए राजा दुर्जनशाल ने बनाया था अभेद्य किला ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, मुगल साम्राज्य के लगातार होते हमलों से सुरक्षा और रणनीतिक बचाव के उद्देश्य से नागवंशी राजा दुर्जनशाल ने नवरत्नगढ़ को अपनी राजधानी बनाया था. सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह किला पूरी तरह अभेद्य था, जिसके चारों तरफ गहरी खाइयां बनाई गई थीं और किले के भीतर जाने का केवल एक ही पहाड़ी मार्ग उपलब्ध था. हालांकि समय के चक्र के साथ खाइयां समतल जमीन में तब्दील हो गईं और कई इमारतें जमींदोज हो गईं, लेकिन इसकी 33 इंच मोटी सुदृढ़ दीवारें और पांच मंजिला पंचमहला महल आज भी पूरी भव्यता के साथ सीना ताने खड़े हैं. रानी लुकई की रहस्यमयी गुंबद आकर्षण का केंद्र नवरत्नगढ़ की वास्तुकला और स्थापत्य कला पर्यटकों को हैरान कर देती है. यहां की पांच मंजिला वर्गाकार इमारत (पंचमहला), रानियों के निवास हेतु बना रानी वासा, कचहरी घर, गुप्त कमरे और रानियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई प्रसिद्ध 'रानी लुकई' की भुलभुलैया आज भी कौतूहल का विषय हैं. इसके अलावा, इमारतों के शीर्ष गुंबदों पर उकेरी गई सिंह, घोड़े और कई पशुओं की नक्काशीदार आकृतियां तथा स्तंभों पर लिपटे विशाल नागों के शिल्प नागवंशी राजाओं की उत्कृष्ट कला समझ को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं. परिसर में कमल सरोवर का प्राकृतिक सौंदर्य सबको भाता इतिहास के पन्नों में समेटे इस परिसर का प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण पर्यटकों को शांति का अद्भुत अहसास कराता है. परिसर में स्थित कमल सरोवर, ऐतिहासिक धोबी मठ, जगन्नाथ मंदिर, भैरव मंदिर और कपिलनाथ मंदिर यहां के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं. कपिलनाथ मंदिर के गर्भगृह में स्थापित विशाल आकृतियां और दीवारों पर की गई मनोहारी चित्रकारी प्राचीन कारीगरी की श्रेष्ठता को उजागर करती हैं. नए साल के मौके पर यहां आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में लोग पिकनिक मनाने और इतिहास को समझने के लिए जुटते हैं. पुरातत्व विभाग सहेज रहा धरोहर हाईटेक दौर में हजारों वर्ष पुरानी यह ऐतिहासिक धरोहर लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रही, जिससे नागवंशी कालीन अमूल्य भवन खंडहरों में तब्दील हो गए. हालांकि, अब पुरातत्व विभाग (ASI) द्वारा इस स्थल के बचे हुए अवशेषों और भवनों की वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत कराई जा रही है, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल की रंगत लौटने लगी है. यदि आप झारखंड में भीड़भाड़ से दूर अपने परिवार के साथ प्रकृति और इतिहास के बीच समय बिताना चाहते हैं, तो नवरत्नगढ़ की यात्रा आपके लिए यादगार साबित हो सकती है.  

पंचायत चुनाव से पहले कोटा में विकास की रफ्तार तेज, सड़क-पुलिया समेत 150 कार्यों पर खर्च होंगे ₹158.90 करोड़

कोटा पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ऐनवक्त पहले मंत्री और विधायक सक्रिय हो गए है। कोटा जिले को एक ही दिन में 214 करोड़ रुपए की सौगात मिली। जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में 236 किलोमीटर से अधिक सड़क और आधारभूत ढांचा मजबूत होगा। भाजपा देहात जिलाध्यक्ष प्रेम गोचर ने बताया कि राज्य सरकार की वर्ष 2026-27 की बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कोटा जिले में तेजी से काम हो रहा है। कोटा जिले के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में सड़क, मिसिंग लिंक, नॉन-पैचेबल सड़क, पुलिया एवं अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े 150 विकास कार्यों पर करीब 158.90 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन कार्यों के माध्यम से करीब 236.32 किलोमीटर क्षेत्र में सड़क और कनेक्टिविटी से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इनकी स्वीकृतियां जारी कर दी गई है। जिले में 45 नॉन-पैचेबल सड़क कार्य और 10 मिसिंग लिंक सहित कुल 55 कार्यों पर 62.52 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा जिले में 49 क्षतिग्रस्त पुलियाओं के पुनर्निर्माण एवं सुधार के लिए करीब 11.59 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है। जिलाध्यक्ष ने विकास कार्यों की स्वीकृति पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक कल्पना देवी का आभार जताया। कोटा शहर में 15 करोड से अधिक के सड़क कार्य कोटा शहर में भी सड़क और कनेक्टिविटी सुधार पर विशेष फोकस किया गया है। कोटा उत्तर में चार नॉन-पैचेबल सड़क कार्यों पर 5.02 करोड़ रुपए तथा कोटा दक्षिण में छह नॉन-पैचेबल सड़क कार्यों पर 6.82 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त कोटा दक्षिण में दो मिसिंग लिंक कार्यों के लिए 3.15 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए है। कोटा उत्तर एवं दक्षिण में इन कार्यों पर कुल 14.99 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ऊर्जा मंत्री ने 56 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कोटड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति (लक्ष्मीपुरा) में आयोजित समारोह में 56 करोड़ 39 लाख रुपए से अधिक की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया। ऊर्जा मंत्री ने क्षेत्र में कृषि, बिजली और सड़क तंत्र को मजबूत करने वाले कई प्रमुख प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी। उन्होंने हरीश चन्द्र सागर परियोजना के तृतीय चरण के अंतर्गत मुख्य नहर और माइनरों में पक्की लाइनिंग के लिए 21.77 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी कर काम शुरू कराया।

DMI पटना के 45 विद्यार्थी जाएंगे पंजाब, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता के नवाचार को करीब से समझेंगे

पटना विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआइ) पटना के विद्यार्थी चार सप्ताह तक पंजाब के विभिन्न गांवों में रहकर विकास प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से अवगत होंगे। पंजाब के किसान और विभिन्न सहकारिता समितियों से जुड़कर बेहतर कार्य कर रहे विशेषज्ञ विद्यार्थियों को वहां के ग्रामीण और कस्बाई समाज अर्थव्यवस्था, सहकारिता व्यवस्था आदि क्षेत्रों में हो रहे नवाचार को समझाएंगे। पीजीडीएम बैच 13 ( सत्र 2026-28) के विद्यार्थियों की पांच टीमें पांच अक्टूबर को पंजाब के लिए रवाना होगी और चार सप्ताह बाद लौटेंगी। टीम में 8 से 9 विद्यार्थी शामिल होंगे। पंजाब के लोगों से सीखेंगे गुर डीएमआइ के निदेशक प्रो. देबीप्रसाद मिश्रा ने बताया कि पंजाब के लोगों की आय में कृषि व डेयरी उत्पाद के साथ को-ऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से एक-दूसरे को सहयोग करने की प्रवृति अहम है। बिहार के गांवों में जीविका तथा अन्य कई सरकारी योजनाओं के माध्यम से उन्नति हो रही है। टीम के सभी विद्यार्थी बिहार के गांवों का भ्रमण कर यहां की वस्तुस्थिति से अवगत हो चुके हैं। अब पंजाब में रहकर वहां की खूबियों और नवाचार को जाएंगे। पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट के दो वर्ष की पढ़ाई में एक-तिहाई समय फील्ड में सीखते हैं। बिहार के गांवों की खासियत से पंजाब के ग्रामीण और वहां की खूबियों से यहां के लोग भी अवगत होंगे। 4 हफ्ते तक गांव के आसपास रहेगी टीम डीएमआइ के सहायक प्राध्यापक सह समन्वयक डॉ. इलियास कंचन शेख ने बताया कि चार सप्ताह तक विद्यार्थी पंजाब के विभिन्न गांव में रहेंगे। टीम 24 घंटे गांव और उसके आसपास ही रहेंगे। ग्रामीणों की दिनचर्या ही विद्यार्थी की होगी। विद्यार्थी वहां के विकास प्रबंधन की खासियत और चुनौती को समझेंगे। खासियत को दूसरे स्थान पर कैसे पहुंचाया जा सकता और चुनौतियों का क्या निदान हो सकता है, इसपर भी काम करेंगे। विद्यार्थियों को वहां के सामाजिक कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, अधिकारी तथा विकास कार्य से जुड़े उद्यमी से भी मिलने का अवसर मिलेगा।

RPSC भर्ती परीक्षाओं का बड़ा शेड्यूल जारी, दिसंबर में RAS प्री समेत होंगी कई अहम परीक्षाएं

अजमेर  राजस्थान लोक सेवा आयोग के कलैंडर के अनुसार भर्ती परीक्षाएं जारी है। अक्टूबर में केवल एक भर्ती परीक्षा होगी। नवम्बर-दिसम्बर सबसे अहम रहेगा। इनमें करीब 6 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षाएं देंगे। आयोग ने जनवरी-2026 से नवम्बर तक 12 हजार 143 पदों की भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर पिछले साल दिसम्बर में जारी किया था इसके तहत बीते सितम्बर तक डिप्टी कमांडेंट और लेक्चरर आयुष, कनिष्ठ रसायनज्ञ, सहायक विद्युत निरीक्षक सहायक अभियंता संयुक्त भर्ती (मुख्य) परीक्षा, सब इंस्पेक्टर/प्लाटून कमांडर-2025, सब इंस्पेक्टर भर्ती पुनः परीक्षा-2021, सहायक अभियोजन अधिकारी (प्रा.) परीक्षा, कारखाना एवं बॉयलर और केमिकल निरीक्षक, पशु चिकित्सा अधिकारी, सहायक कृषि अभियंता और प्राध्यापक, प्राध्यापक कृषि एवं कोच (माध्यमिक शिक्षा विभाग) वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा (माध्यमिक शिक्षा), कनिष्ठ विधि अधिकारी परीक्षा का आयोजन हो चुका है। नई भर्तियों का इंतजार आरपीएससी को नई भर्तियों का भी इंतजार है। इस साल जनवरी से सितम्बर तक आयोग को मात्र 1102 पदों की भर्ती मिली है। बड़ी भर्तियों में आरएएस-अधीनस्थ सेवा भर्ती शामिल है। स्कूल-कॉलेज शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि सहित अन्य विभागों की भर्ती नहीं मिली है। इन संसाधनों की होगी दरकार     500 से ज्यादा: केंद्र परीक्षा     1000: वीडियोग्राफर, सीसीटीवी कैमरे     2000 से ज्यादा: शिक्षक-कर्मचारी     1000 से ज्यादा: पुलिसकर्मी     500 से ज्यादा: वाहन और अन्य साधन अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर में होगी ये परीक्षाएं     सहायक निदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी प्रतियोगी परीक्षा, एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी (विधि विज्ञान) 28 पद: 13 से 16 अक्टूबर     संरक्षण अधिकारी (महिला-बाल विकास) 12 पद: 15 नवम्बर     आरएएस-प्रारंभिक परीक्षा 607 पद : 6 दिसम्बर     प्राध्यापक विशेष शिक्षा (मा. शिक्षा) 121 पद : 8 दिसम्बर     सहायक अभियोजन अधिकारी (मुख्य परीक्षा) 371 पद : 27 दिसम्बर 2027 में फिलहाल आरएएस मुख्य परीक्षा आयोग के कैलेंडर में वर्ष 2027 के लिए फिलहाल आरएएस मुख्य परीक्षा-2026 निर्धारित है। यह परीक्षा 1 और 2 मई 2027 को आयोजित की जाएगी। ऐसे में आरएएस प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए दिसंबर की परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी का अगला चरण महत्वपूर्ण रहेगा।

रामायण वाटिका का लोकार्पण नवरात्र में संभव, मुख्यमंत्री योगी से मांगा गया समय; दिखेगी ‘हरित रामायण’

बरेली भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास काल की स्मृतियों को संजोए रामायण वाटिका के शुभारंभ की तैयारी फिर से आरंभ कर दी गई है। बीडीए की ओर से नवरात्र में वाटिका आमजन के लिए खोलने की योजना बनाई गई है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी समय मांगा गया है। शहर को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन की नई पहचान देने वाली रामायण वाटिका के शुभारंभ के लिए लंबे समय से कवायद चल रही है। अब इसे नवरात्र में जनता को समर्पित करने की तैयारी चल रही है। नवरात्र के दौरान रामायण वाटिका के एम्फीथिएटर (खुला रंगमंच) में प्रतिदिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला सुंदरकांड, सत्संग, संकीर्तन, रामायण आधारित प्रस्तुतियां व अन्य विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने बताया कि, शहर को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन की नई पहचान देने वाली रामायण वाटिका अब पूर्ण हो चुकी है। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ रामायण वाटिका का लोकार्पण कराया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा जा रहा है। वाटिका में स्थापित की गई 51 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा रामायण वाटिका की पहचान ‘हरित रामायण’ की संकल्पना है। भगवान श्रीराम के वनगमन के दौरान जिन वन क्षेत्रों से होकर उनके जाने का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है, वहां की वनस्पतियों एवं वृक्षों से संबंधित विवरण को आधार बनाकर वाटिका काे हरित स्वरूप में विकसित किया गया है। वाटिका में स्थापित 51 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की भव्य-दिव्य प्रतिमा पर्यटकाें का प्रमुख आकर्षण है। साथ ही लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए जाने की व्यवस्था की जा रही है। मानसून के बाद वाटिका में विकसित पुष्प-पौधों, वनस्पतियों और लैंडस्केप के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि नवरात्र के अवसर पर इसे अपने पूर्ण प्राकृतिक एवं आकर्षक स्वरूप में जनता के सामने प्रस्तुत किया जा सके। वाटिका में आमजन के लिए खानपान की सुविधा को कैंटीन, सार्वजनिक शौचालय समेत अन्य सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

नारी शक्ति सम्मेलन में CM भजनलाल का बड़ा ऐलान, महिलाओं को मिली करोड़ों की सौगात और योजनाओं का लाभ

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि महिलाएं समाज का अभिन्न हिस्सा ही नहीं बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार हैं। महिलाओं का सम्मान और सशक्तीकरण किसी भी सभ्य समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में हमेशा से नारी शक्ति का सम्मान रहा है और यहां तो कहा भी गया है कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।   मुख्यमंत्री शनिवार को यूनिवर्सिटी कॉमर्स कॉलेज में आयोजित नारी शक्ति सम्मेलन एवं संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां शक्ति, ज्ञान और समृद्धि की प्रतीक मां दुर्गा, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी के रूप में नारी शक्ति की पूजा की जाती है। भारत का इतिहास महिलाओं के साहस, वीरता, त्याग और बलिदान की अनगिनत गाथाओं से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति की सफलता की कहानियों में संघर्ष, साहस, आत्मविश्वास और संकल्प की वह शक्ति दिखाई देती है, जो किसी भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के कुशल प्रशासन, न्याय-परायणता एवं कल्याणकारी कार्यों का आज भी गुणगान किया जाता है। रानी लक्ष्मीबाई का साहस, मातृभूमि के लिए उनका बलिदान, आज भी हम सभी देशवासियों के हृदय में प्रेरणा का दीप जलाता है। वहीं, सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा की ज्योति जलाई, उसका प्रकाश आज देश के कोने-कोने को आलोकित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की अनेक नारियों ने त्याग, समर्पण, भक्ति और बलिदान की मिसाल कायम की हैं। भक्त शिरोमणि मीराबाई ने कृष्ण-भक्ति और आध्यात्मिक साधना से राजस्थान की धरती को गौरवान्वित किया और पन्नाधाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर स्वामीभक्ति एवं कर्तव्यनिष्ठा का दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत किया। वहीं, हाड़ी रानी ने मातृभूमि की रक्षा और अपने कर्तव्य के लिए अद्वितीय साहस और बलिदान का परिचय दिया तथा वीर बाला कालीबाई ने अपने गुरु की रक्षा के लिए सर्वाेच्च बलिदान देकर गुरु भक्ति की अमर गाथा लिखी। उन्होंने कहा कि अमृता देवी ने प्रकृति और वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि माताएं, बहनें और बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी अद्भुत प्रतिभा और कौशल से मां भारती का गौरव बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में महिला सशक्तीकरण की दिशा में नई सोच और संकल्प के साथ अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन को आसान बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा मिल रही है तथा लखपति दीदी योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। वहीं, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महिलाओं के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं को नेतृत्व का अवसर प्रदान करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी महत्वपूर्ण पहल की गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले पौने तीन साल में महिलाओं के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार 500 रुपये की गई है। मा वाउचर योजना के तहत सोनोग्राफी के लिए 5 लाख 74 हजार कूपन जारी किए जा चुके हैं तथा पात्र परिवारों को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करवा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 13 लाख 85 हजार साइकिलों एवं कालीबाई उच्च शिक्षा स्कूटी योजना एवं देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत लगभग 46 हजार स्कूटियों का वितरण किया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना के तहत करीब 19 लाख पेंशनर्स को 8 हजार 866 करोड़ रुपए की पेंशन राशि दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत गरीब परिवारों को बालिकाओं के जन्म पर डेढ़ लाख रुपये का सेविंग बॉण्ड दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, शिशु पालना गृह कार्यकर्ताओं और साथिनों के मानदेय में पिछले तीन वर्षों में हर वर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। राज्य की 1 करोड़ 22 लाख महिलाओं एवं बालिकाओं को हर माह 12 सैनेटरी नैपकिन निशुल्क दिए जा रहे हैं। वहीं, लखपति दीदी योजना के तहत 26 लाख से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी का प्रशिक्षण प्रदान कर लगभग 20 लाख महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति की प्रतिबद्धता, परिश्रम और सामूहिक शक्ति राजस्थान को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध राज्य बनाएगी तथा उनकी सक्रिय भागीदारी ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत और विकसित राजस्थान का संकल्प साकार करने की शक्ति बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाएं प्रदेश की महिलाओं में नया आत्मविश्वास और जीवन में नई ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न लाभार्थी महिलाओं से संवाद किया और योजनाओं के लाभ से उनके जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन को जाना। इससे पहले मुख्यमंत्री ने राजीविका की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा विभिन्न उत्पादों की जानकारी ली। संवाद कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री लाभार्थी महिलाओं के बीच पहुंचे और आत्मीयतापूर्ण बातचीत की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद मंजू शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा, महेन्द्रपाल मीणा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही तथा वीसी के जरिए सभी जिलों से भी महिलाएं जुड़ीं। इस कार्यक्रम से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल भी वीसी के जरिए जुड़े। मुख्यमंत्री की लाभार्थियों को बड़ी सौगातें कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एनएचएम के तहत 60 एम्बुलेंस, 9 आर्टिकुलेटिंग वाटर टावर तथा 185 ऑटो टिपर को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा लखपति दीदियों को स्कूटी की चाबी वितरित की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों को मकानों की चाबी एवं 27 हजार से अधिक लाभार्थियों को 150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी की। वहीं, 29 हजार 222 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना … Read more

बिहार में बनेंगे 3 नए गंगा पथ, 219 किमी लंबी सड़कों से पटना से यूपी तक आसान होगा सफर

पटना बिहार के तीन नए गंगा पथों का निर्माण कार्य नये साल में शुरू होगा। इन तीनों परियोजनाओं के लिए चयन परामर्शी ने अपना काम शरू कर दिया है। इन्हें तीन महीने में (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) डीपीआर तैयार करने को कहा गया है। डीपीआर बनने के बाद निर्माण कार्य को लेकर निविदा जारी करने की कवायद शुरू की जाएगी। इन गंगा पथों के निर्माण में बिहार सरकार ने अगले 25 सालों के ट्राफिक दबाव की संभावनाओं का आकलन करते हुए उसके निराकरण के उपायों पर विचार किया है। इन तीनों पथों में गंगा के दक्षिणी छोर पर बिदुपुर से दिघवारा तक अंबिका पथ बनेगा। इसकी लंबाई 56 किलोमीटर होगी। वहीं, दूसरा गंगा पथ बक्सर-आरा-मनेर (कोइलवर) तक बनेगा, जो 90 किलोमीटर लंबा होगा। इसका नाम विश्वामित्र पथ रखा गया है। जेपी गंगा पथ को पहले ही मनेर तक विस्तार की स्वीकृति दी जा चुकी है। इस तरह गंगा किनारे सड़क के जरिए पटना की संपर्कता और बढ़ेगी। सारण जिला के दरिहारा (कोन्हुआ) से गोपालगंज जिला के डुमरिया घाट तक 73 किमी लंबा गंगा पथ का निर्माण किया जाएगा। इसका नाम नारायणी पथ रखा गया है। इससे बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश तक के आवागमन में सुविधा होगी। इन तीनों गंगा पथों के सारे कार्य बिहार राज्य पथ निर्माण विकास निगम की निगरानी में किये जा रहे हैं। निगम के द्वारा ही परामर्शी का चयन किया गया है। ये हैं योजनाएं बिदुपुर से दिघवारा तक : 56 किलोमीटर बक्सर से कोइलवर तक : 90 किलोमीटर कोन्हुआ से डुमरिया घाट : 73 किलोमीटर इन गंगा पथों का प्रारंभिक एलाइनमेंट तय कर लिया गया है। फाइनल एलाइनमेंट तय करने, इस पर होने वाले खर्च का आकलन, ट्रैफिक दबाव आदि का अध्ययन परामर्शी करेंगे। इसके बाद निगम डीपीआर सौपेंगे। इन तीनों गंगा पथों पर अगले 25 सालों तक कितना ट्रैफिक दबाव होने की संभावना है और इस पर टोल टैक्स के रूप में कितनी राशि प्राप्त होने का अनुमान है, इन सभी बातों की जानकारी डीपीआर में रहेगी। ● बिहार राज्य पथ निर्माण विकास निगम की निगरानी में हो रहा गंगा पथों का कार्य ● बिदुपुर-दिघवारा, बक्सर-कोईलवर तक बनेगा पथ व कोन्हुआ से डुमरिया घाट तक बनेगी सड़क

जम्मू-कश्मीर में बड़ा ऑपरेशन, बडगाम में लश्कर आतंकी मोहम्मद आसिम उर्फ मूसा मारा गया

नई दिल्ली बडगाम मुठभेड़ में बीते दिनों पाकिस्तान लश्कर कमांडर आतंकी मोहम्मद आसिम उर्फ हाशिम मूसा मारा गया था. जानकारी के मुताबिक, वह पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप(SSG) का रिटार्ड कमांडो था. अधिकारियों के मुताबिक, वह पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा टीम में भी तैनात रह चुका था. बता दें, बीते दिनों सुरक्षाबलों को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था. मुठभेड़ में लश्कर कमांडर आतंकी मोहम्मद आसिम उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया गया था. यह मुठभेड़ मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग इलाके में हुई थी. सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक, 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में विदेशी आतंकियों की संख्या में लगातार गिरावट आई है. उस समय घाटी में भाड़े के आतंकियों की संख्या 300 से 400 के बीच या उससे ज्यादा आंकी जाती थी. लंबे समय से चल रही थी मूसा की तलाश मूसा की तलाश लंबे समय से की जा रही थी. तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से जुड़ी एजेंसियों ने संयुक्त रणनीति बनाई. आखिरकार बडगाम के खानसाहिब इलाके के गुरवतकलान में ऑपरेशन के दौरान मूसा मारा गया. मूसा के मारे जाने के साथ ही 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर के चार बड़े कमांडरों का समूह खत्म हो गया. सुरक्षा बलों के मुताबिक, इस ग्रुप के जुनैद भट, सुलेमान और यासिर पहले ही अलग-अलग अभियानों में मारे जा चुके थे. जुनैद भट 3 दिसंबर 2024 को दाचीगाम में मारा गया था. सुलेमान को 28 जुलाई 2025 को ऑपरेशन महादेव में ढेर किया गया, जबकि यासिर 4 सितंबर 2026 को ऑपरेशन असधर में मारा गया. इसके बाद 30 सितंबर को मूसा का खात्मा हुआ. बड़े हमलों से जुड़े थे चारों कमांडर सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इन चारों कमांडरों का नाम जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ सालों के कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा गया था. इनमें अगस्त 2023 का हालन हमला, दिसंबर 2023 का DKG हमला, मई 2023 का कंडी हमला, मई 2024 का शाहसीतार हमला, जून 2024 का शिव खोरी हमला, अक्टूबर 2024 का गगनगीर हमला, अक्टूबर 2024 का बूटापथरी हमला और अप्रैल 2025 का बैसरण हमला शामिल हैं.

दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पर आसान होगा सफर, पटना-पूर्णिया स्पेशल ट्रेन की अवधि बढ़ी

पटना बिहार की राजधानी पटना से पूर्णिया के बीच चलाई जा रही स्पेशल ट्रेन की सुविधा अब दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ महापर्व पर भी मिलेगी। रेलवे ने इस स्पेशल ट्रेन की अवधि फिर से बढ़ा दी है। पटना के पाटलिपुत्र स्टेशन से पूर्णिया कोर्ट के बीच चलने वाली यह ट्रेन अब 16 नवंबर तक सप्ताह में 5 दिन चलाई जाएगी। इससे पहले 16 अक्टूबर तक इसकी अवधि बढ़ाई गई थी। इससे त्योहारों में आने-जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। इस ट्रेन की अवधि बढ़ने से पूर्णिया प्रमंडल और कोसी प्रमंडल के यात्रियों को पटना आने-जाने में काफी सहूलियत मिलेगी। त्योहारों और बढ़ती यात्री भीड़ के बीच रेलवे के इस निर्णय से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। इस स्पेशल ट्रेन के परिचालन से पूर्णिया, अररिया ,सहरसा, मधेपुरा और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को पटना की यात्रा के लिए अतिरिक्त रेल सुविधा उपलब्ध हो रही है। खासकर नौकरी, शिक्षा, इलाज, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी कार्यों के सिलसिले में पटना जाने वाले लोगों के लिए यह ट्रेन उपयोगी साबित हो रही है। कोसी-सीमांचल के लोगों को फायदा इस संबंध में केशव कुमार गिरि, शंकर झा,ब्रज किशोर भारती, राजेश कुमार अग्रवाल, आलोक लोहिया, अफरोज खान, केशव कुमार मंडल, सानु कुमार जायसवाल, अखिलेश कुमार शर्मा आदि का कहना है कि पूर्णिया और कोसी क्षेत्र से पटना के बीच सीधी और सुविधाजनक रेल सेवा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। ट्रेन को स्थायी करने की मांग स्पेशल ट्रेन को सीमित अवधि के बजाय नियमित या स्थायी रूप से चलाने की मांग भी लगातार उठ रही है। इस ट्रेन का स्थायी परिचालन किया जाता है तो सीमांचल और कोसी क्षेत्र के हजारों लोगों को प्रतिदिन लाभ मिल सकता है। साथ ही पटना से पूर्णिया और आसपास के जिलों के बीच आवागमन आसान होने से व्यापारिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। पटना से पूर्णिया रात्रिकालीन सुविधा ट्रेन नंबर 03216 पटना के पाटलिपुत्र स्टेशन से रात 11 बजे खुलती है। यह सोनपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, सहरसा आदि शहरों को जोड़ते हुए सुबह 8.30 बजे पूर्णिया पहुंचाती है। इस रूट पर रात्रिकालीन ट्रेन की मांग रहती है। पटना में पढ़ाई एवं रोजगार करने वाले कोसी और सीमांचल के लोग अक्सर इस ट्रेन से सफर करना पसंद करते हैं। पाटलिपुत्र से यह स्पेशल ट्रेन बुधवार और शनिवार को छोड़ सप्ताह के 5 दिन चलती है। पूर्णिया से ट्रेन का टाइमटेबल पूर्णिया कोर्ट रेलवे स्टेशन से ट्रेन नंबर 03215 सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर खुलती है और उसी रूट से होते हुए शाम 5 बजकर 45 मिनट पर पाटलिपुत्र (पटना) पहुंचती है। पूर्णिया से यह ट्रेन गुरुवार और रविवार को छोड़कर सप्ताह के पांच दिन संचालित की जाती है।  

छत्तीसगढ़ के 6 जिलों में 312 वैद्यों का हुआ प्रमाणीकरण, अब 1,000 का टारगेट

छत्तीसगढ़ के 06 जिलों के 312 वैद्यों का किया गया प्रमाणीकरण; मार्च 2027 तक 1 हजार वैद्यों के प्रमाणीकरण का लक्ष्य  रायपुर, छत्तीसगढ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग) द्वारा  25 सितंबर से 30 सितंबर तक छत्तीसगढ़ के 06 जिलों कोण्डागांव, नारायणपुर कांकेर, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद के 312 वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया।  वन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत बोर्ड एवं काउन्सिल आफ इंडिया (QCI) से वैद्यों के प्रमाणीकरण करने के लिये अधिकृत संस्था सेंटर फॉर ट्रेड टेस्टिंग एंड सर्टिफिकेशन ऑफ स्किल्ड वर्कर्स (CTTC) द्वारा वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया । जिसमें 05 प्रकार की उपचार विधाओ सामान्य बीमारी, पीलिया, आर्थराइटिस, बोन सेटिंग एवं जहरीले बाइट का उपचार शामिल हैं।  वैद्यों का प्रमाणीकरण प्रकिया दो चरणों के परीक्षण उपरांत किया जाता हैं।  परीक्षण प्रक्रिया अंतर्गत प्रथम दिवस आवेदन फार्म की जांच, वैद्यों के उपचार विधाओ का मौखिक परीक्षण, ताजी औषधि पौधों तथा कच्चे औषधि पौध उत्पाद की पहचान, औषधि निर्माण की विधि तथा  मरीजों को दी जाने वाली औषधि की मात्रा का परीक्षण किया जाता है । प्रमाणीकरण प्रक्रिया के दूसरे दिवस में वैद्यों के घरों पर जाकर उनके उपचार करने की सजीव परीक्षण तथा मरीजों से फीडबैक लिया जाता है ।  छत्तीसगढ़ में 25 से 30 सितंबर तक विभिन्न जिलों में आयोजित परीक्षणों में 312 वैद्यों को प्रमाणीकृत किया गया। इनमें कोंडागांव के 60, नारायणपुर के 23, कांकेर के 60, धमतरी के 135 तथा गरियाबंद एवं महासमुंद के कुल 34 वैद्य शामिल हैं। छत्तीसगढ़ शासन एवं बोर्ड मार्च 2027 तक 1 हजार वैद्यों के प्रमाणीकरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए तेजी से कार्य कर रहे हैं।