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श्रीनगर में ट्रैफिक कैमरों का बढ़ा नेटवर्क, 66 जंक्शन पर 835 कैमरों से हो रही निगरानी

श्रीनगर यदि आप बिना लाइसेंस, बिना हेलमेट, तेज ड्राइविंग या गलत पार्किंग कर रहे हैं, तो सावधान रहें। आपकी इन हरकतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और आपके खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी। यातायात नियमों की अनदेखी करने के परिणामस्वरूप हजारों लोगों को दंडित किया गया है। इस वर्ष अप्रैल से जून 2026 के बीच श्रीनगर में 52,545 ट्रैफिक चालान काटे गए, जो पिछले 12 महीनों में काटे गए चालानों की संख्या से लगभग दोगुना है। यह वृद्धि शहर में ट्रैफिक कैमरों के बढ़ते नेटवर्क के कारण हुई है, जो आटोमेटेड एनफोर्समेंट (स्वचालित निगरानी और कार्रवाई) को बढ़ावा दे रहा है। 12 महीनों में कटे 27000 चालान यह जानकारी हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र में पेश किए गए 'श्रीनगर ट्रैफिक एंड अर्बन मोबिलिटी फ्रेमवर्क' में दी गई। फ्रेमवर्क के अनुसार, पिछले 12 महीनों में यातायात नियमों के उल्लंघन पर 26,331 चालान काटे गए थे, जबकि अप्रैल से जून 2026 में 52,545 चालान काटे गए। बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों की खैर नहीं आटोमेटेड एनफोर्समेंट डेटा में बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने के मामले सबसे अधिक हैं। इस प्रणाली में 66 जंक्शनों पर 835 कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 792 कैमरे (95 प्रतिशत) और 62 जंक्शन (94 प्रतिशत) पूरी तरह से कार्यरत हैं। यह सिस्टम आटोमेटेड चालान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसे आईटीएमएस – आईटीएलएस कंट्रोल रूम और ट्रैफिक पुलिस द्वारा संचालित किया जाता है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त हुई पुलिस सरकार ने ट्रैफिक-मैनेजमेंट उपायों को छह-स्तंभीय फ्रेमवर्क के तहत एकीकृत किया है, जिसमें स्मार्ट एनफोर्समेंट, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमन शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यातायात नियमों का उल्लंघन किसी को भी सहन नहीं किया जाएगा।  

साइबर, महिला और SC-ST थाना समेत चार यूनिट एक छत के नीचे, देवघर में बनेगा G+6 भवन

देवघर  आने वाले समय में देवघर की पुलिस व्यवस्था ना केवल व्यवस्थित होगी बल्कि आधुनिक व मजबूत बनाने के लिए वर्तमान साइबर थाना परिसर में करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से सात मंजिला जी-प्लस सिक्स भवन बनाया जाएगा। इसके बनने के बाद लोगों को अलग-अलग थानों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। दुर्गा पूजा के बाद संभवत: भवन निर्माण की प्रक्रिया बहुत शुरू होगी। शुक्रवार को एसपी प्रवीण पुष्कर ने एमकेएस कंस्ट्रक्शन के निदेशक मनोज सिंह, हाउसिंग कॉरपोरेशन के इंजीनियर, सार्जेंट मेजर के साथ स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने साइबर थाना सहित पुलिस क्वार्टर के पीछे साइट विजिट किया। निर्माण कार्य से जुड़ी तमाम प्रक्रिया से अवगत हुए। बताया गया कि गृह विभाग के निर्देश पर बनने वाले इस भवन में साइबर थाना, महिला थाना, एससी-एसटी थाना और मानव तस्करी से जुड़े मामलों के लिए विशेष थाना एक ही परिसर में संचालित होगा। भवन में ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग, आधुनिक लिफ्ट, थाना प्रभारी कक्ष, कार्यालय, रिकार्ड रूम, जांच कक्ष, बैठक कक्ष, हाजत और कर्मचारियों के कार्यस्थल बनाया जाएगा। वहीं, शिकायत लेकर आने वाले फरियादियों की सुविधा के लिए वेटिंग हाल भी होगा। पेयजल, महिला व पुरुष शौचालय के साथ-साथ बैठने की व्यवस्था भी होगी। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन से हो चुकी है। एमकेएस कंस्ट्रक्शन को कार्य भी मिल चुका है। कंपनी ने एग्रीमेंट भी कर लिया है। नगर थाना परिसर स्थित क्वार्टर भी एसपी ने लिया जायजा इसके बाद एसपी ने पूरे नगर थाना परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वायरलेस आफिस, यातायात थाना, बैरक, महिला थाना, नगर थाना के बगल जर्जर क्वार्टर का भी जायजा लिया। बताया कि नगर थाना के मरम्मत कार्य का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। इस दौरान नगर थाना परिसर को सुसज्जित करने को लेकर कार्ययोजना के प्रस्ताव से संबंधित बातों की चर्चा की गई।

भारत के खिलाफ वेस्टइंडीज की रिकॉर्डतोड़ जीत: 350+ रन बनाकर भी नहीं बचा पाई टीम इंडिया

नई दिल्ली न्यू चंडीगढ़ के पीसीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शनिवार को खेले गए तीसरे वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने इतिहास रच दिया। होप की 143 गेंदों में 162 रनों की नाबाद और जुझारू पारी की बदौलत कैरेबियाई टीम ने 352 रनों के विशाल लक्ष्य को 48.2 ओवरों में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस यादगार जीत के साथ वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की वनडे सीरीज में क्लीन स्वीप होने से खुद को बचा लिया। वेस्टइंडीज क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज न्यू चंडीगढ़ में मिली यह जीत कैरेबियाई क्रिकेट के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है। वेस्टइंडीज ने अपने 907 वनडे मैचों के लंबे इतिहास में पहली बार 350 से अधिक रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक चेज किया है। इससे पहले वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज का सबसे बड़ा सफल रन चेज 328 रनों का था जो उन्होंने साल 2019 में आयरलैंड के खिलाफ डबलिन में हासिल किया था। यह कुल छठा मौका है जब कैरेबियाई टीम ने 300 या उससे अधिक का स्कोर सफलता के साथ चेज किया है। भारतीय टीम के नाम दर्ज हुआ शर्मनाक रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के लिए जहां यह मुकाबला ऐतिहासिक खुशियां लेकर आया, वहीं भारतीय टीम के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। भारतीय वनडे क्रिकेट इतिहास में यह सिर्फ तीसरा मौका है जब टीम इंडिया 350 से ज्यादा रन बनाने के बावजूद अपने स्कोर का बचाव करने में नाकाम रही। भारतीय गेंदबाज बोर्ड पर एक विशाल स्कोर लगे होने के बाद भी विरोधी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। भारतीय गेंदबाजों का लचर प्रदर्शन भारतीय आक्रमण की बात करें तो मोहम्मद सिराज, गुरनूर बरार, कुलदीप यादव और नमन धीर ने 1-1 विकेट जरूर चटकाए लेकिन वे पूरी पारी के दौरान कप्तान शाई होप को रोकने का कोई तोड़ नहीं निकाल सके। ओपनिंग करने उतरे शाई होप अंत तक क्रीज पर खूंटा गाड़कर डटे रहे और अकेले दम पर मैच का पासा पलट दिया। उनकी इस मैच जिताऊ पारी ने दोनों टीमों के बीच का अंतर साफ तौर पर तय कर दिया।  

मछली पालन के लिए अब बिना गारंटी मिलेगा 2 लाख तक का लोन, सुपौल में विशेष KCC अभियान शुरू

सुपौल पूंजी के अभाव में मछली पालन का कारोबार बढ़ाने में परेशानी झेल रहे मत्स्य पालकों के लिए राहत की खबर है। मछली पालन के लिए अब बैंक से ऋण लेना आसान हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर जिले के मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से जोड़ने के लिए शनिवार से विशेष अभियान शुरू किया गया। अभियान के तहत जिले के 8,900 मत्स्य पालकों को केसीसी का लाभ दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शनिवार को अभियान की शुरुआत शुक्रवार को अवकाश रहने के कारण अभियान की शुरुआत शनिवार को की गई। पहले दिन छातापुर और राघोपुर को छोड़कर शेष नौ प्रखंडों में प्रखंड स्तरीय मेगा कैंप लगाया गया। कैंप में बड़ी संख्या में मत्स्य पालक पहुंचे और केसीसी ऋण के लिए आवेदन जमा किए। आवेदनों को बैंकों के माध्यम से शीघ्र स्वीकृत कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई मत्स्य पालकों को बैंक ऋण उपलब्ध कराने के लिए अब प्रत्येक शुक्रवार को प्रखंड स्तर पर मेगा कैंप आयोजित किया जाएगा। शुक्रवार को अवकाश रहने की स्थिति में अगले कार्य दिवस पर कैंप लगेगा। जिला स्तर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी और लीड बैंक मैनेजर को अभियान का संयोजक बनाया गया है। दोनों अधिकारी बैंकों से समन्वय स्थापित कर आवेदनों की स्वीकृति और ऋण वितरण की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। जिले को 8,900 केसीसी का लक्ष्य मिला कैंपों का निरीक्षण करते हुए जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले को 8,900 केसीसी का लक्ष्य मिला है। निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किया जाएगा। उन्होंने मत्स्य पालकों से कैंप में पहुंचकर आवश्यक कागजात के साथ आवेदन करने की अपील की। केसीसी के लिए आवेदक को पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र में से कोई एक देना होगा। इसके अलावा आवासीय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की छायाप्रति, पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और चालू मोबाइल नंबर आवश्यक है। निजी तालाब होने की स्थिति में जमीन की अद्यतन रसीद देनी होगी। तीन लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध वहीं, किराये के तालाब के लिए स्टांप पेपर पर तैयार लीज एग्रीमेंट प्रस्तुत करना होगा।केसीसी के तहत कृषि एवं संबंधित गतिविधियों के लिए अधिकतम तीन लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। वहीं, केवल मछली पालन के लिए मत्स्य पालकों को बिना किसी गारंटी के दो लाख रुपये तक ऋण देने का प्रविधान है। ऋण पर सामान्य ब्याज दर सात प्रतिशत वार्षिक है। समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को ब्याज में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलती है। इस प्रकार समय पर भुगतान करने पर प्रभावी ब्याज दर चार प्रतिशत वार्षिक रह जाती है।  जिले में विशेष अभियान की शुरुआत कर दी गई है। मेगा कैंप के माध्यम से 8,900 मत्स्य पालकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर केसीसी का लाभ देने का लक्ष्य है। मछली पालन के लिए आवेदक के पास निजी तालाब या जलाशय होना चाहिए। निजी जमीन नहीं होने की स्थिति में कम से कम सात से 10 वर्ष के एग्रीमेंट पर लिया गया तालाब भी मान्य होगा। – संजय कुमार सिंह, जिला मत्स्य पदाधिकारी  

अरबाज खान से सलमान पर पूछा सवाल तो बिगड़ा माहौल, जवाब दिए बिना पैपराजी से चले गए एक्टर

हाल ही में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को मुंबई में एक इवेंट के दौरान एक्टर अरबाज खान 'द वेस्टिन मुंबई पवई लेक' में फोटोग्राफर्स से मिले. लेकिन माहौल तब अजीब हो गया जब एक पैपराजी ने उनसे उनके भाई, एक्टर सलमान खान के बारे में सवाल पूछा. जिससे अरबाज काफी चिढ़ गए. दरअसल पैपराजी ने अरबाज से 'बिग बॉस 20' पर ट्रोलर्स को लेकर सलमान की हालिया टिप्पणियों के बारे में पूछा. अरबाज़ ने सवाल का जवाब देने से बचने की कोशिश की और जल्दी से 'एक्सक्यूज़ मी… थैंक यू, थैंक यू' कहा और फोटोग्राफर्स के पास से चले गए. हालांकि, बातचीत यहीं खत्म नहीं हुई. बाद में अरबाज मुड़े और पैपराजी से पूछा, 'क्या यह ज्वेलरी से जुड़ा था? क्या वह सवाल आज के इवेंट से जुड़ा था?' इससे पता चलता है कि शायद उन्हें इवेंट से जुड़े सवालों की उम्मीद थी. अभी तक कोई सफाई नहीं इस छोटी सी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा है. अरबाज के रिएक्शन से यह जानने की एक्साइटमेंट बढ़ गई है कि उन्होंने सलमान से जुड़े सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया. अभी तक अरबाज की तरफ से वहां से चले जाने के फैसले या उनके रिएक्शन के पीछे किसी खास वजह के बारे में कोई सफाई नहीं दी गई है. सलमान ने क्या कहा था? बीते दिनों बिग बॉस 20 में सलमान खान ने पैपराजी के काम करने के तरीके और उनकी मानसिकता पर कड़ा एतराज जताया था. उन्होंने कहा कि गाड़ियों से उतरते-बैठते वक्त एक्ट्रेसेस के गलत एंगल से फोटो-वीडियो लिए जाते हैं, जिन्हें कोई भी महिला पसंद नहीं करती.  उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे लोगों को मीडिया कार्ड किसने दिए हैं और इनकी मानसिकता आखिर क्या है?   वर्क फ्रंट एक्टर आखिरी बार 'बिहू अटैक' में दिखे थे, जिसे सुजाद इकबाल खान ने डायरेक्ट किया था. इस फिल्म में देव मेनारिया, डेज़ी शाह, राहुल देव, रजा मुराद, युक्ति कपूर, हितेन तेजवानी, मीर सरवर, डिम्पू बरुआ और एमी मिसोबाह ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं. 59 साल के अरबाज ने 24 दिसंबर 2023 को मेकअप आर्टिस्ट शूरा खान (36) से शादी की थी. इस कपल के घर 5 अक्टूबर 2025 को बेटी सिपाारा खान का जन्म हुआ. इससे पहले अरबाज की शादी मलाइका अरोड़ा से हुई थी, जो 1998 से 2017 तक चली. इस पूर्व कपल का एक बेटा है, अरहान खान.  

बनास नदी पर बना राजस्थान का सबसे लंबा पुल, ₹134.74 करोड़ की लागत से तैयार हुआ 3.34 किमी हाई-लेवल ब्रिज

जयपुर राजस्थान के बुनियादी ढांचे और सड़क विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। टोंक जिले के गहलोद गांव के पास बनास नदी पर प्रदेश के सबसे लंबे हाई-लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। लगभग 134.74 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भव्य और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के पूरा होने से उन हजारों ग्रामीण इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है, जिन्हें हर साल मानसून के मौसम में जलभराव और आवागमन बाधित होने की वजह से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF) के वित्तीय सहयोग से बनाए गए इस पुल ने राज्य में सिविल इंजीनियरिंग और आपदा-रोधी निर्माण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। भौगोलिक रूप से देखें तो यह पूरा इलाका हर साल बारिश के दिनों में मुख्यधारा से कट सा जाता था। बनास नदी में उफान आने पर पुराना रपटा या कॉजवे पूरी तरह पानी में डूब जाता था या क्षतिग्रस्त हो जाता था, जिससे टोंक, मालपुरा, पीपलू और अजमेर के बीच का संपर्क लंबे समय के लिए टूट जाता था। मजबूरी में स्थानीय लोगों और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 30 से 40 किलोमीटर का लंबा अतिरिक्त चक्कर काटकर सफर करना पड़ता था। लेकिन अब इस 3.34 किलोमीटर लंबे हाई-लेवल ब्रिज के शुरू हो जाने से इस पूरे क्षेत्र के लोगों को साल के 365 दिन सुरक्षित, सुगम और बारहमासी कनेक्टिविटी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 3.34 km लंबाई, 243 टन की भार क्षमता इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट की संरचनात्मक और तकनीकी बारीकियों पर नजर डालें तो इसे बेहद उच्च मानकों के तहत तैयार किया गया है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हाई-लेवल ब्रिज की कुल लंबाई 3.34 किलोमीटर (3,340 मीटर) है, जिसमें लगभग 2 किलोमीटर का मुख्य पुल और 1.34 किलोमीटर लंबी एप्रोच सड़कें शामिल हैं। मजबूत स्पैन संरचना: इस मुख्य पुल में 40-40 मीटर की लंबाई वाले कुल 50 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट स्पैन बनाए गए हैं, जो इसे अत्यधिक मजबूत बनाते हैं। भार वहन क्षमता: इस ब्रिज की लोड-बेयरिंग कैपेसिटी करीब 243 टन आंकी गई है, जो भारी मालवाहक वाहनों और कमर्शियल ट्रैफिक के आवागमन के लिए पूरी तरह मुफीद है। सख्त लोड टेस्टिंग: पुल की मजबूती और गुणवत्ता की पुष्टि के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के तहत 5 चरणों में इसकी कड़ी लोड टेस्टिंग पूरी की गई। टेस्टिंग के दौरान इसमें 92 प्रतिशत की संरचनात्मक रिकवरी दर्ज की गई, जबकि 85 प्रतिशत या इससे अधिक रिकवरी को ही तकनीकी रूप से संतोषजनक माना जाता है। क्षेत्रीय विकास और आम जनता को मिलने वाले लाभ इस नए हाई-लेवल ब्रिज के निर्माण से केवल टोंक जिला ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और कस्बों के बीच आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होंगी। इस पुल के शुरू होने से मुख्य रूप से पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह, फागी और अजमेर क्षेत्र के निवासियों को सीधा फायदा मिलेगा। कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने, मरीजों को समय पर अस्पताल ले जाने और विद्यार्थियों के दैनिक आवागमन में आने वाली बाधाएं अब पूरी तरह दूर हो जाएंगी। ग्रामीण अंचलों के लोगों का यह सफर अब न केवल समय बचाने वाला होगा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी होगा।

भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा होगी और मजबूत, सिद्धार्थनगर में IB के लिए चार स्थान चिन्हित

शोहरतगढ़  भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो की इकाइयों के लिए भूमि चिह्नित की गई है। ककरहवा, खुनुआ, बढ़नी और डुमरियागंज में कार्यालय व आवास के लिए भूमि प्रस्तावित है। ककरहवा के भाटिनपार और खुनुआ 0.3000-0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। डुमरियागंज के रूदौलिया बुजुर्ग में भी 0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है। बढ़नी क्षेत्र के मधवापुर में 0.1052 हेक्टेयर भूमि आवास निर्माण तथा ढेबरुआ में 0.0910 हेक्टेयर भूमि कार्यालय निर्माण के लिए प्रस्तावित है। ककरहवा और डुमरियागंज की भूमि का निरीक्षण हो चुका है। खुनुआ में चिह्नित स्थल का शीघ्र निरीक्षण कराकर उपयुक्त पाए जाने पर पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। इससे सीमापार गतिविधियों पर स्थानीय निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है। सीमा सुरक्षा के लिहाज से अहम पड़ाव जनपद में भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर की सीमा पूरी तरह से खुली होने के कारण सिद्धार्थनगर का सीमावर्ती क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। खुनुआ और बढ़नी, ककरहवा जैसे प्रमुख सीमा बिंदुओं के आसपास आइबी इकाइयों की स्थापना से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है। दो वर्षों के बीच खुनुवा एवं ककरहावा के रास्ते कई विदेशी भारत में प्रवेश करते हुए पकड़े गए हैं। इसको लेकर सीमा की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। बब्बर खालसा ग्रुप, इंडियन मुजाहिदीन ग्रुप से जुड़े आतंकी भारत-नेपाल के बढ़नी बार्डर से पकड़े भी जा चुके हैं। खुली सीमा के चलते दुश्मन देश भारत-विरोधी गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। आतंकी संगठन बिहार और उत्तर प्रदेश के नेपाल से सटे इलाकों में उनकी नापाक गतिविधियों को बढ़ाने नए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े किए जाने की आशंका है, जिसके जरिए भारत में अशांति फैलाई जा सके। नेपाल से सटे इलाकों में कट्टरपंथी गतिविधियों में काफी इजाफा नजर आ रहा है। बढ़नी बार्डर पर मिल चुका है पाकिस्तान कनेक्शन 1993 में बढ़नी में भारत-नेपाल सीमा पर अजमेर सिंह व भाग सिंह नामक उग्रवादी पकडे़ गए। वर्ष 2010 में बढ़नी बार्डर से इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी सलमान उर्फ छोटू को एटीएस ने पकड़ा था। वर्ष 2013 में बिहार के रक्सौल से इसी आतंकी संगठन का मास्टर माइंड अब्दुल करीम टुंडा पकड़ा गया था। पूछताछ में बढ़नी के आसपास रहकर देश विरोधी गतिविधि चलाने की बात सामने आई थी। इसी बीच इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े आतंकी यासिन भटकल को पकड़ा गया था। इसके अलावा पड़ोसी जनपद महराजगंज से हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी नासिर को पकड़ा गया था। बब्बर खालसा का खतरनाक उग्रवादी मक्कन सिंह भी बढ़नी में पकड़ा गया था    

बाब अल-मंदेब पर बढ़ा तनाव, हूतियों के खिलाफ सऊदी ऑपरेशन की तैयारी; पाकिस्तान की भी बड़ी भूमिका

दुबई  दुनिया के तेल और व्यापार की सप्लाई पर दोहरी चोट लगी है. एक तरफ ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, तो दूसरी तरफ यमन में हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर कब्जा कर लिया है. दुनिया के समुद्री व्यापार के इन दोनों अहम रास्तों पर संकट के बीच सऊदी अरब ने हूतियों पर हमले की तैयारी शुरू कर दी है. सऊदी अपने लोगों को इस जंग में नहीं भेजेगा. इस ऑपरेशन में यमन की एक लाख से ज्यादा सैनिकों वाली सेना को मैदान में उतारा जा सकता है, जबकि सऊदी अरब हवाई हमलों से उनका साथ देगा. इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी बढ़ गई है. उसने सऊदी अरब में 30 से 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं और सैन्य उपकरणों के साथ सलाहकार भी भेजे हैं. हालांकि कहा जा रहा है कि ये सैनिक सऊदी की रक्षा के लिए हैं. सऊदी के इस अटैक प्लान से पहले खबर आई थी कि अमेरिका ने अपनी कई पैट्रियट मिसाइलों को सऊदी और कतर के तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा में तैनात किया है।  सऊदी अरब का क्या है प्लान? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ हमले के दो विकल्पों पर विचार कर रहा है. पहला विकल्प बाब-अल-मंदेब के आसपास के तटीय इलाकों को हूतियों से वापस लेने का है. दूसरा विकल्प यमन के कई मोर्चों पर एक साथ हमला करने का है. इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं. इस हमले की टाइमिंग फिक्स नहीं है, लेकिन आने वाले कुछ हफ्तों में शुरू किया जा सकता है. हालांकि, इसकी तारीख को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं. कुछ सूत्रों का कहना है कि हमला एक हफ्ते के भीतर शुरू हो सकता है, जबकि कुछ का मानना है कि अमेरिका के नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद ही सैन्य कार्रवाई हो सकती है।  1 लाख सैनिक कर सकते हैं हमला रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब इस बार सीधे बड़े जमीनी अभियान के बजाय यमनी सैनिकों को आगे रखकर ऑपरेशन चलाने की तैयारी कर रहा है. इस अभियान में 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को जुटाया जा सकता है. हालांकि, सैनिकों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि हमले का दायरा कितना बड़ा रखा जाता है. जमीन पर यमनी सेना हूतियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जबकि सऊदी अरब हवाई हमलों के जरिए समर्थन देगा. इस तरह ऑपरेशन की कमान सऊदी के समर्थन वाले यमनी बलों के हाथ में होगी और रियाद उन्हें सैन्य मदद देगा।  अमेरिका भी इस अभियान में सऊदी अरब की मदद कर रहा है. वह खुफिया जानकारी और टारगेट से जुड़ी सूचनाएं उपलब्ध करा रहा है. इससे पहले उसने उसकी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पैट्रियट एयर डिफेंस तैनात किए हैं. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सीधे सैन्य मदद और हवाई हमलों की मांग को पहले ठुकरा दिया था।  समंदर के दो बड़े दरवाजे बंद इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा पहलू समुद्री व्यापार के दो अहम रास्तों का संकट में आना है. होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान युद्ध के कारण लगभग बंद है. ऐसे में दुनिया की नजर बाब-अल-मंदेब पर टिक गई है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश मार्ग है. बाब-अल-मंदेब भूमध्य सागर और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का बेहद अहम रास्ता है. होर्मुज में आवाजाही बाधित होने के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है. अब हूतियों के इस इलाके पर नियंत्रण से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ने का खतरा है. सऊदी अरब का मानना है कि जब तक हूतियों के हाथ में बाब-अल-मंदेब का नियंत्रण रहेगा, तब तक उनके साथ शांति वार्ता की नई प्रक्रिया शुरू करना मुश्किल होगा. इसकी वजह यह है कि इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण हूतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा दबाव बनाने की ताकत देता है।  पाकिस्तान के 30-40 हजार सैनिक सऊदी अरब में तैनात इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने हाल ही में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब को सैन्य उपकरणों और सलाहकारों के जरिए मदद दी है. रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने पिछले महीने चार कार्गो विमान अदन भेजे थे. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, छोटी तोपें, ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम शामिल थे. अदन यमन की सऊदी समर्थित सरकार का मुख्य केंद्र है. इसके अलावा, पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर यमनी बलों की मदद कर रहे हैं. रिपोर्ट में एक पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 30 हजार से 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं. ये सैनिक सऊदी अरब की जमीनी सीमाओं की सुरक्षा और ड्रोन-मिसाइल हमलों को रोकने में मदद कर रहे हैं. इनकी तैनाती पिछले साल से अलग-अलग चरणों में हुई है और हालिया तनाव के बाद भी सैनिक पहुंचे हैं।  सऊदी के सामने क्या है दिक्कत? सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले सभी गुट एकजुट नहीं हैं. पहले गृहयुद्ध के दौरान सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अलग-अलग यमनी लड़ाकू गुटों को हथियार और ट्रेनिंग दी थी. पिछली सर्दियों में यमन के दक्षिणी हिस्से में UAE समर्थित लड़ाकों ने पूर्वी इलाकों पर कब्जा करने और अलग देश बनाने की योजना का ऐलान किया था. इसके बाद सऊदी समर्थित लड़ाकों के साथ उनकी झड़पें हुईं और अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. यमन मामलों के जानकार मोहम्मद अलबाशा के मुताबिक, हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले कई गुट अभी भी बड़े और लंबे सैन्य अभियान के लिए तैयार नहीं हैं. दूसरी तरफ हूती कई मोर्चों पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं। 

भोपाल में 1 लाख LPG उपभोक्ताओं पर गैस संकट, KYC नहीं कराने पर कनेक्शन ब्लॉक; बुकिंग भी ठप

भोपाल  शहर में 1 अक्टूबर से उन घरेलू LPG सिलिंडर उपभोक्ताओं की रसोई पर संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने अपने कनेक्शन की e-KYC नहीं करवाई थी। ऑयल कंपनियों ने उनका कनेक्शन ब्लॉक कर दिया है, जिससे बुकिंग सहित अन्य सभी सेवाएं ठप हो गई हैं। ऐसे में परेशान उपभोक्ता सिलिंडर के लिए एजेंसी के चक्कर लगाने सहित सभी तरह की मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन एजेंसी कर्मचारियों का एक ही जवाब है कि उन्हें पहले e-KYC करवाना होगी तब ही बुकिंग शुरू हो सकेगी। शहर में करीब 8 लाख घरेलू LPG सिलिंडर उपभोक्ता जानकारी के अनुसार शहर में करीब 8 लाख घरेलू एलीपीजी सिलिंडर उपभोक्ता हैं, इनमें से करीब एक लाख उपभोक्ताओं ने अपने कनेक्शन की e-KYC नहीं करवाई थी। इस वजह से ऑयल कंपनियों ने उनके कनेक्शन ब्लॉक कर दिए हैं, उनको इसका पता तब चला जब वह अपने कनेक्शन पर सिलिंडर की बुकिंग कर रहे थे। ऐसे में जब बुकिंग नहीं हो सकी तो उन्होंने एजेंसी पर पहुंचकर जानकारी ली तो कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने e-KYC नहीं करवाई है जिससे अभी सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। अशोका गार्डन स्थित एक गैस एजेंसी पर शनिवार को बड़ी संख्या में उपभोक्ता सिलिंडर लेने पहुंचे थे, जहां देर शाम तक यह स्थिति बनी रही। हर एजेंसी पर करीब 8 हजार उपभोक्ता सूत्रों के अनुसार शहर में करीब 40 से अधिक इंडेन, भारत, एचपी कंपनियों की गैस एजेंसियां हैं, जिनके द्वारा घरेलू एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति की जाती है। गैस डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस शर्मा के अनुसार शहर में हर एजेंसी पर करीब आठ हजार ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनके कनेक्शन की e-KYC नहीं हुई है। ऐसे में अचानक से सरकार के आदेश पर कंपनियों ने उनके कनेक्शन ब्लॉक कर दिए हैं, जो कि एक तरह से अन्याय है। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को समय देना चाहिए। शहर के सभी घरेलू एलपीजी सिलिंडर उपभोक्ताओं को e-KYC करवाना अनिवार्य है। जिन्होंने अब तक नहीं करवाई है वह करवा लें, जिससे उनका कनेक्शन और बुकिंग दोनों शुरू हो जाएगी।- चंद्रभान सिंह जादौन, जिला आपूर्ति नियंत्रक  

बिहार में कृषि फीडरों का होगा सोलराइजेशन, किसानों को जमीन देने पर मिलेगा तय आर्थिक लाभ

पटना  बिहार के ग्रामीण इलाकों में कृषि फीडरों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक कृषि फीडरों के लिए 2585 मेगावाट सोलर ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। योजना के तहत स्थानीय किसानों को भी सोलर प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराने के माध्यम से जोड़ा जाएगा। किसानों को 55 पैसे यूनिट की दर से मिलती है बिजली वर्तमान में किसानों को कृषि कार्य के लिए 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है। वहीं, बिजली कंपनी को बिजली खरीदने में करीब 6.19 रुपये प्रति यूनिट खर्च आता है। सरकार चाहती है कि कृषि क्षेत्र में दी जाने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा सोलर ऊर्जा से पूरा किया जाए। जमीन देने वाले किसानों को मिलेगा तय लाभ सोलराइजेशन योजना में खेत मालिकों को भी भागीदार बनाने की तैयारी है। बिजली कंपनी स्थानीय स्तर पर किसानों को जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। सोलर प्लांट लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने वाले किसानों को तय राशि का लाभ दिया जाएगा। 2027 तक 640 फीडर होंगे सोलर योजना के पहले चरण में वर्ष 2027 तक 640 कृषि फीडरों का सोलराइजेशन किया जाना है। इससे करीब 640 मेगावाट सोलर बिजली उपलब्ध होने का लक्ष्य है। इसके बाद वर्ष 2028 तक 896 फीडरों को सोलर से जोड़ने की योजना है। 2028 में 900 मेगावाट बिजली का लक्ष्य वर्ष 2028 तक 896 फीडरों के सोलराइजेशन से करीब 900 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए निजी कंपनियों की भागीदारी के साथ स्थानीय स्तर पर जमीन की उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2029 तक 2585 मेगावाट सोलर ऊर्जा वर्ष 2029 तक 1024 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन का लक्ष्य है। इससे करीब 1034 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की योजना है। तीन चरणों में कुल 2585 मेगावाट सोलर ऊर्जा कृषि फीडरों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सोलर बिजली से कृषि क्षेत्र को मिलेगा नया आधार योजना पूरी होने पर कृषि फीडरों के लिए सोलर ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने की मौजूदा व्यवस्था को सौर ऊर्जा से मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही, सोलर प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराने वाले स्थानीय किसानों को भी योजना से आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।