samacharsecretary.com

25.32 लाख अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन, लिखित परीक्षा से लेकर शारीरिक दक्षता परीक्षा तक कई चरणों में हुई चयन प्रक्रिया

लखनऊ  योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में होमगार्ड बल को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी हुई है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (यूपीपीआरबी) ने उत्तर प्रदेश होमगार्ड्स के 41,424 पदों पर एनरोलमेंट-2025 का अंतिम चयन परिणाम जारी कर दिया है। चयनित अभ्यर्थियों की जनपदवार सूची बोर्ड की वेबसाइट uppbpb.gov.in पर उपलब्ध कराई जा रही है। होमगार्ड्स के इन पदों के लिए बोर्ड ने 18 नवंबर 2025 को विज्ञप्ति जारी कर ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए निकाली गई इन रिक्तियों के सापेक्ष कुल 25,32,196 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। होमगार्ड्स एनरोलमेंट-2025 की यह प्रक्रिया आवेदन, लिखित परीक्षा, दस्तावेजों की जांच, शारीरिक मानक परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षा के विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद अंतिम चयन तक पहुंची है। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों में होमगार्ड बल के लिए निर्धारित रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। छह पालियों में हुई लिखित परीक्षा चयन प्रक्रिया के तहत प्रदेश के 74 जिलों में 25, 26 और 27 अप्रैल 2026 को लिखित परीक्षा कराई गई। परीक्षा कुल छह पालियों में हुई। अलग-अलग पालियों में परीक्षा होने के कारण नियमों के अनुसार अभ्यर्थियों के अंकों का नॉर्मलाइजेशन किया गया। इसके बाद अभ्यर्थियों ने आवेदन के समय जिन अधिमानी योग्यताओं से जुड़े दस्तावेज लगाए थे, उनके निर्धारित अंक भी जोड़े गए। इन अंकों के आधार पर आगे की प्रक्रिया के लिए अभ्यर्थियों का चयन किया गया। 1.07 लाख अभ्यर्थी अगले चरण में पहुंचे बोर्ड ने 28 जून 2026 को जारी सूचना के माध्यम से कुल 1,07,221 अभ्यर्थियों को दस्तावेजों की जांच और शारीरिक मानक परीक्षण के लिए बुलाया। यह संख्या विज्ञापित पदों की करीब 2.6 गुना थी। दस्तावेजों की जांच और शारीरिक मानक परीक्षण की प्रक्रिया 13 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक पूरी की गई। इस दौरान अभ्यर्थियों के जरूरी दस्तावेजों की जांच के साथ निर्धारित शारीरिक मानकों को भी परखा गया। शारीरिक दक्षता परीक्षा भी सम्पन्न दस्तावेज जांच और शारीरिक मानक परीक्षण में सफल अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल कराया गया। यह परीक्षा 15 से 26 सितंबर 2026 तक कराई गई। शारीरिक दक्षता परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को अंतिम चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया। जनपदवार मेरिट से हुआ चयन अंतिम चयन के लिए लिखित परीक्षा में मिले नॉर्मलाइज्ड स्कोर और अधिमानी योग्यता के लिए मिले निर्धारित अंकों को जोड़ा गया। इसके बाद प्रदेश में लागू आरक्षण नियमों के अनुसार जनपदवार मेरिट तैयार की गई। इसी मेरिट के आधार पर 41,424 पदों के सापेक्ष चयनित अभ्यर्थियों की सूची तैयार की गई है। चयनित अभ्यर्थी अपना परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर देख सकते हैं। समान अंक वालों के लिए भी नियम तय बोर्ड के अनुसार, 3 नवंबर 2025 के शासनादेश में निर्धारित उत्तर प्रदेश राज्य होमगार्ड्स एनरोलमेंट मार्गदर्शिका के तहत समान अंक प्राप्त करने वाले दो या अधिक अभ्यर्थियों की जनपदवार श्रेष्ठता का निर्धारण नियमों के अनुसार किया गया। इसमें अधिक आयु वाले अभ्यर्थी को वरीयता दी गई तथा समान स्थिति में हाईस्कूल प्रमाणपत्र में दर्ज नाम के अंग्रेजी वर्णमाला क्रम को आधार बनाया गया। प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 41,424 रिक्त पदों के सापेक्ष सभी 41,424 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है।

डीटीसी और क्लस्टर बसों में फ्री यात्रा हेतु पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड हुआ जरूरी

नई दिल्ली  दिल्ली की डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए शनिवार 3 अक्टूबर से पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड अनिवार्य हो गया है। परिवहन विभाग ने शनिवार को दिल्ली परिवहन निगम (मुफ्त एवं रियायती पास) नियमों में संशोधन कर अधिसूचना जारी कर पिंक टिकट की व्यवस्था खत्म कर दी। अब मुफ्त यात्रा के लिए महिला यात्रियों को बस में वैध पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड टैप करना होगा। कार्ड नहीं होने पर किराया देकर सामान्य टिकट लेना पड़ेगा। कौन कौन बनवा सकता है पिंक कार्ड अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली की रहने वाली महिलाएं पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड के जरिए डीटीसी और क्लस्टर की एसी व नॉन-एसी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। ट्रांसजेंडर्स को भी यह सुविधा दी गई है। 12 साल या उससे अधिक उम्र की महिला जिनके पास दिल्ली का आधार कार्ड है, वह कार्ड बनवा सकती हैं। दिल्ली में रोजाना औसतन 6-7 लाख महिलाएं सफर करती हैं। NCR की महिलाओं को देना होगा किराया अब नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे एनसीआर के शहरों से दिल्ली आने-जाने वाली महिलाओं को बसों में फ्री सफर की सुविधा नहीं मिल सकेगी। उन्हें निर्धारित किराया देकर टिकट खरीदना पड़ेगा। चूंकि पिंक सहेली कार्ड सिर्फ उन्हें जारी किए जा रहे है, जिनके पास दिल्ली का आधार कार्ड है। पहले बसों में मिलने वाले पिंक टिकट के जरिए हर महिला को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती थी। 19 लाख पिंक सहेली कार्ड हो चुके जारी दिल्ली में 19 लाख पिक सहेली कार्ड जारी हो चुके है। सरकार ने कागजी पिक टिकट को खत्म कर स्मार्ट कार्ड व्यवस्था लागू करने की तैयारी बीते 8 मार्च से ही शुरू कर दी थी। पिक टिकट की समयसीमा पहले अगस्त और सितंबर में कई बार बढाई गई थी। आखिरी बार इसे 30 सितंबर तक बढ़ाया गया था। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में कुल 38 सेंटर पर अभी भी पिंक सहेली कार्ड बनाए जा रहे हैं।  

हरियाणा सीएमओ में फेरबदल: अरुण गुप्ता के विभागों की जिम्मेदारी उपप्रधान सचिव यशपाल और अजय को सौंपी

 चंडीगढ़  मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विभागों के कामकाज का नये सिरे से बंटवारा किया गया है। अरुण गुप्ता के पास दस विभाग थे, जिनमें से पांच उपप्रधान सचिव यशपाल और पांच उपप्रधान सचिव अजय कुमार को सौंपे गए हैं। गुप्ता के पास मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन से जुड़े कार्यों की निगरानी की भी जिम्मेदारी थी, जो अब मुख्यमंत्री के ओएसडी विवेक कालिया को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय के ओवरआल इंचार्ज और मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने नए प्रधान सचिव की नियुक्ति तक तीन अधिकारियों में काम का बंटवारा किया है। प्रधान सचिव के रूप में अरुण गुप्ता के पास नागरिक उड्डयन, क्रिड, पर्यावरण, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, जेल, खनन, लोक निर्माण, सामाजिक न्याय, परिवहन और शहरी निकाय जैसे विभागों का दायित्व था। 18 विभागों के संभाले हैं जिम्मेदारी उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अब पर्यावरण, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, जेल, लोक निर्माण और शहरी निकाय उपप्रधान सचिव यशपाल संभालेंगे। नागरिक उड्डयन, क्रिड, खनन, सामाजिक न्याय और परिवहन विभाग उपप्रधान सचिव अजय कुमार को दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर स्वयं वित्त, राजस्व, सामान्य प्रशासन, स्वास्थ्य, उद्योग, शहरी विकास, विधायी कार्य, आपदा प्रबंधन, गृह, एक्साइज, फाइनेंस और विजिलेंस समेत 18 विभागों के कामकाज की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। सीएम के उप प्रधान सचिव यशपाल अभी तक नौ और अजय कुमार सात जिम्मेदारी संभाल रहे थे यशपाल के 14 और अजय कुमार के पास 12 विभाग अब यशपाल के 14 और अजय कुमार के पास 12 विभाग रहेंगे। सीएम के ओएसडी राज नेहरू के पास पहले की तरह तीन विभाग रहेंगे, जबकि ओएसडी विवेक कालिया के पास सीएम विंडो व जनसंवाद के साथ मुख्यमंत्री घोषणाओं के क्रियान्वयन की निगरानी की जिम्मेदारी भी रहेगी। सीएम के ओएसडी सुधांशु गौतम के पास तबादलों व मकान आवंटन समेत पांच कार्यक्षेत्र रहेंगे, जबकि ओएसडी राकेश संधू सीएम विंडो और ग्रीवेंस और नरेंद्र पाल मलिक सीएम घोषणाएं देखते रहेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी मुख्यमंत्री के पास आने वाली फाइलों के निस्तारण, नीतिगत निर्णयों के क्रियान्वयन और विभागीय समन्वय की जिम्मेदारी निभाते हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण: डीसी मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश, कोई भी पात्र मतदाता न छूटे

 रांची  विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में आम लोगों की सुविधा के लिए स्थानीय स्तर पर हेल्पडेस्क स्थापित किया जाएगा। हेल्पडेस्क के माध्यम से लोगों को एसआइआर से संबंधित आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, बीएलओ और सुपरवाइजर के साथ समन्वय स्थापित कर स्थानीय स्तर पर आम लोगों की मदद करने का निर्देश दिया गया है। स्पष्ट कहा गया कि कोई भी पात्र मतदाता किसी भी परिस्थिति में मतदाता सूची से बाहर नहीं छूटना चाहिए। ये निर्देश उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने शनिवार को समाहरणालय ए स्थित एनआईसी सभागार में एसआइआर को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में दिए। उन्होंने एसआइआर प्रक्रिया को सुचारू, पारदर्शी और जन-अनुकूल बनाने पर जोर दिया। बैठक में उप निर्वाचन पदाधिकारी बिवेक कुमार सुमन के अलावा सभी निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी एवं सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी उपस्थित थे। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एसआइआर प्रक्रिया के दौरान आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में पूरी गंभीरता बरती जाए। बीएलओ और सुपरवाइजर के स्तर पर लोगों को आवश्यक जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा: नवरात्र के शुभ मुहूर्त में 9 हजार से अधिक नए वाहनों की होगी बंपर डिलीवरी

नई दिल्ली नवरात्र में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के ऑटोमोबाइल बाजार में जोरदार तेजी आई है। शुभ मुहूर्त के 9 दिनों में 9,000 से अधिक नए वाहनों की डिलीवरी की तैयारी है। शुभ मुहूर्त में वाहन घर ले जाने के लिए लोगों ने पहले से बुकिंग करा रखी है। डीलरों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। नवमी पर डिलीवरी की मांग अधिक नए मॉडलों की लॉन्चिंग, त्योहारी छूट और शुभ दिनों में वाहन खरीदने की परंपरा से मांग बढ़ी है। नवरात्र 11 से 19 अक्तूबर तक हैं। इन दिनों में डिलीवरी के लिए बड़ी संख्या में वाहन बुक किए गए हैं। दोपहिया और चार पहिया वाहन डीलरों के अनुसार नवमी पर डिलीवरी की मांग अधिक है। ग्राहकों में उत्साह कर्मा हुंडई के मुख्य बिजनेस अधिकारी मोहम्मद इमरान ने बताया कि नवरात्र में कारों की बुकिंग को लेकर ग्राहकों में उत्साह है। दो शोरूम से 150 से अधिक कारों की डिलीवरी की तैयारी है। मॉडल और कीमत के आधार पर ग्राहकों का रुझान अलग-अलग है। इन कीमत की कारों पर फोकस सागर मोटर्स के जीएम सेल्स दीपक वर्मा ने बताया कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 5 शोरूम से 800 से अधिक वाहनों की डिलीवरी होगी। ग्राहक कम बजट वाली कारों पर टूट पड़ रहे हैं। आलम यह कि इस बार 10 लाख रुपये तक कीमत वाली कारों की बुकिंग सबसे ज्यादा है। मारुति, महिंद्रा समेत अन्य कंपनियों की 2,000 से अधिक कारों की डिलीवरी नवरात्र में होने की तैयारी है। रजिस्ट्रेशन की तैयारियां दोपहिया वाहन डीलरों के अनुसार, एक सामान्य डीलरशिप से नवरात्र के दौरान औसतन 50 से 150 वाहनों की डिलीवरी होने की उम्मीद है। मांग को देखते हुए कई डीलरशिप पर डिलीवरी और पंजीकरण की तैयारियां बढ़ा दी गई हैं। धनतेरस पर भी बंपर डिलीवरी की उम्मीद नवरात्र के बाद धनतेरस पर ऑटोमोबाइल बाजार में वाहनों की बिक्री और डिलीवरी बढ़ने की उम्मीद है। पितृपक्ष समाप्त होने के बाद त्योहारी सीजन में प्री-बुकिंग और एडवांस बुकिंग में भी तेजी आने की संभावना है। डीलरों और वाहन कंपनियों ने त्योहारी मांग को देखते हुए स्टॉक और डिलीवरी की तैयारियां शुरू कर दी हैं। डिलीवरी की तैयारी पिछले साल से अधिक परिवहन विभाग के अनुसार, पिछले साल नवरात्र में 8,700 से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ था। इनमें दोपहिया वाहनों की संख्या अधिक थी। इस बार डीलरशिप पर बुकिंग और डिलीवरी की तैयारियां पिछले साल से अधिक हैं। कुछ शोरूम का समय बढ़ाकर रात नौ बजे तक किया गया है। वाहनों की संख्या को देखते हुए आरटीओ और डीलरशिप ने पंजीकरण प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की है।

जमानत कानून पर सुप्रीम कोर्ट को सलाह देना जज को पड़ा महंगा, शीर्ष अदालत ने मांगी सफाई

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के एक जज के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है. दरअसल, जज ने सुप्रीम कोर्ट को जमानत कानून को लेकर बिन मांगी सलाह दे दी थी. कोर्ट ने इस मामले में रजिस्ट्री को संबंधित जज से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया है. मामला पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का है. यहां बारासात के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एक आपराधिक मामले की सुनवाई कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में इस मामले की सुनवाई तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था. तीन महीने की तय अवधि में ट्रायल पूरा नहीं हो सका. इसके बाद जज ने 11 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार को एक पत्र लिखा. इसमें ट्रायल पूरा करने के लिए और समय मांगा गया. जज ने पत्र में बताया कि मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है. लेकिन लेटर के आखिरी दो पैराग्राफ में उन्होंने जमानत को लेकर SC को सलाह दे दी. उन्होंने लिखा कि यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उच्च अदालत को किन मामलों में जमानत देनी चाहिए और किन मामलों में जमानत नहीं देनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी जज के इस पत्र पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ काफी असहज हुई. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस पर कड़ी टिप्पणी की. पीठ ने कहा कि ट्रायल जज ने जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर अतिरिक्त समय मांगा, उससे वह काफी परेशान है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी पीठासीन अधिकारी का काम सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह देना नहीं है कि उसे कब जमानत देनी चाहिए और कब नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने पत्र की भाषा और उसमें दी गई सलाह पर गंभीर आपत्ति जताई. कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि संबंधित जज से जल्द से जल्द स्पष्टीकरण मांगा जाए. कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि आखिर जज ने इस तरह की टिप्पणी क्यों की. अब जज के जवाब के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा. इसी तरह के एक दूसरे मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के जजों को अहम सलाह दी है. जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने जमानत याचिकाओं की सुनवाई को लेकर टिप्पणी की. पीठ ने कहा कि जजों को अपने निजी नैतिक विचार या व्यक्तिगत मूल्य फैसलों पर नहीं थोपने चाहिए. जमानत याचिका पर फैसला कानून और मामले के तथ्यों के आधार पर होना चाहिए. कोर्ट की इस टिप्पणी का मतलब साफ है कि जमानत जैसे मामलों में न्यायिक फैसले व्यक्तिगत सोच से नहीं, बल्कि कानून और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होने चाहिए.  

सत्यभामा पर स्टालिन की टिप्पणी को लेकर विवाद, CM विजय ने की आलोचना; TVK ने चुनाव आयोग में की शिकायत

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर तीखा हमला बोला है। दरअसल, स्टालिन ने टीवीके उम्मीदवार सत्यभामा को निशाना साधते हुए उन्हें सोमरसॉल्ट भामा कहा था और टीवीके पर सवाल उठाए थे। इसके बाद, टीवीके ने पूर्व मुख्यमंत्री पर महिला दलित उम्मीदवार की बॉडी-शेमिंग करने का आरोप लगाया और माफी की मांग की। उन्होंने स्टालिन को लेकर कहा कि तमिलनाडु और निर्वाचन क्षेत्र की जनता से करारा जवाब मिलेगा। तमिलनाडु के लोगों ने हमेशा यह गहराई से महसूस किया है और पहचाना है कि डीएमके की जड़ों और दिमाग में अश्लीलता, वहशीपन और बदमाशी भरी हुई है। विजय ने स्टालिन पर हमला करते हुए उनकी टिप्पणियों को असभ्य बताया। विजय ने एक्स पर पोस्ट किया, "धारापुरम निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव के लिए एक प्रचार जनसभा की आड़ में, डीएमके जैसी बुरी ताकत के नेता स्टालिन ने एक बदनाम करने वाली और पूरी तरह से असभ्य सभा की है। हमारी धारापुरम निर्वाचन क्षेत्र की उम्मीदवार, बहन श्रीमती सत्यभामा के बारे में उन्होंने मजाक उड़ाया है और बहुत ही अभद्र तरीके से बात की है जिससे उन्हें अजीब मजा आ रहा है।" महिलाओं पर कमेंट करने के मामले में DMK को बार-बार गलत बोलने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि लोग पार्टी को नहीं भूलेंगे। विजय ने कहा, ''ये बुरी ताकतें, जो महिलाओं के बारे में गंदी बातें करने में माहिर हैं और वह भी तब जब महिलाएं उनके ठीक बगल में बैठी हों, उन्हें तमिलनाडु और धारापुरम चुनाव क्षेत्र के लोगों से करारा जवाब मिलेगा।" विजय ने कहा कि स्टालिन ने गर्व से कहा है और खुशी-खुशी माना है कि यह कोई और नहीं बल्कि खुद मिस्टर मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन हैं, जिन्होंने डीएमके की तरफ से गाली-गलौज, वहशीपन और बेईमानी की नदी बहाई और बनाई है। उन्होंने इस बारे में एक कबूलनामा भी दिया है। डीएमके के सदस्य डेमोक्रेसी के खिलाफ हैं। उन्होंने आगे कहा, 'ये बुरी ताकतें जो महिलाओं के बारे में अश्लील बातें करने में माहिर हैं और वह भी तब जब महिलाएं उनके ठीक बगल में बैठी हों, और उन्हें उनकी नफरत का एहसास भी न हो, उन्हें तमिलनाडु के लोगों और धारापुरम चुनाव क्षेत्र के लोगों से करारा जवाब मिलेगा। तमिलनाडु की महिलाओं का बेटा, भाई और छोटा भाई होने के नाते, मैं इस बुरी ताकत डीएमके की कड़ी निंदा करता हूं, जो महिलाओं के बारे में अश्लील बातें करती रहती है। स्टालिन उपचुनाव वाले धारापुरम में प्रचार कर रहे थे, जहां उन्होंने सत्ताधारी टीवीके पर हमला किया। उन्होंने हॉर्स ट्रेडिंग और AIADMK में फूट डालने की साजिश बताया।

वृंदावन से गायब बच्चों की तलाश तेज: प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंच रहे परेशान परिजन

लखनऊ प्रेमानंद महाराज के आश्रम से लापता बताया जा रहा हाथरस के सादाबाद का 16 वर्षीय किशोर अनुज चौधरी को हाथरस पुलिस ने बरसाना के एक आश्रम से सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस द्वारा किशोर से पूछताछ की जा रही है। अनुज के लापता होने का आरोप लगाते हुए उसके परिवारवालों ने वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के आश्रम के बाहर धरना शुरू कर दिया था। पुलिस ने खोजबीन का आश्वासन देकर किसी तरह परिवारीजनों को शांत कराया और धरना खत्म कराया था। उधर, संत प्रेमानंद के राधा केलि कुंज आश्रम पर कई ऐसे लोग पहुंचने लगे हैं, जो अपने बच्चों के गायब होने का दावा कर रहे हैं। शनिवार को कासगंज, महाराष्ट्र और बड़ी आटस के रहने वाले किशोरों के परिवारीजन आश्रम के बाहर पहुंचे। उन्होंने अपने बच्चों की सकुशल वापसी की मांग की। बता दें कि सादाबाद के गांव बरामई खेड़ा के रहने वाले राजवीर चौधरी का बेटा अनुज (17) तीन जुलाई को वृंदावन के लिए निकला था। 26 जून को संत प्रेमानंद से दीक्षा लेने के बाद वो घर लौट गया था। तीन जुलाई को फिर वृंदावन आ गया। तब से अनुज के परिजन उसे तलाश रहे थे। शुक्रवार को अनुज के परिजनों संग बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रेमानंद के राधा केलि कुंज आश्रम के बाहर धरना दिया था। करीब आठ घंटे बाद रात आठ बजे पुलिस के आश्वासन के बाद धरना खत्म किया था। शनिवार अनुज की सकुशल बरामदगी की ख़बर सामने आ गई। अनुज के परिजनों के अनुसार सादाबाद पुलिस ने अनुज को बरसाना के एक आश्रम से बरामद किया है। हालांकि पुलिस द्वारा इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सादाबाद इंस्पेक्टर विजय सिंह ने बताया कि किशोर को बरसाना से सकुशल बरामद कर लिया है। लापता बच्चों के घरवाले पहुंच रहे हैं आश्रम, सकुशल वापसी की मांग संत प्रेमानंद के राधा केलि कुंज आश्रम पर अब कई लोग ऐसे पहुंचने लगे हैं, जिनके बच्चे गायब हैं। शनिवार को कासगंज, महाराष्ट्र और बड़ी आटस के रहने वाले किशोरों के परिजन आश्रम के बाहर पहुंचे और अपने बच्चों की सकुशल वापसी की मांग की। बताया जाता है कि कासगंज का रहने वाला मयंक सिंह चौहान पिछले सात अगस्त को वृंदावन आने की कहकर अपने घर से निकला था। जिसका काफी प्रयास के बाद भी कोई पता नहीं लग सका है। मयंक के पिता चंद्रपाल सिंह ने बताया कि पिछले कुछ समय से मयंक सिर्फ प्रेमानंद महाराज की बातें करता था। पॉलीटेक्निक प्रथम वर्ष के छात्र मयंक तीन भाई बहनों में दूसरे नंबर का बच्चा है। पिता के अनुसार पूरा परिवार मयंक के गायब होने से परेशान है। इसी तरह की पीड़ा महाराष्ट्र की उज्वला ताक पिरे की है। 21 जुलाई से लापता है ओम परमेश्वर उन्होंने बताया कि उनका 20 वर्षीय बेटा ओम परमेश्वर 21 जुलाई से लापता हैं। वो वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के दर्शनों की कहकर अपने घर से निकला था। 23 जुलाई को उसकी मां वृंदावन पहुंची और बेटे की तलाश शुरू कर दी। उज्वला ताकपिरे का कहना है कि उसे आश्रम के सीसीटीवी फुटेज में ओम परमेश्वर के होने की जानकारी मिली थी। लेकिन उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा है। उज्वला अपने बेटे की तलाश में कई बार महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर से वृंदावन आ चुकी है। संभाजी नगर में उसकी गुमशुदगी का मामला दर्ज है। इसी तरह समीपवर्ती देवी आटस निवासी किशोरलाल का 14 वर्षीय बेटा नवनीत भी 10 सितम्बर से गायब है। नवनीत के परिजन भी उसे ढूंढने राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचे थे।

गांवों की सरकार के लिए घमासान: चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले राजस्थान में राजनीतिक दलों की घेराबंदी

जयपुर राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ी हलचल ग्रामीण अंचलों से सामने आ रही है, जहां शहरी निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद अब सारा फोकस पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों पर टिक गया है। चुनाव की तारीखों के आधिकारिक ऐलान से ठीक पहले प्रदेश की दोनों प्रमुख सियासी पार्टियों- भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने गांवों की सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए अंदरखाने अपनी पूरी ताकत झोंकना शुरू कर दिया है। दोनों ही दलों की इस अचानक बढ़ी सक्रियता ने राज्य की ग्रामीण राजनीति में एक नया और दिलचस्प रोमांच पैदा कर दिया है, जिससे हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार गांवों का ऊँट किस करवट बैठेगा। जमीनी स्तर पर राजनीतिक तापमान तेजी से उबल रहा है और दोनों दल कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों और मजबूत संगठन तंत्र के बल पर गांवों में सेंध लगाने की फिराक में है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी अपनी पुरानी रणनीतियों को दरकिनार कर पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतर चुकी है। इस छिपी हुई रस्साकशी और गुप्त रणनीतियों के बीच आइए जानते हैं कि आखिर चुनावी घोषणा से ठीक पहले गांवों की सियासत के इन परदे के पीछे क्या कुछ पक रहा है। पंचायती राज के रण में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और पार्टी का पूरा संगठन तंत्र इस वक्त मैदान में सक्रिय हो चुका है। रणनीतिक रूप से उठाए गए एक बड़े कदम के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महज कुछ ही दिनों के अंतराल में राज्य के 19 जिलों का ताबड़तोड़ दौरा कर डाला। इन दौरों का मकसद केवल सरकारी योजनाओं का लोकार्पण या शिलान्यास करना भर नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सियासी संदेश छिपा था—सीधे तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर जमीनी फीडबैक लेना। इन तूफानी दौरों में ब्यावर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, खैरथल-तिजारा, कोटा, झालावाड़, अजमेर, बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर, फलोदी, सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे संवेदनशील जिले शामिल रहे। सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के पांच दिग्गज नेताओं ने भी राज्य के 23 जिलों और विभिन्न संगठनात्मक जोन में कमान संभाल रखी है। राधा मोहन दास अग्रवाल: राष्ट्रीय महामंत्री एवं राजस्थान प्रभारी ने खैरथल-तिजारा, अलवर, भरतपुर और दौसा में गुप्त और महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकें कीं। मदन राठौड़: प्रदेश अध्यक्ष ने टोंक, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा और राजसमंद का दौरा कर जमीनी तैयारियों के पेंच कसे। अन्य वरिष्ठ नेता: प्रदेश सह प्रभारी विजया राहटकर, राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी और संगठन महामंत्री अजय कुमार ने भी मोर्चे पर डटकर अंदरूनी हालात की समीक्षा की। कांग्रेस की रणनीति: जिलों और संभागों में घेराबंदी दूसरी ओर, हालिया नगरीय निकाय चुनावों के नतीजों से सबक लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और चुनाव की घोषणा से पहले ही संगठन को पूरी तरह एक्टिव मोड में ला दिया है। पार्टी ने इस बार केवल कागजी बैठकों के बजाय सीधे धरातल पर उतरकर जिला और संभाग स्तर पर विशाल सभाएं करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इन सभाओं में पार्टी के तमाम शीर्ष और कद्दावर नेता खुद शिरकत करेंगे, ताकि कार्यकर्ताओं के मुरझाए चेहरों में नया जोश भरा जा सके और उन्हें चुनावी वैतरणी पार करने के लिए तैयार किया जा सके। इस आक्रामक रणनीति की शुरुआत नागौर के डेगाना से हो चुकी है, जिसके बाद बीकानेर में भी शक्ति प्रदर्शन किया गया। पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से चार अलग-अलग चरणों में ऐसे कार्यक्रमों का पूरा खाका तैयार किया है। कांग्रेस के प्रमुख चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट सहित तमाम दिग्गज नेता अलग-अलग जिलों और संभागों में जाकर न केवल कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं, बल्कि टिकट वितरण और संभावित प्रत्याशियों को लेकर अभी से अंदरखाने गुणा-भाग बिठाने में जुट गए हैं। आमने-सामने के दावे और सियासी रोमांच मैदान में उतरी दोनों ही पार्टियों के बयानों से साफ जाहिर है कि इस बार का पंचायत चुनाव किसी जंग से कम नहीं होगा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का दावा है कि राज्य और केंद्र सरकार के विकास कार्यों और अनुशासित संगठन की बदौलत ग्रामीण जनता एक बार फिर भगवा पर ही भरोसा जताएगी। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का पलटवार है कि गांवों की जनता मौजूदा सरकार की कार्यशैली से त्रस्त है और जनता का यह छिपा हुआ गुस्सा इस चुनाव में बड़ा उलटफेर करेगा। बहरहाल, आचार संहिता लगने से ठीक पहले इन राजनीतिक चालों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का पंचायती राज चुनाव बेहद रोमांचक और कड़े संघर्ष वाला होने वाला है।  

एशियन गेम्स में नीरू ढांडा का जलवा: तीन पदक जीतकर रचा इतिहास, मिला बड़ा सम्मान

नई दिल्ली जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत का परचम लहराने वाली स्टार निशानेबाज नीरू ढांडा को एक और बहुत बड़ा सम्मान मिला है। ट्रैप शूटिंग में अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से देश का सिर गर्व से ऊंचा करने वाली नीरू को 4 अक्टूबर को होने वाले समापन समारोह के लिए भारतीय दल का आधिकारिक ध्वजवाहक चुना गया है। नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में नीरू तिरंगा थामकर भारतीय दल की अगुवाई करेंगी। एक ही एशियन गेम्स में नीरू के नाम रहे तीन-तीन मेडल आइची-नागोया खेलों में नीरू का सफर बेहद शानदार और यादगार रहा है। उन्होंने प्रतियोगिता में अपने सटीक निशानों के दम पर एक नहीं बल्कि पूरे तीन पदक (दो गोल्ड और एक सिल्वर) भारत की झोली में डाले। नीरू ने अपने पदक अभियान का आगाज महिलाओं की टीम ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर किया था। इसके बाद उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में जिस तरह का प्रदर्शन किया उसने उन्हें एशियाई खेलों के इतिहास में अमर कर दिया। पहला गोल्ड जीतकर बनाया कीर्तिमान टीम इवेंट में सिल्वर जीतने के बाद नीरू ढांडा का असली जादू व्यक्तिगत स्पर्धा में देखने को मिला। उन्होंने फाइनल में बेहतरीन लय बरकरार रखते हुए गोल्ड पर निशाना साधा। इसके साथ ही वह एशियाई खेलों के इतिहास में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बन गईं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने भारतीय निशानेबाजी के लिए एक नया अध्याय लिख दिया। एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ जीता दूसरा गोल्ड व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐतिहासिक सोना जीतने के बाद भी नीरू का जलवा थमा नहीं। उन्होंने मिक्सड टीम ट्रैप स्पर्धा में साथी निशानेबाज कीनन चेनाई के साथ मिलकर एक और स्वर्णिम सफलता हासिल की। भारतीय जोड़ी ने फाइनल मुकाबले में 34 का स्कोर बनाकर कतर (32 अंक) को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया, जबकि चीन (23 अंक) को कांस्य से ही संतोष करना पड़ा। इस मुकाबले में नीरू और कीनन की जोड़ी ने एशियाई खेलों का नया रिकॉर्ड भी कायम किया।