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उत्तर प्रदेश में बढ़ेगा EV चार्जिंग नेटवर्क, 238 स्थानों पर स्टेशन मंजूर; दूसरे चरण में 1,500 का लक्ष्य

लखनऊ उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग की टेंशन खत्म होने वाली है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश में 238 स्थानों पर नए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की मंजूरी दे दी गई है। प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत यूपी रिन्यूएबल एनर्जी डवलपमेंट एजेंसी (यूपीआरईवी) चार्जिंग स्टेशन विकसित कर रहा है। योजना के मौजूदा चरण में 238 स्थान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 99 स्थानों के लिए समझौता ज्ञापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 139 स्थानों पर समझौता ज्ञापन लंबित है। एनसीआर में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में 39, गाजियाबाद में 6 और मेरठ में 35 स्थान चार्जिंग स्टेशन होंगे। गैर-एनसीआर क्षेत्र में आगरा 21, प्रयागराज 13, गोरखपुर 32, कानपुर 12, कानपुर देहात 2, लखनऊ 36, मथुरा 14 और वाराणसी 28 स्थान प्रस्तावित हैं। कुल 238 स्वीकृत स्थानों में 99 पर समझौता ज्ञापन हो चुके हैं। दूसरे चरण में 1500 स्थानों का रखा गया लक्ष्य चार्जिंग स्टेशन लगाने के दूसरे चरण में एनसीआर के आठ जिलों और माल परिवहन गलियारे को ध्यान में रखते हुए कुल 1,500 स्थानों का लक्ष्य रखा गया है। इनमें नगर निगमों, यूपी रोडवेज, परिवहन विभाग, विद्युत वितरण कंपनियों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों समेत विभिन्न विभागों के स्थान शामिल हैं। इसके तहत अब तक 240 स्थानों की पहचान की जा चुकी है, जबकि 1,260 स्थानों की पहचान की जानी है। दूसरे चरण के तहत नगर निगम क्षेत्रों के लिए कुल 129 स्थान चिह्नित हैं। अलीगढ़ 22, अयोध्या 13, बरेली 16, फिरोजाबाद 15, झांसी 16, मुरादाबाद 7, सहारनपुर 5, शाहजहांपुर 10, आगरा 8, कानपुर नगर 11, मेरठ 5 तथा कानपुर देहात का एक स्थान शामिल है। इसके अलावा रोडवेज के लिए 74, गीडा के लिए 10 और विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 26 स्थानों की पहचान की गई है। मुख्य सचिव ने सभी डीएम को दिए आदेश चार्जिंग स्टेशन लगाने की इस योजना में मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, औद्योगिक क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के औद्योगिक पार्कों, विश्वविद्यालयों, गन्ना संस्थान केंद्रों, मंडी समितियों तथा जिलाधिकारी कार्यालय, विकास भवन और तहसील कार्यालयों जैसे स्थानों को भी शामिल किया गया है। प्रस्तावित सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में 60 किलोवाट क्षमता के दो डीसी चार्जर और 12 किलोवाट क्षमता के एक एसी/डीसी चार्जर की व्यवस्था होगी। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थलों, बड़े कार्यालयों, बस स्टेशनों, इंडस्ट्रियल पार्कों, शिक्षण संस्थानों, मॉल, ढाबों, पार्किंग स्थलों पर स्थान चिह्नित कर जल्द से जल्द सूचना भेजें।

‘कांग्रेस चुनाव जीते तो आयोग ठीक, हारे तो खराब’, चुनाव आयोग विवाद पर शिवराज सिंह चौहान का पलटवार

नई दिल्ली चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ विवाद थमने का नहीं ले रहा है। जहां एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग और पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है, वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए मामले में अपनी सफाई देने में लगे हैं। इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। जनादेश का अपमान करना कांग्रेस की पुरानी आदत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हारने पर जनादेश का अपमान करना, यह कांग्रेस की पुरानी आदत है, कांग्रेस के डीएनए में है। भारत दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र है और दुनिया उदाहरण देती है भारत के लोकतंत्र की। लेकिन लोकतंत्र का अपमान करना, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना, चुनाव हारने पर चुनाव आयोग को बदनाम करना, जनता के जनादेश का अपमान करना, यह कांग्रेस के डीएनए में है। कांग्रेस चुनाव जीत जाए तो ECI ठीक नहीं तो… उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी जी के इशारे पर मल्लिकार्जुन खरगे जी ने प्रधानमंत्री जी को, गृह मंत्री जी को अवैध कहा। यह लोकतंत्र का अपमान है, यह जनादेश का अपमान है, यह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना है, यह लोकतंत्र के प्रति अनास्था पैदा करना है, यह देश में अराजकता फैलाने का प्रयास है। यह कैसी बात करती है कांग्रेस? कांग्रेस चुनाव जीत जाए तो चुनाव आयोग ठीक, और हार जाए तो चुनाव आयोग खराब। 1980-1990 में हुए चुनावों का किया जिक्र केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस कहती है कि मतपत्रों (बैलेट पेपर) के आधार पर चुनाव हो। याद कीजिए 80 और 90 का वह दशक जब बूथ लूट लिए जाते थे, एक व्यक्ति ठप्पा लगा देता था मतपत्रों पर। क्या कांग्रेस उसी दौर में देश को ले जाना चाहती है? टेक्नोलॉजी, जिसके कारण पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से चुनाव होते हैं। आखिर उसका विरोध कांग्रेस क्यों करना चाहती है? लोकतंत्र को कमजोर करने का पाप नहीं कर रही, पहले भी कर चुकी है आपातकाल लगाकर।

जलभराव और जल संकट से निपटने के लिए भिलाई में शुरू होगा ड्रोन सर्वे और जीआईएस मैपिंग

भिलाई  जलभराव, जल निकासी और भूजल संरक्षण की समस्याओं से निपटने के लिए भिलाई नगर निगम एकीकृत शहरी जल प्रबंधन योजना तैयार कर रहा है। इसमें ड्रेनेज, वर्षाजल संरक्षण, भूजल रिचार्ज, पेयजल, सीवरेज और जल गुणवत्ता को एक साथ शामिल किया जाएगा। जीआईएस मैपिंग, ड्रोन सर्वे और फील्ड डेटा के आधार पर शहर की जल संरचनाओं और निकासी व्यवस्था का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। इससे जलभराव वाले क्षेत्रों और उनके कारणों की पहचान कर सुधार कार्यों की प्राथमिकता तय की जा सकेगी। 80 वर्ग किमी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे योजना के तहत 75 से 80 वर्ग किमी क्षेत्र और करीब 350 किमी सड़क व ड्रेनेज कॉरिडोर का ड्रोन सर्वे प्रस्तावित है। सर्वे के आंकड़ों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर शहर के जल प्रबंधन की एकीकृत तस्वीर तैयार की जाएगी। पेयजल-सीवरेज की भी होगी निगरानी जीआईएस मैपिंग से पेयजल लाइनों और सीवरेज के संभावित क्रॉस-कनेक्शन, लीकेज और संदूषण वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। 24 चिह्नित बोरवेल सहित चयनित स्थानों से पानी के नमूनों की जांच भी कराई जाएगी। जलभराव वाले स्थानों की होगी जियो-टैगिंग जलभराव वाले क्षेत्रों की जियो-टैगिंग कर ड्रेनेज क्षमता, रुकावट, अतिक्रमण और निकासी में आने वाली बाधाओं को चिह्नित किया जाएगा। इसके आधार पर सुधार कार्यों की योजना तैयार की जाएगी। बारिश का पानी जमीन में उतारने पर जोर नगर निगम बारिश के पानी को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज वेल और रिचार्ज पिट विकसित करने की संभावनाएं तलाशेगा। उपयुक्त स्थानों पर ऐसी संरचनाएं बनाकर बारिश के पानी को सीधे नालियों में बहने से रोका जाएगा। इससे वर्षाजल का उपयोग भूजल रिचार्ज में होगा और भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी। नगर निगम आयुक्त सुरुचि सिंह के मुताबिक, जलापूर्ति, ड्रेनेज, वर्षाजल, भूजल, सीवरेज और जल गुणवत्ता को एकीकृत रूप से देखने की जरूरत है। जीआईएस, ड्रोन सर्वे और फील्ड डेटा से तैयार डिजिटल डेटाबेस के आधार पर समस्याओं की पहचान कर प्राथमिकता के साथ समाधान की योजना बनाई जा सकेगी।

पीसीबी में शामिल होने की खबरों को शोएब अख्तर ने बताया पूरी तरह फर्जी

नई दिल्ली  पाकिस्तान क्रिकेट टीम के इंग्लैंड के हाथों टेस्ट सीरीज में 0-3 से करारी शिकस्त झेलने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के कोचिंग और सेलेक्शन सेट-अप में बड़े बदलावों की चर्चाएं तेज थीं। मीडिया में यह दावों के साथ कहा जा रहा था कि रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को पाकिस्तान का नया चीफ सेलेक्टर बनाया जा सकता है। हालांकि, अब खुद शोएब अख्तर ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पीसीबी में किसी भी पद पर शामिल होने की कोई दिलचस्पी नहीं है। अम्मी ने कहा- बोर्ड और राजनीति से रहूंगा दूर एक टीवी चैनल पर सीधे पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अख्तर ने अपनी पुरानी बात को याद किया। जब एंकर ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने कभी कहा था कि उनकी मां ने उन्हें पीसीबी और पाकिस्तानी राजनीति से दूर रहने की हिदायत दी थी तो अख्तर ने रुख साफ करते हुए कहा, 'इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है यह सब सिर्फ अटकलें हैं। मैं अपनी बात पर कायम हूं और अपनी अम्मी की दी हुई उसी सलाह का पालन करूंगा।' चीफ सेलेक्टर बनने की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं शोएब अख्तर ने पीसीबी का मुख्य चयनकर्ता बनने के दावों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, 'मेरी पीसीबी में जाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे चीफ सेलेक्टर की जिम्मेदारी मिलने को लेकर जो खबरें सुनने को मिल रही हैं, वे पूरी तरह फर्जी हैं। इन दावों में दूर-दूर तक कोई सच्चाई नहीं है। मैं बस इतना चाहता हूं कि पाकिस्तान क्रिकेट का भला हो।' उन्होंने यह भी साफ किया कि वह फिलहाल एक निजी दौरे पर ह्यूस्टन में हैं और उनकी बोर्ड चेयरमैन मोहसिन नकवी से इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई है। देश के लिए योगदान देने के कई और रास्ते पाकिस्तान के लिए 46 टेस्ट, 163 वनडे और 15 टी20 मैच खेलने वाले इस दिग्गज तेज गेंदबाज का मानना है कि देश के क्रिकेट को आगे ले जाने के लिए किसी आधिकारिक पद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं अपने देश के क्रिकेट की सेवा करना पसंद करूंगा लेकिन मुझे लगता है कि मैं इसे बिना बोर्ड में शामिल हुए अन्य कई तरीकों से भी कर सकता हूं।'  

कैप्टन स्मित मछार के शौर्य पर सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को घेरा

नई दिल्ली दुबई से इजरायल जा रहे विमान में को-पायलट के हमले के दौरान यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मछार की बहादुरी की चारों ओर प्रशंसा हो रही है. राजनेता से लेकर फिल्म स्टार तक, हर कोई उनकी सराहना कर रहा है. लेकिन अब इस मामले ने सियासी मोड़ ले लिया है. बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने इस मामले में कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाया है. बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को इस बहादुरी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और यूपी कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव पर भी निशाना साधा. बीजेपी सासंद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी को कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी पर अपना रुख साफ करना चाहिए. उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मछार ने अद्भुत वीरता दिखाते हुए कई लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली. शीर्ष नेतृत्व चुप क्यों? सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से सीधे सवाल किया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अब तक कैप्टन स्मित मछार के बारे में एक शब्द भी क्यों नहीं कहा. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने अतीत में जाकिर नाइक, अफजल गुरु, बुरहान वानी और याकूब मेमम को लेकर अलग-अलग टिप्पणियां की थी और बाटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे. उन्होंने सवाल किया कि वे अब कैप्टन स्मित मछार की वीरता पर चुप क्यों हैं. बीजेपी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में जवाब मांगा है. इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है. उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कि उत्तर प्रदेश की जनता इसका जवाब देगी.

वेस्टइंडीज के बाद न्यूजीलैंड दौरे की तैयारी: भारत की वनडे टीम से कट सकता है इन तीन का पत्ता

नई दिल्ली वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में शानदार जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों की वनडे सीरीज खेलने की तैयारी में जुट गई है। हालांकि, न्यूजीलैंड दौरे से पहले भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज भी खेलनी है। सीनियर खिलाड़ियों की वापसी और स्क्वाड के समीकरणों को देखते हुए माना जा रहा है कि वेस्टइंडीज वनडे सीरीज में शामिल रहे कम से कम 3 खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इनमें से ज्यादातर खिलाड़ी बैकअप के रूप में टीम में शामिल किए गए थे। अंशुल कंबोज उभरते हुए तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज को प्रसिद्ध कृष्णा के चोटिल होने के बाद टीम में जगह मिली थी। तीसरे वनडे में कंबोज को डेब्यू का मौका तो मिला, लेकिन वे गेंद से कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। न्यूजीलैंड सीरीज तक प्रसिद्ध कृष्णा के फिट होकर लौटने की उम्मीद है, जिसके बाद कंबोज को बाहर बैठना पड़ सकता है। नमन धीर स्पिन ऑलराउंडर नमन धीर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मिला-जुला और औसत प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान वॉशिंगटन सुंदर की वनडे टीम में वापसी तय मानी जा रही है। सुंदर के आते ही नमन धीर को ऑलराउंडर स्लॉट से बाहर होना पड़ेगा।

राजस्थान में चार चरणों में होंगे पंचायती राज चुनाव, किसानों के लिए शुरू हुई विशेष पुरस्कार योजना

बीकानेर  राजस्थान में पंचायत चुनाव का एलान होने के बीच किसानों के लिए अच्छी खबर है। खेती में नए प्रयोग, आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन करने वाले किसानों को अब सम्मानित किया जाएगा। कृषि विभाग ने कृषि उन्नति योजना के कृषि विस्तार उपमिशन (आत्मा) के तहत पुरस्कार योजना शुरू की है। इसके तहत प्रत्येक पंचायत समिति से अलग-अलग कृषि गतिविधियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच किसानों का चयन किया जाएगा। पंचायत समिति स्तर पर कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन-डेयरी एवं मत्स्य पालन, जैविक खेती तथा नवाचारी खेती एवं कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन इन पांच श्रेणियों में एक-एक किसान चुना जाएगा। चयनित किसानों को पंचायत समिति, जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। आधुनिक तकनीक अपनाने वाले किसानों को प्राथमिकता चयन में उन किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो कृषि विभाग के निर्धारित 21 मूल मंत्रों की पालना करते हुए प्रमाणित बीज, बीज उपचार, कृषि यंत्रीकरण, विभागीय पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज और हाईटेक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर रहे हैं। पंचायत समिति से राज्य स्तर तक होगा चयन पंचायत समिति स्तर पर चयनित किसानों में प्रत्येक गतिविधि के दो-दो सर्वश्रेष्ठ किसानों को जिला स्तर के लिए चुना जाएगा। इस तरह जिला स्तर पर कुल 10 किसानों का चयन होगा। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों से चयनित किसानों में से प्रत्येक श्रेणी में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले किसानों सहित राज्य स्तर पर कुल 10 सर्वश्रेष्ठ किसानों को सम्मानित किया जाएगा। तीन स्तर पर मिलेगी पुरस्कार राशि चयनित किसानों को पुरस्कार राशि भी दी जाएगी। पंचायत समिति स्तर पर 10 हजार रुपए, जिला स्तर पर 25 हजार रुपए और राज्य स्तर पर 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। आत्मा योजना के तहत पूर्व वर्षों में पुरस्कृत किसानों का दोबारा चयन नहीं किया जाएगा। पुरस्कार के लिए योग्य किसानों के नाम स्वयं किसान, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, संस्था या कोई अन्य व्यक्ति प्रस्तावित कर सकता है। प्रस्ताव के साथ कृषि अथवा संबद्ध क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों का विवरण और पांच से सात फोटो देना जरूरी होगा। पंचायत चुनाव की घोषणा के बीच यह योजना किसानों के लिए अपने बेहतर कृषि कार्य और नवाचार को पहचान दिलाने का अवसर भी देगी। राजस्थान में चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, 23 अक्टूबर से मतदान शुरू राजस्थान में शनिवार को पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण का मतदान 23 अक्टूबर, दूसरे चरण का 29 अक्टूबर, तीसरे चरण का 4 नवंबर और चौथे चरण का मतदान 14 नवंबर को होगा। चुनाव परिणाम 20 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। 37 जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव 25 और 27 नवंबर को होंगे। 25 नवंबर को जिला प्रमुख और 27 नवंबर को प्रधान का चुनाव कराया जाएगा। वहीं 26 नवंबर को उपजिला प्रमुख तथा 28 नवंबर को उपप्रधान का चुनाव होगा। कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होगा। ऐसे में इन जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव बाद में कराया जाएगा। हालांकि यहां जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव अन्य जिलों के साथ ही होंगे। धनतेरस पर भी होगा मतदान सरपंचों के चुनाव भी चार चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण में 25 अक्टूबर, दूसरे चरण में 31 अक्टूबर, तीसरे चरण में 6 नवंबर और चौथे चरण में 16 नवंबर को मतदान होगा। तीसरे चरण में 3,605 ग्राम पंचायतों में धनतेरस के दिन वोट डाले जाएंगे। सरपंच और पंच चुनाव के नतीजे मतदान वाले दिन देर रात तक घोषित कर दिए जाएंगे। पंचायतीराज चुनाव में पुरुष मतदाताओं की हिस्सेदारी 51.82 प्रतिशत और महिला मतदाताओं की 48.18 प्रतिशत है। 41 जिलों में जयपुर में सबसे अधिक 18.99 लाख मतदाता हैं, जबकि जैसलमेर में सबसे कम 4.36 लाख मतदाता हैं। पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस बार मतदाताओं को महज दो दिन के अंतराल में दोबारा मतदान करना होगा। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए एक साथ वोटिंग होगी, जबकि इसके दो दिन बाद पंच और सरपंच के चुनाव के लिए फिर मतदान करना होगा।

संसदीय समितियों में बड़ा फेरबदल: टीएमसी से छिनी दो अध्यक्षता, सुधांशु त्रिवेदी को मिली कमान

नई दिल्ली संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों का शनिवार को पुनर्गठन किया गया। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न समितियों के अध्यक्षों में बदलाव किया। इस फेरबदल में तृणमूल कांग्रेस से दो अहम संसदीय समितियों की अध्यक्षता चली गई। वाणिज्य संबंधी समिति की जिम्मेदारी बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी को दी गई है, जबकि केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स समिति की अध्यक्ष काकोली घोष दस्तीदार बनी हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर को एक बार फिर से अहम जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें विदेश मामलों की समिति का फिर अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। गृह मामलों की समिति का अध्यक्ष एक बार फिर डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को बनाया गया है। टीएमसी की बागी सांसद ने छीनी अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर कोयला, खान और इस्पात से जुड़ी समिति के अध्यक्ष पद पर बरकरार रहेंगे। जेडीयू से राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा को एक बार फिर से परिवहन संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। वहीं, इस प्रक्रिया के दौरान ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद को बड़ा झटका लगा है। आजाद रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष थे, लेकिन इस साल उनके स्थान पर टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में टीएमसी की राज्यसभा सांसद डोला सेन की जगह इस साल भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी को नियुक्त किया गया है। इनको फिर मिली कमान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय समिति का प्रमुख फिर से नियुक्त किया गया। कांग्रेस सांसद चरणजीत चन्नी कृषि संबंधी समिति के प्रमुख बने रहेंगे। सपा सांसद राम गोपाल यादव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी समिति के अध्यक्ष पद पर बरकरार रहेंगे और कांग्रेस के मुकुल वासनिक को एक बार फिर से शिक्षा, महिला, बाल और युवा मामलों संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा उद्योग संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं और भाजपा के सुजीत कुमार कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष चुने गए हैं।

यूपी 5वां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य, भदोही के कालीन का बड़ा योगदान: मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रदेशवासियों से उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी साझा की। अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर सीएम ने लिखा कि भदोही का हुनर पहले अपनी राह तलाशता था, लेकिन आज सरकार उसके लिए विकास, बाजार और अवसर के नए द्वार खोल रही है। प्रदेश का निर्यात पिछले 10 वर्ष में लगभग 2.27 गुना बढ़कर ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश देश का 5वां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य है। इस निर्यात में भदोही के कालीन का बड़ा योगदान है। यूपी के हुनर का लोहा मनवा रहा भदोही का कालीन सीएम ने लिखा, जिन हाथों ने अपने हुनर से भदोही के कालीन को दुनिया तक पहुंचाया, वर्ष 2017 से पहले वही हाथ बुनियादी सुविधाओं और अवसरों के लिए प्रतीक्षा करते रहे। आज डबल इंजन सरकार में वही हुनर विकास और वैश्विक बाजार से जुड़ रहा है। हाथ से बने भदोही के कालीनों की मांग आज दुनिया में सबसे अधिक है, जो वैश्विक मंच पर उत्तर प्रदेश के हुनर का लोहा मनवा रहे हैं। निर्यातकों, विक्रेताओं एवं उद्यमियों से संवाद मुख्यमंत्री ने बताया कि वह आज एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हस्तनिर्मित कालीन व्यापार मेले 'इंडिया कारपेट एक्सपो' के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ कर कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं एवं उद्यमियों से संवाद करेंगे। कारीगर के हाथ को सम्मान, उद्यम को विस्तार, युवाओं को रोजगार और भदोही को समृद्धि, यही नए उत्तर प्रदेश में विरासत और विकास के संगम की नई पहचान है। तीन विधानसभा क्षेत्रों को मिलेगी विकास की सौगात मुख्यमंत्री ने लिखा कि इस अवसर पर भदोही, औराई एवं ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों को 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं की सौगात मिलेगी और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को हितलाभ प्रदान किए जाएंगे।

यूपी चुनाव की तैयारी: बीजेपी ने बदली मीडिया रणनीति, दोगुने किए गए प्रवक्ता

लखनऊ  वर्ष 2027 के विधान सभा चुनाव के लिए बयानों से लेकर इंटरनेट मीडिया तक पर छिड़ी जंग में भाजपा अब बढ़ी हुई ताकत के साथ विपक्ष के नैरेटिव की काट को जुटेगी। शनिवार को भाजपा ने अपनी नई मीडिया टीम घोषित कर दी है। इसमें प्रदेश प्रवक्ताओं की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। पहले के मुकाबले लगभग दोगुणा (16 से 31) प्रवक्ता बनाए गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी पदाधिकारियों की सूची में पार्टी ने 31 प्रदेश प्रवक्ताओं, 25 प्रदेश मीडिया पैनलिस्टों तथा विभिन्न क्षेत्रों के मीडिया संयोजकों और सह-संयोजकों की भी घोषणा की है। हिमांशु दुबे व दीपक बघेल को जहां प्रदेश मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं डॉ. समीर सिंह, नवीन श्रीवास्तव, डॉ. अंकुश त्रिपाठी, अवनीश त्यागी, संजय चौधरी, हीरो बाजपेयी, मनीष शुक्ला, लालजी निर्मल, प्रियंक पाण्डेय सहित 31 प्रदेश प्रवक्ता बनाए गए हैं। दो को मीडिया वाच की भी जिम्मेदारी दी गई है। क्षेत्रीय स्तर पर भी मीडिया संगठन को मजबूत किया गया है। पश्चिम क्षेत्र में गजेंद्र शर्मा जबकि संजय महेश्वरी, निमित्त जायसवाल और नितिन शर्मा को सह मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। ब्रज क्षेत्र में अंकित महेश्वरी को मीडिया संयोजक और अमित गुप्ता, शशि भूषण गुप्ता, श्याम सुंदर पराशर और नीशित शर्मा को सह मीडिया संयोजक बनाया गया है। कानपुर में अनूप अवस्थी मीडिया संयोजक और संजय सिंह सह मीडिया संयोजक होंगे। अवध में आकाश मिश्रा को मीडिया संयोजक तथा अमित वर्मा, सिद्धार्थ तिवारी, हिमालय वर्मा और दीपक तिवारी को सह मीडिया संयोजक बनाया गया है। काशी में मधुकर चित्रांश मीडिया संयोजक तथा संतोष सोलापुरकर और शैलेन्द्र मिश्रा सह मीडिया संयोजक होंगे। गोरखपुर में राहुल तिवारी मीडिया संयोजक तथा चंदन आर्य और समरेन्द्र विक्रम सिंह सह मीडिया संयोजक बनाए गए हैं।