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बेसिक शिक्षा परिषद ने बीएसए से प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच और एक्सेल डेटा मांगा

लखनऊ परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के विशेष परिस्थितियों में होने वाले अंतरजनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया फिलहाल दस्तावेजों की जांच में उलझ गई है। अधिकांश आवेदनों के साथ लगाए गए प्रमाणपत्र स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें पढ़ने और सत्यापित करने में दिक्कत आ रही है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) से प्रमाणपत्रों की प्रमाणित प्रतियां दोबारा भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जरूरी जानकारी एक्सेल शीट के माध्यम से भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए प्रदेशभर से करीब 7000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें शिक्षक दंपती, दिव्यांग, कैंसर से पीड़ित व डायलिसिस करा रहे शिक्षकों के आवेदन शामिल हैं। इन सभी आवेदनों की स्क्रूटनी (जांच) की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कई प्रमाणपत्र अस्पष्ट होने के कारण जांच पूरी करने में समय लग रहा है। स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना ऐसे में स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है। इस बीच परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। ऐसे में परिषद शिक्षक-छात्र अनुपात (पीटीआर) के आधार पर आवेदन के आधार पर इन शिक्षकों का स्थानांतरण करना चाहती है, ताकि जिन जिलों में शिक्षकों की कमी है वहां संतुलन बनाया जा सके। प्रदेश में 1.11 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 93.91 लाख विद्यार्थी और 3.03 लाख शिक्षक हैं। पूरे प्रदेश का औसत पीटीआर 31 है, लेकिन जिलों के बीच इसमें बड़ा अंतर है। इटावा में एक शिक्षक पर औसतन 17 विद्यार्थी हैं। वहीं श्रावस्ती में सबसे अधिक 71 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक है। विद्यार्थियों की संख्या के लिहाज से सीतापुर सबसे बड़ा जिला है, जहां 3.26 लाख विद्यार्थी, 10,275 शिक्षक और 2,970 विद्यालय हैं। इसके बाद बहराइच में 3.23 लाख और लखीमपुर खीरी में 3.02 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालयों की संख्या हरदोई में 2,825 और लखीमपुर खीरी में 2700 है। परिषद का प्रयास है कि स्थानांतरण के बाद जिलों के बीच शिक्षक-छात्र अनुपात को अधिक संतुलित बनाया जा सके।

लॉर्ड्स में बड़ा मुकाबला: भारत की किस्मत दांव पर, नेट रन रेट भी बनेगा अहम फैक्टर

नई दिल्ली आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है. ग्रुप-ए से सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दो टीमों का फैसला अब आखिरी दिन (28 जून) होगा. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने अब तक चार में से तीन मुकाबले जीतकर खुद को मजबूत स्थिति में जरूर रखा है, लेकिन सेमीफाइनल का टिकट अभी पक्का नहीं हुआ है. रविवार (28 जून) को क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स पर दो मुकाबले खेले जाएंगे. पहले मैच में बांग्लादेश का सामना साउथ अफ्रीका से होगा, जबकि दूसरे मुकाबले में भारत की टक्कर ऑस्ट्रेलिया से होगी. इन दोनों मैचों के नतीजे तय करेंगे कि सेमीफाइनल में कौन-कौन सी टीम पहुंचेगी. चारों ग्रुप मैच जीत चुकी ऑस्ट्रेलियाई टीम 8 अंकों और +4.724 के शानदार नेट रनरेट के साथ सेमीफाइनल के दरवाजे पर खड़ी है. दूसरी ओर भारत 6 अंकों और +2.268 नेट रन रेट के साथ दूसरे स्थान पर मौजूद है. साउथ अफ्रीका ने भी नीदरलैंड्स को 88 रन से हराकर अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है. ऐसे में ग्रुप-ए से दूसरे सेमीफाइनलिस्ट के लिए भारत और साउथ अफ्रीका के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है. भारत के लिए सबसे अच्छा और सीधा रास्ता ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत है. यदि भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को हरा देती है तो उसके 8 अंक हो जाएंगे. हालांकि इसके बाद भी कहानी खत्म नहीं होगी. अगर साउथ अफ्रीका भी बांग्लादेश को हरा देता है, तो दोनों टीमों के 8-8 अंक होंगे और फैसला नेट रनरेट से होगा. वहीं अगर बांग्लादेश साउथ अफ्रीका को हरा देता है, तो भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को रौंदकर सीधे सेमीफाइनल में पहुंच सकती है. ऑस्ट्रेलिया से हार तो क्या होगा? हालांकि ऑस्ट्रेलिया से हार की स्थिति में भारत 6 अंकों पर ही रहेगा. तब भारतीय टीम की नजरें पूरी तरह बांग्लादेश और साउथ अफ्रीका के मुकाबले पर टिकी होंगी. अगर बांग्लादेश साउथ अफ्रीका को हरा देता है, तो भारत और साउथ अफ्रीका बराबर अंकों पर रहेंगे. ऐसे में नेट रन रेट तय करेगा कि सेमीफाइनल में कौन जाएगा. लेकिन अगर साउथ अफ्रीका जीत जाता है, तो भारत का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा. इंग्लैंड के मौसम को देखते हुए बारिश की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अगर भारत और ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो जाता है, तो दोनों टीमों को एक-एक अंक मिलेगा. यानी भारत के 7 अंक हो जाएंगे. इस स्थिति में टीम इंडिया को बांग्लादेश की जीत की दुआ करनी होगी. यदि साउथ अफ्रीका अपना मैच जीत लेता है, तो भारत टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा. भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बात उसका नेट रनरेट है. बांग्लादेश पर मिली जीत के बाद भारत का नेट रन रेट +2.268 पहुंच गया है, जो साउथ अफ्रीका से बेहतर है. यही कारण है कि कई संभावित स्थितियों में भारत को बढ़त मिल सकती है. हालांकि टीम मैनेजमेंट किसी भी तरह के गणित पर निर्भर नहीं रहना चाहेगा. ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ जीत हासिल कर भारत अपने दम पर सेमीफाइनल का टिकट हासिल करना चाहेगा. अब लॉर्ड्स के मैदान पर भारतीय टीम की सबसे बड़ी परीक्षा होनी है. कप्तान हरमनप्रीत कौर, सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना, ऑलराउंडर शेफाली वर्मा और मिडिल ऑर्डर बैटर जेमिमा रोड्रिग्स जैसे खिलाड़ियों पर बड़ी जिम्मेदारी होगी. वहीं गेंदबाजी विभाग से भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी.

राजस्थान में किसानों की आय बढ़ाने के लिए मशरूम खेती पर विशेष अभियान, व्यापक प्रशिक्षण की योजना

उदयपुर  कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने उदयपुर संभाग के दौरे के दौरान कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि में नवाचार, प्राकृतिक खेती तथा उच्च मूल्य वाली फसलों को प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी जिलों में मशरूम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा तथा किसानों को व्यापक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। उदयपुर संभाग के कृषि अधिकारियों की समीक्षा बैठक में आयुक्त ने निर्देश दिए कि Farmers Fertilisers Framework (FFS) को संभाग के सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा, ताकि उर्वरकों का पारदर्शी, वैज्ञानिक एवं प्रभावी वितरण सुनिश्चित हो सके और किसानों को समय पर आवश्यक सुविधाएं मिलें। बैठक में कृषि शिक्षा को अधिक सशक्त बनाने पर भी जोर देते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि राजकीय कृषि महाविद्यालयों के व्याख्याता आधुनिक तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करें, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नियमित शिक्षा उपलब्ध हो सके।  गोयल ने प्रताप विश्वविद्यालय को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए, जिससे कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कौशल विकास को नई गति मिल सके। दौरे के दौरान उन्होंने मशरूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित गतिविधियों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन तथा मशरूम उत्पादन के संबंध में अधिक से अधिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। आयुक्त कृषि ने कहा कि कृषि विभाग का लक्ष्य किसानों तक नई तकनीक, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण एवं बेहतर सेवाएं पहुंचाकर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। इसके लिए सभी अधिकारी योजनाओं का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

गर्मियों में स्किन के लिए खीरे के 3 फेस मास्क, टैनिंग और रूखेपन से मिलेगी राहत

गर्मियों के मौसम में तेज धूप और पसीने की वजह से स्किन से जुड़ी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं. इसके कारण चेहरे पर टैनिंग, रूखापन और जलन जैसी परेशानियां होने लगती हैं. ऐसे में इस मौसम में स्किन की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. इस मौसम में स्किन को अंदर से ठंडक और पोषण देने के लिए खीरा सबसे बेस्ट और नेचुरल उपाय है. खीरे में भरपूर मात्रा में पानी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो चेहरे को हाइड्रेट करने के साथ-साथ चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में भी मदद करते हैं. अगर आप भी इस सीजन में टैनिंग, स्किन में जलन या रूखेपन से परेशान हैं तो महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय घर पर खीरे से बने कुछ आसान फेस मास्क ट्राई कर सकते हैं. आइए जानते हैं इन्हें बनाने और इस्तेमाल करने का सही तरीका, ताकि आपकी स्किन गर्मियों में भी खिली-खिली और फ्रेश बनी रहे. टैनिंग को दूर करता है अगर गर्मियों में धूप की वजह से चेहरे पर टैनिंग हो गई है तो खीरा और दही का फेस मास्क आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए 2 इंच खीरे को कद्दूकस कर लें और उसे आधी कटोरी दही में मिला दें. अब इसमें आधा चम्मच बेसन मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर नॉर्मल पानी से चेहरा धो लें. चेहरे की जलन कम करने में मदद करता है स्किन में जलन या रेडनेस की समस्या होने पर एलोवेरा और खीरे का फेस मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए 1 चम्मच एलोवेरा जेल में 2 चम्मच कद्दूकस किया हुआ खीरा और आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी मिलाएं. इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर 15 मिनट तक लगाकर रखें. इसके बाद चेहरा धोकर जेल-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं. ग्लोइंग स्किन पाने में करता है मदद अगर आप नेचुरल तरीके से ग्लोइंग स्किन पाना चाहते हैं तो खीरे में बादाम का तेल और शहद मिलाकर फेस मास्क तैयार करें. इसे चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और 5 से 7 मिनट बाद धो लें. इससे स्किन सॉफ्ट बनी रहती है और चेहरे पर कुदरती निखार आता है. इन बातों का रखें ध्यान     किसी भी फेस मास्क का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, खासकर अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है.     बेहतर रिजल्ट के लिए इन फेस मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में कम से कम 2 बार जरूर करें.  

यूट्यूबर्स की बढ़ीं मुश्किलें, दूसरी FIR दर्ज; महिला से उगाही और वीडियो हटाने के बदले ₹2 लाख मांगने का आरोप

दुर्ग-भिलाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट विवाद में फंसे 2 यूट्यूबर्स सागर साहू और पुष्पराज सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। महिला की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और उगाही के आरोप में दूसरी FIR दर्ज की है। दरअसल, महिला ग्राहक सेवा केंद्र चलाती हैं। यूट्यूबर्स ने आरोप लगाया था कि वह ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर उनके अंगूठे का निशान लगवाकर खाते से पैसे निकाल लेती है। जबकि महिला का आरोप था कि यूट्यूबर्स ने बातचीत को तोड़-मरोड़कर वीडियो तैयार किया। पीड़िता का कहना है कि सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के बदले यूट्यूबर्स ने 50 हजार मांगे। 35 हजार रुपए देने के बाद वीडियो तो हटा दिया गया, लेकिन फिर से 2 लाख रुपए की डिमांड की, न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी यूट्यूबर्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामला पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र का है। हालांकि, दोनों ही आरोपी भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट मामले में जेल में हैं। ब्लैकमेलिंग की पूरी कहानी… जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता महिला नाम का नेहा मिश्रा है, जो उमदा की रहने वाली है और पिछले 5 सालों से वह गांव में ग्राहक सेवा केंद्र चलाती है। 25 जून को उसने पुरानी भिलाई थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया है कि कुछ समय पहले सागर साहू अपने साथी पुष्पराज सिंह के साथ आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराने के बहाने उनके दफ्तर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने बात को गलत तरीके से दिखाकर वीडियो बनाया और उसे खबर के रूप में वायरल किया। नेहा ने आरोप लगाया है कि 3 जून को वीडियो हटाने के बदले उनसे 50 हजार रुपए की मांग की गई। बदनामी के डर से उसने अपनी जमा पूंजी से 35 हजार रुपए आरोपियों को दे दिए। रकम मिलने के बाद वीडियो हटा दिया गया था। 2 लाख मांगे, नहीं देने पर नई वीडियो वायरल करने की धमकी यह भी आरोप है कि बाद में आरोपियों ने नेहा से फिर 2 लाख रुपए की मांग की। पैसे न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी गई। पैसे न देने पर आरोपियों ने 3 से अधिक अलग-अलग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इससे महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उन्हें अपने ग्राहक सेवा केंद्र जाने में भी शर्मिंदगी महसूस हो रही है। पीड़िता ने पुलिस से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस बोली- जांच के बाद करेंगे आगे की कार्रवाई पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने शिकायत की जांच के बाद शुरुआती तौर पर मामला दर्ज किया है। पुलिस ने सागर साहू और पुष्पराज सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तथ्यों और सबूतों के आधार पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 9 दिन पहले भी मामला दर्ज हुआ था यह पहली बार नहीं है जब दोनों यूट्यूबर्स के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई है। करीब 9 दिन पहले भी उनके खिलाफ एक और मामले में केस दर्ज किया गया था। यह मामला महादेव सट्टा ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर के कथित इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़े वायरल स्क्रीनशॉट से संबंधित था। सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम से एक मैसेज दिखाया गया था, जिसमें लिखा था- “नंबर भेजो अपना, बात करना चाहते हैं।” इसी स्क्रीनशॉट के आधार पर दोनों यूट्यूबर्स ने खबरें वायरल की थीं। भूपेश बघेल ने बताया था फर्जी कंटेंट वायरल चैट सामने आने के बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भिलाई-3 थाने पहुंचे थे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी वायरल चैट और उससे जुड़े कंटेंट को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनकी लीगल टीम फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

स्मार्टफोन को हर हफ्ते रीस्टार्ट करना क्यों है जरूरी, जानिए इसके बड़े फायदे

आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं. सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है. एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती. हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है. रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है. रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है. अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है. रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है. सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है. Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता. किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है. क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है. अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है. ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है.

मध्य प्रदेश में बाघों की मौत पर बड़ा खुलासा, हाईकोर्ट में NTCA ने माना- शिकार भी है बड़ी वजह

 जबलपुर  देशभर में बाघों की लगातार हो रही अप्राकृतिक मौतों के बीच राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने हाई कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाली स्वीकारोक्ति की है। अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारण अदालत में दायर हलफनामे में एनटीसीए ने स्पष्ट रूप से माना है कि संरक्षित बाघ अभ्यारण्यों तथा उनके आसपास बाघों की हालिया अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारणों में से एक है। स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया यह स्वीकारोक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक बाघों की मौतों को लेकर विभिन्न कारण सामने आते रहे थे, लेकिन कोर्ट के समक्ष स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया है। संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली की युगलपीठ के समक्ष यह हलफनामा उस जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत किया गया, जिसे वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दायर कर बाघ अभ्यारण्यों के भीतर और आसपास लगातार हो रही संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि अनेक मामलों में मौतें संगठित शिकार का परिणाम हैं। भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतर एनटीसीए ने अपने जवाब में कहा कि देश के बाहर बाघों के अंगों और उनसे निर्मित उत्पादों की अवैध मांग आज भी भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरों में शामिल है। यही कारण है कि इस चुनौती को प्राधिकरण ने अपनी सर्वोच्च संरक्षण प्राथमिकताओं में रखा है। राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहा है हलफनामे के अनुसार शिकार और वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं तथा सीबीआई, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, डब्ल्यूसीसीबी और संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वित अभियान संचालित किए जा रहे हैं। अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं मामले की अगली सुनवाई में अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं, बल्कि इस पर भी रहेगी कि देश के राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा के लिए घोषित रणनीतियां धरातल पर कितनी प्रभावी सिद्ध होती हैं।

राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम के तहत RCA में चुनाव प्रक्रिया में देरी, प्रशासनिक जांच बनी वजह

जयपुर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव अगले 3 महीने के लिए टल गए हैं. इस दौरान आरसीए की एडहॉक कमेटी का कार्यकाल बरकरार रहेगा. सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने आदेश जारी कर कार्यकाल को एक बार फिर अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि, इसमें चुनाव से जुड़ी एक और बड़ी अपडेट है. राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) (क) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए रजिस्ट्रार ने समिति की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया. विवादित मामलों को बताया चुनाव में देरी की वजह एडहॉक कमेटी के कार्यकाल बढ़ाने के पीछे कई अहम वजह बताई जा रही हैं. इसमें पूर्ववर्ती कार्यकारिणी की वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच करना शामिल है. इसके साथ ही राज्य के विभिन्न जिला स्तरीय खेल संघों के विवादित मामलों की जांच भी अभी प्रक्रियाधीन है, ताकि आरसीए के चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के मुताबिक हो सकें. चुनाव कराने के लिए भी निर्देश जारी इससे पहले, मार्च-2024 में आरसीए के निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इस तीन महीने की कमेटी का गठन हुआ था. लेकिन कई अपरिहार्य और तकनीकी कारणों से समय सीमा के भीतर चुनाव संपन्न नहीं हो सके. इसके बाद से लगातार 3-3 महीनों के लिए समिति का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है. अब इस ताजा आदेश के बाद समिति को अगले तीन महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. इस वजह से फिलहाल चुनाव संभव नहीं इस फैसले के पीछे समिति ने क्रिक्रेट टूर्नामेंट्स को भी अहम वजह बताया है. कमेटी की ओर से तर्क दिया कि वर्तमान खेल सत्र के दौरान खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए क्रिकेट टूर्नामेंट्स का लगातार आयोजन कराया जा रहा है. इसकी वजह से सीमित समय में चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया.

वास्तु शास्त्र के अनुसार पर्स में ये चीजें रखने से रुक सकती है धन की वृद्धि

 वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारा बटुआ (पर्स) केवल धन रखने का एक साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तिगत ऊर्जा क्षेत्र (Personal Energy Field) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.  जैसे घर की दिशाएं और सजावट हमारे जीवन पर गहरा असर डालती हैं, वैसे ही पर्स में रखी गई वस्तुएं भी सीधे तौर पर हमारी आर्थिक स्थिति और धन के प्रवाह (Cash Flow) को प्रभावित करती हैं. अक्सर हम अनजाने में अपने पर्स को कबाड़खाना बना देते हैं, जिसमें ढेर सारी फालतू चीजें जमा होती रहती हैं. वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि पर्स में नकारात्मक ऊर्जा वाली चीजें रखने से धन का आगमन रुक जाता है. इससे व्यक्ति को अनावश्यक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यदि आप भी अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता और सकारात्मकता चाहते हैं, तो अपने पर्स की ऊर्जा को शुद्ध करना बेहद जरूरी है. 1. पुरानी रसीदें और फालतू कागज हम अक्सर शॉपिंग के बाद मिलने वाली रसीदें या पुराने बिल पर्स में ही भूल जाते हैं.  वास्तु शास्त्र में इन्हें नकारात्मक ऊर्जा का संचय माना जाता है.  ये पुरानी रसीदें हमारे बीते हुए खर्चों की याद दिलाती हैं, जो अवचेतन मन में धन की कमी का डर पैदा करती हैं. इन्हें समय-समय पर हटाते रहें ताकि नई ऊर्जा (पैसा) के लिए जगह बन सके. 2. फटे हुए नोट और पुराने कागजात फटे हुए नोट दरिद्रता को आमंत्रित करते हैं. वास्तु के अनुसार, पैसा माता लक्ष्मी का स्वरूप है, और फटे हुए नोट का पर्स में होना धन के प्रति अनादर दर्शाता है. इससे धन की बचत नहीं हो पाती, पैसा आते ही खर्च हो जाता है.  हमेशा साफ-सुथरे और व्यवस्थित नोट ही रखें. 3. मृत पूर्वजों की तस्वीरें श्रद्धा के कारण लोग अक्सर अपने पूर्वजों की तस्वीरें पर्स में रखते हैं.  लेकिन वास्तु शास्त्र कहता है कि मृत व्यक्तियों की तस्वीरें पर्स में रखने से व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और यह धन की वृद्धि में रुकावट करता है. पूर्वजों को घर के उत्तर-पूर्व या किसी विशेष स्थान पर स्थान देना चाहिए, न कि वॉलेट के अंदर. 4. हिसाब-किताब के कागज उधारी, कर्ज या लेनदेन का हिसाब-किताब रखने वाली पर्चियां पर्स में रखना वास्तु दोष पैदा करता है. यह लगातार आपको तनाव और कर्ज की स्थिति की याद दिलाता है, जिससे मानसिक शांति भी भंग होती है.  धन संबंधी कार्य बिगड़ने लगते हैं. हिसाब-किताब के लिए एक अलग डायरी का उपयोग करें. 5. धारदार और नुकीली चीजें पर्स में पुराने ब्लेड, सेफ्टी पिन, पुरानी चाबियां या कोई भी नुकीली वस्तु रखना नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है.  ये वस्तुएं वास्तु दोष पैदा करती हैं, जो आपके आर्थिक निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं और अनावश्यक विवादों को जन्म देती हैं.

विवेकानंद स्कूल मोड़ से नयासराय तक 6.089 किमी सिक्स लेन सड़क, रांची में यातायात को मिलेगा नया स्वरूप

रांची झारखंड की राजधानी रांची में सड़क ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी परियोजना शुरू होने जा रही है. करीब 177 करोड़ रुपये की लागत से शहर का पहला सिक्स लेन स्मार्ट रोड बनाया जाएगा. यह परियोजना पथ निर्माण विभाग के तहत स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड द्वारा क्रियान्वित की जाएगी. टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सितंबर तक इसे अंतिम रूप देने की योजना है. इसके बाद इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. किन इलाकों से होकर गुजरेगी यह सड़क यह प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क विवेकानंद स्कूल मोड़ से शुरू होकर जगन्नाथ मंदिर, झारखंड हाईकोर्ट के पास से गुजरते हुए नयासराय आरओबी तक जाएगी. कुल 6.089 किलोमीटर हिस्से को सिक्स लेन में विकसित किया जाएगा. इसके बाद नयासराय आरओबी से आगे रिंग रोड तक लगभग 2.12 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण किया जाएगा, जिसे टू लेन के रूप में विकसित किया जाएगा. आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा सड़क ढांचा इस स्मार्ट रोड परियोजना में सिर्फ सड़क चौड़ीकरण ही नहीं बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं का भी समावेश किया गया है. सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय यातायात को सुगम बनाया जा सके. इसके साथ ही साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन को बढ़ावा मिलेगा. सौर ऊर्जा से जगमगाएगी सड़क इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता सड़क किनारे लगाई जाने वाली सोलर लाइटिंग व्यवस्था है. पूरी सड़क को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था से रोशन किया जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था विकसित की जा सकेगी. यह पहल रांची को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक कदम और आगे ले जाएगी. सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री के उपयोग के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा. सड़क डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यातायात दबाव को आसानी से संभाला जा सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो. पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि काम की गुणवत्ता में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शहर के विकास में अहम भूमिका यह सड़क न केवल रांची के यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ने में भी मदद करेगी. इससे हाईकोर्ट, शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही, यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था और शहरी विकास को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.