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80-100 साल पुराने फर्जी केवाला से जमीन कब्जाने का खेल, दर्जनभर अंचल जांच के घेरे में

पटना बिहार के कई अंचलों में जमीन माफिया और राजस्व विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों के गठजोड़ का पता चला है। यह सिंडिकेट सरकारी जमीन के नकली और फर्जी कागजात तैयार कर पहले उनकी रजिस्ट्री कराते हैं। फिर राजस्व अंचल कर्मियों की मदद से उस जमीन का दाखिल-खारिज करा देते हैं। जमीन माफिया और अफसरों का गठजोड़ कमजोर और असहाय लोगों की जमीनें भी हड़प रहा है। इसकी जांच चल रही है। जांच एजेंसियां जल्द ही कोई बड़ा ऐक्शन ले सकती हैं। मालूम हो कि संगठित भू माफिया की पड़ताल में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) सहित अन्य जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी मिली है। जांच में जमुई के सिकंदरा, पटना के बख्तियारपुर, खुसरूपुर एवं नौबतपुर, मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी सहित एक दर्जन अंचलों में इन गठजोड़ का खुलासा होने पर संबंधित विभाग को कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। 18 अंचलों में ऐसे गठजोड़ की उच्चस्तरीय जांच चल रही है। दशकों पुराना फर्जी केवाला कर रहे तैयार जांच में पता चला है कि भू माफिया पहले जमीन को विवादित बनाते हैं। इसके लिए जमीन का 80 से 100 साल पुराना फर्जी केवाला या संबंधित दस्तावेज तैयार किया जाता है। इसके आधार पर जमीन माफिया के विभिन्न सदस्यों के नाम पर गलत तरीके से रजिस्ट्री करा ली जाती है। फिर राजस्व पदाधिकारी की मनमाफिक रिपोर्ट लेकर दाखिल-खारिज का काम होता है। सीओ की भूमिका भी शक के दायरे में चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें अंचलाधिकारी से लेकर राजस्व पदाधिकारी और राजस्व कर्मियों की भी अवैध भूमिका सामने आई है। इस बीच, भूमि का असल दावेदार सीओ से लेकर डीसीएलआर और अपर समाहर्ता तक शिकायत दर्ज कराता है, लेकिन लंबे समय तक सुनवाई नहीं होने से जमीन माफिया का कब्जा बरकरार रहता है। इससे संबंधित जांच के दौरान ईओयू टीम को ऐसी कई शिकायत प्राप्त हुई।  

धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को बड़ी सौगात, 5.75 करोड़ की लागत से बनेगी नई सड़क; ट्रैफिक दबाव होगा कम

कुरुक्षेत्र  धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में शहरवासियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि कुरुक्षेत्र में यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए रेलवे एलिवेटेड ट्रैक के समानांतर नई सड़क का निर्माण किया जाएगा कहां से कहां तक बनेगी सड़क? सरकार ने इस सड़क के निर्माण के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है। पूर्व राज्यमंत्री ने इस मंजूरी पर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सड़क एलसी-61सी (विश्वविद्यालय गेट नंबर-3 के पास) से एलसी-65सी (पुराने बस स्टैंड के पास) तक बनाई जाएगी। यह सड़क रेलवे के राइट आफ वे में प्रस्तावित है तथा इसका निर्माण रेलवे से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) और अन्य वैधानिक मंजूरियां प्राप्त होने के अधीन रहेगा। 5.75 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी सड़क उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सड़क की लंबाई लगभग 3.20 किलोमीटर और चौड़ाई 7 मीटर होगी। इसके निर्माण पर करीब 5.75 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। नई सड़क से मिलेगी जाम से निजात उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव, सूर्य ग्रहण सहित अन्य बड़े धार्मिक एवं सार्वजनिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी आमद होती है, जिससे शहर की मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। नई सड़क बनने से इस क्षेत्र में यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा और जाम की स्थिति को कम करने में मदद मिलेगी।

CM योगी का बड़ा बयान- जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटने वाली ताकतों को रोकना शिक्षकों की जिम्मेदारी

लखनऊ यूपी के लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए। सीएम योगी ने कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों की भूमिका, शिक्षा के माध्यम से संस्कार निर्माण और समाज के प्रति उनके दायित्वों पर चर्चा की गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने का कार्य नहीं करते, बल्कि वे नई पीढ़ी के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संस्कारवान नागरिक तैयार करना भी है। सीएम योगी ने विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए उन्हें समाज को विभाजित करने वाला बताया। सीएम योगी ने कहा कि युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है। ये देखना होगा कि हम कैसा भारत चाहते हैं। क्या हमें बिखरा हुआ, बंटा हुआ और जातीय खेमों में लड़ता हुआ भारत चाहिए? हमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत बनाना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि हमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत चाहिए। हम सबको मिलकर ऐसे भारत के लिए काम करना है। गुलामी के समय में भी एक तबका था जो समाज को बांट रहा था। आज भी वो तत्व समाज को जाति, क्षेत्र के नाम पर बांटकर देश की एकता को छिन्न-भिन्न कर रहा है। ये राष्ट्रमाता के प्रति अपराध है, भारत माता के प्रति अपराध है, अपने पूर्वजों के प्रति अपराध है। ये भारत की स्वाधीनता को फिर से खतरे में डालने की चेष्टा है। जब भी राष्ट्र के ऊपर ऐसा संकट दिखाई देता है तब हमारे शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि इन विभाजनकारी ताकतों को किसी भी तरह से सफल नहीं होने देना है। सीएम योगी ने कहा कि आज हम तकनीकी अपना चुके हैं, पहले संसाधन कमी थी लेकिन, हमारी ताकत हमारा परिवार होता था। संयुक्त परिवार में संकट का सामना सब मिलकर करते थे लेकिन, आज परिवार सीमित हो गए हैं। एक छत के नीचे रह रहे हैं लेकिन, अलग-अलग दिशा हो जाती है। दुनिया के बहुत से देशों में तो बिखर रहे समाज और तबाह हो रहे परिवारों को बचाने के लिए उन्हें एक मंत्रालय का गठन करना पड़ रहा है। कार्यशाला में शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार से जुड़े पदाधिकारी, शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

नेपाल की भारी बारिश से बिहार में मची तबाही, NASA सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया बाढ़ का खौफनाक मंजर

पटना बिहार में हाल ही में आई भयावह बाढ़ ने चंपारण से सारण और वैशाली तक जमकर तबाही मचाई। नासा ने सैटेलाइट डेटा से विश्लेषण कर इस घटना को गंभीरता को दिखाया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में मॉनसून सीजन के अंत में हुई भारी बारिश की वजह से गंडक नदी का जलस्तर उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इससे बिहार में तबाही देखने को मिली। नदी का पानी का फैलाव बढ़ गया, तटंध टूट गए और कई किलोमीटर तक इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। नासा की रिपोर्ट में बताया गया कि 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के लुंबिनी और गंडकी प्रांत के पहाड़ी इलाकों में तूफान के साथ भयंकर बारिश हुई। इससे गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी आया। इससे बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं हुईं। इससे नेपाल और भारत दोनों देशों में गंडक (नारायणी) नदी में रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किया गया। गंडक नदी की तेज धारा से कई तटबंध टूट गए। पानी उनके ऊपर से बहने लगा। इससे सैकड़ों किलोमीटर तक नदी का पानी फैल गया और खेत एवं बस्तियां डूब गईं। बाढ़ और भूस्खलन से सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए और हजारों लोग बेघर हुए। 20 और 29 सितंबर की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण रिपोर्ट में कहा गया है कि नासा के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट इमेज और विभिन्न तकनीकी टूल्स से बाढ़ का विश्लेषण किया। नासा के टेरा और एक्वा सैटेलाइट से ली गई 20 और 29 सितंबर की तस्वीरों का मिलान किया गया। दोनों तस्वीरों में बाढ़ के पानी की पहचान के लिए इंफ्रारेड और विजिबल लाइट का अध्ययन किया गया। बाद वाली तस्वीर में बाढ़ का फैलाव साफ नजर आ रहा है। 1960 के बाद सर्वाधिक पानी बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने गुरुवार को कहा कि नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने 2 अक्टूबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट 'रेन्स स्वैंप द गंडक रिवर' में नेपाल और भारत में इसका विस्तार से उल्लेख किया है। नेपाल के देवघाट में 27 सितंबर को गंडक नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंचने की जानकारी दी गई है, जो 1960 के बाद से अब तक का सर्वाधिक था। इसी तरह भारत में गंडक नदी के किनारे स्थित बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट और लालगंज जैसे स्थानों पर भी नए उच्चतम जलस्तर दर्ज किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। असामान्य बारिश से आई तबाही उन्होंने कहा कि इस बार गंडक नदी में बाढ़ की स्थिति सामान्य मौसमी परिस्थितियों से अलग और बहुत भारी बारिश से उत्पन्न असाधारण जलप्रवाह की वजह से हुई। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हुई भारी बारिश का प्रभाव बिहार में नदी के जलस्तर और पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर जिलों के कई क्षेत्रों में जलभराव एवं बाढ़ के रूप में दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। वैज्ञानिक एवं उपग्रह आधारित आंकड़ों से प्राप्त सूचनाएं बिहार में बाढ़ की असाधारण स्थिति को समझने और उसके विस्तार का आकलन करने हेतु उपयोगी और मददगार हैं।

खनन राजस्व में धनबाद का दबदबा, झारखंड ने 5 महीने में जुटाए ₹9,877 करोड़; जानें जिलों का हाल

 रांची खनन राजस्व एवं सेस की वसूली में झारखंड के कुछ जिलों का प्रदर्शन बहुत ही बेहतर रहा है और इनमें धनबाद अव्वल दिख रहा है। सेस के माध्यम से खान एवं भूतत्व विभाग प्रथम पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त तक) में 4657.01 करोड़ रुपये राजस्व वसूल चुका है। वित्तीय वर्ष के छह महीने बीतने के बावजूद अभी इन महीनों की रिपोर्ट समेकित नहीं हो सकी है। विगत पांच महीनों में झारखंड के खजाने में 9,877 करोड़ रुपये से अधिक आ चुके हैं। झारखंड सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक राज्य को खनिज रायल्टी, उपकर और अन्य शुल्कों से कुल 9877.89 करोड़ रुपये की आय हुई है। यह लक्ष्य का 36.59 प्रतिशत है। 2700 करोड़ रुपये वसूलने का है लक्ष्य रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का वार्षिक राजस्व लक्ष्य 2700.00 करोड़ रुपये निर्धारित है। अगस्त 2026 तक कुल 21879.99 करोड़ रुपये का खनिज उत्पादन और उठाव दर्ज किया गया है जिसके ऊपर 98,77.89 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। इसके अलावा झारखंड मिनरल बेस्ड लैंड सेस के माध्यम से भी सरकार के खजाने में 4657.01 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश संशोधित बिल में इस सेस की वसूली पर रोक लगा दी गई है। खनन गतिविधियों से होने वाली आय में सबसे बड़ा योगदान धनबाद जिले का रहा है। अन्य जिलों का प्रदर्शन कुछ कमजोर रहा है। कुछ जिलों से सेस से प्राप्त राजस्व सरकार के लिए निराशाजनक रहा है। राजस्व के हिसाब से धनबाद के बाद चतरा का नाम है। कुछ जिलों की स्थित बहुत ही खराब है। अगले छह महीनों में जोर नहीं दिया गया तो राजस्व की स्थिति कमजोर हो सकती है। जेएमबीएल (झारखंड मिनरल बेस्ड लैंड) सेस वसूली का जिलेवार प्रदर्शन – धनबाद : 689.70 करोड़ रुपये – चतरा : 568.34 करोड़ रुपये – चाईबासा : 586.70 करोड़ रुपये – पश्चिमी सिंहभूम : 457.77 करोड़ रुपये – रामगढ़ : 301.33 करोड़ रुपये – बोकारो : 302.21 करोड़ रुपये  

टीम इंडिया का शुरू होने वाला है सबसे व्यस्त शेड्यूल, 26 दिन में 10 टी20; फिटनेस और वर्कलोड बनेगा चुनौती

नई दिल्ली  वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम करने और एशियन गेम्स 2026 में पाकिस्तान को हराकर गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम का सबसे व्यस्त शेड्यूल शुरू होने जा रहा है। अगले 26 दिनों में भारतीय टीम को कुल 10 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेलने हैं। इसकी शुरुआत 6 अक्टूबर से घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 5 मैचों की टी20 सीरीज से होगी, जिसके तुरंत बाद टीम इंडिया 5 टी20 मैचों के लिए न्यूजीलैंड दौरे पर रवाना होगी। खिलाड़ियों की फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट बनेगी सबसे बड़ी चुनौती श्रेयस अय्यर की अगुवाई में एशियन गेम्स में तिरंगा लहराने वाली भारतीय टीम के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। भारत में घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाकर टीम अपनी लय मजबूत करेगी, जबकि न्यूजीलैंड की उछालभरी और तेज पिचों पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों की परीक्षा होगी। लगातार मैच और यात्राओं के बीच टीम मैनेजमेंट के सामने खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट और रोटेशन पॉलिसी को लागू करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी, जिससे बेंच स्ट्रेंथ को आजमाने का भी बड़ा मौका मिलेगा। भारत बनाम वेस्टइंडीज टी20 सीरीज का पूरा शेड्यूल (घरेलू सीरीज)     पहला टी20: 6 अक्टूबर 2026 — लखनऊ (भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम)     दूसरा टी20: 9 अक्टूबर 2026 — रांची (जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स)     तीसरा टी20: 11 अक्टूबर 2026 — इंदौर (होलकर स्टेडियम)     चौथा टी20: 14 अक्टूबर 2026 — हैदराबाद (राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम)     पांचवां टी20: 17 अक्टूबर 2026 — बेंगलुरु (एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम) भारत बनाम न्यूजीलैंड टी20 सीरीज का पूरा शेड्यूल (न्यूजीलैंड दौरा)     पहला टी20: 22 अक्टूबर 2026 — क्राइस्टचर्च (हेगले ओवल)     दूसरा टी20: 24 अक्टूबर 2026 — क्राइस्टचर्च (हेगले ओवल)     तीसरा टी20: 27 अक्टूबर 2026 — वेलिंगटन (स्काई स्टेडियम)     चौथा टी20: 30 अक्टूबर 2026 — ऑकलैंड (ईडन पार्क)     पांचवां टी20: 1 नवंबर 2026 — हैमिल्टन (सेडन पार्क)  

BJP का बड़ा दांव! राज्यसभा उपचुनाव में कोयल मल्लिक पर भरोसा, उत्तराखंड से दिनेश आर्य मैदान में

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो और उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। भगवा पार्टी ने उत्तराखंड में होने वाले चुनाव के लिए दिनेश आर्य को कैंडिडेट बनाया है। वहीं, पश्चिम बंगाल में होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए रुक्मिणी मल्लिक ऊर्फ कोयल मल्लिक को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। आपको बता दें कि राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रो. राम गोपाल यादव, रामजी, बी. एल. वर्मा, सीमा और हरदीप सिंह पुरी के साथ-साथ उत्तराखंड से नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। उत्तर प्रदेश से डॉ. दिनेश शर्मा की सीट उनके इस्तीफे के कारण 11 सितंबर से रिक्त है। बंगाल से कोयल मल्लिक को टिकट पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव रुक्मिणी मल्लिक के 16 जुलाई को इस्तीफे देने के बाद से रिक्त है। उनका कार्यकाल दाे अप्रैल 2032 तक था। भाजपा ने उन्हें ही यहां से कैंडिडेट बनाया है। आपको बता दें कि वह पहले टीएमसी में थीं। सांसदों के बगावत के बाद उन्होंने भी ममता का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राज्यसभा की 12 सीट के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होंगे। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट शामिल है, जहां मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव होगा। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। आयोग ने पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी करने का निर्देश दिया है।

‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य पर बड़ा प्लान, बिहार में छोटे उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

पटना बिहार में रोजगार बढ़ाने के लिए अब सरकार छोटे उद्योगों पर फोकस करेगी। इसके लिए अगले साल के बजट में विशेष फंड मिल सकता है। ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ का लक्ष्य हासिल करने पर राय देने के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सम्राट सरकार को सौंप दी। यह कमेटी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में गठित की गई थी। रिपोर्ट में छोटे उद्योगों के विस्तार के जरिए रोजगार और लोगों की आय में बढ़ोतरी करने की सिफारिश की गई है। साथ ही अगले पांच सालों तक जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) कम से कम 16 फीसदी पर बरकरार रखने और क्षेत्रीय असमानता दूर कर संतुलित विकास पर जोर दिया गया है। कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार ने रिपोर्ट डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को सौंपी। अब वित्त विभाग इस रिपोर्ट पर अमल करते हुए आगामी बजट में इसके प्रावधानों के लिए राशि का प्रबंध करेगा। कमेटी के अध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा कि साल 2015 में सात निश्चय लॉन्च किया गया। दो निश्चय की सफलता के बाद पिछले साल सात निश्चय-तीन में सरकार ने दोगुना रोजगार-दोगुनी आय का लक्ष्य तय किया है। इसे हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि राज्य की जीडीपी 16 फीसदी पर बरकरार रहे। कमेटी ने कहा कि दो दशक में बिहार ने तेजी से तरक्की हासिल की है। औसतन बिहार की विकास दर 13.7 फीसदी रही है। 2022-23 में बिहार की जीडीपी 17.9 फीसदी तक भी गई थी। इसलिए यह जरूरी है कि राज्य में बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिले। वित्त सचिव रचना पाटिल की मौजूदगी में इस कमेटी ने कहा कि किसी एक क्षेत्र पर ध्यान देने के बजाए समग्रता में काम करना होगा। नीतीश कुमार ने बनाई थी कमेटी पिछले साल तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय-3 की घोषणा की थी। इसमें दिए गए ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बिहार के पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार की अध्यक्षता में त्रि-सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। जनवरी 2026 में गठित इस कमेटी में सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव रहे टीसीए अनंत और आईआईएम अहमदाबाद के प्रो संकेत महापात्रा भी शामिल हैं। डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से गठित इस कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार अमल करेगी। बजट में राशि का इंतजाम होगा। आंकड़ों के आधार पर सभी जिलों की निगरानी होगी। कृषि, जल प्रबंधन, बिजली और कम्युनिकेशन पर सरकार का फोकस है। उन्होंने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीति बनाई गई है। कई बड़ी परियोजनाएं आने वाली हैं। इससे दोगुना रोजगार-दोगुनी आय को हासिल करने में सफलता मिलेगी कमेटी की प्रमुख अनुशंसाएं     बड़े उद्योग स्थापित करने की योजना पर काम करना होगा     छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीति बनाने की जरूरत है     हर जिले की विशिष्ट योजना बने, ताकि जीडीपी में भागीदारी बढ़े     उद्योग लगाने के लिए प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए     सूक्ष्म उद्योगों की मंजूरी जिला और प्रमंडल स्तर पर ही मिले     जीविका समूह को शासन में भागीदारी देने पर विचार हो।

प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत पर आश्रम ने तोड़ी चुप्पी, अफवाहों से बचने की अपील

मथुरा उत्तर प्रदेश के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षित साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के आठ दिन बाद राधा केलि कुंज आश्रम की ओर से पहला लिखित बयान जारी हुआ। श्री हित राधा केलि कुंज ट्रस्ट द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि साधक की मौत से महाराज और परिकर काफी आहत हैं। ट्रस्ट साधक के परिवार के प्रति अपनी पूरी संवेदना और सहानभूति व्यक्त करता है। कहा कि घटना की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग किया जा रहा है। जांच पूरी होने तक सभी श्रद्धालु, साधक और आमजन किसी प्रकार की अपुष्ट जानकारी, अफवाह या अनुमान के आधार पर महाराज की छवि धूमिल करने का प्रयास न करें। ट्रस्ट को पूर्ण विश्वास है कि पुलिस प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच से वास्तविक तथ्य सामने लाए जाएंगे। कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य आए समर्थन में उधर, चर्चित कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य एक बार फिर अपने तीखे बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने संत प्रेमानंद का बचाव करते हुए मीडिया और सोशल मीडिया पर टीआरपी बटोरने वालों पर जमकर अपना गुस्सा निकाला है। अपनी कथा के दौरान दिए गए उनके इस बयान का वीडियो इंटरनेट पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कुछ लोग और मीडिया केवल टीआरपी और व्यूज पाने के लिए कुछ भी बोल देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, लोग पूरा विषय जानते-समझते नहीं हैं और खुद ही जज बनकर फैसला सुनाने लगते हैं। प्रेमानंद के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अनिरुद्ध आचार्य ने कहा कि महाराज जी ने करोड़ों लोगों को भक्ति मार्ग से जोड़ा है। दिनेश फलहारी बाबा ने बाल संरक्षण आयोग को लिखा पत्र वहीं, मथुरा, श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि श्रीधाम वृंदावन स्थित प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज आजकल युवाओं के लिए आध्यात्मिक केंद्र बने हुए हैं। कुछ भक्त बालक बालिकाएं आध्यात्मिक रस में डूबकर उनके आश्रम में ही रह जाते हैं। उनका परिवार समय-समय पर आश्रम में बालक-बालिकाओं की खोजबीन करते पाया गया है तथा कई मामले संदिग्ध भी प्रतीक होते हैं। उन्होंने मांग की कि लापता बच्चों के संबंध में जांच करा कर वास्तविक स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करायें। दिनेश फलाहारी ने कहा कि लोगों में चर्चा या कहें भ्रम है कि कहीं यह बालक-बालिकाएं अध्यात्म की आड़ में बंधक तो नहीं है। यदि उन नाबालिग बच्चों के साथ आश्रम परिसर में कोई घटना घटित हो जाए तो जवाबदेही के लिए आश्रम में किस व्यक्ति को जिम्मेदार माना जाए। घटना वाले दिन सुबह से तनाव में था रसिक उधर, प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत की जांच जारी है। इस मामले में सीसीटीवी में जो सामने आया है, उससे लग रहा है कि मौत से पहले वो बहुत तनाव में था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सीसीटीवी में है कि वो करीब दो घंटे कमरे में रहा। इसके बाद वह धोती पकड़े कमरे से निकलता सीसीटीवी में दिखता है और सीढ़ियों पर चढ़ता हुआ छत पर चला जाता है। छत पर लगे सीसीटीवी में वह बेचैन दिखता है। पहले छत की मुड़ेर पर बैठता है, फर छत पर लेटता है और इसके बाद तेजी से उठकर छत से छलांग लगा देता है। घटना के समय रूम पार्टनर जुगल शरण केली कुंज गया था। सवाल अभी यह भी है प्राइवेट पार्ट ग्राइंडर से काटते समय रसिक क्या चीखा नहीं होगा और वहां लोग आवाज सुन क्यों नहीं पहुंचे?

दुर्गा पूजा में बिजली कटौती नहीं होने देंगे, JBVNL ने कसी कमर; पंडालों की बिजली व्यवस्था होगी दुरुस्त

 रांची  शारदीय नवरात्र झारखंड का प्रमुख त्योहार है। रांची, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, सरायकेला खरसावां समेत प्रदेश के प्रमुख शहरों में मां दुर्गा की सार्वजनिक पूजा धूमधाम से मनाते हैं। लाखों लोग पूजा मंडपों में जाते हैं। जहां देखो, उधर रंग बिरंगी रोशनी। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के शीर्ष अधिकारियों को अंदाजा है कि आम नागरिकों को निर्वाध बिजली चाहिए तो पूजा मंडपों की विद्युतापूर्ति में भी लगातार सजगता आवश्यक है। जेबीवीएनएल सीएमडी के श्रीनिवासन ने शनिवार को दुर्गा पूजा के एकमात्र मसले पर शीर्ष अधिकारियों के अलावा रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, दुमका और मेदिनीनगर के बिजली महाप्रबंधकों के साथ ऑनलाइन संवाद किया। के श्रीनिवासन का साफ कहना था कि जो भी करने की जरुरत है, अभी कीजिए। पूजा मंडप को ज्यादा बिजली चाहिए और ट्रांसफार्मर कम क्षमता का है तो बदल दीजिए। मां दुर्गा की पूजा में बिजली के कारण विघ्न नहीं होनी चाहिए। पूजा समिति और बिजली विभाग का वाट्सअप ग्रुप बनेगा जेबीवीएनएल के आला अधिकारियों की बैठक में तय हुआ कि सभी जिला मुख्यालयों में पूजा समितियों और बिजली अधिकारियों का साझा वाट्सअप ग्रुप बनाया जाएगा। उद्देश्य है कि उभयपक्ष को त्वरित सूचनाएं मिलती रहे। किसी तरह के भ्रम की संभावना नहीं रहे। सभी जिलों में बिजली नियंत्रण केंद्र बनाया जाएगा। कार्यपालक, सहायक और कनीय अभियंता के दूरभाष नंबर आम जनता के लिए सार्वजनिक किए जाएंगे ताकि लोग संपर्क कर सके। समीक्षा बैठक में तय किया गया कि पंचमी से महानवमी तक शाम से पूजा मंडपों में एक बिजली कर्मचारी अवश्य रहेगा। पूजा मंडप से पांच मीटर की दूरी पर बिजली तार लगाए जाएंगे। बिजली सब स्टेशन के पावर ट्रांसफार्मर को जांचा परखा जाएगा। जरूरत हुई तो तेल डाला जाएगा। 33 और 11 केवीए के फीडर की गश्ती कर गड़बड़ी ठीक की जाएगी। ऑनलाइन समीक्षा बैठक में जेबीवीएनएल के वितरण एवं परियोजना निदेशक प्रभात कुमार श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक (ओएंडएम), वाणिज्य एवं राजस्व के कार्यकारी निदेशक, एसटीएन महाप्रबंधक भी शामिल हुए। मां दुर्गा की पूजा झारखंड का बड़ा त्योहार है। महापंचमी से ही लाखों लोग घरों से निकलने लगते हैं। प्रयास है कि दुर्गा पूजा में बिजली व्यवस्था चाक चौबंद रहे। अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दुर्गा पूजा शुरू होने के पहले वो सब कुछ कर लें जो अत्यावश्यक है। किसी तरह की चूक नहीं रहे। -के श्रीनिवासन, सीएमडी, जेबीवीएनएल।