samacharsecretary.com

विंबलडन 2026 ड्रॉ: सेरेना की वापसी से बढ़ा रोमांच, जोकोविक-सिनर और स्वियातेक-रिबाकिना पर नजर

 लंदन  सात बार की विंबलडन चैंपियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स चार साल बाद ग्रैंड स्लैम में वापसी करेंगी। टूर्नामेंट के पहले दौर में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की 20 वर्षीय माया जाइंट से होगा। 44 वर्षीय सेरेना को आयोजकों ने वाइल्ड कार्ड दिया है और वह 2022 के बाद पहली बार विंबलडन में सिंगल्स मुकाबला खेलेंगी। सेरेना ने 2022 के अमेरिकी ओपन के बाद कहा था कि वह टेनिस से आगे बढ़ रही हैं। अब वापसी पर उनकी चुनौती आसान नहीं होगी, क्योंकि दुनिया की 53वें नंबर की खिलाड़ी माया जाइंट दो डब्ल्यूटीए खिताब जीत चुकी हैं, जिनमें पिछले साल ईस्टबार्न का ग्रास कोर्ट खिताब भी शामिल है सबालेंका के सामने कोस्तोविच महिला वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त एरिना सबालेंका अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया की क्वालीफायर तेओदोरा कोस्तोविच के विरुद्ध करेंगी। मौजूदा चैंपियन इगा स्वियातेक का सामना अमेरिका की टेलर टाउनसेंड से होगा। तीसरी वरीय स्वियातेक और दूसरी वरीय एलेना रिबाकिना एक ही हिस्से में हैं। रिबाकिना पहले दौर में फ्रांस की लोइस बोइसों से भिड़ेंगी। वहीं, पुरुष वर्ग में मौजूदा चैंपियन और शीर्ष वरीय इटली के यानिक सिनर सोमवार को सेंटर कोर्ट पर अपने अभियान की शुरुआत सर्बिया के मियोमिर केचमानोविच के विरुद्ध करेंगे। दूसरी वरीयता प्राप्त और हाल में फ्रेंच ओपन चैंपियन बने अलेक्जेंडर ज्वेरेव का मुकाबला बेल्जियम के अलेक्जेंडर ब्लाक्स से होगा। निकला दिलचस्प ड्रॉ ड्रॉ में कई दिलचस्प मुकाबले भी सामने आए हैं। ब्रिटेन के जैक ड्रेपर का सामना छठी वरीयता प्राप्त अमेरिका के टेलर फ्रिट्ज से होगा, जबकि 41 वर्षीय स्विट्जरलैंड के दिग्गज स्टान वावरिंका अपने आखिरी विंबलडन में पूर्व उपविजेता माटेओ बेरेटिनी से भिड़ेंगे। 39 वर्षीय नोवाक जोकोविक रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब की तलाश में पहले दौर में चीन के वू यीबिंग से खेलेंगे। यदि वह आगे बढ़ते हैं तो सेमीफाइनल में उनकी भिड़ंत सिनर से हो सकती है। सिनर के लिए पहले दौर में केचमानोविच आसान प्रतिद्वंद्वी नहीं होंगे। सिनर बिना किसी ग्रास कोर्ट अभ्यास टूर्नामेंट के विंबलडन पहुंचे हैं और उनकी फिटनेस को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। फ्रेंच ओपन में वह दो सेट की बढ़त गंवाकर अर्जेंटीना के जुआन मैनुअल सेरुंडोलो से हार गए थे। हालांकि, कार्लोस अलकराज के चोट के कारण बाहर होने से सिनर को लगातार दूसरा विंबलडन खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। क्वार्टर फाइनल में उनका संभावित मुकाबला आठवीं वरीयता प्राप्त दानिल मेदवेदेव से हो सकता है। हालांकि मेदवेदेव को पहले ही दौर में पूर्व उपविजेता मारिन चिलिच से कड़ी चुनौती मिलेगी।

वीकेंड पर ओटीटी धमाका: ZEE5 पर देखें राजसी साज़िश से लेकर क्राइम थ्रिलर तक का पूरा पैकेज

अगर आप इस वीकेंड ओटीटी पर कुछ धमाकेदार देखने के लिए तलाश रहे हैं, तो जी5 का पिटारा खुल चुका है. यहां राजसी साजिशों से लेकर बैंकिंग घोटालों और डार्क कॉमेडी का ऐसा कॉकटेल मौजूद है, जो आपको स्क्रीन से हिलने नहीं देगा. आइए जानते हैं कि जी5 की बेहतरीन सीरीज और फिल्मों के बारे में, जो आपके वीकेंड को मनोरंजन से भर देंगी. ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड यह एक ऐतिहासिक ड्रामा शो है. इसमें मुगल साम्राज्य के अंदर की राजनीति बारीकी से दिखाई गई है. कहानी बादशाह अकबर के समय की है. अकबर अपने तीन बेटों (सलीम, मुराद और दानियाल) में से अपना उत्तराधिकारी चुनना चाहते हैं. इसके बाद गद्दी के लिए भाइयों में खूनी जंग और साजिशें शुरू हो जाती हैं. इसमें सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी भी दिखाई गई है. क्यों देखें: अगर आपको इतिहास, राजशाही ड्रामे और राजसी ठाट-बाट पसंद हैं, तो यह सीरीज आपको बांधकर रखेगी. कास्ट: नसीरुद्दीन शाह, धर्मेंद्र, अदिति राव हैदरी, आशिम गुलाटी जानवर यह छत्तीसगढ़ के जंगलों पर बनी एक सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर सीरीज है. छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जंगली इलाके में एक मर्डर की जांच शुरू होती है. पुलिस ऑफिसर को जांच के दौरान एक के बाद एक कई लाशें मिलने लगती हैं. धीरे-धीरे केस बहुत उलझ जाता है. कहानी इंसान के अंदर छिपे जानवर और अपराध के इर्द-गिर्द घूमती है. क्यों देखें: इसकी कहानी काफी डार्क और सस्पेंस से भरी है. थ्रिलर के शौकीनों के लिए यह अच्छा ऑप्शन है. कास्ट: भुवन अरोड़ा, भगवान तिवारी, अतुल काले शब्द: रीत और रिवाज यह एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाली ड्रामा सीरीज है. यह कहानी 16 साल के लड़के घुप्पी सिंह की है. घुप्पी को हकलाने की बीमारी है. उसका दिल फुटबॉल खेलने में लगता है. दूसरी तरफ, उसके पिता चाहते हैं कि वो परिवार की 'रागी' परंपरा को आगे बढ़ाए. घुप्पी अपने सपनों और पिता की उम्मीदों के बीच पिसता है. क्यों देखें: यह सीरीज समाज के नियमों, पारिवारिक दबाव और अपने सपनों को चुनने की जद्दोजहद को बहुत खूबसूरती से दिखाती है. कास्ट: सुविंदर विक्की, मिहिर आहूजा और तरनजीत कौर. 4. तेहरान (Tehran) यह एक स्पाई-थ्रिलर फिल्म है, जो सच्ची राजनीतिक घटनाओं से प्रेरित है. दिल्ली में एक बम ब्लास्ट होता है, जिसमें एक मासूम बच्ची की जान चली जाती है. स्पेशल सेल के एसीपी राजीव कुमार इसकी जांच करते हैं. जांच के तार भारत, ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इंटरनेशनल जासूसी नेटवर्क से जुड़ जाते हैं. राजीव को अपनी ही एजेंसी से मदद मिलना बंद हो जाती है, जिसके बाद वो अकेले इस मिशन पर निकलता है. कास्ट: जॉन अब्राहम, मानुषी छिल्लर, नीरू बाजवा और हादी खंजनपोर. हिसाब बराबर यह एक सोशल-सटायर और क्राइम थ्रिलर फिल्म है. यह फिल्म बैंकिंग सिस्टम में होने वाले फ्रॉड और आम आदमी की जेब पर डाका डालने वाले बड़े घोटालों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाती है.

हरियाणा पुलिस में नई जिम्मेदारियां तय, डीजीपी स्तर से लेकर एसपी तक कई अधिकारियों के पद बदले गए

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने शुक्रवार (26 जून, 2026) देर रात पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 15 आईपीएस और 21 एचपीएस अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए हैं। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल को हरियाणा पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। अभी तक यह पद आलोक कुमार मित्तल के पास था। आलोक मित्तल को हरियाणा का जेल महानिदेशक नियुक्त करने के साथ रेजीडेंट कमिश्नर हरियाणा का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। एडीजीपी से पदोन्नत होकर पुलिस महानिदेशक बने नवदीप सिंह विर्क को हरियाणा स्टेट एन्फोर्समेंट ब्यूरो का महानिदेशक तथा विजिलेंस और सुरक्षा एचपीयूएस का निदेशक बनाया गया है। एडीजीपी से डीजीपी के पद पर पदोन्नत नवदीप सिंह विर्क की पत्नी कला रामचंद्रन को डीजीपी प्रशिक्षण एवं निदेशक हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन की जिम्मेदारी मिली है। चारू बाली को एडीजीपी साइबर, एडीजीपी आइटी और एडीजपी एससीआरबी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। वे एडीजीपी भोंडसी पुलिस कांप्लेक्स का कार्यभार भी संभालेंगी आईपीएस डॉ. सीएस राव को होमगार्ड व सिविल डिफेंस का कमांडेंट जनरल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। वे एडीजीपी एचआर एंड लिटिगेशन का कार्यभार भी देखते रहेंगे। सीनियर आईपीएस अधिकारी विकास अरोड़ा को एडीजीपी ईआरएसएस, ट्रैफिक एवं हाईवे के साथ टेली कम्युनिकेशन मुख्यालय की जिम्मेदारी दी गई। राकेश कुमार आर्य को स्टेट क्राइम ब्रांच के साथ आईजी कानून-व्यवस्था का अतिरिक्त प्रभार सौपा गया है। मनीष चौधरी को आईजी रेलवे और कमांडो के साथ आईजी जेल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया। अशोक कुमार करनाल रेंज के आईजी के साथ ही आईजी एचएपी मधुबन की जिम्मेदारी संभालेंगे। आरटीसी भोंडसी की आईजी नाजनीन भसीन को आईजी सीआइडी मुख्यालय बनाया गया है। सुरेंद्र पाल सिंह को डीआईजी एसटीएफ और राजिंदर कुमार मीणा को ज्वाइंट सीपी फरीदाबाद होंगे। डॉ. अंशु सिंगला को डीसीपी मुख्यालय गुरुग्राम बनाया गया है। सुरेंद्र सिंह भोरिया को एसपी एसटीएफ पंचकूला और एसपी कमांडो नेवल के साथ ही एसपी ला एंड आर्डर पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। एचपीएस अनिल कुमार को एसपी एसटीएफ करनाल नियुक्त किया गया है। इन एचपीएस अधिकारियों के हुए तबादले नाम – नई जिम्मेदारी 1. शक्ति सिंह – डीएसपी तृतीय बटालियन एचएपी हिसार 2. कमलजीत सिंह – 3. अरविंद कांबोज – डीएसपी सतर्कता एवं विजिलेंस तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मुख्यालय 4. रविंदर सिंह – डीएसपी राज्य सतर्कता एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो 5. सतीश कुमार – डीएसपी राज्य सतर्कता एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो 6. सुनील कुमार – डीएसपी रादौर 7. आशीष चौधरी – डीएसपी यमुनानगर 8. विकास कुमार – डीएसपी पानीपत 9. राजबीर सिंह – डीएसपी सिरसा 10. कुलदीप सिंह – डीएसपी अंबाला छावनी 11. धर्मबीर सिंह – डीएसपी सीआइडी मुख्यालय 12. संजीव कुमार – डीएसपी तृतीय बटालियन एचएपी हिसार 13. जितेंद्र कुमार – डीएसपी एसटीएफ मुख्यालय 14. ओम प्रकाश – डीएसपी टेलीकाम मुख्यालय पंचकूला 15. जय प्रकाश – डीएसपी तृतीय आइआरबी सुनारियां रोहतक 16. जितेंद्र सिंह – डीएसपी हरियाणा राज्य नशा नियंत्रण ब्यूरो मुख्यालय 17. सुरेश कुमार – डीएसपी द्वितीय आइआरबी भोंडसी 18. राज सिंह – डीएसपी द्वितीय आइआरबी भोंडसी 19. विकास कृष्ण – डीएसपी पीटीसी सुनारियां 20. जसपाल सिंह – डीएसपी चरखी दादरी  

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026: भारत की भारोत्तोलन टीम में चानू समेत मजबूत दावेदार

नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की दो बार की चैंपियन मीराबाई चानू 23 जुलाई से ग्लासगो में शुरू होने वाले इन खेलों में भारोत्तोलन में फिर से भारतीय चुनौती की अगुआई करेंगी। राष्ट्रमंडल खेलों में अभी तक तीन पदक (दो स्वर्ण और एक रजत) जीत चुकी चानू महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी उनके साथ मणिपुर की ही भारोत्तोलक बिंद्यारानी देवी (58 किलोग्राम) और पंजाब की हरजिंदर कौर (69 किलोग्राम) भी टीम में शामिल हैं, जिन्होंने 2022 में बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीते थे। लवप्रीत पर पुरुष टीम की जिम्मेदारी पुरुषों में बर्मिंघम में कांस्य पदक विजेता लवप्रीत सिंह (110 किलोग्राम से अधिक) भारतीय टीम का नेतृत्व करेंगे जिसमें राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार भाग लेने वाले ऋषिकांत सिंह (60 किलोग्राम), अजय बाबू (79 किलोग्राम) और दिलबाग सिंह (94 किलोग्राम) भी शामिल हैं। भारोत्तोलन प्रतियोगिताएं 26 से 30 जुलाई तक एसईसी आर्माडिलो में आयोजित की जाएंगी। रविवार को टीम होगी रवाना भारतीय टीम रविवार को बर्मिंघम के लिए रवाना होगी जहां वह अनुकूलन शिविर में हिस्सा लेगी। इसके बाद टीम 23 जुलाई को ग्लासगो के लिए रवाना होगी। भारत ने 2018 और 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया था। उसने 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में पांच स्वर्ण सहित नौ पदक जीते और फिर 2022 में बर्मिंघम में तीन स्वर्ण सहित 10 पदक अपनी झोली में डाले। इस प्रकार है भारतीय टीम महिला: मीराबाई चानू (48 किग्रा), ज्ञानेश्वरी यादव (53 किग्रा), बिंद्यारानी देवी (58 किग्रा), हरजिंदर कौर (69 किग्रा), संजना (77 किग्रा), मार्तिना देवी (86 किग्रा से अधिक)। पुरुष: ऋषिकांत सिंह (60 किग्रा), एम राजा (65 किग्रा), अजय बाबू (79 किग्रा), दिलबग सिंह (94 किग्रा), लवप्रीत सिंह (110 किग्रा से अधिक)।

झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर जोर, 100 गुणवत्ता मानकों पर परखे जाएंगे सीएचसी अस्पताल

रांची  रांची जिले के अनगड़ा और रातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) अवार्ड दिलाने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग दोनों अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में जुटा है। यदि दोनों अस्पताल करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें एनक्वास प्रमाणन के साथ 50 लाख रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा। यह राशि अस्पताल के विकास, मरीजों की सुविधाओं और चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने में खर्च की जाएगी। रांची जिले में इससे पहले सदर अस्पताल को वर्ष 2024 में एनक्वास अवार्ड मिल चुका है। वहीं ओरमांझी सीएचसी और कुच्चू पीएचसी भी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। जिले के 80 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) भी एनक्वास प्रमाणन प्राप्त कर चुके हैं। अब विभाग की नजर अनगड़ा और रातू सीएचसी पर है। ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होना है बाकी सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार बताते हैं कि दोनों अस्पतालों में अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन एनक्वास के लिए कुछ महत्वपूर्ण कमियां अभी भी दूर की जानी हैं। सबसे बड़ी चुनौती दोनों अस्पतालों में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करना है। योजना के तहत सदर अस्पताल स्थित मदर ब्लड बैंक से रक्त लाकर यहां सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि विशेषकर गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों को तत्काल रक्त उपलब्ध कराया जा सके। अनगड़ा सीएचसी में रेडियोलाजी विभाग को भी पूरी तरह सुदृढ़ किया जाना बाकी है, जबकि रातू सीएचसी में यह सुविधा पहले से संचालित है। वहीं सर्जरी की सुविधा दोनों अस्पतालों में है, लेकिन रातू सीएचसी में सबसे अधिक सीजेरियन आपरेशन किए जाते हैं। अनगड़ा में सर्जिकल सेवाएं अभी सीमित हैं। यहां जरूरत पड़ने पर निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाकर आपातकालीन सर्जरी कराई जाती है, जबकि गंभीर मरीजों को उच्च संस्थानों में रेफर करना पड़ता है। कई मानकों पर होती है जांच एनक्वास प्रमाणन केवल भवन या उपकरणों के आधार पर नहीं मिलता। इसके लिए अस्पतालों को करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, दवा उपलब्धता, प्रशिक्षित मानव संसाधन, प्रयोगशाला एवं रेडियोलाजी सेवाएं, प्रसव एवं नवजात देखभाल, आपातकालीन चिकित्सा, रिकार्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, मरीजों की शिकायतों का निस्तारण और अस्पताल प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर की टीम अस्पताल का निरीक्षण करती है और निर्धारित अंक मिलने के बाद ही एनक्वास प्रमाणन दिया जाता है। अस्पताल और मरीजों दोनों को मिलेगा लाभ एनक्वास अवार्ड मिलने के बाद अस्पताल को 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। इस राशि का उपयोग नई चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने, उपकरण खरीदने, मरीजों के लिए आधारभूत सुविधाएं बढ़ाने और गुणवत्ता सुधार कार्यों में किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलता है। अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है, दवाओं और जांच सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होती है तथा रेफरल की आवश्यकता भी घटती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अपने जिले या प्रखंड स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने लगता है। तीन वर्ष बाद फिर कराना पड़ता है मूल्यांकन एनक्वास प्रमाणन स्थायी नहीं होता। इसकी वैधता तीन वर्ष की होती है। इसके बाद अस्पताल को दोबारा आवेदन कर पुनर्मूल्यांकन कराना पड़ता है। यदि गुणवत्ता मानकों का पालन जारी नहीं रहता तो प्रमाणन समाप्त भी हो सकता है। यही कारण है कि एनक्वास प्राप्त अस्पतालों को लगातार अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखनी पड़ती है। एनक्वास क्या है? एनक्वास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली है। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को यह प्रमाणन दिया जाता है। अस्पताल का मूल्यांकन मरीजों की सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता, स्वच्छता, मानव संसाधन, संक्रमण नियंत्रण और प्रबंधन समेत लगभग 100 गुणवत्ता मानकों पर किया जाता है। प्रमाणन मिलने पर अस्पताल को गुणवत्ता सुधार के लिए 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में जिला अस्पतालों, सीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को एनक्वास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने बदला पाठ्यक्रम, 174 कॉलेजों के छात्रों को मिलेगा नया अध्ययन

 बलरामपुर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक और साहसिक शैक्षणिक कदम उठाते हुए अपने हिंदी पाठ्यक्रम में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड को शामिल कर लिया है। यह निर्णय न केवल बलरामपुर, बल्कि पूरे देश की शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है। 174 महाविद्यालयों के छात्रों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव छात्रों पर प्रभाव देवी पाटन मंडल के अंतर्गत आने वाले 174 महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी अब हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम के तहत इन पवित्र और काव्यात्मक रचनाओं का अध्ययन करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह बदलाव शिक्षा को संस्कृति, आध्यात्म और स्थानीय परंपरा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। बलरामपुर के तुलसीदास की है यह रचना, विश्वविद्यालय का दावा विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण तथ्य को भी सामने रखा है जो अब तक व्यापक रूप से चर्चित नहीं था। विश्वविद्यालय के अनुसार, हनुमान चालीसा की यह विशेष रचना गोस्वामी तुलसीदास (काशी) की नहीं, बल्कि बलरामपुर के तुलसीपुर क्षेत्र के भोजपुर निवासी संत तुलसीदास की है, जिन्होंने इसे इसी पवित्र आध्यात्मिक भूमि पर अपने साधना काल में रचा था। प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र के अनुसार, ये संत तुलसीदास स्वयं को गोस्वामी तुलसीदास का अवतार मानते थे। इस तथ्य का उल्लेख 1940 के दशक में प्रकाशित कल्याण पत्रिका में विनायक के लेख में मिलता है। इसके अलावा अखिल भारतीय विक्रम परिषद, काशी द्वारा प्रकाशित तुलसी ग्रंथावली में भी इसकी पुष्टि की गई है। बाद में ये संत भवनियापुर में बस गए और तुलसीपुर नगर की स्थापना की। कक्षावार पाठ्यक्रम में क्या-क्या बदला बीए प्रथम वर्ष के हिंदी पाठ्यक्रम में अब अयोध्याकांड (दोहा 28 से 41) और रामलला नहछू शामिल की गई हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा गोंडा क्षेत्र की अवधी बोली में रचित यह बाललीला काव्य है, जिसमें बालक राम के स्नेहपूर्ण बाल स्वरूप का जीवंत और मनोरम चित्रण है। विश्वविद्यालय स्तर पर यह पहला अवसर है जब स्थानीय अवधी रूप को इस तरह औपचारिक सम्मान दिया गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार हनुमान चालीसा को स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल किया है। यह रचना न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, बल्कि काव्य-सौंदर्य, भाषा-शक्ति और भक्ति भाव की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। एमए प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में सुंदरकांड को जोड़ा गया है, जिससे छात्रों को तुलसीदास के काव्य कौशल, भाषा-सौंदर्य और भक्ति दर्शन की गहराई समझने का अवसर मिलेगा। कुलपति का दृष्टिकोण मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रविशंकर सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य शिक्षा को अपनी संस्कृति से जोड़ना है। जब विद्यार्थी अपनी भाषा और परंपरा को जानेंगे, तभी शिक्षा का वास्तविक अर्थ साकार होगा। उनके नेतृत्व में हिंदी विभाग के पाठ्यक्रम को स्थानीयता से वैश्विकता की दृष्टि से नया रूप दिया गया है। सितंबर 2025 में यह पाठ्यक्रम में शामिल करने की स्वीकृति दे दी गई थी। इस वर्ष से नए सत्र में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय वित्त समिति के सदस्य सर्वेश सिंह ने कहा कि यह निर्णय केवल पाठ्यक्रम को समृद्ध नहीं करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी देगा कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही ज्ञान का वृक्ष फलता-फूलता है। हिंदी पाठ्यक्रम समिति के पूर्व संयोजक प्रो. शैलेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि आधुनिक शिक्षा तभी पूर्ण है, जब उसमें संस्कृति, लोकभाषा और आध्यात्मिक चेतना का समावेश हो।

2028 तक पूरा होगा DMRC प्रोजेक्ट, दक्षिण-पूर्व दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण कम होने की उम्मीद

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में मेट्रो कनेक्टिविटी को और भी मजबूत बनाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन ने गोल्डन लाइन' के विस्तार की घोषणा की है। DMRC के फेज V(A) विस्तार के तहत बनने वाला यह 3.9 किलोमीटर लंबा कालिंदी कुंज-तुगलकाबाद कॉरिडोर दिल्ली, नोएडा और फरीदाबाद के बीच सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत देगा। कब तक पूरा होगा DMRC का प्रोजेक्ट DMRC ने मैजेंटा और वॉयलेट मेट्रो लाइनों को आपस में जोड़ने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2028 के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस नए कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह यमुना रिवरफ्रंट के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व दिल्ली के मुख्य रिहायशी और उभरते इंडस्ट्रियल इलाकों को बेहतर ढंग से जोड़ेगा। नए रूट पर बनाए जाएंगे कितने स्टेशन इस 3.9 किलोमीटर के रूट पर कुल चार स्टेशन बनाए जाएंगे जिसमें सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर और कालिंदी कुंज एलिवेटेड स्टेशन होंगे, जबकि तुगलकाबाद अंडरग्राउंड बनाया जाएगा। लोगों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी DMRC के अनुसार, नया कॉरिडोर दक्षिण-पूर्व दिल्ली में रिहायशी इलाकों और इंडस्ट्रियल इलाकों के लिए कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा। यह साकेत और छतरपुर जैसे रिहायशी इलाकों तक सीधी पहुंच भी देगा और साथ ही नोएडा, फरीदाबाद, दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के बीच लिंक को बेहतर बनाएगा। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मिलेगा छुटकारा DMRC ने कहा कि नया कॉरिडोर नोएडा-फरीदाबाद रूट के साथ-साथ एयरपोर्ट से जुड़ने वाली सड़कों पर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा। एक अतिरिक्त मेट्रो कनेक्शन देकर, इस प्रोजेक्ट से रोज़ाना सफर करने वालों के लिए यात्रा की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।  

Samsung Galaxy A27 5G लॉन्च, 6 साल तक मिलेगा Android अपडेट और दमदार फीचर्स

सैमसंग ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Samsung Galaxy A27 5G है. साथ ही कंपनी ने ऐलान किया है कि इसके साथ 6 साल के लिए एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर का अपडेट मिलेगा. इसमें क्वालकॉम स्नेपड्रैगन 6 जेन का इस्तेमाल किया है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. Samsung Galaxy A27 5G की पहली सेल 3 जुलाई से शुरू होगी. इसको मल्टीपल कलर वेरिएंट में लॉन्च किया है और कीमत का अभी ऐलान नहीं किया है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. Samsung Galaxy A27 5G में पंच होल कैमरा कटआउट दिया गया है. वहीं A सीरीज में 6.7 इंच का फुल एचडी प्लस सुपर AMOLED इनफिनिटी ओ डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 120Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलता है. Samsung Galaxy A27 5G का प्रोसेसर Samsung Galaxy A27 5G में क्वालकॉम का स्नेपड्रेगन 6 जेन 3 चिपसेट का इस्तेमाल किया है, जो 4nm पर प्रोसेस करके तैयार किया गया है.  इसमें मैक्सिमम 8GB Ram और 256GB स्टोरेज मिलती है. इसकी मदद से ज्यादा ऐप्स, गेम्स और मीडिया फाइल्स को फोन में स्टोर कर सकेंगे. इसमें 2TB तक का माइक्रोएसडी कार्ड लगा सकते हैं. Samsung Galaxy A27 5G का कैमरा Samsung Galaxy A27 5G में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जिसमें 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा मिलता है, जो OIS के साथ आता है. 5 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड एंगल का लेंस मलता है. 2 मेगापि्सल का मेक्रो लेंस दिया है, जो क्लोज शॉट्स के काम आएगा. 12 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. Samsung Galaxy A27 5G की बैटरी और अन्य फीचर्स Samsung Galaxy A27 5G में 5000mAh की बैटरी दी जाएगी, जो 25W के फास्ट चार्जर के साथ आता है. इस हैंडसेट के साथ कई स्मार्ट फीचर्स मिलेंगे. यह फोन एंड्रॉयड 16 के साथ One UI 8.5 के साथ आता है. साथ ही कंपनी ने वादा किया है का आने वाले 5 साल तक तक एंड्रॉयड ओएस का अपडेट दिया जाएगा.

भुवनेश्वर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा ने डिस्कस थ्रो में रचा इतिहास

भुवनेश्वर भुवनेश्वर में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा की महिला खिलाड़ियों ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया। डिस्कस थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण, रजत और कांस्य, तीनों पदक हरियाणा की बेटियों ने अपने नाम किए। इसके साथ ही तीनों खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स के लिए निर्धारित क्वालिफाइंग मानक भी हासिल कर राज्य की खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया। पांच दिवसीय इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन 24 से 28 जून तक कलिंगा स्टेडियम, भुवनेश्वर (ओडिशा) में किया जा रहा है। प्रतियोगिता में हरियाणा के खिलाड़ी विभिन्न स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन कर पदक जीतने के साथ-साथ भारतीय टीम में जगह बनाने की दौड़ में भी आगे हैं। आगामी एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आइची-नगोया (जापान) में होगा। एथलेटिक्स हरियाणा के महासचिव प्रदीप मलिक के अनुसार, भिवानी की सीमा ने 59.73 मीटर की शानदार थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतकर एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में अपना स्थान लगभग सुनिश्चित कर लिया। वहीं महेंद्रगढ़ की सान्या यादव ने 56.05 मीटर की थ्रो के साथ रजत पदक और रोहतक की निधि रानी ने 55.92 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतते हुए एशियन गेम्स का क्वालिफाइंग मानक हासिल किया। हैमर थ्रो स्पर्धा में भी हरियाणा के झज्जर निवासी आशीष जाखड़ ने 67.61 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। इस स्पर्धा में पंजाब के दमनीत सिंह ने 69.72 मीटर की थ्रो के साथ स्वर्ण तथा राजस्थान के परवीन कुमार ने 69.58 मीटर की थ्रो के साथ रजत पदक जीता। दोनों खिलाड़ियों ने भी एशियन गेम्स क्वालिफाइंग मानक हासिल किया। प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को एथलेटिक्स हरियाणा के अध्यक्ष दिलबाग सिंह, महासचिव प्रदीप मलिक, एएफआई ग्रीवेंस कमेटी के सदस्य राजकुमार मिटान तथा टीम कोच-मैनेजर जसवंत सिवाच और अजय कुमार ने बधाई देते हुए आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।    

वास्तु शास्त्र में तवा रखने के तरीके से जुड़ी मान्यताएं और उसके प्रभाव

 वास्तु शास्त्र में रसोई को घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. यह न केवल हमारे भोजन का स्रोत है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य केंद्र भी है. रसोई में रखी हर छोटी-बड़ी वस्तु हमारे जीवन और भाग्य पर सीधा प्रभाव डालती है.  इनमें से एक सबसे सामान्य वस्तु है तवा. अक्सर जल्दबाजी में हम खाना बनाने के बाद तवे को उल्टा रख देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मामूली सी आदत आपके घर की सुख-समृद्धि को दांव पर लगा सकती है? तवे का राहु से गहरा नाता वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, रसोई में उपयोग होने वाला तवा केवल लोहे या धातु का एक टुकड़ा नहीं है.  इसका सीधा संबंध राहु ग्रह से माना जाता है.  ज्योतिष शास्त्र में राहु को मायावी और नकारात्मकता का कारक माना गया है.  यदि आप तवे को सही ढंग से नहीं रखती हैं, तो यह घर में राहु दोष पैदा कर सकता है, जिससे पारिवारिक शांति और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है. उल्टा तवा रखने के नुकसान आर्थिक तंगी: मान्यता है कि तवे को उल्टा रखने से घर में धन का प्रवाह बाधित होता है. यह फिजूलखर्ची और आर्थिक नुकसान का संकेत हो सकता है. मानसिक तनाव: वास्तु के अनुसार, उल्टा तवा घर के सदस्यों के बीच कलह और मानसिक तनाव बढ़ाता है. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. स्वास्थ्य समस्याएं: रसोई में गंदगी या गलत तरीके से बर्तन रखने का सीधा असर घर की सेहत पर पड़ता है. यह परिवार के मुखिया के स्वास्थ्य को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है. वास्तु अनुसार सही तरीका साफ-सफाई है जरूरी: रोटी बनाने के बाद तवे को हमेशा अच्छी तरह धोकर और सुखाकर ही रखें. कभी भी गंदा तवा गैस पर या स्लैब पर न छोड़ें. सीधा रखें: उपयोग के बाद तवे को हमेशा सीधा करके ही रखें. यह सकारात्मक ऊर्जा के संचार में मदद करता है. नजरों से बचाएं: कोशिश करें कि तवे को ऐसी जगह रखें जहां बाहर से आने वाले लोगों की सीधी नजर उस पर न पड़े. रसोई में इसे किसी साफ और ढकी हुई जगह पर रखना सबसे उत्तम है. कपूर का प्रयोग: कभी-कभी आप तवे पर थोड़ा कपूर का प्रयोग कर सकती हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने में सहायक माना जाता है.