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प्लेटफॉर्म 1 से 7 तक आसान सफर, मोबाइल से घर बैठे होगी कार बुकिंग सुविधा

धनबाद  धनबाद रेलवे स्टेशन पर अब सावन माह से बैट्री चलित कार की सुविधा शुरू होगी। बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सर्कुलेटिंग एरिया से प्लेटफार्म एक से प्लेटफार्म सात तक बैट्री चलित कार पर बैठ कर पहुंच सकेंगे। कार की प्री-बुकिंग के लिए मोबाइल नंबर जारी किया जाएगा। यात्री अपनी सुविधा के लिए मोबाइल से बैट्री आपरेटेड कार बुक करा सकेंगे। वैसे यात्री जो पहले से बुक नहीं कराएंगे, उन्हें पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर यह सुविधा मिलेगी। पहले इसी माह से सेवा शुरू करने की योजना थी। 30 जुलाई से सावन माह शुरू होगा। उससे पहले सेवा शुरू होगी, जिसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। घर बैठे 24 घंटे बुकिंग, स्टेशन पहुंचते ही मिलेगी कार बैट्री कार संचालक एजेंसी यात्रियों के लिए मोबाइल नंबर जारी करेगी। मोबाइल पर घर बैठे 24 घंटे कार की बुकिंग कराई जा सकेगी। इससे स्टेशन पहुंच कर इंतजार नहीं करना होगा। सुबह से रात तक की ट्रेन की टाइमिंग के अनुसार कार बुक करा कर निर्धारित समय पर संबंधित प्लेटफार्म तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन से उतर कर बाहर आने को भी मिलेगी सुविधा दूसरे शहर से धनबाद आनेवाले बुजुर्ग, बीमार, गर्भवती महिला या आम यात्रियों को प्लेटफार्म से बाहर सर्कुलेटिंग एरिया तक लाने के लिए भी बैट्री आपरेटेड कार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मोबाइल पर बुक कार कोच के बाहर खड़ी रहेगी, जो यात्री को सर्कुलेटिंग तक ले जाएगी। इससे अलेप्पी एक्सप्रेस से आनेवाले बीमार यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। ट्रेन प्रस्थान के 45 मिनट पहले पहुंचे, छूटने पर एजेंसी जिम्मेवार नहीं बैट्री चलित कार की सुविधा लेने के लिए यात्री को ट्रेन प्रस्थान के 45 मिनट पहले बोर्डिंग करना होगा। लेट पहुंचने पर ट्रेन छूट गई तो इसके लिए कार आपरेटर एजेंसी जिम्मेवार नहीं होगी। फिलहाल दो बैट्री चलित कार चलेंगी। प्रत्येक कार में पांच यात्री बैठ सकेंगे। प्रति यात्री किराया 50 रुपये चुकाना होगा। प्रत्येक यात्री अपने साथ अधिकतम 10 केजी सामान ले जा सकेंगे। पार्सल ले जानेवाले मार्ग से प्लेटफार्म तक पहुंचेगी कार स्टेशन के प्लेटफार्म एक के हावड़ा छोर पर जिस स्थान से पार्सल वाहनों की आवाजाही होती है, उसी स्थान से बैट्री चलित कार भी दो से प्लेटफार्म सात तक पहुंचेगी। आवागमन मार्ग को सुगम बनाने की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग को सौंपी गई है। पेट्रोल पंप की खाली जमीन पर सितंबर अंत से कोच रेस्टोरेंट धनबाद स्टेशन के पास पेट्रोल पंप की खाली जमीप पर कोच रेस्टोरेंट संचालन की तैयारियां अब अंतिम चरण में है। सितंबर माह के अंत तक कोच रेस्टाेरेंट का संचालन शुरू होने की उम्मीद है। एजेंसी ओर से शुल्क जमा करने के साथ ही रेलवे की कागजी प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही पटरी बिछा कर उस पर रेल कोच खड़ी की जाएगी। स्टेशन के दक्षिणी छोर के बाद शहर में यह दूसरा रेल कोच रेस्टोरेंट होगा, जहां ट्रेन के अंदर बैठ कर मनपसंद व्यंजन का लुत्फ उठा सकेंगे।

जल जीवन मिशन में पिछड़ा झारखंड: लाखों घर अब भी पाइपलाइन पानी से वंचित

रांची झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत चल रही हर घर नल जल योजना की प्रगति चिंताजनक है. देश के 100 सबसे पिछड़े प्रखंडों की सूची में झारखंड के 14 प्रखंड शामिल हैं, जहां पेयजल आपूर्ति की स्थिति खराब है. इन 14 प्रखंडों के कुल 3,40,291 घरों में से अब तक मात्र 29,433 घरों तक ही पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल पहुंच सका है. यानी इन क्षेत्रों में औसत प्रगति केवल 8.65 प्रतिशत है. पलामू का मोहम्मदगंज की स्थिति सबसे बदतर सबसे बदतर स्थिति पलामू के मोहम्मदगंज प्रखंड की है, जहां 9,823 घरों में से सिर्फ 39 घरों तक ही पानी पहुंच पाया है. योजना के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य के लगभग 27.89 लाख ग्रामीण परिवार आज भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में कुल 62.52 लाख घर हैं, जिनमें से अब तक केवल 34.62 लाख घरों (55.38 प्रतिशत) को ही कवर किया जा सका है, जबकि इस योजना का राष्ट्रीय औसत 82.03 प्रतिशत है. इससे झारखंड करीब 26.65 फीसदी पीछे चल रहा है. वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना की अवधि दिसंबर 2024 में समाप्त हो गई थी, जिसे केंद्र सरकार ने अब बढ़ाकर 2028 तक विस्तार दिया है. सिमडेगा सबसे आगे जिलेवार प्रदर्शन की बात करें तो सिमडेगा की स्थिति राष्ट्रीय स्तर से भी बेहतर है. सिमडेगा में 92.93 प्रतिशत घरों (1,30,131 में से 1,20,932 घर) तक पानी पहुंचाया जा चुका है. वहीं, रांची, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में प्रगति 70 प्रतिशत से कम है. राज्य में सबसे खराब स्थिति पाकुड़ जिले की है, जहां मात्र 12.85 प्रतिशत और गोड्डा में केवल 19.33 प्रतिशत घरों तक ही नल का जल पहुंच पाया है.  

MP में डीपफेक से सनसनी! उज्जैन की MBBS छात्रा और भोपाल की मां-बेटी के वीडियो वायरल, जांच में चौंकाने वाले खुलासे

उज्जैन / भोपाल मध्यप्रदेश के उज्जैन में MBBS की पढ़ाई कर रही एक छात्रा का फेक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार छात्रा और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा तथा तरक्की से जलन रखने वाले रिश्तेदारों ने ही उसे बदनाम करने की साजिश रची थी. आरोपियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान जमा कराई गई छात्रा की तस्वीर हासिल की और तकनीकी माध्यमों से उसका आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है।  पिता की शिकायत के बाद सामने आया मामला जानकारी के अनुसार मक्सी रोड क्षेत्र के एक किसान ने 20 जून की रात पंवासा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया कि उनके मोबाइल पर एक वीडियो आया, जिसमें उनकी नाबालिग बेटी के नाम से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो दिनों तक गोपनीय रूप से जांच की और वीडियो के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया।  BLO से हासिल की गई छात्रा की तस्वीर जांच में सामने आया कि छात्रा की तस्वीर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान जमा दस्तावेजों से हासिल की गई थी. पुलिस के अनुसार बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी ने एसआईआर फॉर्म में लगी छात्रा की फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी. बाद में यह तस्वीर अन्य आरोपियों तक पहुंची. इसी तस्वीर का उपयोग कर AI और डीपफेक जैसी डिजिटल एडिटिंग के जरिए आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।  MBBS की पढ़ाई और परिवार की तरक्की बनी वजह पंवासा थाना प्रभारी गमर सिंह मंडलोई के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता अपने गांव और समाज की पहली लड़की है जो MBBS की पढ़ाई कर रही है. पुलिस का दावा है कि छात्रा के परिवार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से कुछ रिश्तेदार नाराज थे. परिवार की बढ़ती प्रतिष्ठा को देखते हुए आरोपियों ने उसे बदनाम करने की साजिश रची. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का उद्देश्य कथित तौर पर परिवार पर सामाजिक दबाव बनाना था ताकि छात्रा की पढ़ाई प्रभावित हो सके।  उज्जैन: MBBS कर रही छात्रा बनी रिश्तेदार की साजिश का शिकार उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक MBBS छात्रा के फोटो को अश्लील वीडियो से जोड़कर सोशल मीडिया और गांव के वॉट्सएप ग्रुप पर वायरल कर दिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि यह साजिश छात्रा के ही रिश्तेदार ने रची थी। उसका मकसद छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि छात्रा का फोटो सरकारी रिकॉर्ड से एक महिला BLO ने आरोपियों को उपलब्ध कराई थी। इसके बाद फोटो को एडिट कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया और गांव के ग्रुपों पर वायरल कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। महिला BLO को जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है। सरकारी रिकॉर्ड से मिला फोटो पुलिस के मुताबिक, छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी फोटो जुटाना आसान नहीं था। आरोपी को पता चला कि छात्रा ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान BLO को अपना फोटो दिया था। वहीं से फोटो हासिल कर उसे डीपफेक वीडियो में इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में चुनावी और पारिवारिक रंजिश को घटना की वजह माना जा रहा है। भोपाल: शादी से इनकार पर मां-बहन को बनाया निशाना भोपाल के करोंद इलाके में एक युवक को अपनी प्रेमिका से शादी से इनकार करना भारी पड़ गया। आरोप है कि युवती ने बदला लेने के लिए युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की AI से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से वायरल कर दिए। पीड़ित परिवार का कहना है कि तस्वीरें वायरल होने के बाद उनकी बेटी तनाव में है और पूरा परिवार बदनामी झेल रहा है। परिवार ने थाने में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई पीड़ित परिवार ने पहले छोला थाना में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी युवती के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इन दोनों मामलों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि AI और डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल लोगों की प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर निजी फोटो साझा करने में सावधानी बरतने और संदिग्ध कंटेंट दिखने पर तुरंत पुलिस से शिकायत करने की सलाह दे रहे हैं। चार महीने पहले तैयार किया गया था फेक वीडियो पुलिस जांच में पता चला कि कथित फेक वीडियो करीब चार महीने पहले तैयार किया गया था. बताया जा रहा है कि छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी तस्वीर जुटाना आसान नहीं था. आरोपियों को जब पता चला कि छात्रा की फोटो सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध है, तो उसी का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार किया गया. कुछ समय बाद यह वीडियो छात्रा के पिता तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने पुलिस की शरण ली।  तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(ए) के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने आबिद पटेल, एहसान पटेल और मुजफ्फर पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार बताया जा रहा है।  मोबाइल जब्त, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी जांच एजेंसियों ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं. इन उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि वीडियो बनाने, एडिट करने और प्रसारित करने की पूरी प्रक्रिया का पता लगाया जा सके. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो कितने लोगों तक पहुंचा और इसके प्रसार … Read more

प्रधानों की नियुक्ति बनाम अदालत का सवाल: पंचायत व्यवस्था पर असमंजस गहराया

जौनपुर ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शुक्रवार को आई सख्त टिप्पणी के बाद प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की धड़कन बढ़ गई हैं। अदालत ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय सीमा पूछे जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने यह निर्णय पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक विचार-विमर्श के बाद लिया था। यदि सरकार का फैसला न्यायिक कसौटी पर नहीं टिक पाया तो पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों, नई योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है। अब सबकी नजर 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। बहरहाल इस मुद्दे पर जब प्रधानों से उनकी राय ली गई तो अलग-अलग मत सामने आए।     सरकार का निर्णय बिल्कुल ठीक था। प्रशासन को प्रशासक बनाए जाने के बाद उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति नहीं होती। हमारी समझ से जब तक सरकार पूरी चुनावी तैयारी नहीं कर लेती है, चुनाव का कोई औचित्य नहीं है। -विजय सिंह, प्रधान गैरवाह।     यह सरकार और कोर्ट के बीच गतिरोध में प्रधान व आम जनता परेशान है। अब इसे सरकार की तय करे कि उसे करना क्या है। हम चुनाव के लिए तब भी तैयार थे और अब भी हैं। -राम प्रकाश दुबे, अध्यक्ष प्रधान संघ, सुइथाकलां।     सरकार के समक्ष व्यावहारिक कठिनाई थी जिसके चलते यह निर्णय लेना पड़ा। सरकार ने जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया। अब कोर्ट के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। -बलराम बिंद, प्रधान, ईशापुर।     पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय न होने से सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा, जो जनता के हित मे था। अब कोर्ट का क्या रुख है और उस पर सरकार क्या निर्णय लेती है इसे देखना होगा। -राम सकल वर्मा, प्रधान, सारी जहांगीर पट्टी।     सरकार का निर्णय आम जनता के हित में था। विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो इसलिए सरकार द्वारा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया, रही बात कोर्ट की तो उसका जवाब सरकार ही दे सकती है। -राजन यादव, प्रधान, समसुद्दीनपुर।  

अजमेर में खीरे की खेती परियोजना को लेकर मंत्री के सब्सिडी लाभ पर हितों के टकराव के सवाल उठे

अजमेर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाली एक योजना से लगभग 99 लाख रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी मिली है। यह सब्सिडी उन्हें राजस्थान में उनके खीरे के खेत के लिए दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पैसा जिस बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया, मंत्री महोदय खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। साइनबोर्ड खोलता है राज: क्या है पूरा मामला? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत है, जहां कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हैं। यहां लगे सफेद साइनबोर्ड पर लिखा है, "राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।" बोर्ड पर लाभार्थी का नाम 'भागीरथ चौधरी' और 50% सब्सिडी की रकम '99,60,000 रुपये' लिखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी कुछ महीने पहले उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें वह खुद मंत्री (MoS) हैं। यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना "हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और फसल के बाद के प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास" के तहत दिया गया है। 2025 में इस योजना के तहत जिन 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, उसमें मंत्री जी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल है। मंजूरी में 'सुपरफास्ट' स्पीड: प्रोजेक्ट और लोन की फुल डिटेल साइनबोर्ड के मुताबिक, प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है। इसमें प्रमोटर का शेयर 49.8 लाख रुपये है। चौधरी ने इस प्रोजेक्ट के लिए HDFC बैंक से 1.49 करोड़ रुपये का लोन लिया था। मार्च 2026 में NHB से अंतिम मंजूरी मिलने के कुछ ही हफ्तों के भीतर 99 लाख रुपये से ज्यादा की सब्सिडी सीधे उनके HDFC बैंक के लोन खाते में क्रेडिट कर दी गई। मंत्री जी ने 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और सिर्फ 14 दिनों के भीतर ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। जबकि, नियमों के मुताबिक मंजूरी से पहले साइट का संयुक्त रूप से निरीक्षण होना अनिवार्य है। सवालों के घेरे में क्यों है यह सब्सिडी? जिस बोर्ड (NHB) ने इस सब्सिडी को पास किया है, भगीरथ चौधरी उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। हालांकि अंतिम मंजूरी देने वाली कमेटी में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं। अप्रूवल से एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दी गई संपत्ति की घोषणा में मंत्री ने अपनी पीह वाली कृषि भूमि का जिक्र तो किया है, लेकिन इस पेंडिंग NHB प्रोजेक्ट की कोई जानकारी नहीं दी। हालांकि, उनके एक सहयोगी का कहना है कि इसका "खुलासा किया जाएगा।" भगीरथ चौधरी ने इससे पहले 2018 में भी इस योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन तब हार्ड कॉपी जमा करने में देरी के चलते उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया था। क्या है मंत्रालय की यह योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक खेती (मुनाफे के लिए) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना है। इसके तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर जैसी 3 सब्जियों और गुलाब व आर्किड सहित 8 प्रकार के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। एक परिवार के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये तय है। प्रोजेक्ट पूरा होने के तीन महीने के भीतर सब्सिडी की रकम लोन अकाउंट में जमा कर दी जाती है। हितों के टकराव को लेकर जब मीडिया संस्थान ने केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी से संपर्क किया और सवालों की सूची भेजी, तो उनके कार्यालय ने ईमेल मिलने की पुष्टि की, लेकिन मंत्री की तरफ से कोई जवाब या टिप्पणी नहीं आई।  

दक्षिण बिहार के गया, नवादा और औरंगाबाद में नई सोलर परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी

 पटना  ग्रीन इनर्जी के क्षेत्र में बिहार की स्थिति यह है कि सोलर इनर्जी के क्षेत्र में गतिविधियां अधिक है। अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले सोलर इनर्जी यूनिट उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार स्थित जिलों में अधिक आ रहे। अब तक की सबसे बड़ी यूनिट लखीसराय के कजरा में लगी है जिसकी क्षमता 185 मेगावाट है। यह कजरा की प्रथम यूनिट है। बिजली कंपनी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार साेलर इनर्जी के क्षेत्र में अभी 367.1 मेगावाट की कुल क्षमता की अलग-अलग यूनिट पर काम हो रहा है। गयाजी में कई यूनिट पर हो रहा काम दक्षिण बिहार के गयाजी जिले में कई यूनिटों पर काम हो रहा है। इनमें एक यूनिट गयाजी के शेरघाटी में है जिसकी क्षमता 10 मेगावाट है। गयाजी के ही आमस में 15 मेगावाट और 10 मेगावाट वाली अलग यूनिट, बहेरा में 15 मेगावाट क्षमता की यूनिट अस्तित्व में आने वाली है। इसी तरह नवादा जिला स्थित अकबरपुर में 10 मेगावाट, दरियापुर में तीन मेगावाट की सोलर यूनिट अस्तित्व में आ रही है। औरंगाबाद में 20 मेगावाट की सोलर यूनिट आ रही। उत्‍तर बिहार के कई ज‍िलों में चल रहा काम पटना के बिक्रम में नहर किनारे दो मेगावाट की सोलर यूनिट कमीशंड है। उत्तर बिहार की बात करें तो पश्चिम चंपारण के रामनगर में पांच मेगावाट, मुडेरा में 10 मेगावाट, दरभंगा के मुंदरपुर में 1.6 मेगावाट, सुपौल में फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट0.5 मेगावाट यूनिट पर काम हो रहा। कजरा के बाद सबसे अधिक क्षमता 50 मेगावाट वाली यूनिट बांका में है। बांका में इसके अतिरिक्त दो अन्य यूनिट पर काम हो रहा। इसमें एक की क्षमता 15 और एक की 10 मेगावाट है। यानी वहां 75 मेगावाट क्षमता की सोलर इनर्जी उपलब्ध होगी। बांका के बौंसी में पांच मेगावाट क्षमता की एक यूनिट अलग से है।  

लखनऊ में बिजली की अधिकतम मांग 32,673 मेगावाट तक पहुंची, खपत के सारे रिकॉर्ड टूटे

 लखनऊ प्रदेश में भीषण गर्मी से बिजली की खपत और अधिकतम मांग के पिछले सारे रिकार्ड टूटते जा रहे हैं। गुरुवार को बिजली की रिकार्ड खपत 693.46 मिलियन (69.35 करोड़) यूनिट रही। इससे पहले बुधवार को 67.84 करोड़ और 21 जून को 67.66 करोड़ यूनिट बिजली की खपत रही थी। पारा न गिरने से बुधवार रात 9.51 बजे 32,673 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग का भी नया रिकार्ड बना है। मानसून के विलंबित होने के कारण अब तक वर्षा न होने से इनदिनों रात और दिन के तापमान में बहुत अंतर न होने से न्यूनतम बिजली की मांग भी 23-24 हजार मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है। वर्षा न होन से बिजली की मांग के 34 हजार मेगावाट के भी पार जाने का अनुमान है। इस बीच विभिन्न कारणों से तापीय परियोजनाओं की तीन यूनिटें घाटमपुर की 660-660 मेगावाट की दो व पारीछा की 250 मेगावाट की एक यूनिट के ठप होने से लगभग डेढ़ हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है। हालांकि, पावर कारपोरेशन प्रबंधन का दावा है कि प्रदेशवासियों को तय शेड्यूल से कहीं अधिक बिजली की आपूर्ति की जा रही है दावा है कि शहरों को 24 घंटे बिजली देने के साथ ही गांवों में भी 18 के बजाय 21 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पावर एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली न मिलने से गांवों में जरूर रात के समय दो-तीन घंटे बिजली की कटौती की जा रही हैं लेकिन उसकी भरपाई दिन में कहीं ज्यादा बिजली देकर की जा रही है।

मानसून स्पेशल: कम समय के लिए मिलने वाला जामुन सेहत के लिए क्यों है फायदेमंद

मानसून का मौसम आते ही बाजार में कई तरह के ताजे फल दिखाई देने लगते हैं. आम और लीची के बीच एक ऐसा फल भी होता है, जिसकी उपलब्धता बहुत कम समय के लिए रहती है. यह फल स्वाद के साथ-साथ अपने पोषण गुणों के लिए भी जाना जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसके सीजन में इसका सीमित मात्रा में सेवन शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचा सकता है. सिर्फ कुछ समय के लिए मिलता है जामुन जामुन एक मौसमी फल है, जो आमतौर पर साल में केवल एक-दो महीने के लिए ही बाजार में उपलब्ध रहता है. यही वजह है कि इसके मौसम में इसे खाने की सलाह दी जाती है. जामुन में विटामिन-सी, फाइबर, पोटैशियम, आयरन और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद करते हैं. जामुन का रंग क्यों माना जाता है खास? जामुन का गहरा बैंगनी रंग उसमें मौजूद एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट के कारण होता है. यह तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है. साथ ही यह कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को सपोर्ट करने में भी सहायक माना जाता है. ब्लड शुगर और पाचन के लिए कैसे फायदेमंद है? जामुन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और पाचन प्रक्रिया को भी सहारा मिलता है. कुछ अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि जामुन में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर के संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि, इसे किसी भी बीमारी की दवा नहीं माना जाना चाहिए. बीपी, लीवर और इम्यूनिटी को भी मिल सकता है लाभ जामुन में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट हृदय स्वास्थ्य और ब्लड प्रेशर के सामान्य स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. वहीं विटामिन-सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करता है. कुछ शोधों के अनुसार, जामुन का सेवन लीवर की कार्यप्रणाली को भी सहयोग दे सकता है. वजन घटाने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण जामुन वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है. संतुलित आहार के साथ इसका सेवन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है.

पटना मौसम अपडेट: 28 जून को बिजली-बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई जिलों में सतर्कता जरूरी

पटना  पटना मौसम विज्ञान केंद्र की तरफ से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, 28 जून को बिहार में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलने वाला है। एक तरफ कुछ जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट, कड़कती बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की अनुमान लगाया गया है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, कटिहार, भागलपुर और पूर्णिया जिलों के कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है। वहीं मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, रोहतास, भभुआ, भोजपुर, बक्सर, अरवल और औरंगाबाद जिलों में मेघगर्जन आकाशीय बिजली गिरने के आसार हैं। इसके अलावा, इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। दूसरी ओर, राज्य के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। इस क्षेत्र के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। तापमान की बात करें तो दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार, जिनमें पटना, गया, बक्सर और भोजपुर जैसे जिले शामिल हैं, वहां अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। जबकि उत्तर बिहार और दक्षिण-पूर्व बिहार के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। राज्यभर में न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की संभावना है।

केतन हत्याकांड में बड़ा खुलासा, सिया गोयल की पढ़ाई को लेकर दावा गलत; परिवार ने बताई बुरी आदतों की कहानी

पुणे  पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा अपडेट सामने आ रहा है. लोनावला ग्रामीण पुलिस इस मामले में मुख्य आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को शुक्रवार को गुप्त रूप से लोहगढ़ किले के पास लेकर गई थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों को सुबह करीब 11 बजे किले के पास लाया गया था. इस दौरान जांच अधिकारियों ने दोनों से पूछा कि वे किले तक पहुंचने के लिए किस रास्ते का इस्तेमाल कर पहुंचे थे।  पुलिस का कहना है कि किले तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग रास्ते हैं. सिया और चेतन से यह पहचान करने को कहा गया कि उन्होंने कौन-सा रास्ता अपनाया था. घटनास्थल के रास्ते की जांच के बाद पुलिस दोनों आरोपियों को वापस पुलिस थाने ले गई. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस आने वाले दिनों में सिया गोयल के माता-पिता के बयान भी दर्ज कर सकती है।  दरअसल सिया और चेतन से पूछताछ कर रही पुलिस का दावा है कि सिया और चेतन एक-दूसरे पर आरोप मढ़कर जांच को भटकाने और देरी कराने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस के मुताबिक, सिया और चेतन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो रही है।  ‘बस 10वीं पास है सिया’ इस बीच सिया गोयल को लेकर नए दावे सामने आए हैं. केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि शादी तय होने से पहले उनके परिवार को सिया की शिक्षा और उसके व्यक्तित्व को लेकर गलत जानकारी दी गई थी. विशाल अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब दोनों परिवारों के बीच रिश्ता तय हो रहा था, तब उन्हें बताया गया था कि सिया बी.कॉम कर चुकी है और जल्द ही अपना बेकरी का कारोबार शुरू करने की सोच रही है।  केतन के पिता के मुताबिक, पुलिस जांच के दौरान सामने आई जानकारी से उन्हें बड़ा झटका लगा. उन्होंने दावा किया कि जांच में पता चला है कि सिया केवल 10वीं पास है और 12वीं की परीक्षा भी पास नहीं कर सकी थी. विशाल अग्रवाल के मुताबिक, यह जानकारी पहले उनसे छिपाई गई थी।  ‘बुरी आदतों से परेशान था परिवार’ केतन के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि सिया को शराब पीने समेत कई बुरी आदतें थीं और उसका परिवार भी उसके व्यवहार से परेशान था. उनका दावा है कि इसी वजह से परिजनों ने एक अच्छे और संपन्न परिवार में उसकी शादी कराने का फैसला किया, ताकि उसकी जिंदगी पटरी पर आ सके।  विशाल अग्रवाल के अनुसार, इसी सोच के तहत सिया के परिवार ने उस पर केतन से शादी करने का दबाव बनाया. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।  लोहगढ़ किले पर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस पहले ही सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर चुकी है. दोनों इस वक्त न्यायिक हिरासत में हैं. पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर सुनियोजित तरीके से केतन की हत्या की साजिश रची थी. फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।