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हरियाणा के सिखों को मिला रिकॉर्ड संख्या में वीजा, ननकाना साहिब और करतारपुर साहिब में नतमस्तक होंगे श्रद्धालु

  कुरुक्षेत्र धर्मनगरी कुरुक्षेत्र से आज आस्था और उत्साह की एक विशेष तस्वीर सामने आई। पाकिस्तान स्थित पवित्र गुरुधामों के दर्शन और बैसाखी पर्व मनाने के लिए 255 भारतीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज रवाना हुआ। कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही से हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGMC) के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 5 विशेष बसों में अमृतसर के लिए रवानगी श्रद्धालुओं को ले जाने के लिए कुल 5 बसों की व्यवस्था की गई है। यह जत्था कुरुक्षेत्र से सीधा अमृतसर पहुँचेगा, जहाँ रात्रि विश्राम के बाद कल वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करेगा। यात्रियों में अपने पवित्र स्थलों के दर्शन को लेकर भारी उत्साह देखा गया। बैसाखी और खालसा सृजन दिवस का संगम इस वर्ष पाकिस्तान में बैसाखी पर्व को खालसा सृजन दिवस के रूप में बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। श्रद्धालु वहां ननकाना साहिब, पंजा साहब और करतारपुर साहिब सहित विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों में नतमस्तक होंगे। कई श्रद्धालुओं ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें जीवन में पहली बार इन पवित्र स्थलों के दर्शन का सौभाग्य मिल रहा है। रिकॉर्ड संख्या में वीजा मिलना बड़ी उपलब्धि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अनुसार, इस बार हरियाणा प्रदेश से रिकॉर्ड 255 यात्रियों को वीजा जारी किया गया है। प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने बताया कि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अनुमति मिली है, जो सिख समाज के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। 10 दिनों की यात्रा के बाद 19 अप्रैल को होगी वापसी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सभी श्रद्धालु पाकिस्तान के अलग-अलग गुरुधामों में धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। दर्शन और बैसाखी समारोह संपन्न करने के बाद, यह जत्था 19 अप्रैल को वापस भारत (वतन वापसी) लौटेगा। रवानगी के समय पूरा वातावरण 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयकारों से गूंज उठा।  

आर्थिक मोर्चे पर यूपी की बड़ी छलांग, नेट जीएसटी संग्रह में कर्नाटक और गुजरात को पीछे छोड़ा

लखनऊ उत्तर प्रदेश ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य कर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश नेट कलेक्शन के आधार पर देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पोस्ट सेटलमेंट वृद्धि के मामले में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश को एसजीएसटी और आईजीएसटी से कुल 84.80 हजार करोड़ रुपये मिले। इसमें से 2.37 हजार करोड़ रुपये की रिकवरी के बाद नेट संग्रह 82.42 हजार करोड़ रुपये रहा। इस आधार पर उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। महाराष्ट्र 1.84 लाख करोड़ रुपये के नेट संग्रह के साथ पहले स्थान पर है। मार्च 2026 में राज्य का संग्रह 7.53 हजार करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत है। नेट संग्रह की स्थिति  वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का एसजीएसटी और आईजीएसटी कलेक्शन 82.42 हजार करोड़ रुपये रहा। यह महाराष्ट्र के 1.84 लाख करोड़ रुपये के बाद दूसरा सबसे बड़ा संग्रह है। कर्नाटक का नेट संग्रह 81.06 हजार करोड़ रुपये रहा। गुजरात का नेट संग्रह 73.17 हजार करोड़ रुपये और तमिलनाडु का 72.97 हजार करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वृद्धि दर में अग्रणी प्रदर्शन  उपभोक्ता आधारित राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन वृद्धि के मामले में सबसे बेहतर रहा है। मार्च 2026 में राज्य के संग्रह में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में गिरावट आई। जीएसटी संग्रह में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर व्यापार और उपभोग से जुड़ी है। जीएसटी 2.0 में करों में कटौती के बावजूद उत्तर प्रदेश का कर संग्रह बढ़ा है। राज्यकर आयुक्त डॉ. नीतिन बंसल का कहना है कि जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी सीधे तौर पर व्यापार और उपभोग से जुड़ी होती है। जीएसटी 2.0 में आम लोगों को राहत के लिए करो में कटौती के बावजूद उत्तर प्रदेश का कर संग्रह बढ़ा है। जबकि उपभोक्ता आधारित अन्य राज्यों में नकारात्मक ग्रोथ है। वर्तमान वित्त वर्ष में इसे और बढ़ाने के लिए विभाग कई नए प्रयास कर रहा है। कई नई शुरुआत कर रहा है जिसका असर जल्द सामने आएगा।  

उत्तर प्रदेश में 5.5 लाख प्रगणक संभालेंगे डिजिटल जनगणना का जिम्मा, मुख्य सचिव ने 10 अप्रैल तक तैयारी पूरी करने के दिए निर्देश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्‍होंने निर्देश दिए कि मकान सूचीकरण और गणना से जुड़े सभी प्रारंभिक कार्य 10 अप्रैल तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। बैठक में महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण भी शामिल हुए। उन्होंने भी जनगणना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। पर्यवेक्षकों को 16 अप्रैल से 7 मई के बीच ट्रेनिंग इस मौके पर मुख्य सचिव ने कहा कि यूपी में लगभग 5.5 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जानी है, जिसके लिए उनका सत्यापित और ताजा डिजिटल डेटाबेस निर्धारित समय सीमा के भीतर तैयार किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से घनी शहरी बस्तियों, झुग्गी क्षेत्रों और अधिक गतिशील आबादी वाले इलाकों में सटीक और पूर्ण गणना सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को फील्ड में भेजने से पहले 16 अप्रैल से 7 मई के बीच अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। जनगणना के आंकड़े देश के विकास की दिशा तय करते हैं। यह विकास की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सभी अधिकारी और कर्मचारी इसे जन-अभियान के रूप में संचालित करें ताकि सटीक और विश्वसनीय आंकड़े प्राप्त हो सकें। तकनीकी सहायकों की होगी भर्ती प्रशिक्षण से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं जैसे कक्ष, प्रोजेक्टर, जलपान और उपस्थिति शासनादेश के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं और यह प्रक्रिया 6 मई से पहले पूरी कर ली जाए। गोयल ने कहा कि गणना ब्लॉकों का सीमांकन स्पष्ट और त्रुटिरहित होना चाहिए। इसके लिए तकनीकी सहायकों की भर्ती शीघ्र पूरी कर जियो-टैगिंग और सीमांकन कार्य को मजबूत बनाया जाए। स्व-गणना की सुविधा भी रहेगी मुख्‍य सचिव ने बताया कि इस बार जनगणना में आम नागरिकों के लिए स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश में स्व-गणना पोर्टल 7 मई से 21 मई 2026 तक सक्रिय रहेगा, जिसके माध्यम से नागरिक स्वयं अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।     उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी।     डेटा संग्रहण, प्रविष्टि, सत्यापन और निगरानी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होंगी।     पहले चरण में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी।     दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या गणना का कार्य संपन्न होगा।    

वनप्लस ने लॉन्च किया 9000mAh बैटरी वाला दमदार फोन, एक बार चार्ज करने पर चलेगा ढाई दिन

स्मार्टफोन इंडस्ट्री में आजकल ढेरों स्मार्टफोन ऐसे लॉन्च हुए हैं, जिनके अंदर मेगा बैटरी का यूज किया है. यानी फोन में 7000mAh से लेकर  9000mAh बैटरी पैक तक के कई फोन मिल जाएंगे.  मंगलवार को वनप्लस ने भी 9000mAh की बैटरी वाला फोन लॉन्च किया है. बड़ा बैटरी पैक देने से स्मार्टफोन को सिंगल चार्ज में ज्यादा चलाया जा सकेगा. वनप्लस का दावा है कि 9000mAh बैटरी वाला वनप्लस नॉर्ड 6 एक बार फुल चार्जिंग के बाद ढाई दिन तक का बैटरी बैकअप देने की काबिलियत रखता है. आज के समय में लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ चुका है. ऑफिस के काम से लेकर इंडियन प्रीमियर लीक (IPL 2026) के मैच देखने तक में मोबाइल का यूज होता है. ऐसे में ज्यादा बैटरी बैकअप से यूजर्स को फायदा मिलता है. यूजर्स को बार-बार चार्जिंग की जरूरत नहीं होती है. मेगा बैटरी पैक होने के नुकसान भी     स्मार्टफोन में मेगा बैटरी पैक देने के कई नुकसान भी हैं. इसकी वजह से मोबाइल की थिकनेस बढ़ जाती है और फोन ज्यादा बल्की नजर नजर आता है.     मेगा बैटरी पैक की वजह से स्मार्टफोन में चार्जिंग टाइम में इजाफा हो जाता है. ऐसे में यूजर्स को मोबाइल बैटरी को फुल चार्ज करने में ज्यादा समय लगेगा.     स्मार्टफोन में ज्यादा बड़ी बैटरी होने की वजह से उसमें ओवर हीटिंग से संबंधित समस्या सामने आने लगती है. मोबाइल में ओवर हीटिंग की वजह से मोबाइल की परफोर्मेंस प्रभावित होती है और वह कई बार हैंग भी हो सकता है.     मेगा बैटरी होने की वजह से स्मार्टफोन में ब्लास्ट होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर बैटरी पर ज्यादा प्रेशर बनता है तो बैटरी में आग लग सकती है. ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियां क्यों नहीं करती सैमसंग और ऐपल के फ्लैगशिप हैंडसेट भारत समेत दुनियाभर में पॉपुलर हैं. इसके बावजूद ये कंपनियां अपने हैंडसेट में मेगा बैटरी जैसे 7000mAh या 9000mAh बैटरी का यूज नहीं करती हैं. इसके पीछे कई वजह हैं, जैसे स्मार्टफोन थिकनेस, फोन सेफ्टी, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड और एफिसिएंसी मैनेजमेंट. सैमसंग और ऐपल अपनी फ्लैगशिप सीरीज में भले ही 5000mAh से कम साइज का बैटरी पैक यूज करते हैं, उसके बावजूद उसमें बेहतर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को प्रोवाइड कराते हैं. ऐसे में छोटा बैटरी पैक होने के बावजूद फुल डे बैटरी बैकअप मिलता है.

बैंक फ्रॉड मामला, हरियाणा में IAS अधिकारियों का बड़ा फेरबदल

  चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने बुधवार रात 15 आई.ए.एस. अफसरों के तबादले करके कई अफसरों को सख्त संदेश दिया है। अहम यह है कि आई.डी.एफ.सी. बैंक फ्रॉड के मामले में सी.बी. आई. जांच की मंजूरी से पहले 3 आई.ए.एस. अफसरों पर सरकार ने गाज गिरा दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त प्रधान सचिव (ए.पी.एस.) आई.ए.एस. साकेत कुमार को उनके सभी पदों से हटाते हुए अभिलेखागार विभाग की जिम्मेदारी दे दी है। वहीं अजय कुमार को चीफ मिनिस्टर के डिप्टी प्रिंसीपल सैक्रेटरी-11 (नया पद) बनाया गया है। इसी तरह सीनियर आई. ए. एस. पंकज अग्रवाल और डी.के. बेहरा को महत्वपूर्ण विभागों से पदमुक्त करते हुए साइड लाइन कर दिया गया है। पंकज अग्रवाल को आर्किटेक्चर विभाग का प्रधान सचिव वहीं डी. के. बेहरा को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन का सचिव लगाया गया है। चर्चा है कि इन तीनों अफसर का नाम आई.डी.एफ.सी. बैंक फ्रॉड में सामने आया है। ये सभी अफसर पूर्व में पंचायत विभाग में तैनात रह चुके हैं। चर्चा है कि ए.सी.बी. की ओर से इन अफसरों के खिलाफ 17ए की कार्रवाई शुरू करने के लिए मंजूरी मांगी गई है। वहीं अन्य तबादलों में विनीत गर्ग पहले हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन थे, अब अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी विभाग बनाए गए हैं। ए.सी.एस. अनुराग अग्रवाल पहले टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग और अर्बन एस्टेट्स विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे, अब इसके अलावा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ-साथ हरियाणा सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के एडवाइजर भी होंगे। विजयेन्द्र कुमार कृषि एवं किसान कल्याण, पर्सनल, सैनिक कल्याण समेत कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, अब विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी होंगे। राजीव रंजन लेबर और यूथ एम्पावरमेंट विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी थे, अब सहकारिता विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी भी बनाए गए हैं। आई.ए.एस. सी.जी. राजिनी कान्थन फाइनैंस विभाग (हरियाणा-III) के कमिश्नर एवं सैक्रेटरी थे, अब माइंस एवं जियोलॉजी विभाग के कमिश्नर एवं सैक्रेटरी भी होंगे। जे. गणेशन- फूड, सिविल सप्लाइज, हाऊसिंग फॉर ऑल और हारट्रोन समेत कई पदों पर थे, अब हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन और पब्लिक हैल्थ इंजीनियरिंग विभाग के कमिश्नर एवं सैक्रेटरी भी होंगे। अतुल कुमार ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे, अब फाइनेंस विभाग (हरियाणा-1) के कमिश्नर एवं सैक्रेटरी भी बनाए गए हैं। मनी राम शर्मा सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार थे, अब स्वास्थ्य विभाग के सैक्रेटरी बनाए गए हैं। डॉ. आदित्य दहिया हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के एम.डी. थे, अब हरियाणा पावर जैनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एम.डी. भी होंगे। अजय कुमार गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर और श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर थे, अब चीफ मिनिस्टर के डिप्टी प्रिंसीपल सैक्रेटरी-II (नया पद) बनाए गए हैं। उत्तम सिंह करनाल के डिप्टी कमिश्नर और स्मार्ट सिटी के सी.ई.ओ. थे, अब गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर और श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर होंगे। आनंद कुमार शर्मा रोहतक के डिस्ट्रिक्ट म्यूनिसिपल कमिश्नर समेत कई पदों पर थे, अब करनाल के डिप्टी कमिश्नर और करनाल स्मार्ट सिटी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बनाए गए हैं।

सीएम नायब सैनी की सख्त कार्रवाई, IAS राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार सस्पेंड, बैंक फ्रॉड से जुड़े तार

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में संलिप्तता के आरोपों के चलते दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में राम कुमार सिंह, आईएएस (एचवाई 2012) शामिल हैं, जो राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के साथ-साथ पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। सरकार के आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान राम कुमार सिंह का मुख्यालय मुख्य सचिव, हरियाणा के कार्यालय (सर्विसेज-1 शाखा) में निर्धारित किया गया है। इसी तरह, प्रदीप कुमार-1, आईएएस (एचवाई 2011), जो राज्य परिवहन विभाग में निदेशक और परिवहन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे, को भी निलंबित किया गया है। उनके निलंबन के दौरान मुख्यालय भी मुख्य सचिव, हरियाणा के कार्यालय (सर्विसेज-1 शाखा), चंडीगढ़ में रहेगा। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के घोटाले में उनकी भूमिका को लेकर की गई है। सरकार द्वारा की गई इस कार्रवाई को प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  

जहाँ बंदूकें थीं, अब बहता है पानी – हेटारकसा की बदली हुई तस्वीर

जहॉ बन्दूकें थीं, अब बहता है पानी- हेटारकसा की बदली तस्वीर रायपुर   कभी नक्सल गतिविधियों के कारण विकास से अछूता रहा कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम हेटारकसा आज बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जहां पहले सड़क, संचार और मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच मुश्किल थी, वहीं अब शासन के नक्सल उन्मूलन अभियान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांव में विकास दिखने लगा है। नक्सल प्रभाव के कारण वर्षों तक इस क्षेत्र में योजनाओं का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा कारणों से पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही थी। ग्रामीण, कुएं और नालों पर निर्भर थे, और गर्मी के दिनों में पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन और राज्य शासन के प्रयासों से ग्राम हेटारकसा के 63 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। दो सोलर पंप आधारित जल टंकियों के माध्यम से अब गांव के हर घर में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। गांव के निवासी राजनाथ पोटाई बताते हैं कि पहले पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, जिसमें अधिक समय व श्रम लगता था। वहीं अब घर में ही दिनभर पानी मिलने से दैनिक जीवन काफी आसान हो गया है। गांव की महिला सविता बेन ने कहती हैं कि पहले पानी की समस्या के कारण दिन का बड़ा हिस्सा इसी कार्य में चला जाता था, लेकिन अब नल-जल सुविधा से उन्हें राहत मिली है और वे अन्य कामों में समय दे पा रही हैं। स्वास्थ्य और आजीविका पर सकारात्मक असर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से गांव में जलजनित बीमारियों में कमी आई है। साथ ही ग्रामीण अब घरों के आसपास सब्जी-बाड़ी कर रहे हैं, जिससे टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी जैसी फसलें उगाकर वे पोषण के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित इस दूरस्थ क्षेत्र में योजनाओं का सफल क्रियान्वयन प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज ग्राम हेटारकसा यह साबित कर रहा है कि जब सुरक्षा, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव संभव है।

टेनिस स्टार Daniil Medvedev ने 40 सेकंड में तोड़ा 7 रैकेट, झेली करियर की सबसे शर्मनाक हार

 नई दिल्ली टेनिस कोर्ट पर अपने तेवरों के लिए मशहूर डेनिल मेदवेदेव का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा. मोंटे कार्लो मास्टर्स (Monte Carlo Masters) में उन्हें अपने करियर की सबसे करारी हार झेलनी पड़ी और इसी के साथ दिखा 40 सेकंड का ‘मेल्टडाउन’, जिसमें उन्होंने अपना रैकेट 7 बार पटक दिया।  पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 रूस के मेदवेदेव को क्ले कोर्ट सीजन की शुरुआत में ही मुश्किल चुनौती मिली, जब उनका सामना इटली के माटेओ बेरेटिनी (Matteo Berrettini) से हुआ. मैच की शुरुआत भले ही उन्होंने आक्रामक अंदाज में की और शुरुआती गेम में ब्रेक पॉइंट भी बनाए, लेकिन बेरेटिनी ने सर्विस बचा ली और यहीं से मैच का रुख बदल गया।  इसके बाद मुकाबला पूरी तरह एकतरफा हो गया.  बेरेटिनी  ने महज 25 मिनट में पहला सेट 6-0 से अपने नाम कर लिया. दूसरे सेट की शुरुआत में ही जब मेदवेदेव की सर्विस फिर टूटी और स्कोर 0-2 हुआ, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।  मेदवेदेव ने पहले रैकेट को कोर्ट पर पटका, फिर उसे गुस्से में फेंका. इसके बाद उन्होंने लगातार चार बार रैकेट उछाला और अंत में अपने खिलाड़ी बेंच के पास सातवीं बार जोरदार तरीके से पटककर उसे तोड़ दिया. पूरा ड्रामा सिर्फ 40 सेकंड तक चला, लेकिन दर्शकों की तालियों और हूटिंग ने इसे और भी नाटकीय बना दिया।  कॉमेंट्री कर रहे Sky Sports के कमेंटेटर ने कहा, 'ये तो होना ही था' और फिर मजाक में जोड़ा- 'अब ये रैकेट इस्तेमाल लायक नहीं बचा। अंपायर ने मेदवेदेव को 'अनस्पोर्ट्समैनलाइक कंडक्ट' के लिए चेतावनी भी दी, लेकिन इससे खेल पर कोई फर्क नहीं पड़ा. Matteo Berrettini ने मैच को 6-0, 6-0 से खत्म कर ‘व्हाइटवॉश’ जीत दर्ज की- जो मेदवेदेव के करियर की पहली ऐसी हार रही।  पूर्व ब्रिटिश स्टार Jamie Murray ने भी इस घटना पर हैरानी जताई. उन्होंने कहा, 'ये चौंकाने वाला है, ऐसा नहीं होना चाहिए… लेकिन हुआ. मुझे लगता है कि लॉकर रूम में जाते वक्त उन्हें शर्मिंदगी जरूर महसूस होगी।  मेदवेदेव का कोर्ट पर गुस्सा कोई नई बात नहीं है. US Open 2025 में भी वह अंपायर से तीखी बहस के चलते सुर्खियों में आए थे, जिससे मैच छह मिनट तक रुका रहा था।   

लखनऊ में अप्रैल में हुआ नवंबर जैसी सर्दी का अहसास, पारा गिरकर 27 डिग्री पर पहुंचा, जानें मौसम विभाग का नया अपडेट

लखनऊ प्रदेश में जारी बेमौसम वर्षा, तड़ित झंझावत और ओलावृष्टि के दौर से बृहस्पतिवार से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार से पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाएगा। यह मौसमी बदलाव एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और निचले क्षोभमंडल में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो रहा था, जिसने पूरे प्रदेश को प्रभावित किया है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मध्य एवं ऊपरी क्षोभमंडल में बना हुआ था। यह उत्तरी पाकिस्तान और संलग्न जम्मू-कश्मीर के आसपास एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में केंद्रित था। एक और चक्रवाती परिसंचरण मौजूद इसके अतिरिक्त, निचले क्षोभमंडल में प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग पर एक और चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। यह परिसंचरण मणिपुर तक एक द्रोणी के रूप में फैला हुआ है, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि हुई। बुधवार को प्रदेश के ऊपरी क्षोभमंडल से इन मौसमी प्रणालियों में प्रभावी कमी आने की संभावना है। इस कमी के बाद बृहस्पतिवार से मौसम में धीरे-धीरे सुधार शुरू हो जाएगा। शुक्रवार से मौसम पूर्णतया शुष्क होने की संभावना है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। तापमान में उतार-चढ़ाव का अनुमान मौसम में सुधार के साथ ही प्रदेश के अधिकतम तापमान में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। आगामी चौबीस घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में छह से आठ डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। यह गिरावट हल्की ठंडक का अनुभव कराएगी। हालांकि, उसके बाद के दिनों में तापमान में आठ से दस डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है। यह बढ़ोतरी मौसम को सामान्य स्थिति में लाएगी और गर्मी का अनुभव कराएगी। नवंबर जैसी सर्दी का अहसास मात्र 24 घंटे में मौसम के बदले मिजाज ने राजधानी में अप्रैल के महीने में नवंबर जैसा अहसास करा दिया। सुबह से शुरु हुई रिमझिम बारिश दिन में रुक-रुककर होती रही। हालांकि इस दौरान धूप भी निकली और बादलों की आवाजाही भी लगी रही। इस बदलाव से अधिकतम तापमान पर पारा 7.5 डिग्री का गोता लगाते हुए 34.5 डिग्री से 27 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मंगलवार रात की बारिश 5.3 मिमी दर्ज की गई जबकि बुधवार को शाम तक तीन मिमी बारिश हुई। आमतौर पर अप्रैल का महीना गर्म होता है, लेकिन इस बार लखनऊ में स्थिति भिन्न रही। बारिश के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई। दिन के समय भी मौसम में ठंडक बनी रही। रात में ठंड का अहसास इतना बढ़ गया कि लोगों को नवंबर के मौसम की याद आ गई। पश्चिमी विक्षोभ के असर से मंगलवार शाम में ही तेज हवा के साथ बारिश देखने को मिली। रात में रुक-रुककर बारिश होती रही। बुधवार को भी सुबह में हल्की बारिश ने ठंड का अहसास कराया। शाम को भी बूंदाबांदी हुई। देर शाम मौसम काफी सुहाना हो गया।  

गैस संकट के कारण टलने लगीं शादियां, कैटरर्स ने चाट और डोसा के काउंटर घटाए, एडीएम से मिले व्यापारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश आदर्श टेंट, कैटरिंग एवं डेकोरेशन व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने एडीएम सिविल सप्लाई ज्योति गौतम से उनके कार्यालय में मुलाकात की। पदाधिकारियों ने कैटरिंग क्षेत्र के व्यवसायियों की समस्याओं को उनके सामने रखा। एडीएम ने कहा कि शादी का कार्ड दिखाने पर सिलिंडर मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने बताया कि 15 अप्रैल से सहालगों की शुरुआत हो रही है। इससे कैटरिंग क्षेत्र के व्यापारियों के सामने व्यावसायिक सिलिंडरों की बड़ी चुनौती आ रही है। कैटरिंग व्यापारियों को सहालग में सुगमता से व्यावसायिक सिलिंडर मिलने चाहिए। अपर जिलाधिकारी खाद्य एवं अपूर्ति ज्योति गौतम ने व्यापारियों को भरोसा दिया कि कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शादी के कार्ड और प्री ऑर्डर बुकिंग के प्रपत्र के साथ जिला आपूर्ति कार्यालय या मेरे कार्यालय में जमा करा दें। कैटरर्स या शादी वाले घरों के लोग पत्र देकर व्यावसायिक गैस सिलेंडर की मांग कर सकते हैं। संबंधित गैस एजेंसी को व्यापारियों की मांग भेज कर व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिनिधि मंडल में उत्तर प्रदेश आदर्श टेंट, कैटरिंग एवं डेकोरेशन व्यापार मंडल के अध्यक्ष राघवेंद्र चौधरी, संतोष गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहम्मद रिजवान, आयुष पांडेय, संजीव सिंह मौजूद रहे। रिश्तेदारों की मेहमान नवाजी बड़ी समस्या उत्तर प्रदेश टेंट कैटरर्स एंड डेकोरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार बताते हैं कि गैस की किल्लत की वजह से लोग शादी टाल रहे हैं। घर आने वाले रिश्तेदारों के खाने-पीने की व्यवस्था कैसे होगी, इसकी चिंता बढ़ती जा रही है। बताया कि मेरे परिचित के पांच परिवारों ने नवंबर तक के लिए शादियां टाल दी हैं। मार्च में टाली थी शादी, नहीं मिली राहत: उत्तर प्रदेश आदर्श टेंट कैटरिंग एंड डेकोरेशन व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने बताया कि इंदिरानगर और चिनहट के दो परिवारों ने मार्च में आयोजित अपने घरों की शादियां गैस किल्लत को देखते हुए एक महीने के लिए टाल दी थीं। अब वह अप्रैल के अंत में शादी के लिए हिम्मत जुटा रहे हैं। हालांकि, उन्हें अब भी डर है कि कहीं सिलिंडर नहीं मिला तो मेहमानों को कैसे खिलाएंगे। व्यंजन भी हुए कम, काउंटर घटाए गए कारोबारी बताते हैं कि व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने पर हम हर जगह लकड़ी और कोयला नहीं जला सकते। धुआं होने के कारण मैरिज लॉन वाले ऐसे चूल्हे पर आपत्ति करते हैं। ऐसे में हम लोगों ने शादियों में चाट, पावभाजी, डोसा आदि के काउंटर कम किए गए हैं। इन काउंटर पर लगातार गैस की जरूरत पड़ती है।