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Mercedes-Benz CLA इलेक्ट्रिक सेडान आई, 792 किमी रेंज और बुकिंग 10 मार्च से

मुंबई  लग्जरी कार निर्माता कंपनी Mercedes-Benz ने आखिरकार भारत में अपनी बहुप्रतीक्षित Mercedes-Benz CLA इलेक्ट्रिक सेडान को पेश कर दिया है. इसकी बुकिंग 10 मार्च से शुरू होगी, जिसके बाद अप्रैल में इस कार को लॉन्च किया जाएगा. बता दें कि नई Mercedes-Benz CLA, कंपनी के एंट्री-लेवल मॉडल्स की लाइन-अप में ICE A-Class Limousine के साथ-साथ EQA और EQB EVs की जगह लेगी. ऐसा पहली बार है, जब यह नेमप्लेट फुली इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के साथ आएगी, क्योंकि साल 2020 की शुरुआत में बंद होने से पहले, यह कम्बशन-पावर्ड थी. फिलहाल कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है. 2026 Mercedes-Benz CLA Electric की रेंज और स्पेसिफिकेशन नई CLA EV के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो इसमें 800-वोल्ट का इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर इस्तेमाल किया गया है, और इसका बेस 85kWh 250+ वेरिएंट WLTP साइकिल पर 792km की रेंज देने का दावा करता है, जिसे भारतीय बाजार में उतारा जाएगा. इसकी मज़बूत रेंज काफ़ी हद तक CLA इलेक्ट्रिक की 93 प्रतिशत ड्राइवट्रेन एफिशिएंसी की वजह से है, जिसे इसके एयरोडायनामिक डिज़ाइन और ऑप्टिमाइज़्ड एनर्जी कंजम्प्शन से मदद मिलती है. खास बात यह है कि अब इसका ग्राउंड क्लीयरेंस ज़्यादा है, और इसके सस्पेंशन को सड़क की कंडीशन के हिसाब से खास तौर पर ट्यून किया गया है. एक और खास बात यह है कि इसमें दो-स्पीड गियरबॉक्स लगाया गया है, जैसा कि Porsche Taycan जैसे मॉडलों में देखने को मिलता है, जबकि ज़्यादातर EVs में आम तौर पर सिंगल-स्पीड रिडक्शन यूनिट होती है. कार में लगी पीछे वाली इलेक्ट्रिक मोटर 272hp की पावर देती है, जिससे CLA 250+ सिर्फ 6.7 सेकंड में 100kph की स्पीड पकड़ सकती है. वहीं चार्जिंग की बात करें तो, यह सिस्टम 240kW तक की हाई-स्पीड DC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, और कंपनी का दावा है कि सही हालात में सिर्फ़ 20 मिनट में इसकी बैटरी 400km की रेंज तक चार्ज हो सकती है. 2026 Mercedes CLA Electric का एक्सटीरियर डिजाइन नई CLA के डिजाइन की बात करें तो इसमें लाइटिंग एलिमेंट्स में Mercedes के तीन पॉइंट वाले स्टार लोगो पर खास ध्यान दिया गया है. स्टार मोटिफ हेडलाइट्स, टेल-लाइट्स और 142 छोटे बैकलिट स्टार्स वाली सील्ड-ऑफ फ्रंट ग्रिल में भी मौजूद है. बंपर के डिज़ाइन पर नजर डालें तो यह साफ़ और एयरो-फोकस्ड है, जो इसकी एफिशिएंसी-फर्स्ट अप्रोच के हिसाब से है, और इसमें छोटे एयर इनलेट भी दिए गए हैं, जो कार के कोनों पर एयरफ्लो को आसानी से गाइड करने में मदद करते हैं. साइड प्रोफ़ाइल की बात करें, तो इस सेडान में फ़्लश डोर हैंडल और 18-इंच के व्हील्स के साथ एक स्लीक, कूपे जैसा सिल्हूट दिया गया है. बड़ी पैनोरमिक ग्लास रूफ गर्म मौसम के लिए सही हीट-प्रोटेक्टिव कोटिंग के साथ आती है. अपने पिछले मॉडल से 30mm लंबी, 25mm चौड़ी और 25mm ऊंची होने के बावजूद, स्मूद सरफेसिंग और बेहतर एयरफ़्लो मैनेजमेंट EV को 0.21 का कम ड्रैग कोएफ़िशिएंट पाने में मदद करते हैं. रियर प्रोफाइल की बात करें तो इसमें पीछे की तरफ, टेल-लाइट्स के बीच एक पूरी चौड़ाई वाली लाइट बार लगाई गई है. इसके उपलब्ध एक्सटीरियर शेड्स के तौर पर क्लियर ब्लू, कॉस्मिक ब्लैक, पोलर व्हाइट, एल्पाइन ग्रे और पेटागोनिया रेड कलर शामिल हैं, जिनमें से आखिरी दो मैन्युफ़ैक्चर ऑप्शन हैं. 2026 Mercedes CLA Electric का इंटीरियर और फीचर्स चूंकि भारतीय बाजार में CLA 250+ वेरिएंट उतारा जाएगा, इसलिए इसमें कंपनी का ट्रिपल-डिस्प्ले सुपरस्क्रीन नहीं दिया जाएगा. इसके बजाय, केबिन में 10.25-इंच का ड्राइवर डिस्प्ले और मर्सिडीज़ के लेटेस्ट MB.OS ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाला 14-इंच का सेंट्रल टचस्क्रीन होगा. वहीं पैसेंजर डिस्प्ले की जगह, LED-बैकलिट स्टार लोगो वाला एक ग्लास पैनल लगाया जाएगा, जो एम्बिएंट लाइटिंग के साथ सिंक होगा. यह कार ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट को भी सपोर्ट करेगी. इसके अलावा, इसमें वायरलेस चार्जिंग और छह 100W USB-C फास्ट-चार्जिंग पोर्ट स्टैंडर्ड तौर पर दिए गए हैं, और पीछे की सीटें 40:20:40 के अनुपात में बांटी गई हैं. 2026 Mercedes CLA Electric के सेफ्टी फीचर्स वैसे तो Mercedes CLA इलेक्ट्रिक का Bharat NCAP द्वारा क्रैश-टेस्ट अभी बाकी है, लेकिन इसे 2025 में Euro NCAP द्वारा पूरी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी गई थी. फ्रंट और साइड एयरबैग के अलावा, इसमें एक सेंटर एयरबैग, साथ ही कैमरा- और रडार-बेस्ड लेवल 2 ADAS भी होगा.

रायपुर: सरगुजा में पीएम आवास निर्माण में तेजी, योजनाओं को मिला नया जोश

रायपुर : सरगुजा जिले में पीएम आवास निर्माण ने पकड़ी रफ्तार एक माह में 1628.60 लाख रुपये अंतरित रायपुर सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। जिले में स्वीकृत कुल 1,02,210 आवासों में से 80,296 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि को दर्शाता है। इस माह 1,781 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। निर्माण कार्यों को गति देने के लिए हितग्राहियों को किश्तों की राशि आधार आधारित डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में समय-सीमा के भीतर अंतरित की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-26 में स्वीकृत 36,306 आवासों में से 18,782 आवास पूर्ण हो चुके हैं। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को 1.20 लाख रुपये की राशि स्वीकृति, प्लिंथ एवं पूर्णता चरण में जियो-टैग आधारित सत्यापन के पश्चात प्रदान की जाती है। अब तक 35,125 हितग्राहियों को प्रथम किश्त (40,000 रुपये), 23,419 को द्वितीय किश्त (55,000 रुपये) तथा 10,367 हितग्राहियों को तृतीय किश्त (25,000 रुपये) जारी की जा चुकी है। विगत एक माह में 1,634 आवास पूर्ण करते हुए 1,349.05 लाख रुपये की राशि जारी की गई। साथ ही कुल मिलाकर 1,628.60 लाख रुपये हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए गए। इसके अतिरिक्त मनरेगा के अंतर्गत 90 मानव-दिवस का मजदूरी भुगतान तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण उपरांत 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जा रही है। पीएम जनमन योजना के तहत जिले में 2,565 पहाड़ी कोरवा हितग्राहियों को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 1,385 आवास पूर्ण हो चुके हैं। प्रति हितग्राही 2.00 लाख रुपये की सहायता राशि चार चरणों में जारी की जाती है। विगत एक माह में 73 जनमन आवास पूर्ण हुए तथा 217 लाख रुपये की राशि जारी की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले में 1,024 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 214 आवास पूर्ण हो चुके हैं। पिछले एक माह में 74 आवास पूर्ण करते हुए 62.55 लाख रुपये की राशि हितग्राहियों के खातों में अंतरित की गई है। आवास निर्माण में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए 45 आवास मित्रों एवं 218 रोजगार सहायकों को कुल 61.97 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वर्तमान में जिले में किसी भी हितग्राही की किश्त भुगतान हेतु लंबित नहीं है, जो प्रशासन की पारदर्शी एवं सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है। आवास निर्माण से संबंधित किसी भी समस्या या सुझाव के लिए हितग्राही राज्य शासन द्वारा जारी निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 पर संपर्क कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था: कर्मचारियों को करनी होगी 3 महीने की ट्रेनिंग, वरना लगेगा 5000 रुपए का चालान

भोपाल एमपी में कर्मचारियों के लिए तीन माह के ट्रेनिंग कार्यक्रम की घोषणा की गई है। प्रदेश के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह ट्रेनिंग होगी। लेखा प्रशिक्षण-सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा और 30 जून तक चलेगा। स्थानीय निकायों और अर्धशासकीय संस्थाओं के जिन लिपिक वर्गीय कर्मचारियाों की परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है वे भी लेखा प्रशिक्षण के लिए पात्र होंगे। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ऐसे कर्मचारियों को ट्रेनिंग के लिए 5 हजार रुपए का चालान भरना होगा। यह ट्रेनिंग लेने के इच्छुक लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को अपने आवेदन-पत्र 16 मार्च तक जमा कराने को कहा गया है। नियमित लेखा प्रशिक्षण सत्र लेखा प्रशिक्षण शाला भोपाल में संचालित होगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत सभी जिलों के लिपिकवर्गीय कर्मचारियों को आवेदन कार्यालय प्रमुख से अभिप्रमाणित कराकर ही जमा कराने के लिए निर्देशित किया गया है। आवेदन लेखा प्रशिक्षण शाला में तीन मूल प्रतियों में जमा कराने होंगे। वित्त विभाग के अनुसार वही लिपिकवर्गीय शासकीय कर्मचारी प्रशिक्षण के पात्र होंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है तथा जिन्होंने सीपीसीटी परीक्षा पास की हो या फिर उन्हें नियमानुसार छूट प्राप्त हो। लेखा प्रशिक्षण शाला के प्राचार्य ने बताया कि आवेदन-पत्र के साथ शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र की कापी अनिवार्य रूप से देना होगी। आवेदन-पत्र पर कर्मचारी को पासपोर्ट साइज फोटो लगाना होगा। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को जाति प्रमाण-पत्र भी संलग्न करना होगा। वित्त विभाग के निर्देशानुसार ये प्रमाणपत्र कार्यालय प्रमुख से सत्यापित कराने होंगे। 5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा प्रदेश के स्थानीय निकाय और अर्धशासकीय संस्थाओं के ऐसे लिपिकवर्गीय कर्मचारी भी ट्रेनिंग ले सकेंगे जिनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है। ऐसे कर्मचारियों को प्रशिक्षण शुल्क के रूप में 5 हजार रूपए का चालान जमा कराना होगा। सत्र में प्रवेश के समय यह चालाना देना होगा।

IND vs ENG: रोहित-विराट से लेकर बुमराह तक, ये 5 खिलाड़ी इंग्लैंड पर पड़ सकते हैं भारी

नई दिल्ली सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया इंग्लैंड को हराकर फाइनल का टिकट कटाना चाहेगी। भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप में ये लगातार तीसरा सेमीफाइनल होने वाला है। 2022 में इंग्लैंड ने बाजी मारी, तो 2024 में टीम इंडिया ने जीत हासिल की थी। अब मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में दोनों टीमें टकराने वाली हैं। इस मुकाबले में भारत के 5 ऐसे खिलाड़ी हैं, जो अकेले अपने दम पर टीम को मैच में जीत दिला सकते हैं। इसमें संजू सैमसन से लेकर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह तक का नाम शामिल है। भारत को अपने दम पर जीत दिला सकते हैं ये खिलाड़ी- 1. जसप्रीत बुमराह भारत के दिग्गज तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड के लिए बड़ा सिरदर्द हो सकते हैं। बुमराह नई और पुरानी गेंद के साथ बेहतरीन गेंदबाजी करते हैं। वे बहुत ही कंजूसी के साथ रन भी खर्च करते हैं। बुमराह ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 6 मैच खेले हैं और 9 विकेट अपने नाम किए हैं। उन्होंने मात्र 6.30 की इकोनॉमी से रन दिए हैं, जिससे बुमराह अपने दम पर मैच में जीत दिला सकते हैं। 2. संजू सैमसन विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन फॉर्म में वापसी कर चुके हैं। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ अहम मुकाबले में नाबाद 97 रनों की पारी खेली और टीम को जीत दिलाई। सैमसन ऐसे खिलाड़ी हैं, जो अगर पिच पर टिक गए, तो इंग्लिश गेंदबाजों की खैर नहीं होगी। वे अपने दम पर भारत को मैच जिता सकते हैं और इसका ताजा उदाहरण विंडीज के खिलाफ खेला गया मैच है। 3. वरुण चक्रवर्ती वरुण चक्रवर्ती पिछले कुछ मैचों में अपनी लय में नहीं दिखे हैं। उनके खिलाफ बल्लेबाजों ने रन बनाए हैं लेकिन चक्रवर्ती अपनी गेंदबाजी से इंग्लिश बल्लेबाजों को परेशान कर सकते हैं। वे टी20 की रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज हैं और भारत को मुश्किल समय में विकेट दिलाते रहे हैं। ऐसे में मुंबई में होने वाले सेमीफाइनल मैच में भी वे भारत के लिए अहम खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। 4. ईशान किशन ईशान किशन का पिछले दो मैचों में बल्ला नहीं चला है लेकिन वे शानदर फॉर्म में चल रहे हैं। किशन ने पाकिस्तान के खिलाफ मुश्किल पिच पर मैच विनिंग पारी खेली थी। वे आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुके हैं। ऐसे में वानखेड़े स्टेडियम का उन्हें अच्छे से अंदाजा है। किशन अपने दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं और इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए अहम खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। 5. हार्दिक पांड्या हार्दिक पांड्या बल्ले के साथ टी20 वर्ल्ड कप 2026 में शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। पांड्या अब तक दो फिफ्टी लगा चुके हैं। वे बल्ले से अंत के ओवरों में तेजी से रन बनाते हैं और मैच का रुख कुछ ही गेंदों में बदल देते हैं। इसके अलावा गेंदबाजी से भी पांड्या टीम इंडिया को सफलता दिलाते हैं। ऐसे में वे इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।  

Hanuman Chalisa Rules: गलत समय पर पाठ करने से हो सकता है नुकसान, जानें सही समय

नई दिल्ली हनुमान चालीसा हिंदू धर्म में सबसे प्रभावशाली और फलदायी स्तोत्रों में से एक है। नियमित पाठ से भय, रोग, शत्रुता, आर्थिक संकट और ग्रह पीड़ा दूर होती है। बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। लेकिन शास्त्रों में इसके पाठ से जुड़े कुछ सख्त नियम भी बताए गए हैं। कुछ विशेष समय और अवस्थाओं में हनुमान चालीसा का पाठ करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानते हैं उन समयों के बारे में, जब हनुमान चालीसा का पाठ गलती से भी नहीं करना चाहिए। दोपहर के समय हनुमान चालीसा का पाठ क्यों नहीं करना चाहिए हनुमान चालीसा का पाठ दोपहर के समय वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि दोपहर में हनुमान जी विभीषण को दिए गए वचन के अनुसार, लंका चले जाते हैं। इस समय उनकी उपस्थिति नहीं रहती है। इसलिए दोपहर में पाठ करने से इच्छित फल नहीं मिलता, बल्कि विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। ब्रह्म मुहूर्त, सूर्योदय या संध्या काल में हनुमान चालीसा का पाठ सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इन समयों में पाठ करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं। मासिक धर्म के समय पाठ से बचें महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में इस अवस्था को शारीरिक और मानसिक विश्राम का समय बताया गया है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जप से दूर रहने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से महिला के शरीर और मन को आराम मिलता है। इस अवधि में पाठ करने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। मासिक धर्म समाप्त होने के बाद शुद्ध होकर पाठ शुरू करें। मृत्यु के समय हनुमान चालीसा का पाठ ना करें घर में किसी की मृत्यु होने पर हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। मृत्यु के बाद परिवार पर शोक और अशौच की स्थिति होती है। इस समय धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पूजा-पाठ को कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाता है। शोक काल समाप्त होने और शुद्धि संस्कार के बाद ही पाठ शुरू करना चाहिए। मृत्यु के समय पाठ करने से आत्मा की शांति में बाधा आ सकती है और परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बच्चे के जन्म के समय पाठ से दूर रहें जब घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। जन्म के बाद कुछ दिनों तक परिवार पर सूतक माना जाता है। यह समय नवजात और माता की देखभाल के लिए होता है। इस अवधि में पूजा-पाठ को कुछ समय के लिए बंद कर देना चाहिए। सूतक समाप्त होने और शुद्ध होने के बाद ही पाठ शुरू करें। ऐसा करने से नवजात का स्वास्थ्य और परिवार की शांति बनी रहती है। हनुमान चालीसा का सही समय और लाभ हनुमान चालीसा का पाठ मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में करना विशेष रूप से फलदायी होता है। इन समयों में पाठ करने से भय, रोग, शत्रुता और ग्रह पीड़ा दूर होती है। नियमों का पालन करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नियमित पाठ से आत्मविश्वास, साहस और सफलता मिलती है। गलत समय में पाठ करने से विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखें। हनुमान चालीसा का पाठ श्रद्धा और नियमों के साथ करें। सही समय पर पाठ करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

ब्रेबोर्न स्टेडियम में सजेगा स्क्वैश का महासंग्राम, 18-22 मार्च तक इंडियन ओपन

मुंबई इंडियन ओपन 18 से 22 मार्च के बीच सीसीआई ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला जाएगा। यह एक पीएसए कॉपर इवेंट है, जिसकी टिकट अब लाइव हैं। प्रोफेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (पीएसए) से मान्यता प्राप्त, यह टूर्नामेंट अपने 2025 एडिशन की सफलता को आगे बढ़ा रहा है, जिसे साल के टॉप 10 आइकॉनिक पीएसए इवेंट्स में से एक चुना गया था। 2026 एडिशन में डिफेंडिंग महिला चैंपियन अनाहत सिंह इवेंट में नजर आएंगी। लाइनअप में भारत के टॉप खिलाड़ी भी शामिल हैं, जैसे रमित टंडन, अभय सिंह, वीर चोटरानी, ​​वेलावन सेंथिलकुमार और जोशना चिनप्पा। इनके साथ याह्या एलनवासनी, हाना मोआताज और माजेन हेशाम जैसे इंटरनेशनल कंटेंडर भी शामिल हैं। इस प्रतियोगिता के साथ वर्ल्ड-क्लास स्क्वैश का एक बहुत प्रतिस्पर्धी हफ्ता शुरू होगा। टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं दोनों के इवेंट्स के लिए 44,500 यूएस डॉलर प्राइज मनी होगी। स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल साइरस पोंचा ने कहा, "इंडियन ओपन तेजी से पीएसए कैलेंडर का एक अहम पड़ाव बन गया है, जिससे भारतीय खिलाड़ियों को वर्ल्ड-क्लास कॉम्पिटिशन का अनुभव मिलता है और साथ ही स्क्वैश की प्रोफाइल देश भर में बढ़ती है। 2026 के लिए, हम टूर्नामेंट की इंटरनेशनल अहमियत को बढ़ाते रहने और फैंस को हाई-लेवल मैच लाइव देखने के लिए उत्साहित हैं, जिससे भारत में इस खेल के लंबे समय के विकास में मदद मिलेगी।" इस प्रतियोगिता के क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल ग्लास कोर्ट पर होंगे, जिससे एक एरीना-स्टाइल स्क्वैश वेन्यू बनेगा जो एनर्जेटिक, क्लोज-अप व्यूइंग के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है। एक बड़े स्टेज पर समान प्राइज मनी और टॉप इंडियन और इंटरनेशनल प्लेयर्स के लाइनअप के साथ, 2026 इंडियन ओपन ग्लोबल स्क्वैश में भारत की जगह को मजबूत करेगा।

FIH वर्ल्ड कप 2026 क्वालीफायर: इंग्लैंड महिला हॉकी टीम का हैदराबाद में भव्य स्वागत

हैदराबाद इंग्लैंड की महिला टीम एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 क्वालीफायर के लिए हैदराबाद पहुंच गई है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 8 से 14 मार्च तक तेलंगाना की राजधानी में आयोजित किया जाएगा, जहां आठ देशों की टीमें विश्व कप में जगह बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी। इंग्लैंड की टीम समृद्ध इतिहास के साथ इस प्रतियोगिता में उतर रही है। टीम अब तक 11 एफआईएच वर्ल्ड कप में हिस्सा ले चुकी है और इस बार उसका लक्ष्य बेल्जियम और नीदरलैंड्स में होने वाले विश्व कप के लिए टिकट हासिल करना है। इंग्लैंड का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 संस्करण में रहा था, जब टीम ने कांस्य पदक जीता था। इस बार टीम उस उपलब्धि से आगे बढ़ने की कोशिश करेगी। टीम की कप्तान फ्लोरा पील ने हैदराबाद पहुंचने के बाद आत्मविश्वास जताया। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में उनका प्रशिक्षण शिविर काफी सफल रहा और उससे पहले चीन में प्रो लीग के दौरान टीम ने कई प्रतिस्पर्धी मुकाबले खेले। उनके अनुसार टीम फिलहाल शानदार लय में है और टूर्नामेंट की शुरुआत का बेसब्री से इंतजार कर रही है। भारतीय परिस्थितियों को लेकर भी टीम उत्साहित नजर आई। खिलाड़ी लिली वॉकर ने कहा कि टीम के कई सदस्य पहले भारत आ चुके हैं और यहां के दर्शकों और माहौल को लेकर उत्साह है। गर्म मौसम से तालमेल बिठाने के लिए टीम ने विशेष तैयारी की है, जिसमें सॉना सेशन शामिल हैं, ताकि खिलाड़ी यहां की जलवायु के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें। इंग्लैंड को विश्व कप के तीन उपलब्ध स्थानों में से एक हासिल करने के लिए पूल-ए में मजबूत प्रदर्शन करना होगा। टीम अपने अभियान की शुरुआत 8 मार्च को इटली के खिलाफ करेगी, 9 मार्च को कोरिया गणराज्य से भिड़ेगी और 11 मार्च को ऑस्ट्रिया के खिलाफ ग्रुप चरण का अंतिम मुकाबला खेलेगी।  

‘आधी रात का सूरज’ का देश: जहां रात सिर्फ 40 मिनट की होती है

नई दिल्ली प्राकृतिक का मतलब किसी के लिए सुंदरता है, तो किसी के लिए एक रहस्यमयी दुनिया है। कुछ लोग प्रकृति को एक रहस्यमयी दुनिया इसलिए भी मानते हैं, क्योंकि दुनिया में ऐसी कई अजीबो-गरीब चीजें हैं, जो इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है। जी हां, दुनिया में एक ऐसा अनोखा देश भी है जहां महज 40 मिनट के लिए ही रात होती है। इस देश में रात 12 बजकर 43 मिनट पर सूरज डूब जाता है और 40 मिनट के बाद पूरी जगमगाहट के साथ सूरज उग भी जाता है। यही नहीं इस देश में 76 दिनों तक रात नहीं होती है। अब आपके मन में यकीनन यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर इस अनोखे देश का नाम क्या है और यहां एक लंबे दिन के बावजूद भी रात क्यों नहीं होती है। अगर हां, तो आज इस लेख के जरिये हम आपके इन्हीं सब सवालों के जवाब देंगे। साथ ही आपको एक ऐसे देश के बारे में भी बताएंगे जहां पूरे दो महीने तक सूरज नहीं उगता है और लोगों को अपनी दिनचर्या रात के अंधेरे से ही शुरू करनी पड़ती है।   नॉर्वे में होती है 40 मिनट की रात यूरोप में बसा नॉर्वे एक ऐसा अनोखा देश है, जहां दिन के उजाले के बाद रात महज 40 मिनट के लिए ही होती है। नॉर्वे के हेमरफेस्ट शहर में मई से जुलाई यानी 76 दिनों तक यहां केवल 40 मिनट के लिए ही सूरज ढलता है। बता दें, नॉर्वे के इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देश के अलग-अलग कोने से पर्यटक आते हैं। यहां ज्यादा समय तक उजाला न होने की वजह से इस शहर को 'Land of the Midnight Sun' और 'आधी रात का सूरज' का सूरज भी कहा जाता है।   नॉर्वे में इस समय नहीं उगता सूरज अब तक हमने आपको बताया कि नॉर्वे में 76 दिनों तक केवल 40 मिनट के लिए ही सूरज निकलता है। लेकिन यह सिलसिला साल के बारह मास तक नहीं चलता है। नॉर्वे में नवंबर, दिसंबर और जनवरी के महीने में पूरी तरह से अंधेरा होता है और इन तीन महीनों के दौरान यहां सूरज नहीं निकलता है। क्यों होती है इतनी छोटी रात नॉर्वे में छोटी रात होने का मुख्य कारण यहां का भौगोलिक वातावरण है। दरअसल नॉर्वे आर्कटिक सर्किल के बेहद ही करीब है, जिसके कारण यहां गर्मियों के दिनों में सूरज की किरणें इस क्षेत्र पर सीधी पड़ती है। सूरज की किरणें इस क्षेत्र पर सीधी पड़ने के कारण यहां दिन लंबे और रात छोटी होती है। इसके अलावा, नॉर्वे में बोडो एंड साल्टेन, हेलजेलैंड, लोफोटेन कुछ ऐसे शहर भी है, जहां सूरज बिल्कुल भी नहीं ढलता है। अलास्का में दो महीने तक नहीं उगता सूरज धरती पर एक ऐसी जगह भी स्थित है, जहां पूरे दो महीनों तक सूरज नहीं निकलता है। जी हां, यह अनोखी जगह आर्कटिक सर्कल के भीतर अलास्का के उत्तरी हिस्से में है। बता दें, अलास्का में पूरे दो महीने तक सूरज नहीं निकलता है और यहां दिन छोटे व रातें लंबी होती है। अलास्का में इस भौगोलिक घटना को 'पोलर नाइट' के नाम से जाना जाता है। यहां रहने वाले लोग दिन के अंधेरे में ही अपने दिनचर्या की शुरुआत करते हैं और यहां बच्चे रात के अंधेरे में ही स्कूल पढ़ने के लिए जाते हैं।  

भोपाल में बड़ा बदलाव: पुराने सतपुड़ा-विंध्याचल भवन हटेंगे, अरेरा हिल्स पर तैयार होगा आधुनिक परिसर

भोपाल भोपाल के अरेरा हिल्स पर वल्लभ भवन के सामने 40 साल से ज्यादा पुराने सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को तोड़ने  की प्लानिंग पूरी हो गई है। पुराने भवन को तोड़कर यहां कोर्टयार्ड एनेक्सी बिल्डिंग तैयार की जाएगी जो आपस में ट्विन टावर की तर्ज पर कनेक्ट होंगी। इस भवन में मल्टी लेवल पार्किंग और मल्टी लेवल फ्लोर एक साथ निर्मित किए जाएंगे। शुरुआत के चार से पांच फ्लोर तक आप अपने दो पहिया और चार पहिया वाहन में बैठकर ही संबंधित कार्यालय पहुंच सकेंगे। मल्टी लेवल पार्किंग मॉडल में अधिक चौड़ाई वाले घुमावदार रास्तों को इस प्रकार तैयार किया जाएगा जो संबंधित कार्यालय के फ्लोर पर जाकर लैंड होंगे। शहर में यह व्यवस्था फिलहाल प्राइवेट मॉल में मौजूद है। सरकारी खर्च कम से कम सरकार सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते हुए जीरो फाइनेंस मॉडल लागू करने का प्रयास भी कर रही है। कंस्ट्रक्शन पर बगैर सरकारी खर्च के यह निर्माण हाउसिंग बोर्ड नोडल एजेंसी की निगरानी में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में काम करने वाली बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों के माध्यम से करवाया जा सकता है। मंत्रालय में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन सभी मुद्दों पर जिला प्रशासन, हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम के अधिकारियों के साथ चर्चा में ये बातें तय हुई हैं।   शहर का ब्यू पाइंट बनेगा अरेरा हिल्स पहाड़ी पर बनने वाने मिनी सेंट्रल विस्टा को दिल्ली के नए संसद भवन की तर्ज पर आकार दिया जाएगा। नागरिक यहां अपने परिजनों के साथ आकर व्यू पाइंट की सैर कर सकेंगे। सरकारी भवन की थीम की बजाए इसे व्यू पाइंट बनाया जाएगा।     तीन चरण में बनेगा प्रोजेक्ट     सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को एक साथ नहीं तोड़ा जाएगा     सतपुड़ा भवन का एक हिस्सा टूटेगा। उतना फिर से बनाया जाएगा। उसके बाद बचा हुआ हिस्सा तोड़कर बनाएंगे     इसी तरह विंध्याचल भवन का भी निर्माण होगा।     दोनों के बीच ग्रीन पॉकेट कोर्टयाट के तर्ज पर विकसित होगा।     भवनों की डिजाइन इस तरह रखी जाएगी कि दीवारों से बंद हो और खुले आसमान के नीचे भी हो।     यहां इस तरह एक दूसरे को जोड़ा जाएगा कि गाड़ी के साथ ही लोग संबंधित भवन के संबंधित फ्लोर तक पहुंच जाएं।     दोनों भवनों के साथ ही कोर्टयार्ड से पूरी कनेक्टिविटी होगी। लिफ्ट की जरूरत नहीं होगी।

ग्रामीण विकास को नई रफ्तार: हरियाणा के 111 गांवों में बनेंगी स्मार्ट गलियां

चंडीगढ़ हरियाणा के 111 गांवों में स्मार्ट गलियों का विकास किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 1 करोड़ 19 लाख 39 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में दी। पंवार ने बताया कि जिन गांवों में मतदाताओं की संख्या 10 हजार है, वहां एक गली को स्मार्ट गली के रूप में विकसित किया जाएगा। बादली विधानसभा क्षेत्र के बादली गांव को भी इस योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का दृष्टिकोण है कि जिस प्रकार शहरों में साफ-सुथरी और व्यवस्थित गलियां होती हैं, उसी तर्ज पर गांवों में भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्मार्ट गलियां विकसित की जाएं। शून्यकाल के दौरान विधायक कपूर वाल्मीकि द्वारा मिट्टी उठाने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि यदि ग्राम पंचायत प्रस्ताव भेजती है तो खनन विभाग के अधिकारियों को परमिट जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे। पंचायत भूमि पर मालिकाना हक के लिए विशेष कैंप कालांवाली से कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाल ने पंचायत भूमि पर बने मकानों को वैध करने का मुद्दा उठाया। पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार जहां पंचायत की फिरनी, पौंड या तालाब हैं, वहां बने मकानों को मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री द्वारा पिछले सत्र में पेश किए गए विधेयक के तहत ग्राम पंचायत की कृषि भूमि या फिरनी पर मकान नहीं होने चाहिए। हालांकि, यदि मकान ग्राम पंचायत की भूमि पर है तो 500 गज तक के क्षेत्रफल पर मालिकाना हक दिया जा रहा है।