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उच्च शिक्षा में बढ़ी जेब की मार: डिग्री, टीसी और माइग्रेशन सर्टिफिकेट की फीस तीन गुना

सागर सागर के डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक सत्र-2025-26 के लिए डिग्री, टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र), माइग्रेशन सर्टिफिकेट समेत अन्य सुविधाओं के शुल्क में इजाफा किया गया है। बीते माह जारी हुए आदेश में उक्त तीनों प्रमुख प्रमाण पत्रों के शुल्क में तीन गुना तक का इजाफा किया गया है। अचानक फीस बढ़ने से विद्यार्थी परेशान है। एक साथ 50 से तीन गुना तक फीस बढ़ने से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। तीन गुना बढ़े दाम, छात्रों की बढ़ी परेशानी अब तक विश्वविद्यालय में डिग्री के लिए 250 रुपए ही शुल्क लिया जाता है, लेकिन अब वही डिग्री 500 रुपए में दी जा रही है। इसके साथ स्थानांतरण प्रमाण पत्र में 100 रुपए खर्च आता है, जो अब बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया है। इसके अलावा डुप्लीकेट उपाधि, प्रमाण पत्र, डुप्लीकेट अंकसूची और नाम सुधार (अंकसूची एवं टीआर में सुधार) आदि में भी फीस वृद्धि की गई। इन सभी करीब 50 प्रतिशत ज्यादा फीस बढ़ाने से विद्यार्थियों की आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।   विवि प्रशासन की ओर से दलील दी गई है कि पिछले 12 वर्षों से विद्यार्थियों से जुड़ी सेवाओं में किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं बढ़ाया गया था। विवि प्रशासन ने इसके लिए एक समिति का गठन किया था, जिसने देश के अन्य विश्वविद्यालयों की फीस स्ट्रक्बर का अध्ययन किया और फिर उसी आधार पर समिति ने अनुशंसा की थी। नहीं मिल रहीं सुविधाएं विद्यार्थियों का कहना है कि मार्कशीट, टीसी और अन्य दस्तावेजों में विभिन्न प्रकार की गलतियां मिलती हैं। परीक्षा समय पर आयोजित नहीं होती है। विश्वविद्यालय के हॉस्टल, लाइब्रेरी सहित विभिन्न विभागों में हमें सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। लाइब्रेरी के कंप्यूटर बंद हैं। डिग्री और अंकसूची निकलवाने के लिए कई बार विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में विवि प्रशासन की ओर से फीस वृद्धि करने का निर्णय गलत है।   समिति की अनुशंसा पर निर्णय हुआ है में बढ़ोतरी के लिए समय-समय पर हर तरह के शुल्क आदि में उचित वृद्धि 12 वर्षों बाद इस तरह के शुल्क को रिवाइज करते हुए वृद्धि की गई है। केंद्र सरकार से लगातार दिशा-निर्देश प्राप्त होते हैं कि आंतरिक राजस्व की जानी चाहिए। इसी क्रम में सक्षम प्राधिकारी द्वारा गठित समिति ने देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लगने वाले इस तरह के शुल्क को दृष्टिगत रखते हुए अनुशंसा की, जिसके आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने स्वीकृति के बाद शुल्क में वृद्धि की गई है। विवेक जायसवाल, मीडिया प्रभारी इनका भी बढ़ा शुल्क     डुप्लीकेट उपाधि (डिग्री) -1000 रुपए     डुप्लीकेट प्रवजन प्रमाण पत्र (माइग्रेशन सर्टिफिकेट)- 500 रुपए     डुप्लीकेट अंकसूची (मार्कशीट)- 500 रुपए     नाम सुधार (मार्कशीट एवं टीआर में)- 200 रुपए     प्रावधिक उपाधि प्रमाण पत्र (प्रोविशनल डिग्री सर्टिफिकेट)- 300 रुपए     नाम/सरनेम परिवर्तन शुल्क -750 रुपए     परीक्षा केंद्र परिवर्तन शुल्क – 1000 रुपए     नामांकन विलंब शुल्क- 150 रुपए

एम्स में नई सुविधा: QR Code स्कैन करें और सीधे पहुंचें अपनी OPD तक

भोपाल एम्स की भूलभुलैया से अब मरीजों और परिजनों को राहत मिलने वाली है। यहां मोबाइल ऐप और क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली शुरू होगी जिससे मरीजों को डॉक्टर के केबिन और पर्चा बनवाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। ऐप खोलते या क्यूआरकोड स्कैन करते ही मोबाइल के स्क्रीन पर मरीजों को सीधा विभाग और वार्ड तक पहुंचने का सही रास्ते दिखने लगेंगे। एम्स भोपाल ने आइआइटी इंदौर की दृष्टि टीम से मिलकर स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। यह प्रणाली तकनीक के जरिए अस्पताल परिसर की जटिलता को सरल बनाएगी। क्यूआर कोड स्कैन करते ही खुलेगा नक्शा स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली का पहला स्वरूप वेब आधारित होगा। प्रमुख प्रवेश द्वारों और अहम स्थानों पर क्यूआर कोड लगेंगे। क्यूआर कोड स्कैन करते ही इंटरैक्टिव मानचित्र खुलेगा। यह मानचित्र चरण-दर- चरण सही दिशा बताएगा। मोबाइल ऐप से मिलेगा सटीक दिशा-निर्देशन दूसरा स्वरूप मोबाइल ऐप आधारित होगा। भवनों के बीच जाने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं भवनों के अंदर, जहां जीपीएस कमजोर होता है, वहां लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे। इससे दिशा-निर्देशन और अधिक सटीक होगा। पहले पायलट, फिर पूरे परिसर में लागू एम्स प्रवक्ता डॉ. केतन मेहरा ने कहा कि आइआइटी इंदौर के साथ मिलकर सिस्टम को विकसित कर रहा है। इसे अप्रेल के अंत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। सबसे अहम बात, बड़े अस्पताल को लेकर जो झिझक होती है, वह कम होगी।

मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति लागू, शराब दुकानों के विस्तार पर रोक

भोपाल मध्य प्रदेश में अब नई आबकारी नीति लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने साल 2026-27 के लिए आबकारी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए जारी की गई नई नीति के तहत कहा गया कि, प्रदेश में कोई भी नई शराब दुकान नहीं खुलेगी। अहाते पहले की तरह अब भी बंद ही रहेंगे। वहीं, एक समूह को पांच से ज्यादा दुकानें आवंटित नहीं की जाएंगी। वहीं, कोई भी पुरानी शराब दुकान का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ये शर्तें माननी होंगी नर्मदा नदी के तट से 5 किलोमीटर की दूरी के प्रतिबंध यथावत रहेगा। -मदिरा दुकानों की दूरी: मदिरा दुकानों को नर्मदा के तट से 5 किलोमीटर की दूरी के प्रतिबंध के साथ यथावत रखा गया है -पवित्र नगरों में प्रतिबंध: पवित्र नगरों में मदिरा दुकानों के प्रबंधन को यथावत रखा गया है -नई दुकानें नहीं: कोई भी नवीन मदिरा दुकान नहीं खोले जाने का निर्णय लिया गया है -अहाते बंद: मदिरा दुकानों के अहाते नहीं खोले जाएंगे, उन्हें पूर्ववत बंद रखा जाएगा -नवीनीकरण बंद: मदिरा दुकानों के नवीनीकरण का विकल्प समाप्त कर दिया गया है -ई-टेंडर और ई-ऑक्शन: समस्त 3553 मदिरा दुकानों का निष्पादन ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा -आरक्षित मूल्य: ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों का आरक्षित मूल्य, वर्तमान वर्ष के मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर निर्धारित किया जाएगा -समूह बनाना: ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए मदिरा दुकानों के समूह बनाये जाएंगे। अधिकतम 5 मदिरा दुकानों का एक समूह बनाया जा सकेगा -वर्गीकरण: आरक्षित मूल्य के आधार पर, जिले के समूह को तीन-चार बैच में वर्गीकृत किया जाएगा। -बैच आधारित कार्यवाही: बैच के आधार पर तीन-चार चरण में ई-टेंडर और ई-ऑक्शन की कार्यवाही की जाएगी। -जालसाजी रोकथाम: जालसाजी की आशंकाओं को समाप्त करने के लिए प्रतिभूति राशि के रूप में सिर्फ ई-चालान/ई-बैंक गारंटी ही मान्य की जाएगी। साधारण बैंक गारंटी एवं सावधि जमा (FD) मान्य नहीं होगी।   दस्तावेज़ में निम्नलिखित मुख्य बिंदु हैं -मदिरा की ड्यूटी दरें: विनिर्माण इकाई, बार आदि की लाइसेंस फीस यथावत रखी गई है। -निर्यात प्रोत्साहन: ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को दृष्टिगत रखते हुए निम्नानुसार प्रावधान किए गए हैं- मदिरा के विनिर्माताओं को अपने उत्पाद की कीमत के अनुमोदन की -आवश्यकता नहीं है; विनिर्माता पोर्टल पर निर्धारित व्यवस्था अनुसार अपने उत्पाद की कीमत घोषित कर सकेंगे। -देश के बाहर मदिरा के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए फीस में संशोधन, लेबल पंजीयन में सरलीकरण आदि प्रावधानित किया गया है। -प्रदेश के आदिवासियों स्वसहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराने के लिए उनके राज्यों की हेरिटेज अथवा विशेष मदिरा को प्रदेश में ड्यूटी फ्री करने के प्रावधान किया गया।

बढ़ती गर्मी से किसान चिंतित: हरियाणा में समय से पहले बढ़ा तापमान, फसलों को नुकसान की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में मौसम का मिजाज इस बार गड़बड़ाया हुआ है जिसका सीधा असर फसलों पर पड़ता हुआ नजर आ रहा है। 2012 से लेकर अब तक वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 को छोड़कर मानसून प्रभावी नहीं रहा है। हालांकि 2022 में मानसून में औसत 426 मिलीमीटर की तुलना में 464 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई जबकि 2023 में मानसून में 512.7 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। इस बार मौसम में आए एकाएक बदलाव के बाद फरवरी में ही अधिकतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है। 5 मार्च तक अधिकतम तापमान 34 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इकोनॉमिक एंड स्टैटिकल अफेयर्स हरियाणा की वार्षिक रिपोर्ट-2025 के अनुसार 2019 में फरवरी में औसतन अधिकतम तापमान 20.8, 2020 में 22.2, 2021 में 24.7, 2022 में 22.1, 2023 में 25.7 और 2024 में 23.2 रहा जबकि इस बार यह 30 डिग्री तक पहुंच गया है। इस बार सर्दी के मौसम में अभी तक औसत से 57 फीसदी कम बरसात हुई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल 1 जनवरी से 26 फरवरी तक सिरसा में 6.7 मिलीमीटर, फतेहाबाद में 27.6, हिसार में 17.1, जींद में 24.8, कैथल में 26.6, करनाल में 29.4, पानीपत में 37.5, सोनीपत में 13.9, भिवानी में 23.2, चरखी दादरी में 15.5, झज्जर में 18.5, महेंद्रगढ़ में 12, रेवाड़ी में 15.2, गुरुग्राम में 21.7, नूंह में 12.4, पलवल में 16, फरीदाबाद में 3.2, कुरुक्षेत्र में 56.2, अंबाला में 60.4, यमुनानगर में 43.2 एवं पंचकूला में 48.4 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है। वैसे मौसम विभाग का मानना है कि इस बार प्रदेश में 1 जून से 30 सितम्बर तक अच्छी बरसात हो सकती है। मानसून में जुलाई और अगस्त में होती है सबसे अधिक बरसात हरियाणा में 1 जून से 30 सितम्बर तक औसतन 426 मिलीमीटर बरसात दर्ज की जाती है। जुलाई और अगस्त के महीनों में सबसे अधिक बरसात होती है। जून में औसतन 54, जुलाई में 149, अगस्त में 146 और सितम्बर में 76 मिलीमीटर बरसात आमतौर पर होती है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा में सर्द मौसम में 32.4, प्री-मानसून सीजन में 33.6, मानसून सीजन में 426 मिलीमीटर एवं पोस्ट मानसून सीजन में 28.9 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए। हर साल हरियाणा में 554.7 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए, पर 2012 के बाद 2022, 2023 और 2025 को छोड़कर यह आंकड़ा 460 मिलीमीटर को भी पार नहीं कर पा रहा है। 2012 में हरियाणा में महज 307 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत बरसात से 45 फीसदी कम। इसी तरह से 2013 में 452 मिलीमीटर बरसात हुई। 2013 में देश में अंडमान-निकोबार में सबसे अधिक 3757 मिलीमीटर बरसात हुई थी जबकि सबसे कम बरसात का चिंताजनक रिकॉर्ड हरियाणा के नाम रहा था। 2014 में तो पूरे साल 301.3 मिलीमीटर बरसात ही हुई। 2014 में मानसून में 197.3 मिलीमीटर बरसात हुई जबकि होनी चाहिए थी 42 मिलीमीटर। 2015 में पूरे देश में हरियाणा में सबसे कम 437.8 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत से करीब 23 फीसदी कम। 2016 में सर्द ऋतु में महज 1.2 मिलीमीटर जबकि पूरे साल में कुल 392.9 मिलीमीटर ही बरसात हुई। 2017 में मानसून सीजन में 418.8, 2018 में 416.3, 2019 में 418, 2020 में 419.9, 2021 में 423, 2022 में 417.3, 2023 में 512.7, 2024 में 409 मिलीमीटर बरसात हुई थी। 2025 में तो प्रदेश में मानसून में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। इस बार भी मानसून काफी अच्छा बताया जा रहा है। गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब व राजस्थान के बाद हरियाणा देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य है। इस रबी सीजन में प्रदेश में करीब 26 लाख हैक्टेयर में गेहूं की फसल है। इस बार दिसम्बर, जनवरी एवं फरवरी माह में औसत से कम सर्दी पड़ी है। तापमान भी अधिक रहा है और कोहरा भी नहीं पड़ा। ऐसे में गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि औसत से करीब 5 से 6 डिग्री अधिक तापमान के चलते गेहूं के अलावा सरसों की फसल पर भी असर पड़ सकता है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमैंटेशन की ओर से जारी एन्वायरनमैंट स्टैटिक 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में कुल भौगोलिक क्षेत्र 44212 वर्ग किलोमीटर में से महज 1559 वर्ग किलोमीटर ही वनाच्छादित क्षेत्र है। यह औसत से बहुत कम है। ऐसे में यहां मौसम का मिजाज बिगड़ा-बिगड़ा रहता है। यही वजह है कि पिछले 2 दशक में उत्तरी भारत के राज्यों में गर्मी का पीरियड बढ़ता जा रहा है और सर्दी का पीरियड सिकुड़ रहा है। 1988 में हुई थी 1108 मिलीमीटर बरसात भारतीय मौसम विभाग चंडीगढ़ के आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। हरियाणा में मानसून 30 जून को दस्तक देता है। 2008 में मानसून समय से पहले 13 जून को आया जबकि 1987 में मानसून 27 जुलाई को आया था। मानसून के दौरान पिछले साल 1 जून से लेकर 30 सितम्बर तक हरियाणा में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। आमतौर पर मानसून में 426 मिलीमीटर बरसात होती है। आंकड़ों की बात करें तो साल 1988 में सबसे अधिक 1108 मिलीमीटर बरसात हुई थी। इसी तरह से 1995 में 939 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। 2011 में 374 मिलीमीटर, 2018 में 415 मिलीमीटर व 2020 में 376 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। वैसे हरियाणा में 1995 में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। 16 जिलों में 20 लाख 35 हजार एकड़ फसल प्रभावित हुई थी। 2840 गांवों और हरियाणा के अनेक शहरों के 28 लाख 87 हजार आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा था। 

इस बार बदलेगा पंचांग का गणित: 12 नहीं, 13 महीनों वाला होगा हिंदू नववर्ष 2026

नई दिल्ली Adhik Maas 2026 : वर्ष 2026 आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा, जिसके कारण साल में 12 के बजाय कुल 13 महीने होंगे। 17 मई से 15 जून 2026 तक की इस अतिरिक्त अवधि को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा। खगोलीय विज्ञान और अधिक मास का आधार अधिक मास का सीधा संबंध सूरज और चंद्रमा की चाल के बीच के अंतर को पाटने से है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। हर साल इन दोनों के बीच करीब 11 दिनों का फासला रह जाता है। जब यह अंतर बढ़ते-बढ़ते 30 दिनों के बराबर हो जाता है, तब पंचांग में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी गणितीय गणना के कारण 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार पड़ रहा है।   पौराणिक कथा और पुरुषोत्तम नाम की महिमा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम 'पुरुषोत्तम' देकर इसे अत्यंत पवित्र बना दिया। इसी मास का संबंध भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप के वध से भी जोड़ा जाता है। चूंकि हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे साल के 12 महीनों में से कोई नहीं मार पाएगा, इसलिए भगवान ने इस 13वें महीने का सृजन कर अधर्म का अंत किया। यह समय धर्म की स्थापना और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है। साधना और आत्मचिंतन का विशेष समय पंडितों और विद्वानों का मानना है कि अधिक मास कोई अशुभ समय नहीं है बल्कि यह ईश्वर की भक्ति के लिए रिजर्व रखा गया समय है। 17 मई से 15 जून के बीच अधिक मास महात्म्य का पाठ करना या कथा सुनना बहुत शुभ होता है। यह अवधि हमें भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर आत्म-मंथन करने और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।   वर्जित कार्य और विशेष सावधानी चूंकि यह समय पूरी तरह से ईश्वर की आराधना के लिए समर्पित है, इसलिए इस दौरान सांसारिक मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। अधिक मास में निम्नलिखित कार्य टाल देने चाहिए: विवाह और सगाई के कार्यक्रम। नया व्यापार या दुकान की शुरुआत। गृह प्रवेश और भूमि पूजन। मुंडन, जनेऊ या अन्य संस्कार। दान-पुण्य और लोकहित का महत्व इस महीने में किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। गरीबों को भोजन कराना, जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना, हवन और गीता का पाठ करना इस समय की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। यह महीना हमें सिखाता है कि सेवा और सकारात्मक सोच ही जीवन में वास्तविक सुख और शांति लाती है।

मध्य प्रदेश में रेलवे विस्तार तेज: 108 गांव प्रभावित, 2030 तक ट्रैक पर दौड़ेगी नई लाइन

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर से बुदनी के बीच बन रही नई ब्रॉडगेज रेल लाइन रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। पहले से ही करीब पांच साल देरी का सामना कर रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति जमीन अधिग्रहण की सुस्त प्रक्रिया के कारण थमी हुई है। कई गांवों में मुआवजा और सीमांकन संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाने से निर्माण कार्य तय गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा। हालात ऐसे हैं कि अब इस रेल लाइन को पूरा करने का लक्ष्य बढ़ाकर साल 2030 तक कर दिया गया है। जिससे क्षेत्रवासियों को सीधी रेल कनेक्टिविटी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। परियोजना में खर्च हो चुके हैं 2 हजार करोड़ यह 205 किमी का सेक्शन 342 किमी लंबी इंदौर-जबलपुर नई विद्युत रेल लाइन परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसे 2016-17 में मंजूरी मिली और 2018 में काम शुरू हुआ। शुरुआती लक्ष्य 2024-25 था, लेकिन फंड की कमी, जमीन अधिग्रहण और न्यायिक अड़चनों के कारण अब नई समयसीमा 2029-30 तय की गई है। करीब 7,400 करोड़ रुपए की इस परियोजना पर अब तक लगभग 2,000 करोड़ खर्च हो चुके हैं और प्रगति 30% दर्ज की गई है। निर्माण कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा तीन पैकेज में किया जा रहा है-मांगलिया गांव से खेरी, खेरी से पीपलिया नानकर और पीपलिया नानकर से बुदनी का काम चल रहा है। 75 किमी कम होगा सफर नई लाइन बनने के बाद इंदौर से जबलपुर की दूरी करीब 75 किमी कम हो जाएगी। अभी यात्रियों को भोपाल होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। नई कनेक्टिविटी से समय की बचत होगी और ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तक हो सकेगी। इससे मालवा और महाकौशल क्षेत्र के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा, साथ ही माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।   परियोजना में 80 सुरंगें परियोजना में 80 बड़े पुल और दो सुरंगें (1.24 किमी और 8.64 किमी) प्रस्तावित हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर कोई लेवल क्रॉसिंग नहीं होगी, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। सुरंगों का डिजाइन वन्यजीव क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए तैयार किया गया है। योजना के अनुसार 2027-28 में बुदनी से सलकनपुर, 2028-29 में मांगलिया गांव से खेरी और 2029-30 तक पूरा ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य है। 108 गांवों की जमीन अधिग्रहित कुल 205 किमी में से 186 किमी राजस्व और सरकारी भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। शेष वन क्षेत्र की अनुमति मार्च 2025 में मिल गई। 108 गांवों में अधिग्रहण कर लगभग 721 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है।

225 करोड़ की बड़ी मंजूरी: MP जिले में बनेंगी 254 नई सड़कें

विदिशा विदिशा जिले में गांव के टोला मजरा की 254 सड़कों की तस्वीर बदलेगी। जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में अनुमोदन मिलने के साथ ही बजट की स्वीकृति भी मिल गई है। मुख्यमंत्री मजरा-टोला योजना के तहत 218.89 किमी लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस पर 109.44 करोड़ रुपए का बजट खर्च होगा। जिला पंचायत अध्यक्ष गीता रघुवंशी के अनुसार सिरोंज में सबसे अधिक 64 बसाहटों के लिए 46.87 किमी लंबी सड़कों को मंजूरी दी गई है। इन सड़कों का निर्माण 23.43 करोड़ रुपए से होगा। इन क्षेत्रों में भी बनाई जाएंगी नई सड़कें इसी प्रकार लटेरी क्षेत्र में 55 बसाहटों के लिए 33.72 किमी लंबी सड़क बनाई जाएगी। नटेरन में 32 और ग्यारसपुर में 30 बसाहटों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जाएगा। गंजबासौदा में 27 और कुरवाई की 25 बसाहटों के लिए सड़क निर्माण के प्रस्ताव पास किए गए है। विदिशा जिला मुख्यालय से जुड़े 21 बसाहटों में 34.91 किमी लंबी सडकों का जाल बिछेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कैलाश रघुवंशी के अनुसार सड़कों के निर्माण को लेकर जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शमशाबाद विधानसभा में 116 करोड़ से बनेंगी 9 सड़कें शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र में 116 करोड़ की लागत से 9 सड़कों का निर्माण हो सकेगा। बजट में इन सडकों के लिए राशि घोषित कर दी गई है। विधायक सूर्य प्रकाश मीणा के अनुसार इन सभी सड़कों की लंबाई 77 किलोमीटर है। स्वीकृत सडकों के संबंध में बताया कि करारिया शमशाबाद मार्ग की लंबाई 34 किमी है। इस मार्ग की सड़क 75 करोड़ रुपए से तैयार होगी। इसी प्रकार खामखेड़ा कस्बा से बालाबरखेड़ा तक 10 किमी लंबी सड़क 15.22 करोड़ से बनेगी। ग्राम कागपुर से गढ़ला सुरई मूढरा से होते हुए ग्राम परस परसौरा तक 7 किमी लंबी सडक 5.40 करोड़ रुपए से तैयार की जाएगी। शमशाबाद रोड से कोटरा नामाखेड़ी कोठीचार कलां, सूखा सेमरा मार्ग सांकलखेड़ा, पुरेनिया से गंगरवाड़ा और सेमरा पहुंच मार्ग में 5.60 किमी लंबी सडक 4.50 करोड़ रुपए से बनेगी। सूखा नीमखेड़ा, परासी गूजर मार्ग की 5.50 किमी लंबी सडक 4.40 करोड़ रुपए से बनेगी। कोटी चार पहुंच मार्ग में 2.20 किमी लंबी सडक 1.76 करोड़ रुपए से बनेगी। खामखेड़ा, वामनखेड़ा, वांसखेड़ा मार्ग में 2 किमी लंबी सड़क के लिए 1.60 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। खामखेड़ा लोधाखेड़ी से गंगरवाड़ा मार्ग में 3 किमी लंबी सडक के लिए 2.40 करोड़ रुपए और पौआनाला से चटुआ मार्ग में 7 किमी लंबी सड़क के लिए 5.60 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। विधायक के अनुसार इन सडकों के निर्माण को लेकर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

बोर्ड परीक्षाओं की कॉपी जांच लेट, 90 लाख उत्तरपुस्तिकाएं अटकीं – सामने आया कारण

भोपाल बोर्ड परीक्षा में शामिल स्टूडेंट के लिए रिजल्ट का इंतजार लंबा होगा। कॉपियों की जांच करने शिक्षकों की कमी हो रही है। शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई जा रही है। ऐसे में कॉपियों को जांचने अब शिक्षक नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश में 16 लाख स्टूडेंट बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इनकी 90 लाख कॉपियां हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल से कक्षा बारहवीं की परीक्षा 10 फरवरी से शुरू हुई। 7 मार्च को परीक्षा खत्म होगी। इसी तरह दसवीं की परीक्षा 13 फरवरी से शुरू हुई। ये 6 मार्च तक जारी रहेगी। कॉपियों की जांच और रिजल्ट तैयार करने में डेढ़ से दो माह का समय लगता है। इसी के बीच ट्रेनिंग सहित शिक्षकों को दूसरे काम रहेंगे। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों की मदद लेने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। जनगणना में शिक्षक ज्यादा जानकारी के अनुसार, जनगणना में सबसे ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इनकी संख्या 25 से 30 हजार बताई जा रही है। इनमें से अधिकांश वैसे शिक्षक हैं, जिन्हें बोर्ड की कॉपियां जांचने की जिम्मेदारी दी जानी है। एक समय में दो काम होने के कारण यह परेशानी होगी।   देरी का गणित एक नजर में कुल परीक्षार्थी: 16 लाख (10वीं और 12वीं मिलाकर) कॉपियां: 90 लाख , रिजल्ट तैयार करने में दो माह का अनुमानित समय देरी हुई तो कॉलेज एडमिशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर असर।

स्पीड बनी जानलेवा! 7 साल में 1397 लोगों की मौत, फिर भी नहीं थम रही रफ्तार

भिंड नेशनल हाईवे 719 और 552 पर तेज गति सडक़ हादसों की वजह बन रही है। अकेले शहर के बायपास रोड पर ही एक माह में पांच लोग मौत के गाल में समा गए हैं। इन सभी हादसों के पीछे वाहनों की अनियंत्रित गति और चालकों की लापरवाही सामने आई है। हाइवे पर भले ही वाहनों की गति निर्धारित हो लेकिन चालक बेलगाम वाहनों को दौड़ा रहे हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। यातायात विभाग के पास इकलौता स्पीडोमीटर है उसका भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। बता दें भिण्ड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर कार की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। एमपीआरडीसी ने इसको लेकर बोर्ड भी लगाए है, लेकिन हाईवे पर कार 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भी अधिक दौड़ती हैं। ट्रक, डंपर और हैवी वाहनों की स्पीड 60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है वह भी इससे अधिक दौड़ते हैं जो कि हादसे का कारण बनते हैं। इसी तरह भिण्ड-भांडेर रोड पर बड़े वाहनों की स्पीड 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित है, मगर वाहन 70 से 80 किमी प्रति घंटा तक फर्राटे भरते हैं। कार की स्पीड 80 किमी है, वह भी नियंत्रित गति से अधिक तेज दौड़ती हैं। इस तरह चेक करते हैं स्पीड जिस वाहन की स्पीड चेक करनी होती है, उसके लिए पांच सौ मीटर की रैंज में टारगेट निर्धारित करके गाड़ी को लॉक किया जाता है। वाहन की पूरी जानकारी मशीन में लगे कैमरा में फीड हो जाती है। उसकी स्पीड और फोटो स्पीडो मीटर में पहुंच जाती है। निर्धारित गति से अधिक स्पीड में वाहन चलाने पर तीन हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान है।   एक साल में 347 चालान पिछले एक साल में यातायात पुलिस ने दोनों हाईवे पर 347 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की है। यातायात पुलिस की मानें तो स्पीडोमीटर में वाहन का टारगेट तय करने में समस्या आती है। जिले में स्पीडोमीटर लावन मोड़, डिड़ी, दीनपुरा, लहार रोड पर मानपुरा के पास लगाया जाता है। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि बायपास रोड पर स्पीडोमीटर काम नहीं करता है। क्योंकि वाहनों की स्पीड के लिए 500 मीटर का सीधा मार्ग होना चाहिए। बायपास पर ट्रैफिक अधिक होने के कारण स्पीड चेक करने के लिए जब वाहन का टारगेट फिक्स किया जाता है तो पीछे से दूसरा वाहन क्रॉस करने पर संबंधित वाहन की स्पीड कैमरे में लॉक नहीं हो पाती है। साल हादसे मृतक घायल     2019 699 172 724     2020 656 160 700     2021 645 209 669     2022 714 198 803     2023 639 197 784     2024 687 219 754     2025 671 242 721

Census 2027 बड़ा बदलाव: हर घर को मिलेगा अलग ID, सरकार बनाएगी नया डेटा सिस्टम

खंडवा देश में हर 10 साल में होने वाली जनगणना इस बार 2027 में होगी। जनगणना से पहले मई 2026 से घरों की गिनती का काम शुरू होगा। हर घर को अलग पहचान एक यूनिक नंबर के रूप में मिलेगी। जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर चार्ज अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुआ। प्रशिक्षण में कलेक्टर व प्रमुख जनगणना अधिकारी ऋषव गुप्ता ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक 10 वर्ष में होने वाली जनगणना के कार्य के लिए पूरी गंभीरता से ट्रेनिंग लें। मकानों के नंबरिंग की प्रक्रिया समझाई कलेक्टर ने बताया कि बताया कि जनगणना के लिए 15 से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिकों को उनकी जानकारी जनगणना पोर्टल में स्वयं ही भरने की सुविधा दी जाएगी। जनगणना-2027 के तहत मई-2026 माह में सर्वे कर घरों की लिस्टिंग का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रशिक्षण में मकानों के सूचीकरण तथा नंबरिंग की प्रक्रिया अधिकारियों को समझाई गई। अधिकारियों को बताया गया कि कोई भी मकान सूचीकरण से छूटना नहीं चाहिए। प्रत्येक मकान को देना होगा नंबर प्रत्येक मकान को एक अलग नंबर देना होगा। प्रशिक्षण में बताया गया कि फरवरी 2027 में घर-घर जाकर जनगणना की जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रशिक्षणमें अधिकारियों को भारत की जनगणना के संबंध में संक्षिप्त परिचय एवं नीति निर्माण सहित जनगणना-2027 के मुख्य बिंदुओं एवं प्रक्रियाओं के बारे में अवगत कराया गया। 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक कलेक्टर ने बताया कि जनगणना के लिए 700 से 800 की जनसंख्या पर एक ब्लॉक बनाया जाएगा। एक ब्लॉक पर एक एन्युमेटर की नियुक्ति की जाएगी। छह एन्युमेटर पर एक सुपरवाइजर रहेगा, जो संबंधित चार्ज अधिकारी को रिपोर्ट करेगा। प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के लिए डेटा कलेक्शन और जांच की प्रक्रिया के संबंध में भी बताया गया। प्रशिक्षण भोपाल से आए संभाग प्रभारी अभिमन्यु अरोरा और जिले के जनगणना प्रभारी जेएल साकेत द्वारा दिया गया। ट्रेनिंग में जिले के सभी एसडीएम, आयुक्त नगर निगम, तहसीलदार तथा सीएमओ उपस्थित रहे।