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तनाव के साये में क्रिकेट जंग: भारत-पाकिस्तान भिड़ंत पर सबकी नजर

कोलंबो रविवार को क्रिकेट में सबसे ज़्यादा इंतज़ार किए जाने वाले मैचों में से एक होगा, जब भारत और पाकिस्तान पुरुष टी20 वर्ल्ड कप में यहां आर प्रेमदासा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगे। यह मैच, जो पहले से ही अपने ज़ोरदार खेल के लिए मशहूर है, मैदान के बाहर हुई ज़बरदस्त घटनाओं के बैकग्राउंड में हो रहा है, जिसने टूर्नामेंट में और भी दिलचस्प बातें जोड़ दी हैं। बंगलादेश ने अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए वर्ल्ड कप से नाम वापस ले लिया, और अपने ग्रुप-स्टेज मैचों के लिए भारत नहीं आने का फ़ैसला किया। उनकी जगह, स्कॉटलैंड ने यह पक्का किया कि टूर्नामेंट आसानी से हो सके। शुरू में, खबर थी कि बंगलादेश के नाम वापस लेने के बाद पाकिस्तान भारत के ख़िलाफ़ अपने मैच का रिव्यू कर रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और आईसीसी के साथ बातचीत के बाद, पाकिस्तान ने कन्फ़र्म किया कि वे तय समय पर भारत के ख़िलाफ खेलेंगे, जिससे फ़ैन बिना किसी रुकावट के इस बड़े मैच का इंतज़ार कर सकें। मैदान पर, भारत पाकिस्तान के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप में आठ मैचों में सात जीत के अपने शानदार रिकॉर्ड के दम पर फेवरेट के तौर पर उतरेगा, जिसमें पिछले साल एशिया कप में मिली जीत भी शामिल है। भारत की बैटिंग की ताकत जबरदस्त शुरुआत और मोमेंटम बनाए रखने में काबिल एक मज़बूत मिडिल ऑर्डर का कॉम्बिनेशन है। ईशान किशन ज़बरदस्त फॉर्म में हैं, 2026 में उनका स्ट्राइक रेट 220 से ज़्यादा रहा है और उन्होंने हाल ही में 24 गेंदों पर 61 रन बनाए हैं। अगर वह जल्दी चल पड़ते हैं, तो भारत पावरप्ले पर कंट्रोल कर सकता है और पाकिस्तान पर तुरंत प्रेशर डाल सकता है। सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा से बीच के ओवरों में पारी को संभालने की उम्मीद है, जबकि हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे और अक्षर पटेल डेथ ओवरों में तेज़ी लाने के लिए फायरपावर देंगे। भारत का बॉलिंग अटैक भी उतना ही बैलेंस्ड है: जसप्रीत बुमराह पेस यूनिट को लीड करते हैं, जिन्हें स्पिनर वरुण चक्रवर्ती, अक्षर और कुलदीप यादव का सपोर्ट मिलता है, जो कोलंबो की धीमी, टर्निंग पिच के लिए काफी सही हैं। पाकिस्तान ग्रुप स्टेज में लगातार मैच जीतकर अपने मोमेंटम के साथ आ रहा है। उनकी ताकत उनके स्पिन अटैक में है, जिसे शादाब खान और अनोखे उस्मान तारिक लीड कर रहे हैं, जो धीमी पिच पर अच्छा खेलते हैं और भारत के मिडिल ऑर्डर को परख सकते हैं। साहिबज़ादा फरहान, जो पिछले गेम में शानदार 73 रन की पारी खेलकर फ्रेश हुए हैं, बाबर आज़म और उस्मान खान के साथ मिलकर पारी को संभालेंगे और भारत की बैटिंग की गहराई को चुनौती देने के लिए पार्टनरशिप बनाएंगे। अब जब मैदान के बाहर की अनिश्चितताएं दूर हो गई हैं, तो पाकिस्तान सिर्फ परफॉर्मेंस पर फोकस कर सकता है, जिससे उन्हें भारत के दबदबे का मुकाबला करने का एक भरोसेमंद मौका मिलेगा। इस मुकाबले में टॉस अहम भूमिका निभा सकता है। बीच-बीच में बारिश का अनुमान है, और आसमान में बादल छाए रहने से पारी की शुरुआत में सीमर्स को फायदा हो सकता है, जबकि धीमी होती पिच से मैच आगे बढ़ने पर स्पिनर्स को फायदा होगा। टी20 क्रिकेट, खासकर इतने बड़े मैच में, अक्सर कुछ अहम पलों पर निर्भर करता है, एक शानदार पार्टनरशिप, अचानक हार, या एक अच्छी तरह से की गई डिलीवरी नतीजा तय कर सकती है। आखिर में, भारत पाकिस्तान के खिलाफ टी 20 वर्ल्ड कप मैच जीतने का सिलसिला जारी रखने के लिए फेवरेट के तौर पर उतरेगा, लेकिन यह कोई सीधा मुकाबला नहीं होगा। किशन की ज़बरदस्त बैटिंग, पाकिस्तान का टैक्टिकल स्पिन अटैक, और बंगलादेश के हटने और पाकिस्तान के शेड्यूलिंग रिव्यू के सुलझने के बाद साइकोलॉजिकल इंटेंसिटी यह पक्का करती है कि यह मैच ड्रामा, हाई-स्टेक कॉम्पिटिशन और यादगार पलों का वादा करता है। स्किल और इमोशन दोनों में, यह मुकाबला क्रिकेट के सबसे कड़े मुकाबलों में से एक जैसा नज़ारा पेश करने के लिए तैयार है।  

थैलीसीमिया पीड़ितों के लिए बड़ा ऐलान, मुफ्त ट्रांसप्लांट और पेंशन योजना जारी

 जयपुर  राजस्थान में थैलीसीमिया पीड़ितों को निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट के साथ 1250 रुपए मासिक पेंशन मिल रही है। विधायक रूपिन्द्र सिंह कुन्नर द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने चिकित्सा सहायता से लेकर आर्थिक सुरक्षा तक के प्रावधानों को लेकर जवाब पेश किया है। निःशुल्क चिकित्सा और डे-केयर की सुविधा सरकार ने अवगत कराया कि प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में थैलीसीमिया मरीजों के लिए विशेष 'डे-केयर सेंटर' संचालित हैं । इन केंद्रों पर मरीजों को बिना किसी रिप्लेसमेंट के ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन केलेशन थेरेपी और सभी प्रकार की जाँचे पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं । इसके अतिरिक्त, गंभीर मरीजों के लिए वार्ड में भर्ती होने और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी महंगी चिकित्सा सुविधा भी सरकार द्वारा मुफ्त दी जा रही है । आर्थिक संबल : 1250 रुपए की मासिक पेंशन सामाजिक सुरक्षा के तहत, राज्य सरकार थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को 'मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना' का लाभ दे रही है । इस श्रेणी के बच्चों को वर्तमान में 1250 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन दर से सहायता दी जा रही है । सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि थैलीसीमिया को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत 21 दिव्यांगता श्रेणियों में शामिल किया गया है, जिसके आधार पर इन बच्चों के यूडीआईडी (UDID) कार्ड और दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं । आधार और बायोमेट्रिक नियमों पर स्पष्टीकरण सदन में आधार कार्ड की अनिवार्यता और बायोमेट्रिक सत्यापन को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग ने स्थिति स्पष्ट की। 5 वर्ष से कम आयु: जन्म से 5 वर्ष तक के बच्चों का उपचार माता-पिता के आधार कार्ड के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाता है । छोटे बच्चों का आधार नामांकन 'हेड ऑफ फैमिली' (HoF) के सत्यापन से किया जाता है । बायोमेट्रिक की बाध्यता नहीं : सरकार ने विशेष आदेश जारी कर यह सुविधा दी है कि जिन बच्चों के बायोमेट्रिक (हाथों के निशान) अपडेट नहीं हो पा रहे हैं, उनकी पेंशन नहीं रोकी जाएगी । ओटीपी आधारित सत्यापन : ऐसे मामलों में जहाँ फिंगरप्रिंट या फेस रिकॉग्निशन संभव नहीं है, वहाँ संबंधित पेंशन स्वीकृतिकर्ता अधिकारी पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी (OTP) के माध्यम से आवेदन स्वीकार कर स्वतः स्वीकृति जारी कर सकते हैं । यह वैकल्पिक प्रक्रिया उन विशेष मामलों के लिए 'अपवाद स्वरूप' लागू की गई है, ताकि तकनीकी कारणों से कोई भी पात्र बच्चा सहायता से वंचित न रहे ।

फ्लाइट कैंसलेशन के बाद इंडिगो की भर्ती मुहिम, 1000 नए पायलट्स शामिल होंगे

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो को पिछले साल दिसंबर में पायलट और अन्य क्रू की भारी किल्लत की वजह से 7 दिनों के भीतर 5000 से भी ज्यादा फ्लाइट्स को कैंसिल करना पड़ा था। अब इंडिगो अपने परिचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए 1,000 से अधिक पायलटों की भर्ती करने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो की इस भर्ती में ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर, सीनियर फर्स्ट ऑफिसर और कैप्टन शामिल हैं। अगर इंडिगो इस भर्ती को सफलतापूर्वक पूरा करती है तो यह भारतीय एयरलाइन कंपनी द्वारा की गई अभी तक की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक होगी। फ्रेशर भी रखे जाने की प्लानिंग  रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती नोटिस से पता चलता है कि एयरलाइन अपने नेटवर्क के प्रमुख विमान एयरबस ए320 पर बिना अनुभव वाले आवेदकों की भी भर्ती करने के लिए तैयार है। वहीं, एयरलाइन के नए नियमों के तहत पायलट द्वारा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच की जाने वाली लैंडिंग की संख्या सीमित कर दी गई है, साथ ही साप्ताहिक विश्राम की आवश्यकताएं भी बढ़ा दी गई हैं। पायलटों के भर्ती की तैयारी एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि एयरलाइन अपने विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पायलटों की निरंतर भर्ती के लिए सक्रिय रूप से तैयारी कर रही है। एयरलाइन के इंटरनल ट्रेनिंग सिस्टम पहले से मजबूत है, जिसके तहत प्रति माह लगभग 20-25 फर्स्ट ऑफिसर को कप्तान के पद पर पदोन्नत किया जाता है। एयरलाइन औसतन प्रति माह लगभग चार नए विमान शामिल करती है। दिसंबर में क्यों रद हुई थी उड़ानें? नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की जांच में पाया गया कि एयरलाइन ने नए नियमों के लिए पर्याप्त भर्ती नहीं की और न ही ट्रेनिंग में तेजी लाई, जिससे पायलटों पर बार-बार ट्रांसफर, लंबे वर्किंग डेज और लंबे समय तक खाली उड़ान के कारण प्रेशर बढ़ गया। इंडिगो को 2,422 कप्तानों की आवश्यकता थी, लेकिन एयरलाइन के अनुसार उसके पास केवल 2,357 कप्तान ही थे। जिसकी वजह से रोस्टर पूरी तरह से लागू नहीं हो सका और उड़ानों को रद करना पड़ा।  

2050 का खतरा: दुनिया की 25% आबादी को हो सकती है कान की दिक्कत, WHO की चेतावनी

नई दिल्ली दुनिया भर में सुनने से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की पहली वर्ल्ड रिपोर्ट ऑन हियरिंग के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की करीब 2.5 अरब आबादी यानी हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर की सुनने की समस्या से जूझ रहा होगा. इनमें से लगभग 70 करोड़ लोगों को कान और सुनने से जुड़ी विशेष हॉस्पिटैलिटी और पुनर्वास सेवाओं की जरूरत पड़ेगी. ‌ ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 2050 तक हर चार में से एक शख्स को कान की दिक्कतें क्यों होगी और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में और क्या-क्या आया सामने आया. अभी क्या है स्थिति? डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति को सुनने में किसी न किसी तरह की दिक्कत है. समय पर इलाज और देखभाल न मिल पाना मामलों के बढ़ने के बड़ी वजह है. डब्ल्यूएचओ का कहना है की कम आय वाले देशों में ऐसे 80 प्रतिशत मामले सामने आते हैं, जहां एक्सपर्ट्स और संसाधनों की भारी कमी है. इसके अलावा संक्रमण, जन्मजात बीमारियां, ध्वनि प्रदूषण, तेज आवाज में लंबे समय तक रहना और अनहेल्दी लाइफस्टाइल सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं. वहीं बच्चों में करीब 60 फीसदी मामलों को टीकाकरण, बेहतर मातृत्व, शिशु देखभाल और कान के संक्रमण के समय पर इलाज से रोका जा सकता है. वहीं युवाओं में तेज आवाज में संगीत सुनना बड़ा खतरा बनता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 12 से 35 वर्ष के एक अरब से ज्यादा लोग स्मार्टफोन और हेडफोन के जरिए तेज आवाज में गाने सुनने के कारण खतरे में है. हेल्थ व्यवस्था में बड़ी कमी भी वजह डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि कई देशों में कान, नाक और गला एक्सपर्ट्स, ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट की भारी कमी है. वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में कान और सुनने से जुड़ी देखभाल को अभी भी पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई. इसके चलते शुरुआती पहचान और समय पर इलाज नहीं हो पाता है. इसके अलावा एक्सपर्ट का कहना है कि सुनने की समस्या की शुरुआती जांच बहुत जरूरी है. वहीं नई तकनीकों की मदद से अब कम संसाधनों में भी जांच संभव है. कई कान की बीमारियों का इलाज दवा या सर्जरी से हो सकता है. जहां सुनने की क्षमता वापस नहीं लाई जा सकती, वहां हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट और स्पीच थेरेपी जैसे ऑप्शन मददगार साबित होते हैं. डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि कान और सुनने से जुड़ी सेवाओं में निवेश करने पर सरकार को हर एक डॉलर के बदले करीब 16 डॉलर का सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल सकता है. वहीं सुनने की समस्या का असर सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहता. यह पढ़ाई, रोजगार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है. इसके अलावा डब्ल्यूएचओ के अनुसार इससे सामाजिक अलगाव और अवसाद का खतरा भी बढ़ सकता है.

शादी की खुशियां मातम में बदलीं: तिलक से लौट रहे 3 लोगों को ट्रक ने रौंदा, घर में पसरा सन्नाटा

पटना बिहार के पूर्णिया से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आ रही है। यहां एक तेज रफ्तार और बेकाबू ट्रक ने टोटो में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि टोटो पर 6 लोग सवार थे। पिता-पुत्र समेत 3 की मौके पर दर्दनाक मौत मिली जानकारी के अनुसार, घटना शुक्रवार देर रात सरसी थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर नहर के पास की है। मृतकों की पहचान धमदाहा थाना क्षेत्र के कुमारी गांव निवासी 45 वर्षीय जागो ऋषि, उनके 18 वर्षीय पुत्र किशन कुमार और 40 वर्षीय कंचन देवी के रूप में हुई है। हादसे में टोटो चालक समेत तीन अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज नजदीकी अस्पताल में चल रहा है। रघुनाथपुर नहर के समीप तेज रफ्तार और बेकाबू ट्रक ने टोटो में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। तिलक समारोह से लौट रहा था परिवार जानकारी के अनुसार, 24 फरवरी को जागो ऋषि की बेटी की शादी होनी थी। टोटो पर सवार छह लोग तिलक की रस्म पूरी कर घर लौट रहे थे। तभी रास्ते में तेज रफ्तार ट्रक ने टोटो को टक्कर मारते हुए तीन लोगों को कुचल दिया और चालक वाहन लेकर फरार हो गया। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस जांच में जुटी इधर सूचना मिलते ही सरसी और धमदाहा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जीएमसीएच पूर्णिया भेज दिया गया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त टोटो को जब्त कर लिया है और फरार ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी चालक की पहचान के लिए जांच जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

कैबिनेट का बड़ा फैसला: ‘अर्बन चैलेंज फंड’ से बदलेंगे शहरों के विकास की तस्वीर

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को भारतीय शहरों की सूरत बदलने के लिए 'अर्बन चैलेंज फंड' (UCF) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ की सहायता राशि प्रदान करेगी। सरकार का लक्ष्य इस फंड के जरिए 2031 तक शहरी बुनियादी ढांचे में कुल ₹4 लाख करोड़ का निवेश जुटाना है। फंडिंग का बदला अंदाज यह योजना भारत के शहरी विकास में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब शहर केवल सरकारी Grants पर निर्भर नहीं रहेंगे। केंद्र सरकार किसी भी प्रोजेक्ट की लागत का केवल 25% हिस्सा देगी। शहरों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कम से कम 50% रकम बाजार (बैंक लोन, म्युनिसिपल बॉन्ड या प्राइवेट निवेश) से जुटानी होगी। शेष 25% हिस्सा राज्य सरकार या नगर निगम को वहन करना होगा। शहरों के बीच होगी 'टक्कर' फंड के लिए शहरों का चयन 'चैलेंज मोड' के जरिए होगा। इसका मतलब है कि जिन शहरों के प्रोजेक्ट प्रस्ताव सबसे प्रभावी, सुधारवादी और परिणामोन्मुखी होंगे, उन्हें ही फंडिंग मिलेगी। यह फंड 2030-31 तक चालू रहेगा और भविष्य में इसे 2034 तक बढ़ाया जा सकता है। पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष कवच छोटे शहरों और पहाड़ी राज्यों (North-East) की मदद के लिए सरकार ने ₹5,000 करोड़ का एक विशेष कॉर्पस बनाया है। यह उन नगर निकायों के लिए 'क्रेडिट गारंटी' का काम करेगा जो पहली बार बाजार से कर्ज ले रहे हैं। इसका उद्देश्य इन निकायों को इतना मजबूत बनाना है कि वे खुद निवेश जुटाने में सक्षम हो सकें। किन कामों पर होगा खर्च? इस फंड का मुख्य फोकस तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:     शहरों को आर्थिक विकास का हब बनाना।     पुराने शहरी केंद्रों और हेरिटेज साइट्स का पुनर्विकास।     जल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों में सुधार (जैसे सीवेज नेटवर्क, कचरा प्रबंधन और बेहतर परिवहन)।  

BNP की बड़ी जीत के बाद भारत को संदेश—PM मोदी का आभार जताते हुए कहा, अब संबंध होंगे और मजबूत

ढाका बांग्लादेश में संसदीय चुनाव में शानदार जीत के बाद Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के बधाई संदेश के लिए सार्वजनिक रूप से आभार जताया है। पार्टी ने इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। BNP ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पार्टी प्रमुख Tarique Rahman के नेतृत्व को मिली मान्यता का वह स्वागत करती है। पार्टी ने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को दर्शाती है। BNP ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि वह लोकतांत्रिक शासन, समावेशिता और राष्ट्रीय विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी ने संकेत दिया कि आने वाले समय में नई सरकार भारत के साथ रचनात्मक और सहयोगपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है। BNP ने कहा कि वह भारत के साथ पारस्परिक सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के साझा लक्ष्य के आधार पर काम करने को तैयार है।   इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को उनकी पार्टी की निर्णायक जीत पर बधाई दी थी और कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक माने जा रहे हैं। यह चुनाव 2024 के जन आंदोलनों के बाद पहला था, जिनके चलते लंबे समय से सत्ता में रहीं Sheikh Hasina को पद छोड़ना पड़ा था। चुनाव में BNP ने 300 सीटों वाली संसद में बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की है, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन मुख्य विपक्ष के रूप में उभरा है।  

क्या फिर दोहराएगा इतिहास? भारत बनाम पाकिस्तान के 8 मैचों का पूरा हिसाब

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 का फाइनल से भी बड़ा मैच रविवार 15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाना है, जो कि इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच है। हर कोई यही बात कह रहा है कि ये क्रिकेट की सबसे बड़ी राइवलरी है, लेकिन आंकड़ों पर गौर करेंगे तो आप पाएंगे कि इसमें राइवलरी नाम का कुछ है ही नहीं। टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास के आंकड़ों को उठाया जाए तो आप देखेंगे कि पाकिस्तान भारत के आगे टिकता ही नहीं है। टीम इंडिया और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप के इतिहास में अब तक 8 मुकाबले खेले गए हैं। इन 8 मैचों में से सिर्फ एक बार पाकिस्तान को जीत मिली है। 7 बार भारतीय टीम ने मुकाबला जीता है। इसके अलावा 8 में से 3 मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच एक ही खिलाड़ी रहा है, जो इस बार टीम का हिस्सा नहीं है, लेकिन उसके आगे पाकिस्तान के गेंदबाजों को एक नहीं चलती थी। ये थे क्रिकेट के किंग विराट कोहली। हालांकि, एक बार ऐसा भी हुआ है, जब पाकिस्तान का एक खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द मैच रहा, लेकिन उनकी टीम को भारत से हार का सामना करना पड़ा। ऐसा हुआ था साल 2007 के टी20 विश्व कप के ग्रुप फेज के मैच में, जब मोहम्मद आसिफ को 4 विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। ये मैच टाई रहा था और बॉल आउट के जरिए मैच का नतीजा निकला था, जिसमें भारत को जीत मिली थी। पाकिस्तान का एक और खिलाड़ी इंडिया वर्सेस पाकिस्तान टी20 विश्व कप मैच में प्लेयर ऑफ द मैच रहा है, जो कि शाहीन शाह अफरीदी हैं। 2021 के टी20 विश्व कप के लीग फेज के मैच में शाहीन ने 4 ओवर में 31 रन देकर 3 विकेट निकाले थे। इसमें केएल राहुल, रोहित शर्मा और विराट कोहली का विकेट शामिल था। इसके अलावा 6 मैचों में भारतीय खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द मैच रहे हैं। उनमें भी 3 बार विराट कोहली ने ये खिताब जीता है। विराट कोहली ने 2012, 2016 और 2022 के टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीता है। 2007 के टी20 विश्व कप फाइनल में इरफान पठान प्लेयर ऑफ द मैच थे। 2014 में अमित मिश्रा ने ये अवॉर्ड अपने नाम किया था। 2024 में जसप्रीत बुमराह ने प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड हासिल किया था। एशिया कप 2025 में भारत ने लगातार तीन मैचों में पाकिस्तान को हराया था। ऐसे में पाकिस्तान का मनोबल गिरा हुआ होगा।

CM का बड़ा ऐलान- केन-बेतवा लिंक से 300 गांवों को मिलेगा पानी

दमोह मध्य प्रदेश के दमोह जिले के नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव और किसान सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दमोह जिले के लिए विकास योजनाओं की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रक्षेत्र, सिंचाई परियोजनाओं और पर्यटन विस्तार से जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, सूखे खेत को पानी मिल जाए तो फसल सोने जैसी हो जाती है और केन-बेतवा लिंक परियोजना दमोह की तस्वीर बदल देगी। चीतों की संख्या 35 हुई सीएम ने बताया कि प्रदेश में चीतों का पुनर्स्थापन देश के लिए उदाहरण बना है। श्योपुर के उद्यान में लाए गए चीतों की संख्या अब बढ़कर 35 हो चुकी है और इसी वर्ष जून से पहले नौरादेही अभयारण्य में भी चीते छोड़े जाएंगे। इससे दमोह क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए घर ठहराव योजना के तहत अनुदान भी दिया जा रहा है। 600 करोड़ की घोषणा सिंचाई के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने व्यारमा नदी से पानी लिफ्ट कर बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता बढ़ाने और दमोह विधानसभा के 33 गांवों की 14 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने के लिए 600 करोड़ रुपये की घोषणा की। साथ ही राजनगर तालाब, सीतानगर और सतधरू बांध पर पर्यटन गतिविधियां तथा जल क्रीड़ा केंद्र विकसित किए जाएंगे। एक नजर में घोषणाएं-:     नौरादेही अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापन     गीता भवन निर्माण के लिए 2 करोड़     600 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई योजना     नवीन जिला जेल के लिए 70 करोड़     तेंदूखेड़ा और हटा में खेल स्टेडियम     राजनगर तालाब व बांधों पर पर्यटन और बोट क्लब     नोहटा को नगर परिषद बनाने पर परीक्षण     व्यारमा नदी पर जल क्रीड़ा केंद्र

‘योगी और सत्ता साथ कैसे?’ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने CM पर उठाए सवाल

वाराणसी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि शंकराचार्य की पहचान राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, तो मुख्यमंत्री  कैसे रह सकते हैं? शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच बयानबाजी को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इस बयान के बाद शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता से तय नहीं होती। उन्होने कहा कि जो योगी बन गया, उसे राजपाट से दूर रहना चाहिए। राजा योगी बन सकता है, लेकिन योगी फिर से राजा नहीं बनता। तो सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, विरक्त हैं, तो मुख्यमंत्री सत्ता स्वीकार कैसे कर रहे हैं? 'कोई सीएम शंकराचार्य नियुक्त नहीं करेगा' एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सपा ने शंकराचार्य को मारा था। आप भी मार चुके हो। मतलब सपा ने जिसे मारा, उसे हम भी मार सकते हैं। अगर यही परिभाषा है, तो सपा से अलग कैसे हो सकते हो? जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका देखिएगा। सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। उन्होने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इनमें धार्मिक पदों का निर्धारण आध्यात्मिक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर होता है। उन्होंने कहा कि सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य होगा या नहीं। सीएम योगी ने क्या कहा था? शंकराचार्य विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है, यहां तक कि मुख्यमंत्री भी नहीं। योगी ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है और इसकी अपनी परंपराएं व नियम हैं, जिनका पालन जरूरी है। उन्होने आरोप लगाया कि माघ मेले में जिस मुद्दे को लेकर विवाद बनाया गया, वह वास्तविक नहीं था बल्कि जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था बनाई थी और किसी को भी नियम तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए पूछा कि अगर संबंधित व्यक्ति शंकराचार्य थे तो पूर्व में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई। 'गेरुआ वस्त्र पहनने से कोई योगी नहीं बन जाता' वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केवल गेरुआ वस्त्र पहनने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता और संतों का सम्मान होना चाहिए। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।