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जी राम जी योजना पर सियासी घमासान, विपक्ष के विरोध पर शिवराज चौहान ने पूछा– राम से दिक्कत क्या है?

नई दिल्ली  मनरेगा का नाम बदलने वाले बिल को लेकर विपक्ष की आपत्ति के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राम का नाम जुड़ते ही इन लोगों को पता नहीं क्या परेशानी हो जाती है। मंगलवार को लोकसभा में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन -ग्रामीण (VB- G RAM G) विधेयक 2025 पेश किया गया। इस मौके पर चौहान ने कहा, ‘महात्मा गांधी खुद राम राज की बात करते थे और उनके अंतिम शब्द भी हे राम करते थे। हर गरीब को बेरोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो। गरीब, जनजाति और पिछड़ा को रोजगार मिले और उसके लिए यह बिल आया है। 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा। यह पूरा बिल महात्मा गांधी के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है। मुझे समझ नहीं आता कि राम नाम जुड़ते ही इन लोगों को बिल से क्या आपत्ति हो गई है, जबकि भगवान राम तो खुद ही राम राज्य की बात करते थे।’   ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना उनका अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति के पास भेजा जाए। चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं।’’ उनका कहना था कि मोदी सरकार महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। कांग्रेस ने भी बदला था जवाहर रोजगार योजना का नाम शिवराज चौहान ने सवाल किया, ‘‘कांग्रेस की सरकार ने भी जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था?’’ चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया, ‘‘हम इस विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दे रहे हैं। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि इस विधेयक से गांवों का संपूर्ण विकास होगा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक में केंद्र के अनुदान को 90 से 60 प्रतिशत किया गया है और राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक वापस लिया जाना चाहिए या कम से कम स्थायी समिति के पास भेजा जाए।’’ प्रियंका गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी की ‘‘निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रह’’ के आधार पर कोई विधेयक पेश नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और कई अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाए।  

हाईकोर्ट में गरमाया माहौल: ‘आप वकील कहलाने के योग्य नहीं’ सुनते ही भड़कीं जज साहिबा

नई दिल्ली  बार चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाने वाले वकील को दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील की फेसबुक पोस्ट पर आपत्ति जताई है। साथ ही कहा है कि वह वकील बनने तक के लायक नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही करने से इनकार कर दिया है, लेकिन वकील को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है।   मामला दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन चुनावों से जुड़ा हुआ है। यहां एक एडवोकेट ने फेसबुक पर चुनाव में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे और भड़काऊ पोस्ट की थी। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने वकील की आलोचना की और मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास भेजने की बात कही है। बार एंड बेंच के अनुसार, उन्होंने कहा, 'अगर आप इस तरह की पोस्ट डालते हैं, तो आप वकील बनने के लायक ही नहीं हैं। चुनाव कभी भी दोस्ताना नहीं होते और खासतौर से बार के। इससे आपको ये सब पोस्ट करने का अधिकार नहीं मिलता है। मैं इस मामले को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास भेजूंगी। ये सब क्या बकवास है। बार में ऐसे नेता नहीं होने चाहिए। कोर्ट आपके इस काम और सफाई से खुश नहीं है। कोर्ट ऐसे बार नेताओं के होने की उम्मीद नहीं करता है।' कोर्ट में पोस्ट करने वाले वकील की तरफ से एडवोकेट महमूद पर्चा पेश हुए थे। उन्होंने मुवक्किल की ओर से बगैर शर्त माफी मांगी है। हालांकि, कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि वकील की तरफ से सोशल मीडिया पर की गईं पोस्ट्स को हटाया जाए। जज ने कहा, 'कोर्ट की गरिमा को बनाए रखना है। आप इस बात के व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे कि पोस्ट डिलीट की जाएं। कोर्ट ये उम्मीद नहीं करता कि बार के नेता ऐसा हों।' कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एडवोकेट के फेसबुक पोस्ट को गंभीरता से लिया गया है। हालांकि, बगैर शर्त माफी मांगने और केस को देखते हुए कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही नहीं की जा रही है। कोर्ट ने वकील को भविष्य में ऐसी कोई भी पोस्ट नहीं करने की चेतावनी देकर छोड़ा है। अदालत ने कहा है कि ऐसी कोई भी पोस्ट न की जाएं, जिसके कोर्ट की गरिमा को धक्का लगे।

सीएम नीतीश का बड़ा दांव: सात निश्चय पार्ट-3 के तहत 1 करोड़ रोजगार, 50 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

पटना    बिहार की नीतीश सरकार ने अब अपने महत्वकांक्षी सात निश्चय कार्यक्रमों के तीसरे पार्ट को लागू करने फैसला किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद सात निश्चय-3 को लागू किए जाने का ऐलान एक्स पर किया है। मुख्यमंत्री ने बताया है कि बिहार कैबिनेट ने सात निश्चय पार्ट-3 को मंजूरी प्रदान की है। सीएम नीतीश कुमार ने एक्स पर लिखा, '24 नवम्बर 2005 को जब से हमलोगों की सरकार बनी, तब से राज्य में कानून का राज है और लगातार 20 वर्षों से सभी क्षेत्रों और सभी वर्गों के विकास के लिए काम किया गया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि राज्य में सुशासन के कार्यक्रमों के अन्तर्गत सात निश्चय (2015-2020) और सात निश्चय-2 (2020-2025) में न्याय के साथ विकास से जुड़े निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के बाद बिहार को सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने हेतु अब सात निश्चय-3 कार्यक्रमों को लागू करने का निर्णय लिया गया है। 1. दोगुना रोजगार- दोगुनी आय सात निश्चय-3 का पहला निश्चय ‘दोगुना रोजगार- दोगुनी आय’ रखा गया है। इसका उद्देश्य राज्य की प्रति व्यक्ति औसत आय को दोगुना करना है। इसके लिए कई कार्यक्रमों एवं योजनाओं को लागू किया गया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हमलोग राज्य की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10 हजार रूपए दे रहे हैं। इस योजना के लाभुकों को अपना रोजगार आगे बढ़ाने के लिए 02 लाख रूपए तक की सहायता दी जाएगी। हमलोगों ने वर्ष 2023 में राज्य में जाति आधारित गणना के साथ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण भी कराया था, जिसमें चिह्नित 94 लाख गरीब परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार योजनाओं से आच्छादित किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। बिहार के उत्पादों की ब्रिक्री के लिए हाट-बाजारों को विकसित किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए वर्तमान में अलग से युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन किया जा चुका है। 2. समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार सात निश्चय-3 का दूसरा निश्चय ‘समृद्ध उद्योग- सशक्त बिहार’ है। इसके तहत राज्य में तेजी के उद्योगों के विकास के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तीन उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया जा चुका है। इन समितियों के गठन का मुख्य उद्देश्य है- बिहार को पूर्वी भारत का नया प्रौद्योगिकी केंद्र (Tech Hub) बनाना, बिहार को विश्वस्तरीय कार्य स्थल (Work Place) के रूप में विकसित करना और राज्य के प्रतिष्ठित उद्यमियों तथा प्रतिभाशाली युवाओं को राज्य के अंदर उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। राज्य के सभी जिलों में उद्योग लगाने के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। हमलोगों ने अगले 05 वर्षों में राज्य में कम से कम 50 लाख करोड़ का निजी निवेश सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान नई सरकार बनने के बाद राज्य में उद्योग विभाग के अंतर्गत छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग निदेशालय का गठन किया गया है तथा राज्य के स्थानीय उत्पादों के निर्यात एवं बाजार विकास के लिए एक नए बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम की स्थापना की गई है। हमलोगों ने निर्णय लिया है कि बंद पड़ी 9 चीनी मिलों को चरणबद्ध रूप से चालू किया जाएगा तथा 25 नई चीनी मिलों की स्थापना भी की जाएगी। 3. कृषि में प्रगति-प्रदेश की समृद्धि सात निश्चय-3 का तीसरा निश्चय ‘कृषि में प्रगति- प्रदेश की समृद्धि’ है। इसके तहत किसानों की आय बढ़ाने के लिए वर्ष 2024 से 2029 के लिए गठित चौथे कृषि रोड मैप के काम में और तेजी लाई जाएगी। साथ ही मखाना रोड मैप बनाकर मखाना के उत्पादन एवं प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा। डेयरी एवं मत्स्य पालन पर विशेष जोर दिया जाएगा तथा राज्य के सभी गावों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन एवं प्रत्येक पंचायत में ‘‘सुधा‘‘ बिक्री केंद्र की स्थापना की जाएगी। साथ ही हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के काम को और आगे बढ़ाया जाएगा। 4. उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य सात निश्चय-3 का चौथा निश्चय ‘उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य’ है। इसके तहत राज्य में अलग उच्च शिक्षा विभाग का गठन कर दिया गया है। अब राज्य के पुराने प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा तथा राज्य में नई एजुकेशन सिटी का निर्माण भी किया जाएगा। 5. सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन सात निश्चय-3 का पांचवां निश्चय ‘सुलभ स्वास्थ्य- सुरक्षित जीवन’ है। इसके तहत प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (Speciality Hospital) के रूप में तथा जिला अस्पतालों को अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (Super Speciality Hospital) के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य के नए मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में बेहतर पढ़ाई एवं इलाज के लिए लोक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।  दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों को अलग से प्रोत्साहन की व्यवस्था एवं सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति लाई जाएगी। 6. मजबूत आधार-आधुनिक विस्तार सात निश्चय-3 का छठा निश्चय ‘मजबूत आधार-आधुनिक विस्तार’ है। इसके तहत राज्य में शहरी क्षेत्रों का विस्तार एवं नागरिक सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। साथ ही, नए आधुनिक नियोजित शहरों का विकास किया जाएगा तथा शहरी गरीबों के लिए सस्ते आवास की व्यवस्था की जाएगी। शहरों में सुलभ संपर्कता के लिए 5 नई एक्सप्रेस-वे सड़कों का निर्माण और ग्रामीण सड़कों का चरणबद्ध तरीके से 2 लेन चौड़ीकरण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त विद्युत से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण एवं सभी इच्छुक लोगों के घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही राज्य के पर्यटन स्थलों को विकसित कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थलों के रूप में स्थापित किया जाएगा। पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले सर्किट में सभी प्रकार की पर्यटकीय सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य में महत्वपूर्ण स्थलों पर हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्मों की शूटिंग के लिए फिल्म सिटी का निर्माण तथा फिल्म व्यवसाय को प्रोत्साहित किया जाएगा। पटना में विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स सिटी के निर्माण के साथ ही राज्य के सभी जिलों में खेलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। राज्य में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खेल … Read more

खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल का 11वां संस्करण आज से, 200 फ़िल्मों की होगी प्रदर्शनी

 छतरपुर  विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो में पिछले 10 वर्षों से आयोजित होने वाला खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल का 11 वां संस्करण 16 दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक होगा। यह आयोजन दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के शिल्पग्राम परिसर में आयोजित होगा। इस बार का 11वां फिल्म महोत्सव दिवंगत प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र तथा अभिनेता असरानी को समर्पित रहेगा। पर्यटन मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी समारोह का उद्घाटन करेंगे। फेस्टिवल में मशहूर फिल्म अभिनेत्री हेमामालिनी को भी बुलाया गया है। इस बार आयोजन में नौ टपरा टॉकीज बनाई गई हैं। इनमें से एक बमीठा में भी बनाई है। प्रतिदिन की शाम मंच पर शानदार कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस बार 16 देशों का प्रतिनिधि मंडल इस आयोजन में शामिल होगा। जहां देश विदेश की 200 फ़िल्में प्रदर्शित की जाएंगी। आज आएंगे अनुपम खेर इस महोत्सव में युवा कलाकारों को मंच भी मिलता है। जहां वह अपनी फिल्मों को प्रदर्शित करेंगे। विदेशी कलाकारों की फिल्म कला भी इन टपरा टॉकीज में देखने को मिलेगी। महोत्सव शुभारंभ अवसर पर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर खजुराहो आएंगे। खास बात यह है कि मुंबई से खजुराहो की फ्लाइट नहीं होने से कई कलाकार खजुराहो नहीं आ पाते। फिर भी कई फिल्मी हस्तियां इस समारोह में शामिल होंगी।     खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल का 11 वां आयोजन 16 दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक रहेगा। जहां देश विदेश के कलाकारों की फिल्मकला देखने को मिलेगी। नौ टपरा टाकीज इस बार बनाए गए हैं।     -राजा बुंदेला, आयोजक, खजुराहो फिल्म फेस्टिवल  

प्रदेश में शीतलहर और कोहरे का कहर, ग्वालियर, रीवा में 50 मीटर दृश्यता, भोपाल में शीतलहर जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में जारी शीतलहर के बीच लगभग आधे राज्य में घने कोहरे ने अपनी चपेट में ले लिया है। शीतलहर के साथ कोहरा इतना घना है कि, मौसम विभाग ने सूबे के 22 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। हालात ये हैं कि, कई जिलों में यातायात बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। इनमें सड़क परिवहन के साथ साथ रेल सेवा भी शामिल है। प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से रीवा में 5.5 डिग्री, राजधानी भोपाल में 5.8 डिग्री, इंदौर में 6.6 डिग्री, बैतूल में भी 5.8 डिग्री। उमरिया में 7 डिग्री, रायसेन में 7.6, मलाजखंड-नौगांव में 7.8, खजुराहो में 8.1, नरसिंहपुर में 8.2, दमोह-मंडला में 8.5, छिंदवाड़ा में 8.6, टीकमगढ़ में 8.9, ग्वालियर में 9.1, उज्जैन में 9.3, जबलपुर में 9.4, सतना में 9.6 और गुना में 9.9 डिग्री तापमान रहा। मंगलवार सुबह के लिए ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज और सीधी में घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यानी, इन जिलों में 50 मीटर दूर देखना भी मुश्किल रहेगा। वहीं, भोपाल, विदिशा, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल और सिंगरौली में कोहरे का येलो अलर्ट है। यहां 1 से 2 हजार मीटर विजिबिलिटी रहेगी। इससे पहले सोमवार सुबह रीवा, मुरैना-रायसेन में इतना कोहरा था कि 50 मीटर के बाद कुछ नहीं दिखा। भोपाल में 500 से 1 हजार मीटर तक विजिबिलिटी दर्ज की गई। दिनभर कोहरा छाया रहा। दोपहर में भी यह स्थिति थी कि 2-ढाई किलोमीटर बाद कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। ठंड के सीजन की यह पहली सुबह रही, जब घना कोहरा छाया हो। कोहरे का सबसे ज्यादा असर रीवा में रहा। छतरपुर के खजुराहो में 50 से 200 मीटर, भोपाल, ग्वालियर, दतिया और सीधी में 500 से 1 हजार मीटर, इंदौर, नर्मदापुरम, सागर, रतलाम, दमोह और मंडला में 1-2 हजार मीटर दृश्यता रही। अशोकनगर, पचमढ़ी, टीकमगढ़, विदिशा, शाजापुर, सीहोर, देवास में भी कोहरे वाली सुबह रही। दूसरी ओर, तापमान में भी खासी गिरावट देखी गई। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो सोमवार की रात में भोपाल में सबसे कम 5.8 डिग्री, इंदौर में 6.6 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9.3 डिग्री और जबलपुर में पारा 9.4 डिग्री रहा। प्रदेश में सबसे ठंडे पचमढ़ी और राजगढ़ रहे। यहां तापमान 5.4 डिग्री दर्ज किया गया। बैतूल में 5.8 डिग्री, उमरिया में 7 डिग्री, रीवा में 7.5 डिग्री, रायसेन में 7.6 डिग्री, मलाजखंड-नौगांव में 7.8 डिग्री, खजुराहो में 8.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.2 डिग्री, दमोह-मंडला में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा में 8.6 डिग्री, टीकमगढ़ में 8.9 डिग्री, सतना में 9.6 डिग्री और गुना में तापमान 9.9 डिग्री रहा। कड़ाके की ठंड बढ़ने की संभावना मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि उत्तर भारत के पहाड़ों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहां से आ रही सर्द हवाओं के साथ ही इस बार राजस्थान की तरफ से भी शुष्क एवं सर्द हवाएं लगातार चल रही हैं। इस वजह से प्रदेश में ठंड के तीखे तेवर बरकरार हैं। वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ कमजोर प्रकृति के हैं। इस वजह से मौसम का इस तरह का मिजाज अभी बना रहने की संभावना है।

सरकारी नौकरी में बदलाव: ‘स्थाई-अस्थाई’ का भेद मिटेगा, 2 बड़े फायदे होंगे कर्मचारियों को

भोपाल मध्यप्रदेश में जल्द ही शासकीय सेवकों के बीच 50 साल पुराना एक और भेद खत्म होने वाला है। यह नियमित शासकीय सेवाओं में स्थाई और अस्थाई पदों का है, जो मध्यप्रदेश के गठन के साथ ही विभागों के लिए तैयार किए जाने वाले मैनपावर के ढांचे की रचना के समय पैदा हुआ था। तब नए विभाग और नए पद सृजित किए गए थे। सभी नियमित पद थे, लेकिन तत्कालीन सरकार ने एक समान वेतन, भत्तों और सुविधाओं के बावजूद स्थाई और अस्थाई की श्रेणी में बांट दिया था। तभी से दोनों श्रेणियों में भर्तियां होती रहीं, लेकिन जो शासकीय सेवक अस्थाई पदों पर सेवा देते आ रहे हैं, उन्हें कई कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। कानूनी अड़चनों का सामना वर्तमान में 7.50 लाख से ज्यादा कुल नियमित पद हैं। इनमें 2 से 5 फीसदी अस्थाई हैं। इस वजह से विभागों को नियंत्रण और प्रबंधन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो नियमित श्रेणी के अस्थाई पदों पर भर्ती होकर सेवा कर रहे अधिकारी, कर्मचारियों को भी कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक यह अहम प्रस्ताव मंगलवार को कैबिनेट बैठक में रखा जा सकता है। सब ठीक रहा तो मंजूरी मिल सकती है। एक जानकारी के अनुसार मंत्रालय सेवा में सहायक अनुभाग अधिकारी 338 हैं। इनमें 284 स्थाई और 54 अस्थाई है। सहायक ग्रेड-2 के 335 पद में 307 स्थाई व 28 अस्थाई हैं। सहायक ग्रेड-3 के कुल 602 पदों में से 534 स्थाई और 68 अस्थाई हैं। वन विभाग की वन सेवा के तहत वन क्षेत्रपाल के कुल 1194 पदों में से 1192 स्थाई और 02 अस्थाई है। इसी तरह दूसरे विभागों में भी है। अस्थाई पद वालों को होंगे ये दो बड़े लाभ -ऐसे शासकीय सेवक यदि दूसरी सेवाओं में चयनित होकर काम करना चाहेंगे और तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद पुरानी सेवा में वापस आना चाहेंगे तो आ सकेंगे। अभी इन्हें, इसकी पात्रता नहीं है। -कई बार राज्य व केंद्र के सार्वजनिक उपक्रमों को अनुभवी मैनपावर की जरुरत होती है, वे भर्ती के लिए अधिसूचना जारी करते हैं, जिसमें स्पष्ट उल्लेख होता है कि 3 से 5 साल की नियमित सेवा पूरी कर चुके अभ्यार्थी ही उपक्रमों की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। अभी अस्थाई पदों पर सेवा देने वाले सेवक इन उपक्रमों में शामिल नहीं हो सकते, जिन्हें स्थायी पदों पर संविलियन करने से यह बाधा दूर होगी। कार्यभारित पदों पर भी होना है निर्णय मंत्रालय समेत प्रदेश में कई विभागों के अंदर कार्यभारित पद भी है, जिन पर शासकीय सेवकों की नियमित भर्ती होती आ रही है। ये पद भी नियमित के समान ही है। सामान्य प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इन पदों पर भी निर्णय होना है। बता दें कि नियमित श्रेणी में अस्थाई पद सबसे ज्यादा मंत्रालय सेवा के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग, गृह विभाग समेत लगभग सभी विभागों में हैं। जहां बड़ी संख्या में अस्थाई कर्मचारी सेवा दे रहे हैं। भेद खत्म होने से किस पर क्या पड़ेगा असर सरकार     सेवाओं के प्रबंधन व शासकीय सेवकों पर नियंत्रण में और अधिक मदद मिलेगी। अनावश्यक आदेश-निर्देश की जरुरत नहीं पड़ेगी।     अस्थाई पद: ऐसे जितने भी पद हैं वे धीरेधीरे खत्म होंगे, उन पर कार्यरत शासकीय सेवकों के सेवानिवृत होने के बाद उन पर भर्ती नहीं होंगी। इन पदों को नियमित पदों में शामिल किया जाएगा।     अस्थाई पदों पर सेवारत शासकीय सेवक: ये पूर्व की तरह सेवा में बने रहेंगे। विभाग चाहे तो नियमों में संशोधन कर इन्हें स्थाई श्रेणी में ला सकेंगे।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया संबल योजना के तहत 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का ऐलान, सीधे हितग्राहियों के खातों में

भोपाल   एमपी सीएम डॉ. मोहन यादव आज मंगलवार 16 दिसंबर को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी संबल योजना के तहत हितग्राहियों को बड़ी राहत देने जा रहे हैं। एक सिंगल क्लिक के माध्यम से वे 7 हजार 227 प्रकरणों में कुल 160 करोड़ रुपए की अनुग्रह सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर करेंगे। यह कार्यक्रम राजधानी भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। इसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। क्या है संबल योजना दरअसल संबल योजना के तहत दी जाने वाली यह अनुग्रह सहायता असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक संबल बनेगी। दुर्घटना, असामयिक मृत्यु या अन्य आपात परिस्थितियों में यह सहायता राशि परिवारों को तात्कालिक सहारा देती है। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि संकट के समय परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। सीएम का बड़ा संदेश कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव प्रदेश सरकार की अन्य जनहितैषी योजनाओं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएंगे। इसमें श्रमिक कल्याण, ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्रमुख रहेंगी। यही नहीं सीएम यह भी संदेश देंगे कि सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पारदर्शिता हो रही मजबूत राज्य सरकार लगातार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता लाते हुए सरकारी व्यवस्थाओं को मजबूत कर रही है, ताकि किसी भी स्तर पर बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और लाभ सीधे पात्र हितग्राही तक पहुंचे। संबल योजना के तहत होने वाला यह बड़ा भुगतान इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का बड़ा दावा सरकार का दावा है कि आने वाले समय में भी ऐसी योजनाओं के जरिए श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों को निरंतर राहत दी जाती रहेगी।

फिलीपींस में योजना बनाते बाप-बेटा, ऑस्ट्रेलिया हमले का हुआ खुलासा, IS से ली थी प्रेरणा

सिडनी ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर रविवार शाम को हुए सामूहिक गोलीबारी हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। यह हमला यहूदी समुदाय के हानुका उत्सव 'चानुका बाय द सी' के दौरान हुआ, जिसमें करीब एक हजार लोग शामिल थे। पुलिस ने इसे आतंकी घटना घोषित कर दिया है और प्रारंभिक जांच से संकेत मिल रहे हैं कि हमलावर इस्लामिक स्टेट (आईएस) की विचारधारा से प्रेरित थे। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मंगलवार को कहा कि हमला इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित लगता है। उन्होंने इसे नफरत की विचारधारा करार दिया, जो पिछले एक दशक से कुछ लोगों को उग्रवादी बनाने का काम कर रही है। पुलिस ने पुष्टि की है कि हमलावरों की कार में दो घरेलू स्तर पर बने इस्लामिक स्टेट के झंडे और इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) मिले हैं। हमलावरों की पहचान हमलावर पिता-पुत्र थे। 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसके 24 वर्षीय बेटे नवीद अकरम ने इस हमले को अंजाम दिया। साजिद अकरम की पुलिस की गोलीबारी में मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नवीद गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में पुलिस हिरासत में है। साजिद के पास छह हथियारों का वैध लाइसेंस था, जिनका इस्तेमाल हमले में किया गया लगता है। पुलिस कमिश्नर माल लैन्यन ने बताया कि दोनों हमलावर पिछले महीने फिलीपींस की यात्रा पर गए थे और इस यात्रा के उद्देश्य की जांच चल रही है। कुछ रिपोर्ट्स में संकेत है कि वे वहां मिलिट्री ट्रेनिंग लेने गए थे। नवीद अकरम की 2019 में ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी एएसआईओ ने जांच की थी, क्योंकि उसके आईएस से जुड़े एक सेल से संबंध थे, लेकिन तब उसे तत्काल खतरा नहीं माना गया। कैसे हुआ हमला? हमला शाम करीब 6:47 बजे शुरू हुआ, जब दोनों हमलावर एक फुटब्रिज से लंबी दूरी की राइफलों से भीड़ पर गोलियां बरसाने लगे। कुल 103 गोलियां चलाई गईं। हमले में एक 10 वर्षीय बच्ची सहित 15 लोग मारे गए। घायलों में बच्चे और पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। एक निहत्थे राहगीर अहमद अल अहमद ने बहादुरी दिखाते हुए एक हमलावर को निरस्त्र कर दिया, जिससे कई जानें बच गईं। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने उन्हें मानवता की ताकत का उदाहरण बताया। न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने इसे यहूदी समुदाय पर "बर्बर हमला" बताया। ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिम संगठनों ने हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि यह इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है। दुनिया भर में शोक सभाएं हुईं और सिडनी ओपेरा हाउस को हनुक्का मेनोरा से रोशन किया गया। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने बंदूक कानूनों को और सख्त करने का वादा किया है। जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी अन्य की संलिप्तता के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच सभी पहलुओं पर चल रही है।

अक्षर पटेल की बीमारी से बाहर, अंतिम दो T20 मैचों के लिए टीम में नया खिलाड़ी शामिल

 नई दिल्ली भारत के ऑलराउंडर अक्षर पटेल बीमारी के कारण भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका टी20 सीरीज के शेष दो मुकाबलों से बाहर हो गए हैं. अक्षर ने धर्मशाला में खेले गए तीसरे टी20 में हिस्सा नहीं लिया था और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सोमवार, 15 दिसंबर को पुष्टि की कि वह सीरीज के आगे किसी भी मैच में नहीं खेलेंगे. स्पिन-बॉलिंग ऑलराउंडर अक्षर ने इस सीरीज में आखिरी बार दूसरे टी20 में खेला था, जहां उन्हें बल्लेबाजी के लिए नंबर 3 पर प्रमोट किया गया था. हालांकि, अक्षर मुश्किल हालात में भारत को उबार नहीं सके और टीम को मुल्लांपुर में 51 रनों से हार का सामना करना पड़ा. बीमारी के चलते बाहर हुए अक्षर अक्षर पटेल को 2026 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत के प्रमुख खिलाड़ियों में से एक माना जा रहा है, जिसकी मेजबानी भारत और श्रीलंका संयुक्त रूप से करेंगे. उनकी बीमारी ऐसे अहम समय पर आई है, जब भारतीय टीम प्रबंधन टूर्नामेंट के लिए स्क्वॉड को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है. हालांकि, जब तक यह बीमारी गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली नहीं होती, तब तक इससे अक्षर के चयन पर असर पड़ने की संभावना कम है. इस खिलाड़ी को मिली जगह बंगाल के शाहबाज अहमद को अक्षर पटेल के रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया है. शाहबाज़, जिन्होंने मौजूदा सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में अब तक चार विकेट लिए हैं, लगभग अक्षर जैसे ही (लाइक-टू-लाइक) विकल्प माने जा रहे हैं. यह लेफ्ट-आर्म स्पिनर इस समय घरेलू क्रिकेट में शानदार फॉर्म में चल रहे हैं. क्या प्लेइंग इलेवन में अक्षर की जगह कुलदीप खेलेंगे? अक्षर पटेल की गैरमौजूदगी में कुलदीप यादव को तीसरे टी20आई की प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया. लेग स्पिनर कुलदीप ने पारी के अंतिम ओवरों में दो विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका को 20 ओवरों में सिर्फ 117 रनों पर रोकने में अहम भूमिका निभाई. अभिषेक शर्मा ने इस लक्ष्य को आसान बना दिया और पावरप्ले में भारत को जबरदस्त शुरुआत दिलाई. अभिषेक की 18 गेंदों में 35 रनों की तूफानी पारी के बाद भारतीय पारी लड़खड़ा गई, लेकिन मेज़बान टीम ने 15.5 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर लिया. टी20आई सीरीज के आखिरी दो मुकाबले लखनऊ और अहमदाबाद में खेले जाएंगे. तीन मैचों के बाद भारत सीरीज में 2-1 से आगे है. अब तक सीरीज के तीनों मुकाबले एकतरफा रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडन मार्करम ने भी इस बात को स्वीकार किया और कहा कि प्रोटियाज़ टीम इस सीरीज में बने रहने के लिए दबाव की स्थिति में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी.    

वृंदावन: बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं हुआ ठाकुर जी का भोग, हलवाई को नहीं मिली सैलरी

 मथुरा वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में पहली बार ठाकुर जी को बाल और शयन भोग नहीं लगा. हलवाई को भुगतान न होने के कारण भोग तैयार नहीं किया गया और कई सालों से चली आ रही भोग लगाने की परंपरा टूट गई. इसे लेकर मंदिर के गोस्वामियों में आक्रोश है. वहीं हाई पावर कमेटी अपना पल्ला झाड़ने में लगी है. वृंदावन के श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हर रोज लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं. सोमवार को ठाकुर जी बिना भोग के ही भक्तों को दर्शन दिए. ठाकुर जी के लिए सुबह बाल भोग और शाम को शयन भोग दिया जाता है. लेकिन आज दोनों ही भोग ठाकुर जी को नहीं लगा. हलवाई ने नहीं तैयार किया भोग श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी का गठन किया है. उसी के अंतर्गत ठाकुर जी के लिए प्रसाद और भोग की सामग्री तैयार करने के लिए हलवाई नियुक्त किया गया है. प्रतिमाह हलवाई को अस्सी हजार रुपये वेतन दिया जाता है, लेकिन कुछ महीनों से हलवाई को वेतन नहीं दिया जा रहा था. जिसके कारण हलवाई ने ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं किया. ठाकुर जी को चार बार लगता है भोग मंदिर के गोस्वामी ने बताया, श्री ठाकुर बांके बिहारी का भोग तैयार करने की जिम्मेदारी मयंक गुप्ता नाम के व्यक्ति के पास है. मयंक हलवाई के माध्यम से ठाकुर जी के लिए सुबह बाल भोग, दोपहर में राजभोग और शाम को उत्थापन भोग और रात्रि में शयव भोग लगाया जाता है. हलवाई द्वारा तैयार किया गया भोग ठाकुर जी को अर्पण किया जाता है. लेकिन आज सेवायतों को भोग नहीं मिला. कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया, सोमवार को मंदिर परिसर में ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शाम को शयन भोग नहीं मिलने की जानकारी मिली थी. मयंक गुप्ता से पूछा गया तो बताया कि हलवाई का भुगतान न होने के कारण भोग तैयार नहीं किया गया. जल्द ही मयंक गुप्ता को भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं और इस तरह की घटना की दोबारा पुनरावृत्ति ना हो उसके लिए आदेश कमेटी द्वारा दिया जा रहा है.