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शिक्षकों के बिना पढ़ाई! DAVV में विजिटिंग फैकेल्टी के भरोसे अकादमिक व्यवस्था

इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में शिक्षकों का अभाव बना हुआ है। बरसों से रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। इनकी कमी अब विभागों में महूसस होने लगी है, क्योंकि वरिष्ठ प्राध्यापक लगातार सेवानिवृत्त हो रहे है। ऐसे में विभागों की शैक्षणिक, परीक्षा और रिजल्ट से जुड़े गतिविधियां प्रभावित होती है। विजिटिंग फैकेल्टी के भरोसे 90 फीसद विभाग टीके हुए है। इन दिनों जनवरी से शुरू होने वाले सेमेस्टर को लेकर तैयारी चल रही है। आधा दर्जन से ज्यादा विभागों ने विजिटिंग फैकल्टी के लिए आवेदन मांगवाएं है। अधिकारियों के मुताबिक कई विभागों में नियमित व सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों के पद नहीं है।   हर साल विभागों को सालभर में दो मर्तबा विजिटिंग फैकेल्टी की भर्तियां करना पड़ती है। मई और दिसंबर में आवेदन मांगवाए जाते है। 11 महीने की अवधि रखी जाती है। इन दिनों वाणिज्य, सांख्यिकी, कम्प्यूटर साइंस, सोशल साइंस, फिजिक्स सहित अन्य विभागों ने विज्ञापन निकाला है। विभाग स्तर पर आवेदनों की स्क्रूटनी की जाएगी। उसके बाद उम्मीदवारों के लिए साक्षात्कार रखे जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक विभाग की आवश्यकता अनुसार विजिटिंग फैकेल्टी रखी जाएगी। इन विभागों में पांच से लेकर आठ शिक्षकों को रखा जाएगा। 180 पद हैं अभी रिक्त विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में प्राध्यापक, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, रीडर व लेक्चरार के 450 से अधिक पद है। 270 पद पर शिक्षक कार्यरत है, जिसमें 112 प्रोफेसर, 54 रीडर, 43 लेक्चरार, 60 एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर है। 2009 के बाद 2022 में रिक्त पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। उस दौरान 45 सेल्फ फाइनेंस और 47 बैंकलाग पदों पर भर्तियां की गई। उसके बाद अभी 180 पद पर नियुक्तियां होना बाकी है। इन्हें भरने को लेकर अभी विश्वविद्यालय ने कोई प्रक्रिया नहीं शुरू की है।  

2,000 रन से बस कुछ कदम दूर टेंबा बावुमा, तीसरे वनडे में बनेगा बड़ा रिकॉर्ड?

नई दिल्ली भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच विशाखापत्तनम के एसीए-एडीसीए मैदान में शनिवार को तीसरा वनडे खेला जाना है। सीरीज 1-1 से बराबर है। आखिरी मुकाबला निर्णायक होगा। इस मैच में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान वनडे क्रिकेट में 2,000 रन पूरे कर सकते हैं। भारत दौरे पर सफलता की नई कहानी लिख रहे दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा तीसरे वनडे में 2,000 रन का आंकड़ा छू सकते हैं। बावुमा को इसके लिए 13 रन की जरूरत है। बावुमा ऐसा करने वाले दक्षिण अफ्रीका के 22वें बल्लेबाज होंगे। बावुमा शायद इस आंकड़े को छू चुके होते अगर वह रांची में खेले गए पहले वनडे का हिस्सा होते। दूसरे वनडे में 46 रन की अहम पारी खेलने वाले बावुमा ने इस फॉर्मेट में अपने करियर की शुरुआत 2016 में की थी। इंजरी से प्रभावित करियर में अब तक खेले 54 मैचों की 52 पारियों में 5 शतक और 8 अर्धशतक की सहायता से बावुमा 1,987 रन बना चुके हैं। उनका औसत 42.27 रहा है। दक्षिण अफ्रीका की टीम ने भारत में सिर्फ 1 ही बार वनडे सीरीज जीती है। 2015-16 में 5 वनडे मैचों की सीरीज दक्षिण अफ्रीका ने 2-3 से जीती थी। उस सीरीज में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एबी डिविलियर्स थे। बावुमा के पास डिविलियर्स के रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए भारत में वनडे सीरीज जीतने वाले दूसरे दक्षिण अफ्रीकी कप्तान बनने का मौका है। वनडे सीरीज से पहले 2 मैचों की टेस्ट सीरीज खेली गई थी। टेंबा बावुमा की कप्तानी वाली दक्षिण अफ्रीका ने सीरीज 0-2 से जीती थी। 2000 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब दक्षिण अफ्रीका ने भारत का टेस्ट सीरीज में सूपड़ा साफ किया। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका से तीसरे वनडे में भारतीय टीम को सावधान रहना होगा। बावुमा एंड कंपनी तीसरे वनडे को जीतकर 2015-16 की उपलब्धि को फिर से दोहराना चाहेगी।  

MP में 329 पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज, विधानसभा में खुलासा, जनता के रखवाले भी कटघरे में

भोपाल  मध्यप्रदेश की विधानसभा में आज एक अहम और बड़ी जानकारी निकलकर सामने आई है। जनता के रखवाले खाकी वर्दी वालों पर भी मामले दर्ज हैं। कानून तोडऩे में पुलिस वाले भी पीछे नहीं हैं। विधानसभा में एक सवाल में सरकार ने जो जानकारी दी है वो खाकी पर सवाल खड़े करने वाली है। दरअसल पिछले दो साल में विभिन्न थानों में 329 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कई धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिसवालों के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले भोपाल शहर में है, जहां 48 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं। वहीं फिर ग्वालियर जिला आता है। विधानसभा में विधायक बाला बच्चन के सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी साझा की है। जानकारी में बताया गया है कि  पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज 61 प्रकरणों में अभी विवेचना चल रही है, जबकि 259 मामलों में चालान पेश किया जा चुका है। ज्यादा प्रकरण भोपाल शहर, ग्वालियर, इंदौर, गुना, सिवनी, बालाघाट में दर्ज किए गए हैं । विभिन्न  मामलो की बात करें तो भोपाल शहर में 48, ग्वालियर में 27, गुना में 17, बालाघाट में 13 तो सिवनी में 18 और इंदौर शहर और देहात में17-17 मामले पुलिस वालों पर दर्ज है। गौर करने वाली बात है कि  इंदौर और भोपाल में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद भी लूट, चोरी जैसे अपराधों में बढ़ोतरी हुई है जो सोचने वाली बात है।

बिना इजाजत लगेगा स्मार्ट मीटर! MP सरकार के जवाब से बढ़ा विवाद

भोपाल प्रदेशभर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उठ रहे सवालों और शंकाओं को लेकर सरकार ने विधानसभा में जवाब दिया कि स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ता की सहमति लिया जाना आवश्यक नहीं है। बिजली कंपनियों द्वारा चेक मीटरों को लगाया जा रहा है, अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने 31335 चेक मीटर लगाए हैं। स्मार्ट मीटरों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक कैलाश कुशवाह, राजन मंडलोई, दिलीप परिहार द्वारा लगाए गए प्रश्नों के उत्तर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी दी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भविष्य में स्मार्ट मीटरों की स्थापना के लिए जारी होने वाली निविदाओं में पांच प्रतिशत चेक मीटर लगाए जाने का प्रविधान रखा जाना है।   स्मार्ट मीटरों के संबंध में भी शिकायत प्राप्त होने पर चेक मीटर लगाकर उपभोक्ता की शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने से विद्युत उपभोक्ताओं को विभिन्न लाभ यथा विद्युत खपत एवं जिलों में पारदर्शिता, रियल टाइम खपत की निगरानी, शासन की सब्सिडी योजनाओं का लाभ पात्र उपभोक्ताओं को प्राप्त होगा। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक 20 प्रतिशत की छूट निम्न दाब उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर स्थापित कराए जाने पर दिन के समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। उक्त स्मार्ट मीटरों में नेट मीटरिंग की उपलब्धता होने के दृष्टिगत सोलर का विकल्प लेने वाले उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इसका लाभ प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में बिजली कंपनियों को निजी हाथों में बेचने संबंधी कोई भी कार्रवाई प्रचलन में नहीं है। ऊर्जा विभाग अंतर्गत कार्यरत तीनों बिजली वितरण कंपनियों में से पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ही दो निविदाओं के माध्यम से स्मार्ट मीटर क्रय किए गए है। स्मार्ट मीटरों की स्थापना का कार्य डिजायन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन आपरेट ट्रांसफर माडल पर किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने बताया-पांच नहीं शत प्रतिशत मीटरों की हो रही जांच     ऊर्जा मंत्री ने जानकारी में बताया कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में पांच प्रतिशत मीटर नहीं शत प्रतिशत लगाए जा रहे मीटरों की जांच लैबोरेटरी में कराई जा रही है।     शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना व मध्यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता-2021 के अध्याय-8 "विद्युत मापन तथा बिलिंग" के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पारदर्शी बिलिंग, मीटर रीडिंग प्रणाली में सुधार और सटीक ऊर्जा लेखाकंन के लिए लगाए जा रहे हैं। 

जहरीला कफ सिरप! मध्यप्रदेश में बच्चों द्वारा पी गई दवा में 42 फीसदी डीईजी मिला

भोपाल मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के तीन और सैंपल अमानक पाए गए हैं। इनमें डायथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मात्रा 42 प्रतिशत पाई गई है। जबकि निर्धारित मानक के अनुसार, किसी भी कफ सीरप में डीईजी की मात्रा 0.1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। ये तीनों उन बाटल के सैंपल हैं, जो बच्चों द्वारा पीने के बाद बच गए थे। इनके सैंपल की जांच मध्य प्रदेश में विषाक्त कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने राज्य औषधि लैब से कराई है। इससे साफ है कि बच्चों की मौत अधिक डीईजी मिश्रित कोल्ड्रिफ कप सीरप पीने से ही हुई।   दरअसल, अधिक मात्रा में डीईजी का सेवन किडनी फेल कर देता है। बता दें कि इसके पहले तमिलनाडु औषधि प्रशासन की जांच में कोल्ड्रिफ सीरप में डीईजी की मात्रा 48.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश औषधि प्रशासन विभाग की जांच में 46.2 प्रतिशत मिली थी। उल्लेखनीय है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप बैच नंबर एसआर-13 के अतिरिक्त, खांसी का ही सीरप रिलाइफ बैच नंबर एलएसएल 25160 और रेस्पीफ्रेस टीआर-आर 01जीएल 2523 भी अमानक मिला था। इनमें डीईजी की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक थी।   चार दवाएं भी अमानक मिलीं वहीं, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया है कि कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद प्रदेश भर में कफ सीरप के जितने सैंपल लिए गए थे, उनमें इनमें 109 मानक के अनुरूप और तीन अमानक मिले हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के उपयोग में आने वाली चार दवाएं अमानक मिली हैं, जिनमें पेट के उपचार के लिए उपयोग होने वाला हेप्साडिन सीरप, चिटेम-एमडी, फेरस एस्कार्बेट टैबलेट, पेट में कीड़े मारने की अलबेंडाजोल टैबलेट शामिल है। उप मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

किसानों की मजबूरी: बाजार में कीमत धड़ाम, खेत में गाएं खा रही केले की फसल

बड़वानी क्षेत्र में केला उत्पादक किसानों को इन दिनों फसल के दाम नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। केले के कम दाम मिलने से गुस्साए किसान फसल को काटकर मवेशियों को केले खिला रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे अपनी फसल को खेत से उखाड़कर फेंकने को मजबूर हैं। दरअसल, नर्मदा पट्टी क्षेत्र में केला उत्पादन बेहतर होता है। यहां पर उत्पादित केला कई राज्यों को भेजा जाता है। इसमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा व दिल्ली शामिल है। वहीं इस बार कम दाम व खराब हालात के कारण किसानों को अपनी फसल नष्ट करनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार यदि केले के दाम नहीं मिलेंगे तो कैसे चलेगा।   दाम तो दूर मजदूरी की लागत भी नहीं निकल पा रही है। ग्राम बगूद के किसान अनिल जाट का कहना है कि केले का भाव थोक में दो रुपये प्रति किलो मिल रहा है जबकि उत्पादन लागत 5 से 6 रुपये प्रति किलो आ रही है। ऐसे में किसानों के सामने फसल को नष्ट करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। किसानों ने उचित दाम दिए जाने की मांग की है।

हवाई सफर में संकट, रेल ने संभाला मोर्चा: 4 प्रीमियम ट्रेनों में बढ़ाई गई सीटें, देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली इंडिगो एयरलाइंस की उड़ानों में पिछले कई दिनों से जारी बड़े पैमाने पर कैंसिलेशन और देरी की वजह से हवाई यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय रेलवे ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए यात्रियों को वैकल्पिक और भरोसेमंद विकल्प देने का फैसला किया है। रेलवे ने आज (5 दिसंबर 2025) से चार सबसे व्यस्त और लोकप्रिय प्रीमियम ट्रेनों में स्थायी रूप से अतिरिक्त कोच लगाने की घोषणा की है। इससे दिल्ली-जम्मू, दिल्ली-डिब्रूगढ़, दिल्ली-चंडीगढ़ और दिल्ली-अमृतसर रूट पर यात्रा करने वालों को तत्काल राहत मिलेगी।    ये ट्रेनें हुईं अपग्रेड ट्रेन का नाम एवं नंबर     जोड़ा गया अतिरिक्त कोच नई दिल्ली – जम्मू तवी राजधानी एक्सप्रेस (12425/12426)     → एक अतिरिक्त थर्ड एसी (3A) कोच नई दिल्ली – डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस (12423/12424)     → एक अतिरिक्त थर्ड एसी (3A) कोच नई दिल्ली – चंडीगढ़ शताब्दी एक्सप्रेस (12045/12046)     → एक अतिरिक्त चेयर कार (CC) कोच नई दिल्ली – अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस (12029/12030)     → एक अतिरिक्त चेयर कार (CC) कोच रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ये अतिरिक्त कोच आज से ही संबंधित ट्रेनों में लगने शुरू हो गए हैं और वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को सबसे पहले कन्फर्म सीटें दी जा रही हैं। यात्रियों के लिए सलाह अगर आप आने वाले दिनों में इन रूट्स पर हवाई यात्रा की योजना बना रहे थे और आपकी फ्लाइट कैंसिल हो गई है, तो तुरंत IRCTC वेबसाइट या ऐप पर इन ट्रेनों में सीट उपलब्धता चेक करें। राजधानी और शताब्दी में अक्सर लास्ट मिनट में भी कन्फर्मेशन मिलने की संभावना बढ़ गई है। रेलवे का यह कदम न सिर्फ इंडिगो के यात्रियों को बड़ी राहत देगा बल्कि त्योहारी सीजन में बढ़ती भीड़ को मैनेज करने में भी मदद करेगा।  

राम की पैड़ी पर शंखनाद और पुष्प वर्षा से गूंजी अयोध्या

अयोध्या के विकास कार्यों ने जीता तमिल अतिथियों का मन, मुख्यमंत्री के विज़न दिखा का असर अयोध्या दौरे ने तमिल प्रतिनिधिमंडल के मन में भरी अपार श्रद्धा : डीएम अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में काशी-तमिल संगमम के चौथे संस्करण के तहत काशी से आए 250 विशिष्ट अतिथियों का राम की नगरी अयोध्या में पारंपरिक और भव्य तरीके से स्वागत-सत्कार किया गया। लग्जरी बसों के काफिले के साथ जब अतिथि अयोध्या पहुंचे, तो राम की पैड़ी पर ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखनाद और पुष्प-वर्षा के बीच उनका हर्षोल्लास से अभिनंदन किया गया। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी अतिथियों का पारंपरिक रीति से स्वागत किया। रामलला के दिव्य दर्शन से शुरू हुई यात्रा, अंत में राम की पैड़ी पर उमड़ा भावनाओं का सागर अतिथियों ने अयोध्या पहुंचने के बाद सबसे पहले नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन-पूजन किए। दर्शन के दौरान तमिल अतिथियों की आंखों में उमड़ती भक्ति और आस्था ने पूरे माहौल को भावपूर्ण बना दिया। इसके उपरांत सभी अतिथि हनुमानगढ़ी पहुंचे, जहां बजरंगबली के दर्शन कर उन्होंने आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में तमिल अतिथियों को राम की पैड़ी ले जाया गया, जहां उन्होंने सरयू नदी के दृश्य और आरती स्थल का अवलोकन किया। ‘जय श्रीराम’ के जयघोष और तमिल भक्तों की आस्था ने पूरे वातावरण को राममय कर दिया। भोजन, संवाद और सांस्कृतिक सेतु का अनोखा संगम दर्शन के उपरांत अयोध्या धाम बस अड्डे के नवनिर्मित ऑडिटोरियम में विशिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई थी, जिसमें पारंपरिक व्यंजनों के साथ अवधी व उत्तर भारतीय स्वाद का अद्भुत संगम परोसा गया। सभी अतिथियों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया, जहां आपसी बातचीत एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सुंदर दृश्य देखने को मिला। पूरा आयोजन भारतीय संस्कृति की एकता, विविधता और सांस्कृतिक सेतु का सजीव उदाहरण बना। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सदियों पुराना राम-बंधन एक बार फिर सशक्त रूप में परिलक्षित हुआ। योगी सरकार द्वारा राम की पैड़ी और अयोध्या में किए गए विकास कार्य भी अतिथियों ने नजदीक से देखे और सराहे। जिलाधिकारी निखिल टीकाराम ने बताया कि अयोध्या की यह यात्रा तमिल अतिथियों के मन में रामनगरी के प्रति अपार श्रद्धा, प्रेम और अविस्मरणीय स्मृतियां छोड़ गई। शहर में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।

निवेश को मिलेगी रफ्तार: FDI बढ़ाने के लिए सीएम योगी का अधिकारियों को कड़ा आदेश

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रदेश में विदेशी निवेश को नई रफ्तार देने के लिए चल रहे प्रयासों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए साफ कहा कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ निवेश की संभावना नहीं, बल्कि निवेश के भरोसे का राज्य बन गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर निवेशक के साथ संवाद लगातार बना रहना चाहिए और किसी भी स्तर पर देरी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि 'स्पीड, स्टेबिलिटी और सपोर्ट' यही नए उत्तर प्रदेश की पहचान होनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के सितंबर 2025 तक की अवधि में उत्तर प्रदेश को 683 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है और राज्य का कुल संचयी विदेशी निवेश अक्टूबर 2019 से अब 2,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि चालू अवधि में प्रदेश को 5,963 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश प्रवाह मिला है, जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज वृद्धि को दर्शाता है। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि एफडीआई-एफसीआई-फॉर्च्यून 500 नीति-2023 के तहत अब तक 11 निवेश आवेदकों ने 13,610 करोड़ रुपए के प्रस्ताव दिए हैं। इसके अलावा 22 आवेदनों के माध्यम से 17,810 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 56 हजार करोड़ रुपए के निवेश से जुड़े 29 आवेदन पाइपलाइन में हैं। यह भी बताया गया कि जापान, अमेरिका, बेल्जियम, यूनाइटेड किंगडम, पोलैंड और सिंगापुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख निवेश साझेदार बने हुए हैं। सीएम को अवगत कराया गया कि जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और खाड़ी देशों के लिए बनाए गए विदेशी देश डेस्क लगातार सक्रिय हैं। दूतावासों, उच्चायोगों और व्यापार संघों से निरंतर संवाद चल रहा है। निवेशकों के साथ 100 से अधिक वन-टू-वन बैठकें हो चुकी हैं। जापान व्यापार संगठन और सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मंडल के साथ होने वाले समझौते भी निवेश के ठोस अवसरों में बदले जा रहे हैं। खाड़ी सहयोग परिषद सेक्टर डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि दिल्ली, नोएडा, मुंबई, लखनऊ और कानपुर में अब तक 6 गोलमेज बैठकें हो चुकी हैं, जिनसे 83 कंपनियों के साथ सीधा संवाद बना और करीब 5,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए। सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक रुचि दिखी, जबकि बैंकिंग, वित्त, बीमा, फार्मा, लाइफ साइंस, मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों को उच्च संभावनायुक्त बताया गया। मुख्यमंत्री ने ललितपुर फार्मा पार्क को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए कि इससे जुड़े अवसंरचना कार्यों में और तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि कई बड़ी दवा कंपनियों ने यहां निवेश में रुचि दिखाई है, ऐसे में उनसे लगातार संवाद बनाए रखा जाए और भूमि, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं समय पर सुनिश्चित हों। जापान डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि डेंसो के ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजना पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और दस्तावेजी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कांसाई फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री एसोसिएशन की 125 जापानी कंपनियों के साथ फॉलोअप चल रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। टोयोटा समूह, सुमितोमो और मारुबेनी से निवेश को लेकर लगातार बातचीत जारी है। जापान डेस्क के अंतर्गत कुल 20,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। ताइवान डेस्क को लेकर मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यहां प्रयास और तेज किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि ताइवान के निवेशकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाए, केवल रोड शो तक सीमित न रहा जाए। बैठक में बताया गया कि 40 से अधिक कंपनियां चिन्हित की गई हैं और लगभग 100 करोड़ रुपए के निवेश की पाइपलाइन तैयार है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां एचसीएल-फॉक्सकॉन का 3,700 करोड़ रुपए का निवेश मजबूत आधार बनेगा। कानपुर को तकनीकी वस्त्र और स्पोर्ट्सवेयर केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई। दक्षिण कोरिया डेस्क की समीक्षा में बताया गया कि सैमसंग, एलजी, केएच वेटेक और ड्रीमटेक जैसी कंपनियों के साथ निवेश को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का गौतमबुद्ध नगर में करीब 850 करोड़ रुपए का विस्तार प्रस्तावित है, जबकि लोट्टे समूह का लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने कोरियाई कंपनियों के लिए भी संवाद और सुविधाकरण को और मजबूत करने के निर्देश दिए। सिंगापुर डेस्क के अंतर्गत टेमासेक, सरकारी निवेश कोष, पीएसए, डीबीएस, कैपिटललैंड-असेंडास, केपेल और सेम्बकॉर्प जैसे निवेशक यूपी में लगातार रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी विदेशी डेस्क द्वारा नियमित अंतराल पर राउंड टेबल बैठकें होती रहनी चाहिए। उन्होंने इन्वेस्ट यूपी की टीम से कहा कि हर निवेशक के साथ एकल संपर्क बिंदु तय हो, ताकि उसे प्रणाली में भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री ने उद्योगों को गति देने के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि निवेशक को पहले दिन से तैयार अवसंरचना मिलेगी, तो वह तेजी से काम शुरू कर सकेगा और यही मॉडल उत्तर प्रदेश को अन्य राज्यों से आगे ले जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां कंपनियों के कॉरपोरेट और मुख्यालय खोलने के लिए उन्हें प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को लेकर यह भी निर्देश दिए कि वहां आवश्यक मानव संसाधन की कमी न रहे।

मंत्री राजपूत ने लॉन्च किए तीन हाई-टेक ऐप, पारदर्शिता की बड़ी पहल

पारदर्शिता की बड़ी पहल, गोदामों के निरीक्षण और स्टॉक की डिजिटल ट्रैकिंग भोपाल मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को ग्वालियर से अनाज गोदामों की निगरानी को आधुनिक, सटीक और पूर्णतः पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए तीन महत्वपूर्ण मोबाइल ऐप- निरीक्षण ऐप, नमी मापक ऐप और फ्यूमिगेशन ऐप लॉन्च किये। इन ऐप्स के माध्यम से खाद्यान्न भंडारण प्रणाली में तकनीक आधारित मॉनिटरिंग लागू होगी। इससे गड़बड़ियों पर स्वतः अंकुश लगेगा और नागरिकों को बेहतर गुणवत्ता का अनाज उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। मंत्री श्री राजपूत ने कहा है कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है, खाद्यान्न की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गोदाम प्रबंधन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता लाई जाए। अब निरीक्षण से नमी मापन और फ्यूमिगेशन तक की डिजिटल ट्रैकिंग होगी। इससे गड़बड़ी पर रोक लगेगी और जनता को बेहतर गुणवत्ता का खाद्यान्न उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित होगा। इन ऐप्स से होगी मॉनिटरिंग निरीक्षण ऐप: मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि इस ऐप से रियल-टाइम निगरानी होगी। यह ऐप गोदामों के भौतिक निरीक्षण को पूरी तरह रियल-टाइम और लोकेशन-बेस्ड बना देगा। निरीक्षण का रोस्टर भोपाल मुख्यालय से तैयार होगा। इसके अलावा एक ब्रांच के गोदाम का निरीक्षण दूसरी ब्रांच के प्रबंधक द्वारा किया जाएगा, जिससे क्रॉस वेरिफिकेशन सुनिश्चित होगा। अधिकारी को गोदाम पर फिजिकली मौजूद रहने पर ही निरीक्षण भरने और फोटो अपलोड करने की अनुमति होगी। यदि निरीक्षक 100 मीटर से अधिक दूरी पर है, तो ऐप निरीक्षण स्वीकार ही नहीं करेगा। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सभी जानकारी रियल-टाइम पोर्टल पर दर्ज होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। नमी मापक ऐप: खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि डिजिटल मॉइस्चर मीटर से हर माह सटीक रिपोर्टिंग होगी। अब तक नमी मापन की प्रक्रिया मैनुअल थी, लेकिन नए ऐप से यह पूर्णतः डिजिटल और सटीक हो जाएगी। डिजिटल मॉइस्चर मीटर से स्टैक की ऊपरी, मध्य और निचली परत की नमी मापी जाएगी। मापन के बाद ऐप से निकली डिजिटल पर्ची का फोटो अपलोड करना अनिवार्य होगा। हर गोदाम की नमी रिपोर्ट प्रतिमाह रियल-टाइम उपलब्ध होगी। मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि जिला प्रबंधक अब सीधे भारतीय खाद्य निगम को नमी के डेटा भेज सकेंगे। यह सुधार भंडारित अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। फ्यूमिगेशन ऐप: मंत्रीश्री राजपूत ने बताया कि दवा छिड़काव की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल रिकॉर्ड में रहेगी। फ्यूमिगेशन प्रक्रिया अब कागज रहित होकर डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगी। दवाओं का छिड़काव ब्रांच मैनेजर द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी में होगा। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न को कवर करने और कवर हटाने तक की पूरी फोटो प्रक्रिया ऐप में अपलोड करनी होगी। दवाओं का छिड़काव सफल रहा या नहीं, यह जानकारी भी ऐप में दर्ज करनी होगी। जब तक फ्यूमिगेशन सफल न हो जाए, तब तक स्टॉक इश्यू नहीं हो सकेगा। यह कदम अनाज की सुरक्षा, गुणवत्ता और उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।