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महाकाल मंदिर में डिजिटल बदलाव, प्रोटोकॉल दर्शनार्थियों को मोबाइल लिंक से मिलेगी दर्शन की सुविधा

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रोटोकॉल से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए नई ऑनलाइन व्यवस्था जल्द शुरू होने जा रही है। दर्शनार्थियों को पारंपरिक टोकन नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। मंदिर प्रबंध समिति प्रोटोकॉल दर्शनार्थी के मोबाइल पर लिंक भेजगी, जिसके माध्यम से वे दर्शन के लिए स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। नई व्यवस्था भस्म आरती की बुकिंग प्रक्रिया की तर्ज पर होगी, जिसका उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और श्रद्धालुओं के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाना है। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मिलेगी लिंक प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया नई व्यवस्था के तहत, प्रोटोकॉल के माध्यम से दर्शन करने के इच्छुक श्रद्धालुओं को विवरण दर्ज कराना होगा, जिसके बाद उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर लिंक प्राप्त होगी। लिंक पर क्लिक करके श्रद्धालु 250 रुपए का निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। भुगतान सफल होने पर, उन्हें दर्शन के लिए तिथि और समय स्लॉट आवंटित किया जाएगा, जिसकी जानकारी भी उन्हें मोबाइल पर प्राप्त होगी। मंदिर समिति के अनुसार, इस कदम से प्रोटोकॉल दर्शन प्रणाली में हो रही अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। पहले यह थी व्यवस्था अब तक प्रोटोकॉल के जरिए नंदी हॉल से दर्शन के लिए प्रोटोकॉल अधिकारी के मोबाइल पर सभी के नाम और फोन नंबर देना होते थे। अधिकारी उक्त नंबर पर एक टोकन नंबर भेजते थे। जब श्रद्धालु दर्शन करने मंदिर पहुंचते, तो पहले प्रोटोकॉल ऑफिस जाकर उन्हें प्रति व्यक्ति 250 की रसीद कटाना होती थी, लेकिन कुछ दिनों से टोकन प्रणाली में शिकायतें मिल रही थीं, जिनसे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठते थे। नई लिंक-आधारित प्रणाली से प्रत्येक बुकिंग का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी। अब भस्म आरती की तरह होगी दर्शन व्यवस्था महाकाल मंदिर में जिस तरह से भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था है, जिसमें भक्तों को उनके मोबाइल पर पुष्टिकरण और लिंक प्राप्त होती है। इसी सफलता को देखते हुए अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए भी यही तकनीक सुविधा अपनाई जा रही है। इस नई व्यवस्था से न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि मंदिर प्रबंधन के लिए भी दर्शनार्थियों की संख्या का प्रबंधन करना अधिक आसान हो जाएगा।

सोनम वांगचुक पर सख्त एक्शन, लेह बवाल के बाद NSA के तहत हुई गिरफ्तारी

लेह लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को आज गिरफ्तार कर लिया गया है. उनके खिलाफ ये एक्शन लेह हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हुआ है. उन्हें जेल में शिफ्ट किया जाए या कोई अन्य व्यवस्था की जाए, इस पर फैसला लिया जा रहा है. वांगचुक के खिलाफ केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप है. सोनम वांगचुक को डीजीपी एसडी सिंह जामवाल के नेतृत्व में लद्दाख पुलिस की एक टीम ने गिरफ़्तार किया है. वांगचुक की गिरफ़्तारी के बाद एहतियात के तौर पर लेह में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दी गई है. साथ ही ब्रॉडबैंड की स्पीड कम कर दी गई है. दरअसल, 24 सितंबर यानी बुधवार को लेह में हिंसक झड़प हुई थी. इसमें 4 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 90 लोग घायल हुए थे. हिंसक झड़प के बाद लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया. पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कर्फ़्यू का सख्ती से पालन कराया. अब तक 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. लेह जिला मजिस्ट्रेट ने 2 दिन के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया. क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लेह के अलावा कारगिल सहित अन्य शहरों में भी धारा 144 लागू कर दी गई. उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हाईलेवल सुरक्षा बैठक की और हिंसा की घटनाओं को षड्यंत्र का नतीजा बताते हुए सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए. लेह हिंसा के बाद गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया कि उनके भड़काऊ बयानों ने भीड़ को उकसाया, जिसके चलते प्रदर्शन हिंसक हो गए. मंत्रालय के मुताबिक वांगचुक ने अरब स्प्रिंग और नेपाल के Gen-Z आंदोलनों का हवाला देकर युवाओं को भड़काया, जिसके बाद लेह में बीजेपी कार्यालय और कुछ सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी गई. गृह मंत्रालय ने कहा कि 24 सितंबर को सुबह 11:30 बजे वांगचुक के भाषण के बाद भीड़ उनके भूख हड़ताल स्थल से निकलकर बीजेपी ऑफिस और लेह के सीईसी दफ्तर पर हमला करने पहुंच गई. भूख हड़ताल और मांगें सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी, उनकी मांग थी कि लद्दाख के लिए संवैधानिक गारंटी, अधिक स्वायत्तता, राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा दिया जाए. बुधवार को हिंसा बढ़ने के बाद उन्होंने अपना 2 हफ्ते का अनशन खत्म कर दिया था. मीटिंग्स का दौर जारी सरकार ने कहा कि लद्दाख में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे क्षेत्रीय संगठनों से उच्चस्तरीय समिति (HPC), उपसमितियों और अनौपचारिक बैठकों के जरिए बातचीत चल रही है.

India A ने किया नामुमकिन को मुमकिन, 400+ रन चेज कर तोड़े सारे रिकॉर्ड – केएल राहुल चमके

लखनऊ  इंडिया ए टीम ने कमाल कर दिखाया। शुक्रवार को लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में ध्रुव जुरेल की कप्तानी वाली इंडिया ए टीम ने सबसे बड़ा लक्ष्य अपने इतिहास का हासिल किया है। पहली बार किसी इंडिया ए टीम ने 400 से ज्यादा रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत हासिल की है। ऑस्ट्रेलिया ए ने इंडिया ए के सामने 412 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे इंडिया ने केएल राहुल की कमाल की 176 रनों की पारी और साई सुदर्शन के दमदार शतक के दम पर हासिल कर इतिहास रच दिया। इस मुकाबले में इंडिया ए टीम के कप्तान ध्रुव जुरेल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। हालांकि, कप्तान का ये फैसला सही साबित नहीं हुआ था, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ए के बल्लेबाज ने बोर्ड पर 420 रन लगा दिए थे। इसके बाद भारतीय टीम पहली पारी में बल्लेबाजी करने उतरी तो 194 रन बनाकर ढेर हो गई। इस तरह 226 रनों की बेसकीमती बढ़त ऑस्ट्रेलिया ए को पहली पारी के आधार पर मिल गई। इसके बाद भारतीय ए टीम के गेंदबाजों ने अच्छी गेंदबाजी की और 185 रनों पर मेहमान टीम को रोक दिया। बावजूद इसके इंडिया को 412 रनों का लक्ष्य मिला, क्योंकि पहली पारी के आधार पर बड़ी बढ़त ऑस्ट्रेलिया ए को मिल चुकी थी। उधर, इंडिया ए को 412 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छी शुरुआत मिली, क्योंकि एन जगदीशन और केएल राहुल ने पहले विकेट के लिए 176 रन जोड़े। 36 रन एन जगदीशन बनाकर आउट हुए। इसके बाद केएल राहुल रिटायर्ड हर्ट होकर पवेलियन लौटे, लेकिन शुरुआत अच्छी मिल चुकी थी और अर्धशतक केएल राहुल ने पूरा कर लिया था। दूसरे दिन केएल राहुल ने फिर से बल्लेबाजी की और 176 रन बनाकर नाबाद लौटे। वहीं, साई सुदर्शन ने दमदार 100 रन बनाए। देवदत्त पडिक्कल और मानव सुथर 5-5 रन बना सके, लेकिन कप्तान ध्रुव जुरेल ने 56 रनों की पारी खेली, जिससे भारत जीत के करीब पहुंचा। नितीश कुमार रेड्डी ने 16 रन बना और वे नाबाद लौटे। इस तरह भारत को 5 विकेट से जीत मिली।

मिग-21 का गौरवपूर्ण अंत, एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने भरी आखिरी उड़ान

    चंडीगढ़ भारतीय वायुसेना में शामिल पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21 का आज चंडीगढ़ एयरबेस पर भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस जेट में आखिरी उड़ान एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने भरी। अब यह ऐतिहासिक विमान आसमान के बजाय म्यूजियम में स्थायी रूप से रखा जाएगा। इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मिग-21 विमान ने 62 वर्षों तक भारत और रूस के बीच गहरे सैन्य सहयोग को दर्शाया है। उन्होंने बताया कि यह जेट 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल संघर्ष, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर तक भारत की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। मिग-21 की पहली लैंडिंग 1963 में चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर हुई थी और उसी वर्ष अम्बाला में इसकी पहली स्क्वॉड्रन भी बनी थी। इसका निकनेम 'पैंथर' या 'तेंदुआ' था।  25 अगस्त 2025 को बीकानेर से भरी थी आखिरी उड़ान  रूसी मूल के इस विमान ने 25 अगस्त को राजस्थान के बीकानेर स्थित वायुसैनिक अड्डे से अपनी आखिरी उड़ान भरी। छह दशकों तक भारतीय वायुसेना का अभिन्न हिस्सा रहे मिग-21 का ‘बाइसन संस्करण’ आधुनिक तकनीक से लैस था। मिग-21 के हादसों का काला इतिहास: ‘उड़ता ताबूत’ के नाम से विख्यात मिग-21 के आखिरी वर्षों में हुए 300 से अधिक हादसों में 170 से अधिक भारतीय पायलट और 40 नागरिक मारे गए। इसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ यानी ‘उड़ता ताबूत’ भी कहा गया। 1966 से 1984 के बीच बने 840 विमानों में से आधे से अधिक हादसों में खो गए। पिछले चार वर्षों में भी सात मिग-21 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कई पायलटों की जान गई। प्रमुख दुर्घटनाएं     5 जनवरी 2021, सूरतगढ़ (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित     17 मार्च 2021, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) – ग्रुप कैप्टन की मौत     20 मई 2021, मोगा (पंजाब) – पायलट की मृत्यु     25 अगस्त 2021, बाड़मेर (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित     25 दिसंबर 2021, राजस्थान – पायलट की मृत्यु     28 जुलाई 2022, बाड़मेर (राजस्थान) – दो पायलटों की मौत     8 मई 2023, हनुमानगढ़ (राजस्थान) – पायलट सुरक्षित मिग-21 की विदाई भारतीय वायुसेना के एक युग के समापन का प्रतीक है और यह विमान हमेशा वीरता, साहस और देशभक्ति का प्रतीक बना रहेगा।

पवेलियन में राज्य की धरोहर, संस्कृति और लजीज जायकों की झलक, एआर फोटो बूथ बना युवाओं का पसंदीदा

यूपी पर्यटन पवेलियन में दिखी संस्कृति की झलक, बनारस के घाट और बुद्ध सर्किट ने खींचा ध्यान ग्रेटर नोएडा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में हॉल नंबर-7 का स्टॉल नंबर-12 दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आते ही आगंतुकों को ऐसा अनुभव मिलता है मानो वे किसी मेले में नहीं, बल्कि सीधे उत्तर प्रदेश की धरती पर पहुँच गए हों। कहीं बनारस के घाटों की झलक दिखती है तो कहीं काशी विश्वनाथ धाम और बुद्ध सर्किट की भव्यता नज़र आती है। यही नहीं, आधुनिक तकनीक से लैस एआर फोटो बूथ युवाओं की सेल्फी और तस्वीरों का नया केंद्र बन गया है। बनारस का माहौल, गंगा आरती का अनुभव स्टॉल के प्रवेश द्वार को बनारस की गंगा आरती से प्रेरित कर डिजाइन किया गया है। आगंतुक जैसे ही अंदर आते हैं, उन्हें दीप जलाए कलाकारों और गंगा घाट की नकल करते चबूतरों पर बैठे प्रस्तुति देते कलाकार दिखाई देते हैं। स्टॉल में लगाए गए इन बीआर अनुभव (Immersive VR) के जरिए आगंतुकों को ऐसा आभास होता है मानो वे गंगा की लहरों पर नाव में सवार होकर बनारस की यात्रा कर रहे हों। स्टॉल पर मौजूद दीपिका सिंह ने बताया, “गंगा आरती से प्रेरित यह माहौल हर आगंतुक को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। हमारा प्रयास है कि लोग यूपी के पर्यटन स्थलों से भावनात्मक रूप से जुड़ें।” बुद्ध सर्किट द्वार पर युवाओं की भीड़ स्टॉल में बनाया गया बुद्ध सर्किट द्वार युवाओं का पसंदीदा सेल्फी प्वाइंट बन चुका है। गाजियाबाद से आए आगंतुक अमित ने कहा, “बुद्ध के उपदेश आज के समय में और भी ज़्यादा प्रासंगिक हैं। यह द्वार न केवल एक फोटो स्पॉट है बल्कि संदेश देता है कि शांति और करुणा हमारी जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए।” स्टॉल में आने वाले छात्र और शोधार्थी भी इसे बेहद रोचक मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह यूपी के बौद्ध पर्यटन सर्किट के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम है। धरोहर और जायकों का संगम स्टॉल केवल धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां यूपी की हस्तकला और लजीज जायकों का भी संगम दिखता है। सहारनपुर की लकड़ी की कारीगरी, कन्नौज का इत्र, मुरादाबाद का ब्रासवर्क, भदोही के कालीन, वाराणसी की बूटीदार सिल्क साड़ी, आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा और बनारसी पान यहां आने वाले हर आगंतुक को आकर्षित कर रहे हैं। दीपिका सिंह ने बताया, “हमने कोशिश की है कि इस छोटे से हिस्से में पूरा यूपी समा जाए। कोई स्वाद लेना चाहे या स्मृति चिन्ह साथ ले जाना चाहे, यहां सब उपलब्ध है।” मंदिरों संग डिजिटल फोटो और तकनीकी नवाचार यूपी पर्यटन विभाग के इस स्टॉल की सबसे बड़ी विशेषता एआर फोटो बूथ है। यहां आगंतुक अपनी पसंद का मंदिर या पर्यटन स्थल चुनकर उसके साथ डिजिटल फोटो खिंचवा सकते हैं। फोटो खिंचने के तुरंत बाद आगंतुकों को एक क्यूआर कोड दिया जाता है, जिसे स्कैन कर वे अपनी तस्वीरें सीधे मोबाइल पर डाउनलोड कर सकते हैं। दिल्ली से आए युवा पर्यटक नेहा ने कहा, “यह अनुभव बिल्कुल नया है। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं सचमुच मथुरा के मंदिर में खड़ी हूं। इसे देखकर मेरे दोस्तों ने भी स्टॉल पर आने की जिद की।” यूपी की पहचान और निवेश की संभावना इस स्टॉल के जरिए न केवल पर्यटन स्थलों को प्रमोट किया जा रहा है बल्कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को भी सामने लाया गया है। इस तरह की प्रस्तुति न केवल युवाओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है, बल्कि राज्य में निवेश और पर्यटन को भी बढ़ावा देती है।  स्टॉल की खासियत ▪️बनारस की गंगा आरती से प्रेरित प्रवेश द्वार और घाट जैसा माहौल ▪️इन वीआर अनुभव से नाव में बैठकर बनारस का वर्चुअल भ्रमण सा अनुभव ▪️बुद्ध सर्किट गेट युवाओं का पसंदीदा सेल्फी प्वाइंट ▪️कन्नौज का इत्र, मुरादाबाद का ब्रासवर्क, भदोही के कालीन समेत यूपी की समृद्ध विरासत ▪️एआर फोटो बूथ से मंदिरों और धरोहरों के साथ डिजिटल फोटो और तुरंत डाउनलोड सुविधा

बरेली में नमाज के बाद उपद्रव, माहौल बिगड़ने पर पुलिस ने बरसाईं लाठियां

बरेली  यूपी के बरेली में जुमे की नमाज के बाद बवाल हो गया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया. प्रदर्शनकारी 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर विवाद को लेकर सड़कों पर उतरे थे. आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने प्रोटेस्ट का ऐलान किया था. पुलिस ने काफी समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी भीड़ नहीं मानी और वह बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी. जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. फिलहाल, माहौल तनावपूर्ण हो गए हैं.  दरअसल, शुक्रवार को बरेली में जुमे की नमाज के बाद 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर विवाद को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. सैकड़ों लोग शहर के अलग-अलग हिस्सों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया.  बताया जा रहा है कि श्यामगंज इलाके में प्रदर्शनकारियों और एसपी क्राइम के बीच नोकझोंक भी हुई. हालात को देखते हुए पुलिस ने श्यामगंज में दुकानें बंद करा दीं. नौमहला मस्जिद के बाहर भी भीड़ जुट गई. जब भीड़ बेकाबू हो गई तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. जिससे कुछ ही मिनट में सैकड़ों की संख्या में जमा हुए लोग भाग खड़े हुए.  आपको बता दें कि मौलाना तौकीर रजा ने 'आई लव मोहम्मद' मामले में डीएम के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने की बात कही थी. उन्होंने सड़क पर उतरने का ऐलान किया था. जिसको लेकर पुलिस पहले से हाई अलर्ट पर थी. भीड़ को कंट्रोल करने के लिए हजारों की संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.  शुक्रवार को सुबह से ही इस्लामिया मैदान और बिहारीपुर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. श्यामगंज मंडी वाले रोड पर बैरिकेडिंग करने के साथ-साथ भारी फोर्स भी लगाई गई थी. दोपहर होते-होते जब लोग घरों से निकलने लगे तो माहौल गरम होने लगा. आखिर में जुमे की नमाज के बाद लोग जुलूस के रूप से नारेबाजी करते हुए सड़कों पर निकल पड़े. नारेबाजी हुई, हंगामा हुआ, पुलिस ने रोका तो झड़प हुई. इसके बाद लाठीचार्ज हुआ. 

अमित शाह का दावा: 2026 चुनाव के बाद साकार होगा ‘सोनार बांग्ला’ का सपना

कोलकाता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता के मशहूर संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने बंगाल और देशवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि नौ दिनों तक चलने वाला शक्ति की उपासना का यह पर्व आज पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया है। साथ ही उन्होंने इस दौरान मां दुर्गा से प्रार्थना की कि 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में ऐसी सरकार बने, जो राज्य को फिर से ‘सोनार बांग्ला’ (स्वर्णिम बंगाल) बना सके। शाह ने कहा कि मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की है कि बंगाल में ऐसी सरकार आए जो राज्य को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाए, जैसा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने सपना देखा था। शाह ने कहा कि मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की है कि इस चुनाव के बाद बंगाल में ऐसी सरकार बने जो 'सोनार बांग्ला' (स्वर्णिम बंगाल) की स्थापना करे। उन्होंने बंगाल को एक बार फिर शांति, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक बनाने की बात कही। ईश्वरचंद्र विद्यासागर को दी श्रद्धांजलि अमित शाह ने समाज सुधारक और शिक्षाविद ईश्वरचंद्र विद्यासागर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि विद्यासागर जी का महिला शिक्षा और समाज सुधार में योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही गृह मंत्री ने दुर्गा पूजा की शुरुआत में हुई भारी बारिश और इससे हुई मौतों पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि दस से ज्यादा लोगों की जान चली गई, हम सभी भाजपा कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं।

जिंदल स्टील ने अंगुल में देश के सबसे बड़े ब्लास्ट फर्नेस में से एक का कमीशन किया, 12 एमटीपीए क्षमता की ओर अग्रसर

जिंदल स्टील ने अपने एकीकृत स्टील प्लांट, अंगुल में देश के सबसे बड़े ब्लास्ट फर्नेस में से एक का कमीशन किया, जिससे हॉट मेटल क्षमता 4 एमटीपीए से बढ़कर 9 एमटीपीए हो गई। नया फर्नेस अंगुल, ओडिशा को सबसे बड़े एकल-स्थान स्टील प्लांट के रूप में स्थापित करता है और इसे जिंदल स्टील की भविष्य की विकास रणनीति का केंद्रबिंदु बनाता है। रायपुर  जिंदल स्टील ने भारत के स्टील उद्योग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने 5 एमटीपीए क्षमता वाले ब्लास्ट फर्नेस को चालू किया है। यह सफलता भगवती सुभद्रिका ब्लास्ट फर्नेस – II के कमीशनिंग से हासिल हुई। इस “ब्लो-इन” समारोह का नेतृत्व जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल ने किया। इसके साथ ही अंगुल देश का सबसे बड़ा एकल-स्थान स्टील प्लांट बन गया है। भगवती सुभद्रिका ब्लास्ट फर्नेस, जिसकी उपयोगी क्षमता 5,499 वर्गमीटर है, दुनिया के सबसे बड़े और उन्नत फर्नेस में से एक है। यह जिंदल स्टील की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें कंपनी पैमाने, अत्याधुनिक ऑटोमेशन, मजबूत सुरक्षा डिज़ाइन और बेहतर स्थिरता को जोड़कर उद्योग में नए मानक स्थापित कर रही है। श्री नवीन जिंदल, चेयरमैन, जिंदल स्टील ने कहा, “अंगुल में भगवती सुभद्रिका ब्लास्ट फर्नेस का कमीशन होना जिंदल स्टील और भारत के लिए गर्व का क्षण है। अंगुल की क्षमता को 12 एमटीपीए तक दोगुना करके हम अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत कर रहे हैं तथा आत्मनिर्भर भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रहे हैं। ओडिशा की संस्कृति में जड़े हुए और अत्याधुनिक तकनीक से संचालित यह फर्नेस हमारी उस दृष्टि का प्रतीक है, जिसमें परंपरा और नवाचार का संगम है।” यह उपलब्धि जिंदल स्टील की दीर्घकालिक विकास योजनाओं को नई गति प्रदान करती है। अब अंगुल कंपनी के भविष्य के विस्तार का केंद्रीय केंद्र होगा। प्रस्तावित परियोजनाओं में पारादीप में एक समर्पित पोर्ट, स्लरी पाइपलाइन और कोल पाइप कन्वेयर (सप्लाई चेन दक्षता बढ़ाने के लिए), श्रीभूमि पावर प्लांट और नए कोक ओवन संयंत्र शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से अंगुल को जिंदल स्टील की वैश्विक विकास रणनीति की धुरी के रूप में विकसित किया जाएगा। जिंदल स्टील के बारे में जिंदल स्टील भारत के प्रमुख एकीकृत स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपने पैमाने, दक्षता और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध है। कंपनी माइन-टू-मेटल मॉडल पर कार्य करती है और अपने खनिज संसाधनों, उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और वैश्विक वितरण नेटवर्क का लाभ उठाकर उच्च-प्रदर्शन स्टील समाधान प्रदान करती है। 12 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश के साथ, जिंदल स्टील अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में अत्याधुनिक सुविधाएं संचालित करती है तथा भारत और अफ्रीका में अपनी रणनीतिक गतिविधियां बनाए रखती है। इसका विविध और भविष्य-उन्मुख उत्पाद पोर्टफोलियो बुनियादी ढांचा, निर्माण और विनिर्माण जैसे कोर क्षेत्रों को सशक्त बनाता है, जो स्ट्रेंथ और सस्टेनेबिलिटी के साथ प्रगति को गति देता है।

दो महीने की देरी के बाद MP में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर फैसला जल्द

 भोपाल मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर प्रारंभ हो जाएगी। इसके पहले एक-दो दिन के भीतर नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता जारी करने की तैयारी है। लगभग दो सौ कॉलेजों को मान्यता मिलने के आसार हैं। इनमें 20 हजार से अधिक सीटें हो सकती हैं। इंडियन नर्सिंग काउंसिल द्वारा निर्धारित कैलेंडर के अनुसार 30 सितंबर तक कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जानी थी, पर निरीक्षण में देरी के चलते अभी तक मान्यता ही जारी नहीं हो पाई है। निर्धारित तारीख के बाद प्रवेश के लिए राज्य सरकार को विशेष अनुमति लेनी होगी। मप्र नर्सिंग काउंसिल के कैलेंडर के अनुसार 14 जुलाई तक कालेजों का निरीक्षण पूरा हो जाना था। इसके बाद मान्यता जारी होनी थी। नए और पुराने मिलाकर 172 कॉलेजों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था, जिनका निरीक्षण होना था। प्रदेश भर में नर्सिंग फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पहली बार निरीक्षण कराने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी गई थी, पर उन्होंने रुचि नहीं ली। स्वास्थ्य आयुक्त के बार-बार पत्र लिखने के बाद अब जाकर निरीक्षण पूरा हो पाया है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर मान्यता जारी की जाएगी। फर्जीवाड़े के चलते मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण दो वर्ष से नए कॉलेज नहीं खुले थे। इस वर्ष कुछ नए कॉलेजों को भी मान्यता मिलेगी। इन 172 कॉलेजों के अतिरिक्त सीबीआई ने जिन कॉलेजों को अपनी जांच रिपोर्ट में उपयुक्त बताया था, उन्हें बिना निरीक्षण ही नवीनीकरण की मान्यता मिल जाएगी। देरी से विद्यार्थियों को यह नुकसान बीएससी नर्सिंग और डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कर्मचारी चयन मंडल से प्रवेश परीक्षा आयोजित होने के बाद परीक्षा परिणाम जारी किए जा चुके हैं। अभ्यर्थी लगभग दो माह से काउंसलिंग प्रारंभ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राजस्थान में सहित अन्य राज्यों में या तो पूरी हो गई है या अंतिम चरण में है। ऐसे में मध्य प्रदेश के जिन अभ्यर्थियों को यहां के कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल पाएगा वे दूसरे राज्यों में भी प्रवेश नहीं ले पाएंगे। दूसरा नुकसान यह है कि प्रवेश में देरी होने से विद्यार्थियों का पूरा सत्र देर हो जाएगा। जल्द काउंसलिंग शुरू कराने की तैयारी     नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए जल्दी ही काउंसलिंग शुरू कराने की तैयारी है। एक-दो दिनों में कॉलेजों की मान्यता जारी हो जाएगी। – मनोज सरयाम, संचालक (नर्सिंग), लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बिलकिसगंज में स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान शिविर का किया शुभारंभ

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस से प्रारंभ किए गए सेवा पखवाड़ा एवं स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ करते हुए कहा कि अस्पतालों में 2000 विशेष डॉक्टर्स की भर्ती की जाएगी। उन्होंने शिविर में दी जा रही चिकित्सा सेवाओं और रक्तदान शिविर का अवलोकन किया तथा रक्तदान करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित भी किया। अस्पताल के निरीक्षण के दौरान  शुक्ल ने चिकित्सकों से योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की और प्रबंधन एवं संचालन को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी मरीजों को पोषण टोकरी भी प्रदान की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचें और विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों की स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी समस्याओं की पहचान कर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इस अभियान में ईट-राइट, पोषण माह, योग जैसे वेलनेस कार्यक्रम और निक्षय मित्र जैसी पहल भी शामिल हैं। सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत रक्तदान शिविरों का आयोजन कर जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि यह अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस से प्रारंभ होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा। स्वास्थ्य शिविरों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, विभिन्न प्रकार के कैंसर, एनीमिया और सिकल सेल रोग जैसी गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, वहाँ इस कमी को दूर करने के लिए 2,000 विशेषज्ञ डॉक्टर्स की भर्ती की जाएगी। साथ ही टेलीमेडीसिन प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि नागरिकों को विशेषज्ञ परामर्श के लिए अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े और वे डिजिटल माध्यम से सीधे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकें।