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1 अक्टूबर से आधार से जुड़ी सेवाओं पर ज्यादा फीस देनी होगी, जरूरी अपडेट जरूर पढ़ें

भोपाल  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने डेमोग्राफी व बायोमेट्रिक अपडेट के लिए नई दरें लागू करने की तैयारी कर ली है। 1 अक्टूबर से ये नई दरें आपकी जेब को थोड़ा और खाली करा सकती हैं। 1 अक्टूबर से चुकानी होगी ज्यादा फीस अब तक आधार कार्ड (Aadhaar Card Update)बनवाने या अपडेट करवाने के लिए आप घर बैठे ही एप्लाई कर रहे थे। जिसके लिए आपको 100 या 50 रुपए ही चुकानें होते थे। लेकिन, नये नियम के मुताबिक अब 1 अक्टूबर से डेमोग्राफी व बायोमेट्रिक अपडेट कराना महंगा पड़ेगा। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने डेमोग्राफी और बायोमेट्रिक अपडेट की नई दरें तय कर दी हैं। 30 सितंबर 2028 तक प्रभावी रहेंगी नई दरें ये नई फीसमध्यप्रदेश समेत पूरे भारत के लिए प्रभावी की गई हैं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की ओर से डेमोग्राफी व बायोमेट्रिक अपडेट के लिए निर्धारित की गई ये नई दरें 30 सितंबर 2028 तक प्रभावी रहेंगी। जबकि नया आधार कार्ड बनवाना, 5-7 साल व 15-17 साल की उम्र में मेंडेटरी बायोमेट्रिक अपडेट फ्री रहेगा। 7 से 15 साल और 17+ को यह सेवा 125 रुपए में मिलेगी। पहले 100 रुपए लगते थे। नाम, पता, जन्मतिथि, लिंग, मोबाइल नंबर, ईमेल के लिए 50 रुपए नहीं, 75 रुपए चुकाने होंगे।

राज कुंद्रा पर ED की शिकंजा, ₹150 करोड़ के बिटकॉइन घोटाले में दाखिल हुई चार्जशीट

मुंबई  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा के खिलाफ 150 करोड़ के बिटकॉइन के मालिकाना हक मामले में चार्जशीट दायर की है. ED का दावा है कि कुंद्रा सिर्फ एक बिचौलिये की भूमिका में नहीं थे, बल्कि वो खुद 285 बिटकॉइन के एक्चुअल लाभार्थी हैं, जिसकी मौजूदा कीमत 150 करोड़ रुपये है. PMLA कोर्ट में दायर आरोपपत्र में कहा गया है कि कुंद्रा को बिटकॉइन, जिनकी वर्तमान कीमत ₹150.47 करोड़ है, क्रिप्टो घोटाले के दिवंगत मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज से मिले थे. कुंद्रा ने सबूत छुपाए : ED ED के मुताबिक, कुंद्रा लेन-देन के महत्वपूर्ण डिटेल बताने में विफल रहे हैं. आरोपपत्र में कहा गया है कि कुंद्रा ने जानबूझकर बिटकॉइन वॉलेट के एड्रेस सहित महत्वपूर्ण सबूत छुपाए और भारद्वाज से मिले बिटकॉइन भी नहीं लौटाए. आरोपपत्र में कहा गया है, '2018 से कई मौकों के बावजूद कुंद्रा लगातार उन वॉलेट के एड्रेस नहीं दे पाए हैं जहाँ 285 बिटकॉइन ट्रांसफर किए गए थे. कुंद्रा ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि उनके शुरुआती बयान के तुरंत बाद वॉलेट डिटेल वाला उनका iPhone X खराब हो गया था.  बिटकॉइन पोंजी स्कैम से जुड़ा लिंक ये मामला महाराष्ट्र पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा वेरिएबल टेक प्राइवेट, अमित भारद्वाज और अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज की गई FIR से सामने आया. भारद्वाज ने कथित तौर पर क्रिप्टो माइनिंग के जरिए निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच दिया, लेकिन इसके बजाय उन्हें 'धोखा' दिया और 'गलत तरीके से कमाए गए बिटकॉइन को अज्ञात ऑनलाइन वॉलेट में छिपा दिया गया था.' क्या है पूरा मामला? ये पूरा मामला क्रिप्टो दुनिया के कुख्यात नाम अमित भारद्वाज से जुड़ा है.  जिसे ‘गेन बिटकॉइन’ पोंजी स्कैम का मास्टरमाइंड कहा जाता था. ED का आरोप है कि भारद्वाज से राज कुंद्रा को 285 बिटकॉइन मिले थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, कुंद्रा ने लगातार जांच को गुमराह करने की कोशिश की.  ED ने कहा- सिर्फ बिचौलिये नहीं, मालिक थे राज कुंद्रा राज कुंद्रा ने ये तर्क दिया कि वो इस मामले में केवल मध्यस्थ थे और उनके पास कोई प्रत्यक्ष स्वामित्व नहीं था, लेकिन ED का कहना है कि समझौते की शर्तों और लगातार लेन-देन की जानकारी रखने के कारण ये साफ है कि राज ही वास्तविक लाभार्थी थे।     इतना ही नहीं, 7 साल पुराने लेन-देन को लेकर उनका स्पष्ट विवरण देना यह साबित करता है कि बिटकॉइन उन्हीं के पास थे। गेन बिटकॉइन घोटाला क्या है? इस घोटाले में हजारों निवेशकों से पैसे जुटाए गए थे। वादा किया गया था कि बिटकॉइन माइनिंग से उन्हें मोटा मुनाफा मिलेगा, लेकिन इसके बजाय निवेशकों का पैसा गायब कर दिया गया और बिटकॉइन गुप्त वॉलेट्स में छिपा दिए गए।     महाराष्ट्र और दिल्ली पुलिस ने इस धोखाधड़ी को लेकर कई शिकायते दर्ज की थीं, जिसके आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। चार्जशीट में राज के अलावा कारोबारी राजेश सतीजा का नाम भी सामने आया है।       

गांवों में नई तकनीक की बयार: पंजाब सरकार बनाएगी आधुनिक पंचायत घर और सेवा केंद्र

पंजाब  रंगला पंजाब के सपने को साकार करने की दिशा में पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है. 125 करोड़ की लागत से 500 नए आधुनिक पंचायत घर और कॉमन सर्विस सेंटर (आम सेवा केंद्र) बनाने की घोषणा की गई है. यह सिर्फ ईंटों और सीमेंट की इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये गांवों की तकदीर बदलने की नींव हैं. ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने जानकारी देते हुए कहा कि 2,800 से अधिक आबादी वाले प्रत्येक गांव में एक पंचायत घर और एक सामान्य सेवा केंद्र होगा, जो बैठकों और डिजिटल सेवाओं की डिलीवरी के लिए बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करेगा. सीएम भगवंत मान ने इससे पहले फतेहगढ़ साहिब से इस परियोजना का शुभारंभ किया था. उन्होंने आशा व्यक्त की कि पंचायत घर पंचायतों को एक साथ आने और अपने गांवों की बेहतरी के लिए सामूहिक निर्णय लेने के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान करेंगे.   रंगला पंजाब के वादे को पूरा करने की दिशा में मील पत्थर डिजिटल बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने कहा कि सामान्य सेवा केंद्र ग्रामीण नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं के लिए पंजीकरण, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट और कई अन्य सेवाओं को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. एक पंचायत घर के निर्माण की लागत 20 लाख रुपये होगी, जबकि एक सामान्य सेवा केंद्र 5 लाख रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह परियोजना सिर्फ सुविधाओं की बात नहीं करती, बल्कि यह गांवों के आत्म-सम्मान को भी बढ़ाती है. यह गांवों को ‘स्मार्ट’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. मान सरकार का यह फैसला ‘रंगला पंजाब’ के वादे को पूरा करने की दिशा में एक और मील पत्थर है. गांव में पंचायतों के पास एक सम्मानजनक और आधुनिक जगह हो, जहां वे बैठकर गांव के विकास के लिए योजनाएं बना सकें. यह गांवों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा. यह पंजाब के गांवों के लिए एक नई उम्मीद और गौरव का प्रतीक है.   गांवों में आएगी डिजिटल क्रांति इन नए पंचायत घरों के साथ-साथ ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (आम सेवा केंद्र) भी बनाए जा रहे हैं. ये केंद्र गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और अन्य ऑनलाइन सुविधाओं को सुलभ बनाएंगे. ये केंद्र ग्रामीणों को शहरों के बराबर सुविधाएं देंगे. यह कदम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच के डिजिटल अंतर को कम करेगा. ये केंद्र गांवों में ही सारी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे. इससे गाँव के लोग आसानी से सरकारी सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे और उनका जीवन सरल हो जाएगा. यह परियोजना सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह पंजाब को फिर से उसका गौरव लौटाने का सपना है. यह सपना है कि पंजाब का हर गाँव आत्म-निर्भर बने, हर गांव में आधुनिक सुविधाएं हों, और हर गाँव का व्यक्ति खुद को सशक्त महसूस करे.

CM नीतीश ने बताया मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की अगली 10,000 रुपये की किस्त जारी होने का समय

पटना   बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 75 लाख महिलाओं को पहली किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपये मिल चुके हैं. अब 3 अक्टूबर को शेष महिलाओं को भी यह राशि दी जाएगी.  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ राज्य की बड़ी आबादी तक पहुंचने लगा है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से इस महत्वाकांक्षी योजना की पहली किस्त जारी की. पहले चरण में 75 लाख महिलाओं के खाते में डीबीटी के जरिए 10-10 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की गई. कुल मिलाकर 7500 करोड़ रुपये की रकम सीधे लाभार्थियों तक पहुंची. 3 अक्टूबर को जारी होगी अगली किस्त सरकार ने अब शेष महिलाओं को भी योजना से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली है. 3 अक्टूबर को अगली किस्त जारी होगी, जिसमें बाकी पात्र महिलाओं के खाते में भी यह राशि भेजी जाएगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य हर परिवार की एक महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. उन्होंने बताया कि आगे जो महिलाएं इससे जुड़ेंगी, उन्हें भी इसी तरह 10-10 हजार रुपये का लाभ मिलेगा. 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता कब मिलेगा? नीतीश कुमार ने यह भी घोषणा की कि जिन महिलाओं का रोजगार सफलतापूर्वक आगे बढ़ेगा, उन्हें सरकार की ओर से दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. इससे महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी.  29 अगस्त को हुई थी इस योजना की घोषणा गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने 29 अगस्त को इस योजना की घोषणा की थी. शुक्रवार को कार्यक्रम के दौरान नीतीश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का इसमें शामिल होना राज्य के लिए गर्व की बात है. उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाएं इस राशि का सही उपयोग कर अपने परिवार और समाज को मजबूत बनाएंगी. महिला रोजगार योजना को सरकार ने चुनावी दौर में एक बड़ा कदम माना है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस योजना से लाखों परिवारों को राहत मिलेगी और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. 

महिलाओं के लिए खुशखबरी! हरियाणा में 2100 रुपये पाने के लिए ऐसे करें आवेदन

चंडीगढ़ हरियाणा में 'दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना' गुरुवार यानी 25 सितंबर से लागू हो गई है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये मिलेंगे। इसके लिए आवेदन आज से शुरू भी हो गया है। 2100 रुपये सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाएगी।  'दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना' के लिए कौन पात्र है? दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ उन महिलाओं को मिलेगा जिनकी उम्र 23 वर्ष से 60 साल तक होगी।  इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो हरियाणा की रहने वाली होंगी। महिला आवेदन के समय 15 वर्ष या उससे अधिक समय से हरियाणा में रह रही हो। 2100 रुपये हर महीने उन्हीं महिलाओं को मिलेंगे जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय  (परिवार सूचना डेटाबेस रिपॉजिटरी के अनुसार) एक लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक न हो।  इस योजना का लाभ उठाने वाली परिवार में पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। कौन पात्र नहीं है? यदि कोई महिला पहले से ही सामाजिक सुरक्षा या वित्तीय सहायता योजनाओं में से किसी के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर रही है, तो वह DDLLY के तहत पात्र नहीं होगी।  वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना, विधवा और निराश्रित महिला पेंशन और हरियाणा दिव्यांग वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाली महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा।  पद्म पुरस्कार विजेता महिला, जो हरियाणा गौरव सम्मान योजना का लाभ ले रही हैं। उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। यदि कोई महिला किसी सरकारी या स्थानीय/वैधानिक निकाय, या सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाले संगठन से कोई अन्य वित्तीय सहायता प्राप्त कर रही है तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। आवेदन दाखिल करते समय किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी? दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए पंजीकरण के समय आवेदक को सरकार द्वारा निर्धारित व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी, जैसे स्वयं और परिवार के सदस्यों का आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय, हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) आईडी, बिजली कनेक्शन का विवरण, वाहनों का स्वामित्व, बैंक विवरण आदि प्रदान करने होंगे। दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के लिए कैसे आवेदन करें आवेदन करने के लिए दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या मोबाइल ऐप डाउनलोड करें। आवश्यक विवरण के साथ आवेदन पत्र भरें, अनिवार्य दस्तावेजों की स्कैन की गई प्रतियां संलग्न करें और फॉर्म ऑनलाइन जमा करें।  सबसे पहले योजना के लिए "आवेदन करें" विकल्प पर क्लिक करें। स्व-घोषणा: स्व-घोषणा बॉक्स पर निशान लगाएं और "आगे बढ़ें" पर क्लिक करें। आवेदन पत्र को सभी आवश्यक जानकारी के साथ पढ़ें और पूरा करें। आवेदन के लिए आवश्यक अनिवार्य दस्तावेजों की स्कैन की गई प्रतियाँ अपलोड करें। अपने आवेदन को अंतिम रूप देने और चयन प्रक्रिया के अगले चरण पर आगे बढ़ने के लिए "सबमिट करें" पर क्लिक करें। DDLLY के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी। किसी भी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 0172-4880500 और 18001802231 पर कॉल भी कर सकते हैं।   

लेह में इंटरनेट सेवा बंद, सोनम वांगचुक को जोधपुर की हाई-सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया

लेह   लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर दो दिन पहले हिंसक प्रदर्शन हुआ था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 90 लोग घायल हुए. इसके बाद शुक्रवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख पुलिस प्रमुख एस. डी. सिंह जामवाल के नेतृत्व में पुलिस दल ने उन्हें दोपहर करीब ढाई बजे हिरासत में लिया. गिरफ्तारी के बाद वांगचुक को लद्दाख से राजस्थान के जोधपुर की जेल में भेज दिया गया है. यह कदम प्रदर्शन और बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया. वांगचुक पर लगे आरोपों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन लद्दाख प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया है. सुरक्षा कारणों से लेह में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं. सोनम वांगचुक लंबे समय से ‘लेह एपेक्स बॉडी’ और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ जैसे संगठनों की आवाज उठाते रहे हैं. वे लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और लेह व कारगिल के लोगों के लिए संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं. पिछले पांच सालों से वे इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. केंद्र ने हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया लेह और कारगिल, 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को विभाजित कर बनाये गए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा हैं. केंद्र ने हालिया हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि जलवायु कार्यकर्ता ने सभी आरोपों से इनकार किया है. वांगचुक ने गुरुवार को कहा था, ‘‘यह कहना कि यह (हिंसा) मेरे द्वारा भड़कायी गयी थी, समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय, कोई बलि का बकरा ढूंढने जैसा है, और इससे हमें कोई फायदा नहीं होगा.’’ गृह मंत्रालय ने उठाया सख्त कदम जलवायु कार्यकर्ता की गिरफ्तारी उनके द्वारा स्थापित संगठन ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ का विदेशी चंदा नियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस गृह मंत्रालय द्वारा रद्द करने के एक दिन बाद हुई. मंत्रालय ने कथित वित्तीय विसंगतियों और ‘‘राष्ट्रीय हित’’ के खिलाफ माने जाने वाले धन अंतरण का हवाला देते हुए वांगचुक के संगठन का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था.

धान क्रय लक्ष्य 60 लाख मीट्रिक टन, सेमीकंडक्टर निवेश और लिंक एक्सप्रेसवे को हरी झंडी

योगी कैबिनेट में 22 प्रस्ताव मंजूर, कृषि खरीद से लेकर औद्योगिक निवेश तक हुए बड़े निर्णय – धान क्रय लक्ष्य 60 लाख मीट्रिक टन, सेमीकंडक्टर निवेश और लिंक एक्सप्रेसवे को हरी झंडी – धान खरीद : कॉमन 2369, ग्रेड ए 2389 रुपये/क्विंटल – मक्का खरीद : 2400 रुपये/क्विंटल, 25 जिलों में 15,000 मीट्रिक टन लक्ष्य – बाजरा खरीद : 2775 रुपये/क्विंटल, 33 जिलों में 2.2 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य – ज्वार खरीद : हाईब्रिड 3699, मालदांडी 3749 रुपये/क्विंटल, 50,000 मीट्रिक टन लक्ष्य – उज्ज्वला योजना : 1.86 करोड़ परिवारों को होली-दीपावली पर 2 मुफ्त सिलेंडर – आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे तक 90 km का नया लिंक एक्सप्रेसवे स्वीकृत, 7488 करोड़ आएगी लागत – डीएमएफ न्यास संशोधन 2025 : 70% निधि स्वास्थ्य-शिक्षा पर, राज्य पर कोई बोझ नहीं – शहरी विस्तारीकरण योजना : 970 करोड़ सीड कैपिटल रामपुर-अयोध्या समेत 5 शहरों के लिए स्वीकृत – 3 नई निजी यूनिवर्सिटी को अनुमति, यूपी में अब कुल 50 निजी विश्वविद्यालय होंगे – छात्रवृत्ति : एससी, एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी के 4 लाख से अधिक छात्र होंगे लाभान्वित, डीबीटी से भेजे जाएंगे 647 करोड़ रुपए लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को लोक भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कैबिनेट के फैसलों की विस्तृत जानकारी साझा की। खन्ना ने बताया कि सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली है, जो राज्य के आर्थिक, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में नई दिशा प्रदान करेंगे। 2025-26 के लिए धान क्रय नीति की घोषणा कृषि क्षेत्र को राहत देने वाले फैसलों ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है। खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए मूल्य संवर्धन योजना के अंतर्गत धान क्रय नीति की घोषणा की गई है। इसके तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 अक्टूबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक धान की खरीद की जाएगी। गत वर्ष कॉमन धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2300 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस वर्ष बढ़ाकर 2369 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसी प्रकार, ग्रेड ए धान के लिए पिछले वर्ष 2330 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले इस वर्ष 2389 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। कुल 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें वर्तमान में 3100 क्रय केंद्र कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इनकी संख्या बढ़ाकर 700 अतिरिक्त केंद्र जोड़े जाएंगे, ताकि किसानों को अधिक सुविधा मिल सके। खन्ना ने स्पष्ट किया कि सभी क्रय केंद्रों पर नमी मापक यंत्र, इलेक्ट्रॉनिक कांटे और किसानों की अन्य सुविधाओं की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मक्का की खरीद के लिए 2400 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य निर्धारित मोटा अनाज की खरीद नीति भी मंत्रिपरिषद ने मंजूर कर ली है, जो 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2025 तक प्रभावी रहेगी। मक्का की खरीद के लिए 2400 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष के 2225 रुपये प्रति क्विंटल से 175 रुपये की वृद्धि दर्शाता है। मक्का की खरीद 25 जिलों में होगी, जिनमें बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, इटावा, गोंडा, बहराइच, बलिया, सोनभद्र, जौनपुर, मीरजापुर, देवरिया और ललितपुर शामिल हैं। इसके लिए 75 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे और 15 हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य है। बाजरा की खरीद के लिए 2775 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य तय  बाजरा की खरीद के लिए 2775 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के 2625 रुपये से 150 रुपये अधिक है। बाजरा की खरीद 33 जिलों में होगी, जिनमें बुलंदशहर, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, संभल, रामपुर, अमरोहा, कानपुर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, इटावा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, गाजीपुर, जौनपुर, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशाम्बी, मीरजापुर, बलिया, हरदोई और उन्नाव प्रमुख हैं। 300 क्रय केंद्रों के माध्यम से 2 लाख 20 हजार मीट्रिक टन बाजरा खरीदा जाएगा। 50 हजार मीट्रिक टन ज्वार खरीद का लक्ष्य ज्वार की खरीद नीति में भी वृद्धि की गई है। हाईब्रिड ज्वार के लिए 3699 रुपये प्रति क्विंटल तथा मालदांडी ज्वार के लिए 3749 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य निर्धारित किया गया है। ज्वार की खरीद 11 जनपदों में होगी, जिनमें कानपुर, कानपुर देहात, जालौन, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, फतेहपुर, मीरजापुर, उन्नाव और हरदोई शामिल हैं। 80 क्रय केंद्रों से 50 हजार मीट्रिक टन ज्वार खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इन नीतियों से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर बैठक में ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत बनाने वाले फैसलों पर विशेष जोर दिया गया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) न्यास तृतीय संशोधन नियमावली 2025 को मंत्रिपरिषद ने अपना अनुमोदन दे दिया है। इस संशोधन से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। संशोधन के तहत जिला खनिज फाउंडेशन निधि (डीएमएफ) का 70 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में व्यय किया जाएगा। शेष 30 प्रतिशत निधि का उपयोग भौतिक संरचना विकास, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास में किया जाएगा। खन्ना ने कहा कि यह कदम खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करेगा और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाएगा। सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में एक और बड़ा फैसला लिया गया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत होली-दीपावली अवसर पर 1 करोड़ 86 लाख लाभार्थी परिवारों को दो नि:शुल्क एलपीजी गैस सिलेंडर प्रदान किए जाएंगे। यह निर्णय गरीब महिलाओं को राहत पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। न्यायिक क्षेत्र में भी राहत मिली है। मा. उच्चतम न्यायालय में दायर अपील 'प्रेमलता बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' पर फैसले के अनुपालन में मृतक आश्रित योजना को संशोधित किया गया है। अब मृतक कर्मचारी के आश्रित को उसी कैडर में नौकरी … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 57 हजार ग्राम प्रधानों और सदस्यों से वर्चुअल संवाद

विकसित यूपी महाअभियान के अग्रिम सेनानी हैं ग्राम प्रधान: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 57 हजार ग्राम प्रधानों और सदस्यों से वर्चुअल संवाद  मुख्यमंत्री बोले ग्राम प्रधान लोकतंत्र की प्रथम पंक्ति के प्रतिनिधि विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प की धुरी बनेगा ग्रामीण भारत: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने प्रधानों को याद दिलाये प्रधानमंत्री के पंच प्रण, कहा विकसित यूपी के लिए हर प्रदेशवासी का योगदान जरूरी आज उत्तर प्रदेश सुशासन, बेहतर कानून-व्यवस्था, स्थिरता और शांति का पर्याय बन चुका है: मुख्यमंत्री विकसित यूपी अभियान के बारे में ग्राम प्रधानों को किया जागरूक, कहा; पंचायत की खुली बैठक में करें चर्चा, हर प्रदेशवासी का सुझाव अमूल्य प्रत्येक जनपद के तीन और प्रदेश स्तर पर 05 सर्वोत्तम सुझावों को पुरस्कृत किया जाएगा अगले 04 वर्षों में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक प्रदेश होगा: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' की परिकल्पना को साकार करने में गांवों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। अगर गांव समृद्ध और आत्मनिर्भर होंगे, तो प्रदेश भी आत्मनिर्भर बनेगा और जब प्रदेश आत्मनिर्भर होगा तो विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश का संकल्प पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता।  मुख्यमंत्री शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के 57 हजार ग्राम प्रधानों और सदस्यों से संवाद कर रहे थे। यह संवाद नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने ग्राम प्रधानों को विकसित यूपी@2047 के संकल्पों से परिचित कराते हुए उनसे इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। इस दौरान ग्राम प्रधानों को विकसित यूपी@2047 अभियान के बारे में जानकारी देने वाली एक वीडियो फ़िल्म भी दिखाई गई और क्यूआर कोड तथा पोर्टल के माध्यम से सुझाव देने के तरीके से अवगत भी कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। जब देश की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होंगे, तब भारत को विश्व की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करना हम सबका साझा लक्ष्य है। इस महान लक्ष्य की प्राप्ति में ग्राम पंचायतों और ग्राम प्रधानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आजादी के अमृतकाल के लिए प्रधानमंत्री जी ने 'पंच प्रण' लिए हैं, हर नागरिक इनको अपने जीवन मे उतारे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का स्पष्ट संदेश है कि यदि गांव सशक्त होंगे तो भारत सशक्त होगा और यदि भारत सशक्त होगा तो विश्व मंच पर उसका नेतृत्व सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पिछड़ेपन और अव्यवस्था के बोझ तले दबा हुआ था। किसान कठिन परिस्थितियों में परिश्रम करते थे, लेकिन सिंचाई, तकनीक और विपणन की सुविधाएँ सीमित थीं। बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें अधूरी थीं। युवाओं के पास रोजगार के अवसर नहीं थे। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और भेदभाव सरकारी व्यवस्थाओं में गहराई तक जकड़े हुए थे। पलायन की पीड़ा आम परिवारों को झेलनी पड़ती थी और गरीबी के कारण बच्चों की असमय मौतें होती थीं। लेकिन बीते आठ वर्षों में प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। प्रधानमंत्री जी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र ने उत्तर प्रदेश की दिशा और दशा को नई पहचान दी है। आज उत्तर प्रदेश सुशासन, बेहतर कानून-व्यवस्था, स्थिरता और शांति का पर्याय बन चुका है। 07 वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 35 लाख करोड़ रुपए हो रही है। प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपये से बढ़कर 01 लाख 20 हजार रुपये हो गई है। इन 08 वर्षों में 'नए भारत के नए उत्तर प्रदेश' का निर्माण हुआ है और अब अगले 04 वर्षों में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक प्रदेश होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तय किया गया है। इसमें तीन प्रमुख थीम रखी गई हैं; अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति। अर्थ शक्ति के अंतर्गत कृषि, उद्योग, निवेश और पर्यटन को नई गति दी जाएगी। सृजन शक्ति के तहत आधुनिक बुनियादी ढाँचा और हरित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं जीवन शक्ति का लक्ष्य एक स्वस्थ, शिक्षित, सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण है। इसके तहत 12 सेक्टर निर्धारित किये गए हैं। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति में ग्राम प्रधानों की भूमिका सबसे अहम है क्योंकि लोकतंत्र की प्रथम पंक्ति के प्रतिनिधि होने के नाते वे ही इस महाअभियान के सच्चे शिल्पकार और अग्रिम सेनानी हैं। उन्होंने कहा कि आपके सुझावों के आधार पर एक विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा, जो अगले 22 वर्षों में विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा और रोडमैप तय करेगा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों से आह्वान किया कि वे अपनी पंचायत की बैठकों में विकसित उत्तर प्रदेश के इस अभियान पर चर्चा करें, गांव-गांव, वार्ड-वार्ड और मोहल्लों में लोगों को जोड़ें और समर्थ पोर्टल पर अधिक से अधिक सुझाव दिलाएँ। ग्राम प्रधानों को भेजे गए पत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे पंचायत की खुली बैठक में जरूर पढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद के तीन और प्रदेश स्तर पर 05 सर्वोत्तम सुझावों को पुरस्कृत किया जाएगा। आने वाली पीढियां आपके सुझावों पर गर्व करेगी। उन्होंने कहा कि जब करोड़ों लोगों की ऊर्जा इस यात्रा से जुड़ेगी, तब विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना एक विराट जन-आंदोलन के रूप में साकार होगा। उन्होंने ग्राम प्रधानों से आग्रह किया कि वे ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की राह पर आगे बढ़ें और विकसित भारत 2047 के स्वप्न को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएँ।

₹2.99 लाख में BMW की नई बाइक! सिर्फ 310 खुशकिस्मत लोग ही खरीद सकेंगे

मुंबई  बीएमडब्ल्यू मोटोराड ने भारत में अपनी लोकप्रिय एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक BMW G 310 RR का लिमिटेड एडिशन लॉन्च किया है. यह लॉन्चिंग कंपनी के लिए बेहद खास मौके पर हुई है क्योंकि बीएमडब्ल्यू ने भारत में इस बाइक की 10,000 यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है. ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में यह उपलब्धि छोटी नहीं मानी जाती, खासकर तब जब कम्यूटर सेग्मेंट से पटे बाजार में कोई प्रीमियम ब्रांड ये आंकड़ा छुए और अपनी पकड़ बनाए रखे. बता दें कि, BMW G 310 RR भारतीय बाजार में कंपनी के पोर्टफोलियो की सबसे सस्ती बाइक है. इसके लिमिटेड एडिशन मॉडल कीमत 2.99 लाख रुपये रखी गई है. यह बाइक आज से यानी 26 सितंबर 2025 से सभी बीएमडब्ल्यू मोटोराड इंडिया डीलरशिप्स पर उपलब्ध है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका एक्सक्लूसिव डिज़ाइन है. कैसी है बाइक?  लिमिटेड एडिशन में पूरे बॉडी किट पर खास डेकल्स दिए गए हैं, जिनमें व्हील रिम्स तक को शामिल किया गया है. इसके अलावा फ्यूल टैंक पर '1/310' की खास बैजिंग भी है, जो इसे कलेक्टर्स आइटम जैसा अहसास दिलाती है. एक और ख़ास बात ये है कि, कंपनी इस बाइक के केवल 310 यूनिट्स ही बनाएगी और यह दो रंगों, कॉस्मिक ब्लैक और पोलर व्हाइट कलर में उपलब्ध होगी. यानी केवल 310 लोग ही ये स्पेशल बाइक खरीद सकेंगे.  इंजन, पावर और परफॉर्मेंस टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो लिमिटेड एडिशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह स्टैंडर्ड वर्ज़न की तरह ही 312 सीसी वॉटर-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर, फोर-स्ट्रोक इंजन से लैस है. जो 34 बीएचपी की पावर और 27 न्यूटन मीटर (Nm) का टॉर्क जेनरेट करता है. इस इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स से जोड़ा गया है. मिलते हैं 4 राइडिंग मोड इस बाइक में चार राइडिंग मोड्स दिए गए हैं, जिसमें ट्रैक, अर्बन, स्पोर्ट और रेन मोड शामिल हैं. ट्रैक मोड में ABS को लेट ब्रेकिंग के लिए ट्यून किया गया है, अर्बन मोड शहर के ट्रैफिक में बैलेंस्ड एक्सेलेरेशन और ब्रेकिंग देता है, स्पोर्ट मोड फुल परफॉर्मेंस और मैक्स एक्सेलेरेशन ऑफर करता है. जबकि रेन मोड गीली सड़कों पर बेहतर स्टेबिलिटी और कंट्रोल प्रदान करता है. फीचर्स भी हैं ख़ास फीचर्स की लिस्ट भी काफी प्रीमियम है. इसमें राइड-बाय-वायर सिस्टम (E-Gas), रेस-ट्यून एंटी-हॉपिंग क्लच और टू-चैनल ABS दिया गया है, जो रियर-व्हील लिफ्ट-ऑफ प्रोटेक्शन के साथ आता है. बाइक में 5-इंच TFT डिस्प्ले दिया गया है, जो सभी जरूरी जानकारी जैसे राइडिंग मोड्स, स्पीड और टेम्परेचर दिखाता है. बाइक का हार्डवेयर सस्पेंशन सेटअप में आगे अपसाइड-डाउन (USD) फोर्क और पीछे डायरेक्ट माउंटेड स्प्रिंग स्ट्रट वाला एल्यूमिनियम स्विंग आर्म मिलता है. ग्रिप और कंट्रोल के लिए स्टैंडर्ड मिशलिन पायलट स्ट्रीट रेडियल टायर्स दिए गए हैं. ग्राहकों की सुविधा के लिए कंपनी आकर्षक फाइनेंसिंग सॉल्यूशंस भी ऑफर कर रही है, जिसमें बाइक के साथ-साथ राइडर गियर और एक्सेसरीज़ भी शामिल हैं. इस बाइक पर कंपनी 3 साल की अनलिमिटेड किलोमीटर वारंटी दे रही है.  

नया टीएंडसीपी नियम: अब कॉलोनी प्लानिंग में खुला क्षेत्र छोड़ना अनिवार्य

भोपाल   भोपाल शहर की हरियाली अब और बढ़ेगी। मप्र भूमि विकास अधिनियम और कालोनी विकास की शर्तो में संशोधन के बाद ऐसा हो सकेगा। टीएंडसीपी ने शहर में ग्रीन कॉलोनी बनाने के लिए नए नियम जारी किए जा रहे हैं। अब नयी कॉलोनियों के कुल क्षेत्रफल का दस फीसदी ग्रीन व खुला स्पेस रखना होगा। यानी दस हेक्टेयर की कॉलोनी है तो वहां एक हेक्टेयर क्षेत्रफल सिर्फ पार्क व मैदान के तौर पर होगा। इसके लिए नई पॉलिसी में प्रावधान किए जा रहे हैं। अक्टूबर में ये पॉलिसी लागू होगी। कोई भी डेवलपर सिर्फ मकान, सड़क बनाकर काम पूरा नहीं कर पाएगा। कॉलोनी विकास की अनुमति देते समय ही ग्रीन एरिया का क्षेत्रफल आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। यह नियम 10 हेक्टेयर की कॉलोनी में लागू किया जाएगा। – श्रीकांत बानोट, संचालक टीएंडसीपी ऐसे समझें नए नियम -10 से 40 हेक्टेयर की कॉलोनी है तो 60 फीसदी विकसित किया जा सकेगा। -60 फीसदी विकसित किए जाने वाले क्षेत्र का 80 फीसदी आवासीय विक्रय होगा। -20 फीसदी वर्क सेंटर यानि दुकानों के तौर पर विक्रय किया जाएगा। -10 फीसदी कुल क्षेत्र का कम से कम पार्क व खुला क्षेत्र रखना होगा। -25 फीसदी क्षेत्र वनीकरण के तौर पर यानी छायादार पेड़ लगाने होंगे। -5 फीसदी क्षेत्र में सामाजिक अधोसंरचनाएं विकसित करनी होंगी। -15 फीसदी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवासीय इकाईयों में आरक्षित होंगी। शहर में अभी यह स्थिति इस समय राजधानी में 1200 से अधिक कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें लोगों को खुला क्षेत्र नहीं दिया गया है। गुलमोहर में ही 30 से अधिक ऐसी कॉलोनियां हैं। कोलार में सबसे अधिक परेशानी है। यहां 600 से अधिक कॉलोनियों में पार्क और खुला क्षेत्र नहीं है। बच्चों को पार्क के लिए स्वर्ण जयंती या फिर शाहपुरा जाना पड़ता है।