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रेलवे ने यात्रियों के लिए किया बड़ा ऐलान, अब सफर में होंगे कई फायदे

पटियाला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान प्रोफेसर किरपाल सिंह बडूंगर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी ओर से विशेष ट्रेनों की मांग के लिए लिखे गए पत्र पर कार्यवाही करते हुए रेलवे विभाग ने नई ट्रेनों को मंजूरी दी है। इससे न केवल पंजाब बल्कि अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को भी विशेष सुविधा प्राप्त होगी। प्रो. बडूंगर ने बताया कि 10 दिसम्बर 2024 को उन्होंने पत्र लिखकर मांग की थी कि पंजाब और इसके साथ लगते प्रांतों में रेल संपर्क की भारी कमी है। इस कारण यात्रियों और व्यापारियों को सड़क मार्ग (बसों द्वारा) यात्रा करनी पड़ती है, जिसमें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर बुजुर्गों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है इसलिए राजपुरा से चंडीगढ़, राजस्थान और बठिंडा को जोड़ने वाली विशेष ट्रेनों की जरूरत थी। उनका कहना था कि राजपुरा–चंडीगढ़, पटियाला–समाना–पातड़ां, टोहाना और जाखल होते हुए राजस्थान तक रेल लिंक बनने से लोगों को सुविधा के साथ व्यापार में भी वृद्धि होगी। इसके अलावा, इन ट्रेनों के चलने से धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों जैसे – गुरुद्वारा बुढ़ा जोहड़ (अनूपगढ़-सूरतगढ़), हनुमानगढ़, मंडी डबवाली, रामामंडी (गुरुद्वारा दमदमा साहिब), सिरसा, जाखल, गुरुद्वारा धामधन साहिब, खनौरी, समाना, पटियाला (गुरुद्वारा दूख निवारण साहिब, काली माता मंदिर), राजपुरा, फतेहगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब, कीरतपुर साहिब, नैना देवी और चंडीगढ़ आने-जाने में यात्रियों को बड़ी सुविधा होगी। प्रो. बडूंघर ने यह भी बताया कि 1977 से 1980 के बीच उन्हें रेलवे यूजर्स बोर्ड में सदस्य के रूप में सेवा करने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने केंद्र सरकार के पास रेल लिंक का प्रोजेक्ट तैयार करवाकर भेजा था। इस प्रोजेक्ट में पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह जी द्वारा 1932 में करवाए गए सर्वे को भी शामिल किया गया था, लेकिन अंग्रेज सरकार ने उसे मंजूरी नहीं दी। साथ ही, उस समय केंद्र सरकार गिरने के कारण प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के पिछड़े इलाकों को रेल लिंक से जोड़ रही है और पंजाब भारत का एक अहम राज्य है, जिसे महत्वपूर्ण रेल संपर्क की बहुत जरूरत थी। इस मंजूरी से पंजाब और राजस्थान दोनों के यात्रियों को आवाजाही में बड़ी राहत मिलेगी।

बीटीसी चुनाव परिणाम: असम में विपक्ष को बढ़ा मनोबल, भाजपा हारी सत्ता

नई दिल्ली बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) के चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को करारा झटका लगा है। परिषद में पिछले पांच वर्षों से विपक्ष में रही बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने इस बार 40 में से 28 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। भाजपा को पांच और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) को सात सीटें मिली हैं, जो पांच-छह महीने बाद होने वाले असम विधानसभा चुनाव में भाजपा-यूपीपीएल गठबंधन के लिए सबक है। बीटीसी चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जाता है। बीपीएफ की जीत संकेत देती है कि विधानसभा का मुकाबला आसान नहीं होगा और भाजपा को सत्ता में वापसी के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी होगी। क्यों अहम है बीटीसी का चुनाव? असम की राजनीति में बीटीसी चुनाव का असर हमेशा विधानसभा पर दिखता रहा है, क्योंकि 126 में से 19 विधानसभा सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं। यही वजह है कि यहां का जनादेश पूरे राज्य की दिशा तय करता है। इस बार बीपीएफ ने जिस तरह भाजपा और यूपीपीएल को पछाड़ते हुए प्रचंड जीत दर्ज की है, उसने विपक्ष को नई ऊर्जा और हौसला दिया है। ताजा नतीजों ने तोड़ा मिथक भाजपा ने पिछले एक दशक में असम की राजनीति में गहरी पैठ बनाई थी। लोकसभा और विधानसभा में लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उसे भरोसा दिला दिया था कि विपक्ष उसके सामने टिक नहीं पाएगा। लेकिन बीटीसी का ताजा परिणाम इस मिथक को तोड़ता दिखता है। संदेश साफ है कि मतदाता स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहे हैं। कांग्रेस की जगी उम्मीदें पिछले चुनाव में भाजपा ने बीपीएफ के साथ गठबंधन कर परिषद का चुनाव लड़ा था। बीपीएफ को 17 और भाजपा को नौ सीटें मिली थीं। हालांकि, परिणाम आने के बाद भाजपा ने बीपीएफ से नाता तोड़कर 12 सदस्यों वाली यूपीपीएल के साथ गठबंधन कर लिया। इसके बाद बीपीएफ पांच वर्षों तक विपक्ष में रही। बदले हालात में विधानसभा चुनाव में बीपीएफ भाजपा के साथ हाथ मिलाने के लिए शायद ही तैयार हो पाए। ऐसे में बीटीसी चुनाव में खाता भी नहीं खोल सकी कांग्रेस को बीपीएफ से नई उम्मीदें मिल सकती हैं। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में 126 में से 29 सीटें जीती थीं। बीटीसी के नतीजों ने बीपीएफ के साथ-साथ पूरे विपक्ष को मजबूती दी है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ जैसे दल इसे भाजपा के खिलाफ बढ़ते असंतोष के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि विधानसभा चुनाव में सभी भाजपा विरोधी दल एकजुट होकर उतरते हैं, तो सत्तारूढ़ गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। भाजपा के लिए चुनौती भाजपा के लिए यह हार केवल परिषद की सत्ता गंवाने तक सीमित नहीं है। रणनीतिक दृष्टि से अहम इस क्षेत्र में झटका विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित कर सकता है। यहां की नाराजगी राज्य के अन्य हिस्सों तक असर डाल सकती है। भाजपा ने यूपीपीएल के साथ गठबंधन को स्थानीय समीकरण साधने का जरिया माना था, लेकिन नतीजों ने दिखा दिया कि यह फॉर्मूला काम नहीं आया। अब भाजपा को अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करना होगा। संदेश साफ है कि मतदाता स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व को तवज्जो देते हैं।  

अमेरिका से भारत डिपोर्ट हुई सिख महिला ने कहा, ‘मुझे गोमांस खाने को दिया गया था

नई दिल्ली  अमेरिका में तीन दशक से अधिक समय बिताने के बाद हाल ही में वहां से निर्वासित की गई 73 वर्षीय सिख महिला हरजीत कौर ने शनिवार को कहा कि किसी को भी उस कष्ट से नहीं गुजरना चाहिए, जिससे वह गुजरी हैं। उन्होंने अमेरिका में अपने परिवार से फिर से मिलने की इच्छा भी व्यक्त की। कौर ने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन वह स्वीकार नहीं किया गया। कौर को कैलिफोर्निया में आव्रजन अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद भारत भेज दिया गया था, ऐसा उनके वकील ने पहले कहा था। उन्होंने कहा कि उन्हें खाने के लिए गोमांस दिया गया, जो वह नहीं खा सकती थीं। कैलिफोर्निया में आव्रजन अधिकारियों ने आठ सितंबर को उन्हें उस समय हिरासत में ले लिया, जब वह नियमित जांच के लिए गई थीं, जिसके बाद उनके परिवार और समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया और उनकी स्थिति को लेकर चिंता जतायी थी। कौर 1992 में दो बेटों के साथ अकेली मां के रूप में अमेरिका पहुंचीं। उनके शरण के आवेदन को 2012 में अस्वीकार कर दिया गया था, लेकिन तब से, वह 13 साल से भी ज्यादा समय तक हर छह महीने में सैन फ्रांसिस्को स्थित आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) में “निष्ठापूर्वक रिपोर्ट” करती रहीं, यह बात उनकी पुत्रवधू मंजी ने उनके निर्वासन के बाद कही। मोहाली में अपनी बहन के घर पर पत्रकारों से बात करते हुए, तरनतारन जिले के पंगोटा गांव की रहने वाली कौर ने कहा, “मैं हर छह महीने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वहां (आईसीई कार्यालय) जाती थी। आठ सितंबर को, मैं अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वहां गई थी, लेकिन उन्होंने बिना कुछ बताए मुझे गिरफ्तार कर लिया।” कौर ने राज खोलते हुए यह भी बताया कि उन्हें उनके परिवार के करीबी सदस्यों को अलविदा कहने का भी मौका दिए बिना वापस भेज दिया गया। कौर ने कहा, “मेरे परिवार ने मुझे भारत लाने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति मांगी और हवाई जहाज का टिकट भी दिखाया। लेकिन वे नहीं माने।” उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, “मेरे पास वर्क परमिट, आईडी और लाइसेंस था। मेरे पास सब कुछ था।” जब उनसे पूछा गया कि आव्रजन अधिकारियों ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया, तो उन्होंने आंखों में आंसू भरकर कहा, “मैं क्या कहूं? किसी को भी उस तकलीफ से नहीं गुजरना चाहिए, जिससे मुझे गुजरना पड़ा।” 'मुझे गोमांस परोसा गया, जो मैं नहीं खा सकती थी' विवरण साझा करते हुए कौर ने बताया कि सैन फ्रांसिस्को में हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें एक कमरे में ले जाया गया। दोनों घुटने की सर्जरी करा चुकीं कौर ने कहा, “उन्होंने मेरी तस्वीर ली और मुझे पूरी रात कमरे में ही रखा। बहुत ठंड थी और मैं लेट भी नहीं पा रही थी।” उन्होंने कहा, “जब वे मुझे सैन फ्रांसिस्को से बेकर्सफील्ड ले गए, तो मुझे हथकड़ी और बेड़ियां पहना दी गईं।” यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें दवाइयां लेने की इजाजत थी, कौर ने सिर हिलाते हुए कहा, “मेरी सारी मिन्नतें अनसुनी कर दी गईं।” कौर ने कहा, “मैं शाकाहारी होने के कारण उनका दिया हुआ खाना भी नहीं खा सकी। उन्होंने गोमांस परोसा, जो मैं नहीं खाती।” कौर के अनुसार, उन्हें विमान में सवार 132 लोगों के साथ निर्वासित किया गया, जिनमें 15 कोलंबियाई नागरिक भी शामिल थे। यह पूछे जाने पर कि क्या विमान में उन्हें हथकड़ी लगाई गई थी, कौर ने कहा, “नहीं। विमान में दो अच्छे अधिकारी थे, जिन्होंने मुझे हथकड़ी नहीं लगाई, हालांकि अन्य निर्वासितों को हथकड़ी और बेड़ियां लगाई गई थीं।” कौर ने कहा, “मेरा पूरा परिवार अमेरिका में बसा हुआ है, जिसमें मेरे बच्चे, पोते-पोतियां भी शामिल हैं। जब मैं उनकी आवाज़ सुनती हूं, तो मैं कुछ बोल नहीं पाती। मैंने उनकी देखभाल की है।” महिला ने ट्रंप को ठहराया जिम्मेदार यह पूछे जाने पर कि क्या वह अमेरिका लौटना चाहेंगी, कौर ने कहा, “जरूर। मेरा पूरा परिवार वहीं है।” उन्होंने हाल के महीनों में बड़ी संख्या में भारतीयों के निर्वासन के लिए पूरी तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया। कौर ने कहा, “मैं 1992 से अमेरिका में थी, लेकिन मैंने अधिकारियों द्वारा ऐसी कोई कार्रवाई कभी नहीं देखी। किसी को भी वापस जाने के लिए नहीं कहा गया।” उनकी हिरासत के बाद कैलिफोर्निया में विरोध प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने कौर की रिहाई की मांग की तथा उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, “हमारी दादी को हाथ मत लगाओ” और “दादी को घर लाओ”।  

मुख्यमंत्री ने किया 7 करोड़ 36 लाख रूपये की हिनौता बांध परियोजना का लोकार्पण

किसानों के लिये शुरू की भावांतर योजना राज्य सरकार के पास किसानों की बेहतरी के लिये राशि की कोई कमी नहीं विदिशा जिले के कुरवाई में दी 258 करोड़ के विकास कार्यों की सौगातें कुरवाई में आयोजित कार्यक्रम एवं रोड-शो में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गरीब कल्याण के साथ चहुँमुखी विकास के लिये राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेशवासियों का जीवन बेहतर बनाने और किसानों की बेहतरी के लिये राशि की कमी नहीं होने दी जायेगी। आज बदलते दौर में भारत और भारत की ताकत को दुनिया देख रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विदिशा जिले के कुरवाई में शनिवार आयोजित हिनौता सिंचाई परियोजना अंतर्गत जाजपोन पुनर्वास कॉलोनी एवं विभिन्न निर्माण कार्यों के लोकार्पण- शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कुरवाई एवं विदिशा जिले के विकास के लिए 258 करोड रुपए की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने 92 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत के 46 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं 165 करोड रुपए की लागत के 34 कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें 7 करोड़ 36 लाख रुपए की महत्वपूर्ण हिनौता बांध परियोजना भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित केन-बेतवा लिंक परियोजना के मॉडल का अवलोकन भी किया। किसानों के लिए जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा कर प्रदेश में भावांतर योजना लागू कर दी गई है। इस साल सोयाबीन की फसल की बिक्री पर 5328 रुपए प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी। किसानों को अंतर की राशि सरकार देगी, जिसका भुगतान उनके बैंक खातों में 15 दिन के अंदर कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विदिशा जिले में खराब हुई किसानों की फसलों का सर्वे कराया जाएगा। किसानों को राहत राशि, बीमा आदि का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम किसानों के लिए जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं। किसानों को सिंचाई के लिए कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। केन- बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से सिंचाई और उद्योगों को पानी मिलेगा। भाई-दूज पर बहनों को मिलेगा विशेष उपहार मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना में दीपावली के बाद भाई दूज पर लाड़ली बहनों को 1500 रुपए की राशि देगी। राज्य सरकार बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए भी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। बच्चों को स्कूटी, नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, साईकिल, छात्रवृत्ति सहित छात्रावास की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय भी अच्छे बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से दोस्ती निभाकर गरीब -अमीर की मित्रता की शिक्षा दी थी। भगवान श्रीकृष्ण की जहां लीलाएं हुई उन्हें तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्वदेशी को दें प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने हमें स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग करने का मंत्र दिया है, जिसे प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कम करने से कई वस्तुएं सस्ती हुई हैं। प्रदेश में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। किसी घायल की जान बचाने के लिए सरकार ने राहवीर योजना में 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। गंभीर रोगियों के उच्च स्तरीय उपचार के लिए प्रदेश में एयरलिफ्ट की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। प्रबुद्धजन से संवाद और हितलाभ वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय प्रबुद्धजनों से संवाद भी किया। संवाद के दौरान उन्होंने ग्राम विकास से संबंधित विषयों पर सुझाव भी लिये। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, कृषक कल्याण योजना और महिला एवं बाल विकास की योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ, मार्गदर्शिका का विमोचन और हितग्राहियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित एवं कन्या पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का विभिन्न स्टालों पर जाकर अवलोकन किया। कुरवाई प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव रोड-शो में भी शामिल हुए और नागरिकों का पुष्प वर्षा कर अभिवादन किया। स्थानीय नागरिकों ने भी पूरे उत्साह के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में विदिशा जिले के प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह पटेल, सांसद श्रीमती डॉ. लता वानखेड़े, विधायक गण श्री हरि सिंह सप्रे, श्री सूर्य प्रकाश मीणा, श्री हरि सिंह रघुवंशी, श्री उमाकांत शर्मा, श्री मुकेश टंडन सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं     नगर परिषद कुरवाई के विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ की राशि दी जाएगी।     पठारी में महाविद्यालय खोला जाएगा।     कुरवाई में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन कर 50 बिस्तर का बनाया जाएगा।     बीना रिफाइनरी के सहायक उत्पादों के लिए औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जाएगा।     कुरवाई, लटेरी और नटेरन में 50-50 बिस्तर के नए छात्रावास खोले जाएंगे।     कुरवाई और विदिशा में 10 करोड़ की लागत से जनपद पंचायत भवन बनाए जाएंगे।     सिरोंज एवं अन्य स्थानों पर 6 करोड़ की लागत से हाई स्कूल भवन बनाए जाएंगे।     लटेरी और ग्यारसपुर में 87 करोड रुपए की लागत से सांदीपनि स्कूल एवं क्रिटिकल केयर अस्पताल खोले जाएंगे।  

जोधपुर जेल: लॉरेंस बिश्नोई से सलमान तक, अब वांगचुक का नया पड़ाव

जोधपुर लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आने के साथ जोधपुर सेंट्रल जेल दुनिया भर में सुर्खियों में है। सोनम वांगचुक को शुक्रवार की शाम को जोधपुर सेंट्रल जेल लाया गया। इसके बाद शनिवार को जेल के बाहर वांगचुक के समर्थन में लोग जुटने शुरू हो गए। इसे देखते हुए जेल के भीतर और बाहर सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया है। जेल के बाहर करीब 100 मीटर पर बैरिकेडिंग की गई है। जोधपुर सेंट्रल जेल पहले भी कई बार हाई प्रोफाइल कैदियों को लेकर सुर्खियों में रही है। पूरे देश में तिहाड़ जेल के बाद सबसे सुरक्षित जेल जोधपुर को माना जाता है। जोधपुर सेंट्रल जेल रातानाडा इलाके में स्थित है और 20 फीट ऊंची दीवारों से घिरी है। जेल में त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा है, दीवारों के ऊपर कंटीले तार लगे हैं जिनमें करंट रहता है जिसके चलते इसे अभेद माना  जाता है। जेल के बाहर मुख्य द्वार पर सुरक्षा जांच होती है। इसके बाद जेल में प्रवेश करने के दौरान आरएसी के जवानों के द्वारा सुरक्षा जांच की जाती है। वहीं सामान की जांच स्कैनर की मदद से की जाती है। उसके बाद मुख्य जेल के दोनों गेट खोलकर कैदी को अंदर लिया जाता है। जेल के भीतर की सुरक्षा भी सख्त है, जेल में जगह-जगह वॉच टावर भी लगाए गए हैं। लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को जोधपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। आज (शनिवार) सुबह सवा दस बजे उनके समर्थन में एक युवक तिरंगा लिए जोधपुर सेंट्रल जेल के बाहर पहुंच गया। भारत माता की जय के नारे लगाने लगा। युवक ने अपना नाम विजयपाल बताया। वह चूरू जिले के सुजानगढ़ का रहने वाला है। उसे पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। जोधपुर की सेंट्रल जेल में जम्मू कश्मीर के अलगाववादियों के अलावा बब्बर खालसा से जुड़े आतंकियों को भी रखा गया था। जोधपुर में पकड़ी गई आतंकियों की स्लीपर सेल के आरोपियों को भी इसी जेल में रखा गया। वहीं, इस जेल में भंवरी देवी अपहरण और हत्या के मामले में तत्कालीन कांग्रेस के मंत्री महिपाल मदेरणा सहित बड़े राजनेता भी रह चुके हैं। साल 2017 में लॉरेंस बिश्नोई को जोधपुर के सेंट्रल जेल में ही कैद किया गया था। हालांकि फिलहाल लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल में कैद है। वहीं, बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान भी काला हिरण शिकार मामले में 2018 में जोधपुर सेंट्रल जेल में कैदी रह चुके हैं। सलमान को यहां कैदी नंबर 106 का बिल्ला दिया गया था। अभी इसी जेल में आसाराम बापू कैद है, वह दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। आसाराम फिलहाल जमानत पर बाहर है।

अचानक आदेश: 3 दिन की छुट्टी, शराब की दुकानों को बंद रखने का सख्त निर्देश

बठिंडा  पंजाब के जिला बठिंडा में 3 दिन सरकारी छुट्टी का ऐलान हुआ है। जिले के एक खास मेले को देखते हुए छुट्टी की घोषणा की गई है। डिप्टी कमिश्नर बठिंडा, राजेश धीमान ने जानकारी देते हुए कहा कि माईसरखाना गांव में 28 सितंबर को होने वाले वार्षिक धार्मिक मेले को ध्यान में रखते हुए 27 से 29 सितंबर तक विशेष प्रबंध किए गए हैं। इस दौरान माईसरखाना के सरकारी एलीमेंट्री स्कूल, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और माता माईसरखाना कॉलेज ऑफ एजुकेशन (फॉर गर्ल्स) में सरकारी छुट्टी का ऐलान किया गया है। यह फैसला उप-मंडल मजिस्ट्रेट मौड़ की सिफारिश पर लिया गया है। उन्होंने बताया कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस धार्मिक मेले में शामिल होने आते हैं। भारी भीड़ के कारण कस्बे में भीड़भाड़ हो जाती है, इसलिए प्रशासन ने अमन-शांति बनाए रखने के लिए छुट्टी की घोषणा की है। इसके अलावा, जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए आबकारी एक्ट, 1914 की धारा 54 के अंतर्गत आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार 27 से 29 सितंबर तक माईसरखाना गांव की सीमा के भीतर सभी देसी और विदेशी शराब की दुकाने पूरी तरह बंद रहेंगी। किसी को भी शराब का भंडार रखने या बेचने की अनुमति नहीं होगी। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि मेले के दौरान शराब या किसी नशे का प्रयोग धार्मिक माहौल में व्यवधान डाल सकता है और लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है। इससे अमन और शांति भंग होने का खतरा रहता है। इसलिए मेले के समय शराब की बिक्री पर रोक लगाना जरूरी समझा गया है। 

रायपुर में पीएम सूर्यघर योजना से सोलर पैनलों की बड़ी राहत, मुफ्त बिजली का लाभ

रायपुर के घरों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनलों से मुफ्त बिजली सुविधा पर्यावरण संरक्षण और बचत का साधन बनी पीएम सूर्यघर योजना रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: सोलर पैनलों से मिल रही बड़ी राहतपीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से छत्तीसगढ़ में बिजली उपभक्ताओं को बिजली बिल में बड़ी राहत मिल रही है। सौलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल या तो शून्य या बहुत कम हो जाता है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिल रहा है और स्वच्छ ऊर्जा से लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योजना के लाभार्थियों ने बताया कि सोलर पैनल लगाने से उन्हें आर्थिक बचत हुई है और कुछ परिवारों ने अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं।       बिलासपुर शहर के राधिका विहार फेस 2 निवासी  क्रांति कुमार शर्मा ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत 5 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाया था। पैनल लगने के पहले बिजली बिल लगभग 6 हजार रूपए प्रतिमाह आता था। सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल अब शून्य हो गया है। एक भी रूपए खर्च नहीं करने पड़ रहे है। सोलर पैनल स्थापित करवाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार से उन्हें सब्सिडी भी मिली है। उन्होंने सभी निवेदन किया कि वे इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं। शहर के एक अन्य निवासी  गुरमुख दास मूलचंदानी ने बताया कि उन्होंने अपने पिताजी के नाम पर योजना के तहत अपनी छत पर सोलर पैनल स्थापित करवाया है। पहले लगभग 5 हजार रूपए प्रतिमाह बिजली बिल आता था। पैनल लगने के बाद अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। योजना से मिल रहे लाभ से वे बहुत ही खुश है। केंद्र एवं राज्य सरकार से भी सब्सिडी मिली है। वैभव कुमार अग्रवाल ने बताया कि योजना के अंतर्गत सोलर पैनल लगाने से उन्हें बिजली बिल में बहुत राहत मिली है। यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देती है।      पीएम सूर्यघर योजना में एक बार निवेश करने पर 25 वर्षों तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है और इस पर कोई विशेष मेंटेनेंस खर्च भी नहीं है। साथ ही अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में सप्लाई कर आय अर्जित करने का अवसर भी मिलता है। यह योजना  पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा बड़ा कदम है। योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने पर केन्द्र सरकार से 78 हजार रुपये तक सब्सिडी और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये तक सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही सरकार 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है।योजना के तहत ऋण का भी प्रावधान है जिसमें एक बार निवेश पर 25 वर्षों तक मुफ्त और सतत बिजली पाई जा सकती है।

रायपुर में पीएम सूर्यघर योजना ने दिया राहत और मुनाफा, प्रतिकूल मौसम में भी सफलता

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना ने प्रतिकूल मौसम में भी किसानों को दी राहत और मुनाफा पड़ोसी को देख पड़ोसी ने लगवाया अपनी छत पर भी सोलर पैनल रायपुर छत्तीसगढ़ में अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने और उसका उपयोग करने की प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस योजना से घरों के बिजली बिलों में कटौती तो हो ही रही है, इसके साथ-साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर मुनाफा भी हो रहा है। गरमी, उमस भरी बरसात या ठंड जैसे प्रतिकूल मौसम में भी इस योजना से बिजली की आबाध आपूर्ति के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी हो रहा है। कोरबा जिले के कटघोरा में पड़ोसी ने पड़ोसी को देखकर अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाया है।  कटघोरा कस्बे में श्रीमती ज्योति अनंत और श्री गोरे सिंह राजपूत आसपास रहते हैं। श्रीमती ज्योति ने अपनी घर की छत पर सोलर पैनल लगवाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया। उन्होंने बताया कि अब उनके घर के सभी उपकरण निर्बाध रूप से चल रहे हैं और घर की ऊर्जा का उत्पादन पूरी तरह आत्मनिर्भर है। “पहले गर्मी का मौसम चुनौतीपूर्ण लगता था, अब वही मौसम राहत और मुनाफा लेकर आता है। हम अपनी जरूरत की बिजली स्वयं बना रहे हैं और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर आर्थिक लाभ भी अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने योजना की सबसे बड़ी खासियत यह बताई कि यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित और हरित ऊर्जा के लिए लाभकारी है। उनकी छत केवल बिजली उत्पादन का केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ में योगदान का प्रतीक बन गई है।   पड़ोसी से प्रेरित होकर श्री गोरे सिंह राजपूत ने भी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाया। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से उनके घर की छत पर तीन किलोवाट का सोलर पैनल इंस्टॉल हुआ, जिसकी कुल लागत एक लाख 95 हजार रुपये थी और केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। उन्होंने बताया कि अब उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है और घर की विद्युत आपूर्ति के लिए वे पूरी तरह आत्मनिर्भर है। श्री राजपूत ने कहा, “सौर ऊर्जा अपनाकर हम न केवल अपने खर्च में संतुलन ला रहे हैं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान दे रहे हैं। इस योजना से हमारा जीवन आसान और आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है। यह अनुभव अन्य स्थानीय निवासियों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।” प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री श्री साय ने इस योजना के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराई है। इस पहल से परिवारों में आत्मनिर्भरता, आर्थिक स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है। श्रीमती ज्योति और श्री गोरे सिंह राजपूत ने योजना के लिए अपना हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया और भविष्य में इस तरह की योजनाओं के निरंतर लाभ की उम्मीद जताई। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना देश के आम नागरिकों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बन चुकी है। योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, घरेलू खर्च में संतुलन लाना और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस योजना के तहत रियायती दरों पर सोलर पैनल उपलब्ध कराए जाते हैं और केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपये की सब्सिडी और राज्य सरकार से रूपये 30 हजार की राशि लाभार्थियों को प्रदान की जाती है। इससे न केवल आर्थिक राहत मिलती है, बल्कि परिवारों को उनकी बिजली की जरूरतों के लिए स्वतंत्रता भी मिलती है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का लाभ लेने के लिए नागरिक सरल प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। योजना की वेबसाइट और स्थानीय प्रशासन कार्यालय इसके लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह योजना पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रति नागरिकों में जागरूकता भी बढ़ा रही है। इससे सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा भी मिल रहा है।

खूबसूरत भाभी को लेकर फरार हुई ननद, राज खुला मोबाइल चैटिंग से

जबलपुर आमतौर पर ननद-भाभी के रिश्ते में खटपट की कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन जबलपुर में सामने आए एक मामले ने सबको चौंका दिया है. यहां एक ननद अपनी ही भाभी की खूबसूरती पर फिदा हो गई और दोनों के बीच इश्क परवान चढ़ गया. हालात ऐसे बने कि ननद और भाभी अपने घर-परिवार को छोड़कर रफूचक्कर हो गईं है.  मामला अमरपाटन इलाके का है, जहां आशुतोष नाम के युवक ने करीब 7 साल पहले संध्या से लव मैरिज की थी. दोनों की शादीशुदा जिंदगी सामान्य चल रही थी और दोनों का 5 साल का बेटा भी है. इस दौरान आशुतोष अपने बच्चे की पढ़ाई के सिलसिले में पत्नी समेत जबलपुर शिफ्ट हो गया.  जबलपुर में घर पर आशुतोष की ममेरी बहन यानी पत्नी की ननद मानसी का आना-जाना लगा रहता था और ननद-भाभी में काफी बातचीत भी होती थी. कई बार दोनों साथ में बाज़ार भी जाती थीं. लेकिन ननद-भाभी का पारिवारिक रिश्ते के चलते किसी को कोई शक भी नहीं था. सब कुछ सामान्य था.  इसी बीच, अचानक 12 अगस्त को आशुतोष की पत्नी संध्या अचानक घर से लापता हो गई और अगले दिन वह जबलपुर रेलवे स्टेशन पर मिली और फिर कुछ समय तक पति और बेटे के साथ रही. लेकिन 22 अगस्त को वह अपना मोबाइल घर पर छोड़कर बाहर गई तो वापस नहीं लौटी और अब तक लापता है.  पति अपनी लापता पत्नी के लिए परेशान था लेकिन उसे कभी शक भी नहीं हुआ कि उसकी पत्नी और बहन के बीच रिश्ता महज पारिवारिक नहीं है. पत्नी के लापता होने के कुछ दिन बाद जब पति ने घर पर रखा पत्नी का फोन खंगाला तो उसमें ननद के साथ पत्नी की रोमांटिक चैटिंग मिली जिसे देखकर पति के पैरों तले जमीन खिसक गई.  एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि पीड़ित पति की ओर से जबलपुर ग्रामीण के घमापुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. क्योंकि पत्नी अपने साथ फोन नहीं ले गई है इसलिए इसकी लोकेशन ट्रेस करने में समस्या आ रही है हालांकि, कुछ तकनीकी साक्ष्य पुलिस को मिले हैं जिसके आधार पर लापता पत्नी की तलाश की जा रही है. 

25 साल का हुआ BSNL, अब करेगा 4G में धमाकेदार एंट्री – पूरी तरह स्वदेशी तकनीक के साथ

बीएसएनएल @ 25: देश का अपना नेटवर्क स्वदेशी 4G युग में प्रवेश कर रहा  25 साल का हुआ BSNL, अब करेगा 4G में धमाकेदार एंट्री – पूरी तरह स्वदेशी तकनीक के साथ BSNL का नया अध्याय: 25वें साल में देशी 4G नेटवर्क के साथ भविष्य की ओर कदम भोपाल माननीय प्रधानमंत्री कल दिनांक 27/09/2025 को झारसुगड़ा, (ओडिशा) में बीएसएनएल की स्वदेशी 4G सेवा को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। माननीय प्रधानमंत्री जी कल लगभग 37000 करोड़ कि लागत से निर्मित 4G के 97500 मोबाइल टावर का उद्घाटन करेंगे। अपने रजत जयंती वर्ष में, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) टीसीएम/तेजस/के साथ संयुक्त कार्य योजना के अंतर्गत स्वदेशी सी-डॉट कोर पर आधारित, अखिल भारतीय स्तर पर 4G सेवा शुरू कर रहा है. जो कि भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें बीएनएनएल द्वारा स्थापित 92600 से अधिक स्वदेशी 4G मोबाइल टावर शामिल है। 97500 मोबाइल टावर में से 18900 टावर डिजिटल भारत निधि के वित्तीय सहयोग से संस्थापित किये गए हैं इनमें बीएसएनएल के 14180 टावर भी शामिल हैं, जो दूरस्थ सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित गावों सहित लगभग 26700 संचार विहीन गाँवों को मोबाइल कवरेज में जोड़ेगी और 20 नाख से अधिक नागरिकों को संचार सेवा प्रदान करेगी | यह सभी टावर सौर उर्जा से संचालित है जो इन्हें भारत में हरित दूरसंचार साईट और टिकाऊ बुनियादी ढांचे को निर्मित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा | माननीय प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप बीएसएनएल द्वारा स्वदेशी 4G तकनीक की शुरुआत सी-डॉट कोर तेजस नेटवर्क, (रेडियो एक्सेस नेटवर्क), सिस्टम इंट्रीग्रेटर टीसीएस के द्वारा स्वदेश में ही विकसित की गयी है, जो पूरी तरह से आत्मनिर्भर तकनीक द्वारा संचालित है और सॉफ्टवेयर द्वारा 5G में अपग्रेड करने के क्षमता रखता है। 25 साल का सफरः गठन से लेकर 4G आत्मनिर्भरता तक 2000: 1 अक्टूबर 2000 को बीएसएनएल का निगमीकरण किया गया जिसके बाद दुरसंचार विभाग (DoT) द्वारा बीएसएनएल को पूरे देश में समस्त दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने का दायित्व प्रदान किया गया। 2000 का दशकः सबसे बड़ा लैंडलाइन नेटवर्क विस्तारः राष्ट्रीय कनेक्टिविटी कार्यक्रमों के लिए संचार के आधार के रूप में कार्य किया। 2010 का दशकः अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, तेज़ी से बदलती तकनीक (3G/4G) और विभिन्न तरह के टैरिफ की चुनौतियों का सामना करते हुए बीएसएनएल ने देश के ग्रामीण/नागरिकों तक संचार सेवाएँ प्रदान करने के दायित्वों को जारी रखा।  वीवीएनएल के विलय ने स्वदेशी 4G/5G के लिए आधार तैयार किया मध्यप्रदेश में विस्तार  माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा कल स्वदेशी 4G मोबाइल नेटवर्क के लिए 97,500 से अधिक नए मोबाइल टावर का उद्घाटन किया जा रहा है उसमें मध्यप्रदेश की 4679 टावर शामिल हैं जो की प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थापित किए गए हैं। इसमें डिजिटल भारत निधि के वित्तीय सहयोग से 1223 नए टावर लगाए गए हैं, जिससे प्रदेश के लगभग 1656 ऐसे गाँव में मोबाइल सुविधा उपलब्ध कराइ गयी है जहाँ अब तक किसी भी ऑपरेटर का कवरेज नहीं था। इसके अतिरिक्त 247 टावर के संस्थापन का कार्य प्रगति पर है तथा सम्भावना है कि यह कार्य मार्च 2026 तक पूर्ण हो जायेगा | साथ ही भारत सरकार के वृहद अमेंडेड भारतनेट प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रदेश दूरस्थ ग्रामों तक 65509 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बीएसएनएल द्वारा बिछाई जा रही है जिससे प्रदेश की 22858 ग्राम पंचायतों में हाई स्पीड इन्टरनेट की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी | वर्तमान में मध्यप्रदेश में बीएसएनएल के लगभग 29.3 लाख मोबाइल उपभोक्ता, 1.26 लाख एफटीटीएच उपभोक्ताओं के साथ साथ विभिन्न संस्थानों एवं कार्यालयों में 13571 लीज्ड लाइन कार्यरत हैं। बीएसएनएल के ऐसे उपभोक्ता जिन्होनें अपनी पुरानी 2G/3G सिम को अभी तक 4G सिम में नहीं बदलवाया है, वह किसी भी बीएसएनएल उपभोक्ता सेवा केंद्र अथवा अधिकृत फ्रेंचाइजी/रिटेलर से मुफ्त में 4G सिम प्राप्त कर सकते हैं।