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पीवी सिंधु का धमाका! China Masters 2025 में क्वार्टर फाइनल में प्रवेश

नई दिल्ली  इन दिनों चीन में चाइना मास्टर्स बैडमिंटन टूर्नामेंट 2025 की धूम है. जिसमें भारत की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु कमाल का कर रही हैं. महिला सिंगल्स में राउंड ऑफ-32 के बाद अब उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में गजब का खेल दिखाया. सिंधु ने थाईलैंड की खिलाड़ी को सीधे 2 सेटों में मात दी और क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली. सिंधु ने दोनों ही सेट एकतफरा अंदाज में जीते. पूरे मुकाबले में किसी भी मौके पर थाईलैंड की खिलाड़ी पोर्नपावी चोचुवोंग को वापसी करने का मौका नहीं मिला. पीवी सिंधु ने पोर्नपावी चोचुवोंग को सीधे गेम में 21-15, 21-15 से मात दी है. मैच 41 मिनट तक चला, जिसमें पीवी सिंधु का जलवा दिखा. उन्होंने इस जीत के साथ चोचुवोंग के खिलाफ अपने हेड-टु-हेड रिकॉर्ड को 6-5 कर लिया है. दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट सिंधु फिलहाल वर्ल्ड रैंकिंग में 14वें नंबर पर काबिज हैं. पीवी सिंधु की यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्हें हॉन्गकॉन्ग ओपन 2025 में हार मिली थी. वो पहले राउंड में बाहर हो गई थीं.   जीत के बाद क्या बोलीं पीवी सिंधु ? पोर्नपावी चोचुवोंग के खिलाफ मिली जीत पर उन्होंने खुशी जाहिर की. सिंधु ने कहा ‘मैं जीत से खुश हूं और मेरे लिए शुरुआत से ही सतर्क रहना और अपना शत-प्रतिशत देना बेहद जरूरी था. वह (चोचुवोंग) एक टॉप खिलाड़ी हैं. मैंने इंडोनेशिया ओपन में उनके साथ खेला था और उस समय भी मुकाबला कड़ा था. पहला गेम जीतने के बाद, मैं दूसरे गेम में ज्यादा सतर्क थी.’ क्वार्टर फाइनल में किससे होगा पीवी सिंधु का मुकाबला? अब पीवी सिंधु क्वार्टर फाइनल में नजर आएंगी. उनका मुकाबला टॉप सीड कोरिया की एन से यंग और डेनमार्क की मिया ब्लिकफेल्ट के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा. 

मांगों को लेकर वेरका मिल्क व कैटलफीड आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन CM आवास घेराव की तैयारी में

चंडीगढ़  वेरका मिल्क और कैटलफीड प्लांट आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन ने चंडीगढ़ वेरका प्लांट के गेट पर रैली की और पंजाब सरकार व मिल्कफेड प्रबंधन के खिलाफ  नारेबाजी की। यूनियन के प्रधान रूपिंदर सिंह ने बताया कि इसी तरह की रैलियां वेरका के अन्य प्लांटों में भी आयोजित की गईं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यूनियन की मांगें लंबित हैं और प्रबंधन पिछली बैठकों में स्वीकार की गई मांगों को भी लागू नहीं कर रहा है। जायज मांगों को मानने की बजाय पंजाब सरकार की शह पर यूनियन नेताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। रूपिंदर सिंह ने बताया कि 15 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रबंध निदेशक राहुल गुप्ता के साथ हुई बैठक के दौरान यूनियन नेताओं को मुकदमे दर्ज करने और जेल भेजने की धमकियाँ दी गई थीं। इसके विरोध में सूबा कमेटी ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। यूनियन ने घोषणा की कि 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर “ठेका संघर्ष मोर्चा” के बैनर तले पंजाब के मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यूनियन ने 6 अक्टूबर 2025 से लगातार तीन दिन तक विरोध प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया। प्रधान रूपिंदर सिंह ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी जायज़ माँगें स्वीकार नहीं होतीं, तब तक यह शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस दौरान किसी भी प्लांट को नुकसान होता है तो उसकी ज़िम्मेदारी पंजाब सरकार और वेरका प्रबंधन की होगी। इस अवसर पर पवित्र सिंह, रविंदर सिंह, इंदरजीत सिंह, हरमिंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद थे।

अभिजीत रंजन के बाद अब एक और अधिकारी की मुश्किलें बढ़ीं, जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

भोपाल  आइपीएस अभिजीत रंजन के बाद नागेंद्र सिंह की विभागीय जांच की तैयारी है। पुलिस मुख्यालय ने 6 पन्ने की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर गृह विभाग भेजी है। बता दें, बालाघाट एसपी रहे नागेंद्र सिंह पर पुलिस अधिकारी पत्नी ने आरोप लगाए थे, जिस पर पीएचक्यू की टीम ने जांच की। इसमें आरोप सिद्ध होने के बाद पीएचक्यू द्वारा विभागीय जांच की अनुशंसा की है। अब गृह विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी। तत्काल हटाने के बाद दिए थे जांच के निर्देश वहीं कटनी में एसपी रहे अभिजीत रंजन पर वहां पदस्थ रहीं सीएसपी ख्याति मिश्रा के तहसीलदार पति शैलेंद्र बिहारी शर्मा ने परिवार के लोगों से मारपीट करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले की डीजीपी, यूपीएससी तक शिकायत हुई। सीएम ने उन्हें तत्काल हटाने के बाद जांच के निर्देश दिए थे। यह था मामला बालाघाट एसपी रहे नागेंद्र सिंह की डीजीपी से गुप्त शिकायत उनकी पत्नी ने की थी। यह जांच कई महीनों तक चली। लेकिन बाद में पीएचक्यू की जांच में आरोप सही पाए गए जिसके बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा 6 पन्नों की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर विभागीय जांच के लिए गृह विभाग को फाइल भेजी गई।

कारीगरों के लिए खुशखबरी: शुरू हुई मुख्यमंत्री विश्वकर्मा सम्मान योजना, मिलेगा अतिरिक्त लाभ

रोहतक भगवान श्री विश्वकर्मा जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हरियाणा में कारीगरों और शिल्पकारों को बड़ी सौगात मिली। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मुख्यमंत्री विश्वकर्मा सम्मान योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत हरियाणा के उन कारीगरों को 5 हजार रुपये का टॉप-अप प्रोत्साहन मिलेगा, जिन्होंने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने नई अनाज मंडी में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कहा कि यह दिन उन सभी मेहनती, ईमानदार और कर्मठ श्रमिकों के सम्मान का प्रतीक है, जो अपनी मेहनत से देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा समाज द्वारा आवेदन करने पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के नियमानुसार प्लॉट भी आवंटित किए जाएंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के तहत प्रदेश की 4200 बेटियों की शादी के लिए 22 करोड़ रुपये की राशि 30 सितंबर तक जारी कर दी जाएगी। दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत जल्द पंजीकरण शुरू होंगे और बहनों को 2100 रुपये प्रतिमाह का लाभ मिलेगा। हरियाणा में पीएम विश्वकर्मा योजना में 41,366 आवेदक पंजीकृत सीएम ने बताया कि हरियाणा में पीएम विश्वकर्मा योजना में अब तक 41,366 आवेदक पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 30,655 कारीगरों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और लगभग 12,000 कारीगरों को टूलकिट दी जा चुकी है। साथ ही, 6,000 कारीगरों को 56 करोड़ रुपये के ऋण दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कल्याण के लिए हरियाणा असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड और विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं कार्यरत हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन वृतांत और उनकी जनसेवा को प्रदर्शित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहेः धनखड़ पूर्व मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओपी धनखड़ ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि और विकास का जो आधार स्थापित किया था, आज उसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। पीएम मोदी भारत के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। युवाओं को पारदर्शी ढंग से प्रदान हो रहा रोजगार : गंगवा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी संत महापुरुषों की जयंती मना रही है, यह हम सबके लिए गौरव की बात है और संत महापुरुषों का सम्मान है। ऐसे आयोजन युवा शक्ति के लिए हैं प्रेरणादायक : पंवार विकास एवं पंचायत एवं विकास मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने भगवान श्री विश्वकर्मा को नमन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवा शक्ति के लिए प्रेरणादायक हैं। हरियाणा सरकार की ओर से संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना के तहत इस तरह के आयोजन हमें जीवन में महान विभूतियों की कार्यशैली से अवगत कराती है। विश्वकर्मा समाज आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ : अरविंद शर्मा सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने संदेश में स्पष्ट रूप से जोर दिया कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें देशी उत्पादों का उपयोग बढ़ाना होगा। विश्वकर्मा समाज देश की रीढ़ है और इस समाज की भूमिका आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विशेष होगी।

मर्डर केस में झटका: सोनम रघुवंशी की बेल याचिका खारिज, 3 आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर

इंदौर इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस केस के मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी, राज कुशवाह, आनंद, आकाश और विशाल ने मेघालय के सोहरा उप प्रभाग प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने जमानत की अर्जी दायर की थी। लेकिन पुलिस की कड़ी आपत्ति के बाद कोर्ट ने इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। शिलांग पुलिस ने इस मामले में 790 पन्नों का चालान पेश किया है, जिसमें सोनम की हर साज़िश का विस्तार से जिक्र है। हालांकि, इसी केस में पहले तीन आरोपियों बिल्डिंग मालिक लोकेंद्र तोमर, बलवीर अहिरवार और सिलोम जेम्स को जमानत मिल चुकी है। बाकी आरोपी इन्हीं की जमानत को आधार बनाकर जेल से बाहर आने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी दलील कोर्ट ने मानने से इंकार कर दिया। राजा रघुवंशी की हत्या की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस इसे प्रेम प्रसंग से जुड़ा मामला बता रही है, लेकिन राजा का परिवार इस थ्योरी को मानने को तैयार नहीं है। मृतक के भाई विपिन रघुवंशी का आरोप है कि पुलिस ने जांच में कई गड़बड़ियां कीं और कुछ षड्यंत्रकारियों को बचाने की कोशिश की। उनका कहना है कि सोनम के खातों तक को फ्रीज़ नहीं किया गया। क्या हुआ था? 29 वर्षीय राजा रघुवंशी और 24 वर्षीय सोनम की शादी 11 मई को इंदौर में धूमधाम से हुई थी। पुलिस के अनुसार, सोनम इस शादी से खुश नहीं थी क्योंकि वह परिवार के फर्नीचर कारोबार में काम करने वाले अकाउंटेंट राज कुशवाह को चाहती थी। शादी के कुछ ही दिन बाद सोनम ने हत्या की साजिश रची और हनीमून के बहाने 20 मई को राजा को मेघालय ले गई। 23 मई को दोनों लापता हो गए और लंबे इंतज़ार के बाद 2 जून को राजा का शव बरामद हुआ। जांच में कई राज खुले और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सोनम ने यूपी में सरेंडर किया। बताया गया कि हत्या के बाद वह इंदौर में जाकर छिपी हुई थी। अब इस सनसनीखेज हत्याकांड में सोनम समेत आठ आरोपियों सोनम, राज कुशवाह, आनंद, आकाश, विशाल, बलवीर अहिरवार, सिलोम जेम्स और लोकेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ एसआईटी ने चालान पेश कर दिया है।

MLA गोलू शुक्ला की बस से हादसा, इंदौर में बाइक सवार परिवार की मौत

 इंदौर  ट्रक हादसे का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है कि विधायक गोलू शुक्ला की बस ने पति-पत्नी और बच्चे की जान ले ली। चालक तीनों को रौंदने के बाद बस छोड़कर फरार हो गया। हादसे में घायल एक मासूम की हालत गंभीर है। उसका अरबिंदो अस्पताल में उपचार चल रहा है। बाणगंगा टीआइ सियाराम सिंह गुर्जर के अनुसार, घटना बुधवार देर रात धरमपुरी के समीप ग्राम रिंगनोदिया की है। टक्कर मारने वाली बस विधायक गोलू शुक्ला की बस एमपी 09एफए 6390 ने बाइक एमपी 09वीएफ 3495 को टक्कर मार दी। टक्कर से बाइक सवार दंपती बच्चों सहित दूर जाकर गिरे। हादसे में महेंद्र सोलंकी, जयश्री सोलंकी और 15 वर्षीय जिगर सोलंकी की मौके पर ही मौत हो गई। 10 साल का तेजस सोलंकी गंभीर रूप से घायल हुआ है। सांवेर टीआइ गिरजाशंकर महोबिया के अनुसार, टक्कर मारने वाली बस विधायक गोलू शुक्ला की है। बस के पीछे भी गोलू लिखा है। भाई-भाभी से मिलकर घर लौट रहा था टक्कर के बाद चालक और हेल्पर बस को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। महेंद्र सोलंकी निवासी तीन इमली मूसाखेड़ी की चाय की दुकान है। वह साईं विहार कॉलोनी में रहने वाले भाई बाबूसिंह सोलंकी और भाभी शांति सोलंकी से मिलने आया था। बाबू बुधवार को भोपाल गए थे। लौटने में देरी हो गई और महेंद्र को निकलने में रात हो गई। परीक्षा होने से सभी तो रात में ही रवाना बाबू सिंह ने तेज बारिश का कहते हुए महेंद्र को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन सुबह जिगर की परीक्षा होने से सभी तो रात में ही रवाना होना पड़ा। करीब एक घंटे बाद भी घर पहुंचने की खबर नहीं आई तो बाबूसिंह की बेटी ने काल लगाया। थोड़ी देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आया कि चारों को अरबिंदो अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।  

MP और महाराष्ट्र में बाघों के शिकार पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब, उठे संगठित गिरोहों के सवाल

भोपल  सुप्रीम कोर्ट ने  केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और अन्य से उस जनहित याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कथित संगठित बाघ शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार रैकेट की सीबीआइ जांच की मांग की गई है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ वकील गौरव कुमार बंसल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें सक्रिय संगठित शिकार गिरोहों द्वारा बाघों के लिए उत्पन्न गंभीर खतरे पर प्रकाश डाला गया था। बंसल ने कहा कि कम से कम 30 प्रतिशत बाघ निर्दिष्ट बाघ अभयारण्यों के बाहर हैं और उन्होंने बाघों के बड़े पैमाने पर शिकार की खबरों का हवाला दिया। इन बिंदुओं पर दायर हुई है याचिका महाराष्ट्र सरकार की एसआईटी जांच में शिकारी, तस्करों और हवाला नेटवर्क का संगठित गिरोह सामने आया। यह गिरोह बाघों की खाल, हड्डियां और ट्रॉफी को राज्य की सीमाओं से बाहर और विदेशों तक तस्करी करता है। याचिका में रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि बाघों का शिकार अब संरक्षित क्षेत्रों से बाहर वन प्रभागों और कॉरिडोर में ज्यादा हो रहा है, जहां निगरानी और सुरक्षा बेहद कमजोर है। वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) ने इन क्षेत्रों को बाघों के फैलाव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। बाघों के अंगों की तस्करी में लगे एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के पर्दाफाश पीठ ने केंद्र एवं अन्य प्राधिकारियों की ओर से अदालत में पेश हुईं अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से याचिका पर निर्देश लेने को कहा। याचिका में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बाघों के व्यवस्थित शिकार और राज्यों एवं म्यांमार तक फैले बाघों के अंगों की तस्करी में लगे एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के पर्दाफाश का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है, ''कई आरोपितों की गिरफ्तारी, बाघों की खाल, हड्डियां, हथियार और वित्तीय रिकार्ड की जब्ती, साथ ही एसआइटी के गठन से यह स्पष्ट हो गया है कि यह समस्या किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गहरे आपराधिक नेटवर्क के अस्तित्व को दर्शाती है जो कानून के शासन को कमजोर करता है।'' बाघ अभयारण्यों से सटे गैर-संरक्षित प्रादेशिक वन शिकारियों के आसान शिकार याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिसूचित बाघ अभयारण्यों से सटे गैर-संरक्षित प्रादेशिक वन क्षेत्र बार-बार शिकारियों का आसान निशाना बन गए हैं। इसके फलस्वरूप कार्रवाई करने की वजहें और भी मजबूत हो जाती हैं। सीबीआइ जांच की मांग करते हुए याचिका में कहा गया है, ''जब तक यह अदालत हस्तक्षेप नहीं करती और एक व्यापक, स्वतंत्र और समन्वित जांच का निर्देश नहीं देती, तब तक राष्ट्र की पारिस्थितिक सुरक्षा और राष्ट्रीय पशु के अस्तित्व को गंभीर खतरा रहेगा।'' याचिका में यह भी कहा गया है, ''प्रतिवादियों (केंद्र और अन्य) को एसआइटी की सिफारिशों को तुरंत लागू करने और बाघ अभयारण्यों से सटे बाघ गलियारों और प्रादेशिक वन प्रभागों में प्रभावी सुरक्षा, निगरानी और गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया जाए, और उन्हें मुख्य क्षेत्रों के समान माना जाए।'' याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) और एनटीसीए को पक्ष बनाया गया है। बंसल ने अदालत में कहा याचिकाकर्ता के वकील बंसल ने कहा कि भारत में 30% से अधिक बाघ संरक्षित क्षेत्रों के बाहर पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि तस्करी का यह संगठित नेटवर्क वन गुर्जर समुदाय जैसे आदिवासी समूहों से जुड़े गिरोहों को भी शामिल करता है। उन्होंने अदालत से मांग की कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।  

IPS संवर्ग में होंगे शामिल 7 राज्य पुलिस सेवा अधिकारी, 5 को इसी साल पदोन्नति

भोपाल राज्य पुलिस सेवा के पांच अधिकारी इस वर्ष आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत हो जाएंगे। अगले वर्ष एक जनवरी 2025 की स्थिति में सात को पदोन्नति मिलनी है। यह सभी 1998 बैच के होंगे। यानी, अभी 27 वर्ष की सेवा के बाद भी वह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ही हैं। बड़े-बड़े बैच, हर पांच वर्ष में काडर रिव्यू नहीं होने सहित कई कारणों से मप्र के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति में अन्य राज्यों से काफी पीछे हैं। वर्ष 2025 में सात पदों के लिए डीपीसी की तैयारी शासन अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ कर सकता है। इनकी डीपीसी लगभग एक वर्ष पीछे चल रही है।   बता दें कि कर्नाटक में 2012, तेलंगाना, गुजरात और आंध्र प्रदेश में 2010 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पदोन्नत होकर आइपीएस बन चुके हैं, पर प्रदेश में अभी वर्ष 1998 का ही पूरा बैच पदोन्नत नहीं हो पाया है। उधर, प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2006 के अधिकारी आईएएस में पदोन्नत हो चुके हैं। राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी लंबे समय से शासन से मांग कर रहे हैं कि छोटे जिलों में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी उन्हें दी जाए, पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है, जबकि यह व्यवस्था मध्य प्रदेश में पहले लागू रही है। शशिकांत शुक्ला, रमन सिंह सहित कई अधिकारी दो जिलों में एसपी रहने के बाद आइपीएस बने। अब कई वर्षों से इसे बंद कर दिया गया है।

ग्वालियरवासियों को राहत: कैपेसिटर बैंक से सुधरेगी बिजली आपूर्ति

ग्वालियर बिजली उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा स्थिर बिजली मिलेगी। उन्हें अब लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिल जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश भर में 417 एक्स्ट्रा हाई टेंशन सब स्टेशनों में से 412 सब स्टेशनों पर विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक लगा दिए हैं। इन कैपेसिटर बैंकों की मदद से वोल्टेज में स्थिरता लाई जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और बार-बार उपकरण खराब होने की समस्या से निजात मिलेगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ट्रांसमिशन सिस्टम और अधिक मजबूत हो रहा है।   यह होते हैं कैपेसिटर बैंक कैपेसिटर बैंक (संधारित्र बैंक) कई कैपेसिटर का एक समूह होता है, जो विद्युत ऊर्जा को संग्रहित और जारी करने के लिए एक साथ समानांतर या श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। इन्हें विद्युत प्रणालियों की दक्षता में सुधार करने, पावर फैक्टर को सही करने और प्रतिक्रियाशील शक्ति को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है। ग्वालियर जिले में 11 हाई टेंशन सब स्टेशनों पर 222 एमवीएआर क्षमता के कैपेसिटर बैंक क्रियाशील किए गए हैं। एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों से विद्युत आपूर्ति के दौरान पावर ट्रांसफार्मर पर प्रायः इंडक्टिव लोड (सिंचाई मोटर एवं घरेलू उपकरण) होता है, जिससे वोल्टेज में कमी आती है और विद्युत गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस समस्या के समाधान के लिए कैपेसिटर बैंक लगाए गए हैं, जो अपने कैपेसिटिव लोड के माध्यम से उस इंडक्टिव प्रभाव को संतुलित कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप पावर फैक्टर में सुधार होता है और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति होती है।

घातक ‘मेलिओइडोसिस’: पहचानना मुश्किल, मध्य प्रदेश में बढ़ रही चिंता

भोपाल प्रदेश में एक नए स्वास्थ्य संकट ने दस्तक दी है। यह जीवाणु (बैक्टीरिया) का संक्रमण है, जिसकी पहचान मेलिओइडोसिस बीमारी के रूप में हुई है। इसके लक्षण बिल्कुल टीबी जैसे होते हैं। अगर मरीज का गलत इलाज हो जाए तो जीवन पर खतरा हो जाता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल का दावा है कि इससे संक्रमित प्रत्येक 10 में से चार मरीजों की मौत हो जा रही है। प्रदेश के 20 जिलों में 130 मरीज इस बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं। मध्य प्रदेश में दो लाख से अधिक लोग मिले जो सिकल सेल पीड़ित बच्चों को दे सकते थे जन्म पिछले दिनों राजधानी के पास रहने वाले एक 45 वर्षीय किसान को एम्स लाया गया था। वह कई महीनों से बार-बार आने वाले बुखार, खांसी और सीने में दर्द से परेशान थे। स्थानीय डाॅक्टरों ने इसे टीबी मानकर इलाज शुरू किया था। महीनों तक दवा खाने के बाद भी जब उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो थक-हारकर उन्हें एम्स भोपाल लाया गया। यहां जब माइक्रोबाॅयोलाजी विभाग ने गहराई से जांच की, तो पता चला कि उन्हें टीबी नहीं, बल्कि मेलिओइडोसिस है। सही बीमारी पकड़ में आने के बाद मरीज ठीक हो गया।     एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले छह वर्षों से इस बीमारी पर वह नजर बनाए हुए हैं।     प्रदेश में अब तक 20 जिलों में 130 से ज्यादा मरीजों की पहचान हो चुकी है।     यह बीमारी अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल रही है।     सही समय पर इसकी पहचान न हो पाने के कारण यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।     क्योंकि इसके लक्षण टीबी जैसे होने के कारण अक्सर डाॅक्टर भी धोखा खा जाते हैं। यह होता है मेलिओइडोसिस     मेलिओइडोसिस एक संक्रामक बीमारी है जो 'बर्कहोल्डरिया स्यूडोमल्ली' नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी और पानी में पाया जाता है।     विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी अब प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) हो चुकी है, यानी यहीं के वातावरण में स्थायी रूप से मौजूद है। किसान और मधुमेह रोगी होते हैं आसान शिकार     बताया गया कि इसका सबसे अधिक खतरा ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़े लोगों को होता है, क्योंकि उनका सीधा संपर्क मिट्टी और पानी से होता है।     शहरी इलाकों में डायबिटीज(मधुमेह) के मरीजों और अधिक शराब का सेवन करने वालों को भी यह बीमारी आसानी से अपनी चपेट में ले सकती है। डाॅक्टरों को प्रशिक्षित कर रहा एम्स     एम्स का माइक्रोबायोलाजी विभाग प्रदेश भर के डाॅक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस बीमारी की सही और समय पर पहचान के लिए प्रशिक्षित कर रहा है।     पिछले ढाई सालों में 25 सरकारी और निजी अस्पतालों के 50 से ज्यादा विशेषज्ञों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।     इस प्रशिक्षण का ही नतीजा है कि अब प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी 14 नए मामले सामने आए हैं, जिनका सही इलाज संभव हो पाया है।