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बिहार के 10 शहरों की हवा हुई सबसे जहरीली

पटना. बिहार के छोटे शहरों में हवा लगातार खराब रह रही है। राज्य के 10 शहरों की हवा में पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 की मात्रा बढ़ी रहती है। जिन छोटे शहरों की हवा ज्यादा जहरीली है, उनमें आरा, हाजीपुर, कटिहार, मोतिहारी, अररिया, बेगूसराय, बेतिया, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और बक्सर शामिल है। आरा और हाजीपुर का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से अधिक रहा। इस बीच पटना में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। खुले नाले से निकलने वाले अमोनिया गैस भी हवा में पीएम 2.5 बना रही है। इससे वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने में खुले नालों की महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। आईआईटी बीएचयू के अध्ययन के अनुसार खुले नाले से अमोनिया गैस निकल रही है। यह वाहनों से निकलने वाले सल्फर डाईऑक्साइड(एसओ2) से मिलकर पीएम 2.5 बन रहा है। पीएम2.5 यानी महीन धूलकण। दोनों गैस के आपस में मिलने से महीन कण बन रहे हैं। इसके कारण पीएम2.5 की मात्रा लगातार बढ़ी हुई पायी जा रही है। पटना के वायु प्रदूषण में कमी जरूर आयी है, लेकिन पीएम2.5 अक्सर बढ़ा हुआ रहता है। ऐसी ही स्थिति सूबे के अन्य छोटे शहरों की भी है। खुले नालों को बंद करना होगा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डीके शुक्ला ने बताया कि अध्ययन की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि पटना के खुले नाले से निकल रही अमोनिया गैस से भी पीएम 2.5 बढ़ रहा है। अभी अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। शहरों के खुले नालों को बंद करने से ही पीएम2.5 में कमी आएगी। हालांकि कई खुले नालों को बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में कार्ययोजना बनाकर सरकार को भेजा जाएगी। खुले नाले में आर्गेनिक मेटेरियल होते हैं। गंदगी और कचरा के कारण अमोनिया गैस निकलती है। शहर के वायु में पहले से ही वाहनों से निकलने वाले सल्फरडाई ऑक्साइड मौजूद रहता है। दोनों के मिलने से भी पीएम2.5 बन रहा है। धूप निकलने पर अमोनिया हवा में प्रवेश कर जाता है। अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने और लगेंगे बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आईआईटी बीएचयू को पटना में वायु प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन करने को लेकर समझौता किया था। अध्ययन के लिए एक साल का समय निर्धारित था, जो अब पूरा हो चुका है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने का समय और लगेगा। आईआईटी बीएचयू की टीम ने पटना के खुले नाले का सैंपल लेकर उसकी जांच की थी। अभी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि खुले नाले से निकलने वाली अमोनिया गैस के कारण भी वायु में पीएम2.5 की मात्रा बढ़ रही है।

ठंड, घना कोहरा और जहरीली हवा ने बढ़ाई दिल्लीवासियों की परेशानी, येलो अलर्ट लागू

नई दिल्ली दिल्ली और आसपास के सटे इलाकों में कड़ाके की सर्दी बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, वहीं घने कोहरे ने आम लोगों की आवाजाही और जीवन को मुश्किल बना दिया है। दिल्ली–NCR क्षेत्र के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, ठंडी हवाओं की गति बढ़ने के बावजूद वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुँच चुकी है, जिससे स्वास्थ्य और यातायात दोनों पर असर पड़ रहा है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता अब भी बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है और प्रदूषण में कमी का नाम नहीं लिया जा रहा है। दिन-ब-दिन हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। हालांकि, सरकार ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। राजधानी में GRAP-4 की पाबंदियां लागू की गई हैं, लेकिन इनका असर फिलहाल सीमित नजर आ रहा है और हवा जहरीली बनी हुई है। आज भी दिल्ली के अधिकांश इलाके रेड जोन में हैं। दिल्ली-NCR में बढ़ती ठंड और हवाओं की रफ्तार बीते दो दिनों से दिल्ली–एनसीआर में ठंड लगातार बढ़ रही है और सुबह से शाम तक धूप नदारद है। पूरे क्षेत्र में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे दृश्यता कम हो गई है और ठिठुरन का एहसास बढ़ गया है। ठंडी हवाएं पहले 8 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं, लेकिन आज से इनकी गति बढ़कर लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इन तेज हवाओं के कारण तापमान में और गिरावट महसूस की जा रही है, जिससे आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियां बढ़ गई हैं। ठंड का कोल्ड अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, फिलहाल शीतलहर की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मौसम की गंभीरता को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। सुबह और शाम के समय घना कोहरा कई इलाकों में बना रहता है। ठंडी हवाओं के कारण शरीर में ठिठुरन बढ़ेगी, और बुजुर्गों व बच्चों के लिए जोखिम अधिक रहेगा। IMD ने लोगों से सलाह दी है कि वे सावधानी बरतें, सुबह जल्दी बाहर निकलने से बचें और हाईवे पर अनावश्यक यात्रा न करें, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम से कम हो। कुछ शहरों का तापमान, AQI और आगे का मौसम दिल्ली में अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 334 रहा। नोएडा में तापमान 22 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच और AQI 328 दर्ज किया गया। गाजियाबाद में हालात सबसे गंभीर रहे, जहां AQI 444 से 484 तक पहुंच गया और तापमान 21 से 11 डिग्री सेल्सियस रहा। गुड़गांव में AQI 323 और ग्रेटर नोएडा में 432 रिकॉर्ड किया गया। IMD के अनुसार, 27 दिसंबर तक पूरे सप्ताह ठंड का असर बना रहेगा, और अधिकतम तापमान 19 तथा न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इस दौरान घना कोहरा और ठंडी हवाएं लगातार बनी रहेंगी। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी येलो या अन्य अलर्ट जारी किए जा सकते हैं। दिल्ली पर प्रदूषण की घनी चादर छा जाने से राजधानी की रफ्तार धीमी हो गई है। धुंध और स्मॉग के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है, जिसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सुबह और शाम के समय हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। दूर से दिखाई देने वाली इमारतें और स्मारक अब मुश्किल से दिखाई दे रहे हैं। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत BS-6 मानक से नीचे की गाड़ियों के दिल्ली में प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, निर्माण कार्यों पर रोक, औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके। दिल्ली में सर्दी लगातार बढ़ रही है और राजधानी में दो दिन से येलो अलर्ट जारी है। मौसम विभाग ने सोमवार के लिए भी कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

प्रदूषण का कहर: दिल्ली में बच्चों के लिए साँस लेना बना चुनौती

  नई दिल्ली  राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि शहर के छोटे निवासी लगातार पुरानी सांस की बीमारियों और श्वसन संबंधी जटिलताओं का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से बच्चों के विकसित हो रहे फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसमें हल्की ब्रोंकाइटिस से लेकर तीव्र श्वसन नली की सूजन और गंभीर सर्जरी तक की स्थिति देखी जा रही है। प्रदूषण के कारण बच्चों में सांस की समस्याएं बढ़ रही हैं हाल ही में एक मां ने बताया कि दिल्ली आने के बाद प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने के कारण उनके पांच साल के बच्चे को टॉन्सिल की सर्जरी करानी पड़ी। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामले पूरे इलाके में बढ़ रहे हैं। डॉक्टर ने तीन साल के एक बच्चे का उदाहरण दिया, जिसे भयंकर धुंध के दौरान तीव्र ब्रोंकियोलाइटिस की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया। उन्होंने कहा, "खांसी से शुरू हुई समस्या धीरे-धीरे सांस लेने में तकलीफ़ में बदल गई। कोई संक्रमण नहीं पाया गया। यह प्रदूषण के कारण हुई श्वसन नली की सूजन थी। बता दें की उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शालीमार बाग में पांच साल के एक बच्चे को भी प्रदूषित हवा के कारण गंभीर श्वसन समस्याओं का सामना करना पड़ा। जांच में एडेनॉइड्स बढ़े हुए पाए गए और सर्जरी की संभावना जताई गई। गाजियाबाद के अस्पताल में छह महीने के एक बच्चे को गंभीर घरघराहट वाली ब्रोंकाइटिस के कारण लाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी श्वास नलिकाएं उत्तेजित और संकरी हो गई थीं। नेबुलाइजेशन और मेडिकल देखभाल के बाद उसकी हालत अब स्थिर है। प्रदूषण बच्चों की रोज़मर्रा की जिंदगी भी प्रभावित कर रहा है राज नगर एक्सटेंशन में रहने वाले 11 साल के एक बच्चे के पिता ने बताया कि उनके बेटे को बाहर खेलने के दौरान केवल कुछ मिनटों में ही सांस फूलने लगी। डॉक्टरों ने बताया कि यह किसी संक्रमण के कारण नहीं, बल्कि प्रदूषण की वजह से श्वास नलियों में जलन की प्रतिक्रिया थी। गाजियाबाद में सात साल की एक बच्ची को लगातार घरघराहट की शिकायत हुई। उसे बार-बार नेबुलाइजेशन , ओरल (Oral) और अंतःशिरा स्टेरॉयड्स  लेने पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण न केवल मौजूदा बीमारियों को बढ़ा रहा है, बल्कि नई बीमारियों को भी जन्म दे रहा है। गुड़गांव के आर्टेमिस अस्पताल में ईएनटी विभाग के प्रमुख ने 13 वर्षीय एक बच्चे का उदाहरण साझा किया, जो हाल ही में सिंगापुर से आया था। वहां उसे कोई श्वसन समस्या नहीं थी, लेकिन दिल्ली में आने के तुरंत बाद उसे एडेनॉइड हाइपरट्रॉफी हो गई। गंभीर और दुर्लभ मामलों की बढ़ती संख्या अक्टूबर के अंत से नवंबर तक, प्रदूषण के सबसे खराब हफ्तों में किशोरों में पल्मोनरी एम्बोलिज़्म (फेफड़ों में थक्का) के मामले भी सामने आए। मैक्स, वैशाली में पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख ने बताया कि 17 वर्षीय एक लड़के में अत्यधिक प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क के कारण पैरों में थक्के बन गए, जो फेफड़ों तक पहुंच गए। यदि इलाज समय पर न होता, तो यह जानलेवा हो सकता था। प्रदूषण से बचने के लिए विशेषज्ञों की चेतावनी डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है और बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि विकसित होते फेफड़े सबसे अधिक प्रभावित होते हैं और लंबे समय तक विषाक्त वातावरण में रहने से गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं।

प्रदूषण से बेहाल दिल्ली: खतरनाक स्तर पर AQI, स्मॉग में छिपी राजधानी की पहचानें

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। शनिवार सुबह दिल्ली के कई हिस्सों में घना स्मॉग छाया रहा, जिससे लोगों को आंखों में जलन और सीने में घुटन महसूस हुई। इंडिया गेट पर विजिबिलिटी घटी दिल्ली के पॉपुलर प्लेस इंडिया गेट पर सुबह की सैर के लिए आने वाले लोगों को घने स्मॉग के कारण निराशा हाथ लगी। शनिवार सुबह इंडिया गेट स्मॉग की मोटी चादर में लगभग ओझल हो गया। सुबह 8 बजे यहां AQI 369 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है। हॉटस्पॉट में हवा 'गंभीर' श्रेणी के करीब CPCB के आंकड़ों के मुताबिक प्रदूषण के हॉटस्पॉट माने जाने वाले इलाकों में स्थिति काफी चिंताजनक है। आनंद विहार में सुबह 8 बजे AQI 424 दर्ज हुआ, जो 'गंभीर' श्रेणी की तरफ इशारा करता है। वजीरपुर की हवा का स्तर 447 तक पहुंच गया, जो किसी भी शहर के लिए बेहद खतरनाक है। इसके अलावा लोधी रोड, नजफगढ़, करोल बाग और आईजीआई एयरपोर्ट के पास भी हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में बनी हुई है। हवा में धूल कणों, धुएं और नमी के मिश्रण ने एक मोटी स्मॉग की परत बना दी है, जिससे विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। NCR के हाल भी चिंताजनक दिल्ली से सटे NCR क्षेत्रों में भी हालात बेहतर नहीं हैं। नोएडा सेक्टर-1 में AQI 387 दर्ज किया गया। वहीं गुरुग्राम सेक्टर-51 में AQI 285 रहा। सेहत के लिए गंभीर खतरा इस जहरीली हवा का सबसे बुरा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय रोग से पीड़ित मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी शिकायतें हो रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक इतनी खराब हवा में रहने से फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों के लिए जारी की सलाह दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कच्चे ईंधन वाले वाहनों पर रोक, निर्माण स्थलों पर धूल-नियंत्रण के कड़े उपाय, एंटी-स्मॉग गन का उपयोग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठा रही है। आम जनता के लिए जारी की ये सलाह ·         सुबह और शाम के समय (जब प्रदूषण सबसे अधिक होता है) बाहर निकलने से बचें। ·         घर से बाहर निकलने पर N-95 मास्क का उपयोग करें। ·         घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और शरीर को हाइड्रेट रखें। सरकारी एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन दिल्ली और एनसीआर में हवा की यह गुणवत्ता यहां के निवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।