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यूपी पुलिस सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन के प्राणों की रक्षा का अभिनव प्रयोग करने वाली बनी विश्व की प्रथम पुलिस एजेंसी

– नई दिल्ली में आयोजित 105वें स्कॉच समिट कार्यक्रम में महाकुम्भ-25 में स्थापित आईसीसीसी एवं यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर की मेटा सुसाइडल अलर्ट की अभिनव पहल के लिए वर्ष-25 के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड (श्रेणी-गोल्ड) से किया गया सम्मानित   – स्कॉच अवार्ड की दो अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कृत होने वाली योगी सरकार की यूपी पुलिस बनी देश की एक मात्र पुलिस बल      लखनऊ,  योगी सरकार के नाम शनिवार को एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गयी। योगी सरकार की यूपी पुलिस को नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित 105वें स्कॉच समिट कार्यक्रम में महाकुम्भ-25 में स्थापित आईसीसीसी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर एवं यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर की मेटा सुसाइडल अलर्ट से संबंधित अभिनव पहल को वर्ष-25 के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड (श्रेणी-गोल्ड) से सम्मानित किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम  “Governing Viksit Bharat” रही। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किया जाता है।      105वें SKOCH समिट कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण को पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे उनके द्वारा नामित अधिकारियों क्रमशः ICCC Mahakumbh–25 के तत्कालीन प्रभारी आईपीएस अमित कुमार एवं Meta Suicidal Alert का अवॉर्ड पुलिस महानिदेशक के जनसम्पर्क अधिकारी राहुल श्रीवास्तव तथा सत्या यादव, डायरेक्टर आउटरीच, साउथ एशिया फेसबुक (मेटा) द्वारा ग्रहण किया गया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तकनीक-समर्थ, संवेदनशील एवं जनोन्मुख पुलिसिंग के लिए लगातार दिशा-निर्देश एवं संसाधन प्रदान किये जा रहे हैं। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरुप प्रौद्योगिकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पुलिसिंग में उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही यूपी पुलिस द्वारा तकनीकी नवाचारों को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस वर्ष प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड-25 यूपी पुलिस को मिलना इसका जीता जागता उदाहरण है। यह सम्मान जनसुरक्षा एवं जीवन संरक्षण के क्षेत्र में यूपी पुलिस द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों, उत्कृष्ट सरकारी सेवाओं एवं प्रभावशाली कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त मान्यता को दर्शाता है।      Integrated Command and Control Center(ICCC): महाकुंभ–25 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुचारू संचालन और सुरक्षा के प्रति यूपी पुलिस की गहरी प्रतिबद्धता के दृष्टिगत आईसीसीसी को एक नर्व सेंटर / नियंत्रण हब के रूप में विकसित किया गया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा अन्य कटिंग-एज टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया ताकि मेले के दौरान जनमानस की सेवा, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, आपातकालीन सेवाएं और इंटर-एजेंसी समन्वय को सर्वोत्तम स्तर पर संचालित किया जा सके। महाकुंभ-25 में आईसीसीसी ने इस प्रकार अपना विशिष्ट योगदान दिया – AI-driven प्रणाली के माध्यम से crowd estimation, व्यक्ति-सुरक्षा और यातायात प्रबंधन। – एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ICCC)के ज़रिए 24X7 निगरानी, शिचुएशन रूम, आपातकालीन मॉनिटरिंग और त्वरित निर्णय-निर्धारण। – डिजिटल-गवर्नेंस एवं स्मार्ट टेक्नोलॉजी के समावेश से श्रद्धालुओं की सहायता के लिए "चैटबॉट / मास मैसेजिंग", ऐप-आधारित सपोर्ट। – भीड़-प्रबंधन, डीजास्टर-रेडीनेस और विविध एजेंसियों (पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, अग्नि एवं आपदा प्रबंधन आदि) के बीच बेहतर तालमेल। Meta Suicidal Alert: यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेन्टर द्वारा यह पहल Meta कंपनी के सहयोग से विकसित की गई है। इसके तहत फेसबुक एवं इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आत्महत्या से संबंधित सामग्री पोस्ट किए जाने की स्थिति में Meta द्वारा तत्काल पुलिस मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर को ई-मेल एवं फोन कॉल के माध्यम से अलर्ट भेजा जाता है। पुलिस मुख्यालय में स्थापित 24X7 समर्पित डेस्क, जो यूपी एसटीएफ सर्वर से एकीकृत है, पीड़ित की लोकेशन का त्वरित पता लगाकर संबंधित जनपद को सूचना प्रेषित करती है। इसके बाद स्थानीय पुलिस द्वारा पीड़ित एवं उसके परिजनों से संपर्क कर समय रहते सहायता, रेस्क्यू एवं काउंसिलिंग प्रदान की जाती है तथा अपने अधिकार-क्षेत्र में रहते हुए पीड़ित की समस्या के समाधान का भी प्रयास किया जाता है। 1 जनवरी-23 से 31 दिसम्बर-25 के मध्य Meta से प्राप्त 1,802 अलर्ट के माध्यम से कुल 1,805 व्यक्तियों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इन बचाए गए 1,805 लोगों में से 1,389 पुरुष एवं 416 महिलाएं शामिल हैं। इन एज ग्रुप के लोगों को बचाया गया – 13–18 वर्ष आयु वर्ग: 623 व्यक्ति                                                                                   – 19–25 वर्ष आयु वर्ग: 905 व्यक्ति – 26–35 वर्ष आयु वर्ग: 190 व्यक्ति – 35 वर्ष से अधिक आयु वर्ग: 87 व्यक्ति आत्महत्या के प्रयास के सभी मामलों में कांउसिलिंग की नवीन पहल यूपी पुलिस द्वारा त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के प्राण की रक्षा तत्समय कर ली जाती है, लेकिनभविष्य में आत्महत्या संबंधी विचारों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ऐसे व्यक्तियों को निरंतर एवं प्रभावी कांउसिलिंग की आवश्यकता रहती है। ऐसे में पुलिस महानिदेशक द्वारा नवीन पहल करते हुए आत्महत्या के प्रयास के सभी मामलों में जनपदीय मिशन शक्ति केन्द्र एवं 1090 के टेली-कॉउंसलर के माध्यम से पीड़ित की कांउसिलिंग के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

यूपी पुलिस ने 8 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए 48 कुख्यात अपराधियों को मारा

 लखनऊ साल 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एनकाउंटर में 48 कुख्यात अपराधियों को मारकर पिछले आठ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. पुलिस हेडक्वार्टर में DGP राजीव कृष्ण ने बताया कि 20 मार्च 2017 से 29 दिसंबर 2025 तक कुल 266 आरोपी एनकाउंटर में मारे गए. इस साल पुलिस ने 2,739 ऑपरेशन किए, जिसमें 3,153 आरोपी घायल हुए और एक पुलिसकर्मी शहीद हुआ.  DGP ने बताया कि पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि साल 2018 में 41, 2019 में 34, 2020 और 2021 में 26-26 आरोपी मारे गए थे. इस साल हुई कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत क्राइम के खिलाफ ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी का हिस्सा थी. इसके अलावा, गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के खिलाफ 475 मामले दर्ज किए गए और 855 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इनमें 379 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई. गाय की तस्करी और गोहत्या के खिलाफ पूरे राज्य में 1,197 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 3,128 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. 958 मामलों में चार्जशीट फाइल की गई. इसी दौरान गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत 1,886 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और 7.38 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई. यूपी पुलिस ने चोरी, डकैती और सेंधमारी के मामलों में साल 2025 में 8,543 टू-व्हीलर, 911 फोर-व्हीलर, 28.69 करोड़ रुपए कैश, 52.27 करोड़ रुपए की ज्वेलरी और 58.17 करोड़ रुपए की दूसरी प्रॉपर्टी जब्त की है. इसके अलावा 54,995 मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें से 49,404 फोन असली मालिकों को लौटाए गए. उन्होंने आगे बताया कि 1 जनवरी से 20 दिसंबर 2025 के बीच पुलिस ने कुल 1.16 लाख गाड़ियां, 50.97 करोड़ रुपए कैश, 76.42 करोड़ रुपए की ज्वेलरी और 3.36 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रॉनिक आइटम डिस्पोज़ किए. नशीले पदार्थों के साथ-साथ 39.53 करोड़ रुपए की दूसरी प्रॉपर्टी भी कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटाई गई.  

कार्बाइन फायरिंग में चौंकाने वाला प्रदर्शन: 40 दारोगाओं में से केवल 14 ही साध सके सटीक निशाना

कानपुर  कानपुर पुलिस लाइन में शनिवार को आयोजित हथियार अभ्यास के दौरान कई दारोगा की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े हो गए। अभ्यास के दौरान 40 दारोगा में से आधे से अधिक दारोगा कार्बाइन के पुर्जे सही तरीके से असेंबल नहीं कर पाए, जबकि कुछ को इसमें काफी समय लग गया। वहीं फायरिंग रेंज में भी अधिकांश दारोगा का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। 22 दारोगा अपनी पिस्टल लेकर पहुंचे पुलिस लाइन में नियमित रूप से इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाहियों को पिस्टल और कार्बाइन से निशानेबाजी का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी क्रम में शनिवार को कोतवाली, रेलबाजार, फीलखाना, कैंट, गुजैनी, ग्वालटोली, नवाबगंज, काकादेव, बर्रा समेत अन्य थानों से कुल 40 दारोगा को अभ्यास के लिए बुलाया गया था। इनमें कई चौकी इंचार्ज भी शामिल थे। अभ्यास के दौरान 22 दारोगा अपनी पिस्टल लेकर पहुंचे।   14 दारोगा ही सटीक निशाना लगा सके सबसे पहले फायरिंग रेंज में निशानेबाजी का अभ्यास कराया गया। इसमें केवल 14 दारोगा ही लक्ष्य के निर्धारित गोले के भीतर सटीक निशाना लगा सके, जबकि शेष दारोगाओं की गोलियां गोले के आसपास ही लगती रहीं। इसके बाद पिस्टल और कार्बाइन के पुर्जों को खोलने और दोबारा असेंबल करने का अभ्यास कराया गया। इस दौरान कई दारोगाओं की पिस्टल गंदी पाई गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे अपने हथियारों की नियमित साफ-सफाई और अभ्यास नहीं करते हैं।   कार्बाइन असेंबलिंग में भी स्थिति चिंताजनक रही कार्बाइन असेंबलिंग में भी स्थिति चिंताजनक रही, क्योंकि 40 में से आधे से भी कम दारोगा इसे सही ढंग से पूरा कर सके। संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय विनोद कुमार सिंह ने बताया कि सभी पुलिसकर्मियों को इसका प्रशिक्षण पहले से दिया जाता है, लेकिन नियमित अभ्यास न होने के कारण वे अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। उन्होंने सभी को भविष्य में नियमित अभ्यास करने की सख्त चेतावनी दी और पुलिस लाइन में दोबारा अभ्यास भी कराया गया। 

योगी सरकार का कड़ा कदम: आधुनिक वज्र वाहनों से बढ़ेगी यूपी पुलिस की ताकत

लखनऊ योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ी सौगात देते हुए दंगा नियंत्रण के लिए 9.70 करोड़ रुपये के वज्र वाहनों की खरीद को मंजूरी दी है। इसके तहत संवेदनशील शहरों में वज्र वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी आपात स्थिति में पुलिस प्रभावी नियंत्रण कर सके। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि कई मौकों पर प्रदेश में शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के सामने कड़ी चुनौती होती है। लेकिन अब कैबिनेट ने वज्र वाहनों की खरीद के लिए 9.70 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान करके इस चुनौती से निपटने का प्रयास किया है। बता दें कि पिछले साल भी उत्तर प्रदेश पुलिस को 41 दंगा नियंत्रण वाहनों के लिए बजट स्वीकृत किया गया था।   कैबिनेट की तरफ से कौन-कौन से प्रस्ताव पास हुए? -निदेशक, सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा निदेशालय का त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-20 को राज्य विधान मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाना। -राज्य संपत्ति विभाग के स्टाफ पूल के नीलाम किए गये 14 वाहन के बदले 14 नये वाहनों की खरीद।

31 अक्टूबर को आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ में प्रदेशभर के थानों और मुख्यालयों में आयोजित होगा कार्यक्रम

लखनऊ, देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश में एक बार फिर एकता, अखंडता और राष्ट्रीय समरसता का संदेश गूंजेगा। 31 अक्टूबर को यूपी पुलिस प्रदेश के सभी जिलों और पुलिस कमिश्नरेट मुख्यालयों पर “Run for Unity” कार्यक्रम का भव्य आयोजन करेगी। पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एलआर कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत की एकता और अखंडता के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी थानों, स्कूलों, कॉलेजों, एनसीसी, स्काउट्स और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता के साथ यह दौड़ आयोजित होगी, जिसमें तिरंगे झंडे और राष्ट्रीय नारों के साथ देशभक्ति का वातावरण बनेगा। उन्होंने बताया कि ‘रन फॉर यूनिटी’ सुबह 7 से 10 बजे के बीच आयोजित की जाएगी। प्रत्येक थाने या पुलिस मुख्यालय से 1 से 1.5 किलोमीटर की दूरी तक दौड़ का आयोजन होगा। मार्ग का चिन्हांकन, दिशा संकेतक, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में प्रशिक्षणरत महिला व पुरुष आरक्षी, विद्यालयों व महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं, एनसीसी कैडेट, स्काउट, पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, समाजसेवी और प्रमुख खेल हस्तियां भी भाग लेंगी। इस अवसर पर प्रतिभागियों के हाथों में तिरंगा लहराएगा, जो एकता और सौहार्द का प्रतीक बनेगा।

मिशन शक्ति 5.0: सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश भर में मिशन शक्ति 5.0 के तहत यूपी पुलिस ने चलाया विशेष अभियान

एंटी रोमिया स्क्वायड ने 1 लाख से अधिक मंदिर, बाजार, मॉल, पार्कों और भीड़ भाड़ वाले स्थानों की गहन जांच की 37 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा, सकुशल संपन्न हुआ नवरात्रि पर्व    लखनऊ, प्रदेश की बेटियों और महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने के साथ सुरक्षा का माहौल उपलब्ध कराने के लिए मिशन शक्ति 5.0 अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवरात्र के पहले दिन मिशन शक्ति 5.0 अभियान की शुरुआत की, जो अभी भी पूरे प्रदेश में चल रहा है। इसी के तहत यूपी पुलिस प्रशासन ने अभूतपूर्व अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था और जनसहभागिता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। एंटी रोमियो स्क्वायड ने करीब 10 लोग लोगों की जांच, ढाई हजार अभियोग किये गये पंजीकृत मिशन शक्ति अभियान की नोडल ऑफिसर एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एन्टी रोमियो स्क्वायड ने सार्वजनिक स्थलों, मंदिरों, बाजारों, मॉल, पार्क और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सतर्कता बढ़ाई। इस दौरान 1,08,292  मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों की गहन जांच की गई। अभियान में 9,77,269 व्यक्तियों की जांच की गई, जिनमें संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी गई। कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और महिलाओं के प्रति अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए कुल 2,542 अभियोग  पंजीकृत किए गए। वहीं, असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 3,972 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 3,13,924 लोगों को चेतावनी दी गई और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। प्रदेश भर में 53,237 निरोधात्मक कार्रवाइयां  की गयीं। ऐसे में एन्टी रोमियो स्क्वायड द्वारा यह अभियान न केवल नवरात्रि के दौरान सुरक्षा का प्रतीक बना, बल्कि समाज में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश देने में भी सफल रहा। 37 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा प्रदेश भर में नवरात्रि पर्व के अवसर पर 55,377 पंडालों की स्थापना की गई। सभी पंडालों का पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने निरीक्षण किया, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई कमी न रहे। इस दौरान 4,947 रामलीला व मेला स्थलों का भी भ्रमण किया गया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। योगी सरकार की सख्त निगरानी के चलते सभी धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुए। एन्टी रोमियो स्क्वाड, पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त मुस्तैदी ने सुनिश्चित किया कि महिलाओं और बालिकाओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। नवरात्रि के दौरान मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कुल 37,337 अधिकारी एवं कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। इनमें 411 राजपत्रित अधिकारी, 7,999 निरीक्षक/उपनिरीक्षक, 22,547 मुख्य आरक्षी /आरक्षी और 6,380 होमगार्ड/पीआरडी/ एसपीओ आदि शामिल थे, जिन्होंने निरंतर गश्त और निगरानी कर सुरक्षा का वातावरण बनाए रखा। इस सघन तैनाती से पूरे प्रदेश में नवरात्रि और रामलीला पर्व शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुए। श्रद्धालु परिवारों ने न केवल त्योहार का आनंद लिया, बल्कि महिलाओं ने भी निर्भीक होकर मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। पूरे प्रदेश में डेढ़ करोड़ से अधिक वितरित किये गये फोल्डर, पंफलेट और पेस्टिंग स्टीकर अभियान की नोडल ऑफिसर ने बताया कि नवरात्र में 39,911 मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर महिला चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें 20,54,308 लोगों ने प्रतिभाग किया। इसमें 13,53,903 महिला और 7,00,405 पुरुष शामिल हैं। वहीं महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन मुख्यालय द्वारा योगी सरकार की योजनाओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किये जा रहे सराहनीय कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 1,56,91,080 फोल्डर, पंफलेट और पेस्टिंग स्टीकर वितरित किये गये।

इस जिले में पुलिस महकमे में हड़कंप! 78 पुलिसकर्मियों की नई पोस्टिंग, 29 दरोगा भी शामिल

सुलतानपुर  उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल हुआ है। सुलतानपुर पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने विभाग में व्यापक स्तर पर स्थानांतरण किए हैं। इस फेरबदल में 29 दरोगा समेत 78 पुलिसकर्मियों को नई तैनाती मिली। एसपी ने ट्रांसफर के आदेश का तत्काल पालन कराने का निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस कर्मचारी नई तैनाती स्थल पर रिपोर्ट करने को कहा है। सुलतानपुर पुलिस लाइन से 29 उपनिरीक्षकों (दरोगा) को जिले के विभिन्न थानों में भेजा गया है। इनमें कोतवाली नगर, लम्भुआ थाना, अखंडनगर थाना, कादीपुर समेत कई थाने शामिल हैं। स्थानांतरित किए गए अधिकारियों में सुनील कुमार, मेवालाल भारती, नंदलाल, विनोद मिश्र, शिव बहादुर सिंह समेत कई वरिष्ठ उपनिरीक्षक और उपनिरीक्षक शामिल हैं। इसके साथ ही 27 दीवान (हेड कांस्टेबल) और 22 आरक्षियों (सिपाही) को भी विभिन्न थानों में नई तैनाती दी गई है। पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने ट्रांसफर कर मुख्य आरक्षी शाहिद खान को थाना लम्भुआ, रंजीत सिंह रावत को थाना सन्मुआ और शाहनवाज अहमद को थाना चौदा भेजा दिया है। इसके साथ ही लक्ष्मीराम और राजेंद्र प्रताप सिंह को शिवगढ़ थाने में तैनात किया गया है। वहीं पुलिस कोतवाली देहात में रुद्रमणि यादव और शिवशंकर, थाना कोठनगर में महेंद्र सिंह, फतेहपुर में रंजीत कुमार की तैनाती की गई है। बंधुआकला थाने में मो. फरहान खान, राघवेंद्र सिंह और हवलदार राम को भेजा गया है। सभी स्थानांतरित पुलिसकर्मियों को तत्काल नई तैनाती स्थल पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें अनुपालन आख्या पुलिस अधीक्षक के गोपनीय कार्यालय में जमा करनी होगी।  

यूपी पुलिस को नई गाइडलाइन, तलाशी से पहले अनिवार्य होगा गवाह का होना

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को और जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के नए DGP (पुलिस प्रमुख) राजीव कृष्ण ने बीते सोमवार को गिरफ्तारी और तलाशी से जुड़े नए नियम लागू किए हैं। यह नियम पूरे राज्य में सभी पुलिस कप्तानों को भेजे गए हैं और इनके सख्त पालन के निर्देश दिए गए हैं। अब CBI और ED की तरह काम करेगी यूपी पुलिस नए नियमों के मुताबिक, अब यूपी पुलिस भी CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों की तर्ज पर गिरफ्तारी और तलाशी का काम करेगी। इसका मतलब है कि अब पुलिस को हर गिरफ्तारी के बारे में पूरी रिपोर्ट बनानी होगी, जिसमें कई जरूरी बातें दर्ज करना अनिवार्य होगा। हर गिरफ्तारी की रिपोर्ट में ये बातें होंगी: – गिरफ्तारी का स्थान और समय – गिरफ्तारी का कारण – अभियुक्त (आरोपी) का बयान – बरामद सामान का पूरा विवरण – मेडिकल जांच की स्थिति – गिरफ्तारी के समय मौजूद दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर यह सभी बातें अब लिखित रूप में दर्ज की जाएंगी, जिससे केस की जांच में पारदर्शिता बनी रहे और अदालत में सबूतों की मजबूती हो। बरामद सामान का पूरा रिकॉर्ड जरूरी पुलिस को अब यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी से जो भी चीजें बरामद होती हैं, उनका पूरा ब्यौरा लिखित रूप में रिकॉर्ड किया जाए। इससे अदालत में सबूत पेश करने में आसानी होगी और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई तेज हो सकेगी। निर्दोष लोगों को नहीं होगी परेशान इस नई व्यवस्था से निर्दोष लोगों को फंसने से बचाया जा सकेगा। क्योंकि हर कदम पर रिकॉर्ड और गवाह होंगे, जिससे पुलिस की जवाबदेही भी तय होगी। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है तो उसके परिजनों को समय पर पूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि तनाव और अफवाहों से बचा जा सके। कितना होगा असर? यह आदेश सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को भेज दिया गया है और उन्हें कहा गया है कि इन नियमों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करें। अब देखने वाली बात यह होगी कि थानों और फील्ड में तैनात पुलिसकर्मी इन बदलावों को कितनी गंभीरता से अपनाते हैं।