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9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में महिला श्रम भागीदारी 13% से बढ़कर 36% पहुंची

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के पीछे महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में राज्य में महिला श्रम बल भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जिससे उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति मिल रही है। इसी अवधि में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2017 में करीब 13 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रही  जीएसडीपी  2026-27 में बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये की ओर अग्रसर है। महिला श्रम बल भागीदारी दर में हर 1 प्रतिशत की वृद्धि से सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 0.5 से 1 प्रतिशत तक अतिरिक्त उछाल आता है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में  अर्थशास्त्र का यह सिद्धांत व्यवहार में साबित होता दिख रहा है। यही नहीं, महिला कार्यबल बढ़ने से उत्पादन क्षमता, श्रम उत्पादकता और राज्य के टैक्स बेस तीनों में समानांतर विस्तार हुआ है। महिलाएं बनीं ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ महिलाओं की आय बढ़ने से घरेलू उपभोग में वृद्धि हुई है, जिससे एमएसएमई गतिविधियों और सेवा क्षेत्र को लगातार गति मिल रही है। ग्रामीण स्वयं सहायता समूह,  डेयरी और कृषि आधारित उद्योगों से लेकर शहरी सेवा क्षेत्र तक महिलाएं अब ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ की भूमिका निभा रही हैं। ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह आसान करेंगी महिलाएं नीतिगत स्तर पर महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए उत्तर प्रदेश में आर्थिक भागीदारी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो उत्तर प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रहेगी।

उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र सोमवार से

माननीय राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत 11 फरवरी (बुधवार) को वित्तमंत्री सुरेश खन्ना पेश करेंगे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट लखनऊ,  उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र 2026-27 9 फरवरी से प्रारंभ होगा। सत्र के प्रथम दिन सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा व विधान परिषद) के समक्ष माननीय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का अभिभाषण होगा। 10 फरवरी को सदन के वर्तमान व पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की जाएगी। सदन की कार्यवाही 20 फरवरी तक प्रस्तावित है। 11 फरवरी (बुधवार) को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। इसके पश्चात राज्यपाल के अभिभाषण (धन्यवाद प्रस्ताव) पर चर्चा होगी। 13 फरवरी तक सदन नियमित तौर पर चलेगा। 14 व 15 फरवरी को क्रमशः शनिवार व रविवार होने के कारण सदन की बैठक स्थगित रहेगी। 16 फरवरी से पुनः सदन की कार्यवाही प्रारंभ होगी। विधानसभा अध्य़क्ष सतीश महाना ने सभी सदस्यों से सदन के सफल संचालन का अनुरोध किया है। वहीं नेता सदन (मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ ने सभी सदस्यों से जनता के मुद्दों को सदन में रखने और स्वस्थ चर्चा कर प्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए सरकार का सहयोग करने का आग्रह किया है।

योगी सरकार की पहल से युवा होंगे ग्लोबल स्किल्स के लिए तैयार, अब इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन में लेंगे हिस्सा

राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता 2025-26 के 40 विजेताओं का सम्मान, युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान योगी सरकार की पहल से युवा होंगे ग्लोबल स्किल्स के लिए तैयार, अब इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन में लेंगे हिस्सा कौशल, प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, कौशल विकास मिशन के विशेष बूट कैंप से मिलेगी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी में मदद उत्तर प्रदेश बना देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य, कौशल विकास में रचा नया कीर्तिमान नॉर्थ रीजनल, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूपी के युवा बढ़ाएंगे प्रदेश का गौरव लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर, रोजगारोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) द्वारा इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन 2025-26 के अंतर्गत राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता के विजेताओं का भव्य सम्मान समारोह बुधवार को कौशल विकास मिशन मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर 20 विभिन्न स्किल ट्रेड्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 40 विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं का सम्मान प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम एवं मिशन निदेशक पुलकित खरे ने विजेताओं को सम्मानित किया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने कौशल, समर्पण और परिश्रम से प्रदेश का नाम रोशन किया। युवाओं का कौशल निखारने को प्रतिबद्ध योगी सरकार प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने विजेता प्रतिभागियों से संवाद कर उनके प्रशिक्षण अनुभव, प्रतियोगिता यात्रा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली तथा उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक, रोजगारोन्मुख एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित होती है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे विजेता इस अवसर पर मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता युवाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाने का सशक्त मंच है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि चयनित सभी विजेता प्रतिभागी लखनऊ में आयोजित विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे, जहां उन्हें विशेषज्ञों द्वारा नॉर्थ रीजनल स्किल कॉम्पीटिशन की तैयारी कराई जाएगी। अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह ने कहा कि कौशल विकास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है और मिशन गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रति दो वर्ष में होती है प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित होती है। वर्ष 2024 में जहां कुल 7,472 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया था, वहीं वर्ष 2026 के लिए यह संख्या बढ़कर 1,09,249 हो गई है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य बन गया है। वर्ष 2024 में प्रदेश ने 10 स्किल्स में भागीदारी की थी, जबकि इस वर्ष 20 स्किल्स में सहभागिता कर प्रदेश ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसके साथ ही, जहां पूर्व में प्रतियोगिता एक ही केंद्र पर आयोजित की जाती थी, वहीं इस वर्ष लखनऊ के 11 विभिन्न केंद्रों पर 1,270 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान मिशन की गतिविधियों को जन-जन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया सेल का शुभारंभ किया गया तथा गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण को और सुदृढ़ करने हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर आन्त्रोप्रेन्योरशिप एंड स्माल बिजनेस डेवलपमेंट (NIESBUD) के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ITOT) के निदेशक डी.के. सिंह, NIESBUD नोएडा की डायरेक्टर शिवानी डे, संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक संदीप कुमार, सहायक निदेशक डॉ. एम.के. सिंह एवं डॉ. पवित्रा टंडन, डीडीयू-जीकेवाई के सीओओ आशीष कुमार सहित मिशन के अधिकारी, कर्मचारी एवं विभिन्न जनपदों से आए अधिकारी उपस्थित रहे।

हर जिले की पहचान एक उत्पाद से जोड़कर संतुलित आर्थिक विकास को दी गति

निर्यात, रोजगार व आय वृद्धि के आंकड़ों ने ओडीओपी को साबित किया सफल मॉडल लखनऊ,  उत्तर प्रदेश का ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) मॉडल आज देश के विकास विमर्श का केंद्र बन चुका है। वर्ष 2018 की यह पहल अब सिर्फ केवल एक सरकारी योजना नहीं,  बल्कि जिला आधारित आर्थिक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन गई है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की इस विशिष्ट योजना ने प्रमाणित कर दिया कि यदि स्थानीय जरूरतों और पारंपरिक शक्तियों के अनुरूप नीति बनाई जाए, तो उसका असर धरातल पर स्पष्ट परिलक्षित होता है। ओडीओपी मॉडल की सफलता का प्रभाव प्रदेश के निर्यात आंकड़ों में भी स्पष्ट दिखता है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का निर्यात 88 हजार करोड़ रुपये था, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 58 हजार करोड़ थी। यह निर्यात वर्ष 2024 में बढ़कर 186 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 93 हजार करोड़ है। यह उल्लेखनीय वृद्धि ओडीओपी को मिले समर्थन का स्पष्ट उदाहरण है। अब उत्तर प्रदेश का ओडीओपी मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में देखा जा रहा है। जिला आधारित उत्पाद रणनीति ने निर्यात को जमीनी स्तर तक मजबूत किया और छोटे उत्पादक भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सके हैं। ओडीओपी योजना की मूल अवधारणा हर जिले की एक विशिष्ट पहचान तय करने की रही है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में स्थानीय पारंपरिक कला उद्योग या उत्पाद को चिन्हित कर उसे सरकारी संरक्षण में बाजार तक पहुंच और ब्रांडिंग का सहारा दिया गया। मुरादाबाद के पीतल, बनारस की बुनकरी, फिरोजाबाद के कांच, कन्नौज के इत्र और भदोही के कालीन जैसे उत्पादों को इसी सोच के माध्यम से नई पहचान हासिल हुई है। योगी सरकार के इस मॉडल ने असंतुलित क्षेत्रीय विकास की बड़ी समस्या का समाधान किया, जिसे वर्षों से नजरअंदाज किया जा रहा था। पहले औद्योगिक विकास कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रहता था, लेकिन ओडीओपी के बाद छोटे जिले व कस्बे भी आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बनने लगे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और पलायन पर भी प्रभावी नियंत्रण लगा। प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार ओडीओपी के चलते कारीगरों व छोटे उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ओडीओपी स्किल डेवलपमेंट व टूलकिट वितरण योजना के तहत बड़ी संख्या में कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक टूलकिट प्रशिक्षण और आसान वित्तीय सहायता ने पारंपरिक काम को आधुनिक बाजार से जोड़ा। प्रदेश में अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट्स का वितरण किया जा चुका है। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया और उनकी पहुंच केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही, वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच बना रहे हैं। ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के माध्यम से अब तक 6,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे सूक्ष्म,  लघु व मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों में उद्यमिता को नई गति मिली है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2025 में ओडीओपी को विशेष मंच दिया गया। इस आयोजन में ओडीओपी पवेलियन में 466 स्टॉल लगाए गए, जिनसे करीब 20.77 करोड़ रुपये की बिजनेस लीड/डील सामने आईं। इसी तरह प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान 6,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में ओडीओपी प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें जीआई टैग वाले प्रदेश के 44 ओडीओपी उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहा है यूपी दिवस-2026 का आयोजन

देश की सीमाओं के परे भी मनाया जा रहा है यूपी दिवस-2026, प्रवासी प्रदेशवासियों को मिला यूपी से जुड़ने का अवसर यूके, रूस, मंगोलिया, कंबोडिया और जापान समेत विभिन्न देशों में हुआ यूपी दिवस का आयोजन, ओडीओसी के उत्पाद रहे मुख्य आकर्षण लखनऊ,  उत्तर प्रदेश की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले तीन दिवसीय यूपी दिवस-2026 के भव्य समारोह की शुरुआत प्रदेश की राजधानी लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल में की गई। 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' की थीम पर आधारित इस उत्सव की शुरुआत देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुई। इस वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार यूपी दिवस-2026 का समारोह प्रदेश के सभी जनपदों के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनाया जा रहा है। इसके तहत यूके, रूस, मंगोलिया, कंबोडिया, सिंगापुर, जापान समेत विश्व के विभिन्न देशों में यूपी दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही, देश के अन्य प्रदेशों के लोक भवनों में भी यूपी दिवस के आयोजन के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, कला, शिल्प, व्यंजन और विकास यात्रा को प्रस्तुत किया गया। जो उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को देश की सीमाओं के परे भी पहुंचा रही है। रूस, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी समेत कई देशों में हुआ यूपी दिवस का आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के साथ विकास यात्रा से विश्व को परिचित करवाने के उद्देश्य से इस वर्ष यूपी दिवस-2026 का आयोजन देश और प्रदेश की सीमाओं से परे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनाया गया। इस क्रम में रूस की राजधानी मास्को, लंदन, ब्रिटेन, और ओसाका, जापान में भारतीय दूतावासों के माध्यम से यूपी दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके अलावा मंगोलिया, लिथुआनिया, सिंगापुर, म्यांमार, जर्मनी, श्रीलंका, डीआर कांगो समेत कई अन्य देशों में भी विशेष कार्यक्रम हुए। पर्यटन एवं कला-संस्कृति विभाग की ओर से इन देशों में रहकर यूपी का नाम रोशन करने वाले प्रवासी प्रदेशवासियों को आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। समारोहों में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं के साथ लोक कलाओं का प्रदर्शन हुआ। इस वर्ष यूपी दिवस का मुख्य आकर्षण मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ओडीओसी) और 'एक जनपद-एक उत्पाद' (ओडीओपी) के उत्पादों की प्रदर्शनी रही। विभिन्न देशों में आयोजित इन कार्यक्रमों से प्रवासी प्रदेशवासियों को अपनी जड़ों, परंपराओं और स्वाद से जुड़ने का सुनहरा अवसर मिला। नई दिल्ली, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी मनाया गया यूपी दिवस उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और सांस्कृतिक भव्यता का उत्सव यूपी दिवस-2026 के समारोह के रूप में देश के अन्य राज्यों में भी मनाया जा रहा है। इस क्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री और गणमान्य जनप्रतिनिधि अन्य प्रदेशों के लोक भवनों में जाकर यूपी दिवस के समारोह आयोजित कर रहे हैं। नई दिल्ली के दिल्ली हाट और एलजी कार्यालय में सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई, जहां यूपी के हस्तशिल्प, व्यंजन और लोक नृत्य मुख्य आकर्षण बने। वहीं, गोरखपुर के सांसद एवं लोकप्रिय भोजपुरी अभिनेता रवि किशन के प्रतिनिधित्व में मुंबई, महाराष्ट्र में यूपी दिवस का सांस्कृतिक कार्यक्रम मनाया गया। इसी तरह आंध्र प्रदेश, असम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गोवा, गुजरात, उत्तराखंड, तमिलनाडु, ओडिशा और पंजाब जैसे विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें यूपी की विकास गाथा और सांस्कृतिक विविधता को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में इस वर्ष यूपी दिवस का भव्य उत्सव प्रदेश की नई पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर रहा है।

‘कर्तव्य पथ’ पर विशेष अतिथि बनेंगी यूपी की 14 लखपति दीदी

महिला सशक्तिकरण को उड़ान सीएम योगी के विजन से आत्मनिर्भर बनीं यूपी की नारी शक्ति गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में उत्तर प्रदेश की शान बढ़ाएंगी 14 लखपति दीदी देशभर की लखपति दीदियों संग दिल्ली भ्रमण भी करेंगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आगे बढ़ीं प्रदेश की 14 लखपति दीदी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के ‘कर्तव्य पथ’ पर आयोजित समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगी। नारी शक्ति, आत्मनिर्भर भारत और समृद्ध उत्तर प्रदेश की जीवंत तस्वीर को प्रस्तुत करेंगी। यूपी से जाने वालीं 14 लखपति दीदी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। इन्हें अन्य राज्यों से आई लखपति दीदियों के साथ दिल्ली भ्रमण भी कराया जाएगा। 14 लखपति दीदी लखनऊ से दिल्ली के लिए रवाना हो गई हैं। 26 जनवरी को ‘कर्तव्य पथ’ पर इनकी उपस्थिति से उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ेगा। यह उपलब्धि सीएम योगी के उस विजन का परिणाम है, जिसमें महिलाओं की आर्थिक प्रगति को प्रदेश के समग्र विकास की धुरी माना गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लखपति दीदी अभियान के जरिए ग्रामीण महिलाओं का जीवन बेहतर हो रहा है। यूपी की ये 14 दीदी साबित कर रही हैं कि आत्मनिर्भर नारी ही समृद्ध प्रदेश और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला हैं। लखपति दीदियों ने इन क्षेत्रों में फहराया झंडा इन लखपति दीदियों ने ई-रिक्शा संचालन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, कैफे, मसाला निर्माण, उन्नत कृषि, ब्यूटी पार्लर, जन सुविधा केंद्र, गो-आधारित उत्पाद और प्रेरणा कैंटीन जैसे क्षेत्रों में न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार और आत्मविश्वास दिया। आज ये महिलाएं लखपति बनकर गांव-गांव में प्रेरणा का केंद्र बन रही हैं। कर्तव्य पथ तक पहुंचने वाली यूपी की 14 लखपति दीदी 1. मंशा देवी – पंचायत हरपुर, ब्लॉक ब्रह्मपुर, गोरखपुर : ई-रिक्शा उद्यम व ट्रेनर | आय: ₹18–20 हजार प्रतिमाह। 2. प्रवेश कुमारी – पंचायत बुखारा, ब्लॉक मऊरानीपुर, झांसी गोमाता कैटल फीड एंटरप्राइज | आय: लगभग ₹25 हजार प्रतिमाह। 3. रितु देवी – ग्राम फिरोजपुर नरोट्टम, ब्लॉक देवमल, बिजनौर विदुर कैफे संचालन | आय: 6–7 हजार प्रतिदिन। 4. सरिता देवी – ग्राम पंचायत मीरजापुर जवई, ब्लॉक सिराथू, कौशांबी ई-रिक्शा आधारित उद्यम | आय: लगभग 3 लाख वार्षिक। 5. ऋतु शर्मा – ग्राम लालपुर, ब्लॉक टापल, अलीगढ़ मसाला निर्माण व बिक्री | आय: ₹8–10 हजार प्रतिमाह (250+ महिलाओं को रोजगार से जोड़ा) 6. निर्मला देवी – ग्राम बरसंपुर, ब्लॉक करवी, चित्रकूट दुग्ध व्यवसाय | वार्षिक आय: 6.59 लाख 7. राजकुमारी देवी – ग्राम रखही, ब्लॉक भौरोहिया-कैंपियरगंज, गोरखपुर दुग्ध उत्पादन | आय: ₹1.67 लाख (8 माह में) 8. मंत्रवती शाक्य – ग्राम नगला भिखन, ब्लॉक जसवंतनगर, इटावा उन्नत कृषि | आय: लगभग ₹15 हजार प्रतिमाह। 9. विजेता गोयल – पंचायत कशांपुर, ब्लॉक बसरेहर, इटावा ब्यूटी पार्लर, CSC, गारमेंट | आय: ₹2.5 लाख वार्षिक 10. अनुपमा सिंह – पंचायत बनियाखेड़ा, संभल मोटे अनाज के उत्पाद, ब्यूटी पार्लर | आय: ₹1 लाख+ वार्षिक 11. गुड़िया देवी – ग्राम केवलपुर, ब्लॉक रोहनिया, रायबरेली दुग्ध व्यवसाय | आय: ₹3.42 लाख (2024-25) 12. आशा – पंचायत सकरापार, ब्लॉक देवरिया सदर, देवरिया प्रेरणा कैंटीन, बीमा सखी | आय: ₹1 लाख+ वार्षिक 13. सुमन देवी – पंचायत अब्दुलपुर मुन्ना, ब्लॉक हल्दौर, बिजनौर प्रेरणा कैफे | आय: ₹7–8 हजार प्रतिदिन 14. मोनिका – ग्राम खग्गूपुरा, ब्लॉक संभल, जनपद संभल सौंदर्य प्रसाधन निर्माण | आय: ₹18 हजार प्रतिमाह

यूपी का मॉडल समझने के लिए आधा दर्जन से अधिक दूसरे राज्यों के आबकारी आयुक्तों ने किया उत्तर प्रदेश का दौरा

यूपी की आबकारी नीति का अध्ययन करने के साथ डिस्टिलरी और मदिरा की दुकानों का किया निरीक्षण लखनऊ,  प्रदेश सरकार की दूरदर्शी और पारदर्शी आबकारी नीति प्रदेश के राजस्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आयी है। आबकारी राजस्व में लगातार हो रही रिकॉर्ड वृद्धि के चलते यूपी की आबकारी नीति की गूंज अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर सुनाई देने लगी है। यही वजह है कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश समेत आधा दर्जन से अधिक राज्यों के आबकारी आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदेश का दौरा कर यहां की आबकारी नीति का गहन अध्ययन किया। प्रदेश सरकार के प्रयासों से तैयार नीति न केवल राजस्व वृद्धि पर केंद्रित है, बल्कि इसमें पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार, अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण और उपभोक्ता हितों को भी समान रूप से महत्व दिया गया है। इसी का परिणाम है कि यूपी आज देश के अग्रणी आबकारी राजस्व वाले राज्यों में शामिल हो चुका है। देश के विभिन्न राज्य यूपी की आबकारी नीति को लागू करने पर कर रहे विचार आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रदेश का भ्रमण यूपी की आबकारी नीति को समझने और उसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने यूपी के आबकारी आयुक्त और विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में यह समझने पर जोर दिया गया कि किस तरह नीति निर्धारण, ई-गवर्नेंस, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ कर राजस्व में निरंतर वृद्धि संभव बनाई गई। कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के अधिकारियों ने यूपी की नीति को व्यावहारिक और राजस्व केंद्रित बताते हुए इसकी सराहना की। कई राज्यों ने यह भी स्वीकार किया कि यूपी की आबकारी नीति से प्रेरणा लेकर वे अपने यहां भी आबकारी ढांचे में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। डिस्टिलरी और शराब की दुकानों का किया निरीक्षण प्रदेश दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों के आबकारी अधिकारियों ने प्रदेश की आसवनियों (डिस्टिलरीज) और शराब की दुकानों का निरीक्षण भी किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य यह जानना था कि उत्पादन से लेकर बिक्री तक, किस तरह की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है और किस प्रकार अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यूपी में अपनाई गई डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली, ई-लॉटरी के माध्यम से दुकानों का आवंटन, बारकोडिंग और स्टॉक प्रबंधन प्रणाली की विशेष रूप से सराहना की। अधिकारियों ने माना कि इन उपायों से न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी का निरंतर संवाद बन रहा प्रदेश की प्रगति का माध्यम

उत्तर प्रदेश दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी में हुआ भावपूर्ण पत्रों का आदान-प्रदान    पत्रों के आदान-प्रदान में दिखा भरोसे व सम्मान को दर्शाने का भाव प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी का निरंतर संवाद बन रहा प्रदेश की प्रगति का माध्यम  डबल इंजन सरकार में सुशासन, विकास व आत्मनिर्भरता पर केंद्र व राज्य की है एकीकृत कार्यशैली विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में निर्णायक है उत्तर प्रदेश की भूमिका   लखनऊ  उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुए आत्मीय व भावपूर्ण पत्राचार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डबल इंजन की सरकार में केंद्र और राज्य एकीकृत कार्यशैली में काम कर रहे हैं। प्रदेश में डबल इंजन की सरकार सुशासन, विकास और आत्मनिर्भरता को अपनी प्रमुख वरीयता में रखते हुए उत्तर प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उल्लेखनीय है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई अवसरों पर विकसित भारत में विकसित उत्तर प्रदेश की भूमिका का उल्लेख कर चुके हैं। ऐसे में, इस लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की निर्णायक भूमिका को समन्वय के जरिए सुनिश्चित किया जा रहा है। इस दिशा में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा गया आत्मीय संदेश और उसके उत्तर में मुख्यमंत्री का विस्तृत व भावपूर्ण पत्र, दोनों ही इस बात के सशक्त प्रमाण हैं कि उत्तर प्रदेश में विकास की यात्रा साझा सोच, साझा लक्ष्य और साझा प्रयासों के साथ आगे बढ़ रही है। यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस भरोसे और तालमेल का प्रतिबिंब है, जिसके सहारे उत्तर प्रदेश देश का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है। विश्वास और सम्मान से भरा संवाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक भूमिका और विकास यात्रा की विस्तार से सराहना की। उन्होंने प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत स्तंभ बताया और कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, पर्यटन तथा औद्योगिक विकास में हो रही प्रगति को रेखांकित किया। उनके शब्दों में उत्तर प्रदेश केवल जनसंख्या का बड़ा राज्य नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति से देश के विकास को नई गति देने वाला राज्य है। साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है मुख्यमंत्री का उत्तर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को न केवल शनिवार को राष्ट्र प्रेरणा स्थल में आयोजित उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के शुभारंभ समारोह के कार्यक्रम में सुनाया, बल्कि संदेश के प्रति प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सुशासन, गरीब कल्याण, अंत्योदय और आत्मनिर्भरता के संकल्प को धरातल पर उतार रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने यह भी रेखांकित किया कि बीते वर्षों में प्रदेश की छवि में आया बदलाव केंद्र और राज्य सरकार के बीच विश्वासपूर्ण सहयोग का परिणाम है। डबल इंजन सरकार की कार्य संस्कृति पत्र में मुख्यमंत्री ने डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि और सौभाग्य योजना जैसी पहलों में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन देना है। यह दृष्टिकोण केंद्र और राज्य, दोनों की साझा प्राथमिकता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश और मुख्यमंत्री योगी के पत्र में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी विशेष उल्लेख है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज और बौद्ध स्थलों के विकास के साथ पर्यटन को नई दिशा मिली है। यह संतुलन दिखाता है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण के साथ आगे बढ़ रहा है। दोनों नेताओं के शब्दों में न केवल आपसी सम्मान झलकता है, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि नीतियों से लेकर क्रियान्वयन तक, तालमेल पूरी मजबूती के साथ कायम है। विकसित भारत में उत्तर प्रदेश की भूमिका प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी, दोनों ही इस बात पर एकमत हैं कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की भूमिका निर्णायक होगी। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति इस साझा दृष्टि का परिणाम है। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर हुआ यह संवाद केवल शुभकामनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि उस साझा संकल्प की घोषणा है, जिसमें केंद्र और राज्य एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। संदेश स्पष्ट है कि डबल इंजन सरकार लगातार समन्वय के साथ उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने के लिए न केवल कृत संकल्पित है बल्कि लगातार इस दिशा में वृहद स्तर पर कार्य कर रही है।

‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर उत्तर प्रदेश दिवस-2026 कार्यक्रम का शनिवार से आयोजन

राज्य की विकास यात्रा, संस्कृति और स्वाद का भव्य जनोत्सव होगा 'उत्तर प्रदेश दिवस-2026' ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर उत्तर प्रदेश दिवस-2026 कार्यक्रम का शनिवार से आयोजन फिजी, मॉरीशस, मालदीव, सिंगापुर और थाईलैंड में भी मनाया जाएगा यूपी दिवस, प्रदेशवासियों को किया जाएगा सम्मानित गृह मंत्री अमित शाह करेंगे कार्यक्रम का उद्घाटन, ओडीओसी की प्रदर्शनी होगी मुख्य आकर्षण लखनऊ उत्तर प्रदेश प्रतिवर्ष अपनी स्थापना के गौरवशाली दिन को ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के रूप में 24 जनवरी को मनाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, इस वर्ष ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 24 से 26 जनवरी तक प्रदेश भर में मनाया जाएगा तथा राज्य की प्रगति यात्रा को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर जनोत्सव बने, जिसमें प्रदेश के हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो तथा प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और जीवंत आत्मा के साथ-साथ विकास यात्रा की भी झलक मिले। ऐसे में, इस विशिष्ट आयोजन के माध्यम से प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी। गृह मंत्री अमित शाह करेंगे यूपी दिवस-2026 का उद्घाटन उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का मुख्य समारोह लखनऊ के नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल प्रांगण में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्र सरकार के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे। देश भर से आमंत्रित गणमान्य अतिथियों के साथ-साथ प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। लखनऊ में मुख्य समारोह के आयोजन के साथ-साथ प्रदेश के सभी जनपदों में स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, विकास प्रदर्शनियां और जनभागीदारी वाले आयोजन किए जाएंगे। वहीं, मुख्य समारोह का दूरदर्शन के माध्यम से पूरे प्रदेश में लाइव प्रसारण किया जाएगा, जिससे प्रदेश का जन-जन यूपी दिवस के इस आयोजन का सहभागी बन सकेगा। ओडीओसी योजना होगी यूपी दिवस का मुख्य आकर्षण इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस का मुख्य आकर्षण मुख्यमंत्री योगी द्वारा घोषित ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना होगी। ओडीओसी योजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद के एक पारंपरिक और प्रसिद्ध व्यंजन को चुना गया है। इस विशिष्ट आयोजन में प्रदेश के सभी ओडीओसी व्यंजन एक ही परिसर में उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश के भोजन की विविधता को प्रदर्शित करेगी, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करेगी। यह यूपी के स्वाद को यूपी की पहचान बनाने का माध्यम बनेगी। साथ ही यूपी दिवस के अवसर पर ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत शिल्पकारों के उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विक्रय किया जाएगा। इसके अलावा जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को भी ट्रेड शो की तर्ज पर प्रदर्शित किया जाएगा। यूपी गौरव 2025-26 सम्मान का किया जाएगा वितरण हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश दिवस के समारोह में ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान 2025-26’ का वितरण किया जाएगा। इस वर्ष शिक्षा, साहित्य, कृषि, महिला सशक्तिकरण तथा अंतरिक्ष विज्ञान में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली पांच विभूतियों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनपदों को भी पुरस्कृत किया जाएगा। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना की औपचारिक लॉन्चिंग तथा सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन योजना का शुभारंभ करेंगे। विविध प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ थीम पर आधारित विशेष प्रदर्शनियों और शिल्प मेलों का आयोजन किया जाएगा। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, कृषि, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की झलक देखने को मिलेगी। लोक, शास्त्रीय एवं समकालीन कला रूपों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। प्रदेश भर में आयोजित संस्कृति उत्सव 2025-26 के कार्यक्रमों को भी इससे जोड़ा जाएगा। प्रत्येक जनपद में आयोजित प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, मिशन शक्ति, नवाचार तथा ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवा, उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, कलाकार, खिलाड़ी तथा पंचायती राज, समाज कल्याण, ग्राम्य विकास, कृषि एवं श्रम क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी सम्मानित किया जाएगा। देश की सीमाओं के परे भी होगा यूपी दिवस का आयोजन डबल इंजन सरकार के विजन के अनुसार, इस वर्ष यूपी दिवस-2026 के आयोजन को राज्य और देश की सीमाओं से बाहर भी ले जाया जाएगा। इसके अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों के लोकभवनों में यूपी दिवस-2026 के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही फिजी, मॉरीशस, मालदीव, सिंगापुर और थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावासों में भी यूपी दिवस मनाया जाएगा। इन कार्यक्रमों के लिए एमएसएमई और पर्यटन विभाग द्वारा स्मृति-चिह्न उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से इन देशों और राज्यों में निवासरत उत्तर प्रदेश के नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा। इस क्रम में, प्रदेश सरकार के विभिन्न मंत्री, सांसद और विधायक राज्य के प्रतिनिधि के रूप में इन देशों और राज्यों में उत्तर प्रदेश की संस्कृति और प्रगति से लोगों को परिचित कराएंगे तथा उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने के लिए आमंत्रित करेंगे। जन-जन की भागीदारी को सुनिश्चित करेगा आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उत्तर प्रदेश दिवस-2026 प्रदेश की संस्कृति, स्वाद, शिल्प और विकास यात्रा को प्रदर्शित करने के साथ-साथ जन-जन की भागीदारी का सबसे बड़ा मंच बने। ऐसे में, यह उत्सव प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य का पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सहयोग से यूपी दिवस के आयोजन को गरिमापूर्ण, अनुशासित और भव्य बनाने की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर चुका है। यह आयोजन न केवल उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत का उत्सव होगा, बल्कि ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगा। पूरे प्रदेश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का यह जनोत्सव प्रदेश की एकता और प्रगति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति भी रहेगी। … Read more

समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम

कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटन में यूपी ने प्राप्त किया सत्तर फीसदी लक्ष्य, भूमिहीन किसान हुए लाभान्वित समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम यूपी में भूमिहीन और सीमांत किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल का आवंटन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले ग्रामीणों और भूमिहीन किसानों के आर्थिक स्वावलंबन के लिए बड़े पैमाने पर भूमि सुधार कार्यक्रम लागू किए हैं। जो उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके तहत प्रदेश का राजस्व विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक भूमिहीन, अल्पभूमि धारक किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटित करता है। इस क्रम में विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष लगभग सत्तर फीसदी लक्ष्य हासिल किया है। जिससे न केवल भूमिहीन किसानों को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्राप्त हुए हैं, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भूमिहीन किसानों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में चलाए जा रहे भू-सुधार कार्यक्रमों के तहत भूमिहीन या अल्पभूमि धारक ग्रामीणों को ग्राम सभा की ओर से भूमि आवंटित कराई जाती है। जिसके तहत वर्ष 2025-26 में राजस्व विभाग की ओर से 1076 आवंटियों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन किया जा चुका है। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 69.16 प्रतिशत है। राजस्व विभाग के इस कार्य से प्रदेश के भूमिहीन और सीमांत किसानों को खेती के लिए उपजाऊ भूमि उपलब्ध हुई है। इससे न केवल उनकी आजीविका में स्थिरता आएगी, बल्कि राज्य के कुल कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि होगी। राजस्व विभाग ने 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए राजस्व विभाग गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को आवास के लिए भी जमीन उपलब्ध करवाता है। इस क्रम में विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए गए हैं। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 70.90 प्रतिशत है। आवास स्थल प्राप्त करने से इन परिवारों को न सिर्फ सिर पर छत मिली, बल्कि इसका सीधा प्रभाव उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सुधार के रूप में देखा गया। प्रदेश सरकार के इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को वरीयता प्रदान की जाती है। राजस्व विभाग के भूमि सुधार कार्यक्रमों के तहत कृषि भूमि और आवास स्थल उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की समावेशी विकास नीति का अहम हिस्सा है। इससे न केवल प्रदेश में भूमि का न्यायोचित वितरण सुनिश्चित होता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक न्याय एवं आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।