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वीडी सतीशन बने केरल के नए मुख्यमंत्री, शपथग्रहण समारोह में नई सरकार की शुरुआत

तिरुअनंतपुरम   केरलम में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया. वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने शपथ दिलवाई. वीडी सतीशन केरलम के मुख्यमंत्री बने। IUML से पीके कुन्हालीकुट्टी नेमंत्री पद की शपथ ली. रमेश चेन्निथला ने मंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे. तिरुअनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। PM मोदी ने वीडी सतीशन को केरलम के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी।  पी.के. कुन्हालीकुट्टी, सनी जोसेफ, के. मुरलीधरन और मॉन्स जोसेफ ने वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली केरलम सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और लोकसभा नेता राहुल गांधी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला को केरलम सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी। मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मंच पर मौजूद शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस नेता केरल के तिरुवनंतपुरम में मंच पर मौजूद रहे। कौन-कौन से विधायक बने मंत्री? कांग्रेस के रमेश चेन्निथला, सन्नी जोसेफ, के. मुरलीधरन, ए.पी. अनिल कुमार, पी.सी. विष्णुनाथ, टी. सिद्दीकी, बिंदु कृष्णा, के.ए. तुलसी, रोजी एम. जॉन, एम. लिजू और ओ.जे. जनीश। आईयूएमएल के पी.के. कुन्हालीकुट्टी, एन. शमसुद्दीन, के.एम. शाजी, पी.के. बशीर और वी.ई. अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली। अन्य गठबंधन सहयोगियों में से केरल कांग्रेस (जोसेफ) के मॉन्स जोसेफ, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के शिबू बेबी जॉन, केरल कांग्रेस (जैकब) के अनूप जैकब और कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी के सी.पी. जॉन भी मंत्री बने हैं। यूडीएफ को मिला स्पष्ट जनादेश कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने केरल में 2026 का विधानसभा चुनाव स्पष्ट जनादेश के साथ जीता। दस साल तक विपक्ष में रहने के बाद UDF को 46.55% वोट मिले। इससे पहले 2001 में 49.05% वोट मिले थे। यह उसके 2021 के वोटों के हिस्से के मुकाबले 7.67 प्रतिशत अंकों की बढ़त है। वोटों में इस उछाल का नतीजा यह हुआ कि उसे 62 सीटें ज्यादा मिलीं, जिससे 2026 में UDF की सीटों की संख्या बढ़कर 102 हो गई। यूडीएफ को मिला स्पष्ट जनादेश कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने केरल में 2026 का विधानसभा चुनाव स्पष्ट जनादेश के साथ जीता। दस साल तक विपक्ष में रहने के बाद UDF को 46.55% वोट मिले। इससे पहले 2001 में 49.05% वोट मिले थे। यह उसके 2021 के वोटों के हिस्से के मुकाबले 7.67 प्रतिशत अंकों की बढ़त है। वोटों में इस उछाल का नतीजा यह हुआ कि उसे 62 सीटें ज्यादा मिलीं, जिससे 2026 में UDF की सीटों की संख्या बढ़कर 102 हो गई।    

आखिरकार हुआ ऐलान: वीडी सतीशन के हाथों में केरल की कमान

तिरुवनन्तपुरम केरलम में 10 साल के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस ने आखिरकार मुख्यमंत्री के नाम पर अपनी फाइनल मुहर लगा दी है. वीडी सतीशन नए मुख्यमंत्री होंगे, जिनके नाम का ऐलान गुरुवार को दिल्ली में केरलम की प्रभारी दीपा दास मुंसी ने किया. चार मई को आए चुनाव नतीजे के बाद से मुख्यमंत्री की रेस में केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के नाम चल रहे थे, लेकिन सियासी बाजी सतीशन के हाथ लगी।  केरल के सीएम को लेकर दस तक शह-मात का खेल चलता रहा, जो किसी  किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा. एक तरफ दिल्ली दरबार में राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल हैं, तो दूसरी तरफ केरल विधानसभा में अपनी धारदार बहस से सरकार की नाक में दम करने वाले वीडी सतीशन थ।  सतीशन ने जिस तरह केरल में अपनी पकड़ मजबूत की है, उसने यह साफ कर दिया है कि राज्य की जमीनी सियासत में फिलहाल उनका पलड़ा भारी है. केरलम जीत के हीरो भी सतीशन को माना जाता है. जमीनी पकड़ ही वीडी सतीशन की कांग्रेस के संकटमोचक और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले वेणुगोपाल पर भारी पड़ी।  दिल्ली की 'पकड़' पर भारी पड़ी जमीनी 'हकीकत' केरलम के मुख्यमंत्री के चुनाव करने में कांग्रेस ने ऐसे ही दस दिन नहीं लगाया बल्कि काफी मंथन और मशक्कत के बाद वीडी सतीशन के नाम पर अपनी फाइनल मुहर लगी है. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत UDF की करारी हार के बाद केरलम के कांग्रेस में एक बड़े बदलाव की मांग उठी थी. उस वक्त तक केरलम में केसी वेणुगोपाल का दबदबा निर्विवाद माना जाता था।  केसी वेणुगोपाल को हाईकमान का 'आंख और कान' कहा जाता है, दिल्ली की राजनीति में उनकी पकड़ा है, लेकिन हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि अब पुराने चेहरों और 'ग्रुप पॉलिटिक्स' से काम नहीं चलेगा.  यहीं से वीडी सतीशन का उदय हुआ. सतीशन ने पार्टी के भीतर उस 'ग्रुपिज्म' (A और I ग्रुप) को चुनौती दी, जिसे वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे नेता नियंत्रित करते थे।  केरल कांग्रेस में कोई भी बड़ा फैसला वीडी सतीशन और प्रदेश अध्यक्ष के.सुधाकरन की मर्जी के बिना नहीं होता.  वेणुगोपाल अभी भी दिल्ली में शक्तिशाली हैं और टिकट बंटवारे में उनकी भूमिका अहम रहती है, लेकिन केरल के 'कैप्टन' अब सतीशन ही हैं।  हालांकि वेणुगोपाल राहुल गांधी के करीब हैं, लेकिन राहुल गांधी खुद राज्यों में मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व चाहते थे।, सतीशन की साफ-सुथरी छवि और पांच बार विधायक रहने के अनुभव को राहुल ने वेणुगोपाल की सिफारिशों के ऊपर तरजीह दी।  कैसे सतीशन केरल की रेस में सब पर भारी पड़े? सतीशन ने साबित कर दिया है कि दिल्ली की करीबी आपको पद दिला सकती है, लेकिन जनता और कार्यकर्ताओं का विश्वास आपको 'नेता' बनाता है। केरल में वेणुगोपाल की 'रिमोट कंट्रोल' वाली राजनीति पर सतीशन की 'डायरेक्ट एक्शन' वाली सियासत फिलहाल भारी पड़ती दिख रही है। सतीशन के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह गई कि उन्हें युवा विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का भरपूर समर्थन मिला, जो बदलाव चाहते थे. केरलम में कांग्रेस को सत्ता में वापसी कराने में वीडी सतीशन का अहम रोल था. वेणुगोपाल का नाम सीएम के लिए जब उछला तो केरलम के अलग-अलग जिलों से सतीशन के पक्ष में आवाज उठने लगी. कांग्रेस हाईकमान ने जमीनी हकीकत को समझते हुए वेणुगोपाल के दिल्ली तो वीडी सतीशन को सूबे की सियासत में रखने का फैसला किया।  वेणुगोपाल को सीएम बनाने का फैसला करने पर दो सीटों पर उपचुनाव होता. केसी वेणुगोपाल लोकसभा सांसद हैं, जिनको अपनी सीट से इस्तीफा देना पड़ता. इसके बाद उन्हें विधानसभा सदस्यता के लिए किसी मौजूदा विधायक की सीट खाली करानी पड़ती. इस तरह एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने पड़ते. सतीशन को लिए ऐसा कुछ नहीं करना है, जिसके चलते ही हाईकमान की पहली पसंद बने।  केरल की सामाजिक इंजीनियरिंग में सतीशन फिट वीडी सतीशन  और केसी वेणुगोपाल दोनों ही 'नायर' समुदाय से आते हैं, जो केरल की राजनीति में एक प्रभावशाली जाति मानी जाती है. पारंपरिक रूप से नायर वोट कांग्रेस के आधार रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी की पैठ और एलडीएफ (LDF) की नीतियों के कारण इसमें बिखराव देखा गया था।  सतीशन पिछले पांच बार से नायर बहुल सीट से चुनाव जीतकर आ रहे हैं, जिसके चलते उनकी सियासी पकड़ कांग्रेस के दूसरे नेताओं से ज्यादा नायर समाज पर मानी जाती है. सतीशन को सीएम बनाकर कांग्रेस इस बड़े वोट बैंक को फिर से अपने पाले में पूरी तरह एकजुट कर सकती है. ऐसे में कांग्रेस के भीतर अन्य नायर नेताओं  रमेश चेन्निथला जैसे) के साथ सत्ता के संतुलन को भी बनाए रखना आसान होगा।  सतीशन को मुस्लिम लीग का खुला समर्थन केरलम की सियासत में सत्ता की चाबी अक्सर ईसाई और मुस्लिम समुदायों के हाथ में होती है. सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत धर्मनिरपेक्ष छवि है. उन्होंने ईसाई समुदायों के विभिन्न संप्रदायों के साथ गहरे संबंध विकसित किए हैं. चर्च के कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी और बाइबिल के प्रति उनके ज्ञान ने उन्हें अल्पसंख्यकों के बीच एक 'भरोसेमंद हिंदू नेता' के रूप में स्थापित किया है।  कांग्रेस की सबसे मजबूत सहयोगी  इंडिया युनियन मुस्लिम लीग (IUML) के साथ सतीशन के मधुर संबंध हैं. मुस्लिम लीग शुरू से ही वीडी सतीशन को सीएम बनाने के पैरोकारी करती रही है. इसकी एक वजह यह भी है कि मुस्लिम लीग नहीं चाहती थी कि कोई दिल्ली से आकर सीएम बने बल्कि सतीशन को सीएम बनाने के मजबूती से बात रख रही थी।  वीडी सतीशन ने केरलम का चुनाव सिर्फ कांग्रेस के नाम पर नहीं बल्कि यूडीएफ के नाम पर लड़ा था. ऐसे में कांग्रेस ने कोई नया राजनीतिक प्रयोग करने के बजाय वीडी सतीशन के नाम पर मोहर लगाने का काम किया. इस तरह एक तीर से कांग्रेस ने उन तमाम समीकरण को साधने की कवायद की है, जो उसका अपना सियासी आधार है. मुस्लिम लीग यूडीएफ गठबंधन को स्थिरता प्रदान करते हैं,जिससे मुस्लिम मतदाताओं में यह संदेश जाता है कि कांग्रेस एक ऐसे नेता को आगे बढ़ा रही है जो सबको साथ लेकर चल सकता है।  'नेहरूवादी वामपंथ' … Read more