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गोवा जाना हुआ आसान: 13 घंटे में पहुंचेगी वंदे भारत, जानें संभावित रूट-टाइमिंग

गोवा बेंगलुरु और गोवा के बीच जल्द शुरू होगी नई वंदे भारत एक्सप्रेस। यशवंतपुर से मडगांव तक का सफर मात्र 13 घंटे में होगा पूरा। जानें नई ट्रेन का संभावित रूट, टाइमिंग और रेलवे बोर्ड के प्रस्ताव की पूरी डिटेल। बेंगलुरु और गोवा के बीच रेल यात्रा जल्द ही और भी सुविधाजनक होने वाली है। मिली जानकारी के अनुसार, इन दोनों लोकप्रिय डेस्टिनेशन के बीच एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस (सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन) शुरू होने वाली है। यह नई ट्रेन बेंगलुरु से गोवा तक के सफर को लगभग 13 घंटे में पूरा करेगी। दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) ने इस संबंध में रेलवे बोर्ड को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। बोर्ड से प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही नई वंदे भारत के आधिकारिक शेड्यूल का ऐलान कर दिया जाएगा। संभावित रूट और टाइमिंग दक्षिण पश्चिम रेलवे के संभावित टाइमटेबल के अनुसार, इस ट्रेन का रूट मंगलुरु रेलवे क्षेत्र से होकर गुजरेगा। बेंगलुरु से गोवा: यह ट्रेन बेंगलुरु के यशवंतपुर स्टेशन से सुबह 6:05 बजे रवाना होगी और शाम 7:15 बजे गोवा के मडगांव पहुंचेगी। वापसी का सफर (गोवा से बेंगलुरु): वापसी में यह ट्रेन मडगांव से सुबह 5:30 बजे चलेगी और शाम 6:40 बजे यशवंतपुर पहुंचेगी। रूट: प्रस्ताव के मुताबिक, यह ट्रेन मंगलुरु जंक्शन और मंगलुरु सेंट्रल स्टेशनों को छोड़ते हुए पडिल बाईपास के रास्ते आगे बढ़ेगी। रफ्तार बढ़ाने का प्रस्ताव यात्रा के समय को कम करने के लिए रेलवे विभाग ने कुछ सेक्शन पर ट्रेन की गति बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया है। चिक्का बाणावारा से हासन: इस सेक्शन पर ट्रेन की गति 110 किमी/घंटा से बढ़ाकर 130 किमी/घंटा करने का प्रस्ताव है। सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड घाट सेक्शन: इस पहाड़ी क्षेत्र में ट्रेन की गति 30 किमी/घंटा से बढ़ाकर 40 किमी/घंटा करने का सुझाव दिया गया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी का इंतजार रिपोर्ट के मुताबि, एक वरिष्ठ SWR अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में एक बैठक के दौरान इस वंदे भारत सेवा की योजना की घोषणा की थी। घोषणा के बाद, रेल मंत्रालय ने एक औपचारिक प्रस्ताव मांगा था, जिसे लगभग 20 दिन पहले रेलवे बोर्ड को सौंप दिया गया है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस प्रस्ताव पर फिलहाल चर्चा चल रही है। इस रूट पर सेवा संचालित करने के लिए दो 'ट्रेनसेट' (रैक) की आवश्यकता होगी और दोनों रैक उपलब्ध होने पर ही इसे लॉन्च किया जा सकेगा। लॉन्च से पहले होंगे ट्रायल रन अंतिम टाइमटेबल तय करने से पहले रेलवे द्वारा इस रूट पर ट्रायल रन आयोजित किए जाएंगे। SWR के अनुसार, इन ट्रायल्स में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) सिस्टम से लैस दो वंदे भारत रैक का उपयोग किया जाएगा। ट्रायल शुरू होने से पहले, हाल ही में विद्युतीकृत किए गए हासन-ठोकुर (मंगलुरु) सेक्शन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट (OHE) सिस्टम का प्रमाणित होना और चालू होना आवश्यक है।  

रेलवे की बंपर कमाई: वंदे भारत स्लीपर के पहले सफर में ही हाउसफुल, टिकट 24 घंटे में बिके

नई दिल्ली असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन रेलगाड़ी (रेलगाड़ी संख्या 27576) की पहली व्यावसायिक यात्रा को यात्रियों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। इस ट्रेन के सभी श्रेणियों की टिकट बुकिंग शुरू होने के बाद 24 घंटे से कम समय में ही बिक गई। रेलवे ने मंगलवार को बताया कि 22 जनवरी को कामख्या से चलने वाली वंदे भारत शयनयान रेलगाड़ी में यात्रा के लिए पीआरएस और अन्य साइटों के माध्यम से टिकट बुकिंग शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर सभी सीटें बुक हो गईं। सीटों की इतनी जल्दी बुकिंग होना यात्रियों की उस उत्सुकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। गौरतलब है कि अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित देश की पहली वंदे भारत शयनयान को 17 जनवरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। रेलवे के अनुसार, यह रेलगाड़ी 22 जनवरी से कामाख्या से और 23 जनवरी से हावड़ा से अपनी पहली व्यावसायिक यात्रा शुरू करेगी। एजेंसी वार्ता की रिपोर्ट के अनुसार, इस नई रेल सेवा के लिए टिकट बुकिंग 19 जनवरी को सुबह 8:00 बजे शुरू हुई और 24 घंटे से भी कम समय में सभी श्रेणियों के टिकट पूरी तरह बिक गए। कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीवर एक्सप्रेस से पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के बीच यातायात में काफी सुधार होने की उम्मीद है। यह ट्रेन आधुनिक सुविधाएं, बेहतर यात्रा समय और विश्व स्तरीय रात्रिकालीन यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। टिकट के लिए कड़े नियम वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत 2 ट्रेनों के यात्री यदि निर्धारित प्रस्थान समय से आठ घंटे से पहले, अपने ‘कंफर्म’ टिकट रद्द करते हैं तो एक भी पैसा वापस नहीं मिलेगा। रेल मंत्रालय द्वारा 16 जनवरी को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, इन ट्रेनों के टिकट रद्द करने का शुल्क किराये का 25 प्रतिशत होगा, बशर्ते कि ‘कंफर्म’ टिकट 72 घंटे से पहले रद्द किए जाएं। मंत्रालय ने रेल यात्री (टिकट रद्द करना और किराया वापसी) नियम, 2015 में संशोधन किया है और वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के साथ-साथ अमृत भारत 2 ट्रेनों के लिए सख्त नियमों को अधिसूचित किया है। अन्य ट्रेनों के मामले में, यदि ‘कंफर्म’ टिकट निर्धारित प्रस्थान समय से चार घंटे से कम समय पहले रद्द किए जाते हैं, तो धनवापसी के लिए पात्र नहीं होंगे।

टिकट रद्द करने से पहले जरूरी जानकारी: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में रिफंड के नियम

नई दिल्ली हाल ही में पीएम मोदी ने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है. पश्चिम बंगाल के हावड़ा से असम के गुवाहाटी के बीच चलने वाली यह ट्रेन 14 घंटे में सफर तय करेगी. वहीं वंदे भारत ट्रेन के टिकट और रियायतों से जुड़े नियम दूसरी ट्रेनों से अलग है. दरअसल भारतीय रेलवे ने नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इन प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को अब टिकट कैंसिल करने पर पहले की तुलना में ज्यादा चार्ज देना होगा. रेलवे के नए नियमों के अनुसार तय समय सीमा के अंदर टिकट कैंसिल नहीं करने पर यात्रियों को पूरा रिफंड नहीं मिलेगा और कुछ मामलों में तो रिफंड बिल्कुल भी नहीं होगा.  अब टिकट कैंसिल करने पर कितना कटेगा पैसा? रेलवे की ओर से जारी नई गाइडलाइन के अनुसार वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की कंफर्म टिकट कैंसिल करने पर अलग अलग समय सीमा में अलग चार्ज तय किया गया है. दरअसल अब अगर कोई यात्री टिकट खरीदने के बाद उसे कभी भी कैंसिल करता है तो कम से कम 25 प्रतिशत  राशि काटी जाएगी. वहीं अगर टिकट ट्रेन के निर्धारित डिपार्चर टाइम से 72 घंटे से लेकर 8 घंटे पहले तक कैंसिल किया जाता है तो किराए का 50 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाएगा. वहीं सबसे सख्त नियम यह है कि अगर टिकट ट्रेन के रवाना होने से 8 घंटे से कम समय पहले कैंसिल किया गया तो यात्रियों को किसी तरह का कोई रिफंड नहीं मिलेगा.  क्यों बदले गए नियम? रेलवे अधिकारियों के अनुसार ये नए नियम इसलिए लागू किए गए हैं क्योंकि अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए रिजर्वेशन चार्ट ट्रेन के चलने से 8 घंटे पहले तैयार किया जाएगा. पहले यह प्रक्रिया 4 घंटे पहले होती थी. इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए कैंसिलेशन पॉलिसी  को भी सख्त किया गया है.  बाकी ट्रेनों से कैसे अलग है यह नियम? वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के कैंसिलेशन नियम अन्य ट्रेनों और मौजूदा वंदे भारत चेयर कार ट्रेनों से काफी अलग है. आम ट्रेनों में तय समय से पहले टिकट कैंसिल करने पर एक फ्लैट चार्ज लिया जाता है. जैसे फर्स्ट एसी में 240 रुपये, सेकंड एसी में 200, थर्ड एसी में 180, स्लीपर में 120 रुपये और सेकंड क्लास में 60 रुपये लिए जाते हैं.  लेकिन वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में फ्लैट चार्ज की जगह प्रतिशत के हिसाब से कटौती की जाएगी, जिससे यात्रियों पर ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ सकता है.  नहीं मिलेगी RAC की सुविधा  रेलवे बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में केवल कन्फर्म टिकट ही जारी किए जाएंगे. यानी इन ट्रेनों में RAC रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं होगी. यही वजह है कि टिकट कैंसिलेशन के नियमों को और सख्त बनाया गया है. इसके अलावा नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में सिर्फ कुछ चुनिंदा कोटे ही लागू होंगे. इनमें महिलाओं का कोटा, दिव्यांग यात्रियों का कोटा, वरिष्ठ नागरिकों का कोटा और ड्यूटी पास पर यात्रा करने वालों का कोटा शामिल है. इसके अलावा किसी और तरह का आरक्षण लागू नहीं होगा. साथ ही इन ट्रेनों के लिए न्यूनतम चार्जेबल दूरी 400 किलोमीटर तय की गई है. About the author कविता गाडरी कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है.  पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए.  इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

रेलवे का ग्रीन कदम: फल-सब्जियों के छिलकों से बनी थाली में मिलेगा खाना, मार्च से लागू बदलाव

इंदौर रेल यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सुविधा देने की दिशा में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आइआरसीटीसी) ने एक अहम पहल करने का निर्णय लिया है। मार्च से वंदे भारत एक्सप्रेस सहित कुछ प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को भोजन पारंपरिक प्लास्टिक की थालियों की बजाए बायोडिग्रेडेबल थालियों में परोसा जाएगा। थाली फल-सब्जियों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों से तैयार की जाती है। पहले चरण की सफलता के बाद इसे अन्य प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। आइआरसीटीसी पश्चिम क्षेत्र के जनसंपर्क अधिकारी ए.के. सिंह के अनुसार यह व्यवस्था उन ट्रेनों में भी लागू होगी, जो इंदौर से चलती हैं। रेलवे और आइआरसीटीसी लंबे समय से रेल परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह कदम उसी अभियान को और मजबूती देगा।   रेलवे में हर दिन हजारों यात्रियों को भोजन परोसा जाता है। इससे हर महीने बड़ी मात्रा में डिस्पोजेबल प्लास्टिक थालियों का कचरा निकलता है। इसके निपटान में समय, पैसा और संसाधन खर्च होते हैं। बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे न केवल कचरे का बोझ घटेगा, बल्कि कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। तीन से छह महीने में मिट्टी में मिल जाती है थाली बायोडिग्रेडेबल थाली की खास बात यह है कि उपयोग के बाद यह तीन से छह महीने में गल-सड़कर मिट्टी में मिल जाती है। इसके विपरीत प्लास्टिक की थाली को खत्म होने में कई वर्षों लग जाते हैं। प्लास्टिक टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बनाता है, जो मिट्टी, पानी और भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। बायोडिग्रेडेबल थाली से न तो माइक्रोप्लास्टिक निकलता है और न ही जहरीले रसायन। प्लास्टिक की थालियों में गर्म भोजन परोसने से हानिकारक रसायन निकलने का खतरा रहता है। बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यात्रियों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर भोजन मिलेगा। पहले से प्लास्टिक कप-थैलियों पर रोक पहले रेलवे ने प्लास्टिक कप और थैलियों पर रोक लगाकर कागज के विकल्प अपनाए थे। अब बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह प्रयास और मजबूत होगा। आईआरसीटीसी ने जन आहार और फूड प्लाजा संचालकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का ही इस्तेमाल करें। टेंडर प्रक्रिया जारीआइआरसीटीसी अधिकारियों के मुताबिक इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही टेंडर पूरे होने के बाद मार्च से चुनिंदा ट्रेनों में इसकी शुरुआत होगी। फिर इसे सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में लागू किया जाएगा। एक ओर प्लास्टिक कचरे की समस्या खत्म होगी, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

PM मोदी का 2 दिन का बंगाल दौरा: देश की नई Sleeper Vande Bharat को 17 जनवरी को मिलेगी हरी झंडी

 मालदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 और 18 जनवरी को पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री राज्य को रेलवे से जुड़ी कई अहम प्रोजेक्ट और नई ट्रेनों की सौगात देंगे. 17 जनवरी: मालदा से स्लीपर वंदे भारत को हरी झंडी दौरे के पहले दिन, 17 जनवरी को प्रधानमंत्री मालदा से देश की नई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे. इस मौके पर दो अहम ट्रेन सेवाओं की शुरुआत होगी. एक ट्रेन गुवाहाटी के लिए रवाना होगी. दूसरी स्लीपर वंदे भारत ट्रेन हावड़ा के लिए चलाई जाएगी. सूत्रों के अनुसार, यह देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी, जिसे असम के गुवाहाटी और पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बीच संचालित किया जाएगा. इससे पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के बीच रेल संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है. 18 जनवरी: हावड़ा में बड़ा कार्यक्रम प्रधानमंत्री का दूसरा दिन, 18 जनवरी को हावड़ा में प्रस्तावित कार्यक्रम को समर्पित रहेगा. इस कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री रेलवे से जुड़ी कई नई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान अमृत भारत ट्रेन और इंटरसिटी ट्रेनों की नई खेप को भी जनता को समर्पित किया जाएगा. इन नई सेवाओं से राज्य के भीतर और पड़ोसी क्षेत्रों के लिए रेल यात्रा अधिक सुविधाजनक, तेज और आधुनिक बनने की उम्मीद है. पूर्वी भारत को रेल कनेक्टिविटी का बड़ा लाभ प्रधानमंत्री के इस दौरे और घोषणाओं को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है. खास तौर पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के संचालन से लंबी दूरी की यात्रा में समय की बचत और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने की संभावना है. जानें इसका किराया कितना होगा इसका किराया किलोमीटर के हिसाब से तय होगा. फर्स्ट AC में 3 रुपये 80 पैसे प्रतिकिलोमीटर के हिसाब से किराया देना होगा. 1.AC: 3.80 p/km 2. AC: 3.10 p/km 3AC: 2.40 p/km बता दें कि स्वदेशी तकनीक से बनी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का भारतीय रेलवे ने हाई स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया था. यह ट्रायल कोटा–नागदा सेक्शन पर किया गया, जहां ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की.  16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी की यात्रा के लिए तैयार की गई है.बता दें कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस हाई-स्पीड ट्रायल का वीडियो भी शेयर किया था. इस वीडियो में दिखाया गया था कि तेज रफ्तार के बावजूद पानी से भरे गिलास हिले नहीं और पानी नहीं गिरा. इससे ट्रेन की बेहतरीन स्थिरता, आधुनिक सस्पेंशन और उन्नत तकनीक का पता चलता है. किस रूट पर चलेगी पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन? भारतीय रेलवे की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पूर्वोत्तर और पूर्व भारत को जोड़ने का काम करेगी. यह ट्रेन गुवाहाटी से कोलकाता के हावड़ा स्टेशन तक चलेगी. इस ऐतिहासिक ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएंगे. रेलवे सूत्रों के मुताबिक 17 या 18 जनवरी 2026 को इसकी शुरुआत हो सकती है.  अभी तक वंदे भारत ट्रेनों में सिर्फ चेयर कार की सुविधा थी, जो कम दूरी के लिए बेहतर मानी जाती है. लेकिन स्लीपर वर्जन के आने से लंबी दूरी के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. इस ट्रेन में आरामदायक बेड, बेहतर सस्पेंशन और शांत केबिन होंगे. जिससे यात्रियों के लिए रात का सफर और भी अच्छा हो जाएगा.  कितना होगा किराया? अब बहुत से यात्रियों के मन में यह सवाल भी आ रहा है वंदे भारत  स्लीपर में इतनी सुविधाओं के लिए कितना किराया चुकाना होगा. तो आपको बता दें वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया गुवाहाटी से हावड़ा रूट पर 3AC का किराया 2300 रुपये रखा गया है. जिसमें यात्रियों को खाना भी दिया जाएगा. 2AC में सफर करने के लिए 3000 रुपये खर्च करने होंगे. वहीं 1AC का किराया 3600 रुपये तय किया गया है.  क्या मिलेंगी सुविधाएं? वंदे भारत स्लीपर में सुविधाओं की बात करें तो ट्रेन पूरी तरह मॉडर्न होगी. इसमें सेंसर बेस्‍ड नल वाले वॉशरूम, बेहतर सफाई व्यवस्था और आरामदायक इंटीरियर मिलेगा. सेफ्टी के लिहाज से इमरजेंसी टॉक बैक यूनिट दी गई है, जिससे जरूरत पड़ने पर यात्री सीधे ट्रेन स्टाफ या लोको पायलट से काॅन्टेक्ट कर सकेंगे. कुल मिलाकर यह ट्रेन लंबी दूरी की रेल यात्रा को नए लेवल पर ले जाने वाली है.  वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की प्रमुख सुविधाएं     आरामदायक स्लीपर बर्थ     आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम     ऑटोमैटिक दरवाजे     आधुनिक शौचालय     फायर डिटेक्शन और सेफ्टी सिस्टम     सीसीटीवी निगरानी     डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली     ऊर्जा बचाने वाली तकनीक     सुरक्षा और तकनीकी विशेषताएं     कवच सुरक्षा प्रणाली     झटके रहित सेमी-परमानेंट कपलर     हर कोच के अंत में फायर बैरियर दरवाजे     आग लगने पर तुरंत चेतावनी और नियंत्रण की व्यवस्था     रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम     यूवी-सी लैंप आधारित एसी डिसइंफेक्शन सिस्टम     चौड़े और पूरी तरह सील गैंगवे     सभी कोचों में सीसीटीवी     आपात स्थिति में बात करने के लिए इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम     दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष शौचालय     सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम     ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए आरामदायक सीढ़ी

वंदे भारत की जगह धरती का पुष्पक विमान, 180 किमी/घंटा की स्पीड में सफल ट्रायल, लग्ज़री का नया अनुभव

नई दिल्ली भारतीय रेल वंदे भारत प्रीमियम सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन का स्‍लीपर वर्जन लॉन्‍च करने की तैयारी कर रहा है. इसका ट्रायल भी पूरा कर लिया गया है. इसे सबसे पहले गुवाहाटी से कोलकाता के बीच चलाया जाएगा. पीएम मोदी इसी महीने लग्‍जरी ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं. रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने खुद इसकी जानकारी दी है. उन्‍होंने वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन का ट्रायल सफल रहने के बारे में भी बताया है. वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन के अंदर की तस्‍वीरें सामने आई हैं, जिसे देखने पर इस सुपर एक्‍सक्‍लूसिव ट्रेन में मिलने वाली सुविधाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. तस्‍वीरों में वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन की आरामदायक बर्थ को देखा जा सकता है. सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन की सीटें तेजस राजधानी, दुरंतो और अन्‍य सुपरफास्‍ट ट्रेनों के मुकाबले ज्‍यादा कंफर्टेबल होने वाली हैं.  रेल मंत्री ने अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि यह ट्रेन अगले 15 से 20 दिनों में शुरू हो जाएगी. संभावना है कि इसका शुभारंभ 18 या 19 जनवरी के आसपास हो सकता है. उन्होंने कहा, 'हमने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है और सभी तैयारियां पूरी हैं. सटीक तारीख की घोषणा अगले दो-तीन दिनों में कर दी जाएगी.' ऐसे में अनुमान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने गुवाहाटी और कोलकाता के बीच बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखा देंगे. रेल मंत्री वैष्णव के अनुसार, 16 डिब्बों वाली इस वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के सोने की व्यवस्था होगी. ट्रेन की डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है, हालांकि गुवाहाटी और कोलकाता के बीच यह 120-130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. यह ट्रेन असम और पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी. बता दें कि दोनों राज्यों में इस वर्ष विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं. रेल मंत्री ने इसे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया हवाई यात्रा की तुलना में काफी कम होगा. न्‍यूज एजेंसी PTI के अनुसार, उन्होंने बताया कि AC3 कोच का किराया करीब 2300 रुपये, AC2 का किराया करीब 3000 रुपये और फर्स्‍ट AC का फेयर करीब 3600 रुपये होगा. इन किरायों में भोजन भी शामिल रहेगा. उन्होंने बताया कि किराया तय करते समय मध्यम वर्ग को ध्यान में रखा गया है. वर्तमान में गुवाहाटी-कोलकाता हवाई यात्रा का खर्च करीब 6000 से 8000 रुपये तक होता है.  प्रति किलोमीटर किराए की जानकारी देते हुए वैष्णव ने बताया कि फर्स्‍ट AC के लिए 3.8 रुपये प्रति किमी, AC 2 के लिए 3.1 रुपये प्रति किमी और AC 3 के लिए 2.4 रुपये प्रति किमी किराया होगा. रेल मंत्रालय की प्रस्तुति के अनुसार, इस ट्रेन में 11 थर्ड AC, चार सेकेंड AC और एक फर्स्ट AC कोच होगा. कुल 823 बर्थ में से 611 थर्ड AC, 188 सेकेंड AC और 24 फर्स्ट AC में होंगी.  वंदे  भारत स्‍लीप ट्रेन की खासियतों में आरामदायक और बेहतर कुशनिंग वाली बर्थ, ऑटोमैटिक दरवाजे, बेहतर सस्पेंशन से कम शोर और स्मूथ सफर, ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली, आपातकालीन बातचीत प्रणाली और उच्च स्वच्छता के लिए कीटाणुनाशक तकनीक शामिल है. यह तकनीक 99.9 प्रतिशत कीटाणुओं को खत्म करने में सक्षम है.  180 किमी/घंटा की सफल ट्रायल स्पीड हासिल की भारतीय रेलवे ने देश में स्वदेशी रेल नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (Commissioner of Railway Safety) की निगरानी में हुए इस परीक्षण ने भारत में अगली पीढ़ी की स्लीपर ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। कोटा–नागदा सेक्शन पर हाई-स्पीड ट्रायल इस अंतिम ट्रायल को कोटा–नागदा रेल खंड पर अंजाम दिया गया, जहाँ स्वदेशी रूप से निर्मित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की शीर्ष गति प्राप्त की। परीक्षण के दौरान राइड स्थिरता, कंपन परीक्षण, ब्रेकिंग क्षमता, आपातकालीन ब्रेकिंग प्रदर्शन और सुरक्षा प्रणालियों की जांच की गई। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने ट्रायल को पूरी तरह संतोषजनक घोषित किया। उन्नत राइड क्वालिटी का प्रदर्शन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस सफल परीक्षण के वीडियो साझा किए, जिसमें वाटर-ग्लास स्थिरता प्रदर्शन विशेष आकर्षण रहा। इस परीक्षण में ग्लास में भरा पानी बिना छलके स्थिर रहा, जो ट्रेन की उन्नत सस्पेंशन प्रणाली और राइड कम्फर्ट को दर्शाता है। यात्री केंद्रित डिज़ाइन और आधुनिक सुविधाएँ 16 कोच वाली यह वंदे भारत स्लीपर रेक विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा के लिए तैयार की गई है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख सुविधाएँ उपलब्ध हैं:     आरामदायक स्लीपर बर्थ     स्वचालित दरवाजे     आधुनिक टॉयलेट     CCTV आधारित निगरानी प्रणाली     डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली     ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियाँ     फायर डिटेक्शन और सेफ्टी मॉनिटरिंग सिस्टम खबर से जुड़े जीके तथ्य     वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की ट्रायल गति प्राप्त की है।     ट्रायल रेलवे सुरक्षा आयुक्त की देखरेख में हुआ और संतोषजनक पाया गया।     यह ट्रेन स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित की गई है।     यह आत्मनिर्भर भारत पहल का हिस्सा है। प्रमुख सुरक्षा और तकनीकी विशेषताएँ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में निम्नलिखित अत्याधुनिक सुरक्षा और तकनीकी सुविधाएँ शामिल हैं:     कवच (KAVACH) ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम     क्रैशवर्थी सेमी-पर्मानेंट कपलर्स और एंटी-क्लाइंबर्स     फायर बैरियर डोर्स, एरोसोल आधारित अग्नि शमन प्रणाली     रीजनरेटिव ब्रेकिंग     UV-C लैंप आधारित वातानुकूलन संक्रमण नियंत्रण     केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित दरवाजे     चौड़े सील्ड गैंगवे     आपातकालीन संवाद इकाई (Emergency Talk-back Unit)     दिव्यांगजन अनुकूल शौचालय     सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम     एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन की गई सीढ़ियाँ भारतीय रेलवे की आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में अगला कदम CRS की स्वीकृति के बाद अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवाओं की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया है। यह उपलब्धि सुरक्षा, नवाचार और स्वदेशी निर्माण के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। आने वाले समय में यात्री लंबी दूरी की यात्रा को विश्वस्तरीय सुविधा और उच्च तकनीक के साथ अनुभव कर सकेंगे।  

वंदे भारत अपग्रेड: इंदौर–नागपुर रूट पर 16 कोच की नई ट्रेन, सीट क्षमता दोगुनी

इंदौर रेलवे बोर्ड ने इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस में कोचों की संख्या बढ़ाकर 16 कर दी है। 24 नवंबर से यह ट्रेन दोगुनी सीटों के साथ चलेगी, जिससे लगभग 1200 यात्री यात्रा कर सकेंगे। व्यस्त मार्ग पर यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा।     इंदौर-नागपुर वंदे भारत में कोच बढ़े।     सीट क्षमता हुई दोगुनी, 1200 यात्री।     24 नवंबर से नया बदलाव होगा लागू।  इससे प्रतिदिन 600 अतिरिक्त यात्रियों को आरामदायक और तेज यात्रा का अवसर मिलेगा—जो त्योहारों और भीड़भाड़ के समय राहत का बड़ा कारण बनेगा। व्यस्ततम रूट, मांग लगातार बढ़ रही थी इंदौर–भोपाल–नागपुर रेल मार्ग मध्य भारत के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूटों में शामिल है। विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और ट्रैवलर्स की भारी आवाजाही के कारण वंदे भारत में सीटें अक्सर फुल रहती थीं। वेटिंग लिस्ट भी लगातार बढ़ रही थी। इंदौर और भोपाल शिक्षा व व्यापार केंद्र हैं, वहीं नागपुर एक बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब है। ऐसे में 16 कोच का स्थायी विस्तार यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस दिन से मिलेगा नई सुविधा का लाभ ट्रेन नंबर 20911 इंदौर-नागपुर व ट्रेन नंबर 20912 नागपुर-इंदौर में 24 नवंबर से इस सुविधा का लाभ यात्रियों को मिलेगा। वंदे भारत ट्रेन की एग्जीक्यूटिव क्लास के कोच में 52 तो चेयरकार कोच में 78 सीटें होती हैं। कोच बढ़ने से सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। वंदे भारत (Indore Nagpur Vande Bharat Train) का 16 कोच वाला अपग्रेडेड रैक बुधवार को दिल्ली से इंदौर पहुंचा है। त्योहारी सीजन में फुल थी ट्रेन कोचिंग डिपो में इसका (Indore Nagpur Vande Bharat Train) मेंटेनेंस किया जा रहा है। मालूम हो, पहले यह ट्रेन इंदौर से भोपाल चल रही थी। यात्रियों की संख्या कम होने से इसे नागपुर तक कर दिया गया। त्योहारी सीजन में यह ट्रेन फुल रही। यात्रियों को वेटिंग मिली। कोच दोगुना होने से यात्रियों को आसानी से सीट मिल जाएगी। वंदे भारत ट्रेन में बीते चार माह से सीटें फुल जा रही थी। इस कारण रेलवे ने वंदे भारत के कोच बढ़ा दिए है। इंदौर से नागपुर तक ट्रेन चलाने की मांग हमेशा से उठती रहती है। दो साल पहले इंदौर से भोपाल के बीच वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू किया था। यह ट्रेन सुबह सवा छह बजे जाती है। इंदौर से भोपाल तक के लिए इस ट्रेन को कम यात्री मिलते थे। बाद में वंदेभारत ट्रेन का विस्तार इंदौर से नागपुर तक किया गया। इसके बाद ट्रेन को अच्छे यात्री मिलने लगे। त्यौहार के समय इस ट्रेन में सीट नहीं मिलती है। पहले दिल्ली भेज दिए थे रैक वंदे भारत के लिए सितंबर माह में रैक आए थे, लेकिन उसका उपयोग रेलवे ने दिल्ली पटना ट्रेन के लिए कर दिया था। अब वे रैक वापस इंदौर भेजे है। दो दिन पहले रैक इंदौर लाए गए। अब 24 नवंबर से 16 कोच के साथ ट्रेन इंदौर से नागपुर के लिए रवाना होगी। उधर इंदौर नगर निगम ने भी इंदौर से नागपुर के लिए बस सेवा शुरू की है। पिछले दिनों हरी झंडी देकर मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने बस को रवाना किया था।  

इंजन से उतरकर वंदे भारत ड्राइवर ने किया ऐसा काम, वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल!

ग्वालियर देश की सबसे आधुनिक ट्रेनों में गिनी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस इस बार गलत वजह से चर्चा में है। दिल्ली से भोपाल जा रही ट्रेन के लोको पायलट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें वह ग्वालियर स्टेशन पर इंजन से उतरकर ट्रैक पर पेशाब करता हुआ दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार यह घटना प्लेटफॉर्म नंबर 1 की है। वहां मौजूद यात्रियों ने पूरी घटना अपने मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। वीडियो में साफ दिख रहा है कि लोको पायलट बिना किसी झिझक के ट्रैक पर पेशाब कर रहा है, जबकि आसपास कई यात्री मौजूद थे। रेलवे के नियमों के अनुसार, स्टेशन पर रुकने के दौरान स्टाफ के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध रहती है, लेकिन पायलट ने उसका उपयोग नहीं किया। इस घटना ने न केवल रेलवे की छवि पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान की भावना को भी ठेस पहुंचाई है। रेलवे प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से यात्रियों में आक्रोश और हैरानी दोनों देखी जा रही है। हालांकि पंजाब केसरी इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

वंदेभारत फिर पटरी पर — इस बार 16 कोचों की पूरी ताकत के साथ दौड़ेगी

रायपुर बिलासपुर से नागपुर के बीच दौड़ रही वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. इसे देखते हुए रेलवे ने फिर से 16 कोच के साथ चलाना शुरु कर दिया है. रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार हर दिन इस ट्रेन में 800 से ज्यादा यात्री सफर कर रहे है. बता दें कि 11 दिसंबर 2022 को जब नागपुर के लिए वंदेभारत का परिचालन शुरू हुआ था तब इसमें 16 कोच थे, लेकिन इसमें टिकट महंगा होने के कारण कुछ समय बाद ही यात्रियों की संख्या कम होने लगी. इसके बाद रेलवे ने अप्रैल 2023 में 16 कोच को घटाकर 8 कोच कर दिया था. इसके बाद करीब 564 यात्री ट्रेन में सफर कर पा रहे थे, अब फिर से 1128 यात्री सफर कर पाएंगे. वंदेभारत में रायपुर और बिलासपुर से नागपुर तक सफर करने वाले काफी यात्री मिल रहे हैं. यहां तक की कई यात्री रायपुर से बिलासपुर कम समय में पहुंचने के लिए इसमें सफर करना पसंद कर रहे हैं. इसकी मुख्य वजह इस ट्रेन का समय पर पहुंचना है. साथ ही 16 कोच लगाने के बाद भी वर्तमान में यह ट्रेन पैक चल रही है. वहीं बाकि एक्सप्रेस ट्रेन की तुलना में यह ट्रेन रद्द नहीं हो रही है, इसलिए यात्रियों का भरोसा भी बढ़ा है. रविवार को भी इस ट्रेन के सीसी कोच में 54 और ईसी कोच में 6 वेटिंग चल रही है. इस ट्रेन में त्योहारी सीजन में यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है. नागपुर जाने के लिए बिलासपुर और रायपुर के लोगों को यह ट्रेन रास आ रही है.

अब वंदे भारत में सफर होगा इंटरनेशनल लेवल का — नई टेक्नोलॉजी से लैस होगी ट्रेन

नई दिल्ली स्वदेशी तकनीक के माध्यम से भारत रेलवे के क्षेत्र में निर्माता से निर्यातक बन चुका है। अब वैश्विक स्तर पर भारत में निर्मित रेल इंजन और कोच की मांग अब अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों से आ रही है। रेलवे अब वंदे भारत का अगला संस्करण लाने की तैयारी में है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को भारत मंडपम में आयोजित 16वें अंतरराष्ट्रीय रेल उपकरण प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ा रेलवे प्रदर्शनी है। 'फ्यूचर-रेडी रेलवे' थीम पर आधारित यह प्रदर्शनी 17 अक्टूबर तक भारत मंडपम में चलेगी, जिसमें 15 से भी अधिक देशों के 450 से अधिक कंपनियां आधुनिक रेल, मेट्रो उत्पाद, नवाचार एवं समाधान प्रदर्शित कर रही हैं। 7 हजार KM लंबा यात्री कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी रेलमंत्री ने कहा कि विकसित भारत विजन के तहत वर्ष 2047 तक लगभग सात हजार किमी लंबे समर्पित यात्री कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। ये कॉरिडोर अधिकतम 350 किमी प्रतिघंटा और परिचालन गति 320 किमी प्रतिघंटा तक के लिए डिजाइन किए जाएंगे। ये पूरी तरह स्वदेशी सिग्नलिंग सिस्टम और आधुनिक आपरेशन कंट्रोल सेंटर से सुसज्जित होंगे।   जल्द ही आएगा वंदे भारत ट्रेनों का चौथा संस्करण वैष्णव ने वंदे भारत ट्रेन को देश की बड़ी सफलता करार दिया और कहा कि यह तकनीकी मानकों पर विश्व की सर्वश्रेष्ठ ट्रेनों की बराबरी करती है। भारत में अभी वंदे भारत-3 ट्रेनें चल रही हैं, जो अपने पिछले संस्करणों से काफी उन्नत है। यह जीरो से सौ किमी प्रतिघंटा की रफ्तार सिर्फ 52 सेकंड में पकड़ लेती है, जो जापान और यूरोप की कई ट्रेनों से अधिक है। उन्होंने कहा कि अगले 18 महीनों में वंदे भारत-4 लाने का लक्ष्य है, जो प्रदर्शन और यात्री सुविधा के हर पहलू में वैश्विक मानक स्थापित करेगी। नए संस्करण में बेहतर टॉयलेट्स, आरामदायक सीटें और उच्च गुणवत्ता वाले कोच होंगे, ताकि यह ट्रेन दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यात्री ट्रेन के रूप में पहचानी जाए। अमृत भारत ट्रेनों पर क्या बोलें अश्विनी वैष्णव? इसी तरह अभी अमृत भारत-2 का परिचालन हो रहा, जबकि संस्करण-3 पुश-पुल तकनीक पर आधारित है, जो लंबी दूरी की यात्रा के लिए उपयुक्त होगी। उन्होंने कहा कि अमृत भारत-4 में अगली पीढ़ी के ट्रेनसेट और लोकोमोटिव शामिल होंगे, जिनका डिजाइन और निर्माण अगले 36 महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। वैष्णव ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 35,000 किमी नई लाइनें बिछाई गईं और 46,000 किमी रेलमार्गों का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। देश में अभी 156 वंदे भारत, 30 अमृत भारत और चार नमो भारत चल रही हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में रिकार्ड सात हजार से अधिक कोच, लगभग 42,000 वैगन और 1,681 लोकोमोटिव का निर्माण किया गया। देश का पहला 9,000 हार्सपावर का इलेक्टि्रक लोकोमोटिव शुरू किया गया। इसी तरह 12 हजार एचपी इंजन पहले से ही चल रहे हैं। भारतीय रेल अमेरिका को पीछे छोड़कर अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी माल ढुलाई नेटवर्क बन चुकी है। बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नवाचार पर विशेष ध्यान है। इसके लिए चालू वर्ष में एक लाख 16 हजार करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली 'कवच' भी शामिल है।