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सुबह उठते ही आईना देखना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें वास्तु के नियम

 हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले आईना देखते हैं. बालों को ठीक करना हो या बस चेहरा देखना, हमें लगता है इसमें बुरा क्या है? लेकिन वास्तु शास्त्र की मानें तो ये छोटी सी आदत आपके पूरे दिन को खराब कर सकती है.   चेहरे पर होती है रात भर की सुस्ती वास्तु कहता है कि जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारे शरीर में आलस और नकारात्मक ऊर्जा भरी होती है. आपने गौर किया होगा कि सुबह चेहरा थोड़ा सूजा हुआ और बुझा-बुझा सा दिखता है.  जैसे ही आप आईना देखते हैं, वो नकारात्मक तरंगें आपकी आंखों के जरिए वापस शरीर में चली जाती हैं. नतीजतन पूरा दिन भारीपन और चिड़चिड़ेपन में बीतता है.  खुद को देखने से अच्छा है ईश्वर को याद करना शास्त्रों में सुबह के समय को ब्रह्म मुहूर्त के आसपास का सबसे पवित्र समय माना गया है. धर्मग्रंथों के अनुसार, सुबह उठते ही सबसे पहले अपने इष्ट देव का स्मरण करना चाहिए या अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए. हथेलियों के दर्शन का रहस्य हथेलियों को देखते समय इस मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है. "कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥" इसका अर्थ है कि हाथ के अग्र भाग में माँ लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु (या ब्रह्मा) का वास होता है. जब आप आईना देखते हैं, तो आप इस दैवीय ऊर्जा के बजाय अपनी शारीरिक माया से जुड़ जाते हैं, जिसे अध्यात्म में मोह-माया का प्रतीक माना गया है. बेड के सामने आईना? अगर आपके बेड के ठीक सामने ड्रेसिंग टेबल है और आपकी आंख खुलते ही सबसे पहले अपनी शक्ल दिखती है, तो ये वास्तु के हिसाब से बड़ा दोष है. धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि सोते समय हमारी आत्मा का एक सूक्ष्म अंश शरीर से बाहर विचरण करता है, और आईना उस ऊर्जा को भ्रमित कर सकता है.  इससे घर में तनाव बढ़ता है. तो फिर सुबह उठकर क्या करें? आईने को ढक दें: अगर बेडरूम में आईना है और उसे हटा नहीं सकते, तो रात को सोते समय उस पर एक साफ पर्दा या सफेद कपड़ा डाल दें. यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने से रोकता है. धार्मिक चित्रों के दर्शन: अपने कमरे में ऐसी जगह पर भगवान, उगते हुए सूरज या चहचहाते पक्षियों की तस्वीर लगाएं जहाँ सुबह सबसे पहले आपकी नजर पड़े. शास्त्रों में इसे मंगल दर्शन कहा गया है. हथेलियां चूमकर दिन शुरू करें: बिस्तर छोड़ने से पहले अपनी हथेलियों को देखें, उन्हें अपने चेहरे पर फेरें. इससे हाथों की सकारात्मक ऊर्जा आपके शरीर में प्रवाहित होती है. चेहरा धोने के बाद ही देखें आईना: जब आप फ्रेश हो जाएं, नहा लें या कम से कम ठंडे पानी से आंखें धो लें, तब आईना देखना सुरक्षित माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जल से शुद्ध होने के बाद शरीर का आभामंडल (Aura) स्वच्छ हो जाता है.

गर्मी में घर में सांप आने का कारण और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके संकेत

तपती गर्मी और उमस के कारण जमीन के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए सांप अक्सर ठंडी जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों या घरों का रुख करते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में सांपों के आगमन को केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं माना जाता. इसे घर की ऊर्जा और वास्तु दोषों से जोड़कर देखा जाता है. क्या कहता है वास्तु शास्त्र? वास्तु के अनुसार, सांप का घर में आना राहु और केतु ग्रहों के प्रभाव को दर्शाता है. यदि आपके घर में राहु का दोष है, तो ऐसे जीव घर की ओर आकर्षित हो सकते हैं. विशेष रूप से घर का नैऋत्य कोण (South-West) यदि दूषित हो या वहां गंदगी रहती हो, तो यह राहु को सक्रिय करता है, जो सांपों के आगमन का कारण बन सकता है. इन दिशाओं से निकलना है खतरे की घंटी अगर सांप बार-बार घर की उत्तर-पश्चिम (Vayavya) या दक्षिण-पश्चिम दिशा से प्रवेश कर रहा है, तो यह घर में अस्थिरता और मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के नीचे दरारें होना या दहलीज का टूटा होना भी नकारात्मक ऊर्जा और रेंगने वाले जीवों को निमंत्रण देता है. पितृ दोष और कालसर्प दोष का संकेत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सांपों का संबंध हमारे पूर्वजों से भी माना गया है. यदि किसी को सपने में बार-बार सांप दिखें या गर्मियों में अचानक घर के आंगन में सांप आ जाए, तो यह पितृ दोष या कुंडली में कालसर्प दोष का संकेत हो सकता है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि घर में किसी विशेष पूजा या शुद्धि की आवश्यकता है. वास्तु दोष दूर करने के उपाय गर्मियों में सांपों को घर से दूर रखने और वास्तु दोष को शांत करने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं: सफाई का महत्व: घर के ईशान कोण (North-East) को हमेशा साफ और खाली रखें. यहां कबाड़ जमा होने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है. सर्पगंधा का पौधा: घर के मुख्य द्वार के पास या बगीचे में सर्पगंधा या लेमन ग्रास का पौधा लगाएं. इनकी सुगंध से सांप दूर रहते हैं और वास्तु भी ठीक रहता है. चंदन की धूप: घर में नियमित रूप से चंदन की धूप या अगरबत्ती जलाएं. इसकी महक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. शिव उपासना: चूंकि सांप भगवान शिव के आभूषण हैं, इसलिए घर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करने से भय और दोष दोनों दूर होते हैं.

सूखी तुलसी भी बदल सकती है किस्मत, वास्तु के 3 चमत्कारी उपाय

 पारा 40 डिग्री के पार है, लू के थपेड़े और चिलचिलाती धूप ने न सिर्फ इंसानों का बुरा हाल कर रखा है, बल्कि घर के आंगन में लगी तुलसी भी इस तपिश को झेल नहीं पा रही है. लाख जतन के बाद भी अगर इस भीषण गर्मी में तुलसी सूख गई है, तो निराश होकर उसे फेंकने की गलती बिल्कुल न करें. वास्तु शास्त्र में माना गया है कि जो तुलसी चिलचिलाती धूप में सूख जाती है, उसकी सूखी लकड़ियों में भी चमत्कारिक शक्तियां होती हैं. ये सूखी लकड़ियां न केवल आपके घर की नकारात्मकता को सोख सकती हैं, बल्कि आर्थिक तंगी और वास्तु दोष जैसी समस्याओं के लिए रामबाण इलाज साबित हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि इस भीषण गर्मी में सूखी हुई तुलसी की लकड़ियों के वो 3 अचूक उपाय, जो आपके जीवन में खुशहाली की ठंडी बयार ला सकते हैं. 1. मुख्य द्वार पर बांधें लकड़ी वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में आए दिन क्लेश होता है या आपको लगता है कि घर को किसी की नजर लग गई है, तो सूखी तुलसी की छोटी सी लकड़ी उठाएं. इसे एक साफ लाल कपड़े में लपेटकर कलावा की मदद से घर के मुख्य द्वार पर बीचों-बीच लटका दें. माना जाता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. 2. तिजोरी में रखें एक टुकड़ा: खिंची चली आएंगी लक्ष्मी अगर कड़ी मेहनत के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिक रहा या फिजूलखर्ची बढ़ गई है, तो सूखी तुलसी की लकड़ी या उसकी जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा लें.  इसे गंगाजल से पवित्र करके पीले कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी या धन रखने वाली अलमारी में रख दें.  मान्यता है कि यह उपाय धन को आकर्षित करता है . इससे कंगाली दूर होती है. 3. तुलसी दीप से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. किसी भी शुभ तिथि या एकादशी के दिन जब आप घी का दीपक जलाएं, तो उसमें सूखी तुलसी की एक छोटी सी लकड़ी डाल दें. इसे तुलसी दीप कहा जाता है. ऐसा करने से घर के वास्तु दोषों का नाश होता है, रुके हुए काम बनने लगते हैं. भूलकर भी न करें ये गलती     तुलसी को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है, इसलिए पौधा सूखने के बाद भी उसकी लकड़ियों का अपमान न करें.     इन्हें कभी भी गंदे हाथों से न छुएं.     लकड़ियों को इधर-उधर कचरे या नाली में न फेंकें.     उपाय करने के बाद बची हुई लकड़ियों को गमले की मिट्टी में ही दबा दें या पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें.  

वास्तु टिप्स: घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना हो सकता है नुकसान

ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में घर का सबसे पवित्र स्थान मंदिर को माना गया है। अपने घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए मनुष्य सुबह-शाम नियमित पूजा करता है और देवी-देवताओं की आराधना करता है। इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी पड़ता है। लेकिन वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में कुछ चीजों को रखना वर्जित माना गया है। खंडित मूर्तियां, दो शंख सहित कुछ चीजें पूजा घर में रखने से इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है। साथ ही, अनजाने में हुई गलतियों के चलते पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं से कि घर के मंदिर में किन-किन चीजों को नहीं रखना चाहिए। पूजा घर में न रखें अत्यधिक बड़ी मूर्तियां वास्तुशास्त्र में घर के मंदिर को लेकर कई नियम व टिप्स बताए गए हैं। मान्यता है कि कभी भी पूजा घर में अत्यधिक बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। मंदिर में 3 से 6 इंच की मूर्तियां रखी जा सकती हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से आसपास ऊर्जा का एक समान प्रवाह बना रहता है। वहीं, अत्यधिक बड़ी भगवान की मूर्तियां पूजा घर में स्थापित करने से इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है। बड़ी मूर्तियां मंदिर में स्थापित की जाती हैं वहीं, घर के मंदिर में 3 से 6 इंच की मूर्ति रखनी चाहिए। मंदिर में न रखें दो शंख अगर आपने घर के मंदिर में दो शंख रखे हैं, तो उसे वहां से हटा देना चाहिए। मान्यता है कि गलती से भी पूजा घर में दो शंख नहीं रखने चाहिए। कहा जाता है कि घर में दो शंख रखने से इसका नकारात्मक प्रभाव आसपास की ऊर्जा पर और परिवार के सदस्यों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए हमेशा घर के मंदिर में एक ही शंख रखना चाहिए। साथ ही, कभी भी शंख से शिवलिंग का अभिषेक नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश की तीन प्रतिमा न रखें कई लोग मंदिर में एक ही भगवान की दो-दो प्रतिमाएं रखते हैं। शास्त्रों में ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी देवी-देवता की फोटो या मूर्ति घर के मंदिर में दो नहीं रखनी चाहिए। विशेषतौर पर भगवान गणेश की मूर्ति या प्रतिमा की संख्या पूरे घर में तीन नहीं होनी चाहिए। ऐसा करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इससे शुभ कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। मंदिर में टूटे-फूटे बर्तन न रखें अगर आपके घर के मंदिर में किसी भी प्रकार के टूटी-फूटी थाली, कटोरी, गिलास आदि बर्तन रखे हैं, तो उसे तुरंत पूजा घर से हटा दें। पूजा के लिए टूटे-फूटे और गंदे बर्तनों को प्रयोग करना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में दोष भी लग सकता है। जिससे घर में कई समस्याएं उत्पन्न होने का संकट रहता है। यह गृह क्लेश और कार्यों में बाधाओं का कारण भी बन सकता है। इसलिए मंदिर के बर्तनों से जुड़े इस नियम का ध्यान जरूर रखना चाहिए। पूजा घर में खाली पैकेट और गंदगी न रखें कई बार हम अनजाने में अगरबत्ती, धूपबत्ती या बाती का पैकेट खत्म होने के बाद उसे मंदिर में ही भूल जाते हैं। इस प्रकार की वस्तुओं को मंदिर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। साथ ही, मंदिर को समय-समय पर साफ करना भी आवश्यक होता है। वहां कभी भी अगरबत्ती, धूपबत्ती आदि के खाली पैकेट नहीं रखने चाहिए और न ही किसी प्रकार की गंदगी होनी चाहिए। ऐसा करने से वास्तुदोष लग सकता है। मंदिर में ज्यादा देर न रखें भोग काफी लोग अपने घर के मंदिर में भगवान को भोग लगाकर उसे देर तक या पूरी रात तक वहीं छोड़ देते हैं। ऐसा करना सही नहीं माना जाता है। हमेशा भगवान को भोग लगाने के कुछ देर बाद ही प्रसाद को वहां से उठाकर सभी में बांट देना चाहिए। मान्यता है कि भगवान को प्रसाद चढ़ाते ही उनका भोग लग जाता है। ऐसे में उसे वहां से हटा देना चाहिए। साथ ही, बर्तनों को साफ करके रखना चाहिए।

डाइनिंग टेबल वास्तु टिप्स: इन गलतियों से बचें, वरना हो सकता है नुकसान

अक्सर हम घर की साफ-सफाई और सजावट पर ध्यान तो देते हैं, लेकिन कुछ छोटी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो धीरे-धीरे नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं. खासकर डाइनिंग टेबल जहां पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन करता है. वास्तु शास्त्र मानता है कि यहां रखी चीजें सीधे घर की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं. इसीलिए जरूरी है कि डाइनिंग टेबल को हमेशा साफ, सुसंगठित और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखा जाए. आइए जानते हैं किन चीजों को यहां रखने से बचना चाहिए. दवाइयों को रखें दूर डाइनिंग टेबल पर दवाइयां रखना अशुभ माना जाता है. यह संकेत देता है कि घर में बीमारियों का प्रभाव बढ़ सकता है. कोशिश करें कि दवाइयों को हमेशा किसी अलग और निर्धारित स्थान पर ही रखें, ताकि भोजन के स्थान की ऊर्जा शुद्ध बनी रहे. नुकीली वस्तुओं से बनती है नकारात्मकता चाकू, कैंची या अन्य धारदार चीजों को खाने के बाद टेबल पर छोड़ देना ठीक नहीं माना जाता. वास्तु के अनुसार, ये वस्तुएं तनाव और विवाद को बढ़ावा दे सकती हैं.  इन्हें उपयोग के तुरंत बाद हटा देना बेहतर होता है. जूठे बर्तन और गंदगी से बचें खाना खाने के बाद टेबल पर जूठे बर्तन या बचा हुआ खाना छोड़ना नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. यह आदत धीरे-धीरे घर की आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकती है. इसलिए हमेशा टेबल को तुरंत साफ करना चाहिए. बेकार सामान न रखें डाइनिंग टेबल को स्टोर की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है. अखबार, बिल, बैग या अन्य अनावश्यक चीजें यहां रखने से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है.  टेबल जितनी साफ और खाली होगी, उतना ही सकारात्मक माहौल बना रहेगा. टूटी-फूटी या खराब चीजें हटाएं यदि टेबल पर टूटी प्लेट, क्रैक वाले बर्तन या खराब सजावटी सामान रखा हो, तो यह भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है.  ऐसी चीजें घर में रुकावट और आर्थिक नुकसान का संकेत मानी जाती हैं. क्या करें? डाइनिंग टेबल पर ताजे फूल, फल या साफ-सुथरा टेबल कवर रखना शुभ माना जाता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार के बीच सामंजस्य बना रहता है.

T-पॉइंट पर घर क्यों माना जाता है अशुभ? जानें वास्तु शास्त्र के प्रभाव और उपाय

टी-पॉइंट पर घर होना वास्तुशास्त्र के अनुसार सही नहीं माना जाता है। यह घर और परिवार के सदस्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जिसके चलते वहां अशांति बनी रह सकती है। वास्तु में भूमि की दिशा, स्थान, आकार, प्रकार के शुभ-अशुभ प्रभावों का वर्णन किया गया है। इनका ख्याल रखकर मकान बनवाने से वहां शुभता बनी रहती है। लेकिन अगर घर वास्तु अनुसार न हो तो इससे वास्तु दोष लगने की आशंका रहती है। वास्तु गुरु मान्या कहती हैं कि T-Point पर घर होना अशांति और गृह क्लेश का कारण बन सकता है। अगर पहले से घर टी-पॉइंट पर हो तो इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। आइए विस्तार से जानें टी-पॉइंट पर घर होने के प्रभाव और इससे बचाव के उपाय। टी पॉइंट पर घर होना चाहिए या नहीं? वास्तु शास्त्र में घर के आकार, प्रकार दिशा आदि के बारे में कई नियम बताए गए हैं, जिनका ख्याल रखने से वास्तु दोष नहीं लगता है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, अगर मकान टी पॉइंट पर बना हो तो इसे वास्तु के हिसाब से सही नहीं माना जाता है क्योंकि, सड़क से आने वाली ऊर्जा सीधा वहां मौजूद घर को प्रभावित करती है। इस ऊर्जा प्रवाह लगातार बना रहता है, जिसके चलते घर के माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके चलते घर और परिवार की शांति में बाधा उत्पन्न होने लगती है। साथ ही, यह गृह क्लेश और अशांति का बड़ा कारण भी बन सकता है। टी-पॉइंट वाला घर शांति को करता है प्रभावित अगर घर टी-पॉइंट पर बना हो तो इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों और वहां के माहौल पर भी पड़ता है। सबसे ज्यादा इसका प्रभाव घर की शांति पर पड़ता है। इससे परिवार में छोटी-छोटी बातों पर बहस या अनबन बनी रह सकती है। घर में भी मन शांत महसूस नहीं करता जिसके चलते चिड़चिड़ापन बना रह सकता है। ऐसे में छोटी बातों पर अधिक सोचने लगते हैं जो गृह क्लेश और अशांति का कारण बन सकता है। इसके प्रभाव से बाहर से घर पहुंचने पर भी वहां शांति और सुख महसूस नहीं होता है। टी-पॉइंट पर घर होने से इसका असर नींद पर भी पड़ सकता है, जिससे ठीक से आराम नहीं मिल पाता है। क्योंकि वहां लगातार वाहनों का आना-जाना लगा रहता है और ऊर्जा बहुत अधिक रहती है। बहार के शोर का प्रतिकूल प्रभाव घर के माहौल पर भी पड़ता है, जिससे वहां का माहौल शांतिपूर्ण महसूस नहीं हो पाता है। टी-पॉइंट घर का भावनाओं पर भी दिखता है प्रभाव वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर टी-पॉइंट पर हो तो इसका प्रभाव वहां रह रहे लोगों की भावनाओं पर भी देखने को मिल सकता है। घर में पहुंचने के बाद भी मन को सुकून महसूस नहीं होता है। अपने ही घर में सुरक्षित न महसूस करने जैसी भावना भी आ सकती है। साथ ही, वहां की ऊर्जा के चलते बार-बार घर से कहीं बाहर जाने का मन कर सकता है और परिवार के बीच तालमेल बनाए रखने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। टी-पॉइंट पर घर हो तो क्या करें?  अगर आपका घर टी-पॉइंट पर है तो इसके लिए घर की मुख्य द्वार के सामने बड़े और घने पौधे लगा सकते हैं। इससे बाहर की ऊर्जा घर में सीधा प्रवेश नहीं करेगी। आप घर के बाहर एक कॉन्वेक्स मिरर यानी उत्तल दर्पण भी लगा सकते हैं। ऐसा करने से ऊर्जा के प्रवाह को बदला जा सकता है जिससे परिवार का माहौल सकारात्मक बना रहता है। घर का मुख्य द्वार अगर उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में हो तो वहां आप वॉटर फाउंटेन लगा सकते हैं। इससे आसपास का माहौल सकारात्मक बना रहता है।

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में क्या करें और क्या नहीं?

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा अग्नि को दर्शाती है साथ ही इस दिशा में मंगल और यम की दिशा भी कहा गया है। अगर दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार संतुलित न हो तो घर परिवार के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही आर्थिक मामलों में कुछ न कुछ बाधाएं आती रहती हैं। तो आइए जानते हैं वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, दक्षिण दिशा को कैसा होना चाहिए। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को लेकर क्या नियम बताए गए हैं। दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए 1) वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण दिशा में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। पानी से संबंधित चीजें दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, जल तत्व दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। 2) दक्षिण दिशा में अग्नि की दिशा बताया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह को कोई एंटी एलिमेंट जैसे पानी की टंकी और वॉशिंग एरिया नहीं होना चाहिए। न ही इस दिशा में पूजा घर बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो घर परिवार के सभी लोगों को कामकाज में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार नहीं होता है। 3) दक्षिण दिशा में टॉयलेट भी नहीं बनाना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण में टॉयलेट होने काफी हानिकारक होता है। अगर इस दिशा में टॉयलेट होने पर काम बनते बनते बिगड़ने लगते हैं। साथ ही लोगों की लोकप्रियता भी खराब हो जाती है। 4) दक्षिण दिशा को मंगल की दिशा और यम की दिशा भी माना गया है। इसे यम के द्वार भी कहा जाता है। इस दिशा अगर काले या नीला रंग बोता है तो वह आपको कोर्ट केस या दुर्घटना आदि होने की आशंका अधिक रहती है। साथ ही इस दिशा में घर में पानी का जमाव न होने दें। क्योंकि, इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में स्फटिक टैंक या स्विमिंग पूल न बनवाएं। दक्षिण दिशा में क्या बना सकते हैं 1) दक्षिण दिशा को अग्नि की दिशा भी कहा गया है और यह आपकी प्रसिद्धि से भी जुड़ी दिशा में ऐसे में इस एरिया में आप चाहें तो मास्टर बेडरुम बनवा सकते हैं। इस दिशा में मास्टर बेडरुम होने शुभ परिणाम देता है।

बालकनी का वास्तु बदल सकता है घर की ऊर्जा और भाग्य

 कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी घर में पैसा नहीं टिकता या मानसिक तनाव बना रहता है.  तमाम कोशिश के बाद जब हमारा ध्यान घर के वास्तु पर जाता है तो हम कमरे, किचन और हॉल का वास्तु तो ठीक करते हैं लेकिन कई बार घर की बालकनी अछूती रह जाती है. हम अक्सर घर के कमरों का वास्तु तो ठीक कर लेते हैं, लेकिन बालकनी के वास्तु पर हमारा ध्यान नहीं जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, बालकनी में रखी कुछ चीजें और गलत दिशा आपकी तरक्की में ब्रेक लगा सकती हैं. अगर आप भी सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो बालकनी से जुड़े इन नियमों को अनदेखा करने की गलती बिल्कुल न करें. बालकनी की सही दिशा बदल देगी किस्मत वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व है. बालकनी के लिए उत्तर और पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है. इसे देव मार्ग कहा जाता है. अगर आपकी बालकनी इस दिशा में है, तो सूर्य की पहली किरणें घर की नकारात्मकता को खत्म कर देती हैं. कोशिश करें कि इस हिस्से को जितना हो सके खुला और साफ रखें, ताकि घर में ईश्वरीय ऊर्जा बनी रहे. इसके अलावा बालकनी में आप कुछ पौधे लगा कर पूरे घर के वास्तु दोष से निजात पा सकते हैं. बस इन्हें लगाते वक्त दिशा का ध्यान रखना जरूरी है. तुलसी: बालकनी के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में तुलसी का पौधा लगाएं. इसे साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है. मनी प्लांट: आर्थिक तंगी दूर करने के लिए इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है. शमी: शनि दोष से मुक्ति और कार्यों में सफलता के लिए शमी का पौधा लगाएं. बालकनी में कभी भी कांटेदार या दूध निकलने वाले पौधे न लगाएं, ये घर में कलह और तनाव पैदा करते हैं. दीवारों का रंग और शाम का दीपक बालकनी की दीवारों पर हमेशा हल्के और सात्विक रंगों का चुनाव करें. सफेद, क्रीम या हल्का पीला रंग सबसे अच्छा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, रोज शाम को बालकनी में एक दीपक जरूर जलाना चाहिए. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं. अगर बैठने के लिए भारी फर्नीचर रखना है, तो उसे हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में ही रखें. भूलकर भी न रखें ये चीजें अक्सर लोग बालकनी को स्टोर रूम बना देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती है. कबाड़ और टूटे बर्तन: बालकनी में पुराना सामान या कबाड़ रखने से 'राहु' का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जिससे मानसिक अशांति होती है. सूखे पौधे: अगर आपकी बालकनी में कोई पौधा सूख गया है, तो उसे तुरंत हटा दें. सूखे पौधे दुर्भाग्य और आर्थिक हानि का संकेत हैं. गंदगी: बालकनी जितनी साफ होगी, माता लक्ष्मी के आने का रास्ता उतना ही साफ होगा.

वास्तु शास्त्र: घर में आईना लगाने के सही नियम, वरना बढ़ सकती है नकारात्मकता

घर में रखा आईना आपके घर की ऊर्जा और माहौल पर गहरा असर डालता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार आईना एक ऐसा तत्व है जो ऊर्जा को आकर्षित भी करता है और उसे कई गुना बढ़ाता भी है.  इसलिए अगर आईना सही दिशा और सही जगह पर लगाया जाए तो यह घर में सुख-समृद्धि, शांति और पॉजिटिव ऊर्जा लाता है. वहीं अगर इसे गलत जगह पर रखा जाए, तो यही आईना नकारात्मकता, तनाव और आर्थिक रुकावटों का कारण बन सकता है.  इसलिए जरूरी है कि घर में आईना लगाते समय कुछ खास वास्तु नियमों का ध्यान रखा जाए, ताकि आपका घर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहे. सही दिशा में लगाएं आईना वास्तु के अनुसार आईना हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है.  ये दिशाएं प्राकृतिक रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी होती हैं, जो घर के वातावरण को बेहतर बनाती हैं. मुख्य दरवाजे के सामने न रखें घर के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने आईना लगाने से बचना चाहिए.  ऐसा माना जाता है कि इससे घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा वापस लौट जाती है, जिससे सुख-समृद्धि पर असर पड़ सकता है. बेड के सामने आईना लगाने से बचें बेडरूम में आईना इस तरह लगाएं कि उसमें सोते समय आपका प्रतिबिंब न दिखे. इससे नींद प्रभावित हो सकती है. टूटे या खराब आईने से दूर रहें टूटा या दरार वाला आईना घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है.  इसलिए ऐसे आईनों को तुरंत हटा देना ही बेहतर होता है. आईना क्या दिखाता है, इस पर दें ध्यान आईना हमेशा साफ-सुथरी और सकारात्मक चीजों को ही रिफ्लेक्ट करे. अगर उसमें हरियाली, रोशनी या सुंदर दृश्य दिखते हैं, तो यह घर में अच्छी ऊर्जा को और बढ़ाता है. आमने-सामने आईने लगाने से बचें दो आईनों को एक-दूसरे के सामने रखने से लगातार प्रतिबिंब बनते हैं, जिससे मानसिक अस्थिरता और असहजता बढ़ सकती है. इसलिए इस तरह की व्यवस्था से बचना चाहिए.

वास्तु टिप्स: सुबह की ये 6 आदतें बदल सकती हैं आपका पूरा दिन और किस्मत

 हम अक्सर सोचते हैं कि हमारा दिन कैसा बीतेगा, यह हमारी किस्मत पर निर्भर है.  लेकिन वास्तु शास्त्र यह मानता है कि हमारे दिन की सफलता इस बात पर टिकी होती है कि हम अपनी सुबह की शुरुआत कैसे करते हैं.  सुबह का समय पॉजिटिव एनर्जी से भरा होता है. यदि हम सुबह उठते ही कुछ छोटी-छोटी लेकिन प्रभावशाली आदतों को अपना लें, तो न केवल हमारा मन शांत रहता है, बल्कि घर में धन-धान्य और खुशहाली  भी बढ़ती है. 1. अपनी हथेलियों को देखें नींद खुलते ही सबसे पहले किसी भी अन्य वस्तु या व्यक्ति को देखने के बजाय अपनी दोनों हथेलियों को एक साथ जोड़कर देखना चाहिए.  शास्त्रों में कहा गया है कि हथेलियों के अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में भगवान गोविंद (विष्णु) का वास होता है. सुबह-सुबह अपने हाथों को देखकर चेहरे पर फेरने शुभ होता है. सुबह-सुबह तेल के बर्तन, या सूई धागा ना देखें. 2. धरती को नमन बिस्तर से पैर नीचे उतारने से पहले धरती माता को हाथ से छूकर प्रणाम करना चाहिए.  अपने कुलदेवता का नाम लेना भी बहुत शुभ होता है. किसी भी ऐसे जानवर का नाम ना लें जो अपशकुन हो, जैसे बंदर, कुत्ता, या सूअर. 3. सूर्योदय से पहले उठने का लाभ वास्तु के अनुसार, सूर्योदय के बाद देर तक सोए रहने से घर में दरिद्रता आती है और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. सूरज की पहली किरण निकलने से पहले उठने वाले व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से वाइटल एनर्जी (प्राण शक्ति) मिलती है.  इससे आलस्य दूर होता है.  बुद्धि तेज होती है. 4. मुख्य द्वार की पवित्रता घर की महिलाएं या बड़े बुजुर्ग यदि सुबह उठकर घर के मुख्य द्वार पर थोड़ा सा जल छिड़कते हैं, तो यह बहुत शुभ माना जाता है. साफ-सुथरा मुख्य द्वार देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करता है.  ध्यान रहे कि घर की दहलीज के पास कचरा या गंदगी बिल्कुल न हो. 5. सूर्य देव को जल और योग स्नान के बाद तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य देना आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है.  इसके साथ ही 10-15 मिनट का ध्यान या योग आपके शरीर को स्फूर्ति देता है.   6. तुलसी को जल तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना और उसकी परिक्रमा करना घर के कलह-क्लेश को शांत करता है.  सुबह के समय कभी भी किसी की बुराई न करें और न ही क्रोध करें.  अपनी वाणी में मधुरता रखें ताकि पूरा दिन खुशनुमा बना रहे.