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घर में मकड़ी के जाले सिर्फ गंदगी नहीं, वास्तु में माने जाते हैं अशुभ संकेत

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है. इस मौसम में घरों के कोनों या छिपी हुई जगहों पर मकड़ी के जाले तेजी से नजर आने लगते हैं. गर्म और सूखे मौसम में मकड़ियां ज्यादा दिखने लगती हैं, जिससे घर के कोनों, दीवारों और छत पर जाले बनना आम हो जाता है. अक्सर लोग इन्हें मामूली गंदगी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, मकड़ी के ये जाले नकारात्मक ऊर्जा का संकेत भी माने जाते हैं. यही बात हम अक्सर अपने बड़े-बुजुर्गों से भी सुनते आए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के अलग-अलग स्थानों पर लगे मकड़ी के जाले जीवन पर अलग-अलग तरह से असर डालते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में. बेडरूम में मकड़ी का जाला वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके बेडरूम में मकड़ी का जाला है, तो इसे तुरंत साफ कर देना चाहिए. बेडरूम में जाले होने से दांपत्य जीवन में भी तनाव बढ़ सकता है. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली कम होती है और रिश्तों में खटास आ सकती है. छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने की संभावना भी बढ़ जाती है. घर के कोनों में मकड़ी का जाला अक्सर घर के ऊंचे कोनों में मकड़ी के जाले लग जाते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि वे आसानी से साफ नहीं हो पाते हैं. लेकिन वास्तु के अनुसार, घर के कोनों में जाले होना आर्थिक परेशानियों का संकेत माना जाता है. यह धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है, इसलिए समय-समय पर इन्हें साफ करना जरूरी है. मंदिर में मकड़ी का जाला घर के मंदिर को साफ-सुथरा रखना बहुत जरूरी होता है. कई बार सफाई की अनदेखी के कारण मंदिर में भी मकड़ी के जाले लग जाते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, मंदिर में जाला लगना दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है. इसलिए रोजाना पूजा से पहले मंदिर की साफ-सफाई करना बेहद जरूरी है. किचन में मकड़ी का जाला किचन घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां अन्नपूर्णा विजारती हैं और भोजन तैयार किया जाता है. अगर यहां मकड़ी का जाला लगा हुआ है, तो यह सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. वैज्ञानिक रूप से भी यह सही नहीं है, क्योंकि जाले और गंदगी से बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे घर के लोग बीमार पड़ सकते हैं. इसलिए किचन की नियमित सफाई बेहद जरूरी है. क्या करें उपाय? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके घर में मकड़ी के जाले लगते हैं, तो रोजाना उनकी सफाई करें और उन्हें तुरंत कूड़े में फेंक दें. रोज या हफ्ते में 2-3 बार झाड़ू-पोंछा करें. छत, कोनों और फर्नीचर के पीछे भी सफाई करें. पुराने जाले तुरंत हटा दें. मकड़ी के जाले हटाने के लिए आप चाहें तो घर में रोजाना धूप और दीपक जला सकते हैं, इस एक उपाय को करने से नकारात्मक ऊर्जा और कीट-पतंगे दूर रहते हैं.

मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु टिप्स: सही दिशा और नियम से घर में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि

वास्तुशास्त्र में मुख्य द्वार को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसका सही स्थान और दिशा में होना अति आवश्यक होता है। क्योंकि, मेन गेट से होते हुए ही घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। साथ ही, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार से ही माता लक्ष्मी का भी आगमन होता है। ऐसे में वास्तु दोष से बचाव व घर में पॉजिटिविटी के लिए घर का मेन गेट बनवाते समय वास्तु की कुछ बातों और नियमों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। साथ ही, इसके आसपास मौजूद चीजों का प्रभाव भी घर और परिवार के सदस्यों पर पड़ता है और वास्तु दोष का कारण बन सकता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानें मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए और इससे जुड़े जरूरी वास्तु नियम। मुख्य द्वार दिशा वास्तु अनुसार वास्तु गुरु मान्या और वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा में होना चाहिए। अगर ऐसा संभव न हो तो आप पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में भी मेन गेट बनवा सकते हैं। इस दिशा को मुख्य द्वार के लिए सबसे उत्तम माना गया है। वास्तु गुरु बताती हैं कि मेन गेट उत्तर दिशा 5 डिग्री से 346 डिग्री पर, पूर्व दिशा 90 डिग्री पर, दक्षिण दिशा 180 डिग्री पर और पश्चिम दिशा 270 डिग्री पर होना सबसे उत्तम होता है। इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार पर भी देखने को मिलता है। मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु नियम     घर के मुख्य द्वार के पास किसी भी प्रकार का कचरा या कबाड़ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से इसका प्रतिकूल प्रभाव घर के अंदर के माहौल पर पड़ सकता है।     माना जाता है कि भूलकर भी मुख्य द्वार के आसपास भारी सामान नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा, दरवाजे के पीछे, मुख्य द्वार के रास्ते में या आसपास भी किसी भी प्रकार की भारी वस्तु न रखें।     वास्तुशास्त्र के अनुसार, मेन गेट के ठीक सामने बिजली का खंभा या किसी भी प्रकार का पिलर नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, इसके आसपास बड़ा पेड़ होना भी शुभ नहीं माना जाता है। ये घर में सकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने में बाधा का कारण बन सकते हैं।     इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि घर का मुख्य द्वार कभी भी रोड के टी-पॉइंट पर न हो। ऐसे स्थान की ऊर्जा बहुत अधिक और सीधी होती है जो घर के अंदर की शांति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।     नाली, गटर या जहां गंदा पानी इकट्ठा होता हो, ऐसे स्थानों के सामने या आसपास मुख्य द्वार नहीं बनवाना चाहिए। ऐसे स्थानों के पास मेन गेट मौजूद होने से पॉजिटिव एनर्जी अंदर प्रवेश नहीं कर पाती है।     मुख्य द्वार के पास आप तुलसी, मनी प्लांट जैसे शुभ और खूबसूरत दिखने वाले पौधे लगा सकते हैं। साथ ही, मेन गेट के दोनों तरफ साफ-सफाई का विशेष ध्यान जरूर रखना चाहिए। यह सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।     घर के मेन गेट पर गोल्डन कलर का बल्ब जलाकर रखना शुभ माना जाता है। इससे आसपास का माहौल सकारात्मक बना रहता है। साथ ही, शाम के समय मुख्य द्वार पर कभी भी अंधेरा नहीं रखना चाहिए।     वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर का मुख्य द्वार बनवाते समय इस बात का ख्याल जरूर रखें कि उसके ठीक सामने कोई शीशा न लगा हो। ऐसा होने से सकारात्मक ऊर्जा शीशे से टकरा कर वापस बाहर चली जाती है।     घर के मुख्य द्वार पर दो पल्ले वाला दरवाजा लगाना सबसे शुभ माना जाता है। साथ ही, आप गेट के पास लोबान जला सकते हैं जिससे वहां का माहौल आनंददायक बना रहे।     मुख्य द्वार बनवाते समय इस बात का ख्याल जरूर रखें की यह घड़ी की दिशा में यानी क्लॉक वाइज ही खुलना चाहिए। मुख्य द्वार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण टिप्स अपने घर के मेन गेट बनवाते समय इस बात का ख्याल जरूर रखना चाहिए कि इसकी सीध में पूजा घर न हो। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है। मुख्य द्वार के बिल्कुल सीध यानी सामने कभी भी रसोई घर नहीं बनवाना चाहिए। साथ ही, चूल्हा भी मेन गेट के सामने दिखना शुभ नहीं माना जाता है। वास्तु के अनुसार, कभी भी शौचालय या बाथरूम के सामने मेन गेट नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा करना सही नहीं माना गया है। साथ ही, मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियां भी नहीं होनी चाहिए।  

घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के आसान फेंगशुई उपाय

दिनभर की थकान और दफ्तर की भागदौड़ के बाद जब हम घर की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो उम्मीद होती है कि वहां सुकून मिलेगा. लेकिन क्या कभी आपने ये महसूस किया है कि घर पहुंचते ही बिना वजह भारीपन, उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होने लगे? अगर हां, तो यह आपके घर का वास्तु या फेंगशुई दोष हो सकता है. अक्सर लोग फेंगशुई के नाम पर महंगे शो-पीस खरीदने लगते हैं, लेकिन असल में फेंगशुई ऊर्जा के सही संतुलन का नाम है. आइए जानते हैं कि कैसे आप अपनी जेब से एक चवन्नी खर्च किए बिना अपने आशियाने को खुशियों से भर सकते हैं. 1. कबाड़ को हटाएं फेंगशुई का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम है सफाई.  रुकी हुई ऊर्जा अक्सर पुराने कबाड़, टूटे हुए सामान या लंबे समय से बंद पड़ी अलमारियों में जमा हो जाती है. यदि आपके घर में ऐसी चीजें हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो उन्हें हटा दें. खाली जगह का मतलब है नई ऊर्जा के लिए रास्ता बनाना. जैसे ही आप घर का कोना-कोना साफ करते हैं, आप खुद को हल्का और मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे. 2. ताजी हवा और प्राकृतिक रोशनी सूरज की रोशनी और ताजी हवा प्राकृतिक रूप से नकारात्मकता को नष्ट करती है. रोज सुबह कम से कम 20 मिनट के लिए अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें. फेंगशुई में माना जाता है कि चलती हुई हवा ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू बनाती है. अगर आपके घर के किसी कोने में हमेशा अंधेरा रहता है, तो वहां रोशनी की व्यवस्था करें ताकि ऊर्जा सही हो जाए. 3. मुख्य द्वार फेंगशुई के अनुसार, 'ची' यानी ऊर्जा मुख्य द्वार से ही घर में प्रवेश करती है. बिना खर्च किए इसे बेहतर बनाने के लिए बस अपने मुख्य द्वार को साफ रखें.  वहां रखे पुराने जूते-चप्पल हटा दें. ये सुनिश्चित करें कि दरवाजा खुलते समय आवाज न करे.  एक साफ और सुंदर प्रवेश द्वार न केवल मेहमानों को, बल्कि सुख-समृद्धि को भी आकर्षित करता है. 4. शीशों का सही इस्तेमाल आपके घर में मौजूद पुराने शीशे भी फेंगशुई का बड़ा टूल बन सकते हैं. बस उनकी दिशा बदलें.  यदि आपके घर के किसी खिड़की के बाहर हरियाली या सुंदर दृश्य है, तो उसके सामने शीशा लगाएं. इससे बाहर की सकारात्मक ऊर्जा परावर्तित  होकर घर के अंदर आएगी. ध्यान रहे, शीशा कभी भी मुख्य द्वार या बिस्तर के ठीक सामने न रखें, वरना यह ऊर्जा को वापस बाहर भेज सकता है या नींद में खलल डाल सकता है. 5. पानी और नमक घर की निगेटिविटी सोखने के लिए नमक सबसे सस्ता और असरदार तरीका है.  पोंछे के पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक या सेंधा नमक मिलाकर घर की सफाई करें. इसके अलावा, बाथरूम या घर के अंधेरे कोनों में एक कटोरी में नमक भरकर रखें.  यह वातावरण की दूषित ऊर्जा को सोख लेता है.  हर हफ्ते इस नमक को बदल दें.  यह छोटा सा बदलाव घर के माहौल को काफी सकारात्मक बना देता है.

सुबह उठते ही आईना देखना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें वास्तु के नियम

 हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले आईना देखते हैं. बालों को ठीक करना हो या बस चेहरा देखना, हमें लगता है इसमें बुरा क्या है? लेकिन वास्तु शास्त्र की मानें तो ये छोटी सी आदत आपके पूरे दिन को खराब कर सकती है.   चेहरे पर होती है रात भर की सुस्ती वास्तु कहता है कि जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारे शरीर में आलस और नकारात्मक ऊर्जा भरी होती है. आपने गौर किया होगा कि सुबह चेहरा थोड़ा सूजा हुआ और बुझा-बुझा सा दिखता है.  जैसे ही आप आईना देखते हैं, वो नकारात्मक तरंगें आपकी आंखों के जरिए वापस शरीर में चली जाती हैं. नतीजतन पूरा दिन भारीपन और चिड़चिड़ेपन में बीतता है.  खुद को देखने से अच्छा है ईश्वर को याद करना शास्त्रों में सुबह के समय को ब्रह्म मुहूर्त के आसपास का सबसे पवित्र समय माना गया है. धर्मग्रंथों के अनुसार, सुबह उठते ही सबसे पहले अपने इष्ट देव का स्मरण करना चाहिए या अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए. हथेलियों के दर्शन का रहस्य हथेलियों को देखते समय इस मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है. "कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥" इसका अर्थ है कि हाथ के अग्र भाग में माँ लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु (या ब्रह्मा) का वास होता है. जब आप आईना देखते हैं, तो आप इस दैवीय ऊर्जा के बजाय अपनी शारीरिक माया से जुड़ जाते हैं, जिसे अध्यात्म में मोह-माया का प्रतीक माना गया है. बेड के सामने आईना? अगर आपके बेड के ठीक सामने ड्रेसिंग टेबल है और आपकी आंख खुलते ही सबसे पहले अपनी शक्ल दिखती है, तो ये वास्तु के हिसाब से बड़ा दोष है. धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि सोते समय हमारी आत्मा का एक सूक्ष्म अंश शरीर से बाहर विचरण करता है, और आईना उस ऊर्जा को भ्रमित कर सकता है.  इससे घर में तनाव बढ़ता है. तो फिर सुबह उठकर क्या करें? आईने को ढक दें: अगर बेडरूम में आईना है और उसे हटा नहीं सकते, तो रात को सोते समय उस पर एक साफ पर्दा या सफेद कपड़ा डाल दें. यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने से रोकता है. धार्मिक चित्रों के दर्शन: अपने कमरे में ऐसी जगह पर भगवान, उगते हुए सूरज या चहचहाते पक्षियों की तस्वीर लगाएं जहाँ सुबह सबसे पहले आपकी नजर पड़े. शास्त्रों में इसे मंगल दर्शन कहा गया है. हथेलियां चूमकर दिन शुरू करें: बिस्तर छोड़ने से पहले अपनी हथेलियों को देखें, उन्हें अपने चेहरे पर फेरें. इससे हाथों की सकारात्मक ऊर्जा आपके शरीर में प्रवाहित होती है. चेहरा धोने के बाद ही देखें आईना: जब आप फ्रेश हो जाएं, नहा लें या कम से कम ठंडे पानी से आंखें धो लें, तब आईना देखना सुरक्षित माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जल से शुद्ध होने के बाद शरीर का आभामंडल (Aura) स्वच्छ हो जाता है.

गर्मी में घर में सांप आने का कारण और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके संकेत

तपती गर्मी और उमस के कारण जमीन के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए सांप अक्सर ठंडी जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों या घरों का रुख करते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में सांपों के आगमन को केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं माना जाता. इसे घर की ऊर्जा और वास्तु दोषों से जोड़कर देखा जाता है. क्या कहता है वास्तु शास्त्र? वास्तु के अनुसार, सांप का घर में आना राहु और केतु ग्रहों के प्रभाव को दर्शाता है. यदि आपके घर में राहु का दोष है, तो ऐसे जीव घर की ओर आकर्षित हो सकते हैं. विशेष रूप से घर का नैऋत्य कोण (South-West) यदि दूषित हो या वहां गंदगी रहती हो, तो यह राहु को सक्रिय करता है, जो सांपों के आगमन का कारण बन सकता है. इन दिशाओं से निकलना है खतरे की घंटी अगर सांप बार-बार घर की उत्तर-पश्चिम (Vayavya) या दक्षिण-पश्चिम दिशा से प्रवेश कर रहा है, तो यह घर में अस्थिरता और मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के नीचे दरारें होना या दहलीज का टूटा होना भी नकारात्मक ऊर्जा और रेंगने वाले जीवों को निमंत्रण देता है. पितृ दोष और कालसर्प दोष का संकेत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सांपों का संबंध हमारे पूर्वजों से भी माना गया है. यदि किसी को सपने में बार-बार सांप दिखें या गर्मियों में अचानक घर के आंगन में सांप आ जाए, तो यह पितृ दोष या कुंडली में कालसर्प दोष का संकेत हो सकता है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि घर में किसी विशेष पूजा या शुद्धि की आवश्यकता है. वास्तु दोष दूर करने के उपाय गर्मियों में सांपों को घर से दूर रखने और वास्तु दोष को शांत करने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं: सफाई का महत्व: घर के ईशान कोण (North-East) को हमेशा साफ और खाली रखें. यहां कबाड़ जमा होने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है. सर्पगंधा का पौधा: घर के मुख्य द्वार के पास या बगीचे में सर्पगंधा या लेमन ग्रास का पौधा लगाएं. इनकी सुगंध से सांप दूर रहते हैं और वास्तु भी ठीक रहता है. चंदन की धूप: घर में नियमित रूप से चंदन की धूप या अगरबत्ती जलाएं. इसकी महक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. शिव उपासना: चूंकि सांप भगवान शिव के आभूषण हैं, इसलिए घर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करने से भय और दोष दोनों दूर होते हैं.

सूखी तुलसी भी बदल सकती है किस्मत, वास्तु के 3 चमत्कारी उपाय

 पारा 40 डिग्री के पार है, लू के थपेड़े और चिलचिलाती धूप ने न सिर्फ इंसानों का बुरा हाल कर रखा है, बल्कि घर के आंगन में लगी तुलसी भी इस तपिश को झेल नहीं पा रही है. लाख जतन के बाद भी अगर इस भीषण गर्मी में तुलसी सूख गई है, तो निराश होकर उसे फेंकने की गलती बिल्कुल न करें. वास्तु शास्त्र में माना गया है कि जो तुलसी चिलचिलाती धूप में सूख जाती है, उसकी सूखी लकड़ियों में भी चमत्कारिक शक्तियां होती हैं. ये सूखी लकड़ियां न केवल आपके घर की नकारात्मकता को सोख सकती हैं, बल्कि आर्थिक तंगी और वास्तु दोष जैसी समस्याओं के लिए रामबाण इलाज साबित हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि इस भीषण गर्मी में सूखी हुई तुलसी की लकड़ियों के वो 3 अचूक उपाय, जो आपके जीवन में खुशहाली की ठंडी बयार ला सकते हैं. 1. मुख्य द्वार पर बांधें लकड़ी वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में आए दिन क्लेश होता है या आपको लगता है कि घर को किसी की नजर लग गई है, तो सूखी तुलसी की छोटी सी लकड़ी उठाएं. इसे एक साफ लाल कपड़े में लपेटकर कलावा की मदद से घर के मुख्य द्वार पर बीचों-बीच लटका दें. माना जाता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. 2. तिजोरी में रखें एक टुकड़ा: खिंची चली आएंगी लक्ष्मी अगर कड़ी मेहनत के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिक रहा या फिजूलखर्ची बढ़ गई है, तो सूखी तुलसी की लकड़ी या उसकी जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा लें.  इसे गंगाजल से पवित्र करके पीले कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी या धन रखने वाली अलमारी में रख दें.  मान्यता है कि यह उपाय धन को आकर्षित करता है . इससे कंगाली दूर होती है. 3. तुलसी दीप से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. किसी भी शुभ तिथि या एकादशी के दिन जब आप घी का दीपक जलाएं, तो उसमें सूखी तुलसी की एक छोटी सी लकड़ी डाल दें. इसे तुलसी दीप कहा जाता है. ऐसा करने से घर के वास्तु दोषों का नाश होता है, रुके हुए काम बनने लगते हैं. भूलकर भी न करें ये गलती     तुलसी को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है, इसलिए पौधा सूखने के बाद भी उसकी लकड़ियों का अपमान न करें.     इन्हें कभी भी गंदे हाथों से न छुएं.     लकड़ियों को इधर-उधर कचरे या नाली में न फेंकें.     उपाय करने के बाद बची हुई लकड़ियों को गमले की मिट्टी में ही दबा दें या पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें.  

वास्तु टिप्स: घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना हो सकता है नुकसान

ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में घर का सबसे पवित्र स्थान मंदिर को माना गया है। अपने घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए मनुष्य सुबह-शाम नियमित पूजा करता है और देवी-देवताओं की आराधना करता है। इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी पड़ता है। लेकिन वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में कुछ चीजों को रखना वर्जित माना गया है। खंडित मूर्तियां, दो शंख सहित कुछ चीजें पूजा घर में रखने से इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है। साथ ही, अनजाने में हुई गलतियों के चलते पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं से कि घर के मंदिर में किन-किन चीजों को नहीं रखना चाहिए। पूजा घर में न रखें अत्यधिक बड़ी मूर्तियां वास्तुशास्त्र में घर के मंदिर को लेकर कई नियम व टिप्स बताए गए हैं। मान्यता है कि कभी भी पूजा घर में अत्यधिक बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। मंदिर में 3 से 6 इंच की मूर्तियां रखी जा सकती हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से आसपास ऊर्जा का एक समान प्रवाह बना रहता है। वहीं, अत्यधिक बड़ी भगवान की मूर्तियां पूजा घर में स्थापित करने से इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है। बड़ी मूर्तियां मंदिर में स्थापित की जाती हैं वहीं, घर के मंदिर में 3 से 6 इंच की मूर्ति रखनी चाहिए। मंदिर में न रखें दो शंख अगर आपने घर के मंदिर में दो शंख रखे हैं, तो उसे वहां से हटा देना चाहिए। मान्यता है कि गलती से भी पूजा घर में दो शंख नहीं रखने चाहिए। कहा जाता है कि घर में दो शंख रखने से इसका नकारात्मक प्रभाव आसपास की ऊर्जा पर और परिवार के सदस्यों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए हमेशा घर के मंदिर में एक ही शंख रखना चाहिए। साथ ही, कभी भी शंख से शिवलिंग का अभिषेक नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश की तीन प्रतिमा न रखें कई लोग मंदिर में एक ही भगवान की दो-दो प्रतिमाएं रखते हैं। शास्त्रों में ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी देवी-देवता की फोटो या मूर्ति घर के मंदिर में दो नहीं रखनी चाहिए। विशेषतौर पर भगवान गणेश की मूर्ति या प्रतिमा की संख्या पूरे घर में तीन नहीं होनी चाहिए। ऐसा करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इससे शुभ कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। मंदिर में टूटे-फूटे बर्तन न रखें अगर आपके घर के मंदिर में किसी भी प्रकार के टूटी-फूटी थाली, कटोरी, गिलास आदि बर्तन रखे हैं, तो उसे तुरंत पूजा घर से हटा दें। पूजा के लिए टूटे-फूटे और गंदे बर्तनों को प्रयोग करना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में दोष भी लग सकता है। जिससे घर में कई समस्याएं उत्पन्न होने का संकट रहता है। यह गृह क्लेश और कार्यों में बाधाओं का कारण भी बन सकता है। इसलिए मंदिर के बर्तनों से जुड़े इस नियम का ध्यान जरूर रखना चाहिए। पूजा घर में खाली पैकेट और गंदगी न रखें कई बार हम अनजाने में अगरबत्ती, धूपबत्ती या बाती का पैकेट खत्म होने के बाद उसे मंदिर में ही भूल जाते हैं। इस प्रकार की वस्तुओं को मंदिर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। साथ ही, मंदिर को समय-समय पर साफ करना भी आवश्यक होता है। वहां कभी भी अगरबत्ती, धूपबत्ती आदि के खाली पैकेट नहीं रखने चाहिए और न ही किसी प्रकार की गंदगी होनी चाहिए। ऐसा करने से वास्तुदोष लग सकता है। मंदिर में ज्यादा देर न रखें भोग काफी लोग अपने घर के मंदिर में भगवान को भोग लगाकर उसे देर तक या पूरी रात तक वहीं छोड़ देते हैं। ऐसा करना सही नहीं माना जाता है। हमेशा भगवान को भोग लगाने के कुछ देर बाद ही प्रसाद को वहां से उठाकर सभी में बांट देना चाहिए। मान्यता है कि भगवान को प्रसाद चढ़ाते ही उनका भोग लग जाता है। ऐसे में उसे वहां से हटा देना चाहिए। साथ ही, बर्तनों को साफ करके रखना चाहिए।

डाइनिंग टेबल वास्तु टिप्स: इन गलतियों से बचें, वरना हो सकता है नुकसान

अक्सर हम घर की साफ-सफाई और सजावट पर ध्यान तो देते हैं, लेकिन कुछ छोटी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो धीरे-धीरे नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं. खासकर डाइनिंग टेबल जहां पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन करता है. वास्तु शास्त्र मानता है कि यहां रखी चीजें सीधे घर की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं. इसीलिए जरूरी है कि डाइनिंग टेबल को हमेशा साफ, सुसंगठित और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखा जाए. आइए जानते हैं किन चीजों को यहां रखने से बचना चाहिए. दवाइयों को रखें दूर डाइनिंग टेबल पर दवाइयां रखना अशुभ माना जाता है. यह संकेत देता है कि घर में बीमारियों का प्रभाव बढ़ सकता है. कोशिश करें कि दवाइयों को हमेशा किसी अलग और निर्धारित स्थान पर ही रखें, ताकि भोजन के स्थान की ऊर्जा शुद्ध बनी रहे. नुकीली वस्तुओं से बनती है नकारात्मकता चाकू, कैंची या अन्य धारदार चीजों को खाने के बाद टेबल पर छोड़ देना ठीक नहीं माना जाता. वास्तु के अनुसार, ये वस्तुएं तनाव और विवाद को बढ़ावा दे सकती हैं.  इन्हें उपयोग के तुरंत बाद हटा देना बेहतर होता है. जूठे बर्तन और गंदगी से बचें खाना खाने के बाद टेबल पर जूठे बर्तन या बचा हुआ खाना छोड़ना नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. यह आदत धीरे-धीरे घर की आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकती है. इसलिए हमेशा टेबल को तुरंत साफ करना चाहिए. बेकार सामान न रखें डाइनिंग टेबल को स्टोर की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है. अखबार, बिल, बैग या अन्य अनावश्यक चीजें यहां रखने से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है.  टेबल जितनी साफ और खाली होगी, उतना ही सकारात्मक माहौल बना रहेगा. टूटी-फूटी या खराब चीजें हटाएं यदि टेबल पर टूटी प्लेट, क्रैक वाले बर्तन या खराब सजावटी सामान रखा हो, तो यह भी वास्तु दोष पैदा कर सकता है.  ऐसी चीजें घर में रुकावट और आर्थिक नुकसान का संकेत मानी जाती हैं. क्या करें? डाइनिंग टेबल पर ताजे फूल, फल या साफ-सुथरा टेबल कवर रखना शुभ माना जाता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार के बीच सामंजस्य बना रहता है.

T-पॉइंट पर घर क्यों माना जाता है अशुभ? जानें वास्तु शास्त्र के प्रभाव और उपाय

टी-पॉइंट पर घर होना वास्तुशास्त्र के अनुसार सही नहीं माना जाता है। यह घर और परिवार के सदस्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जिसके चलते वहां अशांति बनी रह सकती है। वास्तु में भूमि की दिशा, स्थान, आकार, प्रकार के शुभ-अशुभ प्रभावों का वर्णन किया गया है। इनका ख्याल रखकर मकान बनवाने से वहां शुभता बनी रहती है। लेकिन अगर घर वास्तु अनुसार न हो तो इससे वास्तु दोष लगने की आशंका रहती है। वास्तु गुरु मान्या कहती हैं कि T-Point पर घर होना अशांति और गृह क्लेश का कारण बन सकता है। अगर पहले से घर टी-पॉइंट पर हो तो इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। आइए विस्तार से जानें टी-पॉइंट पर घर होने के प्रभाव और इससे बचाव के उपाय। टी पॉइंट पर घर होना चाहिए या नहीं? वास्तु शास्त्र में घर के आकार, प्रकार दिशा आदि के बारे में कई नियम बताए गए हैं, जिनका ख्याल रखने से वास्तु दोष नहीं लगता है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, अगर मकान टी पॉइंट पर बना हो तो इसे वास्तु के हिसाब से सही नहीं माना जाता है क्योंकि, सड़क से आने वाली ऊर्जा सीधा वहां मौजूद घर को प्रभावित करती है। इस ऊर्जा प्रवाह लगातार बना रहता है, जिसके चलते घर के माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके चलते घर और परिवार की शांति में बाधा उत्पन्न होने लगती है। साथ ही, यह गृह क्लेश और अशांति का बड़ा कारण भी बन सकता है। टी-पॉइंट वाला घर शांति को करता है प्रभावित अगर घर टी-पॉइंट पर बना हो तो इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों और वहां के माहौल पर भी पड़ता है। सबसे ज्यादा इसका प्रभाव घर की शांति पर पड़ता है। इससे परिवार में छोटी-छोटी बातों पर बहस या अनबन बनी रह सकती है। घर में भी मन शांत महसूस नहीं करता जिसके चलते चिड़चिड़ापन बना रह सकता है। ऐसे में छोटी बातों पर अधिक सोचने लगते हैं जो गृह क्लेश और अशांति का कारण बन सकता है। इसके प्रभाव से बाहर से घर पहुंचने पर भी वहां शांति और सुख महसूस नहीं होता है। टी-पॉइंट पर घर होने से इसका असर नींद पर भी पड़ सकता है, जिससे ठीक से आराम नहीं मिल पाता है। क्योंकि वहां लगातार वाहनों का आना-जाना लगा रहता है और ऊर्जा बहुत अधिक रहती है। बहार के शोर का प्रतिकूल प्रभाव घर के माहौल पर भी पड़ता है, जिससे वहां का माहौल शांतिपूर्ण महसूस नहीं हो पाता है। टी-पॉइंट घर का भावनाओं पर भी दिखता है प्रभाव वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, घर टी-पॉइंट पर हो तो इसका प्रभाव वहां रह रहे लोगों की भावनाओं पर भी देखने को मिल सकता है। घर में पहुंचने के बाद भी मन को सुकून महसूस नहीं होता है। अपने ही घर में सुरक्षित न महसूस करने जैसी भावना भी आ सकती है। साथ ही, वहां की ऊर्जा के चलते बार-बार घर से कहीं बाहर जाने का मन कर सकता है और परिवार के बीच तालमेल बनाए रखने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। टी-पॉइंट पर घर हो तो क्या करें?  अगर आपका घर टी-पॉइंट पर है तो इसके लिए घर की मुख्य द्वार के सामने बड़े और घने पौधे लगा सकते हैं। इससे बाहर की ऊर्जा घर में सीधा प्रवेश नहीं करेगी। आप घर के बाहर एक कॉन्वेक्स मिरर यानी उत्तल दर्पण भी लगा सकते हैं। ऐसा करने से ऊर्जा के प्रवाह को बदला जा सकता है जिससे परिवार का माहौल सकारात्मक बना रहता है। घर का मुख्य द्वार अगर उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में हो तो वहां आप वॉटर फाउंटेन लगा सकते हैं। इससे आसपास का माहौल सकारात्मक बना रहता है।

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में क्या करें और क्या नहीं?

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा अग्नि को दर्शाती है साथ ही इस दिशा में मंगल और यम की दिशा भी कहा गया है। अगर दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार संतुलित न हो तो घर परिवार के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही आर्थिक मामलों में कुछ न कुछ बाधाएं आती रहती हैं। तो आइए जानते हैं वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, दक्षिण दिशा को कैसा होना चाहिए। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को लेकर क्या नियम बताए गए हैं। दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए 1) वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण दिशा में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। पानी से संबंधित चीजें दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, जल तत्व दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। 2) दक्षिण दिशा में अग्नि की दिशा बताया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह को कोई एंटी एलिमेंट जैसे पानी की टंकी और वॉशिंग एरिया नहीं होना चाहिए। न ही इस दिशा में पूजा घर बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो घर परिवार के सभी लोगों को कामकाज में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार नहीं होता है। 3) दक्षिण दिशा में टॉयलेट भी नहीं बनाना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण में टॉयलेट होने काफी हानिकारक होता है। अगर इस दिशा में टॉयलेट होने पर काम बनते बनते बिगड़ने लगते हैं। साथ ही लोगों की लोकप्रियता भी खराब हो जाती है। 4) दक्षिण दिशा को मंगल की दिशा और यम की दिशा भी माना गया है। इसे यम के द्वार भी कहा जाता है। इस दिशा अगर काले या नीला रंग बोता है तो वह आपको कोर्ट केस या दुर्घटना आदि होने की आशंका अधिक रहती है। साथ ही इस दिशा में घर में पानी का जमाव न होने दें। क्योंकि, इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में स्फटिक टैंक या स्विमिंग पूल न बनवाएं। दक्षिण दिशा में क्या बना सकते हैं 1) दक्षिण दिशा को अग्नि की दिशा भी कहा गया है और यह आपकी प्रसिद्धि से भी जुड़ी दिशा में ऐसे में इस एरिया में आप चाहें तो मास्टर बेडरुम बनवा सकते हैं। इस दिशा में मास्टर बेडरुम होने शुभ परिणाम देता है।