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वास्तु शास्त्र की चेतावनी: इस दिशा में बैठकर भोजन करने से बढ़ सकती हैं परेशानियां

अन्न को हिंदू धर्म में 'ब्रह्म' माना गया है और भोजन करने की प्रक्रिया को एक 'यज्ञ' के समान पवित्र माना गया है। अक्सर हम इस बात पर तो ध्यान देते हैं कि हम क्या खा रहे हैं, लेकिन हम 'किधर' मुंह करके खा रहे हैं, इसे नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गलत दिशा में बैठकर किया गया भोजन न केवल बीमारियों को बुलावा देता है, बल्कि घर की सुख-शांति भी छीन सकता है। यदि आप भी बार-बार बीमार पड़ते हैं या घर में बरकत नहीं रहती, तो एक बार अपने भोजन करने की दिशा जरूर बदलें। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार भोजन करने की सही और गलत दिशाएं। 1. पूर्व दिशा वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा माना गया है। यदि आप पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करते हैं, तो इससे शरीर को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह दिशा मानसिक तनाव को दूर करती है और लंबी आयु प्रदान करती है। बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए इस दिशा में बैठकर खाना सबसे उत्तम माना गया है। 2. उत्तर दिशा उत्तर दिशा को कुबेर और मां लक्ष्मी की दिशा माना जाता है। इस दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से शरीर निरोगी और स्वस्थ रहता है। जो लोग करियर में सफलता चाहते हैं या धन प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उन्हें उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए भी यह दिशा श्रेष्ठ है। 3. पश्चिम दिशा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करना वास्तु में मिला-जुला परिणाम देता है, लेकिन अक्सर इसे पाचन के लिए ठीक नहीं माना जाता। इस दिशा में बैठकर खाना खाने से पाचन तंत्र (Digestion) खराब हो सकता है और व्यक्ति के मन में भौतिक इच्छाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, जो मानसिक अशांति का कारण बनती हैं। 4. दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करना सबसे हानिकारक माना गया है। इस दिशा को यम की दिशा माना जाता है। दक्षिण दिशा में बैठकर खाना खाने से पेट संबंधी गंभीर रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, इससे मान-सम्मान में कमी और आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड़ सकता है।

घर में अन्न की कमी दूर करेगी ये एक चीज़, बस चावल के डिब्बे में रखें

भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है। रसोई केवल भोजन पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह ऊर्जा केंद्र है जो पूरे परिवार के स्वास्थ्य और भाग्य को नियंत्रित करता है। वास्तु के अनुसार, रसोई में रखी हर वस्तु और अनाज का अपना एक विशेष महत्व होता है। विशेष रूप से चावल, जिसे अक्षत कहा जाता है, हिंदू धर्म में पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। चावल का संबंध चंद्रमा और माता लक्ष्मी से है। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे विशेष उपाय बताए गए हैं जिन्हें यदि चावल के डिब्बे के साथ किया जाए, तो घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती। आइए जानते हैं कि चावल के डिब्बे में वह कौन सी गुप्त चीज है जिसे रखने से आपके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और इसके पीछे के ज्योतिषीय व वास्तु कारण क्या हैं। चावल के डिब्बे में क्या रखें ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप चाहते हैं कि आपके घर का भंडार हमेशा भरा रहे, तो अपने चावल रखने वाले कंटेनर या डिब्बे में 'लाल कपड़े में बंधे हुए 5 या 11 साबुत हल्दी की गांठें या चांदी का एक सिक्का रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। डिब्बे को कभी पूरी तरह खाली न होने दें वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि रसोई में चावल का डिब्बा कभी भी पूरी तरह खाली नहीं होना चाहिए। जैसे ही चावल खत्म होने वाले हों, उससे पहले ही नया स्टॉक भर दें। पूरी तरह खाली डिब्बा घर में कंगाली और अभाव का संकेत माना जाता है। यह परिवार की आर्थिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करता है। सही दिशा का चुनाव रसोई में चावल और अन्य अनाज रखने की सबसे उत्तम दिशा वायव्य कोण मानी गई है। यदि आप उत्तर-पश्चिम दिशा में अनाज रखते हैं, तो घर में अन्न की आवक बनी रहती है और बरकत होती है। सफाई और स्वच्छता चावल के डिब्बे को हमेशा साफ-सुथरा रखें। डिब्बे के आसपास गंदगी या जाले नहीं होने चाहिए। गंदे डिब्बे में रखा अनाज राहु के दुष्प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे घर में कलह और बीमारियां आती हैं। बरकत बढ़ाने के अन्य प्रभावी उपाय यदि संभव हो, तो चावल के डिब्बे में एक चांदी का सिक्का रखें। चांदी चंद्रमा को मजबूत करती है, जिससे धन का संचय बढ़ता है। 5 साबुत हल्दी की गांठों को पीले कपड़े में बांधकर चावल के डिब्बे में रखने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे सौभाग्य और समृद्धि आती है। यदि चांदी उपलब्ध न हो, तो तांबे का एक साफ सिक्का भी रखा जा सकता है। यह सूर्य की ऊर्जा प्रदान करता है।

कछुआ अंगूठी पहनने से पहले सावधान! इन राशि वालों को हो सकता है नुकसान

कछुए वाली अंगूठी आजकल एक फैशन बन गई है, लेकिन वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध सीधे आपकी किस्मत और आर्थिक स्थिति से होता है। कछुए को भगवान विष्णु के 'कूर्म अवतार' का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे धारण करने से पहले कुछ नियमों को जानना बहुत जरूरी है। कछुए वाली अंगूठी पहनने के बड़े फायदे आर्थिक समृद्धि: शास्त्रों के अनुसार, कछुआ धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रिय माना जाता है। इसे पहनने से घर में बरकत आती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कछुआ धैर्य और शांति का प्रतीक है। इसे धारण करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक तनाव कम होता है। सकारात्मक ऊर्जा: यह अंगूठी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति लाती है। किस धातु में पहनें अंगूठी? धातु का चुनाव आपकी राशि और इसके प्रभाव को तय करता है: चांदी : वास्तु शास्त्र के अनुसार, कछुए की अंगूठी के लिए चांदी सबसे उत्तम धातु मानी जाती है। यह मन को शांत रखती है और शुभ फल देती है। सोना या तांबा: अगर आपकी कुंडली अनुमति देती है, तो आप इसे सोने या तांबे में भी बनवा सकते हैं, लेकिन चांदी को सबसे प्रभावशाली माना गया है। पहनने की सही दिशा और तरीका कछुए का मुख: अंगूठी पहनते समय ध्यान दें कि कछुए का मुख हमेशा पहनने वाले की तरफ (अंदर की ओर) होना चाहिए। इससे धन आपकी ओर आकर्षित होता है। मुख बाहर की ओर होने से धन व्यय होने की संभावना रहती है।  

अगर आप भी दरवाजे के पीछे टांगते हैं कपड़े, तो हो जाएं अलर्ट!

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य दरवाजा सकारात्मक ऊर्जा (प्राणिक ऊर्जा) के प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। इसके पीछे कपड़े टांगना या कोई बाधा रखना शुभ नहीं माना जाता। मुख्य दरवाजे के पीछे कपड़े टांगना सही नहीं है क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करता है। अन्य दरवाजों पर कपड़े टांगने में कोई बड़ी समस्या नहीं है, बशर्ते इसे सुव्यवस्थित और स्वच्छ रखा जाए। यदि यह आपकी आदत है और इसे बदलना संभव नहीं है, तो सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से सफाई और दरवाजे की देखभाल करें। आइए जानें, इससे जुड़े विभिन्न पहलु- दरवाजे के पीछे कपड़े टांगने के प्रभाव ऊर्जा का अवरोध: दरवाजे के पीछे कपड़े टांगने से दरवाजे का खुलना सीमित हो सकता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे घर में तनाव या नकारात्मकता बढ़ सकती है। अव्यवस्था और मानसिक प्रभाव: दरवाजे के पीछे टंगे कपड़े अव्यवस्थित ऊर्जा (क्लटर एनर्जी) का निर्माण करते हैं। इससे घर के सदस्यों की मानसिक शांति और ध्यान भंग हो सकता है। मुख्य द्वार के पीछे टंगे कपड़े: यदि मुख्य द्वार के पीछे कपड़े टांगे जाते हैं तो यह विशेष रूप से अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, यह धन और अवसरों के प्रवाह को रोक सकता है। बैडरूम और अन्य दरवाजों पर कपड़े: बैडरूम या अन्य दरवाजों के पीछे कपड़े टांगना उतना हानिकारक नहीं होता, लेकिन इसे नियमित रूप से व्यवस्थित करना चाहिए। वास्तु-अनुकूल उपाय दरवाजे पर बाधा न बनाएं: मुख्य दरवाजे के पीछे या किसी अन्य दरवाजे के पीछे ऐसी चीजें न रखें जो उसे पूरी तरह खुलने से रोकें। हुक या हैंगर का उपयोग: यदि कपड़े टांगना आवश्यक है, तो दरवाजे के ऊपरी हिस्से में हल्के और व्यवस्थित हुक का उपयोग करें। दरवाजे के पास स्वच्छता रखें: नियमित रूप से दरवाजे के पास साफ-सफाई और सुव्यवस्था बनाए रखें। दरवाजे के पास ऊर्जा बढ़ाने वाले उपाय: सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए मुख्य दरवाजे के पास तुलसी का पौधा, स्वस्तिक चिन्ह या तोरण लगाएं। 

बसंत पंचमी 2026: जानिए किस दिशा में करें मां सरस्वती की स्थापना, पढ़ाई-करियर में मिलेगा लाभ

वैदिक पंचांग के अनुसार, 23 जनवरी को बसंत पंचमी को मनाई जाएगी। यह दिन विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मां सरस्वती अवतरित हुई थीं। इसलिए इस तिथि पर बसंत पंचमी का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद लोग घरों में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने से साधक पूजा के पूर्ण फल की प्राप्ति से वंचित रहता है। इसलिए शुभ दिशा में मां सरस्वती की मूर्त स्थापित करनी चाहिए। साथ ही मूर्ति को घर लाने से पहले वास्तु शास्त्र के नियम के बारे में जरूर जान लें। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं किस मुद्रा में होनी चाहिए मां सरस्वती की मूर्ति और स्थापित करने की सही दिशा। ये हैं शुभ दिशा     वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा में सरस्वती की मूर्ति को स्थापित कर पूजा करने से साधक को ज्ञान की प्राप्ति होती है और मां सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।     इसके अलावा उत्तर पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित करने से धन में वृद्धि होती है और करियर में सफलता के मार्ग खुलते हैं।     सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए मां सरस्वती की मूर्ति को उत्तर दिशा में स्थापित कर सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और करियर और जॉब में सफलता मिलता है। किस मुद्रा में होनी चाहिए मूर्ति     बसंत पंचमी की पूजा के लिए कमल के फूल पर बैठी हुई मां सरस्वती मूर्ति की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस मुद्रा को एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है।     मां सरस्वती के चेहरे पर प्रसन्नता का भाव होना चाहिए। घर में उदास मुद्रा वाली मुद्रा नहीं रखनी चाहिए।     मां सरस्वती के दो हाथों में वीणा हो, जो संगीत और कला का प्रतीक माना जाता है।  

कहीं आप भी तो नहीं कर रहे झाड़ू से जुड़ी यह भूल? मां लक्ष्मी हो सकती हैं रुष्ट

 सनातन धर्म में झाड़ू का विशेष महत्व है। इसका संबंध मां लक्ष्मी और घर की स्वच्छता से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, झाड़ू के द्वारा घर की दरिद्रता बाहर निकलती है और धन आगमन के मार्ग खुलते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में साफ-सफाई रहती है। वहीं, धन की देवी मां लक्ष्मी वास करती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखना चाहिए। झाड़ू से जुड़ी गलती करने से व्यक्ति को जीवन में कंगाली का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मां लक्ष्मी की नाराजगी का सामान करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं कि घर की किस दिशा में झाड़ू रखनी चाहिए और इससे जुड़े नियम के बारे में। वास्तु शास्त्र में झाड़ू से जुड़े नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है। वास्तु के अनुसार, झाड़ू को घर की उत्तम दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति ठीक बनी रहती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है, लेकिन झाड़ू को गलत दिशा में रखने से जातक को धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। किस दिशा में रखें झाड़ू? वास्तु के अनुसार, झाड़ू रखने के लिए पश्चिम दिशा को उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस दिशा को धन और प्रसिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी झाड़ू को रख सकते हैं। यह दिशा स्थिरता प्रदान करती है। भूलकर भी न रखें इस दिशा में झाड़ू झाड़ू को भूलकर भी उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में झाड़ू रखने से घर में दरिद्रता का आगमन होता है। साथ ही धन की कमी हो सकती है। अगर आप भी इस तरह की गलती कर रहे हैं, तो आज ही इसमें सुधार करें। इसके अलावा झाड़ू को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना वर्जित है। इस दिशा में झाड़ू को रखने से घर में क्लेश की समस्या बन सकती है। इन बातों का रखें ध्यान     घर या ऑफिस में झाड़ू को किसी की नजरों से दूर रखना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।     घर में टूटी हुई झाड़ू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस गलती को करने से घर में दरिद्रता का वास होता है और इंसान को कई परेशानियां घेर लेती हैं।    

घर के मंदिर में न रखें ये मूर्तियां, धन हानि का संकेत

घर का मंदिर वह पवित्र कोना होता है जहां से पूरे परिवार को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है। हम अपनी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ ईश्वर की मूर्तियां स्थापित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत स्वरूप या दोषपूर्ण मूर्तियों का चुनाव आपके जीवन में अशांति और आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है। वास्तु शास्त्र और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हर मूर्ति की अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है और घर के भीतर केवल सौम्य और आशीर्वाद देने वाली ऊर्जा का ही वास होना चाहिए। अक्सर हम अनजाने में या केवल सुंदरता देखकर ऐसी मूर्तियां घर ले आते हैं जो गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। शास्त्रों का स्पष्ट मानना है कि यदि मंदिर में रखी गई मूर्तियों की ऊर्जा घर के वातावरण से मेल नहीं खाती, तो यह तरक्की में बाधा, स्वास्थ्य हानि और आपसी कलह का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। तो आइए जानते हैं कि पूजा घर में भूलकर भी कैसी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। खंडित या टूटी हुई मूर्तियां वास्तु शास्त्र का सबसे पहला नियम है कि पूजाघर में कभी भी खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। चाहे वह थोड़ी सी ही क्यों न चटक गई हो, ऐसी मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है। यह मानसिक तनाव और कार्यों में बाधा का कारण बनती है। ऐसी मूर्तियों को पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। देवी-देवताओं का रौद्र रूप घर के मंदिर में हमेशा शांत और सौम्य मुद्रा वाली मूर्तियां रखनी चाहिए। देवी काली का विकराल रूप, भगवान शिव का तांडव करते हुए स्वरूप या भगवान हनुमान का लंका दहन वाला चित्र घर में नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि रौद्र रूप वाली मूर्तियां घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध बढ़ाती हैं। एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां अक्सर लोग श्रद्धावश एक ही भगवान की कई मूर्तियां रख लेते हैं। वास्तु के अनुसार, एक ही देवी-देवता की तीन या उससे अधिक मूर्तियां या चित्र एक ही जगह पर नहीं होने चाहिए। इससे घर में गृह-क्लेश की स्थिति पैदा हो सकती है और धन का आगमन रुक सकता है। आमने-सामने न हों मूर्तियां मंदिर में मूर्तियों को इस तरह न रखें कि वे एक-दूसरे के आमने-सामने हों। विशेष रूप से गणेश जी की पीठ कभी भी दिखाई नहीं देनी चाहिए, क्योंकि उनकी पीठ में 'दरिद्रता' का वास माना जाता है। मूर्तियों का मुख हमेशा सामने की ओर या साधक की ओर होना चाहिए। पूर्वजों की तस्वीरें कई लोग भगवान के साथ ही अपने मृत पूर्वजों की तस्वीरें भी रख देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, देवता और पितर दोनों पूजनीय हैं लेकिन उनके स्थान अलग होने चाहिए। भगवान के मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखने से देव-दोष लगता है, जिससे घर की उन्नति रुक सकती है। युद्ध या विनाश दर्शाने वाली तस्वीरें महाभारत के युद्ध का दृश्य या किसी असुर का वध करते हुए उग्र तस्वीरें पूजाघर में रखने से बचें। ऐसी तस्वीरें परिवार में कलह और अशांति का माहौल पैदा करती हैं।

अगर सोई किस्मत जगानी है तो अपनाएं कपूर के ये वास्तु उपाय, शिव मंत्र से मिलेगा लाभ

नई दिल्ली घर सिर्फ ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं होता, बल्कि वहां मौजूद ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों पर गहरा असर डालती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कभी-कभी घर में बिना किसी ठोस कारण के तनाव, भारीपन या कलह रहने लगती है। इसका मुख्य कारण घर में जमा 'नकारात्मक ऊर्जा' हो सकती है। इसे दूर करने के लिए कपूर और महादेव का एक सरल मंत्र अचूक उपाय माना जाता है। कपूर का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व वास्तु में कपूर को शुद्धता और सकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। इसकी खुशबू न केवल मन को शांत करती है, बल्कि वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और नकारात्मक तरंगों को भी नष्ट करती है। उपयोग करने का सही तरीका: प्रतिदिन आरती: सुबह और शाम पूजा के समय कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर का 'ऑरा' (Aura) साफ होता है। मुख्य द्वार पर प्रयोग: घर के मुख्य दरवाजे पर कपूर का धुआं दिखाने से बाहर की बुरी नजर और नकारात्मकता घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती। बेडरूम की शुद्धि: अगर सोते समय बुरे सपने आते हों, तो सोने से पहले कमरे में कपूर जलाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है और नींद अच्छी आती है। शिव मंत्र की असीम शक्ति भगवान शिव को 'नकारात्मकता का संहारक' माना जाता है। कपूर जलाते समय अगर "ॐ नमः शिवाय" का जाप किया जाए, तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। इस मंत्र की ध्वनि से निकलने वाले कंपन घर के कोने-कोने से डर, दरिद्रता और उदासी को बाहर निकाल देते हैं। घर की सुख-शांति के लिए छोटे बदलाव सफाई का ध्यान: घर में टूटा हुआ कांच या बंद घड़ियां न रखें, ये तरक्की रोकती हैं।

घर के मंदिर में मौजूद 5 वस्तुएं रोक सकती हैं धन आगमन, आज ही हटाएं

सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। इसमें मंदिर से जुड़े नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के नियम का पालन न करने से साधक को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में कुछ चीजों को रखने से साधक को पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। साथ ही घर में मां लक्ष्मी वास नहीं करती हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल आपको बताते हैं कि मंदिर में किन चीजों को रखने से बचना चाहिए। टूटी मर्तियां मंदिर में भूलकर भी देवी-देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, टूटी हुई मूर्तियों की पूजा करने से नकारात्मकता बढ़ती है और साधक को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही पूजा का फल नहीं मिलता। ऐसे में टूटी हुई मूर्तियां को पवित्र नदी में बहा दें। पितरों की तस्वीर वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि मंदिर में पितरों की तस्वीर भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में पितरों और देवताओं का स्थान अलग-अलग बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में पितरों की मूर्ति लगाने से घर में अशांति का माहौल हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीर को घर की दक्षिण दिशा में लगाना चाहिए। सूखे हुए फूल रोजाना पूजा के दौरान प्रभु को फूल अर्पित किए जाते हैं और अगले दिन सुबह उन फूलों को प्रभु के दौरान शृंगार के दौरान हटा दिया जाता है, लेकिन उन फूलों को मंदिर में न रखें। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में सूखे हुए फूलों को रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए सूखे हुए फूलों को पवित्र नदी में बहा दें या फिर किसी पेड़ के नीचे दबा दें। कटी-फटी धार्मिक पुस्तक मंदिर में भूलकर भी कटी-फटी धार्मिक पुस्तकों को नहीं रखना चाहिए। इससे वयक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नुकीली चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में कैंची और चाकू जैसी नुकीली चीजों को नहीं रखना चाहिए, क्योंकि नुकीली चीजों को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में वर्णित नियम का पालन करने की सलाह दी जाती है।  

बाथरूम वास्तु दोष: सरल और असरदार समाधान

अगर आप अपने घर में वास्तु नियमों की अनदेखी करते हैं, तो इससे आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है, जिससे धन की बर्बादी और लड़ाई-झगड़े जैसी कई समस्याओं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि बाथरूम से जुड़ी किन गलतियों को करने से बचना चाहिए, वरना इससे आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस तरह लगता है वास्तु दोष वास्तु शास्त्र में माना गया है कि बाथरूम को हमेशा घर की पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना चाहिए। इसे दक्षिण, दक्षिण-पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाने से बचें। अगर आपका बाथरूम किचन के ठीक सामने है, तो यह वास्तु दोष की वजह बन सकता है। इसके साथ ही अगर आपके बाथरूम में टपकता हुआ नल है, तो इसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए। साथ ही बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए। इन नियमों की अनदेखी करने पर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। रखें इन बातों का ध्यान वास्तु दोष को दूर करने के लिए, बाथरूम को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। साथ ही आप बाथरूम में एक नीली बाल्टी भी रख सकते हैं, जो वास्तु की दृष्टि से फायदेमंद माना गया है। बाथरूम में हल्के रंग की टाइल्स लगाएं। इसके साथ ही पर्याप्त वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी का भी ध्यान रखना चाहिए। इस सभी बातों का ध्यान रखने से आपको वास्तु दोष से राहत देखने को मिल सकती है। जरूर करें ये काम वास्तु दोष से राहत पाने के लिए आप बाथरूम के कोनों में एक कांट की कटोरी में समुद्री नमक या फिटकरी भी रख सकते हैं, जिसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मकता ऊर्जा भी बढ़ती है। वास्तु दोष से छुटकारा पाने के लिए कपूर जलाना भी एक फायदेमंद उपाय है।