samacharsecretary.com

सूरजकुंड मेले में उपराष्ट्रपति ने चखा गोहाना का जलेबा का स्वाद

फरीदाबाद. सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव के पहले दिन ही गोहाना का जलेबा ने मेले की चौपाल पर मिठास भर दी। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मंच पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण को जलेबा का स्वाद लेने के लिए जलेबा परोसा। सीएम ने कहा कि इसकी मिठास अपनत्व का प्रतीक है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जलेबा का स्वाद लेते हुए का कि यह मिठाई नहीं बल्कि हरियाणा की संस्कृति की पहचान और आत्मनिर्भरता की गौरव गाथा है। क्योंकि यह खास जलेबा सिर्फ इसी प्रदेश में मिल सकती है। उपराष्ट्रपति की इस बात पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जलेबी हमारे प्रदेश की लोकसंस्कृति से भी जुड़ी है। मंच पर मौजूद पर्यटन मंत्री ने कहा कि जलेबा का स्वाद ही ऐसा हैं। जो इसको पूरे देश में खास बना देता हैं। सूरजकुंड मेला हर प्रोडेक्ट को लोकल टू ग्लोबल बना देता हैं। इस मेले में आकर ही गोहाना का जलेबा राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि गोहाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। गोहाना की जलेबी से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। इस दौरान इजिप्ट के एंबेसडर कामिल जायद गलाल और डिप्टी एंबेसडर दालिया तांतवे ने भी जलेबा का स्वाद लिया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और दर्शकों ने इसे हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बताया।

उपराष्ट्रपति बोले- ‘सिर्फ अपने लिए जीना गलत, समाज को कुछ वापस देना चाहिए’

चंडीगढ़. एलपीयू में 12वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया। इस समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी. राधाकृष्णन, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री मैरी एलिजाबेथ ट्रस को डॉक्टरेट मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस मौके उपराष्ट्रपति ने ग्रेजुएट छात्रों को बधाई देते हुए दीक्षांत समारोह को एक संतुष्टि का क्षण बताया। जो एक साथ जिम्मेदारी को भी बढ़ाता है – न केवल ग्रेजुएट्स के लिए, बल्कि माता-पिता, स्टाफ सदस्यों और संस्थानों के लिए भी जो युवा दिमागों को आकार देते हैं। इसी के साथ उन्होंने मेड-इन-इंडिया उत्पादों को अपनाने के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली एलपीयू की पहलों की सराहना की। उन्होंने स्नातकों से ईमानदारी, विविधता, करुणा और सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, इस बात पर जोर देते हुए कि “अपने लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ़ अपने लिए जीना गलत है। हमें समाज को कुछ वापस देना चाहिए”। इसी के साथ छात्रों से न केवल खुद नशीली दवाओं को अस्वीकार करने, बल्कि अपने साथियों को भी इस जाल में फंसने से रोकने का आग्रह किया। वहीं पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को बधाई दी और उन्हें याद दिलाया कि शिक्षा सिर्फ़ अकादमिक उपलब्धि तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसमें चरित्र निर्माण, मूल्यों और नागरिक ज़िम्मेदारी का भी महत्व है। संसद मेंबर व एलपीयू के फाउंडर चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति के साथ-साथ प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तियों की मेजबानी करने पर खुशी ज़ाहिर की। डॉ. मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि एलपीयू में शिक्षा सिर्फ डिग्रियों तक ही सीमित नहीं है। इसी के साथ यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा भारत उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था को आकार देने वाली एक केंद्रीय शक्ति है। इसी के साथ जोखिम लेने और इनोवेशन के महत्व पर ज़ोर देते हुए, ग्रेजुएट छात्रों को स्थापित प्रणालियों को चुनौती देने, असफलताओं से सीखने और दृढ़ विश्वास के साथ नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस समारोह में 2023- 2024 और 2024-2025 के रेगुलर, ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन कार्यक्रमों के 50,000 से ज़्यादा छात्रों को डिग्रियां दी गई। इसी के साथ यूनिवर्सिटी ने 320 छात्रों को अकादमिक पदक प्रदान किए, 37 स्वर्ण पदक विजेता शामिल हैं, जबकि 861 पीएचडी रिसर्चर को उनके शोध योगदान, दृढ़ता और अकादमिक कठोरता के लिए सम्मानित किया गया। इस दीक्षांत समारोह में लवली ग्रुप के चेयरमैन रमेश मित्तल, वाइस-चेयरमैन नरेश मित्तल, प्रो-चांसलर डॉ. कर्नल रश्मि मित्तल, पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत और एलपीयू के डायरेक्टर जनरल एच.आर. सिंगला भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल रमेन डेका एवं  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजभवन में आधुनिक असम के सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना एवं राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों ने श्री हजारिका के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

राधाकृष्णन के खिलाफ ISRO वैज्ञानिक को उतारने पर विचार, विपक्ष जल्द खोलेगा पत्ता

नई दिल्ली विपक्षी नेता उपराष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार पर चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सोमवार शाम बैठक करेंगे। रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने भी नए उपराष्ट्रपति के सर्वसम्मति से चुनाव के लिए राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे सहित कुछ विपक्षी दलों के नेताओं से संपर्क किया है। सूत्रों ने बताया कि विपक्ष देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए ऐसे गैर-राजनीतिक चेहरे को मैदान में उतारना चाहता है, जिसकी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कद हो। उन्होंने बताया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेताओं ने उपराष्ट्रपति पद के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक वैज्ञानिक का नाम प्रस्तावित किया है, जो तमिलनाडु से हैं और काफी सम्मानित हैं। वरिष्ठ द्रमुक नेता तिरुचि शिवा का नाम भी चर्चा में है लेकिन अन्य विपक्षी नेताओं के साथ अभी इस पर चर्चा होनी बाकी है। शिवा ने हालांकि यह कहते हुए इस संबंध में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस मामले पर उनका नेतृत्व फैसला लेगा। NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं जहां 2026 में चुनाव होने हैं। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी सहित ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के वरिष्ठ नेताओं के इस बैठक में भाग लेने की संभावना है। यह बैठक सत्तारूढ़ राजग द्वारा महाराष्ट्र के राज्यपाल राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित करने के एक दिन बाद होगी। सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की उनकी समकक्ष ममता बनर्जी सहित अन्य वरिष्ठ नेता विचार-विमर्श में डिजिटल माध्यम से शामिल हो सकते हैं जबकि अखिलेश यादव जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं के व्यक्तिगत रूप से इसमें शामिल होने की संभावना है। विपक्ष आज करेगा उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है. लेकिन विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और उम्मीदवार की घोषणा अभी बाकी है. सूत्रों की मानें तो आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया ब्लॉक का एक साझा उम्मीदवार मैदान में उतरेगा. इसको लेकर संसद में मौजूद 'सभी विपक्षी दलों के नेताओं' की बैठक आज दोपहर 12:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बुलाई गई है. उम्मीद है कि बैठक के बाद आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार का नाम घोषित किया जाएगा. किन नामों पर हो रही चर्चा? सूत्रों के मुताबिक, इंडिया ब्लॉक के शीर्ष नेता कई नामों पर चर्चा कर रहे हैं. इनमें पूर्व इसरो वैज्ञानिक मैलस्वामी अन्नादुरई का नाम भी शामिल है, जिन्होंने चंद्रयान-1 परियोजना की अगुवाई की थी. विपक्ष चाहता है कि इस चुनाव को ‘लोकतंत्र और संविधान की रक्षा’ की लड़ाई के रूप में पेश किया जाए. खबरों की मानें तो जिन नामों पर चर्चा हो रही है उनमें एक नाम तमिलनाडु से डीएमके के सांसद तिरुचि सिवा का भी है. चर्चा में शामिल तुषार गांधी का भी नाम इसके अलावा, महात्मा गांधी के परपोते और इतिहासकार तुषार गांधी का नाम भी शुरुआती चर्चा में आया है, ताकि यह चुनाव भाजपा के खिलाफ एक वैचारिक संघर्ष के रूप में दिखाया जा सके. साथ ही महाराष्ट्र से एक दलित बुद्धिजीवी को भी इंडिया ब्लॉक के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में विचार किया जा रहा है. पीएम मोदी से मिले राधाकृष्णन एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन सोमवार को दिल्ली पहुंचे. एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. उनका काफिला पहले से तैयार था और इस दौरान गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया. दिल्ली पहुंचने के बाद राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.

उपराष्ट्रपति पद के लिए नई एंट्री ने बढ़ाई हलचल, बीजेपी हाईकमान से हुई बातचीत

नई दिल्ली जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने के बाद अब अगले वाइस प्रेसिडेंट के नाम की अटकलें लगने लगी हैं। अब तक संभावितों की लिस्ट में कई बड़े नेताओं के नाम सामने चुके हैं। अब इसमें एक और बड़ा व चौंकाने वाला नाम शामिल हुआ है। दरअसल, केंद्रीय राज्य मंत्री और जेडीयू सांसद रामनाथ ठाकुर ने बुधवार शाम को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है, जिसके बाद अटकलें लगने लगी हैं कि वे भी उपराष्ट्रपति की रेस में शामिल हैं। रामनाथ ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं और इस समय जेडीयू कोटे से मोदी सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री हैं। कौन हैं रामनाथ ठाकुर, रेस में क्यों हुए शामिल? रामनाथ ठाकुर बिहार से आने वाले बड़े चेहरे हैं। वे राज्य के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर के बड़े बेटे हैं। वे लालू यादव की पहली कैबिनेट का भी हिस्सा रह चुके हैं और तब गन्ना मंत्री बनाया गया था। फिर साल 2005 से 2010 तक नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। उनके पिता कर्पूरी ठाकुर को कुछ समय पहले ही भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। रामनाथ ठाकुर के उपराष्ट्रपति की रेस में शामिल होने की कई वजहें बताई जा रही हैं। दरअसल, इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में यदि एनडीए सरकार वहीं से आने वाले किसी नेता को उपराष्ट्रपति बनाती है तो चुनाव से पहले बड़ा मैसेज जाएगा और इसका फायदा मौजूदा सरकार को राज्य में मिल सकता है। जेडीयू को साधने के लिए रामनाथ ठाकुर को बनाएगी उपराष्ट्रपति? वहीं, रामनाथ ठाकुर को उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी बिना किसी दिक्कत के पांच सालों तक केंद्र में सरकार चला सकती है। बीजेपी को इस समय अकेले दम पर लोकसभा में बहुमत नहीं है और जेडीयू व टीडीपी की मदद से सरकार चला रही है। इसी वजह से उपराष्ट्रपति का पद जेडीयू कोटे से किसी नेता को भी दिया जा सकता है। पहले बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन बाद में उनका नाम रेस से लगभग बाहर हो गया। बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश खुद को मुख्यमंत्री पद से दूर करना नहीं चाहेंगे। इसी वजह से अब उनकी जगह जेडीयू की ओर से रामनाथ ठाकुर का नाम रेस में आ गया है। यदि रामनाथ ठाकुर को एनडीए सरकार उपराष्ट्रपति बनाती है तो इससे नीतीश कुमार भी राज्य के अगले सीएम पद की रेस में बने रहेंगे और उपराष्ट्रपति जैसा बड़ा पद भी उनके ही दल के नेता को मिल जाएगा। लिस्ट में और कौन-कौन से नाम हैं शामिल? पिछले एक दशक से ज्यादा समय में मोदी सरकार हमेशा चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती है। उसकी अगली रणनीति और फैसले के बारे में बहुत ही कम बार पहले से पता चल सका है। इसी तरह इस बार भी उपराष्ट्रपति पद के लिए विभिन्न नामों की अटकलें भले ही लग रही हैं, लेकिन कौन बनेगा, इसका पता तो तभी चलेगा, जब बीजेपी खुद इसका ऐलान करेगी। हालांकि, अभी कई नाम हैं, जो संभावितों की सूची में हैं। सबसे पहले नीतीश कुमार का नाम सामने आया, लेकिन अब उनकी संभावना बहुत कम है। उनके अलावा, हरिवंश नारायण सिंह, राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा जैसे नामों की भी चर्चा है।

देश को मिलेगा नया उपराष्ट्रपति! चुनाव आयोग ने शुरू की प्रक्रिया, अधिसूचना शीघ्र

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने देश का नया उपराष्ट्रपति चुनने के लिए इलेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग की ओर से इस संबंध में प्रेस नोट जारी किया गया है। आयोग का कहना है कि गृह मंत्रालय से जानकारी मिली है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया है। अब इस पद पर चुनाव के लिए हमारी ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्दी ही चुनाव की तारीख भी घोषित कर दी जाएगी। होम मिनिस्ट्री की ओर से 22 जुलाई यानी सोमवार को ही उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। दरअसल, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार यानी 21 जुलाई 2025 को अचानक इस्तीफा दिया था. उनके इस्तीफे से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी. किसी को भी भनक नहीं लगी थी कि ऐसा भी कुछ होगा. खुद राष्ट्रपति भवन के स्टाफ हैरान थे कि जगदीप धनखड़ अचानक राष्ट्रपति से मिलने क्यों पहुंचे थे. जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह सेहत को प्राथमिकता देने के चलते इस्तीफा दे रहे हैं, मगर कांग्रेस को इस फैसले में कुछ दाला में काला जैसा दिख रहा है. चुनाव आयोग ने लिखा, 'आर्टिकल 324 के तहत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन का कार्य चुनाव आयोग करता है। इसका निर्देशन राष्ट्रपति की ओर से किया जाता है। चुनाव आयोग ने अब उपराष्ट्रपति के इलेक्शन की तैयारी शुरू कर दी है। अभी इसकी तैयारी चल रही है और उसे पूरा करने के बाद जल्दी ही इलेक्शन की डेट का ऐलान किया जाएगा।' आयोग ने कहा कि इलेक्शन की तारीख का ऐलान करने से पहले हम कुछ चीजों पर काम कर रहे हैं। इनमें से एक है- इलेक्टोरल कॉलेज तैयार करना। इसके तहत लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को मिलाकर एक वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी। उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा के नामित सदस्यों को भी वोटिंग का अधिकार होता है। अगर राष्ट्रपति के चुनाव में सभी सांसदों के साथ देशभर के विधानसभाओं के विधायक वोट डालते हैं तो उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने का काम केवल सांसद करते हैं. चूंकि ये पद 21 जुलाई को धनखड़ के इस्तीफे से खाली हो चुका है, लिहाजा देश को 21 जनवरी तक नया उप राष्ट्रपति मिल जाना चाहिए. उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग जल्द ही इसका नोटिफिकेशन जारी करके इसकी प्रक्रिया शुरू करेगा. हालांकि अक्टूबर – नवंबरतक देश में बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने हें. बैलेट बॉक्स से होता है ये चुनाव उपराष्ट्रपति का चुनाव सीक्रेट बैलेट बॉक्स के जरिए ही होता है. वोटिंग के बाद इसके वोटों की काउंटिंग होती है. उसी दिन रिजल्ट घोषित हो जाता है. उपराष्ट्रपति के चुनाव में रिटर्निंग अफसर की भूमिका लोकसभा के महासचिव निभाते हैं. पहली बार कब हुआ था उप राष्ट्रपति का चुनाव देश में पहली बार उपराष्ट्रपति का चुनाव 1952 में राष्ट्रपति चुनाव के साथ ही शुरू हुआ था. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के पहले उपराष्ट्रपति बने थे. वो दो कार्यकाल तक इस पद पर रहे. उप राष्ट्रपति का कार्यकाल भी पांच साल का ही होता है. ये चुनाव इसलिए अहम है क्योंकि उप राष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद से ही उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है. संसद के दोनों सदनों के सदस्य इसमें हिस्सा लेते हैं और हर सदस्य केवल एक वोट ही डाल सकता है. राष्ट्रपति चुनाव में चुने हुए सांसदों के साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उप राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है. क्या मनोनीत सदस्य कर सकते हैं वोट दोनों सदनों के लिए मनोनीत सांसद राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते लेकिन वे उप राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग कर सकते हैं. इस तरह से देखा जाए तो उप राष्ट्रपति चुनाव में दोनों सदनों के 790 निर्वाचक हिस्सा लेंगे. राज्यसभा – चुने हुए सदस्य: 233, मनोनीत सदस्य: 12 लोक सभा – चुने हुए सदस्य: 543, मनोनीत सदस्य: 2 कुल निर्वाचक: 790 तो इस बार क्या है वोट समीकरण लोकसभा में मौजूदा समय में 542 सांसद हैं तो राज्यसभा में 240 यानि कुल वोट 782 होंगे. इसमें मेजोरिटी मार्क 392 का होगा. एनडीए के पास 427 सांसद (लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 134) हैं, जिसमें 10 नोमिनेटेड सदस्य भी हैं. विपक्ष के पास दोनों सदनों में 355 सांसद हैं (249 लोकसभा में और 106 राज्यसभा में). इसका मतलब ये हुआ कि एनडीए से इस पद के लिए खड़ा किया गया कोई भी उम्मीदवार आराम से जीत जाएगा. मौजूदा स्थिति राज्यसभा – सदस्य: 240 मनोनीत सदस्य: 10 लोक सभा – सदस्य: 542 कुल निर्वाचक सदस्य : 782 जीतने के लिए मेजोरिटी – 392 वोटिंग में अनुपातिक पद्धति क्या होती है उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव इलेक्शन अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति (proportional representation) से किया जाता है. इसमें वोटिंग खास तरीके से होती है जिसे सिंगल ट्रांसफ़रेबल वोट सिस्टम कहते हैं. – इसमें मतदाता को वोट तो एक ही देना होता है मगर उसे अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है. – वह बैलट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद को 1, दूसरी पसंद को 2 और इसी तरह से आगे की प्राथमिकता देता है. प्रत्याशी के पास कितने प्रस्तावक और समर्थक – चुनाव में खड़े होने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 20 संसद सदस्यों को प्रस्तावक और कम से कम 20 संसद सदस्यों को समर्थक के रूप में नामित कराना होता है – उपराष्ट्रपति के रूप में प्रत्याशी बनने वाले 15,000 रुपए की जमानत राशि जमा करनी होती है. – नामांकन के बाद फिर निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करता है और योग्य उम्मीदवारों के नाम बैलट में शामिल किए जाते हैं. उप राष्ट्रपति पद के लिए पात्रता कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति होने का पात्र तभी होगा, अगर   1. भारत का नागरिक हो 2. 35 साल वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो 3. वह राज्यसभा के लिए चुने जाने की योग्यताओं को पूरा करता हो. 4. उसे उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए 5. कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन … Read more