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घूमना हुआ आसान! भारतीय पासपोर्ट पर 56 देशों में वीजा फ्री एंट्री, जानें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली भारतीय पर्यटकों के लिए विदेश यात्रा अब और आसान होने वाली है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के अनुसार, भारत 10 पायदान ऊपर चढ़कर 75वें स्थान पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि भारतीय पासपोर्ट धारक अब 56 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल/ई-वीजा के यात्रा कर सकते हैं। इससे विदेश यात्रा की लंबी प्रक्रियाओं और झंझटों से निजात मिलेगी। वीजा-फ्री देशों में भारतीयों की आसानी इन 56 देशों में कुछ ऐसे हैं, जहां भारतीय पर्यटक सिर्फ पासपोर्ट लेकर एंट्री ले सकते हैं। एशिया में भूटान, कजाकिस्तान, मकाओ, मलेशिया और नेपाल शामिल हैं। अफ्रीका में अंगोला, मॉरीशस, रवांडा और सेनेगल, जबकि कैरिबियन द्वीप समूह में बारबाडोस, जमैका, डोमिनिका और ग्रेनाडा जैसे देश शामिल हैं। ओशिनिया में फिजी, कुक द्वीप और माइक्रोनेशिया जैसे देश भारतीय पर्यटकों के लिए खुल गए हैं। मध्य पूर्व में कतर भी इस श्रेणी में आता है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) से आसान यात्रा कई देशों में ऑनलाइन वीजा की सुविधा उपलब्ध है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) कहा जाता है। इससे भारतीय पर्यटक चंद घंटों में वीजा हासिल कर सकते हैं। केन्या, सेशेल्स और सेंट किट्स और नेविस जैसे देश इस श्रेणी में आते हैं। वीजा ऑन अराइवल की सुविधा कुछ देशों में भारतीय यात्रियों को एयरपोर्ट या सीमा पर ही वीजा मिल जाता है। इस सुविधा के तहत एशियाई देशों में कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मालदीव, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। अफ्रीका में बुरुंडी, मेडागास्कर, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे, तंजानिया और अन्य देशों में भी वीजा ऑन अराइवल की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा मार्शल द्वीप, पलाऊ, समोआ और तुवालू जैसे ओशिनियाई देश और जॉर्डन, सेंट लूसिया व मॉरिशस भी इसी सुविधा के तहत आते हैं। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स और वैश्विक रैंकिंग हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 199 पासपोर्ट और 227 देशों के आधार पर रैंकिंग करता है। यह सूचकांक यह बताता है कि किसी देश का पासपोर्ट धारक बिना वीजा कितने देशों की यात्रा कर सकता है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स की शुरुआत 2000 के दशक के मध्य में हुई थी। लगातार सिंगापुर, जापान और जर्मनी शीर्ष पर बने हुए हैं, जबकि अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में थोड़ी कमजोर हुई है। फरवरी 2026 की रैंकिंग के अनुसार, सिंगापुर सबसे मजबूत पासपोर्ट के साथ 192 देशों में वीजा-फ्री एंट्री प्रदान करता है। जापान और दक्षिण कोरिया 187 देशों के लिए वीजा-फ्री यात्रा की सुविधा के साथ दूसरे स्थान पर हैं। स्वीडन और संयुक्त अरब अमीरात 186 देशों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका 179 देशों में वीजा-फ्री प्रवेश के साथ 10वें स्थान पर है। यूनाइटेड किंगडम 182 देशों के साथ सातवें स्थान पर और फ्रांस 185 देशों के साथ चौथे स्थान पर है। इस रैंकिंग के बाद भारतीय पर्यटकों के लिए विदेश यात्रा अधिक सुगम और सुविधाजनक हो गई है। अब भारतीय बिना वीजा झंझट के 56 देशों की यात्रा कर सकते हैं और कई जगहों पर वीजा ऑन अराइवल या ई-वीजा जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।

अमेरिका में वीजा धारकों पर शिकंजा, ट्रंप प्रशासन ने बनाए कड़े नियम

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने करीब 5.5 करोड़ (55 मिलियन) वीजा धारकों की संपूर्ण समीक्षा (Review) शुरू की है। इस समीक्षा का उद्देश्य है यह देखना कि किसी ने वीजा की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं किया है और अगर किया है तो उस पर डिपोर्टेशन (देश से निकाला जाना) की कार्रवाई की जा सके। किन-किन पर पड़ेगा असर? इस फैसले का असर अमेरिका में रह रहे सभी वीजा होल्डर्स पर पड़ सकता है, जैसे:     छात्र (Student Visa)     वर्क वीजा वाले कर्मचारी (H1-B, L1 वीजा आदि)     फैमिली वीजा धारक (Spouse/Dependent Visa)     पर्यटक या विज़िटर वीजा पर आए लोग     ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर चुके लोग सरकार की दलील क्या है? एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार:"अगर किसी व्यक्ति के वीजा रिकॉर्ड में ओवरस्टे (यानी तय समय से ज्यादा रुकना), आपराधिक गतिविधि, सुरक्षा के लिए खतरा, या आतंकवाद से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी मिलती है, तो उसका वीजा कभी भी रद्द किया जा सकता है।" यानी कि अगर कोई वीजा धारक नियमों के उल्लंघन में पकड़ा जाता है तो बिना किसी पूर्व चेतावनी के उनका वीजा सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। कौन कर रहा है यह जांच? यह जांच अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से की जा रही है। सभी वीजा धारकों की पृष्ठभूमि (Background) की जांच की जा रही है। इसमें पुलिस रिकॉर्ड, इमिग्रेशन हिस्ट्री, और कोर्ट केस तक की जानकारी शामिल होगी। क्यों हो रही है चिंता? इमिग्रेंट एडवोकेसी ग्रुप्स (प्रवासी अधिकार संगठनों) ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक:     यह प्रक्रिया अत्यधिक कठोर और भेदभावपूर्ण हो सकती है।     बिना स्पष्ट वजह के भी कई लोगों का वीजा रद्द किया जा सकता है।     ऐसे फैसलों से विदेशी छात्रों और कुशल कामगारों में डर का माहौल बन सकता है। पहले भी ट्रंप प्रशासन ने किए थे सख्त फैसले डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में इमिग्रेशन नीति पहले से ही काफी सख्त रही है। इससे पहले उन्होंने मुस्लिम बैन लगाया था, जिसमें कुछ देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से रोका गया था। H1-B वीजा की प्रक्रिया को कड़ा किया था और डीएसीए (DACA) जैसे कार्यक्रमों को खत्म करने की कोशिश की थी, जिससे लाखों युवा अप्रवासी प्रभावित हुए थे। भारतीयों पर क्या असर? अमेरिका में लाखों भारतीय छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स H1-B, F1 और अन्य वीजा पर रहते हैं। ऐसे में इस फैसले से भारत के हजारों परिवारों और पेशेवरों पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर वे लोग जिनकी वीजा वैधता को लेकर कोई पेचीदगी है — उन्हें डिपोर्टेशन का नोटिस मिल सकता है।