samacharsecretary.com

पंजाब में शराब ठेकेदारों को राहत, लाइसेंस फीस में 15% तक की कटौती

जालंधर/चंडीगढ़   पंजाब में आबकारी विभाग द्वारा ग्रुपों की नीलामी प्रक्रिया के बावजूद अभी भी 10 एक्साइज (आबकारी) ग्रुप अलॉट होने से रह गए हैं। महंगे रेट और कम मुनाफे के कारण ठेकेदार इन ग्रुपों को खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए लाइसेंस फीस में कुल 15 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है, ताकि लंबित ग्रुपों को जल्द से जल्द अलॉट किया जा सके। आवेदन करने की सीमा तय ठेकेदारों ने बताया कि विभाग ने अब 4 अप्रैल को दोपहर 4 बजे तक ई-टैंडर के माध्यम से आवेदन करने की अंतिम समय सीमा तय की है। इसके तहत न्यू चंडीगढ़, भारतगढ़ (रोपड़), अमृतसर सिटी सैंटर, टांडा (होशियारपुर-2), दसूया (होशियारपुर-2), बी.एम.सी. चौक (जालंधर ईस्ट), फगवाड़ा-2, बस स्टैंड (पठानकोट) और फिरोजपुर कैंट सहित कई प्रमुख क्षेत्र अभी भी लंबित ग्रुपों में शामिल हैं, जिन्हें विभाग जल्द अलॉट करना चाहता है। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते वे नए ग्रुप लेने से हिचकिचा रहे हैं।  उनका यह भी मानना है कि यदि अंग्रेजी शराब की बिक्री और वितरण पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जाए, तो बाजार में चल रही अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा सकता है और कारोबार में स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नीतियों में और सुधार किए जाएं, ताकि ठेकेदारों का भरोसा बहाल हो सके और आबकारी विभाग को भी राजस्व का नुकसान न उठाना पड़े।  …तो  राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव  फिलहाल विभाग द्वारा दी गई रियायतों के बावजूद यह देखना बाकी है कि 4 अप्रैल तक इन लंबित ग्रुपों के लिए कितने आवेदन आते हैं और स्थिति कितनी सुधरती है। इसके अलावा आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि लाइसैंस फीस में की गई 15 प्रतिशत की कटौती से ठेकेदारों को कुछ राहत मिलेगी और ई-टैंडर प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे और राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि सभी ग्रुप समय पर अलॉट हो सकें और सरकार के राजस्व लक्ष्य पूरे किए जा सकें।  विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाए।  

12वें चरण की शराब दुकान नीलामी कल, आबकारी विभाग को मिलेगा पांच हजार करोड़ का राजस्व, टेंडर आज 2 बजे खुलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत 1 अप्रैल से शराब के नए ठेके भले ही शुरू हो गए हों, लेकिन अब भी 650 समूह और दुकानें नीलामी से बाहर हैं। हालांकि इनमें से कई दुकानों को होल्ड पर रखा गया है, जिन्होंने आरपी से 20 प्रतिशत से ज्यादा पर आॅफर दिए हैं। कई बची हुई दुकानों के लिए बुधवार को 11वें राउंड की नीलामी आयोजित की गई। आबकारी विभाग के अनुसार, 11वें राउंड में 21 शराब दुकानें 130.97 करोड़ रुपए में बिकीं, जबकि इनका कुल रिजर्व प्राइस (आरपी) 150.60 करोड़ रुपए था। यानी इस राउंड में नीलामी आरपी से कम दर पर हुई। वहीं 10वें और 11वें राउंड में आरपी से 20 प्रतिशत से अधिक कम दर पर आए ऑफर को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। इनके बारे में सरकार एक-दो दिनों  में निर्णय लेगी। जिन दुकानों की नीलामी नहीं हो सकी, वहां फिलहाल आबकारी अमले द्वारा अस्थाई रूप से शराब की बिक्री की जा रही है, ताकि राजस्व प्रभावित न हो। विभाग के सामने अब भी सालाना लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है, जिसके लिए करीब 5,080 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाना बाकी है। प्रदेश में कुल 3,553 शराब दुकानें हैं, जिनमें से अब तक 11 राउंड 1200 समूहों और दुकानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। बची हुई दुकानों के लिए अब 12वें राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 3 अप्रैल दोपहर 2 बजे तक ई-टेंडर भरे जाएंगे और इसके तुरंत बाद टेंडर खोले जाएंगे।  बीओक्यू की शर्त फिर लागू, 30  फीसदी कम पर दे सकते हैं ऑफर 12वें राउंड में इस बार केवल ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यानी नीलामी (आॅक्शन) नहीं होगी। साथ ही बीओक्यू की शर्त को फिर से लागू कर दिया गया है। अब ठेकेदारों को आरपी से 30 प्रतिशत कम तक आॅफर देने की अनुमति होगी। इससे पहले के राउंड में यह सीमा हटा दी गई थी, जिसके चलते कई जगह 50 प्रतिशत तक कम आॅफर आए थे। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-टेंडर में ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% कम तक ही मान्य होगा। यानी 70% से कम का कोई भी ऑफर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे न्यूनतम बोली की सीमा तय की गई है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10वें और 11वें चरण में प्राप्त ऐसे प्रस्ताव, जो आरक्षित मूल्य के 80% या उससे अधिक हैं, उन्हें स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। वहीं 80% से कम के उच्चतम ऑफर्स को फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे आवेदकों को दोबारा ईएमडी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। समूह और इकाई स्तर पर होगी नीलामी इस चरण में शराब दुकानों की नीलामी समूह के साथ-साथ समूह में शामिल प्रत्येक दुकान के लिए अलग-अलग भी की जाएगी। राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए जिला समितियां सीमित संख्या में समूहों का पुनर्गठन करेंगी, जिसे आबकारी आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। जिन जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक है, वहां किसी भी समूह का मूल्य जिले के कुल आरक्षित मूल्य के 20% से ज्यादा नहीं रखा जाएगा। ई-टेंडर का शेड्यूल ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और ऑफर जमा करने की प्रक्रिया आज सुबह 11 बजे से शुरू हुई है, जो 3 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक चलेगी। टेंडर खोलने की प्रक्रिया 3 अप्रैल को दोपहर 2:05 बजे से शुरू होगी। अब तक 1200 समूहों की नीलामी 29 मार्च तक 1200 समूहों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जिससे लगभग 15,409.94 करोड़ रुपए का राजस्व तय हुआ है। यह आरक्षित मूल्य से 3.61% अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में इसमें 24.34% की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य स्तर पर 19,952.89 करोड़ रुपए के लक्ष्य में से अब तक 77.23% नीलामी हो चुकी है, जबकि करीब 5,080.35 करोड़ रुपए का कार्य अभी शेष है। विभाग को उम्मीद है कि लगातार ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी बनी रहेगी। अब तक की नीलामी का आंकड़ा –  वर्ष 2026-27 लक्ष्य: 19,952 करोड़ रुपए – कुल नीलामी: 1200 समूह – रिजर्व प्राइस: 14,872.54 करोड़ रुपए – प्राप्त राजस्व: 15,409.94 करोड़ रुपए – आरपी से वृद्धि: 3.61 प्रतिशत – पिछले वर्ष से वृद्धि: 24.34 प्रतिशत – अभी बाकी राजस्व: 5,080 करोड़ रुपए

शराब प्रेमियों के लिए खुशखबरी, सस्ते रेट पर बिक रही शराब, ठेकों के बाहर मेला सा माहौल

जालंधर  नई एक्साइज पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू होने जा रही है, इससे पहले शहर में शराब के ठेकों पर सस्ती दरों पर बिक्री ने लोगों को आकर्षित किया, जिसके चलते दिनभर और देर रात तक ठेकों पर भारी भीड़ देखने को मिली। पुराने ठेकों की समयावधि समाप्त होने के कारण ठेकेदारों द्वारा स्टॉक निकालने के लिए शराब कम कीमतों पर बेची गई, जिसका लोगों ने जमकर फायदा उठाया। शहर के विभिन्न इलाकों में ठेकों पर ऐसा माहौल देखने को मिला मानो मेला लगा हो। सुबह से ही ठेकों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं और शाम होते-होते यह भीड़ और बढ़ गई। कई स्थानों पर लोगों ने बिना किसी रोक-टोक के पेटियों के हिसाब से शराब खरीदी। दोपहिया वाहनों पर भी लोग शराब की पेटियां ले जाते नजर आए। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग ग्रुपों के ठेके समाप्त होने के कारण शराब बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध थी। हालांकि, एक्साइज नियमों के तहत एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही शराब बेचने का प्रावधान है, लेकिन कई स्थानों पर इन नियमों की पालना होती नजर नहीं आई। इससे यह साफ हुआ कि सस्ती शराब के कारण मांग अचानक बढ़ गई। एक्साइज विभाग द्वारा ढोल या अन्य प्रचार माध्यमों पर पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी थी, जिसके चलते ठेकों पर किसी प्रकार का औपचारिक प्रचार नहीं किया गया। इसके बावजूद भारी भीड़ इस बात का संकेत दे रही थी कि सस्ती शराब की जानकारी लोगों तक अपने आप पहुंच गई थी। विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन हालात को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने और नियमों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

शराब खरीदने के लिए सैलरी स्लिप जरूरी, इस देश में 50,000 रियाल की कमाई पर निर्भर करेगा नियम

रियाध सऊदी अरब में शराब बिक्री को लेकर नियमों में छूट दी जा रही है। इसके मुताबिक यहां पर गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक शराब खरीद सकेंगे। इसके लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब में रहने वाले गैर मुस्लिम विदेशी अपनी सैलरी स्लिप दिखाकर शराब खरीद सकते हैं। हालांकि यह जरूरी है कि उनकी मासिक कमाई 50 हजार रियाल यानी 13,300 डॉलर होनी चाहिए। अगर रुपए में बात करें तो यह कमाई करीब 12 लाख रुपए प्रतिमाह होनी चाहिए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी में रहने वाले गैर मुस्लिम रियाध में स्थित दुकान से शराब खरीद सकते हैं। इस दुकान में एंट्री के लिए उन्हें सैलरी स्लिप दिखाकर अपनी कमाई साबित करनी होगी। यह दुकान पिछले साल विदेशी राजनयिकों के लिए खोली गई थी। हाल ही में यहां से उन गैर-मुस्लिमों को भी शराब बेची जाने लगी है जो प्रीमियम रेजीडेंसी का दर्जा रखते हैं। मामले से परिचित लोगों ने यह जानकारी नाम न छापने की शर्त पर दी। इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए यह लोग अपनी पहचान नहीं जाहिर करना चाहते। बता दें कि मामले को लेकर अभी तक आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। वहीं, सरकार ने भी इसको लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। शराब में क्यों दे रहा छूट सऊदी शराब से जुड़े नियमों में छूट देने के पीछे सऊदी अरब की खास रणनीति है। ऐसा करके सऊदी अपने देश में सामाजिक प्रतिबंधों को आसाना बना रहा है। ताकि लोगों को व्यवसाय और निवेश के लिए यहां आमंत्रित किया जा सके। पिछले कुछ साल में सऊदी अरब में कई तरह के बदलाव हुए हैं। इनमें महिलाओं के ड्राइविंग पर प्रतिबंध को हटाना, सार्वजनिक मनोरंजन की इजाजत, संगीत आदि से जुड़ी छूट शामिल है। यह सब करके सऊदी खुद को अत्याधुनिकरण के रास्ते में बढ़ता दिखाना चाहता है।

भारत में शराब की खपत में शीर्ष पर कौन सा राज्य?

रायपुर   भारत में शराब का सेवन लगातार बढ़ रहा है और हर साल इसकी खपत अरबों लीटर में पहुँच रही है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि आखिर कौन सा शहर शराब पीने के मामले में सबसे आगे है। छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे ज़्यादा शराब पीने वाले लोग  ICRIER और लॉ कंसल्टिंग फर्म PLR Chambers की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में सबसे ज्यादा शराब की खपत वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ का नाम सबसे ऊपर है। यहाँ कुल आबादी के लगभग 35.6% लोग शराब का सेवन करते हैं, जो एक महत्वपूर्ण आँकड़ा है। कोलकाता नहीं, दिल्ली है खपत में दूसरे नंबर पर जब बात सबसे ज्यादा शराब पीने वाले शहरों की आती है तो स्थिति थोड़ी अलग दिखती है। 2021 के एक सर्वे के अनुसार कोलकाता में शराब की खपत दर 32.9% थी। यह दर भारत के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में अधिक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी शराब की खपत कोलकाता जितनी ही या उससे भी ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार अकेले पश्चिम बंगाल में लगभग 1.4 करोड़ लोग शराब पीते थे। प्रमुख शहरों में शराब की खपत के आँकड़े कोलकाता के बाद शराब की खपत के मामले में दिल्ली का नंबर आता है, जहाँ 31% लोग शराब का सेवन करते हैं। इस सूची में तीसरे स्थान पर चंडीगढ़ है, जहाँ 29.1% लोग शराब पीते हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में शराब पीने वालों का आँकड़ा 28.1% है, वहीं लखनऊ में यह आँकड़ा 27.9% के आसपास है। भारत के आईटी हब बेंगलुरु में शराब पीने वालों की संख्या 27.3% है। अन्य शहरों में पुणे में 26.2% और भुवनेश्वर में 24.9% लोग शराब का सेवन करते हैं। यह आँकड़े बताते हैं कि भारत के शहरी क्षेत्रों में शराब का सेवन काफी व्यापक है, और इस पर और अध्ययन की आवश्यकता है ताकि इसके सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभावों को समझा जा सके।