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यीडा ने शासन को भेजी सूचना, सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी का प्रस्ताव

यमुना एक्सप्रेस-वे : जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के लिए 500-500 एकड़ भूमि प्रस्तावित यीडा ने शासन को भेजी सूचना, सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी का प्रस्ताव दोनों सेक्टर मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में होंगे विकसित प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण को लेकर तैयारी पूरी   लखनऊ,   यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के विकास को लेकर औपचारिक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। 18 फरवरी 2026 को जारी पत्र में प्राधिकरण ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन को अवगत कराया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में इन दोनों प्रस्तावित सिटीज के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने बताया कि इन दोनों सिटी को लेकर भूमि अधिग्रहण से संबंधित योजना तैयार कर ली गई है। पत्र के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आधिकारिक प्रस्तावित जापान और सिंगापुर यात्रा के संदर्भ में प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत जापान सिटी और सिंगापुर सिटी हेतु क्षेत्र चिन्हित कर सूचना उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई थी। इसी क्रम में प्राधिकरण ने सेक्टर-5ए और सेक्टर-7 को इन परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित किया है। प्राधिकरण की महायोजना के अंतर्गत सेक्टर-7 और सेक्टर-5ए मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नियोजित हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोग न्यूनतम 70 प्रतिशत निर्धारित है। इसके साथ ही आवासीय उपयोग अधिकतम 12 प्रतिशत, वाणिज्यिक उपयोग अधिकतम 13 प्रतिशत तथा संस्थागत सुविधाएं न्यूनतम 5 प्रतिशत तक निर्धारित हैं। पत्र में कहा गया है कि इन सेक्टरों को एक इंटीग्रेटेड औद्योगिक सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है। जापानी सिटी के लिए सेक्टर-5ए  ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ क्षेत्र प्रस्तावित है। इसी प्रकार सिंगापुर सिटी के लिए सेक्टर-7, ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है। दोनों ही परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। इन सेक्टरों का विकास ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मोड पर किए जाने का प्रस्ताव है।

योगी सरकार का मेगा पुश: यमुना एक्सप्रेसवे पर 65 से अधिक इकाइयों को भूमि आवंटन

मुख्यमंत्री ने बीते रविवार को प्रदान किए विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तथा मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन पत्र सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिनिक्स से लेकर हेल्थ सेक्टर तक में निवेश होगा यमुना एक्सप्रेसवे बन रहा औद्योगिक विकास का नया पावरहाउस, योगी सरकार ने यमुना प्राधिकरण में औद्योगिकीकरण को दी रफ्तार प्राधिकरण ने 65 से अधिक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए आवंटित किए भूखंड लखनऊ,  यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थ सेक्टर के लिए एक उभरता हुआ राष्ट्रीय केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों और तेज निर्णय प्रक्रिया का परिणाम है कि हजारों करोड़ के निवेश के साथ लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। यीडा ने वर्ष 2025-26 में औद्योगिकीकरण को गति देने के लिए कई सकारात्मक और ठोस पहल की हैं। प्राधिकरण ने 65 से अधिक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भूखंड आवंटित किए हैं। बीते रविवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यीडा क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों को उद्योगों और मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन पत्र प्रदान किए थे। व्यापक निवेश के साथ उपलब्ध हो रहे रोजगार यीडा की औद्योगिक योजना के अंतर्गत 28 औद्योगिक इकाइयों को 2.32 लाख वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई, जिसमें लगभग 1332 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 8783 लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, ई-ऑक्शन योजना के माध्यम से 37 औद्योगिक इकाइयों को एक लाख वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई है, जिसमें 500 करोड़ रुपये का निवेश और 4800 रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, इनवेस्ट यूपी और शासन के विभागों द्वारा जारी एलओसी के माध्यम से 09 औद्योगिक इकाइयों को 18.77 लाख वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई है। इन इकाइयों से लगभग 21,128 करोड़ रुपये का निवेश और 18044 युवाओं के लिए रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने सौंपे आवंटन पत्र मुख्यमंत्री ने बीते रविवार को चार प्रमुख कंपनियों को भूमि आवंटन पत्र प्रदान किए। इनमें इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड को 48 एकड़ भूमि, एसेंट सर्किट प्राइवेट लि. को सेक्टर-10 स्थित इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में 16 एकड़ भूमि और अंबर इंटरप्राइजेज इंडिया लि. को सेक्टर-08 में 100 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इन तीनों परियोजनाओं में 10,500 करोड़ से ज्यादा का निवेश प्रस्तावित है, जबकि हजारों रोजगार के साधन सृजित होंगे। इनके माध्यम से सेमीकंडक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की इकाइयां स्थापित हो रही हैं। औद्योगिक विकास के साथ स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूती यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। बोधिसत्व चैरिटेबल ट्रस्ट को सेक्टर-17ए में 20.50 एकड़ भूमि मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवंटित की गई है। इस परियोजना में 532.18 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आवंटित परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारा जाए, ताकि निवेश के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।

यमुना एक्सप्रेस-वे के सेक्टर-11 में ‘फिनटेक पार्क’ और इससे जुड़ा इकोसिस्टम होगा विकसित

डिजिटल फाइनेंस, साइबर सिक्योरिटी और बैंकिंग सेक्टर में युवाओं के लिए पैदा होंगे रोजगार के हजारों नए अवसर प्रोजेक्ट के लिए इंटरनेशनल कंसल्टेंट तैयार करेंगे निवेश का रोडमैप, डीपीआर प्रक्रिया शुरू लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को नई पीढ़ी की डिजिटल अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र के सेक्टर-11 में 250 एकड़ भूमि पर “फिनटेक पार्क” विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को केवल आईटी पार्क के रूप में नहीं, वरन एक संपूर्ण फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के रूप में आकार दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख फिनटेक हब के रूप में स्थापित करेगी। यह 'फिनटेक पार्क’ बैंकिंग से ब्लॉकचेन तक का विशाल हब होगा। योजना के अनुसार, सेक्टर-11 का फिनटेक पार्क बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, इंश्योटेक, इन्वेस्टटेक, Fintech SaaS (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर ऐज ए सर्विस) और इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर से जुड़ी कंपनियों के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा। यहां वित्तीय सेवाओं से जुड़ी सभी आधुनिक तकनीकों को एक ही परिसर में विकसित और स्थापित किया जाएगा, जिससे कि स्टार्टअप से लेकर बड़ी वैश्विक कंपनियां तक, यहां निवेश के लिए आकर्षित हो सकें। फिनटेक पार्क की सबसे बड़ी शक्ति इसकी लोकेशन है। यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ा है और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अत्यंत निकट स्थित है। सरकार का आकलन है कि एयरपोर्ट की शुरुआत के बाद यह इलाका अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बनेगा। दिल्ली-एनसीआर से बेहतर कनेक्टिविटी के चलते यहां आने वाली कंपनियों को राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तर पर परिचालन में सुविधा प्राप्त होगी। इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंसल्टेंसी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीपीआर में फिनटेक पार्क के इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश मॉडल, रोजगार क्षमता और चरणबद्ध विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार डीपीआर पूरी होते ही निवेशकों के लिए प्लॉट आवंटन और अन्य प्रक्रियाओं का रोडमैप सार्वजनिक किया जाएगा। योगी सरकार इस परियोजना को रोजगार सृजन से भी जोड़कर देख रही है। फिनटेक पार्क के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। बैंकिंग टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे सेक्टरों में युवाओं को अवसर मिलेंगे। सरकार का फोकस इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश की प्रतिभाएं अब दूसरे राज्यों में पलायन करने के बजाय प्रदेश में ही वैश्विक स्तर का काम करें। योगी सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उत्तर प्रदेश को केवल परंपरागत उद्योगों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और अब फिनटेक जैसे हाई एंड (उच्च मूल्य) सेक्टर में प्रदेश को अग्रणी बनाया जाएगा। सेक्टर-11 का फिनटेक पार्क इसी नीति का हिस्सा है, जहां नीति और नीयत दोनों स्पष्ट दिखाई देती हैं। औद्योगिक क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना न केवल निवेश बढ़ाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश के डिजिटल फाइनेंस मैप पर मजबूत स्थान दिलाने में सक्षम होगी।

दिल्ली, आगरा और एनसीआर से मजबूत कनेक्टिविटी ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

यमुना एक्सप्रेस-वे सिर्फ सड़क नहीं विकास कॉरिडोर के रूप में किया गया है विकसित लखनऊ, उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में यमुना एक्सप्रेस-वे मात्र एक सड़क नहीं बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी नीति और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक है। जिस मार्ग को कभी केवल दिल्ली और आगरा को जोड़ने वाले कॉरिडोर के रूप में देखा जाता था, वही आज प्रदेश के औद्योगिक पुनर्जागरण की रीढ़ बन गया है। योगी सरकार ने यमुना एक्सप्रेस-वे को ट्रैफिक सुविधा तक सीमित न रखते हुए इसे निवेश, रोजगार और नियोजित शहरीकरण के सबसे बड़े इंजन के रूप में विकसित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसने प्रदेश की छवि बदली है। एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर औद्योगिक क्लस्टर, आधुनिक अर्बन सेंटर्स और लॉजिस्टिक्स हब का विकास इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीति अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं बल्कि जमीन पर परिणाम देने वाली साबित हो रही है। यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र आज उस नए उत्तर प्रदेश की पहचान बन रहा है जहां निवेशकों को भरोसा, युवाओं को रोजगार और प्रदेश को आर्थिक मजबूती मिल रही है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस-वे के आस-आस विकसित हो रहीं परियोजनाएं उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बुलंदी पर पहुँचाने का काम कर रही है। ये प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी की ओर ले जाएंगी। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से सरकार ने नियोजित विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है जो उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती के साथ स्थापित करेगा। 3000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह औद्योगिक विकास क्षेत्र दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। इसमें औद्योगिक, आवासीय, वाणिज्यिक और मिश्रित भूमि उपयोग की स्पष्ट योजना बनाई गई है, जिससे अनियोजित शहरीकरण पर नियंत्रण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा स्पष्ट रही है कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे बल्कि उसका लाभ आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचे। यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित हो रहा औद्योगिक क्लस्टर इसी सोच का परिणाम हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, बिजली जल निकासी और अन्य आधारभूत सुविधाओं के साथ यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। दिल्ली आगरा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से मजबूत कनेक्टिविटी ने यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग के लिए आदर्श बना दिया है। इसके साथ ही जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने जा रहा है। योगी सरकार ने एयरपोर्ट को केंद्र में रखकर औद्योगिक शहरों, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार केंद्रों की एक पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना बनाई है। यमुना एक्सप्रेस-वे की प्रमुख परियोजनाएं – जेवर के पास एचसीएल फॉक्सकॉन की ओसैट यूनिट – ओसैट यूनिट को लेकर भूमि पूजन जनवरी, 2026 में संभावित – एक हजार एकड़ का सेमीकंडक्टर और ईएमसी पार्क – मेडिकल डिवाइस पार्क और डेटा सेंटर पार्क का विकास – विवो, एलजी और हावेल्स जैसी प्रमुख कंपनियों द्वारा फैक्ट्रियों की स्थापना – वाईईआईडीए को मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब को मंजूरी – एयरपोर्ट एक्सप्रेस-वे और आरआरटीएस से मजबूत कनेक्टिविटी – दो सौ से अधिक नई फैक्ट्रियां निर्माणाधीन – सेमीकंडक्टर पार्क से बड़े स्तर पर रोजगार की संभावना – लॉजिस्टिक्स और हाई टेक हब के रूप में विकसित हो रहा है – जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक जोन से रियल एस्टेट, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में नए अवसर

यमुना एक्सप्रेसवे पर 5 बजे के बाद No Entry लागू, इन गाड़ियों पर लगी पाबंदी

लखनऊ घने कोहरे और बढ़ते सड़क हादसों के खतरे को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे पर रविवार से ट्रैक्टर-ट्रॉली के संचालन पर सख्त रोक लगा दी गई है। एक्सप्रेसवे प्रबंधन और ट्रैफिक पुलिस ने यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। नए नियमों के तहत रोज शाम 5 बजे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली का एक्सप्रेसवे पर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान यदि कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली चलते हुए पाया गया, तो उसे क्रेन की मदद से एक्सप्रेसवे से उतारकर हटाया जाएगा। यमुना एक्सप्रेसवे के वरिष्ठ प्रबंधक जेके शर्मा ने बताया कि हाल ही में मथुरा क्षेत्र में हुए सड़क हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अक्सर एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। ये वाहन न केवल धीमी गति से चलते हैं, बल्कि अधिकतर मामलों में ओवरलोड भी होते हैं। इसके अलावा, ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे की ओर उचित प्रकाश व्यवस्था नहीं होती, जिससे तेज रफ्तार में आ रहे वाहन चालकों के लिए इन्हें समय पर देख पाना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण कोहरे के दौरान कई बार गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, अब शाम 5 बजे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को किसी भी टोल बूथ से यमुना एक्सप्रेसवे पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, यदि दृश्यता 50 मीटर से कम होती है, तो वाहनों को नियंत्रित तरीके से रोककर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। रविवार को घने कोहरे के दौरान एक्सप्रेसवे पर कॉनवॉय सिस्टम के तहत वाहनों को सुरक्षित रूप से गुजराया गया। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट भी तय गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर की ट्रैफिक पुलिस ने सर्दियों में कोहरे के दौरान होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से जिले की प्रमुख सड़कों और यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की स्पीड लिमिट पहले ही कम कर दी है। यह नई स्पीड लिमिट 15 दिसंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी। यमुना एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों के लिए अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार, गर्मियों में एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। प्रशासन की वाहन चालकों से अपील अधिकारियों के अनुसार, गर्मियों में एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि कोहरे के दौरान निर्धारित गति सीमा का पालन करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी तरह की लापरवाही से बचें, ताकि सड़क हादसों को रोका जा सके।

जिसने खरीदा था प्लॉट 5 साल पहले, अब कमा रहा है मोटा मुनाफा – यमुना एक्सप्रेसवे पर 536% तक बढ़ी कीमतें

नई दिल्‍ली यमुना एक्सप्रेसवे, जो कभी सिर्फ एक रास्ता हुआ करता था, अब NCR का सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट कॉरिडोर बन गया है, पिछले पांच सालों में यहां के अपार्टमेंट और प्लॉट की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. यहां प्लॉट की कीमतें 500% से ज़्यादा और अपार्टमेंट की कीमतें 158% तक बढ़ गई हैं. इनवेस्टोएक्सपर्ट (InvestoXpert) एडवाइजर्स  की ताज़ा RealX Stats रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2025 के बीच इस कॉरिडोर पर अपार्टमेंट की कीमतें 158% बढ़ी हैं, जबकि प्लॉट की कीमतों में 536% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो पांच गुना से भी ज़्यादा है.   अपार्टमेंट की कीमतों में उछाल अपार्टमेंट खरीदना निवेशकों और खरीदारों, दोनों के लिए एक अच्छा दांव साबित हुआ है. 2020 में जहां एक वर्ग फुट की औसत कीमत 3,950 रुपये थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 10,200 रुपये हो गई. जब NCR के बाकी इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आई, तब भी यमुना एक्सप्रेसवे पर कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, साल 2025 में ही यहां अपार्टमेंट की कीमतों में 7.37% की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह साफ है कि यहां घर खरीदना एक बेहतर फैसला है. Chi 3 जैसे इलाकों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है, जहां ज़मीन की कीमतें दस गुना से भी ज़्यादा बढ़कर 1,200 रुपये प्रति वर्ग फुट से 12,950 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं हैं. सेक्टर 22D और Chi Phi में भी पांच साल में कीमतें 400% से ज़्यादा बढ़ी हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कमाल यह जबरदस्त उछाल कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से आया है. इन सबमें सबसे बड़ा कारण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो जेवर में बन रहा है और जिसका उद्घाटन 30 अक्टूबर 2025 को होना है. उम्मीद है कि यह एयरपोर्ट यहां की ग्रोथ में सबसे बड़ा रोल अदा करेगा. इसके अलावा, UER-II एक्सप्रेसवे, YEIDA की इंडस्ट्रियल टाउनशिप, लॉजिस्टिक्स पार्क और बनने वाली फिल्म सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने भी यमुना एक्सप्रेसवे को एक आम इलाके से ग्रोथ के बड़े हब में बदल दिया है.  इनवेस्टोएक्सपर्ट एडवाइजर्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, विशाल रहेजा कहते हैं, "यमुना एक्सप्रेसवे अब NCR के सबसे शानदार रियल एस्टेट कॉरिडोर में से एक बन गया है. प्लॉट की कीमतों में पांच गुना का उछाल दिखाता है कि निवेशकों को इस पर कितना भरोसा है और जेवर एयरपोर्ट और UER-II जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का यहां कितना असर हुआ है. इंडस्ट्रियल क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और प्लांड टाउनशिप के साथ, यह इलाका सिर्फ बढ़ नहीं रहा, बल्कि पूरे NCR का भविष्य तय कर रहा है." अब जब अपार्टमेंट की कीमतें 10,000 रुपये प्रति वर्ग फुट का आंकड़ा पार कर चुकी हैं और प्लॉट ने जबरदस्त रिटर्न दिया है, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यमुना एक्सप्रेसवे की यह डबल-डिजिट ग्रोथ जारी रहेगी. एयरपोर्ट के खुलने से यहां विकास का एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद है.