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योगी सरकार की पहल से रफ्तार पकड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना

योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में 94 नई इकाइयां स्थापित ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश, 2,586 युवाओं को मिला रोजगार 10 लाख रुपये तक बैंक ऋण और ब्याज अनुदान से बढ़ा आत्मनिर्भरता का मार्ग लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण रोजगार और ग्रामीण औद्योगिकीकरण सबसे ऊपर है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय गति से आगे बढ़ रही है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक योजना के अंतर्गत 94 इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिसके तहत ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश संभव हुआ है। इसके माध्यम से 2,586 युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। यह आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष में योजना ने मजबूत प्रगति दर्ज की है और शेष अवधि में लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। योग्य बेरोजगार युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ऋण इस योजना ने गांवों में उद्योग स्थापित कराकर स्थानीय युवाओं को उनके ही घर के पास रोजगार उपलब्ध कराने का रास्ता खोला है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित एवं तकनीकी योग्य बेरोजगार युवक-युवतियों को 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। योगी सरकार ने उद्यमियों के लिए ब्याज सब्सिडी की बड़ी सुविधा दी है, जिसमें सामान्य वर्ग के उद्यमियों के लिए 4% से ऊपर का ब्याज सरकार देती है, जबकि आरक्षित वर्ग के उद्यमियों का पूरा ब्याज सरकार वहन करती है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से चयन योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष एवं महिला उद्यमी पात्र हैं। चयन प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से की जाती है। सामान्य वर्ग को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना होता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में और अधिक युवाओं को इस योजना से जोड़कर स्व-रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। योगी सरकार का ग्रामीण विकास मॉडल योगी सरकार ग्रामीण विकास को केवल सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि ग्रामीण उद्योगों का नेटवर्क विकसित कर रही है। पारंपरिक कारीगरों व हस्तशिल्पकारों को सशक्त बना रही है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है और साथ ही, स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार सृजन हो रहा है। सरकार का मानना है कि “गांव मजबूत होंगे तो प्रदेश मजबूत होगा।” इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है।

डिजिटल शिक्षा से छात्राओं को संबल, योगी सरकार के अभियान को नई उड़ान

समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू, दो बालिका विद्यालयों को दिए गए टैबलेट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गोरखपुर और महाराजगंज के सर्वोदय बालिका विद्यालयों से पहल की शुरुआत लखनऊ, छात्राओं के समावेशी विकास, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत मंगलवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में मदद फाउंडेशन के सहयोग से समन्वय बैठक और टैबलेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हर बालिका विद्यालय को 20–20 टैबलेट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के डिजिटलीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके तहत कार्यक्रम में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय, गोरखपुर और महाराजगंज जनपदों के प्रधानाचार्यों को कुल 40 टैबलेट प्रदान किए गए। प्रत्येक विद्यालय को 20–20 टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसकी सफलता के आधार पर अन्य विद्यालयों में टैबलेट वितरण का दायरा बढ़ाया जाएगा। ‘डिजिटल शिक्षा समय की अनिवार्य आवश्यकता’ इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि उपस्थित रहे। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज समय की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीकी संसाधनों के माध्यम से छात्राओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनेंगी। उन्होंने इस पहल को बालिकाओं के सशक्तिकरण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ एवं डिजिटल इंडिया की भावना के अनुरूप बताया। योगी सरकार का शिक्षा व महिला सशक्तिकरण मॉडल कार्यक्रम में बताया गया कि योगी सरकार द्वारा स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट, टैबलेट व डिजिटल उपकरण कौशल व करियर उन्मुख प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को नई तकनीक से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि बालिकाएं केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें। मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि ने समाज कल्याण विभाग के साथ इस सहयोग को सामाजिक उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताया। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह, उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह, जे. राम सहित विभागीय अधिकारी एवं मदद फाउंडेशन की टीम उपस्थित रही।

प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने, 5 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य

  हाई स्किल रोजगार के सृजन की ओर बढ़ रहा है प्रदेश, थमेगा प्रतिभा पलायन लखनऊ,  उत्तर प्रदेश तेजी से विकसित होती अवसंरचना के कारण वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यह प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) निवेश की दृष्टि से एक उभरता हुआ गंतव्य बन गया है। पिछले नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश नॉलेज और सर्विस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भी मजबूती से अपने कदम बढ़ा रहा है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है की आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों का एक बहुत बड़ा केंद्र बनेगा। प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसके माध्यम से प्रदेश के पांच लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।    उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति 2024 के माध्यम से योगी सरकार ने जिस नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को अपनाया है उससे वैश्विक कंपनियों की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है। इनमें नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी सबसे प्रमुख थी। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने स्पष्ट ढांचा तैयार किया है, जिससे निवेशकों को शुरुआत से ही नियम शर्तें और दायित्व समझ में आ सकें। इससे भरोसे का वातावरण बना है, निर्णय लेने की गति तेज हुई है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में इस समय लगभग 90 जीसीसी हैं। भूमि आधारित प्रोत्साहन, निवेश की शुरुआती लागत को घटाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश सरकार की सोच है कि जब निवेशक को शुरुआती चरण में संरचनात्मक सहयोग मिलेगा तो वह लंबे समय तक प्रदेश से जुड़ा रहेगा। यही कारण है कि अस्थायी ऑफिस या किराए की व्यवस्था के स्थान पर स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत और स्थिर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रदेश सरकार का जोर केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी है। इसके लिए जवाबदेही तय की गई है, जिससे परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकें। निवेशकों की नजर में उत्तर प्रदेश अब परिणाम देने वाला राज्य है जहाँ पर निवेश करना फायदेमंद है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के जरिये प्रदेश में हाई वैल्यू रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त होने का रास्ता मिल रहा है। इससे न केवल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता सुदृढ़ होगी बल्कि प्रतिभा पलायन की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रूप से नियंत्रण संभव होगा। विशेष रूप से कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर सरकार क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। जब वैश्विक कंपनियां इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगी तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

CM योगी का सख्त संदेश: अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, भूमाफियाओं पर चलेगा कानून का डंडा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए प्रत्येक प्रार्थी से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। आमजनों के प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दिया और कहा कि अवैध कब्जा कतई बर्दाश्त नहीं है। भूमाफिया और दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी है और नियमित रूप से होती रहेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ ही लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार आपकी समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ वादी जमीन कब्जा व मारपीट आदि की शिकायत लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हर एक व्यक्ति के पास पहुंचकर उसकी शिकायत सुनी, प्रार्थना पत्र लिया और फिर अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनपद स्तर पर कानून व राजस्व के प्रकरण में तेजी से सुनवाई करते हुए इसका निस्तारण किया जाए। कानून व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में है। इसमें हीला-हवाली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन और जनपद, मंडल, रेंज व जोन के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि दबंगों व भूमाफिया के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई नियमित रूप से जारी रखें। गंभीर बीमारी से जूझ रहे कुछ पीड़ितों ने ‘जनता दर्शन’ में पहुंचकर इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। सीएम ने कहा कि सरकार इलाज के लिए आर्थिक सहायता दे रही है। आप भी हॉस्पिटल से जल्द एस्टिमेट बनवाकर दें, एस्टिमेट मिलते ही आपके इलाज में सरकार तुरंत आर्थिक मदद करेगी। धन के अभाव में इलाज नहीं रुकेगा। ‘जनता दर्शन’ में कई बच्चे भी अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे। नन्हे-मुन्ने बच्चों के सामने सीएम योगी का बालप्रेम फिर उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों का हाल जाना, उन्हें दुलारा-पुचकारा और चॉकलेट दी। सीएम ने अभिभावकों से कहा कि ठंड में बच्चों का विशेष ध्यान रखें। यह अपनत्वपूर्ण भाव सुनकर अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।

कमांड सेंटर ने महाकुम्भ-25 में भारी भीड़ को कंट्रोल करने के साथ 60 लाख से अधिक साइबर अटैक को किया ध्वस्त

45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई थी आस्था की डुबकी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिव्य-भव्य महाकुम्भ- 25 आयोजन की देश ही नहीं पूरी दुनिया ने सराहना की, जहां 45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस आयोजन को सुरक्षित बनाने के लिये यूपी पुलिस की भी देश और विदेश में तारीफ हुई। इस आयोजन को थल से लेकर नभ तक सुरक्षित बनाने के लिये यूपी पुलिस के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) ने अहम भूमिका निभाई। इस सेंटर ने जहां एक ओर जमीन पर भारी भीड़ को कंट्रोल किया, वहीं 60 लाख से अधिक साइबर अटैक को ध्वस्त किया। नर्व सेंटर बना इंट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है कि प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ-25 को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और आईसीसीसी को स्काच गोल्ड अवार्ड (SKOCH Gold Award) से सम्मानित किया गया। प्रयागराज के महाकुंभ-25 को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय समागमों में गिना गया, जहां 45 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं, मौनी अमावस्या जैसे दिनों में असाधारण पीक-फुटफॉल, हजारों हेक्टेयर में फैली अस्थायी नगरी और अभूतपूर्व लॉजिस्टिक्स का समन्वय देखने को मिला। इस विराट आयोजन की तैयारी एक साल पहले शुरू हुई थी। इसमें “पब्लिक-फर्स्ट” चिंता और जमीन-आसमान दोनों मोर्चों पर चलती क्राइसिस-मैनेजमेंट की मशीनरी का नर्व सेंटर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बना। 12 महीने पहले ही शुरू हुआ “वार-रूम मॉडल महाकुम्भ-25 की तैयारी “इवेंट मैनेजमेंट” नहीं, बल्कि सिस्टम-इंजीनियरिंग थी। इसे अमलीजामा पहनाने के लिये योजना बनाने से लेकर धरातल पर उतारने के लिये एक साल पहले तैयारी शुरू की गई। इसमें टेबल-टॉप एक्सरसाइज़, परिदृश्य-आधारित परीक्षण (scenario testing) और भीड़-ओवरफ्लो जैसी स्थितियों के लिए डिजिटल-ट्विन सिमुलेशन तक शामिल था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश था कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षित अनुभव और मेले का सुचारू संचालन हो। इसके लिये कटिंग-एज टेक्नोलॉजी को जनहित में तैनात किया गया। आईसीसीसी:नर्व सेंटर, जो भीड़, आपदा और प्रतिक्रिया को एक स्क्रीन पर लाया महाकुम्भ-25 में आईसीसीसी को केंद्रीय कमांड हब की तरह डिजाइन किया गया जो चौबीसों घंटे सक्रिय रहा। इसमें भीड़-प्रबंधन, पब्लिक-सेफ्टी, आपदा-प्रतिक्रिया, ट्रैफिक-मैनेजमेंट और इंटर-एजेंसी समन्वय से लेकर रीयल-टाइम शामिल थी। इस प्रणाली में 2,750 से अधिक एआई समर्थित कैमरे, चार ऑपरेशनल आईसीसीसी यूनिट्स, 400 से अधिक कार्मिक, 1920 कॉल-सेंटर (हर शिफ्ट में 50 ऑपरेटर), जैम-प्रूफ वायरलेस ग्रिड, ANPR-आधारित वाहन मॉनिटरिंग, VMD डिस्प्ले, और श्रद्धालुओं की सहायता हेतु 11 भाषाओं वाला AI चैटबॉट “Kumbh Sah’AI’yak” जैसे घटक शामिल रहे। यही वह “सिंगल-पॉइंट कमांड” था जहाँ से QRT डिस्पैच, ग्रीन-चैनल एक्टिवेशन, रेलवे-बस-स्टैंड इनफ्लो अलर्ट, और बहु-विभागीय सूचना-हैंडओवर ज़ीरो-डिले लक्ष्य के साथ चलाया गया। जमीन पर भीड़ और ऑनलाइन “डिजिटल हमला”: 60 लाख से अधिक साइबर अटैक महाकुम्भ-25 जितना भौतिक-रूप से बड़ा था, उतना ही “डिजिटल-फुटप्रिंट” बड़ा स्वरूप था। इसी डिजिटल निर्भरता ने इसे साइबर हमलावरों के लिए हाई-वैल्यू लक्ष्य बनाया। 45-दिवसीय आयोजन के दौरान 60 लाख से अधिक malicious/ संदिग्ध साइबर हमले रोके गए, जिनके IP 25+ देशों से ट्रेस हुए; हमलों में DDoS, ransomware-टाइप गतिविधियां, DNS poisoning, SQL injection, spoofing, brute force, web-app attacks आदि शामिल बताए गए। यह सफलता केंद्रीय एजेंसियों के समय पर अलर्ट और राज्य पुलिस/सिस्टम-इंटीग्रेटर्स की त्वरित कार्रवाई से संभव हुई। साथ ही आईआईटी कानपुर और ट्रिपलआईटी प्रयागराज की तकनीकी टीमों ने साइबर-सिक्योरिटी असेसमेंट व ऑन-ग्राउंड सपोर्ट में भूमिका निभाई। STQC (MeitY) के माध्यम से डिजिटल-इन्फ्रास्ट्रक्चर के टेस्टिंग/क्वालिटी-चेक का भी उल्लेखनीय योगदान रहा है। डिजिटल कुम्भ के साथ डिजिटल सेफ्टी को किया गया सुनिश्चित आईपीएस भानु भास्कर ने बताया कि महाकुम्भ की टेक-तैनाती में 56 “साइबर वॉरियर्स” द्वारा सक्रिय मॉनिटरिंग ने “डिजिटल कुम्भ” के साथ-साथ “डिजिटल सेफ्टी” को भी सुनिश्चित किया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि साइबर-डिफेंस को केवल “आईटी-इश्यू” नहीं माना गया, बल्कि इसे भीड़-प्रबंधन, इमरजेंसी-रिस्पॉन्स और पब्लिक-ट्रस्ट से सीधे जोड़कर देखा गया क्योंकि एक भी सफल defacement/DoS/हैकिंग घटना गलत सूचना, अफरा-तफरी और ऑपरेशनल बाधा पैदा कर सकती थी। इंटर-एजेंसी कॉर्डिनेशन: एक प्लेटफॉर्म, अनेक विभाग आईसीसीसी मॉडल की ताकत “टेक्नोलॉजी” से भी ज्यादा उसकी इंटर-एजेंसी सिंक्रोनाइज़ेशन क्षमता रही। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, आपदा-प्रबंधन, ट्रैफिक, नगर-सेवाएँ, रेलवे-समन्वय तथा तकनीकी/शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग भी अहम है। साइबर-सुरक्षा के लिए भी यही सहयोग-आर्किटेक्चर अपनाया गया। CERT-In की सरकारी इकाइयों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप CISO-फंक्शन, समर्पित साइबर-टीम और रिपोर्टिंग/रेस्पॉन्स-मैकेनिज़्म जैसी सर्वोत्तम प्रथाओं की दिशा में समन्वय की सोच दिखाई देती है। साइबर हमलों से निपटने को देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों को सहयोग लिया गया आई जी प्रेम गौतम ( तत्कालीन आईजी रेंज प्रयागराज) द्वारा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की संभावित कमजोरियों एवं साईबर हमलों से निपटने के लिए देश के कई  प्रतिष्ठित संस्थानों/केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग प्राप्त किया गया जो अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। फील्ड-स्तर पर जहां 60,000+ प्रशिक्षित कर्मियों की विशाल तैनाती रही, वहीं आईसीसीसी  में “मानव-मशीन” साझेदारी ने ऑपरेशंस को गति और सटीकता दी। महाकुम्भ आईसीसीसी का पर्यवेक्षण भानु भास्कर (पूर्व ADG Prayagraj Zone) ने किया, जिन्हें वरिष्ठ अधिकारियों/टीम ( तरुण गाबा, पुलिस आयुक्त प्रयागराज, प्रेम गौतम आईजी रेंज प्रयागराज, डीआईजी महाकुम्भ वैभव कृष्ण ) का सहयोग मिला।  “ऑफिसर-इन-चार्ज” के रूप में Amit Kumar, IPS ने ऑपरेशनल कमांड व टेक्नोलॉजी-ह्यूमन इंटीग्रेशन की जिम्मेदारी निभाई। SKOCH Gold Award 2025 महाकुम्भ-25 के आईसीसीसी मॉडल को 105th SKOCH Summit में SKOCH Gold Award 2025 से सम्मानित किया गया। Skoch समिति द्वारा तत्कालीन एडीजी जोन प्रयागराज भानु भास्कर को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया जिसे तत्कालीन एसपी आईसीसीसी अमित कुमार द्वारा ग्रहण किया गया। यह अवॉर्ड यूपी पुलिस की टेक-ड्रिवन, नागरिक-केंद्रित पहलों को राष्ट्रीय मान्यता देता है जिसमें आईसीसीसी को “24×7 nerve centre” के रूप में रेखांकित किया गया।

योगी सरकार की पुलिस का यूपीकॉप एप बना आमजन का सारथी

घर बैठे आमजन एफआईआर समेत 27 सुविधाओं का उठा रहे लाभ यूपीकॉप एप से थाने के चक्कर लगाने से आमजन काे मिली मुक्ति एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में दर्ज हुई उल्लेखनीय कमी लखनऊ, योगी सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में स्मार्ट पुलिसिंग को लेकर कई कदम उठाए हैं। योगी सरकार की यह मुहिम पुलिस से लेकर आमजन के लिए बड़ी राहत और भरोसे का माध्यम बन गयी है। योगी सरकार की यूपी पुलिस का यूपीकॉप एप और सिटीजन पोर्टल आज प्रदेशवासियों के लिए “डिजिटल पुलिस स्टेशन” की तरह काम कर रहा है। प्रदेशवासी एप के माध्यम से न सिर्फ घर बैठे एफआईआर दर्ज करा रहे हैं बल्कि 27 प्रकार की पुलिस सेवाओं का लाभ बिना थाने गए उठा रहे हैं। 50 लाख से अधिक लोगों ने एप को किया डाउनलोड, 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर डाउनलोड की गई डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिसिंग को जनकेंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए टेक्नोलॉजी से जोड़ा है। उनकी दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है कि आज यूपी पुलिस तकनीक के जरिये आम जनमानस की सेवा में नई मिसाल कायम कर रही है। यूपीकॉप एप ने थानों के चक्कर लगाने की मजबूरी को काफी हद तक कम कर दिया है। वहीं एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी है। उन्होंने बताया कि एप के जरिए लोग ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने, एफआईआर की कॉपी डाउनलोड करने, खोये सामान (Lost Article)की रिपोर्ट दर्ज कराने, चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन समेत 27 प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। अब तक 50 लाख से अधिक यूजर्स एप को डाउनलोड कर चुके हैं। वहीं एप के माध्यम से 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर डाउनलोड की जा चुकी हैं जबकि 7.3 लाख से अधिक लोगाें ने खोये सामान की रिपोर्ट दर्ज करायी है। यह आंकड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल पुलिसिंग की सोच के महत्व को दर्शाते हैं। एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में दर्ज की गई भारी कमी डीजीपी ने बताया कि यूपी कॉप एप में कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसमें रीयल-टाइम नोटिफिकेशन के जरिए आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति की तुरंत जानकारी मिल रही है। यह एप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर रहे हैं। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से लोकेशन ट्रैकिंग और एसओएस बटन जैसी सुविधाओं को भी अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा एप पर नजदीकी पुलिस स्टेशन को मैप पर देखने की सुविधा भी दी गई है, जो आपात स्थिति में काफी उपयोगी साबित हो रही है। एप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण में लगने वाले समय में भारी कमी आयी है। वर्तमान में चरित्र सत्यापन में लगभग 6 दिन का समय लग रहा है जबकि पहले इसमें 8 दिन लगते थे। इस तरह किरायेदार सत्यापन में करीब 8 दिन लग रहे हैं जबकि पहले 24 से 25 दिन लगते थे, कर्मचारी सत्यापन में करीब 5 दिन लग रहे हैं जबकि पहले 13 दिन लगते थे।इसके साथ ही योगी सरकार का पब्लिक ग्रेवांस रिव्यू पोर्टल भी आमजन के लिए प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। पोर्टल के जरिए आमजन अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, जिनकी नियमित समीक्षा और समयबद्ध निस्तारण भी किया जा रहा है। इससे पुलिस की जवाबदेही बढ़ी है और शिकायतकर्ताओं को यह भरोसा मिला है कि उनकी बात सुनी जा रही है। “यूपीकॉप ऐप उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘डिजिटल पुलिस स्टेशन’ है, जो नागरिकों की शिकायतों और सेवाओं के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था देता है। टेक्नोलॉजी के माध्यम से हम सेवा-प्रक्रियाओं का मानकीकरण कर रहे हैं—ताकि हर आवेदन पर समान गति, समान पारदर्शिता और निश्चित समय-सीमा सुनिश्चित हो। टेक्नोलॉजी-आधारित जनशिकायत निवारण से पुलिसिंग अधिक जनकेंद्रित और जवाबदेह बन रही है—यही स्मार्ट पुलिसिंग का वास्तविक अर्थ है।” राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश

यूपी पुलिस सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन के प्राणों की रक्षा का अभिनव प्रयोग करने वाली बनी विश्व की प्रथम पुलिस एजेंसी

– नई दिल्ली में आयोजित 105वें स्कॉच समिट कार्यक्रम में महाकुम्भ-25 में स्थापित आईसीसीसी एवं यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर की मेटा सुसाइडल अलर्ट की अभिनव पहल के लिए वर्ष-25 के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड (श्रेणी-गोल्ड) से किया गया सम्मानित   – स्कॉच अवार्ड की दो अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कृत होने वाली योगी सरकार की यूपी पुलिस बनी देश की एक मात्र पुलिस बल      लखनऊ,  योगी सरकार के नाम शनिवार को एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गयी। योगी सरकार की यूपी पुलिस को नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित 105वें स्कॉच समिट कार्यक्रम में महाकुम्भ-25 में स्थापित आईसीसीसी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर एवं यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर की मेटा सुसाइडल अलर्ट से संबंधित अभिनव पहल को वर्ष-25 के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड (श्रेणी-गोल्ड) से सम्मानित किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम  “Governing Viksit Bharat” रही। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किया जाता है।      105वें SKOCH समिट कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण को पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे उनके द्वारा नामित अधिकारियों क्रमशः ICCC Mahakumbh–25 के तत्कालीन प्रभारी आईपीएस अमित कुमार एवं Meta Suicidal Alert का अवॉर्ड पुलिस महानिदेशक के जनसम्पर्क अधिकारी राहुल श्रीवास्तव तथा सत्या यादव, डायरेक्टर आउटरीच, साउथ एशिया फेसबुक (मेटा) द्वारा ग्रहण किया गया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तकनीक-समर्थ, संवेदनशील एवं जनोन्मुख पुलिसिंग के लिए लगातार दिशा-निर्देश एवं संसाधन प्रदान किये जा रहे हैं। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरुप प्रौद्योगिकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पुलिसिंग में उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही यूपी पुलिस द्वारा तकनीकी नवाचारों को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस वर्ष प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड-25 यूपी पुलिस को मिलना इसका जीता जागता उदाहरण है। यह सम्मान जनसुरक्षा एवं जीवन संरक्षण के क्षेत्र में यूपी पुलिस द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों, उत्कृष्ट सरकारी सेवाओं एवं प्रभावशाली कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त मान्यता को दर्शाता है।      Integrated Command and Control Center(ICCC): महाकुंभ–25 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुचारू संचालन और सुरक्षा के प्रति यूपी पुलिस की गहरी प्रतिबद्धता के दृष्टिगत आईसीसीसी को एक नर्व सेंटर / नियंत्रण हब के रूप में विकसित किया गया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा अन्य कटिंग-एज टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया ताकि मेले के दौरान जनमानस की सेवा, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, आपातकालीन सेवाएं और इंटर-एजेंसी समन्वय को सर्वोत्तम स्तर पर संचालित किया जा सके। महाकुंभ-25 में आईसीसीसी ने इस प्रकार अपना विशिष्ट योगदान दिया – AI-driven प्रणाली के माध्यम से crowd estimation, व्यक्ति-सुरक्षा और यातायात प्रबंधन। – एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ICCC)के ज़रिए 24X7 निगरानी, शिचुएशन रूम, आपातकालीन मॉनिटरिंग और त्वरित निर्णय-निर्धारण। – डिजिटल-गवर्नेंस एवं स्मार्ट टेक्नोलॉजी के समावेश से श्रद्धालुओं की सहायता के लिए "चैटबॉट / मास मैसेजिंग", ऐप-आधारित सपोर्ट। – भीड़-प्रबंधन, डीजास्टर-रेडीनेस और विविध एजेंसियों (पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, अग्नि एवं आपदा प्रबंधन आदि) के बीच बेहतर तालमेल। Meta Suicidal Alert: यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेन्टर द्वारा यह पहल Meta कंपनी के सहयोग से विकसित की गई है। इसके तहत फेसबुक एवं इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आत्महत्या से संबंधित सामग्री पोस्ट किए जाने की स्थिति में Meta द्वारा तत्काल पुलिस मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर को ई-मेल एवं फोन कॉल के माध्यम से अलर्ट भेजा जाता है। पुलिस मुख्यालय में स्थापित 24X7 समर्पित डेस्क, जो यूपी एसटीएफ सर्वर से एकीकृत है, पीड़ित की लोकेशन का त्वरित पता लगाकर संबंधित जनपद को सूचना प्रेषित करती है। इसके बाद स्थानीय पुलिस द्वारा पीड़ित एवं उसके परिजनों से संपर्क कर समय रहते सहायता, रेस्क्यू एवं काउंसिलिंग प्रदान की जाती है तथा अपने अधिकार-क्षेत्र में रहते हुए पीड़ित की समस्या के समाधान का भी प्रयास किया जाता है। 1 जनवरी-23 से 31 दिसम्बर-25 के मध्य Meta से प्राप्त 1,802 अलर्ट के माध्यम से कुल 1,805 व्यक्तियों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इन बचाए गए 1,805 लोगों में से 1,389 पुरुष एवं 416 महिलाएं शामिल हैं। इन एज ग्रुप के लोगों को बचाया गया – 13–18 वर्ष आयु वर्ग: 623 व्यक्ति                                                                                   – 19–25 वर्ष आयु वर्ग: 905 व्यक्ति – 26–35 वर्ष आयु वर्ग: 190 व्यक्ति – 35 वर्ष से अधिक आयु वर्ग: 87 व्यक्ति आत्महत्या के प्रयास के सभी मामलों में कांउसिलिंग की नवीन पहल यूपी पुलिस द्वारा त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के प्राण की रक्षा तत्समय कर ली जाती है, लेकिनभविष्य में आत्महत्या संबंधी विचारों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ऐसे व्यक्तियों को निरंतर एवं प्रभावी कांउसिलिंग की आवश्यकता रहती है। ऐसे में पुलिस महानिदेशक द्वारा नवीन पहल करते हुए आत्महत्या के प्रयास के सभी मामलों में जनपदीय मिशन शक्ति केन्द्र एवं 1090 के टेली-कॉउंसलर के माध्यम से पीड़ित की कांउसिलिंग के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

अशोक लीलैंड के नए प्लांट से बढ़ा भरोसा, धरातल पर दिख रहा योगी सरकार के प्रयासों का असर

केंद्र सरकार के “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश नंबर-1, सिंगल विंडो सिस्टम से हो रहा तेज अनुमोदन अनुमतियों की प्रक्रिया सरल, समय सीमा तय होने और ऑनलाइन सिस्टम से निवेशकों को मिली राहत लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में किए गए बड़े व्यापारिक और नीतिगत सुधार अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। सरकार ने कारोबार शुरू करने की प्रक्रियाओं को आसान बनाया, अनुमतियों के लिए तय समय सीमा लागू की और ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया। इन कदमों का नतीजा है कि अब बड़े उद्योग उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं। इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है अशोक लीलैंड का नया प्लांट, जिसका शुभारंभ शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुआ। लखनऊ में इस प्लांट के शुभारंभ से न सिर्फ प्रदेश की औद्योगिक पहचान मजबूत हुई है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी गया है कि उत्तर प्रदेश अब देश के सबसे भरोसेमंद निवेश स्थलों में शामिल हो चुका है। केंद्र सरकार के “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिला है। उत्तर प्रदेश में भूमि, भवन, निर्माण, श्रम, पर्यावरण अनुमति और बिजली–पानी जैसे 23 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार किए गए। फ्लेक्सिबल ज़ोनिंग, डिजिटल लैंड यूसेज बदलाव, जीआईएस लैंड बैंक और ऑनलाइन अनुमोदन ने पुरानी जटिलताएं खत्म कर दीं। इसी कारण अब उद्योग अपनी इकाइयां लगाने के लिए उत्तर प्रदेश को तरजीह दे रहे हैं। अशोक लीलैंड का प्लांट इस भरोसे का बड़ा उदाहरण है। इस प्लांट से प्रदेश में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और हजारों युवाओं के लिए सीधे और परोक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। साथ ही आसपास के एमएसएमई, छोटे उद्योग और सप्लाई चेन को भी बड़ा लाभ मिलेगा। श्रम सुधार भी इस बदलाव के महत्वपूर्ण कारण हैं। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति, कार्य घंटे में लचीलापन और तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण जैसी सुविधाओं ने उद्योगों के संचालन को आसान बनाया है। पर्यावरण और अन्य लाइसेंसों की ऑनलाइन प्रक्रिया से अनावश्यक देरी खत्म हुई है। बिजली और पानी के कनेक्शन भी अब जल्दी मिल रहे हैं। इन सभी सुधारों का परिणाम यह है कि निवेश अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर नए कारखानों, उत्पादन और रोजगार के रूप में दिखाई दे रहा है। अशोक लीलैंड का नया प्लांट इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश एक नीति आधारित निवेश गंतव्य बन चुका है, जहां स्थिरता, भरोसा और साफ प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। “उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार अधिनियम, 2025” और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम ने इस व्यवस्था को और मजबूत किया है।

एमएसएमई और बड़े उद्योगों में शिक्षुता को बढ़ावा, योगी सरकार दे रही है प्रतिपूर्ति का लाभ

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण को नई रफ्तार देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अप्रेंटिसशिप के क्षेत्र में मजबूत पहल की है। राज्य में संचालित अप्रेंटिसशिप योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को उद्योगों व एमएसएमई इकाइयों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी मिल सकें। वर्ष 2025-26 में अप्रेंटिसशिप योजना के तहत 83,277 युवाओं को उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों में शिक्षुता प्रशिक्षण हेतु योजित किया गया है। इससे युवाओं को उत्पादन इकाइयों, सेवा क्षेत्र और लघु–मध्यम उद्योगों में काम सीखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक युवा “सीखते हुए कमाएं” और उद्योगों के अनुरूप कौशल प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें। सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का हब बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रेंटिसशिप योजना के माध्यम से युवाओं को सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि काम का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। हमारे लिए लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। नेशनल और मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत दी जा रही प्रतिपूर्ति से अधिष्ठानों की रुचि बढ़ी है और इससे रोजगारपरक अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। राज्य सरकार हर युवा को उसकी क्षमता के अनुरूप कौशल और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उपलब्ध कराई जा रही प्रतिपूर्ति की सुविधा उत्तर प्रदेश में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना तथा मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत संबंधित अधिष्ठानों और अभ्यर्थियों को प्रतिपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे शिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान आर्थिक सहयोग मिलता है, वहीं अधिष्ठानों को भी प्रशिक्षुओं को रखने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है। योगी सरकार का मानना है कि यह मॉडल युवाओं और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी है। नियुक्ति की संभावनाएं कई गुना बढ़ीं अप्रेंटिसशिप के दायरे को बढ़ाने के लिए सशक्त संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। इसी के परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 795 नवीन अधिष्ठानों को पोर्टल पर पंजीकृत कराया गया है। नए पंजीकरण से विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण के अवसरों का दायरा बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर युवाओं को उद्योगों तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही सीएमएपीएस योजनान्तर्गत 6,164 नए अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया है। विभाग के अनुसार, इन योजनाओं के जरिए युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल और औद्योगिक अनुभव भी मिल रहा है, जिससे नियुक्ति की संभावनाएं बढ़ रही हैं। विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को बनाया गया सरल राज्य में कौशल विकास की इस सतत प्रक्रिया का बड़ा परिणाम यह रहा कि बीते लगभग नौ वर्षों में 4 लाख से अधिक प्रशिक्षु युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में सेवायोजित कराया गया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अप्रेंटिसशिप को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हुए युवाओं को उद्योगों, स्टार्टअप्स और MSME सेक्टर से जोड़ा जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, ऑनलाइन पोर्टल को सुदृढ़ किया गया है और उद्योगों के साथ समन्वय भी बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि कौशलयुक्त युवा न केवल अपने लिए अवसर पैदा करेंगे, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश माहौल को भी मजबूती देंगे।

पुनर्वासन योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का योगी सरकार का निर्देश

  दिव्यांगजनों को शिक्षा, कौशल और रोजगार में समान अवसर देना सरकार की प्राथमिकता लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों में समान भागीदारी प्राप्त कर सकें और समाज की मुख्य धारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। इसी क्रम में “दिव्यांगजन के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना” लागू की गई है, जिसके तहत पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजन इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं। सरकार का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके पुनर्वासन की एक सुदृढ़ व्यवस्था तैयार करना है। सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और रोजगार के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें। दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता प्रदान करने की योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा दे रही है। इस योजना के अंतर्गत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में उल्लिखित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित व्यक्तियों के लिए संचालित पुनर्वासन परियोजनाओं को अनुदान दिया जा रहा है, जिससे दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की समुचित सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने बताया कि मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजनों को छोड़कर अन्य दिव्यांग वर्गों के लिए यह योजना प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है उद्देश्य योजना के अंतर्गत अर्ली इंटरवेंशन सेंटरों की स्थापना, डे-केयर सेंटरों एवं प्री-प्राइमरी विद्यालयों का संचालन, प्राथमिक से हाईस्कूल स्तर तक विशेष विद्यालयों का संचालन, दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, पाठ्य सामग्री निर्माण, ब्रेल एवं सहायक उपकरणों की उपलब्धता तथा दिव्यांगजनों से संबंधित पुस्तकालयों के संचालन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को सहायता अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रारंभिक अवस्था से ही पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है। पारदर्शी एवं तकनीक आधारित आवेदन प्रक्रिया मंत्री ने बताया कि योगी सरकार की  नीति है कि दिव्यांगजनों के पुनर्वासन में केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि अनुभवी और समर्पित स्वैच्छिक संस्थाओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं के लिए पारदर्शी एवं तकनीक आधारित आवेदन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। केवल वही संस्थाएं योजना के अंतर्गत पात्र होंगी, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत हों, नीति आयोग के एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण के साथ विशिष्ट पहचान संख्या रखती हों तथा दिव्यांगजनों के क्षेत्र में न्यूनतम दो वर्षों का कार्यानुभव रखती हों। सहायता केवल वास्तविक, सक्रिय एवं प्रभावी संस्थाओं को उन्होंने यह भी कहा कि योजना के अंतर्गत प्रस्तुत प्रस्तावों का परीक्षण जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा, जिसके पश्चात निदेशालय स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सहायता केवल वास्तविक, सक्रिय एवं प्रभावी संस्थाओं को ही मिले और सरकारी धन का समुचित एवं परिणामोन्मुखी उपयोग हो सके। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर मंत्री ने बताया कि सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं, ताकि अधिक से अधिक स्वैच्छिक संस्थाएं आगे आकर दिव्यांगजनों के पुनर्वासन के इस अभियान में सहभागी बन सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के संकल्प के साथ दिव्यांगजनों को सशक्त, शिक्षित और स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।