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योगी सरकार की पहल से प्रदेश के युवाओं को विदेश में भी मिल रहे रोजगार के अवसर

2,600 निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग प्रक्रिया प्रगति पर, विदेश में उपलब्ध कराया जाएगा रोजगार जर्मनी, जापान, इज़राइल और यूएई से मिल रहीं केयरिंग व नर्सिंग से जुड़ी नौकरियां प्रदेश भर में विभिन्न रोजगार मेलों के माध्यम से भी विदेश में खुल रहे नौकरियों के रास्ते अंतरराष्ट्रीय रोजगार के जरिए आय बढ़ाना और कौशल निखारना योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं, श्रमिकों को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा विदेश में रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराने की कार्यवाही प्रभावी ढंग से शुरू की गई है। सरकार की इस पहल से न केवल युवाओं को रोजगार मिल रहा है, बल्कि उनके कौशल को वैश्विक पहचान भी मिल रही है। इज़राइल में निर्माण श्रमिकों को मिला रोजगार प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन एम.के. शनमुगा सुंदरम ने बताया कि जनवरी से मार्च 2024 के दौरान सेवायोजन विभाग द्वारा निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग, प्रशिक्षण एवं अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें इज़राइल भेजने की प्रक्रिया संचालित की गई। इस योजना के तहत अब तक लगभग 5,978 निर्माण श्रमिकों को इजराइल भेजा जा चुका है, जहां वे बेहतर वेतन और सुरक्षित माहौल में कार्य कर रहे हैं। यह प्रदेश के श्रमिकों के लिए बड़ी उपलब्धि है। हजारों श्रमिक प्रक्रिया में शामिल वर्तमान में 1,336 निर्माण श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के बाद इज़राइल भेजने की कार्यवाही प्रगति पर है। इसके अलावा 2,600 निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग प्रक्रिया चल रही है, जिन्हें आवश्यक मानकों पर खरा उतरने के बाद विदेश में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में और अधिक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा। कई देशों से मिल रहे रोजगार के अवसर योगी सरकार के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह है कि श्रम एवं सेवायोजन विभाग को जर्मनी, जापान, इज़राइल और यूएई जैसे देशों से भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इन देशों में विशेष रूप से केयरिंग और नर्सिंग सेक्टर में रिक्तियां सामने आई हैं, जिससे प्रदेश के प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए द्वार खुल रहे हैं। रोजगार मेलों से भी मिले विदेश में नौकरियों के अवसर इसी क्रम में 26-28 अगस्त, 2025 को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रोजगार महाकुंभ में कुल 16,212 युवाओं का चयन किया गया, जिनमें से 1,612 युवाओं को विदेश में रोजगार के लिए चुना गया। इसके अतिरिक्त 14-15 अक्टूबर, 2025 को जनपद गोरखपुर में आयोजित इंटरनेशनल प्लेसमेंट इवेंट के माध्यम से 279 अभ्यर्थियों का विदेश में रोजगार हेतु चयन हुआ। वहीं 09-10 दिसंबर, 2025 को वाराणसी में आयोजित काशी सांसद रोजगार महाकुंभ के जरिए 8,054 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिसमें 85 युवाओं को विदेशी रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ। युवाओं और औद्योगिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 22 अगस्त, 2025 को नोएडा में एचआर मीट तथा 18 दिसंबर, 2025 को वाराणसी में इंटरनेशनल मोबिलिटी कॉन्क्लेव-2025 का आयोजन किया गया, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार के प्रयास और अधिक सशक्त हुए हैं। आय और कौशल दोनों में बढ़ोतरी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय रोजगार को बढ़ावा देने के पीछे योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश के युवाओं की आय में वृद्धि हो, उनका कौशल वैश्विक मानकों के अनुरूप निखरे और वे आत्मनिर्भर बनें। सरकार द्वारा पारदर्शी चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण और टेस्टिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योग्य अभ्यर्थियों को ही विदेश में रोजगार के अवसर मिलें।

योगी सरकार की संवेदनशील पहल: गोवंश को मिल रहा पौष्टिक आहार, गोचर भूमि पर तेजी से बढ़ रहा हरा चारा उत्पादन

समग्र दृष्टि से पशु कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही योगी सरकार प्रदेश में 7140.37 हेक्टर चारागाह की भूमि को कब्जा मुक्त करके हरा चारा उत्पादन किया जा रहा, आगामी 2 वर्षों में 35000 हेक्टेयर भूमि का होगा उपयोग टैग्ड गोचर भूमि पर शत प्रतिशत हरे चारे का हो रहा उत्पादन, हाइब्रिड नेपियर और अन्य हरे चारे पर विशेष फोकस हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर हरा चारा उत्पादन करने वाले शीर्ष 4 जनपदों में शामिल लखनऊ,  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पशु कल्याण और गोवंश संरक्षण को लेकर लगातार ठोस कदम उठा रही है। गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में गोचर एवं चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका सकारात्मक असर अब ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में उपलब्ध कुल 61118.815 हेक्टेयर गोचर एवं चारागाह भूमि है। जिसमें 7140.37 हेक्टर चारागाह की भूमि को कब्जा मुक्त करके हरा चारा उत्पादन किया जा रहा है।यह प्रयास न केवल पशुओं के पोषण स्तर को बेहतर बना रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। अगले दो वर्षों में 35 हजार हेक्टेयर पर होगा हरा चारा उत्पादन योगी सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। आने वाले दो वर्षों में 35000 हेक्टेयर कब्जामुक्त एवं सिंचित चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन कराया जाएगा। इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में 1691.78 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर चारा और 5448.59 हेक्टेयर में अन्य हरे चारे (जई, बरसीम आदि) की बुआई की जा चुकी है। इससे गोवंश को सालभर पौष्टिक और संतुलित आहार उपलब्ध हो सकेगा। इन जनपदों में तेजी से बढ़ा हरा चारा उत्पादन प्रदेश के हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर जनपदों में हरा चारा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं टैग्ड गोचर भूमि पर शत-प्रतिशत हरा चारा उत्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। गोचर एवं चारागाह भूमि का समतलीकरण, सुरक्षाबाड़ा एवं खाई निर्माण जैसे कार्य मनरेगा कन्वर्जेन्स के माध्यम से कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है और पशुओं के लिए सुरक्षित चारागाह भी विकसित हो रहे हैं। शीतलहर से बचाव के भी निर्देश योगी सरकार ने गोवंश के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शीतलहर से बचाव के लिए बोरा-चट्ट ओढ़ाने, तिरपाल लगाने और गो-आश्रय स्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पशु स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें। कुल मिलाकर हरा चारा उत्पादन, चारागाह विकास और गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं के माध्यम से योगी सरकार यह स्पष्ट संदेश दे रही है कि प्रदेश में विकास के साथ-साथ पशु कल्याण भी शासन की प्राथमिकता है। यह पहल न केवल गोवंश संरक्षण को मजबूती दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को पशुपालन के क्षेत्र में एक सशक्त मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

‘स्टार्ट इन यूपी’ को मिली संस्थागत मजबूती, 7 स्वीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी

ब्लॉकचेन, एआई, 5जी/6जी, हेल्थटेक, ड्रोन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस आईआईटी, आईआईएम और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से स्टार्टअप्स को मिल रहीं विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट से रोजगार के नए अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने में जुटी है। योगी सरकार ने 'स्टार्ट इन यूपी' नीति के अंतर्गत प्रदेश में 7 अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति प्रदान की है, जिन्हें अब तक कुल ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। इन केंद्रों की मदद से प्रदेश में नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिल रही है। इन सभी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट, नए रोजगार अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को बढ़ावा मिल रहा है। ब्लॉकचेन से ड्रोन टेक्नोलॉजी तक, भविष्य की तकनीकों पर फोकस प्रदेश में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी/6जी टेलीकॉम, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। ये सेंटर न केवल स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें ग्लोबल स्टैंडर्ड पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। आईआईटी और आईआईएम बने नवाचार के इंजन गौतम बुद्ध नगर, लखनऊ, कानपुर नगर, सहारनपुर और गाजियाबाद में स्थापित इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आईआईटी कानपुर, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, एसटीपीआई लखनऊ और एकेजीईसी गाजियाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। इससे स्टार्टअप्स को विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग) प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट मिल रहा है। 5 वर्षों में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, ₹10 करोड़ तक का संस्थागत सहयोग उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत प्रत्येक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्थापना की तिथि से 5 वर्षों की अवधि में अधिकतम ₹10 करोड़ तक की ग्रांट-इन-एड (पूंजीगत एवं संचालन व्यय सहित) प्रदान किए जाने का प्रावधान है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि ये सेंटर पांच वर्षों के भीतर आत्मनिर्भर बनें और दीर्घकालिक रूप से प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करें। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा गौतम बुद्ध नगर में स्थापित ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईएम लखनऊ ईआईसी द्वारा माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र 10,000 वर्ग फुट के अत्याधुनिक परिसर में अगले पांच वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करेगा। यहां स्टार्टअप्स को उच्च तकनीकी सुविधाओं के साथ ₹75 लाख तक की सीड फंडिंग, विशेषज्ञ मेंटरशिप और एंजेल व वेंचर कैपिटल नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश में एक सशक्त और टिकाऊ ब्लॉकचेन इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। मेडटेक और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स से आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था लखनऊ में स्थापित मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स (मेडटेक) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एसटीपीआई लखनऊ, एसजीपीजीआई, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग (उत्तर प्रदेश सरकार), एआईएमईडी, एएमटीजेड और केआईएचटी के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य मेडिकल डिवाइस और हेल्थ टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करना और मेक इन इंडिया व डिजिटल इंडिया को सशक्त करना है। यहां स्टार्टअप्स को तकनीकी विशेषज्ञों, डॉक्टरों, मेंटरशिप और वेंचर फंडिंग का सहयोग मिल रहा है। 5जी/6जी और एआई से भविष्य की तकनीकों पर फोकस कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित 5जी/6जी टेलीकॉम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों पर अनुसंधान और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा दे रहा है। अत्याधुनिक आरएफ लैब्स, एआई/एमएल सर्वर, सुपरकंप्यूटिंग टूल्स और टेस्टिंग सुविधाओं से लैस यह केंद्र भारत को वैश्विक टेलीकॉम नवाचार में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में स्थापित एआई एवं इनोवेशन आधारित उद्यमिता (एआईआईडीई) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईटी कानपुर और फिक्की के सहयोग से संचालित है, जहां हर वर्ष 50 एआई आधारित स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निवेश से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। सहारनपुर और गाजियाबाद से उभरता औद्योगिक नवाचार सहारनपुर में आईआईटी रुड़की द्वारा संचालित 5जी/6जी यूबिक्विटस वायरलेस कम्युनिकेशन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस 6जी विजन के अनुरूप कार्य कर रहा है। वहीं, गाजियाबाद में एकेजीईसी द्वारा स्थापित एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अत्याधुनिक थ्रीडी प्रिंटिंग और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के माध्यम से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है। ड्रोन और यूएवी तकनीक में यूपी को राष्ट्रीय हब बनाने की तैयारी कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित यूएवी डिजाइन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता, टेस्टिंग, डिजाइन वैलिडेशन और कंसल्टेंसी प्रदान कर रहा है। डीजीसीए अनुमोदित फ्लाइट टेस्टिंग जोन और उन्नत लैब्स के माध्यम से यह केंद्र प्रदेश को ड्रोन टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर है।

योगी सरकार के नेतृत्व में यूपी में औद्योगिक विस्तार को नई रफ्तार, डिफेंस कॉरिडोर में 1000 एकड़ भूमि आवंटन की तैयारी

झांसी, अलीगढ़, चित्रकूट और लखनऊ बने निवेशकों की पसंद करीब ₹3.5 हजार करोड़ के प्रस्तावित निवेश से औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बल ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर हो सकता है निवेश प्रस्तावित भूमि आवंटन से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार होगा उपलब्ध लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अंतर्गत पाइपलाइन में मौजूद निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए लगभग 1000 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटन की तैयारी की जा रही है। योगी सरकार की स्पष्ट डिफेंस इंडस्ट्रियल नीति, तेज निर्णय प्रक्रिया और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते देश–विदेश की कंपनियां उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में निवेश के लिए आगे आ रही हैं। उपलब्ध प्रस्तावों के अनुसार निवेश की इच्छुक कंपनियों को विभिन्न नोड्स में भूमि आवंटन प्रस्तावित है, जिनके माध्यम से करीब ₹3.5 हजार करोड़ के निवेश की संभावना है। डिफेंस कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र बना झांसी नोड उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत प्रस्तावित निवेश में झांसी नोड निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है। यहां गुडलक एस्ट्रा द्वारा 247 एकड़ भूमि पर ₹1000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। वहीं, रेडवुड ह्यूजेस द्वारा 247 एकड़ भूमि पर ₹700 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यही नहीं, सिटाडेल और गुरुत्वा जैसी कंपनियों द्वारा भी डिफेंस एंड एलाइड मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश का प्रस्ताव है। झांसी में यह निवेश बुंदेलखंड को डिफेंस इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकसित करने के योगी सरकार के विजन को मजबूती देगा। अलीगढ़ और चित्रकूट में हाई-टेक डिफेंस और ड्रोन सेक्टर को बढ़ावा अलीगढ़ फेज–2 नोड में स्पेसकेम, मराल और जी-1 ऑफशोर जैसी कंपनियों द्वारा केमिकल, ऑफशोर और डिफेंस सपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग में निवेश प्रस्तावित है। चित्रकूट नोड में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा 209.95 एकड़ भूमि पर ₹672 करोड़ का निवेश प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, आईजी ड्रोन्स द्वारा ड्रोन टेक्नोलॉजी सेक्टर में ₹100 करोड़ का निवेश प्रस्ताव है। यह निवेश चित्रकूट को योगी सरकार के डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम होगा। लखनऊ नोड में डिफेंस सपोर्ट और टेक्नोलॉजी यूनिट्स राजधानी लखनऊ स्थित डिफेंस नोड में भी नेक्सा मुंबई, इंद्रप्रस्थ और प्रोमोटेक जैसी कंपनियों द्वारा कम भूमि में उच्च तकनीक आधारित निवेश प्रस्तावित हैं। यह निवेश डिफेंस सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और सपोर्ट सिस्टम को मजबूती प्रदान करेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) को डिफेंस कॉरिडोर में इसके अतिरिक्त भी निवेश के कई और आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिनके लिए आवश्यक भूमि के आवंटन की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। यूपीडा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसके पास डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में संभावित निवेश के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए भूमि आवंटन की सभी आवश्यक प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों का पालन किया जा रहा है। डिफेंस उत्पादन, रोजगार और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के तहत प्रस्तावित भूमि आवंटन से योगी सरकार को उम्मीद है कि हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होगा। इससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता तथा स्थानीय एमएसएमई व स्टार्टअप्स को डिफेंस सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती देगी।

योगी सरकार की योजनाओं से गांवों में बदली विकास की तस्वीर

शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कौशल विकास तक दिखाई दे रहा समग्र बदलाव पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, खेल स्टेडियम, सोलर प्लांट और बालिकाओं की सुरक्षा को मिल रहा बल सरकारी धन से गांवों में बन रही आत्मनिर्भर विकास संरचना लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी लगन से आकांक्षात्मक विकास खंडों की तस्वीर बदलने में जुटी है। विकास अब कागज़ों से निकलकर गांवों की ज़मीन पर नजर आ रहा है। प्रदेश के कई पिछड़े व आकांक्षात्मक विकास खंडों में केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त प्रोत्साहन राशि का सदुपयोग कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, ऊर्जा, कौशल तथा आधारभूत सुविधाओं में ठोस बदलाव किया गया है। परिणाम यह है कि जो क्षेत्र कभी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते थे, वे अब प्रेरणादायी विकास मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार ने आकांक्षात्मक ब्लॉकों को परिणाम आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया है। शिक्षा से सशक्तिकरण, गांवों में ज्ञान के नए केंद्र विकास खंडों को मिल रही प्रोत्साहन राशि से विकास के व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बरेली के मझगवां विकास खंड में दो उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की रचनात्मक क्षमता और वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के लिए एस्ट्रोनॉमी लैब का निर्माण किया गया है। इससे ग्रामीण बच्चों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का अवसर मिला। न्याय पंचायत गैनी में छात्रों के शैक्षिक विकास के लिए पुस्तकालय का निर्माण कराया गया। खेल और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा मझगवां (बरेली) में ही ग्राम पंचायत बेहटा बुजुर्ग में शारीरिक व सामाजिक विकास के दृष्टिगत मिनी स्टेडियम व ओपन जिम का निर्माण किया गया। यह पहल ग्रामीण युवाओं को खेलों से जोड़ने के साथ ही नशामुक्त, स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बालिकाओं की सुरक्षा और सुविधा पर विशेष फोकस प्रोत्साहन राशि का सदुपयोग बदायूं के वजीरगंज विकास खंड में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में भी देखा गया, जहां छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीसी रोड तथा बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया। यह योगी सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें ‘बेटी की सुरक्षा और शिक्षा’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। स्वच्छ ऊर्जा से प्रशासनिक सशक्तिकरण इसी प्रकार बलिया के सोहांव विकास खंड में विकास खंड कार्यालय भवन पर 10 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल सिस्टम स्थापित किया गया है। इससे न केवल बिजली खर्च में कमी आई है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में ग्रीन एनर्जी मॉडल को भी बढ़ावा मिला है। स्वास्थ्य, पोषण और कौशल विकास में समन्वित प्रयास आकांक्षात्मक ब्लॉकों में स्वास्थ्य एवं पोषण, पेयजल, मानव संसाधन विकास और कौशल उन्नयन जैसे क्षेत्रों में लक्षित निवेश किया गया है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों से जुड़े संकेतकों पर विशेष ध्यान देते हुए योजनाओं को लागू किया जा रहा है, ताकि सामाजिक विकास के साथ मानव विकास सूचकांक में भी सुधार हो। योगी मॉडल: प्रोत्साहन से परिणाम आधारित विकास आकांक्षात्मक विकास खंडों में दिख रहा यह परिवर्तन योगी सरकार के सुशासन, पारदर्शिता और निगरानी आधारित मॉडल का परिणाम है। यहां प्रोत्साहन राशि का उपयोग केवल निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि स्थायी लाभ, सामुदायिक भागीदारी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। आज उत्तर प्रदेश के ये आकांक्षात्मक ब्लॉक संदेश दे रहे हैं कि सरकारी धन यदि सही योजना, ईमानदार क्रियान्वयन और स्पष्ट विजन के साथ खर्च हो, तो वही क्षेत्र प्रेरणादायी विकास की मिसाल बन सकता है। योगी सरकार का यह मॉडल आने वाले समय में प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक रोल मॉडल बनता दिख रहा है।

योगी सरकार की नीतियों से रोजगार सृजन के साथ ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मिल रही है दृढ़ता

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब नवाचार और निवेश विश्वास का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पॉलिसी के माध्यम से प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम को जो दिशा दी है, वह प्रदेश को भारत के सबसे मजबूत प्रौद्योगिकी और उद्यमिता हब के रूप में स्थापित करने की क्षमता और दक्षता रखती है। यह पहल योगी सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत रोजगार सृजन के साथ-साथ नॉलेज इनेबल्ड (ज्ञान आधारित) अर्थव्यवस्था को दृढ़ता प्रदान करना प्राथमिकता है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 90 जीसीसी हैं। इनकी संख्या आने वाले समय में एक हज़ार से अधिक करने का लक्ष्य है। जीसीसी के जरिए नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव योगी सरकार की नीतियों में जीसीसी को केवल बैक ऑफिस यूनिट के रूप में नहीं देखा गया है। इन्हें रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंजीनियरिंग के गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे उत्तर प्रदेश में हाई वैल्यू वाले कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था नवाचार आधारित मॉडल की ओर त्वरित गति से अग्रसर होगी। एआई,  ब्लॉकचेन और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश सरकार द्वारा एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, ड्रोन, 5जी, 6जी और हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से जीसीसी और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधा सहयोग और समन्वय विकसित होगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों के कार्यस्थल के साथ-साथ नई तकनीकों के निर्माण का केंद्र बने। यही कारण है कि आईआईटी कानपुर, आईआईएम लखनऊ सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों को नीति के केंद्र में रखा गया है। स्टार्टअप्स और जीसीसी की साझेदारी से वैश्विक समाधान उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों का प्रमाण है। अब जीसीसी और स्टार्टअप्स के बीच प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (अंतिम उत्पाद/सेवा का प्रारंभिक मॉडल) और समस्या समाधान आधारित साझेदारी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे स्थानीय स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय नवाचार का लाभ प्राप्त होगा। यह सहयोग मॉडल प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत के विजन का ठोस स्तंभ बनाने की ओर बढ़ रहा है। युवाओं के लिए रोजगार के साथ उद्यमिता का नया रास्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मत है कि सच्चा विकास वही है, जिसमें युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बने। जीसीसी-स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से प्रदेश के युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता के भी उचित अवसर प्राप्त होंगे। महिलाओं, दिव्यांगों और युवाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन इस नीति को सामाजिक रूप से भी समावेशी बनाते हैं। उत्तर प्रदेश से तय होगा विकसित भारत का भविष्य वर्तमान में उत्तर प्रदेश नीतिगत स्थिरता, तेज निर्णय और पारदर्शी व्यवस्था का पर्याय बन चुका है। निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और तकनीकी जगत की दृष्टि प्रदेश पर टिकी है। योगी सरकार के नेतृत्व में स्टार्टअप और जीसीसी का यह संगम उत्तर प्रदेश को भारत का इनोवेशन पावरहाउस बनाने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यही कदम विकसित भारत के विजन के अंतर्गत देश की आर्थिक दिशा और वैश्विक पहचान को नई बुलंदी देगा।

योगी सरकार की नीतियों का बड़ा असर, भू-आबद्ध राज्यों में मिला प्रथम स्थान

निर्यात नीति, ओडीओपी, ट्रेड शो और अवसंरचना सुधारों ने बदली तस्वीर योगी सरकार के प्रयासों से बढ़ी निर्यात तत्परता लखनऊ,  उत्तर प्रदेश आज न केवल तेजी से उभरता निर्यातक राज्य बन रहा है, बल्कि निर्यात को रोजगार, निवेश, क्षेत्रीय संतुलन और समावेशी विकास से जोड़ते हुए नए राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। इसका ताजा उदाहरण नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 (Export Preparedness Index—EPI 2024) की रैंकिंग है। बुधवार को जारी इस रैंकिंग में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए ओवरऑल चौथा स्थान तथा भू-आबद्ध (LANDLOCKED) राज्यों में प्रथम स्थान हासिल किया है। वर्ष 2022 की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश ओवरऑल सातवें स्थान पर और भू-आबद्ध राज्यों में दूसरे स्थान पर था। केवल दो वर्षों में यह बड़ी छलांग राज्य के निर्यात क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों और योगी आदित्यनाथ सरकार की निर्यात-प्रोत्साहन नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है। योगी सरकार की नीतियों ने दी निर्यात को नई रफ्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करने, लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, विविध उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और कारोबारी माहौल को सुगम बनाने पर विशेष बल दिया गया। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति, एक जिला–एक उत्पाद (ODOP) योजना, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, लॉजिस्टिक्स सुधार, रोड-कनेक्टिविटी और ड्राई पोर्ट जैसी पहल निर्यात तत्परता को गति देने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं। सरकार द्वारा माल भाड़ा व्यय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों/प्रदर्शनियों में भागीदारी, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग शुल्क, कुरियर एवं एयर-फ्रेट व्यय तथा निर्यात क्रेडिट गारंटी पर प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाओं ने निर्यातकों का लागत बोझ कम किया है और उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया है। इंटरनेशनल ट्रेड शो ने खोले वैश्विक बाजारों के दरवाजे पिछले तीन वर्षों से आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो ने राज्य के निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म का कार्य किया है। इसके माध्यम से यूपी के एमएसएमई और पारंपरिक कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बायर्स से सीधा संपर्क मिला, जिससे नए बाजारों में प्रवेश और निर्यात ऑर्डरों में वृद्धि दर्ज की गई। इससे प्रदेश के हथकरघा, हस्तशिल्प, खाद्य-प्रसंस्करण, चमड़ा, फार्मा और एग्री-बेस्ड उत्पादों को नई पहचान मिली है। चार स्तंभों और 70 संकेतकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन नीति आयोग ने EPI-2024 रैंकिंग तैयार करते समय चार प्रमुख स्तंभ—निर्यात अवसंरचना, बिजनेस इकोसिस्टम, नीति एवं सुशासन और निर्यात प्रदर्शन के साथ 13 उप-स्तंभों के 70 संकेतकों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन किया। इन विभिन्न मानकों पर उत्तर प्रदेश ने व्यापक सुधार दर्ज कराए हैं। निर्यात पोर्टफोलियो का विस्तार, नए बाजारों तक पहुंच, लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम का विकास और उद्योग-अनुकूल नीतियों ने यूपी की स्थिति को मजबूत किया है। भू-आबद्ध राज्य होते हुए भी विशेष उपलब्धि रैंकिंग में पहले तीन स्थान पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात जैसे तटीय राज्य रहे हैं, जबकि समुद्री तट न होने के बावजूद उत्तर प्रदेश का चौथे स्थान तक पहुंचना एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। समुद्री तट न होने के कारण उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को बंदरगाहों तक माल पहुंचाने में अधिक समय और लागत वहन करनी पड़ती है। इसके बावजूद राज्य का ओवरऑल चौथे स्थान तक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधार, नीति समर्थन और सक्रिय हैंड-होल्डिंग ने निर्यातकों को वास्तविक लाभ पहुंचाया है।

कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के साथ मौके पर पंजीकरण एवं नवीनीकरण की मिल रही सुविधा

लखनऊ, योगी सरकार द्वारा निर्माण श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने तथा उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उपलब्ध कराने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं श्रमिकों के पंजीयन/नवीनीकरण के उद्देश्य से बुधवार को लेबर अड्डा मोहनलालगंज, लेबर अड्डा बुद्धेश्वर तथा लेबर अड्डा बाराबिरवा, आशियाना, लखनऊ में जागरूकता अभियान एवं पंजीयन शिविर का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार, उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। इस जागरूकता अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रमिकों ने योजनाओं के प्रति रुचि दिखाई और पंजीयन प्रक्रिया का लाभ उठाया। मौके पर पात्र श्रमिकों का कराया गया पंजीकरण शिविर के माध्यम से निर्माण श्रमिकों को कन्या विवाह सहायता योजना, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना तथा अटल आवासीय विद्यालय योजना सहित बोर्ड द्वारा संचालित प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान मौके पर ही पात्र पाए गए श्रमिकों का पंजीकरण भी कराया गया। अटल आवासीय में अधिकाधिक आवेदन पर जोर जागरूकता शिविर में विशेष रूप से अटल आवासीय विद्यालय योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 हेतु कक्षा-06 एवं कक्षा-09 में प्रवेश के लिए अधिकाधिक आवेदन कराने पर जोर दिया गया। बोर्ड के अंतर्गत न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि पूर्ण कर चुके श्रमिकों को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवेदन करने हेतु प्रेरित किया गया। लाभार्थियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य शिविर के आयोजन में विज्ञान फाउंडेशन एवं अन्य कार्यदायी संस्थाओं के साथ श्रम प्रवर्तन अधिकारी शक्तिराय, संतोष कुमार एवं सुनील कुमार की सक्रिय उपस्थिति रही। अधिकारियों ने श्रमिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु समय से पंजीयन एवं नवीनीकरण कराने की आवश्यकता पर बल दिया। अपर श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र, कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि बोर्ड द्वारा संचालित किसी भी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्माण श्रमिक का बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत होना एवं पंजीयन का नियमानुसार नवीनीकरण अनिवार्य है। श्रमिक अपना पंजीकरण एवं नवीनीकरण सी.एस.सी. ई-डिस्ट्रिक्ट सेंटर, सी.एस.सी. ई-गवर्नेंस सेंटर अथवा बोर्ड की वेबसाइट upbocw.in के माध्यम से करा सकते हैं।

योगी सरकार की पहल से रफ्तार पकड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना

योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में 94 नई इकाइयां स्थापित ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश, 2,586 युवाओं को मिला रोजगार 10 लाख रुपये तक बैंक ऋण और ब्याज अनुदान से बढ़ा आत्मनिर्भरता का मार्ग लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण रोजगार और ग्रामीण औद्योगिकीकरण सबसे ऊपर है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय गति से आगे बढ़ रही है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक योजना के अंतर्गत 94 इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिसके तहत ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश संभव हुआ है। इसके माध्यम से 2,586 युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। यह आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष में योजना ने मजबूत प्रगति दर्ज की है और शेष अवधि में लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। योग्य बेरोजगार युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ऋण इस योजना ने गांवों में उद्योग स्थापित कराकर स्थानीय युवाओं को उनके ही घर के पास रोजगार उपलब्ध कराने का रास्ता खोला है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित एवं तकनीकी योग्य बेरोजगार युवक-युवतियों को 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। योगी सरकार ने उद्यमियों के लिए ब्याज सब्सिडी की बड़ी सुविधा दी है, जिसमें सामान्य वर्ग के उद्यमियों के लिए 4% से ऊपर का ब्याज सरकार देती है, जबकि आरक्षित वर्ग के उद्यमियों का पूरा ब्याज सरकार वहन करती है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से चयन योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष एवं महिला उद्यमी पात्र हैं। चयन प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से की जाती है। सामान्य वर्ग को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना होता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में और अधिक युवाओं को इस योजना से जोड़कर स्व-रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। योगी सरकार का ग्रामीण विकास मॉडल योगी सरकार ग्रामीण विकास को केवल सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि ग्रामीण उद्योगों का नेटवर्क विकसित कर रही है। पारंपरिक कारीगरों व हस्तशिल्पकारों को सशक्त बना रही है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है और साथ ही, स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार सृजन हो रहा है। सरकार का मानना है कि “गांव मजबूत होंगे तो प्रदेश मजबूत होगा।” इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है।

डिजिटल शिक्षा से छात्राओं को संबल, योगी सरकार के अभियान को नई उड़ान

समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू, दो बालिका विद्यालयों को दिए गए टैबलेट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गोरखपुर और महाराजगंज के सर्वोदय बालिका विद्यालयों से पहल की शुरुआत लखनऊ, छात्राओं के समावेशी विकास, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत मंगलवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में मदद फाउंडेशन के सहयोग से समन्वय बैठक और टैबलेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हर बालिका विद्यालय को 20–20 टैबलेट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के डिजिटलीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके तहत कार्यक्रम में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय, गोरखपुर और महाराजगंज जनपदों के प्रधानाचार्यों को कुल 40 टैबलेट प्रदान किए गए। प्रत्येक विद्यालय को 20–20 टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसकी सफलता के आधार पर अन्य विद्यालयों में टैबलेट वितरण का दायरा बढ़ाया जाएगा। ‘डिजिटल शिक्षा समय की अनिवार्य आवश्यकता’ इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि उपस्थित रहे। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज समय की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीकी संसाधनों के माध्यम से छात्राओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनेंगी। उन्होंने इस पहल को बालिकाओं के सशक्तिकरण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ एवं डिजिटल इंडिया की भावना के अनुरूप बताया। योगी सरकार का शिक्षा व महिला सशक्तिकरण मॉडल कार्यक्रम में बताया गया कि योगी सरकार द्वारा स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट, टैबलेट व डिजिटल उपकरण कौशल व करियर उन्मुख प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को नई तकनीक से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि बालिकाएं केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें। मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि ने समाज कल्याण विभाग के साथ इस सहयोग को सामाजिक उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताया। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह, उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह, जे. राम सहित विभागीय अधिकारी एवं मदद फाउंडेशन की टीम उपस्थित रही।