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स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए : मुख्यमंत्री

गांव हो या नगर, भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री बढ़ती बिजली मांग के बीच उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सभी इकाइयों को पूरी दक्षता से संचालित करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की ऊर्जा विभाग समीक्षा, कहा बिलिंग और कलेक्शन क्षमता बढ़ाने की जरूरत ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत व भरोसेमंद बनाने पर मुख्यमंत्री का जोर फीडर वाइज मॉनीटरिंग करके जवाबदेही तय हो, शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें : मुख्यमंत्री इस वर्ष 30,339 मेगावाट तक पहुंची प्रदेश की पीक बिजली मांग, निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश वर्ष 2026 में बढ़ी बिजली मांग के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था मजबूत रखने पर मुख्यमंत्री का जोर आंधी-तूफान के बावजूद विद्युत व्यवस्था बहाल रखने के लिए त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर व्यवस्था की पड़ताल करें : मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री व राज्य मंत्री को दिए निर्देश आम जन को बिजली आपूर्ति के बारे में सही जानकारी दें, समाधान कब तक, यह भी बताएं: मुख्यमंत्री स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए : मुख्यमंत्री प्रदेशवासियों को बेहतर, भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग के बीच प्रदेश में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में ऊर्जा विभाग पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करे। मुख्यमंत्री रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एवं राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की उपस्थिति में ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन एवं सभी डिस्कॉम के अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ बनाने तथा गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और सभी संयंत्रों में तकनीकी दक्षता तथा रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग 10 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक एवं भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखा जाए तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास वर्तमान में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें संचालित हैं। प्रदेश में 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह तथा उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने अथवा शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों के बावजूद फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए। बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए, लेकिन मरम्मत एवं बहाली कार्य तेजी से कराया गया। मुख्यमंत्री ने भूमिगत केबल वाले स्थलों पर खुदाई से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से विधिवत स्वीकृति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए ताकि विद्युत व्यवस्था बाधित न हो। मुख्यमंत्री ने ट्रांसफॉर्मर क्षति की घटनाओं में कमी को सकारात्मक बताते हुए इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022-23 की तुलना में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022-23 में 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई। बैठक में यह भी बताया गया कि 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2022-23 में जहां 39,177 बड़े ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 20,292 रह गई। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा तंत्र की व्यापक स्थापना, समयबद्ध मरम्मत और जवाबदेही तय किए जाने से यह सुधार संभव हुआ है। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अप्रैल और मई माह में पिछले वर्ष की तुलना में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके कारण प्रदेश में बिजली मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड मेट 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन हो गया, जबकि पीक डिमांड मेट 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट तक पहुंच गया। बैठक में बताया गया कि 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुरूप विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 15 मई से विभिन्न पावर प्लांटों में अलग-अलग कारणों से बिजली उपलब्धता प्रभावित हुई। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश पावर … Read more

सभी थानों की सीसीटीवी मॉनिटरिंग के लिए बने सेंट्रल डैशबोर्ड: मुख्यमंत्री

सभी थानों की सीसीटीवी मॉनिटरिंग के लिए बने सेंट्रल डैशबोर्ड: मुख्यमंत्री पुलिस की गोपनीय सूचनाओं और संचार सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, हर जरूरी तकनीकी सुधार करें: मुख्यमंत्री 12 जनपदों में शुरू होगी डिजिटल वायरलेस सेवा, 47 करोड़ की कार्ययोजना रिवर्स ऑक्शन से पुलिस रेडियो उपकरण खरीद में 1.23 करोड़ रुपये की बचत डीआईजी रेडियो पूर्वी का मुख्यालय आजमगढ़ तथा डीआईजी रेडियो पश्चिमी का मुख्यालय अलीगढ़ में बनाने पर विचार रेडियो कार्मिकों की चरित्र पंजिका संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से सत्यापित कराने पर भी हुई चर्चा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की पुलिस व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, सुरक्षित तथा तकनीक आधारित बनाने के लिए पुलिस रेडियो विभाग को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। रविवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की लोकेशन, मूवमेंट और संचार गतिविधियों की गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी सेंधमारी की संभावना नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस रेडियो नेटवर्क को अत्याधुनिक तकनीकों से सशक्त किया जाए तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक निर्बाध संचार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी पुलिस थानों की सीसीटीवी फुटेज की लाइव मॉनिटरिंग के लिए एक सेंट्रल डैशबोर्ड विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे कानून व्यवस्था की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगी।  मुख्यमंत्री ने बेहतर पर्यवेक्षण और निगरानी के लिए विभागीय ढांचे को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। इस क्रम में डीआईजी रेडियो पूर्वी का मुख्यालय आजमगढ़ तथा डीआईजी रेडियो पश्चिमी का मुख्यालय अलीगढ़ में स्थापित किए जाने पर विचार किया गया। साथ ही रेडियो कार्मिकों की चरित्र पंजिका संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से सत्यापित कराने तथा वायरलेस सेटों को निष्प्रयोजन घोषित करने से पहले तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि गत वित्तीय वर्ष में संचार उपकरणों की खरीद के अंतर्गत थानों के लिए 275 फ्लैट बेस मास्ट, 5322 बैटरियां, 120 बैकपैक सेट तथा केबल, चार्जर और एंटीना सहित अन्य सहायक उपकरण खरीदे गए। आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत 50 पीए सिस्टम भी स्थापित किए गए। रिवर्स ऑक्शन प्रक्रिया अपनाने से उपकरणों की खरीद में लगभग 1.23 करोड़ रुपये की बचत हुई। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 47 करोड़ रुपये की लागत से 12 जनपदों में डिजिटल वायरलेस सेवाएं शुरू करने की योजना है। इसके अतिरिक्त मापक उपकरण, पोर्टेबल संचार के लिए 5जी फिल्टर, दूरस्थ थानों के लिए सेल्फ सपोर्टेड मास्ट तथा पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के लिए हैंड हेल्ड वायरलेस संचार व्यवस्था विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने विभागीय मानव संसाधन प्रबंधन को भी तकनीक आधारित बनाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी कार्मिकों का डेटा मानव सम्पदा पोर्टल पर अद्यतन किया जाए तथा चरित्र पंजिका, अवकाश और अन्य सेवा संबंधी कार्य पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित हों। उन्होंने कर्मचारियों को नवीनतम तकनीकों, कंप्यूटर प्रशिक्षण और संचार संदेशों की गुणवत्ता सुधार से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने पर भी विशेष बल दिया।

उत्तर प्रदेश में नई व्यवस्था लागू, योगी सरकार ने जिलों के लिए जारी किए सख्त निर्देश

 लखनऊ यूपी में लोगों की समस्याओं को लेकर सीएम योगी ने बड़ा फैसला लिया है. अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में हर सप्ताह विकास खंड स्तर पर विशेष चौपाल लगाई जाएगी, जहां जमीन विवाद, घरेलू हिंसा, पुलिस शिकायत, अवैध वसूली और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत निस्तारण करने की कोशिश होगी।  सीएम योगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों से दो टूक कहा कि जनता की समस्या का औपचारिक निस्तारण नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान होना चाहिए. यानी अब सिर्फ फाइल बंद कर देना काफी नहीं होगा. अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायतकर्ता को वास्तव में राहत मिली या नहीं. सरकार की योजना के मुताबिक हर विकास खंड में सप्ताह में एक दिन चौपाल लगेगी. इसमें जिले के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहेंगे. लोगों की शिकायतें सीधे सुनी जाएंगी और मौके पर कार्रवाई की जाएगी।  किन समस्याओं पर होगा फोकस सरकार ने साफ किया है कि इन चौपालों में सिर्फ सामान्य शिकायतें नहीं, बल्कि रोजमर्रा की बड़ी परेशानियों पर खास फोकस रहेगा. इनमें प्रमुख रूप से राजस्व और जमीन विवाद, घरेलू हिंसा के मामले,  पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज न करना,  अवैध वसूली की शिकायतें, सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना पेंशन, राशन, आवास और आयुष्मान जैसी योजनाओं से जुड़ी दिक्कतों पर सुनवाई होगी.  सरकार चाहती है कि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचे और उन्हें महीनों तक अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़ें।  अफसरों को मिला सख्त संदेश बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि शिकायतों को हल्के में लेने की आदत अब नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए. कई बार देखा गया है कि अधिकारी सिर्फ जवाब अपलोड कर मामले को बंद कर देते हैं, जबकि जमीन पर समस्या जस की तस बनी रहती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  त्योहारों को लेकर भी सख्त निर्देश बैठक में सिर्फ चौपाल योजना ही नहीं, बल्कि आने वाले गंगा दशहरा और बकरीद को लेकर भी बड़े निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी. प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक रहेगी और कुर्बानी सिर्फ तय स्थानों पर ही की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी नई परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. इसके साथ ही नमाज को लेकर भी निर्देश दिए गए कि सड़क जाम करके नमाज पढ़ने की अनुमति किसी भी हालत में नहीं दी जाए. नमाज सिर्फ पारंपरिक स्थानों पर ही अदा होगी।  खुले में मांस बिक्री और अवैध स्लॉटर हाउस पर सख्ती सरकार ने त्योहारों के दौरान साफ-सफाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि खुले में मांस की बिक्री नहीं होनी चाहिए. अवैध स्लॉटर हाउस किसी भी हालत में संचालित न हों. साथ ही वैध बूचड़खानों में भी तय क्षमता से अधिक पशु रखने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. बैठक में अलीगढ़, बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर और संभल जैसे संवेदनशील जिलों के अधिकारियों से अलग से बात की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों की घटनाओं का अध्ययन किया जाए और संभावित उपद्रवियों की सूची पहले से तैयार रखी जाए. जरूरत पड़ने पर निषेधात्मक कार्रवाई भी की जाए. साथ ही सभी जिलों में पीस कमेटी की बैठकों और फ्लैग मार्च बढ़ाने के निर्देश दिए गए. साथ ही तेज गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए छायादार स्थान और मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।  बिना नंबर प्लेट वाहनों पर चलेगा अभियान बैठक में सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने के आदेश दिए. इसके अलावा अवैध खनन पर भी सरकार ने सख्त रुख दिखाया. टास्क फोर्स बनाकर कार्रवाई करने और किसी भी दबाव में न आने के निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई हो, लेकिन आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।  भू-माफियाओं पर और सख्त होगी कार्रवाई सरकार ने भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान तेज करने के भी निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध कब्जा करने वालों पर कार्रवाई हो, लेकिन किसी भी आम नागरिक के वैध अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए. इसी दौरान जिन जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति नहीं है, वहां जल्द तैनाती करने के भी निर्देश दिए गए. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, आईजी, एसएसपी और एसपी मौजूद रहे। 

योगी सरकार का बड़ा कदम, डिजिटल ट्रेनिंग से हाईटेक बन रहे शिक्षक

डिजिटल प्रशिक्षण से शिक्षकों को हाईटेक बना रही योगी सरकार – निष्ठा प्रशिक्षण 2026-27 का पहला चरण शुरू, दीक्षा पोर्टल के माध्यम से होगा ऑनलाइन प्रशिक्षण – प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के शिक्षकों को नई शिक्षा पद्धति, एफएलएन और डिजिटल सुरक्षा का मिलेगा प्रशिक्षण – तकनीक आधारित शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल को जमीनी स्तर तक मजबूत कर रही योगी सरकार लखनऊ योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत है। शिक्षकों को नई तकनीक, आधुनिक शिक्षण पद्धति और डिजिटल दक्षता से लैस करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। प्रदेश सरकार ने सत्र 2026-27 के लिए निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला चरण दीक्षा पोर्टल के माध्यम से शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल दर्शाती है कि अब प्रदेश में शिक्षा सुधार केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों की क्षमता वृद्धि और डिजिटल दक्षता को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का फोकस अब तकनीक आधारित शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल को जमीनी स्तर तक मजबूत करने पर है, ताकि कक्षा शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। निष्ठा कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों का नामांकन 21 मई 2026 से शुरू हो गया है, जबकि नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 15 सितंबर 2026 तक संचालित होंगे। शासन स्तर से सभी बीएसए, डायट प्राचार्य, बीईओ, एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर्स को शिक्षकों का शत-प्रतिशत नामांकन और प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। तीन श्रेणियों में होगा प्रशिक्षण निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी ईसीसीई की है, जिसमें प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और बुनियादी सीखने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरी श्रेणी एफएलएन की है, जिसके अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को भाषा और गणितीय दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति से जोड़ा जाएगा तथा तीसरी श्रेणी में कक्षा 6 से 12 तक के शिक्षकों के लिए एडवांस कोर्स शामिल किए गए हैं। इनमें साइबर हाइजीन, ई-वेस्ट के खतरे, एक्शन रिसर्च और 'कैच द रेन' जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत हो रहा शिक्षक प्रशिक्षण योगी सरकार पहले ही स्मार्ट क्लास, मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ा रही है। अब दीक्षा पोर्टल के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उसे और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल सुरक्षा और व्यावहारिक शिक्षा मॉडल से जोड़ना है, ताकि बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। शिक्षा सुधार के साथ शिक्षक दक्षता पर फोकस योगी सरकार की रणनीति साफ है कि जब शिक्षक तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धति में दक्ष होंगे, तभी परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सीखने की क्षमता और शैक्षिक गुणवत्ता में व्यापक सुधार दिखाई देगा। यही कारण है कि अब प्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया न रखकर डिजिटल और परिणाम आधारित मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर नई मजबूती मिल सके।

योगी सरकार का ‘फ्यूचर रेडी’ एजुकेशन विजन, नोएडा CSR राउंड टेबल में जुटीं 100+ संस्थाएं

योगी सरकार के नेतृत्व में ‘फ्यूचर रेडी’ शिक्षा व्यवस्था पर जोर, नोएडा में सीएसआर राउंड टेबल, 100 से अधिक संस्थाओं की सहभागिता 2017 के बाद शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव, 96% स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं नॉलेज इकॉनमी की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश, युवाओं की क्षमता पर फोकस एनईपी 2020 के तहत समग्र, कौशल आधारित और तकनीक-सक्षम शिक्षा पर बल स्मार्ट क्लासरूम, एआई और शिक्षक प्रशिक्षण से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार निपुण भारत मिशन में यूपी तेजी से अग्रणी बनने की ओर शिक्षा सुधार में सीएसआर और कॉर्पोरेट भागीदारी को मिला बढ़ावा डिजिटल, एसटीईएम और कौशल विकास के लिए संस्थाओं ने दिए सहयोग प्रस्ताव नोएडा / लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को भविष्य उन्मुख, तकनीक सक्षम एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा इन्वेस्ट यूपी एवं सीएसआरबॉक्स के सहयोग से नोएडा में “उत्तर प्रदेश सीएसआर राउंड टेबल 2026 ऑन फ्यूचर रेडी एजुकेशन” का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के कॉर्पोरेट, सीएसआर संस्थानों एवं विकास क्षेत्र के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा विभाग संदीप सिंह ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहीं आज 96 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में शौचालय, पेयजल, बिजली सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। यह परिवर्तन प्रदेश में शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा युवा शक्ति वाला राज्य है, जिसे सकारात्मक दिशा देकर “नॉलेज इकॉनमी” के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अब शिक्षा प्रणाली को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के समग्र विकास, कौशल, नवाचार एवं रुचि आधारित शिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ कॉर्पोरेट एवं सीएसआर संस्थाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इन्वेस्ट यूपी द्वारा संचालित सीएसआर फैसिलिटेशन मॉडल की सराहना करते हुए इसे और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया, ताकि शासन एवं निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित हो सके। राउंड टेबल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पीएम योजना एवं राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान, डिजिटल एवं एआई आधारित शिक्षा, विद्यालयी अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, शिक्षक क्षमता निर्माण, बालिका शिक्षा तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास जैसे विषय प्रमुख रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा डिजिटल शिक्षा, स्टेम (STEM), एआई, शिक्षक प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति एवं कौशल विकास के क्षेत्रों में सहयोग हेतु आशय पत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार एवं देश की अग्रणी संस्थाओं के मध्य समझौते भी हुए, जो प्रदेश में आधुनिक शिक्षा एवं कौशल विकास को नई दिशा देंगे। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, महानिदेशक बेसिक शिक्षा  मोनिका रानी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सीएम के सरकारी आवास पर आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम, 17 निवेशकों को मिलेगा औद्योगिक आवंटन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निवेशकों को सौंपेंगे आवंटन पत्र सीएम के सरकारी आवास पर आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम, 17 निवेशकों को मिलेगा औद्योगिक आवंटन निवेश और उद्योगों को मिलेगी नई रफ्तार, दो निवेश परियोजनाओं का भी होगा उद्घाटन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश लगातार देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार 22 मई को मुख्यमंत्री राजधानी लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर निवेशकों को एक विशेष कार्यक्रम में आवंटन पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 17 निवेशकों को औद्योगिक आवंटन पत्र प्रदान करेंगे, जिससे प्रदेश में नए निवेश, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। सायंकाल होने वाले इस कार्यक्रम में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता भी उपस्थित रहेंगे और निवेशकों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान सीईएससी ग्रीन्स और आईबी सोलर की दो निवेश परियोजनाओं का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री निवेशकों के साथ संवाद कर उन्हें प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक संभावनाओं और सरकार की योजनाओं से भी अवगत कराएंगे। अंत में सभी प्रतिभागियों के साथ ग्रुप फोटो का भी कार्यक्रम निर्धारित है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार की निवेशक अनुकूल नीतियों, बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज प्रशासनिक फैसलों के कारण उत्तर प्रदेश लगातार बड़े निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। सरकार का फोकस प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन पर भी है।

स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए तत्परता से खड़ी है सरकार: सीएम योगी

पीएम मोदी के नेतृत्व में बना स्पोर्ट्स का शानदार ईको सिस्टम: मुख्यमंत्री 46वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के विजेताओं को पुरस्कृत किया सीएम योगी ने स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए तत्परता से खड़ी है सरकार: सीएम योगी स्पोर्ट्स क्षेत्र में विकसित हुए बेहतरीन ईको सिस्टम का परिणाम है रामगढ़ताल: सीएम योगी गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप देश और सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले 11-12 वर्षों में स्पोर्ट्स का शानदार ईको सिस्टम विकसित हुआ है। पीएम मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास हुआ है। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण व प्रोत्साहन के लिए सरकार पूरी तत्परता से खड़ी है। स्पोर्ट्स क्षेत्र में विकसित हुए बेहतरीन ईको सिस्टम का ही परिणाम रामगढ़ झील (रामगढ़ताल) भी है। 2017 के पहले जो रामगढ़ताल क्षेत्र गंदगी व अपराध का गढ़ था, वहां आज रोइंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए राष्ट्रीय महिला टीम के प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन संभव हुआ है।  सीएम योगी गुरुवार को रामगढ़ताल में रोइंग फेडरेशन आफ इंडिया की तरफ से आयोजित 46वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। 20 राज्यों से आए रोइंग खिलाड़ियों की सहभागिता वाली इस प्रतियोगिता के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी ऊर्जा व शक्ति का सही दिशा में सकारात्मक उपयोग करने वाले देश का भविष्य उज्ज्वल होता है। खिलाड़ी हमेशा सकारात्मक सोच और टीम भावना के साथ कार्य करता है। वह नशा व नकारात्मकता से दूर रहकर स्व अनुशासन के साथ समाज को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ता है।  ‘चरैवेति-चरैवेति’ ही जीवन का मंत्र सीएम योगी ने कहा, मुकाबले के दौरान ताल में खिलाड़ियों के सामने तेज हवाओं को देखकर मेरे मन में महान साहित्यकार सोहनलाल द्विवेदी की पंक्तियां याद आ गईं- ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’ यह जीवन का सच है कि जो डर गया, वह मर गया। जो भाग गया उसको समाज, देश और ईश्वर भी कभी माफ नहीं करते। इसीलिए, जीवन का एक ही मंत्र है और वह है- ‘चरैवेति-चरैवेति’, यानी चलते रहो-चलते रहो। सम और विषम परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए अपने आप को तैयार करते रहो। भारतीय मनीषा ने भी सदैव यही प्रेरणा दी है।  हर गांव में विकसित हो रहे खेल के मैदान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश में 2017 के पहले खेल सुविधाओं का नितांत अभाव था, वहां आज हर गांव में खेल के मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम और जिला स्तर पर स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं। गांव-गांव में प्रतियोगिताएं हो रही हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में खेलो इंडिया खेलो, फिट इंडिया मूवमेंट, सांसद खेलकूद प्रतियोगिता, विधायक खेलकूद प्रतियोगिता तथा ग्रामीण लीग प्रतियोगिता के माध्यम से खेल गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ी है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। गोरखपुर में भी विगत दिनों अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया।  पदक विजेता 534 खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से मिली नौकरी सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों में कोई खेल नीति नहीं थी। हमारी सरकार ने खेल नीति विकसित की। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को नौकरी की गारंटी दी। ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप आदि में पदक विजेता 534 खिलाड़ियों की पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों में सीधी भर्ती की गई है। 500 और खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के जरिये नौकरी देने का कार्य शुरू किया जा रहा है।  रोइंग खिलाड़ियों ने आगे बढ़ाया ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ विजन सीएम योगी ने कहा कि 46वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में 20 राज्यों के लगभग 300 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग कर पीएम मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ विजन को आगे बढ़ाया है। भारत में रोइंग प्रतिस्पर्धाएं तेजी से आगे बढ़ी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा रामगढ़ताल के समीप एक वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी विकसित किया गया है। वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए जरूरी स्पोर्ट्स साइंस, डेटा एनालिटिक्स, मेंटल फिटनेस एवं आधुनिक प्रशिक्षण जैसी तमाम सुविधाएं देश में उपलब्ध हो रही हैं। आने वाले समय में रामगढ़ताल में रोइंग, कयाकिंग, कैनोइंग एवं जल क्रीडा से संबंधित अन्य प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होगा। वर्ष 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स भारत में होंगे। उसमें महिला टीम के प्रशिक्षण हेतु रामगढ़ताल को चुना गया है। प्रशासन खिलाड़ियों के प्रशिक्षण हेतु सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करे। अच्छे कोच व विशेषज्ञों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि सुगमतापूर्वक प्रशिक्षण संचालित हो सके।  यूपी में वाटर स्पोर्ट्स की समृद्ध संभावनाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में वाटर स्पोर्ट्स की संभावनाएं बहुत समृद्ध हैं। प्रदेश में गंगा, यमुना, सरयू, गंडक, राप्ती जैसी पावन नदियां विद्यमान हैं, जहां वाटर स्पोर्ट्स को आगे बढ़ाया जा सकता है। बलिया, कुशीनगर, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, कानपुर जैसे शहरों में वाटर स्पोर्ट्स को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश में आधुनिक ईको सिस्टम उपलब्ध है। सीएम योगी ने बढ़ाया रोइंग खिलाड़ियों का उत्साह मुख्यमंत्री ने जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के दो फाइनल मुकाबलों (दो किमी बालिका डबल स्कल और दो किमी बालक क्वाड्रपल स्कल) का अवलोकन कर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने ताली बजाकर खिलाड़ियों के जुनून की सराहना की। इसके पहले कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर रोइंग फेडरेशन/एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सीएम योगी का स्वागत किया।  सीएम योगी के नेतृत्व में खेल व खिलाड़ियों को भरपूर प्रोत्साहन: खेल मंत्री समारोह में खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में विकास का उदाहरण पेश कर रहा है। खेल व खिलाड़ियों के लिए हर तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर और भरपूर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गोरखपुर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास हो चुका है तो यहां का रामगढ़ताल रोइंग की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार हो चुका है। सपा सरकार में जिस रामगढ़ताल की पहचान गंदगी और अपराध से जुड़ी हुई थी, जहां गोलियां चलती थीं, वहां अब सीएम योगी के विजन से राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं … Read more

सीएम योगी ने रामगढ़ताल में की क्रूज की सवारी

सीएम योगी ने रामगढ़ताल में की क्रूज की सवारी लहरों पर विहार करने के साथ मुख्यमंत्री ने ताल की साफ-सफाई का लिया जायजा गोरखपुर जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के समापन पर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार शाम जनप्रतिनिधियों के साथ नैसर्गिक रामगढ़ताल में लेक क्वीन क्रूज की सवारी की। करीब 25 मिनट तक क्रूज पर सवार होकर मुख्यमंत्री निखरे ताल की लहरों के स्पंदन की आनंदानुभूति करने के साथ गोरखपुर की नई विकसित पहचान को ताल के किनारे उमड़ी भीड़ से महसूस करते रहे। ताल की लहरों पर विहार करने के दौरान सीएम ने इस विशाल प्राकृतिक झील की साफ-सफाई का भी जायजा लिया।  रामगढ़ताल के कायाकल्प का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है। उनके विजन से निखरा-संवरा रामगढ़ताल न केवल नए गोरखपुर की नई पहचान बन चुका है बल्कि इसकी गिनती अब इस अंचल के खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में भी होती है। पर्यटन विकास के साथ यहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। इस ताल में बड़े महानगरों की तर्ज पर क्रूज और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का भी संचालन हो रहा है। साथ ही ताल में वाटर स्पोर्ट्स की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं ने इसे नेशनल फेम दिला दिया है।  जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में पुरस्कार वितरण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेक क्वीन क्रूज पर पहुंचे। यहां उन्होंने क्रूज की सवारी के बीच ताल की स्वच्छता का भी निरीक्षण किया। उनके साथ कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ फोटो भी खिंचवाई।

यूपी रोडवेज बसों की लाइव ट्रैकिंग से यात्रियों का सफर हुआ ज्यादा सुरक्षित

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों की लाइव ट्रैकिंग से सुरक्षित बनाया जा रहा यात्रियों का सफर प्रतिदिन 16 लाख से ज्यादा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही योगी सरकार निगम की 13,500 से अधिक बसों को वीएलटीडी से जोड़ा गया बस के साथ ही ड्राइवरों की हर गतिविधि की हो रही कमांड सेंटर से निगरानी मार्गदर्शी पोर्टल पर यात्री भी बसों की देख पा रहे लाइव लोकेशन लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास करती आ रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) यात्रियों को सुरक्षित, सुगम यात्रा का अनुभव देने के लिए बड़े पैमाने पर नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। यूपीएसआरटीसी की लगभग सभी बसों की लाइव ट्रैकिंग हो रही है, ताकि प्रतिदिन इन बसों में सफर करने वाले 16 लाख से अधिक यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता की जा सके। यूपीएसआरटीसी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए 13,500 से अधिक बसों को व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) से जोड़ा जा चुका है। इसकी ट्रैकिंग लखनऊ स्थित मुख्यालय के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से हो रही है। बस ड्राइवरों की जवाबदेही भी तय की गई उन्होंने बताया कि इन बसों में प्रतिदिन 16 लाख से अधिक लोग यात्रा कर रहे हैं। बसों की ट्रैकिंग के लिए हर रोज 24 घंटे मुख्यालय का कमांड सेंटर और 20 रीजनल मॉनिटरिंग सेंटर एक्टिव रहते हैं। यहां से बस की ओवर स्पीड, तेज ब्रेक लगाने, तेज गति में बस मोड़ने, तय सीमा से अधिक रफ्तार पर बस चलाने, तय रूट समेत अन्य पर नजर रखी जा रही है। इसकी मुख्यालय से रोज रिपोर्ट तैयार होती है और गलती पाए जाने पर बस ड्राइवर को चेतावनी या कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इससे प्रदेश में दुर्घटनाओं में काफी कमी लाई जा रही है। पैनिक बटन दबाते ही एक्शन शुरू लाइव ट्रैकिंग के साथ इन बसों में हादसे या आपात स्थिति के लिए पैनिक बटन भी लगाए गए हैं। इनका इस्तेमाल होते ही अलर्ट यूपीएसआरटीसी कमांड सेंटर के साथ यूपी पुलिस के कंट्रोल रूम को भी जाता है। इसके बाद फौरन कंडक्टर से संबंधित विभागों द्वारा बात कर उचित एक्शन लिया जाता है। यूपीएसआरटीसी के मुताबिक हर रोज 5 हजार से अधिक अलर्ट आते हैं। जरूरत के हिसाब से मदद उपलब्ध कराई जाती है। पोर्टल और वेबसाइपट के जरिए यात्रियों को सुविधा यूपीएसआरटीसी के मार्गदर्शी पोर्टल और निगम की वेबसाइपट पर ट्रैक माई बस के जरिए यात्रियों को काफी सुविधा मिल रही है। यात्री बस की लोकेशन कहीं से भी लाइव देख सकते हैं।

स्वतंत्र देव सिंह बोले- पहले भर्तियों में होती थी लूट, ‘चाचा-भतीजा’ करते थे खेल

जब-जब भर्तियां निकलती थीं 'चाचा-भतीजा' लूटने के लिए झोला लेकर निकल पड़ते थे : स्वतंत्र देव सिंह – सपा सरकार में हुई नियुक्तियों और भर्तियों की योगी सरकार के मंत्रियों ने खोली पोल  – कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अखिलेश पर साधा निशाना  – 2004-07 पुलिस भर्ती घोटाले पर योगी सरकार के मंत्रियों ने सपा को घेरा – सपा सरकार में भर्ती मतलब सेटिंग और वसूली : स्वतंत्र देव सिंह  – योगी सरकार में पारदर्शी ढंग से हुईं 9 लाख भर्तियां : स्वतंत्र देव सिंह – सपा की असली ऑडिट रिपोर्ट जनता के पास है : असीम अरुण – यूपीपीएससी में एक जाति विशेष को फायदा पहुंचाया गया : असीम अरुण – योगी सरकार में नकल माफिया की कमर तोड़ दी गई, इसीलिए बौखलाए हैं अखिलेश : असीम अरुण  लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों स्वतंत्र देव सिंह और असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सपा सरकार के दौरान भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार, जातिवाद और पैसे के खेल का अड्डा बन चुकी थी। दोनों मंत्रियों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था स्थापित कर युवाओं का भरोसा लौटाया है, जबकि सपा शासन में नौकरी निकलते ही 'चाचा-भतीजा वसूली तंत्र' सक्रिय हो जाता था। भर्ती निकलते ही झोला लेकर निकल जाते थे चाचा-भतीजा जल शक्ति विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जब-जब नियुक्तियों और रोजगार के विज्ञापन निकलते थे, तब-तब चाचा-भतीजा लूट के लिए झोला लेकर निकल जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर भर्ती तक हर जगह खुला रेट चलता था और बिना पैसे व सिफारिश के कोई काम नहीं होता था। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में लगभग 9 लाख सरकारी भर्तियां पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हुई हैं। समाज के सभी वर्गों के युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि आज हर गांव में 4-5 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। न जातिवाद चला, न क्षेत्रवाद। केवल योग्यता के आधार पर चयन हुआ।  दलितों और शोषितों को दबाने का काम करती थी सपा सरकार स्वतंत्र देव सिंह ने आरोप लगाया कि सपा शासन में दलितों, पिछड़ों और शोषित वर्गों को व्यवस्थित रूप से दबाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और लूट-खसोट उस सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुके थे। सपा सरकार में हर काम में भ्रष्टाचार था। जनता सब देख चुकी है और समझ चुकी है। 2004-07 की भर्ती घोटाले की ऑडिट रिपोर्ट जनता के सामने है समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने भी अखिलेश यादव की कथित 'पीडीए ऑडिट रिपोर्ट' पर पलटवार करते हुए कहा कि जनता के पास सपा सरकार की असली 'ऑडिट रिपोर्ट' पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि 2004 से 2007 के बीच मुलायम सिंह यादव सरकार में पुलिस भर्ती घोटाला हुआ था, जिसमें व्यापक धांधली के आरोप लगे। असीम अरुण ने कहा कि मायावती सरकार बनने के बाद 50 से अधिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया और पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा। बाद में सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दाखिल की। उन्होंने कहा कि मायावती सरकार ने 2007 में पुलिस भर्ती की पारदर्शी व्यवस्था लागू की थी, लेकिन 2012 में अखिलेश सरकार ने उसे खत्म कर 10वीं और 12वीं के नंबर के आधार पर भर्ती शुरू कर दी, जिससे पक्षपात और धांधली के आरोप फिर बढ़े। योगी सरकार ने बिना सिफारिश सवा दो लाख पुलिस भर्ती की असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार ने पहली बार ऐसी भर्ती व्यवस्था दी, जिसमें बिना सिफारिश और बिना पैसे के केवल योग्यता के आधार पर चयन हुआ। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग सवा दो लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती पारदर्शी तरीके से कराई गई है और कुल मिलाकर लगभग 9 लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आज नकल माफिया की कमर टूट चुकी है। परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई हो रही है। इसी वजह से अखिलेश यादव बौखलाए हुए हैं। यूपीपीएससी में एक जाति विशेष की भर्तियां हुईं असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान यूपीपीएससी में हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने अनिल यादव को यूपीपीएससी का चेयरमैन बनाया, जिसकी नियुक्ति को हाईकोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में एक जाति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए भर्ती प्रक्रिया प्रभावित की गई। सामान्य वर्ग की सीटों पर भी एक ही जाति के लोगों की भर्ती कराई गई। यही सपा की असली ऑडिट रिपोर्ट है। राहुल गांधी राजनीतिक पर्यटक बन चुके हैं राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए असीम अरुण ने कहा कि कांग्रेस नेता अमेठी और रायबरेली में 'राजनीतिक पर्यटक' की तरह आते हैं और हर बार विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है और यह दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन राहुल गांधी ऊल-जुलूल बयान देकर सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। जनता सब जानती है दोनों मंत्रियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सपा शासन और योगी सरकार के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से देख चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जहां पहले भर्ती प्रक्रिया जातिवाद और भ्रष्टाचार से प्रभावित रहती थी, वहीं अब पारदर्शिता, तकनीक और मेरिट के आधार पर चयन हो रहा है।