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शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, योगी सरकार विकसित करेगी इनोवेशन कल्चर

परिषदीय और केजीबीवी में इनोवेशन कल्चर विकसित करेगी योगी सरकार – 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की तैयारी – विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, क्विज और निबंध प्रतियोगिताएं होंगी आयोजित – गांव और कस्बों के बच्चों तक आधुनिक और नवाचार आधारित शिक्षा पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम लखनऊ,  योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ देश के उभरते इनोवेशन और तकनीकी बदलावों से जोड़कर भविष्य के लिए तैयार करने में जुट गई है। 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से पहली बार गांव और कस्बों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी, रिसर्च, नवाचार और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू की गई है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे तक भी वही आधुनिक सीखने का माहौल पहुंचे, जो अब तक चुनिंदा संस्थानों और बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था। सरकार द्वारा अब परिषदीय और केजीबीवी विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, नवाचार क्विज और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन कल्चर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मई 2026 के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की सहभागिता से विभिन्न नवाचार आधारित गतिविधियां कराई जाएंगी। प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में 'विकसित भारत के नवाचार परिदृश्य' विषय पर संगोष्ठी, 'डीप टेक्नोलॉजी' विषय पर विशेष कक्षाएं, 'भारत क्विज- भारत के नवाचार को कौन जानता है?' प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उनमें जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से हो सकेंगे तैयार योगी सरकार की रणनीति है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी देश और दुनिया में हो रहे तकनीकी बदलावों और नवाचारों से परिचित हों। यही कारण है कि अब परिषदीय विद्यालयों में भी इनोवेशन और रिसर्च आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब बच्चों को शुरुआती स्तर पर वैज्ञानिक सोच, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जाएगा तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। स्वयंसेवी संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग विद्यालयों में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि गतिविधियों को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसमें शामिल हो सकें। इसके साथ ही विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों की फोटो, वीडियो और नवाचार से जुड़ी जानकारियों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास योगी सरकार पहले ही निपुण भारत मिशन, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने पर काम कर रही है। अब 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान को उसी व्यापक विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी भविष्य की तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डाटा सेंटर क्लस्टर, प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं प्रसंस्करण नीति की उच्च स्तरीय समीक्षा की एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: मुख्यमंत्री बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से शुरू की जा सकती है परियोजना, बड़े पैमाने पर उपलब्ध है भूमि: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर दिया जोर, मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाने का दिया निर्देश मंडियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पर्वों के दौरान लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएः मुख्यमंत्री अल नीनो के संभावित प्रभाव के चलते मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश, राज्य के खाद्यान्न भंडार पर्याप्त और मजबूत होने चाहिए “प्रोजेक्ट गंगा” के तहत जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाएः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों, उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), प्रोजेक्ट गंगा तथा गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क एवं मंडी सेस में संभावित छूट जैसे महत्वपूर्ण विषयों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी) की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल एनसीआर क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह सहित बड़ी टेक कंपनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर  प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा  एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है। प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह केवल एक परियोजना नहीं बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है। इसके तहत वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और 5 गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2040 तक दुनिया की नई अर्थव्यवस्था एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे “फ्यूचर एरेना” के इर्द-गिर्द विकसित होगी, जिनका संयुक्त वैश्विक बाजार 29 से 48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत के लिए एआई सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज, क्लाउड सर्विसेज, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर्स, एयरोस्पेस और ईवी जैसे सेक्टर भविष्य के प्रमुख आर्थिक इंजन होंगे। बैठक में उत्तर प्रदेश की पांच प्रमुख संरचनात्मक ताकतों- भौगोलिक स्थिति, विशाल भूमि उपलब्धता, बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व को रेखांकित किया गया। कहा गया कि उत्तर प्रदेश का इनलैंड लोकेशन इसे समुद्री जोखिमों और चक्रवातों से सुरक्षित बनाता है, जबकि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तेजी से विकसित हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर, एनआईटी प्रयागराज और 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों के कारण राज्य में विशाल तकनीकी प्रतिभा उपलब्ध है। बैठक में उत्तर प्रदेश को “एशिया का मोस्ट सिक्योर, स्केलेबल एवं कनेक्टेड इनलैंड एआई टेरिटरी” बताया गया। कहा गया कि देश के लगभग सभी प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं और राज्य भारत के सभी समुद्री केबल लैंडिंग पॉइंट्स से जुड़ा हुआ है। राज्य के भीतर 5 मिलीसेकंड से कम लेटेंसी तथा मुंबई और चेन्नई जैसे डिजिटल हब तक 5–12 मिलीसेकंड कनेक्टिविटी उपलब्ध है। वैश्विक टेक कंपनियों के लिए यूपी कम लागत, बेहतर स्केलेबिलिटी और अधिक नेटवर्क रिडंडेंसी वाला आदर्श एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब है। प्रोजेक्ट गंगा मुख्यमंत्री ने “प्रोजेक्ट गंगा” यानी गवर्नेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कार्य करने वाली कंपनियां भी इन युवाओं का उपयोग कर सकें, ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत से ही डिजिटल उद्यमियों को उचित इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाने की महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य केवल इंटरनेट उपलब्ध कराना नहीं बल्कि टेलीमेडिसिन, डिजिटल शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, ई-गवर्नेंस, डिजिटल रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है। परियोजना के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (डीएसपी) के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और 1 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। योजना के तहत 20 लाख से अधिक घरों को फाइबर आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक डीएसपी अपने क्षेत्र में 200 से 300 घरों को कनेक्ट कर सकेगा। महिला उद्यमिता को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है और लगभग 50 प्रतिशत महिला उद्यमियों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक में बताया गया कि केवल मोबाइल इंटरनेट के जरिए सीमित सेवाएं संभव हैं, जबकि वास्तविक डिजिटल परिवर्तन के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड आवश्यक है। एआई आधारित कृषि, ड्रोन मॉनिटरिंग, स्मार्ट विलेज, वर्चुअल लैब, टेलीमेडिसिन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी सेवाओं के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी बताया गया। प्रोजेक्ट गंगा के तहत डीएसपी केवल इंटरनेट सेवा प्रदाता नहीं होंगे, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का संपूर्ण नेटवर्क विकसित करेंगे। वे हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, आईपीटीवी, ओटीटी एक्सेस, सीसीटीवी समाधान, पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी और एंटरप्राइज कनेक्टिविटी जैसी सेवाएं प्रदान करेंगे। योजना के तहत प्रत्येक डीएसपी को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना फिलहाल 21 प्राथमिक जिलों में “प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट” के रूप में शुरू करने की तैयारी में है और इसके बाद इसे … Read more

क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा मुद्दों पर हुई चर्चा, बैठक में शामिल हुए योगी आदित्यनाथ

मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की अध्यक्षता, चार राज्यों के मुख्यमंत्री हुए शामिल कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने एवं राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन जैसे अहम विषयों पर हुई चर्चा  लखनऊ मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक  छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मेजबान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी मौजूद रहे।  बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में सहभाग किया। बैठक में जनकल्याण, सुशासन, क्षेत्रीय विकास, कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने एवं राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन जैसे अहम विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने लिखा कि सहकारी संघवाद, समन्वित विकास और राज्यों के मध्य बेहतर तालमेल को नई दिशा देने वाला यह मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'विकसित भारत' के सामूहिक संकल्प को और अधिक सशक्त करेगा।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का किया आत्मीय स्वागत

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल होने पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री साय ने उन्हें राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप उन्हें सम्मान दिया।               उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक का आयोजन आज बस्तर में किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय, विकास और प्रशासनिक विषयों पर व्यापक चर्चा होगी।           इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच विभिन्न समसामयिक मुद्दों, राज्यों के बीच आपसी समन्वय तथा क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में सुशासन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

वेटरनरी स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी, सरकार ने बढ़ाया इंटर्नशिप स्टाइपेंड

पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते को 4,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के पशु चिकित्सा छात्रों को बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा और उनका मनोबल भी बढ़ेगा। दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशाल जनसंख्या, बड़ी पशुधन संख्या और विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र वाला राज्य है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, विभिन्न पशु महामारियों के नियंत्रण और उन्मूलन तथा उन्नत नस्लों के संवर्धन में पशु चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी तथा सरदार वल्लभभाई पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में अध्ययनरत पशु चिकित्सा छात्रों को अब बढ़ा हुआ इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। सरकार के अनुसार वर्तमान में इन छात्रों को 4,000 रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता दिया जा रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। इस निर्णय से तीनों विश्वविद्यालयों में अनुमोदित 300 छात्रों को लाभ मिलेगा। पशुपालन मंत्री ने कहा कि हरियाणा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में अधिक इंटर्नशिप भत्ता दिए जाने का अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। प्रस्ताव लागू होने पर सरकार पर लगभग 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा, जिसकी व्यवस्था विश्वविद्यालयों को दिए जाने वाले शासकीय अनुदान के गैर-वेतन मद से की जाएगी। इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा, शिक्षा के प्रति रुचि और कार्य के प्रति उत्साह बढ़ेगा तथा समानता के सिद्धांत को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसे “समानता के सिद्धांत” के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट! पिछड़ा आयोग की बाधा दूर, जल्द बज सकता है चुनावी बिगुल

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे करोड़ों ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के लिए सोमवार का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में कुल 12 प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई है। इस बैठक का सबसे बड़ा फैसला पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर जरूरी ओबीसी आयोग के गठन का रहा। इससे चुनाव के रास्ते की सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर होगी। यूपी पंचायत चुनाव में देरी हो गई है। 2021 में 2 मई को ही नतीजे आ गए थे। 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन को हरी झंडी उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन को लेकर पिछले काफी समय से बनी उहापोह की स्थिति आखिरकार समाप्त हो गई है। योगी कैबिनेट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी (OBC) आरक्षण का सटीक स्वरूप और आनुपातिक आबादी तय करने के लिए 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' (Dedicated OBC Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। अब इस आयोग की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों के आरक्षण का रोटेशन तय किया जाएगा, जिससे सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले की वैधानिक बाध्यता पूरी हो जाएगी। योगी कैबिनेट के फैसले के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश होंगे। अन्य सदस्य पिछड़ा वर्ग की जानकारी रखने वाले लोग ही होंगे। इनका कार्यकाल छह महीने होगा। पशु चिकित्सा विवि में इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पशु चिकित्सा (Veterinary) विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के मासिक इंटर्नशिप भत्ते (Stipend) को सीधे तीन गुना बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब इंटर्नशिप कर रहे भावी पशु चिकित्सकों को हर महीने 4,000 के स्थान पर 12,000 रुपए मिलेंगे। उप्र पं० दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा, आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या और सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ के छात्रों को इसका फायदा होगा। लखनऊ और आगरा में मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार लखनऊ और आगरा में मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दोनों शहरों की मेट्रो परियोजनाओं से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। जहां एक तरफ लखनऊ मेट्रो के बहुप्रतीक्षित फेज-1बी (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) के निर्माण के लिए भारत सरकार के साथ त्रिपक्षीय समझौते (MoU) के रास्ते साफ हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 के लिए निःशुल्क भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। इन फैसलों से दोनों ही शहरों में मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। लखनऊ मेट्रो: 5801 करोड़ के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए हस्ताक्षरित होगा MoU राजधानी लखनऊ में चारबाग से वसंतकुंज तक बनने वाले 11.1 किलोमीटर लंबे 'ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर' (फेज-1बी) की राह अब पूरी तरह साफ हो गई है। मुख्यमंत्री की कैबिनेट ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (भारत सरकार), उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) के मध्य निष्पादित होने वाले त्रिपक्षीय मेमोरेण्डम ऑफ अण्डरस्टैण्डिंग (MoU) के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इससे पहले 5 मार्च 2024 को राज्य कैबिनेट ने इसके डीपीआर (DPR) को मंजूरी दी थी, जिसके बाद भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 3 सितंबर 2025 को इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹5,801.05 करोड़ को स्वीकृत करते हुए अपना अंतिम अनुमोदन प्रदान किया था। भारत सरकार की शर्तों और न्याय विभाग द्वारा विधीक्षित (संशोधित) आलेख के अनुसार, इस त्रिपक्षीय समझौते में राज्य सरकार की भूमिका, वित्तीय हिस्सेदारी और दायित्वों को पूरी तरह निर्धारित कर दिया गया है। इस कॉरिडोर के बनने से पुराने लखनऊ के लाखों निवासियों को विश्वस्तरीय यातायात की सुविधा मिलेगी। आगरा मेट्रो: कॉरिडोर-2 के निर्माण के लिए सेवायोजन कार्यालय की जमीन निःशुल्क ट्रांसफर ताजनगरी में आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनने वाले मेट्रो कॉरिडोर-II के काम को गति देने के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा और अपवादस्वरूप फैसला लिया है। इस कॉरिडोर के तहत मेट्रो स्टेशन और वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए आगरा के सदर तहसील के अंतर्गत मौजा चक अव्वल में स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय परिसर की पार्क के रूप में रिक्त पड़ी 550 वर्गमीटर नजूल भूमि को उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) को आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी आगरा द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक के अनुरोध पर विचार करते हुए, राज्य सरकार ने प्रभावी सर्किल दर पर पूरी तरह से छूट प्रदान की है। कतिपय नियमों और शर्तों के अधीन यह कीमती जमीन मेट्रो कॉर्पोरेशन को बिल्कुल निःशुल्क (Free of Cost) ट्रांसफर की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेट्रो परियोजना के जनहित को देखते हुए यह भूमि हस्तांतरण केवल एक 'अपवादस्वरूप' फैसला है, जिसे भविष्य के लिए किसी भी अन्य मामले में नजीर या दृष्टांत के रूप में नहीं माना जाएगा। मिर्जापुर में पूलिंग उपकेन्द्र (एआईएस) एवं सम्बन्धित पारेषण लाइनों का निर्माण प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए प्रस्तावित तापीय एवं पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं से उत्पादित ऊर्जा के समुचित निकासी के लिए 765/400 केवी मिर्जापुर पूलिंग उपकेन्द्र और संबंधित पारेषण लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2799.47 करोड़ है। इसमें उपकेन्द्र एवं 'बे' निर्माण हेतु 1315.91 करोड़ और पारेषण लाइनों के लिए 1483.56 करोड़ सम्मिलित हैं। यह परियोजना एक Common Public Infrastructure के रूप में विकसित की जाएगी। इससे प्रदेश में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं निरंतरता में सुधार होगा और सभी उपभोक्ताओं-घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। लोहिया इंस्टीट्यूट में 1010 बेड का मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस गोमती नगर विस्तार सेक्टर-7 स्थित संस्थान के नवीन परिसर (शहीद पथ) में 1010 बेडेड मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर अस्पताल, Teaching Block और नवीन ओपीडी ब्लाक के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की लागत 85504.34 लाख (आठ अरब पचपन करोड़ चार लाख चौतीस हजार) है । इसके अंतर्गत हास्पिटल भवन में 1010 बेड्स के साथ ही एक नया … Read more

ग्रामीण निकाय चुनाव में OBC आरक्षण का रास्ता साफ, बनेगा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग

ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनेगा उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सरकार का निर्णय, छह माह में देगा रिपोर्ट पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए सामाजिक और राजनीतिक अध्ययन करेगा आयोग पांच सदस्यीय होगा आयोग, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे अध्यक्ष कैबिनेट में 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, सभी पर लगी स्वीकृति की मुहर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी गई। यह आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने हेतु उनके सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की समकालीन एवं अनुभवजन्य जांच करेगा। कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और सभी को स्वीकृत कर लिया गया। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण प्रदान करने के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी है। आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों की स्थिति, उनकी जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पंचायतों में भागीदारी का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा तथा निकायवार आनुपातिक आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी संस्तुतियां देगा। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और यदि जनसंख्या के अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े निर्धारित किए जा सकेंगे। आयोग के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है तथा आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह माह का होगा। आयोग प्रदेश की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण तय करने के उद्देश्य से आंकड़ों का अध्ययन करेगा और निकायवार आनुपातिक आरक्षण की संस्तुति देगा। इसके आधार पर आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का ज्ञान व अनुभव हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ तथा संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।

‘सड़क पर नमाज नहीं चलेगी’, CM योगी की चेतावनी; नियम तोड़ने वालों को दिया सख्त संदेश

लखनऊ   बकरीद (Bakrid 2026) से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) का सख्त बयान सामने आया है. राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज की इजाजत नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सड़कें आवागमन के लिए होती हैं, किसी भी व्यक्ति को उन्हें रोकने या सार्वजनिक रास्तों पर धार्मिक आयोजन करने का अधिकार नहीं है।  सीएम योगी ने कहा, ‘लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं बिल्कुल नहीं होती. सड़कें चलने के लिए हैं, कोई भी चौराहे पर आकर तमाशा नहीं बना सकता.’ उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों के लिए निर्धारित स्थल हैं और वहीं पर आयोजन होने चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कुछ लोगों ने उनसे कहा कि नमाजियों की संख्या अधिक होने के कारण जगह कम पड़ती है, तो उन्होंने सुझाव दिया कि ‘शिफ्ट में नमाज पढ़ लीजिए.’ उन्होंने आगे कहा कि अगर व्यवस्था के साथ रहना है तो नियम-कानून का पालन करना होगा।  आपको बता दें कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए. प्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं साहब आपके यहां यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं कतई नहीं होती है. आप जा कर देख लो नहीं होती है. अरे सड़कें चलने के लिए है या कोई भी व्यक्ति आकर के चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा. क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का? आवागमन बाधित करने का कौन सा अधिकार है? जहां उसका स्थल होगा वहां जाकर करें।  बकौल सीएम योगी- 'उन लोगों ने मुझसे कहा साहब कैसे होगा? हमारी संख्या ज्यादा है. हमने कहा शिफ्ट में कर लो. तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है तो भाई संख्या नियंत्रित कर लो. और नहीं है सामर्थ्य क्यों बेकार आगे संख्या बढ़ाई जा रही है और यह चाहिए आपको कि अगर आपको सिस्टम के साथ रहना है तो याद करना हम उन नियम और कानून को मानना शुरू करें।  सीएम योगी ने सख्‍त लहजे में कहा कि अगर तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है तो भाई अपनी जनसंख्‍या को ही नियंत्रित कर लो. अगर सामर्थ्य नहीं है तो क्यों बेकार आगे संख्या बढ़ा रहे हो. अगर आपको सिस्टम के साथ रहना है तो उन नियम और कानूनों को भी मानना शुरू करें. मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने आगे कहा कि यूपी में कानून का राज होागा और हम इसे सबके लिए समान रूप से ही लागू करेंगे. नमाज पढ़नी जरूरी है तो आप लोग इसे शिफ्ट में पढ़िए. हम तो उसको रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं।  सीएम योगी ने साफ किया कि ‘सड़क चलने के लिए है. एक आम नागरिक के लिए, एक बीमार व्यक्ति के लिए, एक आम नागरिक के लिए, एक कामगार के लिए, एक कर्मचारी के लिए, एक सामान्य नागरिक के लिए, एक व्यापारी के लिए हम सड़क को बाधित नहीं करने देंगे. सरकार का नियम सार्वभौम है. सबके लिए समान रूप से लागू होता है।  इसके बाद वह और ज्‍यादा सख्‍त दिखे. उन्‍होंने यहां तक कह डाला कि ‘हम यूपी में सड़कों पर अराजकता नहीं फैलने देंगे. प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है. अगर नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. हमारा काम है संवाद बनाना. आप संवाद से मानेंगे.. संवाद से नहीं तो संघर्ष से भी देख लो. बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का काम किया था. देख लिया ताकत. इसलिए सरकार उन सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का राज होगा. कानून के राज को सबको समान रूप से लागू करेंगे. नमाज पढ़नी आवश्यक है. आप शिफ्ट में पढ़िए. हम उसको रोकेंगे नहीं. लेकिन सड़क पर नहीं. सड़क चलने के लिए एक आम नागरिक के लिए, एक बीमार व्यक्ति के लिए, एक आम नागरिक के लिए, एक कामगार के लिए, एक कर्मचारी के लिए, एक सामान्य नागरिक के लिए, एक व्यापारी के लिए हम सड़क को बाधित नहीं करने देंगे. सरकार का नियम सार्वभौम है. सबके लिए समान रूप से लागू होता है।  उन्होंने कहा है कि हमने सबको कहा हमने कहा भाई नहीं चलने देंगे. अराजकता नहीं सड़कों पर फैलने देंगे. प्यार से मानेंगे ठीक बात है. नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. हमारा काम है संवाद बनाना. आप संवाद से मानेंगे संवाद से नहीं तो संघर्ष से भी देख लो. बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का कार्य किया. देख लिया ताकत. इसलिए सरकार उन सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है। 

योगी सरकार का बड़ा दावा, 9 वर्षों में 289 दुर्दांत अपराधी ढेर; 34 हजार से ज्यादा गिरफ्तार

योगी सरकार की पुलिस ने नौ वर्षों में 289 दुर्दांत अपराधियों को मुठभेड़ में किया ढेर, 34,253 को गिरफ्तार किया योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी है एनकाउंटर की कार्रवाई  सबसे अधिक मेरठ में 97 अपराधी किए गए ढेर, प्रदेश में पहले स्थान पर    एनकाउंटर की कार्रवाई में दूसरे नंबर पर है वाराणसी जोन और तीसरे नंबर पर है आगरा जोन  लखनऊ,  योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 289 दुर्दांत अपरधियों को मुठभेड़ में ढेर कर यमलोक पहुंचाया है। इस दौरान पुलिस ने कुल 17,043 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं, जिनमें 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। एनकाउंटर की कार्रवाई में 11,834 अपराधी घायल हुए। वहीं अपराधियों से लोहा लेते हुए 18 पुलिसकर्मी शहीद हो गये जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए। एनकाउंटर में मेरठ जोन पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर  सबसे अधिक मुठभेड़ मेरठ ज़ोन में दर्ज की गईं, जहां पुलिस ने 4,813 कार्रवाई की गईं। इस कार्रवाई में 8,921 अपराधी दबोचे गये जबकि 3,513 अपराधियों को घायल हुए। वहीं 97 कुख्यात अपराधियों को मौके पर ही मार गिराया गया। मेरठ जोन की मुठभेड़ के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो पुलिसकर्मी शहीद हो गये। एनकाउंटर कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा है। इसी तरह वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया जबकि 29 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया। इस दौरान 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए। पूरे प्रदेश में वाराणसी जोन एनकाउंटर कार्रवाई में दूसरे स्थान पर है। वहीं एनकाउंटर कार्रवाई में पूरे प्रदेश में आगरा जोन तीसरे स्थान पर है। यहां 2,494 एनकाउंटर की कार्रवाई की गईं, जिनमें 5,845 अपराधियों को दबोचा गया। इस दौरान 968 अपराधी घायल हुए जबकि 24 अपराध मार गिराए गए। मुठभेड़ के दौरान 62 पुलिसकर्मी घायल हुए।  कमिश्नरेट में सबसे अधिक गाजियाबाद में 18 अपराधी किए गये ढेर एनकाउंटर आंकड़ों पर नजर डालें तो बरेली ज़ोन में 2,222 मुठभेड़ के दौरान 21 दुर्दांत अपराधियों को मारा गया, वहीं लखनऊ ज़ोन में 971 मुठभेड़ के दौरान 20 अपराधी मारे गए। गाजियाबाद कमिश्नरी में 7,89 मुठभेड़ों में 18 अपराधी मारे गये। सभी कमिश्नरेट में यह सबसे अधिक है। कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12, लखनऊ कमिश्नरी में 147 मुठभेड़ों में 12 और प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधियों को मारा गया। इसी तरह आगरा कमिश्नरी में 489 मुठभेड़ों में 10, गौतमबुद्ध नगर में 1,144 मुठभेड़ों में 9, गोरखपुर जोन में 699 मुठभेड़ों में 8, वाराणसी कमिश्नरी में 146 मुठभेड़ों में 8, प्रयागराज कमिश्नरी में 150 मुठभेड़ों में 6 और कानपुर कमिश्नरी में 253 मुठभेड़ों में 4 अपराधियों को ढेर किया गया। पुलिसिया एक्शन ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर किया मजबूर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में यूपी पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारा। इससे अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। यही वजह है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस ने संगठित अपराध, माफिया और अवैध वसूली पर सख्त प्रहार किया। मुठभेड़ों के साथ ही संपत्ति कुर्की, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और एनएसए जैसे कानूनों के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ चला यह नौ वर्षीय अभियान न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि जमीनी हकीकत में भी कानून का राज स्थापित करने में सफल रहा है। पुलिस की त्वरित, कठोर और साहसिक कार्रवाई ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर कर दिया है और उत्तर प्रदेश अब भयमुक्त और सुरक्षित राज्य के रूप में अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी स्थापना को हरी झंडी

मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना को मिली मंजूरी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के अंतर्गत निजी क्षेत्र में “सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर” की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था को आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि वाराणसी स्थित एपेक्स वेलफेयर ट्रस्ट, जो बड़े अस्पतालों का संचालन करता है, अब शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रवेश कर रहा है। ट्रस्ट द्वारा मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का प्रस्ताव दिया गया था, जिसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में कैबिनेट ने संस्थान को आशय पत्र जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार मीरजापुर जनपद की चुनार तहसील के ग्राम समसपुर में लगभग 50.45 एकड़ भूमि पर इस निजी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। यह विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार होने के साथ उसकी गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अंग्रेजों के समय से लेकर वर्ष 2017 तक प्रदेश में केवल 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे, जबकि वर्ष 2017 के बाद अब तक आठ नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। इसी प्रकार निजी विश्वविद्यालयों की संख्या, जो लंबे समय तक 29 पर स्थिर थी, अब बढ़कर 52 हो गई है। मंत्री ने बताया कि आठ संस्थानों को लेटर ऑफ इंटेंट यानी आशय पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।