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UP में 1645 विस्थापित परिवारों के लिए बड़ा दिन, योगी सरकार देगी जमीन का अधिकार

 बिजनौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को बिजनौर के आलमपुर गौंरी, अफजलगढ़, धामपुर में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित 1645 परिवारों को जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र वितरित करेंगे. सरकार वंचित, शोषित और विस्थापित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए यह कदम उठा रही है. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों 50 पूर्व सैनिकों व पट्टाधारकों को भी लाभ मिलेगा. इसके अलावा, वह प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को आवंटन पत्र और चेक सौंपकर स्थानीय लोगों को बड़ी विकास योजनाओं से जोड़ेंगे।  बिजनौर में भव्य कार्यक्रम और कैफे का उद्घाटन इस भव्य आयोजन के दौरान सीएम योगी महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं द्वारा संचालित 'विदुर प्रेरणा कैफे' का भी उद्घाटन करेंगे. सरकार का मुख्य उद्देश्य इन विस्थापित और वंचित परिवारों को नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में सुरक्षा, सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है, जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके।  पहले भी विस्थापितों को मिले अधिकार उत्तर प्रदेश सरकार इससे पहले भी कई वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ चुकी है. अप्रैल के महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हुए 331 परिवारों को जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र बांटा था. इसके अलावा, चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में नदियों के कटान से प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2350 परिवारों और थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भूमि अधिकार पत्र आवंटित किए गए थे।  पुनर्वास के लिए करोड़ों की आर्थिक मदद इसी सिलसिले में मार्च महीने में बहराइच की ग्राम पंचायत सेमरीहना में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. वहां सीएम योगी ने भरथापुर गांव के 118 लाभार्थियों को पुनर्वास सहायता, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों के समकक्ष मूल्य के रूप में प्रति लाभार्थी 15 लाख रुपये की दर से 21.55 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की थी. साथ ही 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास, शौचालय और आवासीय पट्टे भी दिए गए थे। 

बिजली, स्वास्थ्य बीमा, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और महिला बैंक खातों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

एनएफएचएस-6 की ताजा रिपोर्ट में यूपी की बड़ी छलांग: 8 साल में बदली सामाजिक विकास की तस्वीर बिजली, स्वास्थ्य बीमा, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और महिला बैंक खातों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी योगी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तीकरण मानकों में सुधार परिवार नियोजन अभियान रहा सफल, प्रजनन दर 2.74 से घटकर 2.2 हुई संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंची स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंचा लखनऊ  राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक विकास की बदलती तस्वीर को सामने रखा है। वर्ष 2015-16 और 2023-24 के बीच के आंकड़ों की तुलना बताती है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के व्यापक क्रियान्वयन, महिला कल्याण कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विकास का असर अब राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षणों में भी दिखाई देने लगा है। सबसे पहले यदि बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो बिजली और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 2015-16 में जहां केवल 71 प्रतिशत घरों तक बिजली की पहुंच थी, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 95.8 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार स्वास्थ्य बीमा या किसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत 6.1 से बढ़कर 37.2 प्रतिशत पहुंच गया है। आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी पहलों ने लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच उपलब्ध कराया है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी 96.4 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 97.9 प्रतिशत (ग्रामीण) पहुंच गई है, जो जीवन स्तर में सुधार का संकेत है। जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2015-16 के 2.74 से घटकर 2023-24 में 2.2 रह गई है। यह आंकड़ा जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। परिवार नियोजन के किसी भी साधन का उपयोग करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 45.5 से बढ़कर 63.8 प्रतिशत हो गया है। वहीं ऐसी महिलाएं जो बच्चों के जन्म में अंतर तो रखना चाहती थीं परंतु परिवार नियोजक साधनों का उपयोग नहीं कर पा रहीं थीं, उनकी संख्या में भी काफी गिरावट आई है। यह 18 प्रतिशत से घटकर 10.8 प्रतिशत रह गई है। किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों में मां बनने अथवा गर्भवती होने का प्रतिशत 4 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत हो गया है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। सरकारी अस्पतालों के विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का असर अब आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2015-16 में केवल 26.4 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान चार या उससे अधिक बार स्वास्थ्य जांच कराती थीं, जबकि अब गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 70.6 तक पहुंच गया है। संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। टीकाकरण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2015-16 में 12 से 23 माह आयु वर्ग के केवल 51.1 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 81.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मिशन इंद्रधनुष और नियमित टीकाकरण अभियानों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों में गंभीर बीमारियों का खतरा कम हुआ है और बाल स्वास्थ्य में सुधार आया है। कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बच्चों में बौनापन यानी उम्र के अनुसार कम ऊंचाई की समस्या 46.2 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत पर आ गई है। इसी प्रकार कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 39.5 से घटकर 34.5 प्रतिशत रह गया है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, पोषण अभियान और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। महिला सशक्तीकरण के मोर्चे पर सर्वेक्षण ने सबसे सकारात्मक तस्वीर पेश की है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 10 वर्ष या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 32.9 से बढ़कर 42.5 प्रतिशत हो गया है। वहीं वित्तीय आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंच गया है। जनधन योजना, स्वयं सहायता समूहों और मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रमों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संकेतकों में भी सुधार दर्ज हुआ है। पति द्वारा शारीरिक अथवा यौन हिंसा का सामना करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 34.4 से घटकर 28.5 प्रतिशत रह गया है। यह बदलाव महिलाओं में बढ़ती जागरूकता, शिक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और सरकारी सहायता तंत्र की मजबूती का परिणाम माना जा रहा है। प्रदेश के विकास की यह तस्वीर आने वाले वर्षों में और बेहतर होने की उम्मीद जगाती है।

41,424 पदों पर एनरोलमेंट की प्रक्रिया जारी, सितम्बर में जारी होगा अंतिम परिणाम

होमगार्ड संगठन को आधुनिक, प्रशिक्षित और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर, मुख्यमंत्री ने दिए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश होमगार्ड केवल पुलिस बल के सहायक के रूप में ही नहीं, बल्कि आपदा राहत, भीड़ प्रबंधन, चुनावी व्यवस्थाओं, सामुदायिक सेवा तथा जनजागरूकता अभियानों में भी महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री होमगार्ड के जवानों को अनिवार्य रूप से दी जाए सीपीआर व फर्स्ट एड की ट्रेनिंग, गोल्डन ऑवर के महत्व से भी कराया जाए अवगतः मुख्यमंत्री  41,424 पदों पर एनरोलमेंट की प्रक्रिया जारी, सितम्बर में जारी होगा अंतिम परिणाम सेवाकाल में मृत्यु पर आश्रितों को ₹5 लाख की अनुग्रह सहायता, दिसंबर 2020 से अब तक 3,153 मामलों में ₹157.65 करोड़ वितरित ₹104.80 करोड़ की 20 निर्माण परियोजनाएं प्रगति पर, प्रशिक्षण और आधारभूत संरचना को मिलेगा नया आयाम कल्याण, प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण पर विशेष फोकस, होमगार्ड संगठन के लिए तैयार की गई व्यापक भविष्य की कार्ययोजना लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  होमगार्ड विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि होमगार्ड संगठन उत्तर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन तथा जनसेवा का महत्वपूर्ण स्तंभ है। बदलते समय और नई चुनौतियों के अनुरूप इस संगठन को अधिक सक्षम, प्रशिक्षित, तकनीक-सक्षम और आधुनिक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण क्षमता विस्तार, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण और मानव संसाधन विकास से जुड़े सभी कार्यों को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए, ताकि होमगार्ड स्वयंसेवक प्रत्येक परिस्थिति में प्रभावी भूमिका निभा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि होमगार्ड केवल पुलिस बल के सहायक के रूप में ही नहीं, बल्कि आपदा राहत, भीड़ प्रबंधन, चुनावी व्यवस्थाओं, सामुदायिक सेवा तथा जनजागरूकता अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और तकनीकी सशक्तिकरण के माध्यम से होमगार्ड संगठन की कार्यक्षमता को और बढ़ाया जा सकता है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पुलिस व होमगार्ड का जवान समाज का फर्स्ट रिस्पांडर होता है। किसी भी घटना में पीड़ित के पास सबसे पहले यही पहुंचते हैं, इसलिए इन्हें सीपीआर व फर्स्ट एड की अनिवार्य रूप से ट्रेनिंग दी जाए और गोल्डन ऑवर के महत्व के बारे में भी बताया जाए। इनकी सजगता जीवन बचाने में काफी महत्वपूर्ण होती है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 1963 में स्थापित उत्तर प्रदेश होमगार्ड संगठन में 1,18,348 पद स्वीकृत हैं। स्थापना के समय जहां मात्र 2,000 होमगार्ड व्यवस्थापित थे, वहीं आज 67,971 होमगार्ड उपलब्ध हैं। विभाग पुलिस बल के सहयोग, सार्वजनिक व्यवस्था एवं आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने, आपातकालीन सेवाओं तथा लोककल्याण से जुड़े विविध दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। बताया गया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में 3,812 होमगार्डों को ‘आपदा मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त 1,091 स्वयंसेवकों को अग्नि बचाव तथा 425 को बाढ़ बचाव कार्यों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने एनरोलमेंट प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्धता के साथ संपन्न की जाए। बैठक में बताया गया कि 3 नवंबर 2025 को जारी उत्तर प्रदेश राज्य होमगार्ड्स एनरोलमेंट मार्गदर्शिका के अंतर्गत 41,424 रिक्त पदों पर एनरोलमेंट प्रक्रिया के तहत अप्रैल 2026 में लिखित परीक्षा पारदर्शी ढंग से संपन्न कराई गई। अंतिम परिणाम सितंबर 2026 में घोषित किए जाने की तैयारी है। चयनित अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के प्रशिक्षण संस्थानों में 90 दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण प्रदान जाना प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सक्षम, अनुशासित और पेशेवर होमगार्ड बल के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।  मुख्यमंत्री ने विभागीय कार्यप्रणाली में तकनीक के व्यापक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि पारदर्शिता और दक्षता के लिए डिजिटल प्रणालियों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि प्रशिक्षण भत्ता ₹260 प्रतिदिन से बढ़ाकर ड्यूटी भत्ते के समकक्ष कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक होमगार्ड को प्रत्येक तीन वर्ष में ₹3,000 वर्दी भत्ता प्रदान किए जाने की व्यवस्था लागू की गई है। आधारभूत संरचना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि लगभग ₹104.80 करोड़ की लागत से स्वीकृत 20 निर्माण परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है।  होमगार्ड कल्याण से संबंधित उपायों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयंसेवकों और उनके परिवारों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि सेवाकाल में मृत्यु की स्थिति में नामित आश्रित को ₹5 लाख की अनुग्रह सहायता प्रदान की जा रही है। दिसंबर 2020 से अब तक 3,153 मामलों में ₹157.65 करोड़ की अनुग्रह राशि वितरित की जा चुकी है। अप्रैल 2022 से अब तक 125 दिवंगत होमगार्ड स्वयंसेवकों के आश्रितों को विभिन्न बैंकिंग बीमा योजनाओं के माध्यम से ₹30 लाख से ₹45 लाख तक की बीमा सहायता प्राप्त हुई है। अंतरजनपदीय संचरण की स्थिति में देय दैनिक भोजन भत्ता ₹30 से बढ़ाकर ₹120 प्रतिदिन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि होमगार्ड संगठन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाया जाए। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान को राज्य स्तरीय अत्याधुनिक संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, आधुनिक परेड ग्राउंड, ड्रिल क्षेत्र, फिजिकल ट्रेनिंग एवं ऑब्स्टेकल कोर्स, आधुनिक छात्रावास, भोजनालय, डिजिटल पुस्तकालय, डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म तथा सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश होमगार्ड संगठन को आधुनिक, सक्षम, अनुशासित और जनसेवा के लिए सदैव तत्पर बल के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी प्रस्तावित योजनाओं एवं सुधारात्मक पहलों को निर्धारित समयसीमा में लागू करने के निर्देश दिए।

लोक भवन में सोमवार, 1 जून को होगा मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह-2026 का आयोजन

मुख्यमंत्री करेंगे 223 मेधावियों का सम्मान, प्रदेशभर में 1682 विद्यार्थियों को मिलेगा पुरस्कार लोक भवन में सोमवार, 1 जून को होगा मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह-2026 का आयोजन  मेधावियों को एक लाख रुपये, टैबलेट और प्रशस्ति पत्र मिलेगा, 11 विद्यालयों के प्रधानाचार्य भी होंगे सम्मानित राज्य स्तरीय समारोह के समानांतर प्रदेश के सभी जनपदों में भी आयोजित होगा मेधावी विद्यार्थी सम्मान कार्यक्रम जिला स्तर पर कुल 1459 विद्यार्थियों को सम्मान मिलेगा, जिनमें 687 हाईस्कूल और 772 इंटरमीडिएट के विद्यार्थी होंगे शामिल जिला स्तरीय मेधावियों को 21 हजार रुपये की धनराशि, प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया जाएगा लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिभा को प्रोत्साहन देने और विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सोमवार, 1 जून को मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह-2026 का आयोजन किया जाएगा। राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन सभागार में आयोजित होने वाले इस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के विभिन्न शिक्षा बोर्डों के 223 राज्य स्तरीय मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करेंगे। वर्ष 2018 से शुरू हुई इस पहल के माध्यम से प्रदेश सरकार लगातार मेधावी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन कर रही है। समारोह में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड के वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तर पर चयनित विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की धनराशि, टैबलेट, प्रशस्ति पत्र, मेडल और साफा प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों तथा संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तरीय सम्मान के लिए कुल 223 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के 138 विद्यार्थी, माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के 21 विद्यार्थी, सीआईएससीई बोर्ड के 33 विद्यार्थी तथा सीबीएसई बोर्ड के 31 विद्यार्थी शामिल हैं। इन 223 विद्यार्थियों में 85 छात्र और 138 छात्राएं हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन को भी दर्शाता है। कार्यक्रम की एक विशेषता यह भी होगी कि राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के एक अभिभावक को शॉल भेंट कर सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त विभिन्न बोर्डों में सर्वोच्च अथवा प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के 11 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी प्रशस्ति पत्र और शॉल प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे परिवार और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए उनके योगदान को भी सार्वजनिक रूप से सम्मान दिया जा रहा है। राज्य स्तरीय समारोह के समानांतर प्रदेश के सभी जनपदों में भी मेधावी विद्यार्थी सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिला स्तर पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। जिला स्तर पर कुल 1459 विद्यार्थियों को सम्मान मिलेगा, जिनमें 687 हाईस्कूल और 772 इंटरमीडिएट के विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें 617 छात्र और 842 छात्राएं हैं। जिला स्तरीय मेधावियों को 21 हजार रुपये की धनराशि, प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार वर्ष 2026 के मेधावी विद्यार्थी सम्मान कार्यक्रम के तहत प्रदेशभर में कुल 1682 विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।

सीएम योगी के निर्देश पर आगामी 5 से 21 जून तक प्रदेशव्यापी जनजागरूकता अभियान की तैयारी

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा प्रचार-प्रसार, चलेगा विशेष अभियान सीएम योगी के निर्देश पर आगामी 5 से 21 जून तक प्रदेशव्यापी जनजागरूकता अभियान की तैयारी जनहितकारी कार्यक्रमों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे: जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जनपद स्तर पर भी आयोजित होंगी किसान गोष्ठियां, जनसंवाद कार्यक्रम और प्रदर्शनी लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों का जनता के बीच प्रचार-प्रसार करेगी। इस अभियान से किसानों से लेकर हर वर्ग को सीधा लाभ मिल पाएगा। यह प्रचार अभियान 5 जून से शुरू होगा। इस संबंध में सिंचाई विभाग मुख्यालय में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, उपलब्धियों एवं जनहितकारी कार्यक्रमों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश में कृषि विकास, जल सुरक्षा, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि आगामी 5 जून से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के साथ विभागीय जनजागरूकता कार्यक्रमों का शुभारंभ किया जाए। इसके अंतर्गत 5 से 21 जून 2026 तक प्रदेशभर में पदयात्रा, प्रदर्शनी, किसान संवाद, जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सिंचाई परियोजनाओं, राजकीय नलकूपों, नहर प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, जल संरक्षण अभियानों, भूजल संवर्धन, आधुनिक सिंचाई तकनीकों तथा विभाग द्वारा किए गए विकास कार्यों की जानकारी आमजन एवं किसानों तक पहुंचाई जाएगी। किसानों को मिले वास्तविक लाभ बैठक में उपस्थित राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभाग की विशाल परियोजनाओं, आधारभूत संरचनाओं एवं विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से जनता के बीच प्रस्तुत किया जाए, जिससे आमजन विभाग की भूमिका एवं उपलब्धियों से अवगत हो सकें। वहीं राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने कहा कि लिफ्ट नहर योजनाओं के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सिंचाई सुविधाओं तथा नहरों के टेल तक पानी पहुंचाने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियों को विशेष रूप से जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि किसानों को विभाग की योजनाओं का वास्तविक लाभ प्राप्त हो सके। बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद स्तर पर किसान गोष्ठियों, जनसंवाद कार्यक्रमों, प्रदर्शनी एवं अन्य जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से विभाग की योजनाओं के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न की जाए।

प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने, फसलों और जनहानि का आकलन करने के आदेश

आंधी-बारिश को लेकर मुख्यमंत्री सख्त, अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने, फसलों और जनहानि का आकलन करने के आदेश सीएम योगी ने बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा  लखनऊ  प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी आंधी, बारिश और तेज हवाओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को कई जिलों में आंधी, बारिश और तूफान की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, राहत आयुक्त कार्यालय तथा संबंधित विभागों को लगातार निगरानी बनाए रखने और किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जिन जनपदों में तेज आंधी, बारिश, ओलावृष्टि अथवा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि अथवा पशुहानि हुई है, वहां प्रभावित परिवारों को तत्काल अनुमन्य राहत राशि वितरित की जाए। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुंचनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए। जहां भी कृषि क्षति की सूचना मिले, वहां राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर आकलन करे तथा शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराए, ताकि किसानों को नियमानुसार सहायता प्रदान की जा सके। मुख्यमंत्री ने विद्युत विभाग को भी आंधी और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर स्थिति का जायजा लें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य संचालित करें।  जनता से सावधानी बरतने की अपील  मुख्यमंत्री ने जनता से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतें, अनावश्यक रूप से खुले स्थानों में न जाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

योगी सरकार के प्रयास रंग लाए, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट

योगी सरकार के प्रयासों का असर, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई कमी एसआरएस की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मौत के आंकड़ों के सुधार कंगारू मदर केयर, सीपैप मशीन, मिल्क बैंक व नियमित टीकाकरण बने बड़े सहायक आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण करने का भी मिला फायदा लखनऊ  योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में नवजात से पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। आंकड़ों में आया यह सुधार हजारों बच्चों के सुरक्षित जीवन, लाखों परिवारों की उम्मीदों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते विश्वास की कहानी दर्शाता है। साथ ही जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने की चुनौती भी पेश करता है।  नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 26 से 25, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 37 से 35 और पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्युदर 42 से 41 रह गई है। यह सर्वे प्रति 1000 बच्चों के हिसाब से किया गया है।      बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी पर उत्तर प्रदेश का उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होना, जहाँ बच्चों की मृत्यु दर में सभी आयु वर्गों में कमी आई है, सबके सामूहिक समर्पण, अथक परिश्रम और जमीनी स्तर पर निरंतर किए गए प्रयासों का प्रमाण है। यह रुझान उत्साहजनक हैं तो हमें यह भी याद दिलाते हैं कि नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी की रफ़्तार अभी भी उम्मीद से धीमी है और जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में खास बदलाव नहीं आया है। इससे साफ़ पता चलता है कि बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी और जीवन के पहले 48 घंटों के दौरान दी जाने वाली देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर बहुत ज़्यादा निर्भर करेगा। स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ शालिनी त्रिपाठी के अनुसार प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई है। बीते तीन-चार सालों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को लगातार प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर लगाई जाने वाली सीपैप मशीन, कंगारू मदर केयर, मिल्क बैंक, निःशुल्क दवाओं व नियमित टीकाकरण भी शिशुओं की मृत्यु दर कम करने में सहायक साबित हुए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में शुरू हुए मदर न्यूबार्न केयर यूनिट (एमएनसीयू), जिसमें प्रसव के बाद मां-बच्चे को एक साथ वार्ड में ठहराया जाता है, से भी बड़ा लाभ हो रहा है।  रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने से जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मिली मजबूती वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स डेजी रानी ने बताया कि नर्सों को नवजात शिशु की देखभाल पर नियमित रूप से साप्ताहिक वर्चुअल लर्निंग सेशन और समय-समय पर आमने-सामने रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जा रही है। इन ट्रेनिंग से उन्हें नवजात शिशु के खतरे के लक्षणों को पहचानने, समय पर रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने और जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मजबूत करने में काफी मदद मिली है। वीरांगना अवंती बाई अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सलमान ने बताया कि बहुत से बच्चों की मौत संक्रमण व अस्वच्छता के कारण भी हो जाती थी। अब अस्पतालों में स्वच्छता व बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाता है कि शिशु के पास आने से पहले डाक्टर, नर्स के हाथ साफ हों, प्रसूता का डिलिवरी क्षेत्र साफ हो, बच्चे को लपेटने वाला कपड़ा साफ हो, बच्चे की नाल काटने वाला उपकरण व नाल में बांधी जाने वाली क्लिप स्वच्छ हो। अस्पतालों में स्वच्छता व संक्रमण कम होना भी शिशु मृत्यु दर कम होने की एक वजह है।

मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात

माफिया अब खुली जीप में पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकताः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात  धार्मिक आयोजन में व्यवधान डालने वाले की रावण व कंस जैसी दुर्गति तयः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री ने कहा, माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सपा सरकार, देखकर छूटता था पसीना सीएम योगी ने जन प्रतिनिधियों की मांग पर घोसी चीनी मिल के विस्तारीकरण के लिए मांगा प्रस्ताव  मऊ/लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ की धरती से माफिया को फिर खुली चुनौती दी। उन्होंने दो टूक कहा कि अब किसी माफिया व गुंडे में दुस्साहस नहीं है कि त्योहारों में उपद्रव कर दे। यदि किसी ने रामलीला, यज्ञ-कथा, जन्माष्टमी, रामनवमी, शिवरात्रि, रक्षाबंधन आदि धार्मिक आयोजनों में व्यवधान डाला तो उसकी रावण व कंस जैसी दुर्गति तय है। किसी ने बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो उसका इंतजार यमराज ही करेंगे। अब कोई माफिया खुली जीप में चलकर पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ के गांधी मैदान में 392 करोड़ से अधिक लागत वाली 114 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने मऊ को क्रांतिधरा बताते हुए साहित्यकार श्याम नारायण पांडेय, समाज सुधारक स्वामी सहजानंद सरस्वती, मऊ को नई पहचान दिलाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने पूर्व राज्यपाल फागू चौहान का भी जिक्र किया और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया।   अच्छी सरकारी देती है विकास, गलत लोग चुनने पर लगती है सुरक्षा में सेंध  मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी सरकार विकास लेकर आती है। यह विकास बिना भेदभाव नागरिकों के जीवन स्तर को उठाने का माध्यम होता है। सड़क या पुल जाति पूछकर नहीं चलने देते, स्वास्थ्य केंद्र जाति पूछकर उपचार और बाढ़ सुरक्षा के कार्य जाति पूछकर बचाव नहीं करते। जब अच्छे लोग चुने जाते हैं तो अच्छी सरकार आती है। जब गलत लोग चुने जाते हैं तो सुरक्षा में सेंध लगती है, जन विकास में लगने वाले पैसे में डकैती और बेटी-व्यापारी की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा होता है।  धार्मिक आयोजनों में व्यवधान पैदा किया जाता था मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश का यही हाल था। जिन लोगों की आयु 30-35 वर्ष से ऊपर है, वे भूले नहीं होंगे कि 21 वर्ष पहले 2005 में भरत-मिलाप कार्यक्रम पर दंगा कर मऊ को जलाने का प्रयास हुआ था। सत्ता के संरक्षण में माफिया रामलीला आयोजन में व्यवधान पैदा कर निर्दोष हिंदुओं का कत्लेआम कर रहे थे। माफिया को देखकर सपा का पसीना छूटता था, इनके मुंह से आवाज नहीं निकलती थी। माफिया के सामने नतमस्तक व नाक रगड़ने वाली सरकार मौन थी और यहां की सुरक्षा खतरे में थी। अराजकता का तांडव था। जनता यदि चंदा जुटाकर रामलीला, रामनवमी, यज्ञ, जन्माष्टमी, शिवरात्रि का आयोजन करती थी तो उसमें व्यवधान पैदा किया जाता था। शोहदे बेटियों का अपहरण करते थे, व्यापारी सूर्यास्त से पहले प्रतिष्ठान बंद करने को मजबूर थे। गरीब, युवा, नारी व किसान का उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लगता है  सीएम योगी ने कहा कि 2014 में जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में देश की बागडोर सौंपी तो सभी ने 12 वर्ष में बदलते भारत को देखा। मोदी जी कहते हैं कि हमारे लिए केवल चार जातियां (गरीब, युवा, नारी व किसान) हैं। इनका उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लग जाएगा और भारत दुनिया की बड़ी ताकत बन जाएगा। उन्होंने दिल्ली में योजनाएं बनाईं, भाजपा शासित राज्यों ने इसे लागू भी किया, लेकिन 2014 से 2017 तक सपा सरकार ने यूपी में उन योजनाओं को लागू नहीं होने दिया। सपा ने गरीबों के लिए शौचालय, आवास, राशन, सड़क नहीं बनने दी।  चार बार सरकार के बावजूद सपा शासन में गरीबों को नहीं मिलीं सुविधाएं  सीएम ने कहा कि आज प्रदेश में 65 लाख गरीबों को आवास, पौने तीन करोड़ गरीबों के घरों में शौचालय, 16 करोड़ गरीबों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। उपदेश देने वाले सपाइयों से पूछिए कि चार बार शासन करने के बाद भी उन्होंने और लगभग 50 वर्ष तक शासन करने वाली कांग्रेस ने यह कार्य क्यों नहीं किया। कांग्रेस-सपा सरकार में उनके गुंडे गरीब का राशन खा जाते थे और गरीब टकटकी लगाकर देखता था। 24 घंटे के भीतर मिलती है 5 लाख की सहायता  सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई है। किसान परिवार या बटाईदार यदि आपदा की चपेट में आ जाता है तो मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत 24 घंटे के अंदर जनप्रतिनिधि पांच लाख रुपये की सहायता राशि उसके घर जाकर देते हैं।  बिना रुके, झुके, थके चल रहे विकास अभियान सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में विकास अभियान बिना रुके, बिना झुके, बिना डिगे, बिना थके चल रहे हैं। हर गरीब के लिए आवास, पानी, सड़क, पुल, बाढ़ से बचाव आदि के प्रयास हो रहे हैं। सड़कें, पर्यटन केंद्र संवर रहे हैं, पुल-पुलिया बन रही हैं। बिजली परियोजनाएं तैयार हो रही हैं। सुरक्षा का माहौल है, नौजवान के लिए नौकरी-रोजगार, बेटी के स्वावलंबन, अन्नदाता किसान के सम्मान के लिए योजनाएं चल रही हैं। विकास का पैसा विकास में और गरीब का पैसा गरीब के पास जा रहा है। सीएम ने नागरिकों से कहा कि वर्तमान को सजाने व संवारने का दायित्व आपके ऊपर है। आपने डबल इंजन सरकार को जिताने में योगदान दिया तो पीएम मोदी के नेतृत्व, मार्गदर्शन में सरकार सफल हुई और इसका श्रेय आपको जाता है।  सीएम ने बताई एक-एक वोट की ताकत सीएम योगी ने एक-एक वोट की ताकत बताई और कहा कि जब किसी देवस्थल का पुनरुद्धार व अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इसका पुण्य भी आपके खाते में जाता है। आपका एक वोट 500 वर्ष की गुलामी के कलंक को धोकर राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण करता है तो बेटी-व्यापारी की सुरक्षा, माफिया को मिट्टी में मिलाकर कर्फ्यू, उपद्रव मुक्त प्रदेश बनाने में योगदान देता है। विकास की यात्रा अनवरत आगे बढ़नी … Read more

सीएम योगी बोले- मातृभूमि के प्रति समर्पण ही असली राष्ट्रभक्ति

जन्मभूमि के ऋण से मुक्त होना ही सच्ची देशभक्ति: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मऊ जिले के गांव ताजोपुर में ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल का किया उद्घाटन सीएम बोले: गांव आत्मनिर्भर बनेंगे तभी विकसित भारत का सपना होगा साकार ताजोपुर मॉडल को मुख्यमंत्री ने बताया राष्ट्र निर्माण, ग्रामीण स्वावलंबन और “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की जीवंत मिसाल एक समय पहचान के संकट से जूझने वाला मऊ आज इन संस्थानों की वजह से नई पहचान प्राप्त कर रहा है: मुख्यमंत्री मऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ जिले के गांव ताजोपुर स्थित ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जन्मभूमि के ऋण से मुक्त होना ही सच्ची देशभक्ति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह ने भारतीय सेना में 35 वर्षों तक सेवा देने और देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य करने के बाद अपनी जन्मभूमि लौटकर जो कार्य किया है, वह केवल संस्थान निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना और विभिन्न संस्थानों में वर्षों सेवा देने के बाद ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह का अपने गांव लौटकर वहां अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज, आईटीआई और सैनिक पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों की स्थापना करना पूरे देश के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि यह वही भाव है, जिसे हमारे शास्त्रों में “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” कहा गया है। जन्मभूमि और मातृभूमि से बड़ा कुछ नहीं हो सकता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका विजय के बाद जब लक्ष्मण ने स्वर्णमयी लंका की समृद्धि की चर्चा की थी, तब भगवान श्रीराम ने कहा था, “अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यही भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन है। चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसकी जन्मभूमि और मातृभूमि से बड़ा कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह ने इसी आदर्श को अपने जीवन में उतारा है। भारतीय सेना के आर्मी मेडिकल कोर में वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने अपनी जन्मभूमि ताजोपुर लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव लौटकर उन्होंने जिस प्रकार स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के केंद्र खड़े किए हैं, वह ग्रामीण भारत के लिए विकास का आदर्श मॉडल है। अस्पताल ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा केंद्र मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका ब्रिगेडियर पी.एन. सिंह से संबंध लगभग 15-16 वर्ष पुराना है। तभी से वे उनके समाजसेवा और राष्ट्रसेवा से जुड़े कार्यों के बारे में सुनते रहे हैं और आज उन्होंने अपनी आंखों से इसे देखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ताजोपुर में स्थापित ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल केवल एक अस्पताल नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा केंद्र है। इसी प्रकार सैनिक नर्सिंग कॉलेज के माध्यम से एएनएम, जीएनएम, पोस्ट बेसिक बीएससी और बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कराई जा रही है। फार्मेसी कॉलेज के माध्यम से डी.फार्मा और बी.फार्मा की शिक्षा दी जा रही है, जबकि आईटीआई के जरिए युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। सैनिक पब्लिक स्कूल क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये संस्थान केवल भवन नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ हैं। यहां रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार मिल रहा है और बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका इन संस्थानों से जुड़ रही है। उन्होंने कहा कि एक समय पहचान के संकट से जूझने वाला मऊ आज इन संस्थानों की वजह से नई पहचान प्राप्त कर रहा है। सभी को लेने होंगे "पंच प्रण" मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान दिए गए “पंच प्रण” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया था कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करे, तब वह विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो। इसके लिए हर भारतीय को पांच प्रण लेने होंगे। पहला प्रण हमारी विरासत पर गर्व करने का है। हम राम, कृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई जैसे महानायकों के वंशज हैं। हमें उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। दूसरा प्रण गुलामी की मानसिकता को पूरी तरह समाप्त करने का है। हमें हर उस सोच और प्रवृत्ति को त्यागना होगा, जिसमें विदेशी मानसिकता या गुलामी की गंध हो। तीसरा प्रण “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” है। जातिवाद, क्षेत्रवाद और छुआछूत जैसी बुराइयों ने देश को कमजोर किया। समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ खड़े होना हर भारतीय का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने चौथे प्रण के रूप में सैनिकों और सुरक्षा बलों के सम्मान की बात कही। उन्होंने कहा कि जब देश का सैनिक सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर माइनस तापमान में खड़ा रहता है, जब राजस्थान के रेगिस्तान में 50 डिग्री तापमान में सीमा की रक्षा करता है और जब पुलिसकर्मी दिन-रात अपराधियों से लड़ते हैं, तभी हम चैन से सो पाते हैं। इसलिए हर भारतीय के मन में सैनिकों और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पांचवां प्रण नागरिक कर्तव्यों का पालन करना है। हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। विकसित भारत का सपना गांवों के विकास से ही साकार होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना गांवों के विकास से ही साकार होगा। प्रदेश विकसित तभी होंगे, जब जनपद विकसित होंगे और जनपद तभी विकसित होंगे, जब ताजोपुर जैसे गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल, सैनिक पब्लिक स्कूल, नर्सिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज और आईटीआई जैसे संस्थान आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह पिछले डेढ़ दशक से “चरैवेति-चरैवेति” के मंत्र के साथ लगातार राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में जुटे हुए हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची देशभक्ति अपनी जन्मभूमि और समाज के लिए काम करने से सिद्ध होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे सभी प्रयासों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रकार के उत्कृष्ट … Read more

निपुण भारत मिशन को रफ्तार देगी योगी सरकार, जिला समन्वयकों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

निपुण भारत मिशन को मिलेगी नई गति, योगी सरकार जिला समन्वयकों को देगी विशेष ट्रेनिंग – 1 और 2 जून को लखनऊ में होगा राज्य स्तरीय प्रशिक्षण, प्रदेश के सभी जिलों से पहुंचेंगे जिला समन्वयक – निपुण भारत मिशन और गुणवत्ता शिक्षा संवर्धन गतिविधियों की जमीनी मॉनिटरिंग को मिलेगा नया आधार – प्रशिक्षण के जरिए स्कूल शिक्षा में सीखने के परिणामों और अकादमिक गुणवत्ता सुधार पर रहेगा फोकस – राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), लखनऊ में होगा प्रशिक्षण लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार अब निपुण भारत मिशन और गुणवत्ता शिक्षा अभियान को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में राज्य स्तर पर कार्यरत जिला समन्वयक (निपुण भारत मिशन) एवं जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) के लिए 1 और 2 जून को राज्य स्तरीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को संबंधित जिला समन्वयकों की प्रशिक्षण में अनिवार्य सहभागिता सुनिश्चित कराए जाने संबंधी निर्देश दिए गए हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), लखनऊ में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से जिला समन्वयक प्रतिभाग करेंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य निपुण भारत मिशन और गुणवत्ता शिक्षा संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। निपुण भारत मिशन एक शैक्षिक कार्यक्रम के साथ-साथ बच्चों की सीखने की बुनियादी  क्षमता को सुदृढ़ करने का व्यापक अभियान है। योगी सरकार ने पिछले एक दशक में परिषदीय शिक्षा के ढांचे, तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था और शिक्षण पद्धतियों में व्यापक सुधार किए हैं। ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग, ई-कंटेंट और निपुण भारत मिशन जैसे अभियानों के माध्यम से परिषदीय शिक्षा व्यवस्था में बड़े परिवर्तन लाए गए हैं। अब जिला समन्वयकों के विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से इन सुधारों को विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक परिणाममुखी बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दो बैचों में होगा प्रशिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो बैचों में आयोजित किया जाएगा। पहले बैच का प्रशिक्षण 1 जून को होगा, जिसमें आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बरेली, बस्ती, देवीपाटन, गोरखपुर और चित्रकूट मंडल के जिलों के प्रतिभागी शामिल होंगे। वहीं दूसरे बैच का आयोजन 2 जून को किया जाएगा, जिसमें झांसी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर और वाराणसी मंडल के जिला समन्वयक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। अकादमिक अनुश्रवण और सीखने के परिणामों पर रहेगा विशेष फोकस प्रदेश सरकार का मानना है कि जब जिला स्तर पर अकादमिक मॉनिटरिंग और प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी, तभी विद्यालयों में सीखने के परिणामों में वास्तविक सुधार दिखाई देगा। इसी सोच के तहत प्रशिक्षण के माध्यम से जिला समन्वयकों को अकादमिक एवं प्रशासनिक अनुश्रवण, डेटा आधारित योजना एवं निर्णय निर्माण, प्रभावी समीक्षा प्रक्रियाओं, शिक्षक सहयोग तंत्र तथा सीखने के परिणामों (एसएलओज) में सुधार हेतु आवश्यक प्रक्रियाओं और प्रणालियों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही जिला समन्वयकों को निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गुणवत्ता मूल्यांकन, शिक्षकों के क्षमता संवर्धन, गतिविधि आधारित शिक्षण तथा विद्यालयों में गुणवत्ता शिक्षा संवर्धन से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा और जिला स्तर पर बेहतर योजना, प्रभावी अनुश्रवण और शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण सीखने को बढ़ावा दिया जायेगा।