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‘जनता दर्शन’ में आए आमजनों से मिले सीएम योगी, हर आगंतुक की सुनीं समस्या

जनता दर्शन जनसेवा, सुरक्षा व सुशासन सरकार का संकल्पः मुख्यमंत्री  ‘जनता दर्शन’ में आए आमजनों से मिले सीएम योगी, हर आगंतुक की सुनीं समस्या  अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर समस्या निस्तारण का दिया निर्देश  मुख्यमंत्री से मिलने बिहार से पहुंचीं एक महिला, सीएम योगी ने किया अभिवादन भीषण गर्मी में अकारण घर से न निकलें, परिवार का रखें विशेष ध्यान: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यस्ततम दिनचर्या के बीच भी सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों से मिले और हर किसी की समस्या सुनी। मुख्यमंत्री ने सभी से कहा कि जनसेवा, सुरक्षा व सुशासन सरकार का संकल्प है। आपकी हर उचित समस्या का समाधान होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर समस्याओं के निस्तारण का भी निर्देश दिया। 'जनता दर्शन' में बिहार से भी एक महिला मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचीं, मुख्यमंत्री ने उनका अभिवादन कर कुशलक्षेम पूछा।  डीएम-एसपी स्वयं कराएं समस्या का समाधान  मुख्यमंत्री ने सभी के प्रार्थना पत्र लेने के उपरांत सम्बंधित जनपदों के अधिकारियों को प्रकरण की जांच कराकर पीड़ितों को न्याय दिलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक स्वयं मामलों पर नजर रखें और पीड़ितों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।  हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान सरकार की प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देशित किया कि पूरी तत्परता व संवेदनशीलता से सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सभी को न्याय मिले। हर पात्र को योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो, जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। महाराज जी प्रणाम! कवनो दिक्कत नाही बा, बस आपके दर्शन करेके रहल  ‘जनता दर्शन’ में सीएम योगी की प्रशंसक एक महिला बिहार से आई थीं। मुख्यमंत्री सभी की समस्या सुनते हुए उनके पास भी पहुंचे। पूछा कि कहां से आई हैं, आपको क्या परेशानी है। इस पर महिला ने कहा- महाराज जी, प्रणाम। हम बिहार से आइल बानी। हमके कवनो दिक्कत नाही बा। बस आपके दर्शन करेके रहल, त आ गइलीं। इस पर सीएम योगी ने उनका अभिवादन किया, फिर कहा कि गर्मी बहुत पड़ रही है। इस भीषण गर्मी में अकारण घर से न निकलें और परिवार के सभी लोगों का भी विशेष ध्यान रखें।

भीषण गर्मी पर CM योगी सख्त, अधिकारियों को राहत-बचाव के लिए अलर्ट रहने के निर्देश

भीषण गर्मी पर सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश- राहत-बचाव को लेकर रहें सतर्क अस्पतालों, पेयजल और बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष नजर, लू से बचाव के लिए जनता से सतर्क रहने की अपील 19 से 21 मई तक ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत: मौसम विभाग लखनऊ उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड में रहने को कहा है।  अस्पतालों में हीट स्ट्रोक वार्ड तैयार रखने के निर्देश सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संवेदनशील जिलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। वहीं सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। अस्पतालों में दवाओं, बेड और डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने के साथ एंबुलेंस सेवाओं को भी सक्रिय रखने को कहा गया है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था और बिजली आपूर्ति बाधित न होने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। दोपहर में घर से बाहर निकलने से बचें: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि अत्यधिक गर्मी और लू के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। सीएम ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से पर्याप्त पानी पीने, हल्के सूती कपड़े पहनने और धूप में निकलते समय सिर ढककर रखने की अपील की है। 19 से 21 मई तक सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत मौसम विभाग ने बताया कि 19, 20 और 21 मई को प्रदेश के कई जिलों में अति उष्ण लहर चल सकती है। तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए योगी सरकार ने सभी जिलों को राहत और बचाव की तैयारियां समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा कदम, सबसे बड़ी अड़चन दूर होने के संकेत

 लखनऊ, उत्तर प्रदेश में  गांव-गांव एक ही बात की चर्चा है कि पंचायत चुनाव कब होंगे? ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में हो रही देरी की सबसे बड़ी वजह यूपी में समर्पित ओबीसी आयोग का न होना है. हाईकोर्ट के सख्त तेवर अपनाए जाने के बाद यूपी की योगी सरकार इस दिशा में अपने कदम बढ़ा सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है?  यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ, लेकिन अब तस्वीर साफ होती दिख रही है. पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग के गठन पर कैबिनेट में मोहर लग सकती है. इसके साथ ही एक दर्जन से ज्यादा प्रस्ताव को मंजूरी देने का प्रस्ताव है।  यूपी में मौजूदा ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था, जिसे सरकार ने अक्टूबर 2026 तक के लिए बढ़ा तो दिया है, लेकिन कानूनी रूप से उसके पास समर्पित आयोग के अधिकार नहीं हैं. ओबीसी आयोग अपने तीन साल के मूल कार्यकाल के रहते हुए ही आरक्षण का सर्वे कर सकता है. इसीलिए योगी सरकार सोमवार को कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग गठन को अमलीजामा पहना सकती है।  ओबीसी आयोग गठन को मिलेगी मंजूरी?  वैश्विक संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मितव्ययता की अपील के बाद सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक होगी. इस लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूबे में पंचायत चुनाव पर छाए सियासी बादल कैबिनेट की बैठक में छंटती हुई दिख सकती हैय कैबिनेट बैठक में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे सकती है।  ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का स्वरूप तय होगा. सूबे में समर्पित ओबीसी आयोग नहीं होने के चलते पंचायत चुनाव के आरक्षण की प्रक्रिया लटकी हुई है. हाईकोर्ट ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा था कि ओबीसी आयोग में क्यों देरी हो रही है, जिसके बाद ही समर्पित ओबीसी आयोग गठन को कैबिनेट में मंजबूरी देने ही।  यूपी में नए ओबीसी आयोग के बाद ही ओबीसी की आबादी का सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का आकलन का सर्वे करेगी. ओबीसी आयोग के सर्वे के आधार पर यह तय होगा कि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण कितने प्रतिशत और किन सीटों पर लागू होगा.ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण पहले से ही निर्धारित है. इसके अलावा कौन सीट आरक्षित करनी है और कौन नहीं?  चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो को मंजूरी? योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है.मेट्रो परियोजना में पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी जा सकती है. इसके अलावा आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) में मेट्रो स्टेशन एवं वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट विचार कर सकती है।  कैबिनेट बैठक में क्या-क्या होंगे फैसले लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन में बदलाव करने के लिए संशोधन प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने विचार के लिए रखा जाएगा. ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन के साथ चल रही समुदाय परियोजना को पांच साल के लिए और बढ़ाया जाएगा. परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है. वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास परियोजनाओं को मंजूरी कैबिनेट दे सकती है।  आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोकतंत्र सेनानियों को कैबिनेट कैशलेस इलाज की सुविधा देने जा रही है. सोमवार को कैबिनेट बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा. इन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी. कैबिनेट में जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ी नई नियमावली को भी मंजूरी मिल सकती है।  हाथरस, बागपत और कासगंज में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट सहमति देगी. वहीं, कैबिनेट के सामने ऊर्जा विभाग केनरा बैंक से निकाली गई 1500 करोड़ रुपये की राशि की कार्येत्तर इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा. कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।  राज्य सरकार की प्रतिभूतियों के संबंध में वर्ष 2007 में जारी किए गए जनरल नोटिफिकेशन में संशोधन का प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगी. इसके अलावा भारतीय स्टांप अधिनियम में भी संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है. वहीं, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर लगने वाले अतिरिक्त कर को रेशनलाइज करने को भी कैबिनेट अपनी मुहर लगा सकती है। 

अंशकालिक अनुदेशकों के लिए खुशखबरी, सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री करेंगे मानदेय बढ़ोतरी का ऐलान

अंशकालिक अनुदेशकों का सम्मान समारोह आज , मुख्यमंत्री करेंगे बढ़े मानदेय वितरण का शुभारंभ लोकभवन से सीएम योगी करेंगे कार्यक्रम की अध्यक्षता, सभी जिलों में होगा लाइव प्रसारण प्रत्येक जनपद में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में वितरित होंगे चेक राज्यस्तरीय समारोह के साथ ही जिलाधिकारियों को भव्य आयोजन और प्रचार-प्रसार करने के निर्देश लखनऊ  प्रदेश सरकार अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान और उनके बढ़े हुए मानदेय वितरण को लेकर रविवार 17 मई को पूरे उत्तर प्रदेश में भव्य कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान एवं बढ़े हुए मानदेय वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम सायं 4 बजे से आयोजित होगा। सरकार द्वारा पूर्व में जारी शासनादेश के तहत अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि का निर्णय लिया गया था। बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी किया गया है। इसी के तहत अब प्रदेशभर में प्रतीकात्मक चेक वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाले कार्यक्रम के समानांतर सभी जिलों में भी भव्य आयोजन सुनिश्चित किए जाएं। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए। जिला स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में शिक्षकों, अंशकालिक अनुदेशकों और आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के समापन के बाद जिलों में जनप्रतिनिधियों द्वारा अंशकालिक अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय के प्रतीकात्मक चेक वितरित किए जाएंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनप्रतिनिधियों के संबोधन भी आयोजित होंगे।

जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही ‘खेत तालाब योजना

किसानों की समृद्धि का आधार बनी योगी सरकार की योजना, डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही  ‘खेत तालाब योजना योजना के तहत सरकार दे रही ₹52,500 का अनुदान, ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर किसानों का चयन    खेत तालाब से किसान कर रहे मत्स्य पालन, मोती, सिंघाड़ा उत्पादन एवं अन्य जलीय खेती ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिला बढ़ावा, किसानों को मिल रहे सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए महत्वकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें। साथ ही योगी सरकार किसान को खेती तक सीमित नहीं, बल्कि उनको आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और अतिरिक्त आय के स्रोतों से भी जोड़ रही है। इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित ‘खेत तालाब योजना’ का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी सुविधा उपलब्ध कराना है। आज के समय में भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, ऐसे में खेत तालाब योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। खेतों में बनाए जाने वाले तालाब वर्षा के पानी को संरक्षित करते हैं, जिससे सूखे के समय भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है। आधी लागत सरकार वहन कर रही  इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत ₹1,05,000 निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार द्वारा ₹52,500 का अनुदान दिया जाता है। यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के अवसर यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर ₹15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है। आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम- आर.पी. कुशवाहा कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है।  अनुदान दो चरणों में मिलेगाः 1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर। 2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद। 3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की 'फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। 4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी। 5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा।

गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद

गोमाता के जरिए खेती में ‘जीन क्रांति’ की तैयारी गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद योगी सरकार गो संरक्षण और खेती में करने जा रही बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग एंजाइम टेक्नोलॉजी से 10 गुना तेजी से तैयार होगी ऑर्गेनिक खाद, 5 गुना बढ़ेगा न्यूट्रिशन देश में पहली बार यूपी वाले करेंगे खेती में इस जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग लखनऊ गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और रोजगार से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक और बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। पहली बार देश में खेती किसानी में गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की खोज ने खेती में गो आधारित जीन क्रांति की नई जमीन तैयार कर दी है। इस तकनीक के जरिए तैयार होने वाली ऑर्गेनिक खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी। इतना ही नहीं, इसकी न्यूट्रिशन क्षमता लगभग 5 गुना अधिक होगी, जबकि इसे तैयार करने में लगने वाला समय भी 10 गुना तक कम हो जाएगा। योगी सरकार इसे खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल के रूप में देख रही है। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की बड़ी खोज यह तकनीक आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने विकसित की है। उन्होंने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन, माइक्रोबियल आइसोलेशन और बायोपॉलिमर डेवलपमेंट को गोबर एवं गो मूत्र आधारित प्राकृतिक संसाधनों के साथ जोड़कर हाई क्वालिटी ऑर्गेनिक और नेचुरल फर्टिलाइजर तैयार किया है। शोधकर्ताओं ने फसल-विशिष्ट माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट तैयार किया है, जिसके जरिए केवल 1 किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक विकसित किया जा सकता है। यह तकनीक खेती की लागत घटाने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाएगी। 15 गुना कम मात्रा ही रहेगी पर्याप्त, लागत भी घटेगी शुरुआत में 50 किलोग्राम वाले ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बैग तैयार करने की योजना है। खेतों में इसकी जरूरत लगभग 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है, जो पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में बेहद कम है। इससे किसानों की परिवहन, श्रम और उपयोग लागत में बड़ी कमी आएगी। तकनीक से तैयार इस उर्वरक की लागत भी कम आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उत्पाद को इंडियन काउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च द्वारा 40 से अधिक गुणवत्ता एवं पोषण मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित भी किया जा चुका है। गोबर और गो मूत्र से बनेगा साइंटिफिक फर्टिलाइजर यह उर्वरक मुख्य रूप से गोबर, गोमूत्र, कृषि अपशिष्ट और प्राकृतिक जैविक स्रोतों से तैयार किया जा रहा है। माइक्रोबियल प्रोसेसिंग और एंजाइम एक्सट्रैक्शन तकनीक की मदद से इसमें पोषक तत्वों की क्षमता कई गुना बढ़ाई गई है। अब गोबर आधारित बायोगैस उत्पादन के लिए भी विशेष माइक्रोबियल तकनीकों पर काम किया जा रहा है। बायोगैस निर्माण के बाद बचने वाली स्लरी और वेस्ट बायोमास से केवल 3 से 4 दिनों के भीतर हाई क्वालिटी कस्टमाइज्ड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तैयार किए जा रहे हैं। गोशालाएं बनेंगी वेस्ट टू वेल्थ मॉडल योगी सरकार इस तकनीक को आत्म निर्भर गोशाला के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इसके तहत गोशालाएं केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि जैविक खाद उत्पादन, बायोगैस निर्माण और अतिरिक्त आय का केंद्र बनेंगी। प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और स्थानीय किसानों के सहयोग से इस मॉडल को लागू किया जा रहा है। विभिन्न जिलों में गोबर संग्रहण एवं माइक्रोबियल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं, जहां गोबर, गोमूत्र और कृषि अपशिष्ट को वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक में बदला जाएगा। महिला रोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल इस परियोजना में महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादन और वितरण से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार होंगे। इससे गांवों में आत्मनिर्भरता आधारित आर्थिक मॉडल मजबूत होगा। यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने, कृषि अपशिष्ट प्रबंधन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। सीएम योगी की प्राथमिकता बना गो संरक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पहले से ही गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। अब आईआईटी कानपुर की इस वैज्ञानिक खोज के जरिए प्रदेश में गो आधारित खेती, जैविक उर्वरक और ग्रामीण रोजगार का एक नया मॉडल तैयार होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हुआ तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया सीएम योगी आदित्यनाथ ने

गोरखपुर में बनेगा विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: मुख्यमंत्री गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया सीएम योगी आदित्यनाथ ने इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के बगल में 60 एकड़ में बनेगा नया स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स हर तरह के इनडोर गेम्स की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में: सीएम योगी गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करने के साथ ही खेल व खिलाड़ियों के हित में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के बगल में आरक्षित कराई गई 60 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा।   केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में शनिवार को गोरखपुर के ताल नदोर में करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यहां 46 एकड़ में 30 हजार दर्शकों की क्षमता का इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम तो बनेगा ही, इसके बगल की 60 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बनाएंगे। इसमें हर तरह के इनडोर गेम्स की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी तथा हॉकी जैसे अन्य आउटडोर गेम्स भी हो सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनने से इस क्षेत्र में होटल, रेस्त्रां व मार्केट की नई श्रृंखला तैयार होगी और बड़ी संख्या में नए रोजगार भी सृजित होंगे। लोक कल्याण के लिए होना चाहिए सरकारी भूमि का उपयोग मुख्यमंत्री ने ताल नदोर क्षेत्र में हो रहे विकासपरक बदलाव की चर्चा करते हुए कहा कि कुछ साल पहले यह क्षेत्र बंजर पड़ा था। उपेक्षित था, जिसकी मर्जी होती वह कब्जा कर लेता था। अब यहां की जमीन कब्जामुक्त है। डबल इंजन सरकार इस भूमि पर नौजवानों के भविष्य को तराशने का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवा रही है। इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम युवाओं और भावी पीढ़ी के सपनों को साकार करेगा। सरकारी भूमि का उपयोग लोक कल्याण तथा विकास परियोजनाओं के लिए होगा। इसी विजन से ताल नदोर में पशु चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना भी की जा रही है। जाति-क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले नहीं हो सकते जनता के हितैषी सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश को माफियामुक्त, गुंडामुक्त, दंगामुक्त, कर्फ्यूमुक्त बनाया है। इससे प्रदेश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। विकास होता है तो रोजगार का सृजन स्वतः स्फूर्त भाव से होता है। जाति, भाषा, क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले लोग जनता के हितैषी नहीं हो सकते। जब ऐसे लोगों को सत्ता मिली तो वे गुंडागर्दी, अराजकता, अव्यवस्था फैलाते रहे। जनहित के बजाय परिवार के लिए सत्ता का दुरुपयोग करते रहे। लेकिन, डबल इंजन सरकार जन कल्याण व रोजगार सृजन के लिए कार्य कर रही है। 500 खिलाड़ियों की सीधी भर्ती जल्द मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यूपी में अब तक हमने लगभग साढ़े पांच सौ पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के जरिये सरकारी नौकरी दी है। साथ ही 500 खिलाड़ियों की नई भर्ती फिर से निकाली है। इससे बहुत जल्द ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ, वर्ल्ड चैंपियनशिप आदि में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। अब तक सीधी भर्ती में ललित उपाध्याय, दीप्ति शर्मा, पारुल चौधरी, अर्जुन देशवाल, प्रवीण कुमार, राजकुमार पाल को यूपी पुलिस में सीधे डिप्टी एसपी का पद दिया गया है। विजय कुमार यादव व दिव्या काकरान को नायब तहसीलदार, अर्जुन सिंह को यात्री एवं मालकर अधिकारी, प्राची व पुनीत कुमार को जिला युवा कल्याण अधिकारी, अजीत सिंह व सिमरन को जिला पंचायत राज अधिकारी, प्रीति पाल को खंड विकास अधिकारी, रिंकू सिंह को क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी के पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं।  पीएम मोदी के नेतृत्व में बनी नई खेल संस्कृति मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट और सांसद खेल स्पर्धा से नई खेल संस्कृति आगे बढ़ी है। इसका परिणाम है कि ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ और विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में भारत की प्रतिभागिता और मेडल की संख्या में वृद्धि हुई है। खिलाड़ियों को इंफ्रास्ट्रक्चर देना सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रही है। सुविधा मिलने से खिलाड़ी पीएम मोदी के विजन को साकार कर रहे हैं। सरकार हर गांव में खेल मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिला स्तर पर स्टेडियम और मंडल स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज की सुविधा विकसित कर रही है। मेरठ में खेल विश्वविद्यालय बन चुका है और इसी सत्र में उसका भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित होने जा रहा है। दूरी घटाकर विकास की रफ्तार बढ़ा रही सरकार सीएम ने कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम जिस गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर बन रहा है, उससे होकर वाराणसी जाने में पहले चार से पांच घंटे लगते थे लेकिन अब महज ढाई घंटे लगते हैं। इसी तरह गोरखपुर से लखनऊ जाने में लगने वाला समय आठ घंटे से कम होकर साढ़े तीन घंटे हो गया है। सरकार सिर्फ दूरी ही नहीं घटा रही, बल्कि विकास की रफ्तार बढ़ाकर रोजगार सृजन भी कर रही है। पश्चिम एशिया के संकट में बेहतरीन प्रबंधन का परिचय कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का स्वागत करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पूरा विश्व पश्चिम एशिया के संकट से जूझ रहा है। कई देशों में अव्यवस्था, अस्थिरता है। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं। इन स्थितियों में भारत में प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हरदीप सिंह पुरी जी ने बेहतरीन प्रबंधन का परिचय दिया है। तेल कम्पनियों पर भले ही बोझ आया, लेकिन उन्होंने संकट के बीच आम जनता को लगातार राहत दिलाई है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए सीएसआर फंड से 100 करोड़ रुपये देने के लिए पेट्रोलियम मंत्री, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रति आभार व्यक्त किया।  वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री ने किया भूमिपूजन इससे पहले मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन किया। अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद उन्होंने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सीएम ने स्टेडियम के ड्राइंग मैप व मॉडल का अवलोकन भी किया। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों … Read more

आधुनिक विज्ञान से जुड़ रहे परिषदीय बच्चे, Yogi Adityanath सरकार की नई पहल चर्चा में

परिषदीय बच्चों को आधुनिक विज्ञान शिक्षा से जोड़ रही योगी सरकार गांव के बच्चों तक पहुंच रही प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षा, आईआईटी गांधीनगर की साइंस किट से बदल रही परिषदीय स्कूलों की तस्वीर 38 जिलों के 9,356 विद्यालयों में पहुंचीं साइंस किट, अब परिषदीय स्कूलों में भी प्रयोग कर सीखेंगे बच्चे लखनऊ योगी सरकार अब परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रयोग और अनुभव आधारित विज्ञान शिक्षा से जोड़कर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में जुट गई है। प्रदेश के 38 जिलों में 9,356 साइंस किटों की आपूर्ति कर सरकार ने सुनिश्चित कर दिया है कि अब गांव और गरीब परिवारों के बच्चों को भी वही आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, जो अब तक बड़े निजी स्कूलों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी। प्रदेश के 38 जिलों में साइंस किटों की आपूर्ति की जा चुकी है। गोंडा में 370, शाहजहांपुर में 366, आगरा में 357, उन्नाव में 338, बुलंदशहर में 314 और अलीगढ़ में 301 साइंस किटें पहुंचाई गई हैं। वहीं लखीमपुर खीरी में 464 और सीतापुर में 469 साइंस किटों की आपूर्ति की गई है। योगी सरकार पहले ही मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, स्कूल कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे अभियानों के माध्यम से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। अब साइंस किटों की उपलब्धता से विज्ञान शिक्षा को भी व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की कोशिश तेज हुई है। अब शिक्षा को केवल भवन और नामांकन तक सीमित न रखकर गुणवत्ता, तकनीक और प्रयोग से जोड़ा जा रहा है। प्रयोग आधारित शिक्षण को लगातार बढ़ावा मिलने से भविष्य में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि और नवाचार क्षमता दोनों तेजी से बढ़ेंगी। योगी सरकार की यह पहल इसी बदलाव की मजबूत नींव के रूप में देखी जा रही है। सरकार की रणनीति साफ है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाला बच्चा भी संसाधनों और सीखने के अवसरों में किसी से पीछे न रहे। इस पूरी पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि साइंस किटों की आपूर्ति आईआईटी गांधीनगर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से सुनिश्चित की गई है। यानी अब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों के बच्चे भी प्रयोगशाला आधारित विज्ञान शिक्षा से जुड़ सकेंगे। योगी सरकार का यह कदम सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार क्षमता विकसित करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि विज्ञान शिक्षा को केवल किताबों और परिभाषाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब बच्चे स्वयं प्रयोग करते हैं, मॉडल देखते हैं और गतिविधियों के माध्यम से सीखते हैं, तभी विज्ञान उनके लिए रोचक, व्यावहारिक और आसानी से समझ में आने वाला विषय बनता है। इसी सोच के तहत परिषदीय विद्यालयों में साइंस किट उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि बच्चों को कक्षा में ही प्रयोग आधारित शिक्षण का अवसर मिल सके।

सीएम योगी के निर्देश पर प्रभारी मंत्री करेंगे प्रभावित परिवारों से मुलाकात

आपदा पीड़ितों के साथ खड़ी योगी सरकार, राहत कार्यों में तेजी सीएम योगी के निर्देश पर प्रभारी मंत्री करेंगे प्रभावित परिवारों से मुलाकात जिलाधिकारियों को तत्काल सहायता पहुंचाने के सख्त निर्देश लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी: मुख्यमंत्री लखनऊ उत्तर प्रदेश में आंधी, आकाशीय बिजली और अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार भी संवेदनशीलता दिखाई है। सीएम ने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने और हालात का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी मजबूती के साथ जनता के साथ खड़ी है और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। शासन स्तर से की जा रही मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारियों ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत राशि उपलब्ध करानी शुरू कर दी है। शासन स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि जरूरतमंदों तक सहायता समय पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सभी डीएम को निर्देशित किया है कि प्रभावित परिवारों को जो भी सहायता आवश्यक हो, उसे बिना देरी उपलब्ध कराया जाए। सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा है कि राहत और बचाव कार्यों में पूरी गंभीरता बरती जाए तथा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुचारु किया जाए ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सीएम योगी ने अधिकारियों को स्पष्ट कहा है कि जनता की सुरक्षा और सहायता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  इन जिलों में है नुकसान की सूचना प्रदेश के बाराबंकी, बहराइच, कानपुर देहात, बस्ती, संभल, हरदोई, उन्नाव समेत 19 जिलों में जनहानि, पशुहानि और फसल नुकसान की जानकारी सामने आई है। खराब मौसम के कारण कई मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।

संसदीय समितियों का दौरा टला, विधान परिषद ने स्थगित किया भ्रमण कार्यक्रम

विधान परिषद की संसदीय समितियों के भ्रमण कार्यक्रम स्थगित जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकों में करेंगे प्रतिभाग  लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सरकारों ने ईंधन बचाने, काफिला कम करने आदि की पहल को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों को फ्लीट को 50 प्रतिशत कम करने का फैसला किया है। अब इसी क्रम में विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने परिषद की संसदीय समितियों के पूर्व निर्धारित भ्रमण के समस्त कार्यक्रमों को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया है।  यह जानकारी विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि संसदीय समितियों की बैठकों में जिला स्तरीय अधिकारी अग्रिम आदेशों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग करेंगे।