samacharsecretary.com

विरासत का सम्मान : विश्व धरोहर दिवस पर बागपत से शुरू होगी पहली हेरिटेज ट्रेल

'श्री कृष्ण की लीला और पांडवों के पराक्रम' की देखिए अमिट छाप विरासत का सम्मान : विश्व धरोहर दिवस पर बागपत से शुरू होगी पहली हेरिटेज ट्रेल चार हजार वर्ष पुरानी सभ्यता से परिचित होने का मिलेगा मौका प्रदेश को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विरासत से वैश्विक पहचान दिलाने में योगी सरकार का बड़ा कदम द्वापर युग के ऐतिहासिक स्थलों को देख सकेंगे देश-विदेश के पर्यटक बरनावा, सिनौली, लाक्षागृह से लेकर प्राचीन धार्मिक स्थलों तक जोड़ी जाएगी ऐतिहासिक श्रृंखला युवाओं को गाइड, गांवों को होमस्टे और स्थानीय व्यंजनों को मिलेगा बढ़ावा लखनऊ ‘श्री कृष्ण की लीला और पांडवों के पराक्रम’ की कहानी आप सभी ने सुनी होगी। अब इसकी अमिट छाप भी देख सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर देश दुनिया के लिए विश्व धरोहर दिवस पर 18 अप्रैल को बागपत से हेरिटेज ट्रेल शुरू की जा रही है। यहां द्वापर युग के ऐतिहासिक स्थलों से देश-विदेश के पर्यटक परिचित हो सकेंगे। इसके अंतर्गत बरनावा, सिनौली, लाक्षागृह से लेकर प्राचीन धार्मिक स्थलों तक ऐतिहासिक श्रृंखला जोड़ी जा रही है। इसकी एक और खास बात है कि युवाओं को यहां गाइड, गांवों को होमस्टे और स्थानीय व्यंजनों को योगी सरकार बढ़ावा भी देने जा रही है। हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से पर्यटक बरनावा स्थित लाक्षागृह और पांडवकाल की गुफाओं जैसे स्थलों का अवलोकन कर सकेंगे, जहां महाभारतकालीन इतिहास और उस दौरान के कई प्रसंगों की अमिट छाप देखी जा सकेगी। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक 4000 वर्ष पुरानी सभ्यता के बारे में जान सकेंगे और इतिहास के अनदेखे पहलुओं को देखकर अभिभूत होंगे। महाभारत से जुड़ा है बागपत का गौरवशाली संबंध बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मांगे गए पांच गांवों में से एक गांव वर्तमान बागपत जिले के बरनावा क्षेत्र में माना जाता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है तथा इसे हेरिटेज ट्रेल का प्रमुख केंद्र बनाया गया है। हेरिटेज ट्रेल में बरनावा का लाक्षागृह, सिनौली पुरातात्विक स्थल, खंडवारी के प्राचीन अवशेष, पुरा महादेव मंदिर, जोहड़ी मंदिर परिसर, बरौत का ऐतिहासिक क्षेत्र, त्रिलोक तीर्थ धाम तथा यमुना तट के प्राचीन अवशेषों को शामिल किया गया है। बागपत के सिनौली में प्राचीन रथ, तलवार और ढाल मिले हैं, जिनका विशेष पौराणिक महत्व है। युवाओं को मिलेगा रोजगार, गांवों में विकसित होंगे होमस्टे हेरिटेज ट्रेल के तहत स्थानीय युवाओं को पर्यटन गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही गांवों में होमस्टे विकसित कर स्थानीय भोजन, लोक संस्कृति और पारंपरिक आतिथ्य को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पारंपरिक कलाओं को मिलेगा मंच इस पहल के अंतर्गत पॉटरी, पीतरा ड्यूरा, ब्लॉक प्रिंटिंग, इत्र निर्माण सहित पारंपरिक एवं लुप्तप्राय कलाओं की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी होगा। विरासत बनेगी नई पहचान बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से बागपत को एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के जरिए जिले की विरासत को नई पहचान दी जाएगी तथा लोगों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गौतम बुद्ध नगर में औद्योगिक असामंजस्य के समाधान हेतु गठित की गई उच्च स्तरीय समिति

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गौतम बुद्ध नगर में औद्योगिक असामंजस्य के समाधान हेतु गठित की गई  उच्च स्तरीय समिति गौतम बुद्ध नगरमें औद्योगिक असामंजस्य के समाधान हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति ने बहुचरण में श्रमिकों एवं संबंधित पक्षों के साथ की जा रही है बैठक समिति द्वारा श्रमिकों एवं संबंधित पक्षों की समस्याओं का गहनता से किया जाएगा अनुश्रवण गौतमबुद्धनगर      मुख्यमंत्री  के निर्देश पर  जनपद गौतम बुद्ध नगर में उत्पन्न औद्योगिक असामंजस्य की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए औद्योगिक सौहार्द एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा श्रमिकों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।  मा0 मुख्यमंत्री जी के निर्देश के क्रम में समिति के अध्यक्ष औद्योगिक विकास आयुक्त उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सभागार में श्रमिक प्रतिनिधियों व संबंधित पक्षों के साथ के महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें समिति के सदस्य अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन विभाग, सदस्य सचिव श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश कानपुर सहित मंडलायुक्त मेरठ मंडल मेरठ, जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर व प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित हैं ।       बैठक में समिति द्वारा जनपद की विभिन्न कंपनियों में कार्यरत श्रमिकों की समस्याओं को विस्तार से सुना जा रहा है। श्रमिकों ने वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, श्रमिक हितों की सुरक्षा तथा सम्मानजनक कार्य वातावरण जैसी प्रमुख मांगें समिति के समक्ष रखीं।              समिति ने सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए श्रमिकों को विश्वास दिलाया कि उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और सभी कंपनियों में श्रम कानूनों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।          साथ में समिति ने सभी श्रमिकों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से अपने-अपने कार्यस्थलों पर लौटकर कार्य करें और किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना या अफवाहों पर ध्यान न दें। केवल आधिकारिक रूप से जारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें, ताकि औद्योगिक वातावरण में सौहार्द, विश्वास और स्थिरता बनी रहे।      सौजन्य सूचना विभाग, गौतमबुद्धनगर।

योगी सरकार में मंत्री पद पर सवर्ण और पश्चिम यूपी पर होगा फोकस, एक नेता की नियुक्ति तय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार होने की तैयारी है। लखनऊ से दिल्ली तक यह वीकेंड काफी गहमागहमी वाला रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अचानक ही लखनऊ पहुंचे और एक के बाद एक कई नेताओं से मुलाकात की। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात हुई। यही नहीं पंकज चौधरी ने दिल्ली में भी मुलाकातें की हैं। माना जा रहा है कि विनोद तावड़े ने सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की है। इनसे राज्य के कामकाज पर बात की गई और मंत्री बनाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई। यही नहीं विनोद तावड़े की मुलाकात पूर्व प्रदेश अध्यक्षों रमापति राम त्रिपाठी और सूर्यप्रताप शाही से भी हुई। इसके अलावा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह जैसे नेता भी उनसे मिले। ये सारी बैठकें फीडबैक के लिए हुईं और मंथन हुआ कि कौन से नेता मंत्री बन सकते हैं। इसके अलावा किन लोगों को निगमों, सहकारी संस्थाओं आदि में पद देकर नवाजा जा सकता है। इस बीच चर्चा है कि पश्चिम यूपी से आने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्री बनना तय है। वह प्रदेश अध्यक्ष पद से हटे हैं और जाट नेता हैं। बिरादरी का पश्चिम यूपी में अच्छा असर है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि उन्हें कोई अहम विभाग देकर समाज में एक संदेश दिया जाए। 6 मंत्रियों के लिए एंट्री की संभावना, कौन हैं रेस में उत्तर प्रदेश सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं। इनमें से 21 कैबिनेट मंत्री हैं और 14 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इसके अलावा 19 राज्यमंत्री हैं। अब भी 6 मंत्री और बन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विधानसभा की कुल क्षमता के 15 फीसदी के बराबर का मंत्री परिषद हो सकता है। यूपी में आखिरी कैबिनेट विस्तार मार्च 2024 में हुआ था। सूत्रों का कहना है कि अब होने वाले कैबिनेट विस्तार में कुछ लोगों को सरकार से संगठन में भेजा सकता है। इसके अलावा सालों से संगठन में मेहनत कर रहे कुछ लोग मंत्री पद पा सकते हैं। यही नहीं आयोग और निगमों में भी पद दिए जा सकते हैं। दिल्ली से लखनऊ तक मंथन, किन्हें मिलेगा जिम्मा और कौन बाहर कहा जा रहा है कि राज्य में कुछ नियुक्तियों को लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच मतभेद की स्थिति है। ऐसे में इस बार नियुक्तियां ऐसी करने पर विचार हो रहा है कि कहीं भी नाराजगी का स्कोप ना रहे। इसके अलावा मंत्री परिषद के गठन में पश्चिम यूपी पर फोकस करने की तैयारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम, दोनों डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष में से सभी मध्य अथवा पूर्वी यूपी के हैं। ऐसे में पश्चिम यूपी के किसी नेता को अहमियत मिल सकती है। वहीं सामाजिक समीकरण की बात की जाए तो ओबीसी और दलित के अलावा सवर्ण समाज पर भी फोकस रह सकता है। यूजीसी रूल्स वाले विवाद के बाद सवर्णों में नाराजगी के चर्चे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा सरकार इन्हें 2027 से पहले निश्चित तौर पर साधना चाहेगी।

सीएम योगी ने अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का भी किया अनावरण, रोजगार मेले में बांटे नियुक्ति पत्र

मुजफ्फरनगर को विकास की सौगात, मुख्यमंत्री ने किया ₹951 करोड़ की 423 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास सीएम योगी ने अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का भी किया अनावरण, रोजगार मेले में बांटे नियुक्ति पत्र सड़क, पेयजल, रेल और शहरी विकास से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को मिली रफ्तार कौशल विकास, एआई और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल मुजफ्फरनगर को मिलेगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मुजफ्फरनगर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को महर्षि शुकदेव की पावन धरा मुजफ्फरनगर को ₹951 करोड़ से अधिक की लागत वाली 423 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने बटन दबाकर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का अनावरण किया और रोजगार मेले का अवलोकन करते हुए युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और रोजगार के अवसरों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकार्पित प्रमुख परियोजनाओं में बेहड़ा सादात से मेरठ-पौड़ी मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, मंसूरपुर से शाहपुर मार्ग का सुदृढ़ीकरण, शुक्रतीर्थ में लाइट एंड साउंड शो तथा नगर पंचायत चरथावल की पेयजल पुनर्गठन योजना शामिल हैं। वहीं शिलान्यास की गई योजनाओं में खतौली रेलवे स्टेशन पर दो लेन का रेल उपरिगामी सेतु, छपार-रोहना-चरथावल मार्ग और खतौली-मीरापुर मार्ग का चौड़ीकरण, नाला निर्माण कार्य तथा राजकीय इंटर कॉलेज में 800 क्षमता वाले ऑडिटोरियम का निर्माण शामिल है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की पुस्तक ‘कौशल दर्शन’ का विमोचन किया और देश में एआई विश्वविद्यालयों की रूपरेखा से जुड़ी ‘एआई सेंटीमेंट एंड रेडीनेंस’ रिपोर्ट लॉन्च की। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग और एनएसडीसी के बीच एमओयू भी संपन्न कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी परियोजनाएं न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देंगी, बल्कि रोजगार, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में भी अहम भूमिका निभाएंगी।

योगी सरकार की पहल: आंबेडकर जयंती बनेगी सामाजिक न्याय और जनसशक्तीकरण का महापर्व

योगी सरकार की पहल, आंबेडकर जयंती बनेगी सामाजिक न्याय और जनसशक्तीकरण का महापर्व लखनऊ में सीएम योगी करेंगे बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित, महासभा परिसर में भव्य आयोजन लखनऊ  उत्तर प्रदेश में इस वर्ष आंबेडकर जयंती को अभूतपूर्व स्तर पर मनाने की तैयारी की गई है। योगी सरकार ने इसे केवल एक स्मृति दिवस न रखकर सामाजिक न्याय, जागरूकता और जनसंपर्क के व्यापक अभियान के रूप में परिवर्तित कर दिया है। प्रदेश के सभी जनपदों और विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें जनप्रतिनिधि सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनके अधिकारों, संविधान और समानता के मूल्यों की जानकारी देंगे।  हजरतगंज स्थित आंबेडकर महासभा परिसर में होने वाला मुख्य कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बाबा साहब के अस्थिकलश पर पुष्पांजलि और बुद्ध वंदना के साथ होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।  लोकतंत्र की जड़ों को मिलेगी मजबूती  योगी सरकार की मंशा है कि बाबा साहब के विचार- समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाए। इसी दिशा में यूपी के प्रत्येक जिले में भारतीय जनता पार्टी के सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाकर उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करेंगे। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूती मिलेगी। बाबा साहब की प्रतिमाओं पर लगाए जाएंगे छत्र योगी सरकार ने आंबेडकर जयंती से पहले एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में स्थापित बाबा साहब की प्रतिमाओं पर छत्र लगाए जाएंगे, साथ ही बाउंड्री वॉल और सौंदर्यीकरण का कार्य भी कराया जाएगा। इस निर्णय को ऐतिहासिक कदम बताते हुए डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि इससे दलित समाज और आंबेडकर अनुयायियों में खासा उत्साह है। 14 अप्रैल को प्रदेश नजर आयेगा आंबेडकरमय उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में भी विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें विचार गोष्ठियां, भाषण, निबंध प्रतियोगिताएं और वाद-विवाद शामिल हैं, जिनके माध्यम से नई पीढ़ी को बाबा साहब के योगदान और उनके संघर्षों से परिचित कराया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल स्पष्ट करती है कि वह सामाजिक समरसता और जनभागीदारी को प्राथमिकता दे रही है। 14 अप्रैल को पूरा प्रदेश ‘आंबेडकरमय’ नजर आएगा। बाबा साहब के योगदान पर होगी विशेष चर्चा  वहीं समाज कल्याण विभाग के सभी कार्यालयों, विद्यालयों, छात्रावासों और संस्थाओं में भी आयोजन होंगे। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भी विशेष कार्यक्रम होंगे। इनमें बाबा साहब डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा एवं चित्र पर माल्यार्पण, विचार गोष्ठियां, निबंध, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। उनके जीवन, शिक्षाओं और संविधान निर्माण में योगदान पर विशेष चर्चा होगी। मूर्ति विकास योजना को मिल चुकी है मंजूरी सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को मंजूरी दे चुकी है, जिसके तहत प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक न्याय के महानायकों के 10-10 स्मारकों और प्रतिमाओं का विकास एवं सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इस पर कुल 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, महात्मा ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि सहित अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं और स्मारकों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और आधारभूत विकास होगा।

जब प्रदेश विकास व शांति की ओर बढ़ रहा है, कुछ लोग षड्यंत्र कर अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं: मुख्यमंत्री

औद्योगिक अशांति फैलाने वालों से सावधान रहें श्रमिक: सीएम योगी जब प्रदेश विकास व शांति की ओर बढ़ रहा है, कुछ लोग षड्यंत्र कर अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं: मुख्यमंत्री हमारी सरकार श्रमिकों के साथ, उद्यमियों को सुरक्षा देंगे और हर श्रमिक को संरक्षण भी: सीएम योगी विकास व विरासत की यात्रा को डबल इंजन सरकार दे रही गति, किसानों, युवाओं व महिलाओं के सशक्तीकरण पर विशेष जोर आधुनिक तकनीक व रोजगार सृजन से बदलेगी प्रदेश की तस्वीर, सुरक्षा, सुशासन व पारदर्शिता से मजबूत हुआ नया उत्तर प्रदेश मुजफ्फरनगर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रगति के पद पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ लोग इसके खिलाफ षड्यंत्र कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश के श्रमिकों से अपील की कि वे औद्योगिक अशांति फैलाने वालों से सावधान रहें और उनके प्रयासों को किसी भी कीमत पर सफल न होने दें। डबल इंजन सरकार विकास व विरासत की यात्रा को मजबूती से आगे बढ़ा रही है, जिसमें श्रमिकों, किसानों, युवाओं और महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। सरकार एक ओर जहां आधुनिक तकनीक, रोजगार और निवेश को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था और श्रमिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि औद्योगिक विकास के साथ सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित रहेगी, ताकि प्रदेश में शांति, स्थिरता और समृद्धि का वातावरण बना रहे। श्रमिकों और कार्मिकों के साथ हो सीधा संवाद मुजफ्फरनगर में सोमवार को ₹951 करोड़ की 423 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सुरक्षा, सुशासन और सेवा का एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत कर रही है। लेकिन जब प्रदेश विकास और शांति की ओर अग्रसर है,  कुछ लोग षड्यंत्र के तहत अशांति फैलाने की चेष्टा कर रहे हैं। सीएम ने सभी औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत कार्मिकों व श्रमिकों से अपील करते हुए कहा कि वे याद करें, कोरोना काल में सरकार किस तरह उनके साथ खड़ी रही। उस कठिन समय में सरकार ने श्रमिकों के लिए परिवहन, क्वारंटीन और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की, उन्हें सुरक्षित घर तक पहुंचाया। औद्योगिक अशांति पैदा करने वाले लोगों से सावधान रहें। न्यूनतम मानदेय की गारंटी मिलेगी मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं सभी उद्योगों से भी इस संबंध में अपील करता हूं कि वे श्रमिकों और कार्मिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करें। हमारी सरकार श्रमिकों के साथ है। सरकार उद्यमियों को सुरक्षा देगी और हर श्रमिक को संरक्षण भी प्रदान करेगी, साथ ही उनका उचित मानदेय सुनिश्चित करेगी। हमने गत वर्ष ही एक कॉरपोरेशन का गठन कर दिया है और इसी महीने उसकी सिफारिशें लागू होने वाली हैं। इसके तहत चाहे सफाई कर्मचारी हो या आउटसोर्सिंग पर कार्य करने वाला कोई भी युवा, उसे न्यूनतम मानदेय की गारंटी मिलेगी। सरकार द्वारा निर्धारित राशि सीधे उसके खाते में जाएगी, कोई भी बिचौलिया उसके हक पर डकैती नहीं डाल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रहेगी,  बल्कि अगले चरण में इसे औद्योगिक संस्थानों में भी लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि हर श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा मिल सके। हमने शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों, आंगनबाड़ी और आशा वर्करों को भी 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की है। आगे बीमा कंपनियों के साथ मिलकर यह प्रयास किया जा रहा है कि प्रत्येक श्रमिक को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सके।  लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने दिखाया न्याय और सुशासन का आदर्श मॉडल मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे शुकदेव की इस पावन धरा पर, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी व चौधरी अजीत सिंह जी की कर्मभूमि पर आज यहां लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की दिव्य प्रतिमा के अनावरण का अवसर प्राप्त हुआ है। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 350वीं जयंती गत वर्ष प्रधानमंत्री मोदी जी की प्रेरणा से पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाई गई थी। उसी समय केंद्र और राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया था कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए श्रमजीवी महिला छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश में 14 श्रमजीवी महिला छात्रावास निर्माणाधीन हैं, जो लोकमाता की स्मृतियों की ओर हम सबका ध्यान आकर्षित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जगन्नाथ पुरी से लेकर सोमनाथ तक, काशी विश्वनाथ से लेकर रामेश्वरम तक भारत की गुलामी के उस कालखंड में, जब मुगल आक्रांताओं के कारण व्यवस्था जकड़ी हुई थी, तब भी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर भारत की विरासत के संरक्षण के लिए पूरी तन्मयता से कार्य कर रही थीं। न्याय और सुशासन का आदर्श मॉडल कैसा होता है, यह लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने भारत को दिखाया। वह मालवा की शासक थीं, लेकिन पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए समर्पित रहीं। आज का काशी विश्वनाथ मंदिर उसी का उदाहरण है, जिसका पुनर्निर्माण लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था, जब औरंगजेब ने उसे ध्वस्त कर दिया था। लोकमाता अहिल्याबाई को हर सच्चा भारतीय नमन करता है। राष्ट्रनायक की कोई जाति नहीं होती मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता का जो योगदान है, चौधरी साहब का जो योगदान है, वह जाति के लिए नहीं है, व्यक्ति के लिए नहीं है, बल्कि देश के लिए है। उनके योगदान के कारण ही हम सब आज यहां हैं। महापुरुषों को सम्मान मिलना चाहिए। महापुरुषों को जाति के संकीर्ण दायरे में मत बांधिए। यह देश तब गुलाम हुआ था, जब हमने महापुरुषों को जातीय सीमाओं में बांधने का पाप किया था। आप मुझे बताइए कि धन सिंह कोतवाल ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में जो शंखनाद किया, क्या वह किसी जाति के लिए था? जो लोग मुजफ्फरनगर में शहीद हुए, क्या उन्होंने अपने परिवार के लिए बलिदान दिया था? महारानी लक्ष्मीबाई, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज, क्या इन्होंने किसी जाति के लिए संघर्ष किया था? नहीं, उन्होंने देश और धर्म के लिए संघर्ष किया, और स्वदेश तथा धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। सीएम ने कहा कि चौधरी साहब ने भी सबके कल्याण की बात की। उन्होंने किसान, गांव, श्रमिक, युवाओं, खेत और खलिहान की बात की। उन्होंने कभी जाति की बात नहीं … Read more

2200 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट से गाजियाबाद बनेगा यूपी का इंटीग्रेटेड अर्बन हब

2200 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट से यूपी का प्रवेश द्वार गाजियाबाद बनेगा इंटीग्रेटेड अर्बन हब पश्चिमी यूपी को पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की सौगात, जल्द हो सकता है शिलान्यास विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम के चारो तरफ बसेगी एरोसिटी, बढ़ेगा पर्यटन व रोजगार आधुनिक शॉपिंग मॉल, रिटेल जोन, हाईटेक बिजनेस हब और बनेंगे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर बनेगा प्रमुख आकर्षण, स्पोर्ट्स एकेडमी, स्मार्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और ग्रीन स्पेस की रहेगी सुविधा लखनऊ उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार गाजियाबाद अब एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। करीब 2200 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम और एरोसिटी प्रोजेक्ट न केवल इस शहर की पहचान बदलने जा रहा है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सौगात मिलने जा रही है। इसके साथ ही यह क्षेत्र इतने बड़े स्तर के इंटीग्रेटेड अर्बन डेवलपमेंट मॉडल का हिस्सा बनेगा, जिससे गाजियाबाद प्रदेश का बड़ा पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा। इसके साथ ही यहां लाखों की संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से टर्निंग प्वाइंट साबित होंगे। सबसे अहम बात यह है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास जल्द ही होने की संभावना है, जिससे वर्षों से अटकी योजना अब जमीन पर उतरने के करीब पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन पर आधारित यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद को स्पोर्ट्स, टूरिज्म और हाईटेक अर्बन डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र बनाएगा। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर प्रमुख आकर्षण रहेगा। 417 एकड़ में खेल, व्यापार, पर्यटन और आधुनिक जीवनशैली का होगा समेकित विकास गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी नंद किशोर कलाल ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन (मोर्टी क्षेत्र) में प्रस्तावित इस योजना के तहत 37 एकड़ में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम विकसित किया जाएगा, जबकि इसके आसपास 380 एकड़ में लगभग 1800 करोड़ रुपये की लागत से एरोसिटी टाउनशिप बसाई जाएगी। दोनों को मिलाकर एक ऐसा इंटीग्रेटेड अर्बन हब तैयार किया जाएगा, जहां खेल, व्यापार, पर्यटन और आधुनिक जीवनशैली का समेकित विकास होगा। 2014-15 में बनी थी योजना, पहले की सरकार में नहीं हो सका कोई काम दरअसल, इस परियोजना की रूपरेखा 2014-15 में तैयार हुई थी, लेकिन लंबे समय तक यह आगे नहीं बढ़ सकी। उस दौर में विकास की गति अपेक्षित नहीं रही और गाजियाबाद को उसकी क्षमता के अनुरूप पहचान नहीं मिल पाई। पहले की सरकार के दौरान रही सुस्ती के कारण यह प्रोजेक्ट वर्षों तक ठहराव में रहा, लेकिन अब योगी सरकार में इसे प्राथमिकता में रखते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। पश्चिमी यूपी पहली बार अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों की करेगा मेजबानी करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं वाला होगा। इसमें करीब 30,000 से अधिक दर्शकों की क्षमता, आधुनिक मीडिया सेंटर और हाईटेक लाइटिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी, जो इसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएंगी। इस स्टेडियम के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पहली बार बड़े अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों की मेजबानी का अवसर मिलेगा। काम करने, रहने और मनोरंजन के लिए बनेगा संपूर्ण डेस्टिनेशन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी नंद किशोर कलाल ने बताया कि स्टेडियम के चारो ओर विकसित होने वाली एरोसिटी इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी ताकत होगी। इसमें बड़े होटल, लक्जरी रिजॉर्ट्स, आधुनिक शॉपिंग मॉल, रिटेल जोन, हाई-टेक बिजनेस हब, ऑफिस स्पेस और एंटरटेनमेंट सेंटर विकसित किए जाएंगे। एयरपोर्ट के नजदीक होने के कारण यह क्षेत्र देश-विदेश के पर्यटकों और निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बनेगा। यह परियोजना सिर्फ स्टेडियम या टाउनशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि एक नए अर्बन मॉडल के रूप में विकसित की जा रही है। इसमें स्पोर्ट्स एकेडमी, स्मार्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स, ग्रीन स्पेस और आउटडोर खेल सुविधाएं भी शामिल होंगी, जिससे यह क्षेत्र रहने, काम करने और मनोरंजन के लिए एक संपूर्ण डेस्टिनेशन बनेगा। होटल, रिटेल और सर्विस सेक्टर तक बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, बढ़ेगा निवेश गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) बोर्ड से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे यूपी क्रिकेट एसोसिएशन के साथ जॉइंट वेंचर मॉडल पर विकसित किया जाएगा। सभी सुविधाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है, ताकि यह प्रोजेक्ट भविष्य में निवेश और विकास का बड़ा केंद्र बन सके। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने से गाजियाबाद और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को व्यापक आर्थिक लाभ मिलेगा। निर्माण से लेकर होटल, रिटेल और सर्विस सेक्टर तक बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, निवेश बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना आने वाले समय में पश्चिमी यूपी के विकास की दिशा और गति दोनों तय करती नजर आएगी।

लखीमपुर खीरी में 1311 करोड़ की 538 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करेंगे सीएम योगी

लखनऊ/लखीमपुर खीरी.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को लखीमपुर खीरी के दौरे पर रहेंगे, जहां वह पलिया व मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करने के साथ सात विधानसभा क्षेत्रों को करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास की सौगात देंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न लाभार्थी परिवारों को भूमि आवंटन पत्र, आवास की चाबी और चेक भी सौंपेंगे।  मुख्यमंत्री यहां कुल 1311 करोड़ रुपये की 538 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करेंगे। इनमें 356 करोड़ रुपये की 345 परियोजनाओं का लोकार्पण और 955 करोड़ रुपये की 193 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन परियोजनाओं का लाभ जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों लखीमपुर, गोला, श्रीनगर, पलिया, निघासन, मोहम्मदी और धौरहरा के लोगों को मिलेगा। कार्यक्रम की शुरुआत चंदन चौकी (पलिया) से होगी, जहां मुख्यमंत्री जनसभा को संबोधित करने के साथ ही थारू जनजाति के परिवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार पत्र तथा लाभार्थियों को डेमो चेक प्रदान करेंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को आवास की चाबी का वितरण और निर्माण कार्यों का लोकार्पण/शिलान्यास भी करेंगे। इस दौरान बच्चों द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत ‘ओडीओपी’ योजना के तहत निर्मित हैट पहनाकर किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री मियांपुर (मोहम्मदी) में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचेंगे, जहां वह विस्थापित परिवारों को भूमि अधिकार पत्र प्रदान कर एक ऐतिहासिक पहल करेंगे। यहां विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को डेमो चेक वितरित किए जाएंगे और मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को उनके आवास की चाबी सौंपी जाएगी। साथ ही सीएम योगी कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करेंगे। थारू जनजाति के परिवारों को मिलेगा पूर्ण स्वामित्व अधिकार थारू जनजाति के परिवारों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए योगी सरकार ने उन्हें पूर्ण स्वामित्व के साथ भूमि अधिकार देने का निर्णय किया है। इसके तहत तहसील पलिया में थारू जनजाति के 34 गांवों के 4356 परिवारों को 5338 हेक्टेयर भूमि पर भौमिक अधिकार प्रदान किए हैं। वर्ष 1976 में इन परिवारों को भूमि उपयोग का अधिकार मिला था, लेकिन अब योगी सरकार उन्हें पूर्ण स्वामित्व अधिकार देने जा रही है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान भी मिलेगा। उपनिवेश योजना के तहत 2350 परिवारों को मिला अधिकार इसी तरह, उपनिवेश योजना के तहत नदी कटान से प्रभावित परिवारों को बसाने के लिए 12 उपनिवेश (कालोनियों) में बसे 2350 परिवारों को 4251 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया। इनमें अनुसूचित जाति के 1077 और पिछड़े वर्ग के 874 परिवार शामिल हैं। वर्षों से इन परिवारों के पास भूमि उपयोग का अधिकार तो था, लेकिन स्वामित्व नहीं था। अब इसी भूमि पर उन्हें मालिकाना अधिकार प्रदान किया जा रहा है। यह निर्णय उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा लेकर आएगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगा। पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों का पुनर्वास इसी प्रकार पूर्वी पाकिस्तान/बांग्लादेश से विस्थापित होकर आए 331 हिंदू परिवारों का पुनर्वास भी लखीमपुर खीरी में किया गया है। इन परिवारों को जिले की विभिन्न तहसीलों धौरहरा, मोहम्मदी और गोला में बसाया गया था, जहां उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कृषि योग्य भूमि भी उपलब्ध कराई गई है। मियांपुर में बसे 156 परिवारों को प्रति परिवार करीब 4.75 एकड़ भूमि दी गई है, जबकि अन्य गांवों में भी परिवारों को औसतन 3 से 7 एकड़ तक जमीन आवंटित की गई है। बुनियादी सुविधाएं इन गांवों तक पहुंचाई योगी सरकार द्वारा इन परिवारों को केवल जमीन ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पेंशन योजनाएं और सुकन्या समृद्धि योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। साथ ही, राशन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सड़क और रोजगार से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं भी इन गांवों तक पहुंचाई गई हैं। हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना योगी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री का यह दौरा विकास, पुनर्वास और सामाजिक न्याय के समेकित मॉडल को जमीन पर उतारने का प्रयास है। भूमि स्वामित्व अधिकार, आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से योगी सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि विकास के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना योगी सरकार की प्राथमिकता है।

योगी सरकार का यक्ष एप, स्मार्ट पुलिसिंग को बना रहा मजबूत आधार

योगी सरकार का यक्ष एप स्मार्ट पुलिसिंग को दे रहा धार – महज 90 दिनों में एक दर्जन से अधिक मामलों का किया खुलासा, अपराध नियंत्रण में आई तेजी – कुछ घंटों में दो लूट का किया खुलासा, अपहरण केस में चौंकाने वाला सच आया सामने – सीसीटीवी और डिजिटल डाटा से तेजी से आरोपियों तक पहुंच रही पुलिस – आगरा में बुजुर्ग को झूठे आरोप से बचाया, असली आरोपी गिरफ्तार लखनऊ  यूपी पुलिस का यक्ष एप अपराधियों को सलाखों के पीछे धकेलने में अहम भूमिका निभा रहा है। यक्ष एप ने महज 90 दिनों में एक दर्जन से अधिक अपराधिक घटनाओं का खुलासा कर अपराध नियंत्रण पर स्मार्ट पुलिसिंग को नया आयाम दिया है। एप के जरिये अपहरण, हत्या, लूट, चोरी जैसे गंभीर अपराधों का खुलासा किया है। यक्ष ऐप की मदद से पुलिस न केवल तेजी से आरोपियों तक पहुंच रही है, बल्कि घटनाओं के खुलासे का समय भी काफी कम हुआ है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में स्मार्ट पुलिसिंग को नई दिशा देने के लिए  “पुलिस मंथन” कार्यक्रम में यक्ष एप को लांच किया था।  एप ने किया कुछ घंटों में दो लूट का खुलासा, अपहरण की गुत्थी को सुलझाया डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरुप स्मार्ट पुलिसिंग के तहत यक्ष एप को लांच किया गया था। यक्ष ेएप में प्रदेश के अपराधियों का डिजिटल डाटाबेस, सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन आधारित मैपिंग और एनालिटिकल टूल्स जैसी सुविधाएं दी गई हैं। पहले जहां विवेचकों को “विलेज क्राइम नोट बुक” जैसे पारंपरिक रजिस्टर पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब कुछ ही मिनटों में अपराधियों की पूरी हिस्ट्री सामने आ जाती है। डीजीपी ने बताया कि हरदोई में दर्ज अपहरण के एक मामले में यक्ष ऐप ने चौंकाने वाला सच सामने लाया। जांच में पता चला कि कथित अपहृत व्यक्ति पिछले ढाई साल से जेल में बंद था। इसी तरह जौनपुर में 11 मार्च 2026 को जन सेवा केंद्र संचालक के साथ हुई लूट की घटना का खुलासा कुछ ही घंटों में कर लिया गया। पुलिस ने यक्ष एप के माध्यम से 42–43 सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया, जिससे संदिग्धों की पहचान और लोकेशन ट्रैक हुई। इसके बाद मुठभेड़ में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और करीब 1.30 लाख नकद बरामद किया गया। इसके अलावा राजधानी लखनऊ के काकोरी क्षेत्र में एक घंटे के अंतराल पर हुई दो लूट की घटनाओं का 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया गया। यक्ष एप के जरिए आरोपियों की पहचान, मोबाइल लोकेशन और गतिविधियों का विश्लेषण कर पुलिस ने दोनों बदमाशों को गिरफ्तार किया। इतना ही नहीं रायबरेली में यक्ष एप की मदद से 8 सदस्यीय अंतरराज्यीय वाहन चोर गैंग का पर्दाफाश हुआ। एप के डाटाबेस और जियो-टैगिंग के जरिए पुलिस को आरोपियों का आपराधिक इतिहास मिला, जिससे योजनाबद्ध कार्रवाई कर सभी को गिरफ्तार किया गया। झूठे आरोप से बुजुर्ग को बचाया बरेली में सास और साले की हत्या के आरोपी को पकड़ने में भी यक्ष ने अहम भूमिका निभाई। आरोपी का फोटो और रिकॉर्ड एप से मिलते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आगरा में एक बुजुर्ग व्यक्ति को झूठे छेड़छाड़ के आरोप से बचाने में भी एप उपयोगी साबित हुआ। सीसीटीवी फुटेज और फेस रिकग्निशन के जरिए असली आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। मेरठ, हाथरस, फर्रुखाबाद, कानपुर और गोंडा जैसे जिलों में यक्ष के जरिए कई चोरी और जेबकतरी गैंग का खुलासा हुआ। मेरठ में जेबकतरा गिरोह के 4 सदस्य गिरफ्तार किये गये, हाथरस में आभूषण चोरी का आरोपी ट्रेस, कानपुर में ज्वैलरी दुकान से चोरी करने वाले गैंग का भंडाफोड़ और गोंडा में स्कूलों में हो रही चोरी का खुलासा एप ने किया।    यह है एप की विशेषताएं – पुलिस इकाइयों के लिए उपलब्ध प्रदेशव्यापी अपराधियों का डिजिटल डाटाबेस – त्वरित साक्ष्य संकलन के लिए सीसीटीवी कैमरों का स्थान आधारित मानचित्रण – प्रत्येक अपराधी को दिया गया यूनिक क्रिमिनल आईडी, जिससे जिलों के बीच सूचनाओं का सहज आदान-प्रदान संभव – सटीक पहचान के लिए अपराधियों के मल्टी-एंगल फोटोग्राफिक रिकॉर्ड

बीमार भारत न तो विकसित हो सकता है, न सशक्त बन सकता है और न ही आत्मनिर्भर: मुख्यमंत्री

व्यापक बचाव अभियान और मजबूत उपचार व्यवस्था ही बनेगी भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को किया संबोधित सीएम ने कहा- स्वस्थ नागरिक से स्वस्थ समाज बनेगा और स्वस्थ समाज ही रखता है एक सशक्त राष्ट्र की नींव बीमार भारत न तो विकसित हो सकता है, न सशक्त बन सकता है और न ही आत्मनिर्भर: मुख्यमंत्री स्वस्थ दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से ही कर सकते हैं इस चुनौती का प्रभावी समाधान: सीएम लखनऊ तेजी से बदलती जीवनशैली और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य नीति के केंद्र में अब केवल उपचार नहीं, बल्कि बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट), दोनों का संतुलित समन्वय अनिवार्य हो गया है। इसी व्यापक दृष्टि को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि देश को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ और उत्पादक बनाना है, तो चिकित्सा व्यवस्था को इलाज-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़ाकर जन-जागरूकता और जीवनशैली में सुधार पर आधारित मॉडल की ओर ले जाना होगा। मुख्यमंत्री शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना और किफायती उपचार के विस्तार पर काम कर रही है। दूसरी ओर, समाज को बीमारियों से पहले ही सुरक्षित करने की रणनीति यानी ‘बचाव’ को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यही द्विस्तरीय दृष्टिकोण (मजबूत उपचार व्यवस्था और व्यापक बचाव अभियान) आने वाले भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनेगा और ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने की दिशा तय करेगा। बचाव को बनाना होगा प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज आज समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं, जबकि भारत की परंपरा में संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या हमेशा से स्वस्थ जीवन का आधार रही है। बदलती जीवनशैली के चलते उत्पन्न चुनौतियों के बीच अब स्वास्थ्य के दो प्रमुख आयाम – बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट) स्पष्ट रूप से सामने हैं। जहां विशेषज्ञों की स्वाभाविक रुचि उपचार और नवाचार में होती है, वहीं उनका मानना है कि इन बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बचाव को प्राथमिकता देनी होगी। जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके। आयुष्मान भारत बना सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तेजी से नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां बढ़ रही हैं और समाज का बड़ा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। पहले गंभीर बीमारी का मतलब पूरे परिवार के लिए आर्थिक संकट होता था, क्योंकि न पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थान थे और न ही विशेषज्ञों की उपलब्धता। लेकिन पिछले वर्षों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से आज देश के लगभग 55-60 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, जो दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवरेज योजनाओं में एक है और आमजन को उपचार की बड़ी चिंता से राहत प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से लगभग 1400 करोड़ रुपये उपचार के लिए जनता को उपलब्ध कराए गए, जो सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है। आयुष्मान भारत योजना से वंचित रह गए वर्गों को भी मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत शामिल कर स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया है। हाल ही में शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, एएनएम तथा मिड-डे मील से जुड़े रसोइयों को भी इस योजना में कवर किया गया है, जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग अब स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आ गया है और उन्हें प्रभावी लाभ मिल रहा है। जागरूकता के बिना नहीं रुकेगी बीमारी की चुनौती मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जो 25 करोड़ की आबादी के लिए बेहद अपर्याप्त थे, जबकि आज केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है और 2 एम्स भी संचालित हैं। हर जिले में आईसीयू की स्थापना, अनेक स्थानों पर कैथ लैब की शुरुआत, निजी क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों का तेजी से विस्तार और पुराने मेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती दे रहा है। लखनऊ के एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान के माध्यम से टेली-कंसल्टेशन, टेली-आईसीयू और वर्चुअल आईसीयू सेवाओं को प्रदेशभर के अस्पतालों से जोड़ा गया है। साथ ही मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क के जरिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण उपचार व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इंगित किया कि इन सभी प्रयासों के बावजूद, यदि जीवनशैली में सुधार और व्यापक जागरूकता अभियान पर समान बल नहीं दिया गया, तो बढ़ती बीमारियों की चुनौती को केवल उपचार के माध्यम से नियंत्रित करना संभव नहीं होगा। चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां निजी क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों के लिए परिस्थितियां अपेक्षाकृत सहज हैं, वहीं सरकारी संस्थानों में अत्यधिक मरीजों की भीड़ एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि केजीएमयू में प्रतिदिन 12 से 14 हजार, एम्स दिल्ली में 16 से 17 हजार और एसजीपीजीआई में 10 से 12 हजार तक ओपीडी होती है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक मरीज को पर्याप्त समय और गुणवत्तापूर्ण उपचार दे पाना कठिन हो जाता है, और भविष्य में यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, विशेषकर प्रतिदिन 4 से 6 घंटे स्मार्टफोन के उपयोग ने नई बीमारियों को जन्म दिया है, वहीं डायबिटीज का तेजी से बढ़ता प्रसार भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इन परिस्थितियों में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब यही संदेश डॉक्टरों के माध्यम से समाज तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव अधिक गहरा और स्थायी होता है, इसलिए चिकित्सकों की भूमिका इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिलावटी खान-पान और बिगड़ी दिनचर्या सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सबसे बड़ी … Read more