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योगी सरकार के निर्देश, 24 घंटे में राहत-मुआवजा; घायलों के उपचार में ढिलाई पर रोक

सीएम योगी के सख्त निर्देश, 24 घंटे में मिले मुआवजा, घायलों के इलाज में न हो लापरवाही प्रदेश में आंधी, वर्षा और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि को लेकर प्रशासन गंभीर  सभी जिलाधिकारियों को फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्देश  प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमें सक्रिय लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में आंधी, वर्षा और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सीएम ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को घायलों के त्वरित व समुचित इलाज तथा सभी प्रभावितों को 24 घंटे के भीतर राहत राशि उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही जिलाधिकारियों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने को कहा गया है। सीएम ने जताई संवेदना, राहत को लेकर दिए सख्त निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आपदा पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घायलों का समुचित और तत्काल इलाज सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जनहानि, पशुहानि और घायलों को 24 घंटे के भीतर अनुमन्य राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अलर्ट जारी, प्रशासन सतर्क मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भी कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करने और आवश्यक संसाधनों के लिए शासन से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमें लगातार सक्रिय हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

बंगाल में बवंडर, लेकिन असली कमाल सीएम योगी का; स्ट्राइक रेट ने दी झकझोरने वाली जीत

लखनऊ  पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं, जिसमें टीएमसी का सूपड़ा साफ हो गया. बीजेपी की इस कदर आंधी चली है कि खुद ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट तक हार गईं. इस बार के चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. खुद पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह से लेकर तमाम दिग्गज नेता चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल पहुंचे हुए थे. हाालंकि सबकी नजर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हुई थी कि सीएम योगी ने जहां-जहां चुनाव प्रचार किया, वहां बीजेपी का क्या हाल रहा. बीजेपी ने उन सीटों पर जीत हासिल की है या फिर हार का सामना करना पड़ा. हालांकि जो नतीजे आए हैं, उससे यह जाहिर है कि सीएम योगी का स्ट्राइक रेट बंगाल चुनाव में भी जबरदस्त रहा है. सीएम योगी ने कुल 22 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था, उनमें से 18 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है।  जानिए किस सीट पर सीएम योगी ने किया चुनाव प्रचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोनामुखी, नंदकुमार, कांथी दक्षिण, बाराबनी, रामपुरहाट, बोलपुर, माथाभंगा, धुपगुड़ी, जॉयपुर, गारबेटा, जोरासांको, चकदहा, उदयनारायणपुर, नबद्वीप, कटवा, बागदा, धानेखाली और राजारहाट गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं की. इसके अलावा उन्होंने बांकुड़ा, कल्याणी और दमदम में रोड शो किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए थे।  किन-किन सीटों पर बीजेपी ने हासिल की जीत सोनामुखी में बीजेपी दिबाकर घरामी, नंदकुमार से बीजेपी के खानरा निर्मल, कांथी दक्षिण से अरूप कुमार दास, बाराबनी से बीजेपी के अरजित रॉय, रामपुरहाच से बीजेपी के धुर्वा साहा, माथाभांगा से बीजेपी के निसिथ प्रामाणिक, धुपगुड़ी से बीजेपी के नरेश रॉय, बांकुडा से बीजेपी के नीलाद्री शेखर दाना, पिंगला से बीजेपी के स्वागत मन्ना, जॉयपुर से बीजेपी के बिस्वजीत महतो, जोरासांको से बीजेपी के विजय झा, चकदहा से बीजेपी के बंकिम चंद्र घोष, नबद्वीप से बीजेपी के श्रुति शेखर गोस्वामी, कटवा से बीजेपी के कृष्णा घोष, बागदा से बीजेपी के सोमा ठाकुर, कल्याणी से बीजेपी के अनुपम बिश्वास, दमदम से बीजेपी के अरजित बख्शी, राजारहाट गोपालपुर से तरुण ज्योति तिवारी जीत गए।  कहां हुई हार धानेखली विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार असिमा पात्रा ने बीजेपी उम्मीदवार को 13057 वोटों से हराया है. वहीं बोलपुर विधानसभा सीट पर टीएमसी के चंद्रनाथ सिन्हा ने बीजेपी के दिलीप घो, को 13188 वोटों से हरा दिया। 

सीएम योगी ने बढ़ाया मुआवजा, यूपी के लोगों को मिलेगा दोगुना फायदा

लखनऊ  यूपी में किसानों के हित से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है. लंबे समय से बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों की जो शिकायतें थीं, अब उन पर सरकार ने ठोस कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुआवजा व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए किसानों को सीधा आर्थिक लाभ देने का फैसला किया गया है।  अब 765, 400, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित जमीन पर पहले से कहीं ज्यादा मुआवजा मिलेगा. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जहां टावर (खंभे) खड़े किए जाते हैं, उस जमीन के लिए किसानों को अब जमीन की कीमत का 200% यानी दोगुना मुआवजा मिलेगा. वहीं, जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं, उस हिस्से (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर) के लिए 30% मुआवजा दिया जाएगा।  क्यों जरूरी था यह बदलाव दरअसल, बिजली की बड़ी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जमीन की जरूरत पड़ती है. टावर लगाने के साथ-साथ उनके बीच से गुजरने वाली तारों के नीचे भी जमीन का उपयोग सीमित हो जाता है. किसान उस जमीन पर न तो निर्माण कर सकते हैं और न ही कई बार पूरी तरह खेती कर पाते हैं. पहले इस नुकसान के बदले किसानों को या तो बहुत कम मुआवजा मिलता था या कई मामलों में बिल्कुल नहीं मिलता था. यही वजह थी कि कई परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता था. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, ताकि किसानों के साथ न्याय हो और परियोजनाएं भी बिना रुकावट आगे बढ़ सकें।  पहले क्या था नियम, अब क्या बदला अगर पुराने सिस्टम की बात करें, तो 2018 से पहले टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अक्सर कोई स्पष्ट मुआवजा तय नहीं था. कई मामलों में किसानों को उचित भुगतान नहीं मिल पाता था. 2018 में इसमें सुधार किया गया और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया. लेकिन इसके बावजूद एक बड़ी कमी बनी रही लाइन के नीचे आने वाली जमीन (कॉरिडोर) के लिए कोई मुआवजा नहीं था. अब नई व्यवस्था में दोनों हिस्सों को शामिल किया गया है. टावर के नीचे जमीन का 200% (दोगुना) मुआवजा दिया जाएगा इसी तरह लाइन कॉरिडोर (तारों के नीचे) 30% मुआवजा दिया जाएगा. यानी अब किसान को उसकी जमीन के हर प्रभावित हिस्से का भुगतान मिलेगा।  कैसे तय होगा मुआवजा  मुआवजा तय करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल रेट को आधार बनाया जाएगा. इसका मतलब है कि हर जिले में जमीन की जो सरकारी दर तय होती है, उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा. इससे मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान बनेगी. साथ ही विवाद की संभावना भी कम होगी. सरकार के मुताबिक, इस नए फैसले से किसानों को पहले के मुकाबले 21% से 33% तक ज्यादा लाभ मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार के इस फैसले को अगर सरल भाषा में समझा जाए तो जहां पहले कम या कोई मुआवजा नहीं मिलता था, अब वहां सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा. जमीन का उपयोग भले सीमित हो, लेकिन उसका मुआवजा मिलेगा. लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति खत्म होगी.  यह फैसला खास तौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी जमीन से होकर बड़ी बिजली लाइनें गुजरती हैं।   क्या होगा इसका असर सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बिजली परियोजनाओं को भी गति मिलेगी. पहले जमीन से जुड़े विवादों और विरोध के कारण कई प्रोजेक्ट्स में देरी होती थी. अब जब किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, तो उनकी सहमति भी आसानी से मिलेगी. इससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम तेजी से पूरा हो सकेगा, जिसका सीधा फायदा बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मिलेगा. ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह नई व्यवस्था भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है. देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मुआवजा नीति लागू की जा रही है. उनका कहना है कि यह फैसला एक तरह से दो अहम जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है एक तरफ किसानों के अधिकार और दूसरी तरफ विकास की जरूरत. अक्सर देखा जाता है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन लेने पर विवाद होता है. लेकिन अगर मुआवजा सही और समय पर मिले, तो यह टकराव काफी हद तक कम हो सकता है. उनका कहना है कि सरकार ने इस फैसले के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की है कि विकास के साथ-साथ किसान हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।  जमीनी असर कब दिखेगा नई मुआवजा व्यवस्था लागू होने के बाद इसका असर धीरे-धीरे जिलों में दिखाई देगा. जहां भी नई ट्रांसमिशन लाइनें बनेंगी या पुराने मामलों का निपटारा होगा, वहां किसानों को इसका फायदा मिलेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस नीति को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है।   

योगी की रैलियों में उमड़ी भीड़, बंगाल में जीत का बनता समीकरण

बंगाल भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक में से एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक प्रसिद्ध कविता है, ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा.’ उनकी कविता की ये पंक्तियां आज बंगाल में साकार होती दिख रही है. भाजपा के मूल संगठन जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि में अब कमल खिलने जा रहा है. पश्चिम बंगाल में मतगणना जारी है. खबर लिखे जाने तक जो रुझान सामने आए हैं, उनके मुताबक बीजेपी करीब 190 सीटों पर आगे चल रही है. इन नतीजों के पीछे पूरे संगठन की मेहनत है. लेकिन इन सबसे इतर एक फैक्टर है जिसने इन चुनावों में खासा प्रभाव डाला है. विशेषकर जिन सीटों पर सीएम योगी ने प्रचार किया उनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा कब्जा करती दिख रही है. यानी योगी फैक्टर ने अपना जादू चला दिया है. बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के नेताओं की महती भूमिका रही है. देशभर में किसी भी राज्य में चुनाव हों उसमें एक जोड़ी हमेशा हिट रही है. वो है मोदी और योगी की जोड़ी. इसी तरह बंगाल के चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के प्रमुख चेहरों ने मोर्चा संभाला. जिसमें सबसे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. उन्होंने लगातार जनसभाएं और रैलियां की. इतना ही नहीं, उन्होंने सीधे जनता से जुड़ने का प्रयास किया. दुकान पर जाकर झालमुड़ी खाना, लोगों के बीच जाना इसका उदाहरण है. जिसने लोगों को प्रभावित किया. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी के पक्ष में जमकर माहौल बनाया है. मुख्यमंत्री योगी की डिमांड हर राज्य में रही है. बिहार के चुनाव हों, महाराष्ट्र के चुनाव हों, ओडिशा के चुनाव हों, छत्तीसगढ़ के चुनाव हों, मध्यप्रदेश या राजस्थान के चुनाव हों, हर प्रदेश में सीएम योगी की अपनी फैन फॉलोविंग है. हिंदुत्व की छवि वाले योगी किसी भी क्षेत्र में जाकर वहां की जनता के बीच गहरी छाप छोड़ते हैं. बंगाल में भी इसका असर देखने को मिल रहा है. बंगाल में योगी की सभाओं में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली. योगी को सुनने के लिए बड़ा जनसमूह उतरा. कई जगहों पर इतनी भीड़ दिखी कि वहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी. कुल मिलाकर योगी ने इस भीड़ को वोट में तब्दील करने का पूरा प्रयास किया. जिसका नतीजा सकारात्मक दिख रहा है. जिन जिन क्षेत्र में योगी ने सभाएं की वहां अधिकतर सीटों पर कमल खिलता दिख रहा है. इन सीटों पर बीजेपी को बढ़त     कल्याणी विधानसभा में भाजपा को बढ़त मिल रही है. यहां अनुपम बिस्वास आगे चल रही हैं.     नंदकुमार सीट में खानरा निर्मल आगे चल रहे हैं.     बागदा विधानसभा में सोमा ठाकुर आगे चल रही हैं.     कटवा में कृष्णा घोष ने बढ़त बनाई हुई है.     माथाभांगा (कूच बिहार) में निशीथ प्रमाणिक जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     धूपगुड़ी विधानसभा में नरेश चंद्र राय लीड लिए हुए हैं.     बांकुरा विधानसभा सीट पर नीलाद्री शेखर आगे चल रहे हैं.     कांथी दक्षिण सीट में भी अरुप कुमार दास बढ़त बनाए हुए हैं.     गोपालपुर विधानसभा सीट से तरुणज्योति तिवारी आगे चल रहे हैं.     दम दम विधानसभा सीट से अरिजीत बख्शी बढ़त बनाए हुए हैं.     जोरासांको सीट से विजय ओझा लीड बनाए हुए हैं.     चकदहा विधानसभा में बंकिम चंद्र घोष आगे चल रहे हैं.     उदयनारायणपुर सीट पर प्रभाकर पंडित बढ़त बनाए हुए हैं.     पिंगला विधानसभा में स्वागता मन्ना आगे चल रही हैं.     जॉयपुर सीट से बिस्वजीत महतो बढ़त बनाए हुए हैं.     गारबेटा विधानसभा में पारादीप लोधा जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     बाराबनी सीट पर अरिजीत रॉय आगे चल रहे हैं.     रामपुरहाट विधानसभा में ध्रुब साहा बढ़त बनाए हुए हैं.     सोनामुखी विधानसभा में दिबाकर घरामी आगे चल रहे हैं. बता दें कि जिन विधानसभाओं में योगी ने धुंआधार प्रचार किया है उनके आसपास के क्षेत्रों में भी उनका प्रभाव पड़ा है. बिहार में चला था मोदी-योगी का जादू बता दें कि 5 महीने पहले हुए बिहार चुनाव में 202 सीटों के साथ NDA की प्रचंड जीत हुई थी. भाजपा ने अकेले 89 सीटें जीती थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 रैलियों से NDA को 97 सीटें दिलाई थीं. इसमें 44 नई सीटें थीं. पीएम का स्ट्राइक रेट 80% रहा था. इसी तरह सीएम योगी ने भी 80% स्टाइक रेट के साथ 98 सीटें जितवाई थीं. बिहार में सबसे ज्यादा डिमांड भी सीएम योगी की रैलियों, सभा और रोड शो की रही थी.

मुख्यमंत्री का आह्वान, हर विद्यार्थी एक पौधा जरूर लगाए, हर आंगनबाड़ी केंद्र 05 सहजन के पौधे रोपे जाएं

एक दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधरोपण कर यूपी फिर बनाएगा रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का आह्वान, हर विद्यार्थी एक पौधा जरूर लगाए, हर आंगनबाड़ी केंद्र 05 सहजन के पौधे रोपे जाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की वृहद पौधरोपण अभियान- 2026 की तैयारियों की समीक्षा, कहा पौधे लगाएं भी-बचाएं भी जनभागीदारी से सफल होंगे हरित क्रांति के प्रयास: मुख्यमंत्री विगत 09 वर्ष में वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई वर्तमान में हरित आवरण 9.96%, वर्ष 2030 तक 15% और 2047 तक 20% हरित आवरण का लक्ष्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, इस वर्ष गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर हो वृहद पौधरोपण हरित उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम: नदियों के किनारे 4.35 करोड़ पौधरोपण की तैयारी रिकॉर्ड वृक्षारोपण के बाद अब फोकस जीवितता पर, टेक्नोलॉजी से होगी हर पौधे की निगरानी लखनऊ ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष एक दिन में 35 करोड़ पौधरोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा है कि विगत वर्षों में जनभागीदारी से प्रदेश ने वृक्षारोपण में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और अब इसे जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। रविवार को वृहद पौधरोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में न्यूनतम 05 सहजन के पौधे लगाए जाएं, जबकि स्कूल-कॉलेजों में हर छात्र कम से कम एक पौधा लगाए। मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सतत जन-अभियान के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में पिछले वर्षों में वृक्षारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2009 से 2016 के बीच जहां 51.48 करोड़ पौधे लगाए गए थे, वहीं वर्ष 2017 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 242.13 करोड़ हो गई। इसी अवधि में वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है और हरित आवरण लगभग 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कार्बन स्टॉक में वृद्धि के मामले में भी प्रदेश राष्ट्रीय औसत (1.13 प्रतिशत) से आगे है और 2.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को हरित क्रांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हर हाल में हासिल करना है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्ष 2026 के अभियान को पूरी तरह वैज्ञानिक, योजनाबद्ध और परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने माइक्रो प्लानिंग को अभियान की आधारशिला बताते हुए ग्रामीण और शहरी स्तर पर तैयार सभी माइक्रो प्लानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।  मुख्यमंत्री ने पौधों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी विभागों को वन विभाग की नर्सरियों से निःशुल्क एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1935 विभागीय नर्सरियां संचालित हैं और 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिसके लिए 34 नई नर्सरियों की स्थापना भी की गई है। उद्यान, रेशम और निजी क्षेत्र की नर्सरियों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की सुरक्षा और उनकी जीवितता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आधुनिक तकनीक के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि ‘हरीतिमा’ ऐप, जीआईएस मैपिंग, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग तथा प्लांटेशन मॉनीटरिंग सिस्टम (पीएमएस) और नर्सरी मैनेजमेंट सिस्टम (एमएमएस) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वृक्षारोपण की निगरानी की जा रही है। वर्ष 2025 के विशेष सर्वेक्षण में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की जीवितता 80 प्रतिशत दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने शहीदों, स्वाधीनता संग्राम सेनानियों व अन्य हुतात्माओं के नाम पर वन/वाटिका के स्थापित करने पर बल दिया, नदियों के किनारे, हाइवे आदि के किनारे भी पौधे लगाए जाएं। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष अयोध्या में रामायणकालीन पौधे लगाने पर जोर दिया।  मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि 30 मई तक अपनी-अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर लें और निर्धारित समयबद्ध कार्यक्रम के अनुसार वृक्षारोपण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।  बैठक के दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को 'शेखा झील पक्षी विहार, अलीगढ़' के रामसर साइट घोषित किए जाने का प्रमाण पत्र भी सौंपा गया। बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 12 रामसर स्थल नामित किए जा चुके हैं, जो कुल 38,992.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल आच्छादित करते हैं। शेखा झील पक्षी विहार रामसर स्थल 40.309 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ प्रदेश का सबसे छोटा रामसर स्थल है। 2016 में इसे पक्षी विहार के रूप में अधिसूचित किया गया था।

सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 40 साल से यूपी में बंजर है कांग्रेस, अब सपा की बारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. सीएम योगी ने कहा कि सपा ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर डकैती डालने का काम किया है. आज विपक्ष महिलाओं के श्राप से श्रापित हो चुका है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 40 वर्ष बीत गए, लेकिन उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बंजर जमीन बन गई है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सपा ने कांग्रेस का समर्थन किया है, इसलिए सपा भी जल्द ही बंजर बन जाएगी।  सीएम योगी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ हुए अन्याय और मौलवियों के सामने नाक रगड़ने की वजह से कांग्रेस की दुर्गति हुई. उन्होंने याद दिलाया कि यदि शाहबानो मामले में न्याय मिल गया होता तो कांग्रेस की यह हालत नहीं होती. कांग्रेस ने तीन तलाक की कुप्रथा का समर्थन किया और अब भी सुधरने के बजाय देश को कठमुल्लापन की ओर ले जाना चाहती है।  देख सपाई बिटिया घबराई मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्ष में डबल इंजन कि सरकार के कार्यों के परिणाम सामने है. पहले देख सपाई बिटिया घबराई का नारा पब्लिक लगाती थी. पहले लोग अपने बेटियों को पढ़ने के लिए UP से बाहर भेजते थे. आज महिला वर्क फ़ोर्स 26% और अर्थव्यवस्था 3 गुणा बढ़ी है. NCRB के मुताबिक हत्या में 43% गिरावट आई. दहेज़ उत्पीड़न में 19%, रेप दुष्कर्म में 67% की कमी आई. आज देश के सबसे बड़े राज्य के सदन में आधी आबादी के सम्मान पर चर्चा हो।  पूजा पाल का किया जिक्र  मुख्यमंत्री ने सपा पर माफियाओं के सामने नतमस्तक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा विधायक पूजा पाल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं. उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा माफियाओं के सामने झुक गई थी. सीएम ने आरोप लगाया कि सपा की सहानुभूति न तो पिछड़ों, दलितों और न ही पूजा पाल जैसे लोगों के प्रति है।  महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष की आलोचना योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर संसद में महिला आरक्षण बिल गिराने का आरोप लगाया और कहा कि बिल गिराने के बाद सपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे. उन्होंने कहा कि विपक्ष के इस आचरण से पूरा देश आहत है. सीएम ने सदन में कुछ पुरानी घटनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने मई 2014 में बदायूं की चचेरी बहनों से हुई घटना, जुलाई 2016 में बुलंदशहर के राजमार्ग पर हुए सामूहिक बलात्कार और आजम खान द्वारा इसे “राजनीतिक साजिश” बताने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि एक महिला ने एक विधायक पर बलात्कार का आरोप लगाया था, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उस महिला की हत्या कर दी गई. लखनऊ के मोहनलालगंज में हुई शर्मनाक घटना का भी उन्होंने जिक्र किया. सीएम योगी ने कहा कि आजम खान और एसटी हसन जैसे नेता जेल से बयान देते थे और विपक्ष आज भी महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति संवेदनशील नहीं है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण

भारत को जोड़ने की ताकत हैं राम-कृष्ण और शिवः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण  सीएम योगी ने भगवान शिव व रामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर उतारी आरती जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय सुनिश्चित हैः मुख्यमंत्री सीएम ने की अपील- महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए अयोध्या,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धर्म ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव व श्रीरामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती भी उतारी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम हमें जोड़ने के माध्यम बने हैं। श्रीराम उत्तर को दक्षिण से और श्रीकृष्ण पूरब को पश्चिम से जोड़ रहे हैं। इसी प्रकार भगवान शंकर द्वादश ज्योतिर्लिंग के माध्यम से भारत के कण-कण को जोड़ रहे हैं। ये तीनों भारत को जोड़ने की शक्ति हैं और यही हमारी भी सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. लोहिया कहते थे कि श्रीराम, श्रीकृष्ण व शिवशंकर हैं तो कोई भारत का बाल बांका नहीं कर सकता, लेकिन यह बात उनके शिष्य नहीं समझेंगे, क्योंकि समझ उन्हें आता है, जिनमें समझ का सामर्थ्य होता है। जिनमें समझ का सामर्थ्य नहीं, उन रामद्रोहियों-शिवद्रोहियों के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं होगा।  जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय ही होगी  सीएम ने गर्व से कहा कि इतने बड़े आंदोलन ने बता दिया कि जहां अयोध्या होगी और जहां राम होंगे, वहां विजय होगी। सम-विषम परिस्थितियों में हम न रुकेंगे, न झुकेंगे, न डिगेंगे और लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे। दुनिया अयोध्या धाम का अनुसरण कर रही है। सीएम ने नई अयोध्या की स्थिति का भी जिक्र किया। कहा कि नई अयोध्या त्रेतायुग की याद दिला रही है और यही डबल इंजन की ताकत है। यह तभी हो पाया, जब एक साथ एक स्वर में सनातन धर्मावलंबी बोल उठे, तभी रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया था।  महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए सीएम ने लोगों से आग्रह किया कि सनातन धर्म की एकता के जरिए भारत की एकता व अखंडता को मजबूती दीजिए। महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए और बांटने वालों से सावधान रहिए। यह वही पाप कर रहे हैं, जो मध्यकाल में देश को बांटने और समाज की एकता को खंडित करने वालों ने किया था। बांटने का पाप देशद्रोह से कम नहीं है। यह पाप कभी मत होने दें। जिस दिन 140 करोड़ भारतवासी अपने नेतृत्व पर विश्वास करते हुए बढ़ेंगे, दुनिया उनके सामने बाधक नहीं बन सकती।  ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया सीएम ने कहा कि ट्रस्ट के पदाधिकारी पहले तपती गर्मी, फिर बिजली की कड़क और बारिश की चेतावनी से चिंतित हो गए, लेकिन यह ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया। प्रभु की कृपा के लिए शुद्ध नीयत से उनके पास शरणागत होना पड़ेगा। जब भक्त और याचक बनकर प्रभु के चरणों में जाते हैं तो हमारी मनोकामना पूर्ण होती है। जब यह अकड़ होती है कि हमने किया है, तो प्रभु उसे रगड़ भी देते हैं।  सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु का मंदिर बने और हम अपनी आंखों से देख सकें सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण अभियान है। भारत व दुनिया में जहां भी सनातन धर्मावलंबी रहा, वह गिरिवासी, वनवासी, वंचित, भिक्षावृत्ति से जीवन यापन करने वाला हो या राजमहल जैसे प्रासाद में रहने वाला बड़ा उद्यमी, सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु राम का भव्य मंदिर बने और वह इसे अपनी आंखों से देख सके। पीढ़ी दर पीढ़ी चली गईं, संघर्ष व आंदोलन बढ़ता गया। महिला, पुरुष, बच्चे, युवा समेत समाज के हर तबके ने, सनातन धर्म की हर उपासना विधियों से जुड़े लोगों ने लगातार 500 वर्ष तक संघर्ष किया। एक दिन वह काली रात आई थी, जब प्रभु श्रीराम के मंदिर को अपवित्र करके विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया, लेकिन 1528 से बिना किसी रोक-टोक या भय के कोई दिन ऐसा नहीं रहा होगा, जब सनातन धर्मावलंबियों ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए सोचा न हो और कुछ करने की इच्छाशक्ति के साथ अभियान का हिस्सा न बनें हो।  देश के हर कोने में लोग जयश्रीराम कहते हैं  सीएम योगी ने कहा कि प्रभु जब अपना काम कराना चाहते हैं, तभी सफलता प्राप्त होती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जब 1983 में आंदोलन को अपने हाथों में लिया तो आंदोलन चरम की ओर बढ़ता गया। अशोक सिंहल जी ने बिखरी हुई ताकत को एक किया। इस आंदोलन में क्षेत्र, जाति, भाषा की दीवारें टूटी हैं। आज भी देश के किसी कोने में हम जाते हैं तो उसके प्रभाव को महसूस करते हैं। अरुणाचल या ओडिशा, नगालैंड हो या मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड का सुदूर कोना, पश्चिमी-पूर्वी, उत्तरी-दक्षिण, मध्य भारत हो या छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसा जनजाति क्षेत्र, जैसे ही लोग हमें देखते हैं, वे सबसे पहले जयश्रीराम कहते हैं। मैं पश्चिम बंगाल के चुनाव में दूरदराज के गांवों में गया। वहां भी सड़कों पर आकर महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी ने जयश्रीराम से अभिवादन किया।  जिस दिन राम मंदिर का फैसला आया, वह भारत के इतिहास का सबसे खुशहाल दिन  सीएम योगी ने कहा कि हम सभी गुलामी का ढांचा हटने और आंदोलन के साक्षी हैं। जब उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से रामजन्मभूमि का फैसला दिया तो देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी झूम उठे। कुछ लोग धमकाते थे कि राम जन्मभूमि का फैसला आएगा तो यह होगा-वह होगा। ये वही लोग हैं, जो वकील खड़ा करते थे, रामसेतु को तोड़ना चाहते थे, रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे और चाहते थे कि समस्या का समाधान न निकले और सनातन धर्मावलंबी अपमानित हो, लेकिन जब उच्चतम न्यायालय ने सनातन धर्म की भावनाओं के अनुरूप साक्ष्यों के आधार पर सर्वसम्मति से फैसला किया तो देश-दुनिया ने भी उसका स्वागत किया। जिस दिन यह फैसला आया, वह भारत के इतिहास के सबसे शांत और खुशहाल दिन में से एक था।   जब मंदिर बना तो हर आंख में थे खुशी के आंसू सीएम योगी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में श्रीरामजन्मभूमि … Read more

अंश निर्धारण में बहराइच ने मारी बाजी, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला

अंश निर्धारण में बहराइच अव्वल, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला मुख्यमंत्री योगी के राजस्व सुधार अभियान को मिली गति, जमीनी स्तर पर सक्रियता से हासिल हुई बड़ी उपलब्धि डीएम अक्षय त्रिपाठी के नियमित समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने से यह उपलब्धि हासिल हुई लखनऊ  प्रदेश में भूमि संबंधी कार्यों को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए चल रहे योगी सरकार के अंश निर्धारण अभियान में बहराइच जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के नेतृत्व में जिले ने निर्धारित समय सीमा के भीतर 99.6 प्रतिशत मामलों का निस्तारण कर एक नई मिसाल कायम की है। जमीनी स्तर पर सक्रियता बनी सफलता की कुंजी योगी सरकार की प्राथमिकता वाले इस अभियान के तहत बहराइच जिला प्रशासन ने गांव-गांव जाकर अंश निर्धारण की प्रक्रिया को गति दी। राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसानों एवं भूमिधरों के बीच विवादित हिस्सों का सत्यापन कर रिकॉर्ड को अपडेट किया, जिससे वर्षों से लंबित मामलों का समाधान संभव हो सका। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि नियमित समीक्षा, जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई। प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल भूमि विवादों में कमी आएगी, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अधिक सुगम होगी। प्रदेश के लिए बन सकता है रोल मॉडल अंश निर्धारण की प्रक्रिया भूमि प्रबंधन और विकास कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहले कई परियोजनाएं इसी कारण अटक जाती थीं, लेकिन अब बहराइच जैसे जिलों के बेहतर प्रदर्शन से यह समस्या दूर होती दिख रही है। बहराइच का यह मॉडल अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की दिशा में देखा जा रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और विवादमुक्त बनाया जा सके।

शिलान्यास से उद्घाटन तक: योगी सरकार की तेज़ी से विकास की पहचान

शिलान्यास से लेकर उद्घाटन तक का संकल्प, तेज गति है योगी सरकार की पहचान एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर से उत्तर प्रदेश को मिली नई पहचान योगी सरकार में हर विकास योजना को रिकॉर्ड समय में किया गया पूरा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने यह दिखाया है कि योजनाओं को केवल शुरू करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना ही असली विकास है। सीएम योगी ने यूपी को ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ दिया। इसमें परियोजनाओं की परिकल्पना से लेकर उनके पूर्ण होने तक काम कभी नहीं रुकता, चाहे जेवर एयरपोर्ट, गंगा, पूर्वांचल, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे हों या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अन्य योजनाएं। ताजा उदाहरण देखा जाए तो गंगा एक्सप्रेसवे हमारे सामने है। 595 किलोमीटर के एक नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश में 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया गया और 29 अप्रैल 2026 को आज जनता को समर्पित कर दिया गया। सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश को 9 वर्षों में बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकाला। उन्होंने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सड़क, मेट्रो, एयरपोर्ट समेत अन्य तमाम क्षेत्रों में सौगात दी। सीएम योगी के कार्यकाल में सिर्फ योजनाएं बनी ही नहीं बल्कि वह जमीन पर भी उतरीं। उन्होंने योजनाओं का शिलान्यास किया फिर जमीनी स्तर पर इनकी तैयारी, विभागों की जिम्मेदारी, निर्माणाधीन योजनाओं की लगातार निगरानी खुद की और आखिर में उनका लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को लाभ पहुंचाया। सीएम योगी के निर्देशन में ही जेवर एयरपोर्ट के पहले फेज का रिकॉर्ड टाइम में उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ, जिसका शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को किया गया था। यह उत्तर प्रदेश का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात के दबाव कम करने का काम कर रहा है। साथ ही सीएम योगी के विजन के चलते ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना, जहां 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे बन चुके हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत लिंक एक्सप्रेस पूरे हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन की ही देन है कि 14 जुलाई 2018 को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास हुआ और 16 नवंबर 2021 को इसका उद्घाटन भी कर दिया गया। इसी क्रम में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की आधारशिला फरवरी 2020 में रखी गई और जुलाई 2022 में इसे जनता को समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकालने के लिए बुंदेलखंड जैसे तमाम पिछड़े क्षेत्रों सड़क नेटवर्क को बढ़ावा दिया गया। इससे क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव हो रहा है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का भी मार्च 2019 में शिलान्यास हुआ। यह एक्सप्रेसवे भी लगभग बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण योगी सरकार अगले कुछ महीने में कर सकती है। इससे लखनऊ-कानपुर के बीच की यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर 45 मिनट हो जाएगा।  वहीं पूर्वांचल की राह आसान करने वाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पूरा किया गया। इस परियोजना पर काम फरवरी 2020 से शुरू हुआ था। प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प के चलते इसका जून 2025 में योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। वहीं 115 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर भी कार्य योजना बनाई जा रही है। अनुमान है कि इस पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह 63 गांव से होकर गुजरेगा, जिससे विकास की धारा बहेगी। इन्हीं विजन के चलते आज देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में शानदार उपलब्धि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो एयरपोर्ट संचालित हो रहे थे, जिसमें लखनऊ और वाराणसी का नाम शामिल है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ने देश में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल दी। राज्य 21 एयरपोर्ट का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने यूपी को 5 इंटरनेशनल एयपोर्ट वाले राज्य के रूप में पहचान दिलाई है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण अयोध्या एयरपोर्ट भी है। अयोध्या में फरवरी 2022 से महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनना शुरू हुआ था। यह रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ और 30 दिसंबर 2023 में उद्घाटन किया गया। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के लिए 10 मार्च 2024 की तारीख काफी अहम रही। इस दिन एक साथ आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती के हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया। सीएम योगी के विजन का नतीजा है कि जहां 2016-17 में महज 59.97 लाख लोगों ने हवाई यात्रा की थी। वहीं 2024-25 में यह संख्या 14 करोड़ से ज्यादा हो गई। हर शहर को मेट्रो देने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में रैपिड रेल और मेट्रो परियोजनाओं को लेकर भी काफी काम हुआ है। इस तरफ भी योगी सरकार ने पूरा ध्यान दिया है। यूपी के शहरों के अंदर यातायात सुधारने के लिए तेजी से मेट्रो कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में 7 दिसंबर 2020 को आगरा मेट्रो की नींव रखी गई। महज चार साल के अंदर मार्च 2024 में इसका उद्घाटन कर संचालन शुरू किया गया। वहीं 22 फरवरी 2026 को मेरठ मेट्रो का संचालन शुरू हुआ। वहीं योगी सरकार ने गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज में भी मेट्रो संचालन की मंशा जाहिर की है। रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का बढ़ रहा योगदान केंद्र सरकार ने योगी सरकार पर भी भरोसा जताया और नतीजा रहा कि आज यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट भी बन चुकी है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का उद्घाटन मई-जून 2025 में हुआ, जिससे देश में यूपी की अलग छवि बनी है। वहीं वर्ष 2019 में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) की नींव रखी गई और वर्ष 2023 से इसका संचालन शुरू हुआ। इसके तहत कानपुर में गोला-बारूद और मिसाइल संयंत्र अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस में फरवरी 2024 से काम शुरू हो गया है। रक्षा उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभा रहा है। इन विकास योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि योगी सरकार के ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ की सफलता के पीछे बदलाव की लाने की इच्छा और प्रशासनिक सुधार महत्वपूर्ण कारण हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और काम में लापरवाही के लिए सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके साथ ही तकनीक का उपयोग बढ़ाकर परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाया गया, जिससे सफलता … Read more

योगी सरकार के तहत पर्यटन को मिली नई दिशा, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र

योगी सरकार में पर्यटन को नई उड़ान, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, पर्यटन मंत्री ने दिए जनसुझावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश पर्यटन बजट 22 गुना, संस्कृति के लिए बजट 20 गुना बढ़ा 1 साल में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का यूपी आगमन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के नए स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार की मजबूत नीतियों, पारदर्शी कार्यशैली और विरासत संरक्षण के संकल्प ने प्रदेश को देश के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन राज्यों में शामिल कर दिया है। पर्यटन विभाग की स्थायी समिति की बैठक में सामने आए आंकड़ों ने इस सफलता पर मुहर लगा दी, जहां बताया गया कि पर्यटन बजट में 22 गुना और संस्कृति के लिए बजट में 20 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन प्रदेश की लोकप्रियता का प्रमाण है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज समेत धार्मिक स्थलों का भव्य विकास योगी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही सरकार मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का पर्यटन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2017 से पहले जहां पर्यटन विकास सीमित दायरे में था, वहीं आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता, सुशासन और योजनाबद्ध विकास के माध्यम से पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए यूपी अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन विभाग के बजट में लगभग 22 गुना और संस्कृति विभाग के बजट में करीब 20 गुना वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी मुख्यमंत्री योगी की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी बनाने में पर्यटन की अहम भूमिका होगी। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का उत्तर प्रदेश आगमन हुआ, जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। महाकुंभ-2025 के आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान खींचा महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित किया। प्रयागराज, अयोध्या और काशी को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अनूठा आध्यात्मिक अनुभव दे रहा है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार अब एक्सपीरियंशल टूरिज्म पर फोकस कर रही है, ताकि पर्यटक सिर्फ भ्रमण न करें बल्कि प्रदेश में अधिक समय रुकें और स्थानीय संस्कृति, खानपान तथा परंपराओं को करीब से जान सकें। इससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने झांसी में हेली सेवा, प्रयागराज में वाटर स्पोर्ट्स, सहारनपुर में जंगल सफारी, कानपुर में औद्योगिक पर्यटन और गाजीपुर सहित अन्य क्षेत्रों में पर्यटन विस्तार से जुड़े सुझाव भी दिए हैं।